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Saturday, 7 May 2016

रोहित वेमुला , डेल्टा और जीशा की हत्या के लिए न्याय के आन्दोलन को खत्म करना चाहते है वामपंथी छात्र आन्दोलन


जन उदय : अगर हम १९४७ के पहले के वामपंथी आंदोलनों का सही सही विवेचना करे तो हम  पायंगे की वामपंथी आन्दोलन की इन वामपंथी आंदोलनों का मुख्य उदेश्य  दलित आंदोलनों को खत्म करना था कमजोर करना था न की समाज में एकता , समानता और समाजवाद लाने में इनकी कम दिलचस्पी बहुत कम थी  बल्कि यु कहे ये आन्दोलन दलित आन्दोलन को कजोर करने के षड्यंत्र थे

आजादी के बाद भी दलित आन्दोलन सिर्फ इसलिए कामयाब नहीं हो पाए क्योकि ये लोग दलित युवाओं को समानता और समाजवाद के नाम पर भ्रमित करने में कामयाब रहे सारे के सारे दलित युवा हमेशा इनके पीछे  लगे रहे  , दलित  युवा ये कभी नहीं समझ पाए कि  इन वामपंथी आंदोलनों में सिर्फ और सिर्फ ब्राह्मण  और  उच्च  जातिय  मुसलमान ही क्यों शीर्ष पर रहे .. कभी भी इन आंदोलनों में दलित आगे नहीं आये जबकि ये सारे आन्दोलन चलते रहे दलितों के नाम पर गरीबो के नाम पर

कुल मिला कर  ये वामपंथी लोग दलितों को अपने आन्दोलन के लिए इंधन की तरह इस्तेमाल करते रहे लेकिन दलितों को कभी उनका हक नहीं मिला

 हाल ही में हैदराबाद  सेंट्रल यूनिवर्सिटी में रोहित वेमुला की संस्थानिक  हत्या ने दलित आन्दोलन ने  पूरी दुनिया  को हिला दिया था , पूरी दुनिया में इस हत्या की निंदा  हो रही थी .. ये वामपंथी कभी भी रोहित वेमुला के जिन्दा रहते कभी दलित छात्रो के साथ नहीं आये लेकिन रोहित वेमुला की हत्या से फायदा उठाने तुरंत आ गए


जब आन्दोलन कम न हुआ तो वामपंथी छात्र ब्राह्मणों के इशारे पर कन्हिया को लेकर एक अन्य षड्यंत्र को जन्म देने लगे इसके बाद यही हुआ यानी जे एन यु षड्यंत्र जिसके बाद रोहित वेमुला की हत्या को लोग भुलाने लगे .. इसके बाद डेल्टा मेघवाल का 
बलात्कार और हत्या हुई  जैसे ही डेल्टा आन्दोलन ने टूल पकड़ा  फिर जे एन यु में एक और षड्यंत्र हुआ उसमे भी वामपंथी  यानी कन्हीय्या  आगे आ गया  इसके बाद जीशा की हत्या और बलात्कार के मसले को फिर जे एन यु ने दबा दिया और अब फिर दुबारा से इसी तरफ आगे बढ़  रहे है . यानी कुल मिला कर दलित आन्दोलन को कमजोर करना सिर्फ यही है वामपंथी आन्दोलन का मकसद  वामपंथी यानी ब्राह्मणों का एक और संघठन 

Wednesday, 23 March 2016

रोहित वेमुला संस्थानिक हत्या ::: ए बी वी पी और संघ ने फिर रचा हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में षड्यंत्र : की वी सी ऑफिस में तोड़ फोड़ इल्जाम दलित छात्रो पर

जन उदय : खबर  आ रही है की कन्हिया कुमार के  हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में जाने पर और रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या के खिलाफ पदर्शन को दबाने के लिए फिर से एक बार ए बी वी पी  और संघ ने  हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में षड्यंत्र रच दिया है

यह ज्ञात रहे की छात्र रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या और दोषीओ के खिलाफ कार्यवाही की मांग कर रहे है , जिसमे वाईस चांसलर अप्पाराव का इस्तीफा / निष्काशन शामिल है

