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Saturday, 19 March 2016

मुसलमान उर्दू लेखकों को बताना होगा, किताब सरकार या देश विरोधी तो नहीं

नई दिल्ली, 19 मार्च  केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले उर्दू भाषा के प्रचार के लिए राष्ट्रीय समिति (एनसीपीयूएल) ने एक फॉर्म जारी किया है, जिसमें लेखकों को हर साल इस बात की घोषणा करनी होगी कि उनकी किताब सरकार या देश के खिलाफ नहीं है।


अंग्रेजी समाचार पत्र में छपी खबर के अनुसार, पिछले कुछ महीनों से कई लेखकों और संपादकों को ऐसे फॉर्म मिले हैं, जिसमें उनको दो गवाहों के हस्ताक्षर भी उपलब्ध कराने को कहा गया है। वह फॉर्म उर्दू में लिखा गया है। जिसमें लेखक को बताना है कि एनसीपीयूएल के आर्थिक सहायता योजना के तहत अत्यधिक मात्रा में उनकी जिन किताबों या पत्रिकाओं को खरीदने का जो निर्णय लिया गया है,


उसमें सरकार की नीतियों या राष्ट्रहित के खिलाफ कुछ भी नहीं है, और न ही उससे देश के विभिन्न समुदायों के बीच विद्वेष फैलता है, और न ही उसे सरकारी या गैर सरकारी संस्थाओं से आर्थिक मदद प्राप्त है। उसमें चेताया गया है कि अगर घोषणा पत्र में किए गए दावे गलत पाए जाते हैं तो एनसीपीयूएल उस लेखक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकता है और आर्थिक सहायता वापस ले सकता है। एनसीपीयूएल के निदेशक इर्तेजा करीम का कहना है कि अगर कोई लेखक सरकार से आर्थिक मदद चाहता है तो किताब में सरकार के खिलाफ कंटेंट नहीं होना चाहिए।


 एनसीपीयूएल एक सरकारी संस्था है और वे लोग सरकारी कर्मचारी हैं। हम