रोहित वेमुला की हत्या के बाद से ही अप्पाराव को छुट्टी पर भेज दिया गया था  जिसके कारण सभी छात्र नाराज थे क्योकि छात्र अप्पाराव का निष्काशन चाहते है , लेकिन सरकार  ने न तो नया दिया रोहित वेमुला को और न ही उनकी कोई मांग मानी बल्कि अप्पाराव को दुबारा ड्यूटी पर बुला लिया  जिसके विरोध में छात्रो ने शांतिपूर्ण विरोध शुरू कर दिया

यह भी देखने वाली बात है की वी सी  ने कैंपस को छावनी में  तब्दील कर दिया है और छात्रो की हर सुविधा को खत्म कर दिया है जैसे बिजली , पानी ,  व्वाई फाई इत्यादि

इसके अलावा ३६ छात्रो को नजरबंद कर कहा भेज दिया गया है यह भी पता नहीं , छात्रो के बारे में पूछे  जाने पर पुलिस मना  कर रही है की छात्र का इनको नहीं मालूम ,

बताया   जा रहा है की वी सी ऑफिस को खुद ए बी वी पी छात्रो ने  तोड़ फोड़ दिया है  और इसका इल्जाम पदर्शन कारी  छात्रो पर लगाया गया है , इस तरह के षड्यंत्र  संघ  के लिए कोई नई बता नहीं है  जे एन यु षड्यंत्र  तो अभी भी जिन्दा है

यूनिवर्सिटी में हालात   इमरजेंसी की तरह हो गए है  ऐसा लगता है इस बार फिर दो चार दलित छात्रो की हत्या होगी 


लाशो की सडांध मार रही है मोदी सरकार : इसे साफ़ करो

लाशो की सडांध मार रही है मोदी सरकार : इसे साफ़ करो
जन उदय : इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता की  मोदी सरकार के आते ही बहुत से लोगो में ये आशा बंध गई थी की अब कुछ नया होगा  बेरोजगारी कम होगी , महंगाई कम होगी , और सुशासन  कम होगा

आते के साथ ही मोदी ने  नई नई योजनाये  लागू की , लेकिन विश्लेष्ण से यही पता  चला की ये पिछली सरकार की ही योजनाये  थी , यानी नई बोतल में पुरानी शराब , मोदी ने दुनिया भर की सैर भी की  जिस मीडिया  संस्थाओं ने मोदी  के चमचो से पैसे खाए  हुए थे , उन्होंने  हर संभव प्रयास किया की मोदी को कुछ अलग करके दिखाया जाए
सबने ये भी कहा की आते के साथ ही कोई भी कुछ नहीं कर सकता इसलिए मोदी को थोडा  समय  दिया जाए ,

लेकिन धीरे धीरे जनता का सब्र टूटने लगा और फिर महंगाई कम करने की बेरोजगारी कम करने की मांग करने लगे

लेकिन महंगाई कम होने की बजाय और बढ़ने लगी  मोदी सरकार हर  समस्या को कम करने और खत्म करने में नाकाम रही , दिल्ली की हार ने भाजपा और संघ को थोडा सा चेताया   लेकिन मोदी और भाजपा अपना संघ पापा के साथ जीत के नशे में चूर  रहे  सो परिणाम इनके सामने रहा
समस्या को दूर तो नहीं किया हाँ  दंगे करवाए गए जैसा की इनकी पुरानी आदत है , गोमांस के नाम पर हत्याए हुई , रोहति वेमुला की संस्थानिक  हत्या हुई  बावजूद इसके की पूरी दुनिया में भारत की बदनामी हुई है  मोदी सरकार अब तक रोहित वेमुला को न्याय नहीं देना चाहती बल्कि उल्टा  हैदराबाद  में छात्रो पर दुबारा लाठी चार्ज  हुआ है कई छात्र घायल हुए है , इसके बाद रोहित की मौत के मामले को दबाने के लिए जे एन यु का षड्यंत्र रचा गया   ये  षड्यंत्र ऐसा है की ऐसा पूरी दुनिया में कही नहीं हुई जबकि सरकार ने अपनी पूरी ताकत एक यूनिवर्सिटी को बंद करने , उसे बदनाम करने  और बर्बाद करने  में लगा दी है


इसके बाद अम्बेडकर के नाम पर मोदी मगरमछ के आंसू बहाते नजर आये  जिसमे मोदी ने कहा की आरक्षण को खरोच तक नहीं आएगी  लेकिन लेकिन संसद में आरक्षण के बिल को खुद ही रोका हुआ है  जिसमे नौकरी में प्रमोशन की बात है

और अब दुबारा से हैदराबाद में लाठी चार्ज करवाया जा रहा है , जे एन यु कन्हीय्या के  हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी पहुचते ही यूनिवर्सिटी को बंद करवा दिया गया

ये बात समझ से एकदम परे है की  पुरे देश दुनिया के विरोध के बावजूद संघ , मनुसिमृति इरानी आखिर क्यों दोषी छात्रो और वाईस  चांसलर को बचाना  चाहते है
बिहार यु पी हर जगह दलित बस्तिओ में आग लगाईं जा रही है ताकि दलितों को डराया  धमकाया  जा सके

ये सब वारदाते  मोदी सरकार की गन्दी नीतिओ और मानसिकता के कारण हो रही है  और अब इसमें से सड़ांध आ रही है  इसका एक ही निर्मूलन  है वह है संघ भाजपा मोदी सरकार का देश से सफाया  

Tuesday, 22 March 2016

फिर उबल पड़ा हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी

जन उदय : वोटो की खातिर  संघ न जाने क्या क्या पापड़ बेल रहा है  दंगे ,गोमांस, राष्ट्रवाद,आरक्षण को खत्म करना   जैसे सारे इनके हुकुम के इक्के फ्लॉप हो गए है
दुखी मन से संघ मुख्यालय पर तिरंगा भी फहरा दिया गया है , अपनी घातक इमेज बदलने के लिए निक्कर भी बदल ली है  इसके बाद दलितों  को खुश करने के लिए यह भी कह दिया की बाबा साहेब विश्व पुरुष है उन्हें किसी जाति या स्थान से न जोड़ा जाए , ( बाबा साहेब की किताबो का छपना बंद करवा दिया है संघ सरकार ने  जो संघ के कच्चे चिट्ठे खोलती है )

लेकिन किसी ने सही कहा है की  नाग अपना मूल स्वभाव कभी नहीं छोड़ता और यही हो रहा है भाजपा संघ सरकार के साथ ये एक तरफ तो राष्ट्रवादी , दलित हित में काम करने वाले बन रहे है  दूसरी तरफ दलितों के खिलाफ हर सभव प्रयास कर रहे है जिससे दलित उपर न आ सके
हैदराबाद में फिर उबल पड़ा हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी. डॉ. रोहित वेमुला सांस्थानिक हत्या के आरोपी वाइस चांसलर अप्पा राव दो महीने की छुट्टी के बाद चोर दरवाजे से आज वापस आ गए. छात्राओं और छात्रों का विरोध चल रहा है. लाठियां चली हैं. यूनिवर्सिटी में फिर से स्ट्राइक हो गई है.... राष्ट्रीय स्तर पर इसे लेकर नाराजगी है.

मनुस्मृति ईरानी अप्पा राव को हर हाल में बचाना चाहती हैं. अप्पा राव ने सारी कार्रवाई मनुस्मृति ईरानी के मंत्रालय की चार चिट्ठियों के बाद की है. अप्पा राव जाते हैं, तो मनुस्मृति बच नहीं पाएगी. अप्पा राव सारा भेद खोल देंगे.


लेकिन संघ सरकार आज भी रोहित वेमुला को इन्साफ नहीं देना चाहती  , संघ सरकार दलित छात्रो पर लाठी चलवा रही है , उनका अपमान कर रही है  लेकिन इन्साफ  नहीं दे रही 

Wednesday, 16 March 2016

कन्हिया ने फिर मारे भिगो भिगो कर जूते मोदी , भाजपा और इनकी अम्मा संघ को :रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या के विरोध में मार्च

रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या के विरोध में मार्च
कन्हिया  ने फिर मारे भिगो भिगो कर जूते मोदी , भाजपा और इनकी अम्मा संघ को
जन उदय : हैदराबाद  केंद्रीय के टॉपर  दलित  छात्र   रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या को दबाने के लिए  संघ सरकार न जाने क्या क्या पापड़ बेल रही है लेकिन हर बार विफल रही है ,

रोहित वेमुला की हत्या के मामले को दबाने के लिए संघ ने न्यूज़ चैनल  और मीडिया संस्थाओं से मिल कर जे एन यु षड्यंत्र  रचा  जिसमे खुद संघ  के लोगो ने  भारत विरोधी   नारे लगाए   और इल्जाम जे एन यु के मासूम  छात्रो पर धर  दिया .
इस मामले में जे एन यु छात्र संघ अध्यक्ष कन्हिया  को देशद्रोह  कानून में फंसा कर जेल में भी डाला गया   लेकिन इस बात से भी रोहित वेमुला का मामला दब न सका  उल्टा   ज़रा से ही वक्त में संघियो   का षड्यंत्र  सामने आ गया और संघियो  की दबा कर किरकिरी  हो गयी

 जेल से आने के बाद कनाहिया  ने जो भाषण  दिया उसके इस भाषण को दुनिया में प्रसारित  किया गया   और पूरी दुनिया के लोगो ने मोदी सरकार की भर्त्सना की
 १५ मार्च को रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या के खिलाफ  एक विशाल रैली  निकाली गई


जिसमे हजारो  छात्रो ने  भाग लिया  जहा पर कन्हिया  ने फिर  जे एन यु स्टाइल में संघियो को भाजपा को और उनके  समर्थको को शब्द बाण  से लताड़ा    और इतना लताड़ा  की ऐसे लग रहा था कोई बड़ी बे रहमी से  किसी के सर  पर जूते  बरसा  रहा हो


भारत के पुरे इतिहास में  आजतक किसी पार्टी या  प्रधानमंत्री  की बेइज्जती  नहीं हुई है  और न ही इतने कठोर शब्द कहे गए है जितने की मोदी के बारे में , लेकिन मोदी भाजपा संघ  इरानी ये सब बेशर्म  षड्यंत्रकारी  लोग है   इन्हें  कोई फर्क  नहीं पड़ता 

Monday, 7 March 2016

रोहित वेमुला की हत्या ध्यान हटाने के लिए रचाया जे एन यु का स्वांग ,संघ ने : ब्राह्मण शासन है अंतिम लक्ष्य

देश में हो  रही दलित  हत्याए आदिवासिओ की हत्याए  लगातार हो  रही है और बाकायदा इनकी संख्या  लगातार बढती जा रही  है , उड़ीसा से लेकर मध्य प्रदेश , छतीसगढ़ ,महारष्ट्र में कोंग्रेस  बी जे पी दोनों एक साथ मिल कर आदिवासी हत्याओं में शामिल है ,

ये बात जानकार सबको हैरानी होगी की दलित हत्या के मामले में ये दोनों दल एक है , एकमत है


फिलहाल ही  एक आदिवासी महिला सोनी सोरी के मूह पर तेज़ाब फेंका गया  इससे  पहले  उसके निजी अंग में पथ्तर  भर दिए थे पुलिस वालो ने , इस कार्य की वजह से उन पुलिस वालो को राष्ट्रपति का वीरता पुरूस्कार भी मिला था
 दलित हत्या के क्रम में संघियो ने धीरे धीरे उन सस्न्थाओ को और उन छात्रो को निशाना बनाना शुरू किया किया  जहा पर दलित छात्र उनके उपर हो  रहे है जुल्मो के खिलाफ आवाज उठाते है ,

और इस प्रक्रिया में  दक्षिण भारत को चुना गया और  वहा पर आई आई टी मद्रास  को सबसे पहले निशाना  बनाया गया  जहा पर बीफ को लेकर संघियो ने उन्माद मचाया  और दलित छात्रो को प्रताड़ित किया गया .

इसके बाद हैदराबाद  केन्द्रीय विश्विद्यालय  को चुना गया  जहा पर झूटा इल्जाम लगा कर रोहित वेमुला और  अन्य  छात्रो को  जबरदस्ती  होस्टल से निकाला गया  और  ये  छात्र सडक पर रात बिताने के लिए मजबूर किया गया , इसके साथ साथ इनकी स्कोलरशिप भी रोक दी  गयी यानी की मानसिक , आर्थिक और शारीरक तीनो तरह से इनको प्रताड़ित  किया गया ,  हैदराबाद केन्द्रीय  विश्वविध्यालय के इस दलित आन्दोलन  का अंत रोहत वेमुला की संस्थानिक हत्या से हुआ जिसका पुरे देश में ही नहीं दुनिया में विरोध होने लगा  सारे देश  की भावना रोहित और उसके परिवार से जुड़  गुई  संघियो को लगा जैसे ये उनकी एक राजनेतिक हार है  रोहित के मामले को दबाने के लिए एक नया षड्यंत्र  रचा गया और ये  षड्यंत्र जे एन यु षड्यंत्र के नाम से जाना गया जहा पर  संघियो ने पूरी प्लानिंग के साथ अपने ही लोगो से देश विरोधी नारे लगवाये और पुलिस  और मीडिया की मदद से जे एन यु छात्रो को गिरफ्तार  करवाया गया वो भी देशद्रोह के आरोप में

इन छात्रो की भी गलती यही  थी की ये भी ब्राह्मणवाद , सामन्तवाद , जातिवाद के खिलाफ नारे लगाते थे , जे एन यु की घटना के जरिये  संघियो/ भाजपा  ने  पुरे देश का ध्यान दलितों  के उपर हो  रहे अत्याचार से हटाने की एक नाकाम कोशिस  की जो की हो नहीं पाया



घटना सिर्फ ये नहीं  है  इतिहास में भाजपा / संघ इसी तरह के कार्यो में लिप्त रहे है 

Sunday, 6 March 2016

तानाशाह भाजपा अगला लोकसभा चुनाव हारी तो कर लेगी हथियारों के दम देश पर कब्जा

 हलांकि देश में भाजपा शासन का आना  ही देश का सबसे बढ़ा  दुर्भाग्य था लेकिन ये सारा  कार्य एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत हुआ तो पुरे देश ने भाजपा को सम्मान की दृष्टि से देखा और नरेंदर मोदी को  प्रधान मंत्री के  रूप  में  दिल से स्वीकार  भी  किया
जिस तरह से किसी भी पार्टी से देश की जनता उम्मीद करती है उसी तरह जनता ने भाजपा  सरकार से भी उम्मीद की देश की टूटती  ,बिखरती अर्थ वाव्य्स्था को भाजपा  संभाल लेगी  और महंगाई , पर रोक लगायगी , दाम कम होंगे, पट्रोल के दाम कम होंगे  बेरोजगारी  कम होगी  और युवाओं को विकास के नए  रास्ते मिलेंगे .

लेकिन युवाओं के साथ और देश के साथ बहुत बढ़ा  धोखा  हुआ नरेंद्र मोदी सिर्फ भाषणों से और घोषणाओं से लोगो का दिल बहलाने लगे , कुछ समय तो देश की जनता भाषणों से से भी खुश नजर आये  , लेकिन फिर भी कुछ  न हुआ  , कुछ लोगो ने कहा  की भाजपा  सरकार को कुछ समय  देना चाहिए ताकि वो चीजो को समझ कर अर्थ वाव्य्स्था को सही दिशा में ले जा सके लेकिन दो साल बाद भी कुछ नहीं हुआ ,
अपनी नाकामयाबी को भाजपा समझ भी  रही  थी , हालांकि ऐसा नहीं है की भाजपा  ने कोशिश  नहीं की लेकिन शायद  उसकी सारी  कोशिशे  सब बेकार गई , यानी पिछले  दो सालो में भाजपा  पूरी तरह विफल   रही है .
अब भाजपा ने अपने पुराने तरीके भी इस्तेमाल करने शुरू कर दिए यानी राज्यों के आम चुनावों में साम्प्रदायिक  दंगे कराये गए , मुज्ज़फर नगर दंगे , इसके बाद दादरी में गोमांस को लेकर एक मुस्लिम व्यक्ति की हत्या  कराई गई ,  हर समय देश में एक असंतोष का माहोल बनता चला गया  उधर दूसरी तरफ  विश्विध्यालो में अपने लोगो को लाना और संघियो के प्रभाव को बढाने के लिए  प्रयास किये जाने लगे , मद्रास आई आई टी , हैदराबाद केन्द्रीय विश्वविध्यालय  में रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या , दूसरी तरफ जे एन यू , पुणे फिल्म स्कूल , फिर इलाहाबाद विश्वविध्यालय में  ऋचा सिंह को प्रताड़ित किया जाने लगा , स्कूलों और कोलेजो में पाठ्यक्रम को बदलना , जे एन यू  की घटना ने तो पुरे विश्व को हिला दिया यही नहीं पुरे  विश्व में भारत की इमेज बहुत गन्दी हो गई 

कन्हिया के जेल से आने के बाद जो भाषण हुआ उसके बाद  कोई  उसकी जीभ  काटने की बात कर रहा है  , कोई उसकी  ह्त्या करवा   रही  है , कोई उसको  गोली मार  रहा है
कमाल की बात है की इस  तरह की बाते करने वाले खुल्ले आम अखबारों में और टीवी  चंनेलो में बैठे  बकवास कर  रहे है , और पुलिस प्रशासन घर बैठे इन्हें देख रहे है ,

जो लोग देश के माहोल  को खराब करने पर तुले है उनके खिलाफ  कोई भी कार्यवाही  नहीं  हो  रही  है , अगर  हालात ऐसे ही  रहे तो ऐसा लगता है की आने वाले वक्त में जब भाजपा सत्ता से बहार होने लगेगी  तो वो इस बात को बर्दास्त नहीं कर पायंगे और फिर भाजपा संघ के साथ मिल  कर एक हथियारबंद कब्जा देश पर करना  चाहेगी हालांकि  ये शायद आज के दौर में न हो पाए लेकिन हालात  ऐसे लग  रहे है की भाजपा अब सत्ता से बहार नहीं जाना चाहेगी  और इस कार्य के लिए चाहे दंगे हो चाहे दलितों की हत्या हो  या खुनी  खेल  भाजपा   किसी  बात से पीछे  नहीं हटेगी 

रोहित वेमुला की हत्या के बाद ऋचा सिंह की संस्थानिक हत्या की शाजिस कर रहा है संघ

रोहित, कन्हैया के बाद अब किया जा रहा ऋचा सिंह को प्रताड़ित

दक्षिणपंथी  छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से भिड़ने के वजह से कथित तौर पर जिस तरह  हैदराबाद विश्वविद्यालय में रोहित वेमुला ने हुए उत्पीड़न और निलंबन की वजह से आत्महत्या कर ली थी फिर उसी तरह ही जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में भी  के छात्र संघ के  अध्यक्ष कन्हैया कुमार सहित कई छात्र नेताओं की गिरफ़्तारी कर के उनपर देशद्रोह का मुकदमा चलाया गया।  हैदराबाद विश्वविद्यालय के रोहित और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के बाद अब ऋचा सिंह की बारी है. इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ की पहली महिला अधय्क्ष ऋचा सिंह को  भाजपा छात्र इकाई ABVP और विश्वविद्यालय प्रशासन के दबाव का सामना करना पड़ रहा है है।  ऋचा   इलाहाबाद विश्वविद्यालय के ग्लोबलाइज़ेशन एवं  डेवेलपमेंट  स्टडीज सेंटर से पीएचडी कर रही हैं

“वो लोग मुझे पीएच.डी. से बाहर करने के लिए कोशिश कर रहे हैं मेरा एडमिशन रद्द करने   की  कोशिश  की  जा  रही है ,  “मैंने  अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के खिलाफ लड़ाई लड़ाई लड़ती रही  हूँ और मैंने विश्वविद्यालय परिसर में विवादित सांसद योगी आदित्यनाथ को प्रवेश नहीं होने दिया था जब उन्हें किसी कार्यकर्म  में आना था । मैंने कुलपति द्वारा किए गए गलत नियुक्तियों पर भी सवाल उठाया है और इसी वजह से  वो सब मुझे निशाना बना रहे हैं और मेरा दाखिला रद्द करने के लिए कोशिश कर रहे हैं।”  ऋचा सिंह ने आपका टाइम्स संवाददाता को फ़ोन पर हुई बातचीत में बताया।
ऋचा  ने कहा कि उनका दाखिला  पीएच.डी. में  2013-14 के सत्र में  हुआ था और दो साल पूरा होने वाला है  एडमिशन होने के बाद  और सब सही चल रहा था और  आज  अचानक  ही  ऐसा  क्या के मेरे एडमिशन पर  सवाल  उठाया  जा  रहा  है? अब तक 2 सालों में मेरे एडमिशन में उन्हें कुछ गलत नहीं लगा और अब जाकर उन्हें मेरा एडमिशन गलत लग रहा है तो सवाल यह है की पिछले  दो साल से वो लोग क्या कर रहे थे।
ऋचा ने बताया की “जब मेरा  एडमिशन 2013-14 में हुआ था तब , सेंटर में दो सीटें थे। वो लोग(कॉलेज प्रशाशन ) कहते हैं कि दो सीटों में से एक  सामान्य सीट और अन्य एक आरक्षित सीट थी। वो  अब दावा कर रहे हैं कि सीटों के रोटेशन के हिसाब से वह सीट आरक्षित वर्ग के लिए थी।”
गौरतबल है की ऋचा M.Phill की गोल्ड मेडलिस्ट भी रही हैं और छात्र संघ का चुनाव निर्दलीय जीता था जबकि बाकी के तीन सीटों पर ABVP का कब्ज़ा है।
News source : aapkatimes.com 

Tag: jnu , abvp,dalit, richa singh , Allahabad, Hyderabad university ,rohit vemula ,kanahiya , ambedkar students association ,dalit atrocity 

Sunday, 28 February 2016

आर एस एस पुरे देश को अपना सांस्कृतिक गुलाम बनाना चाहता है


यह बात किसी से छिपी  नहीं  है  की  भारत का सविंधान न सिर्फ अभिव्यक्ति की आजादी  देता है बल्कि हर जाति  , समुदाय , धर्म के लोगो को अपने रीती रिवाज आस्था के  साथ सम्मानीय जीवन जीने की भी आजादी मौलिक अधिकारों में देता है .
आर एस एस  जो  की ब्राह्मणों का एक अतिवादी संघठन है अपनी स्थापना  से ही देश में धर्म और संस्कृति के नाम पर लोगो को बरगलाता आया है , देश  में होने वाले आज तक तक सभी दंगो में सीधा  उलटे  तरीके से संघ का हाथ   रहा है .
कभी गंगा बचाओ , कभी मंदिर , कभी गोमांस  कभी महिसासुर , कभी देशद्रोह के नाम पर संघ ने देश में न सिर्फ तनाव पैदा किया है बल्कि देश को  भाषा और संस्कृति के नाम पर  बांटने का काम किया है .

हाल ही में हैदराबाद केन्द्रीय विश्वविध्यालय में दलित छात्रो पर जो प्रशासनिक जुल्म हुए जिसकी वजह से रोहित वेमुला नाम के दलित छात्र को आत्महत्या करनी पड़ी  , इन  छात्रो  से संघ को सिर्फ इसलिए परेशानी   थी कि  ये छात्र अम्बेडकरवादी सन्घठन से जुड़े थे और हमेशा सभी के लोकतांत्रिक हको के लिए आवाज उठाते  थे , ब्राह्मणों द्वारा फैलाई जा  रही कुत्सित और घ्रणित विचारधारा के खिलाफ  थे , विश्विध्यल्या में गोमांस खाने की आजादी की बाते करते क्योकि ये एक बहुत बड़े समुदाय की खान पान संस्कृति से जुडी थी , लेकिन संघ  की  विचारधारा  के  लोग हमेशा इस बात के खिलाफ  थे और वो गोमांस खाने को देशद्रोह से जोड़ कर देखते  थे  संघी  ये भी बताते  थे की  यह ब्राह्मणों  का पवित्र पशु  है  और ये इश्वर का वरदान  है .. लेकिन शोध आदि  से यह  भी  पता  चल गया  की  प्राचीन काल में स्वव्म  ब्राह्मण गोमांस  खाते   थे  बल्कि मारकंदय  पुराण में  तो यहाँ तक  बताया  गया  है कि मृत  पितरो  को गोमांस अर्पित करने से वो बहुत तृप्त  हो  जाते  है . . इसके अलावा  बहुत सारे और दृष्टांत   ब्राह्मण द्वारा  रचित ग्रंथो में मिल जाएंगे  
तो आज इन  बातो  के  लिए  संघ  का  यह आतंकी    रवेय्या  क्यों  ??
इससे पहले मंदिर के नाम पर  गुजरात में मुंबई में हम बहुत खून खराबा  देख  चुके  है , कोई कहे  नहीं  लेकिन तीस  सबके दिल में  .
यही  हाल  जे एन यु  में  हुआ   जहा छात्रो  को देशद्रोह के जूठे  आरोप लगा कर जेल में दाल  दिया   गया  है

सवाल  यह  है  की  क्या कोई  भी व्यक्ति , समुदाय ,अगर समाज में फैली बुराई  के खिलाफ अगर बोलेगा  तो  क्या उसे देशद्रोही कहा जाएगा ?? या सीधा सीधा  कहे  कि अगर ब्राह्मणों  द्वारा  फैलाई जा  रही मानसिकता के  खिलाफ बोलेगा   तो वह  देशद्रोही  होगा ?? क्या इस  तरह ब्राह्मण  इस  देश  को  अपना सांस्कृतिक  गुलाम  बनाना  चाहता  है ??   और जो नहीं  मानेगा  वो  देशद्रोही  होगा  , ऐसे कई  लेखक , कलाकार  है   जिनकी हत्या संघ करवा चुका  है  
आज  संघ के पास  देश की  कमान  है  यानी ये  लोग सत्ता  में है  इसका मतलब  यह  नहीं  की  ये  लोग हमेशा  के लिए  सत्ता  में आ चुके  है  समय और लोकतंत्र  का पहिया  हर तानाशाह को कुचल  देता  है संघ को भी कुचल देगा    और जब  ये  लोग  सत्ता  में  नहीं  होंगे  तब इनके लिए बहुत मुश्किल  होगी .  इसके  अलावा इन  लोगो को ये बात  अपने मन  में बिठानी  ही होगी  की  ये  देश  किसी  का गुलाम  नहीं  है


ये  बात  अलग  है की विदेशो  से आये आर्य /  ब्राह्मण एक समय आने पर  कत्ले आम करके इस  देश  के शासक  बन  गए  और यहाँ के  मूलनिवासी लोगो  को अपना सांस्कृतिक  गुलाम बना लिया  अपने  लिए   ग्रन्थ  लिख  लिए   की  उन्हें  भगवान्  ने भेजा  है  आने  वाली नसले गरीब कमजोर , निरक्षर   रहे  और उनकी अज्ञानता  का फायदा  ब्राह्मणों  को  मिलता  रहा लेकिन  आज  तो  ये  मूलनिवासी पड़ लिख  गए  है और अपने इतिहास को  जानने  लग गए  है , दूसरी  बात अगर  आपको  अपने रीती रिवाज की  इतनी  परवाह  है   तो  आप  कैसे किसी  दुसरे  जाति  धर्म  के  बारे  में अपमानजनक बाते  कह  सकते   है  ??? सबसे   पहले   ब्राह्मणों  को   अपने  आपको  सुधारना  होगा  और  इस   देश  को  अपना सांस्कृतिक   गुलाम  समझना  बंद  करना  होगा   तभी   इनका  भविष्य  इस  देश  में सुरक्षित  रहेगा  , क्योकि  ताकतवर , अत्याचारी कभी   सलामत  नहीं   रहे  , इतिहास   गवाह  है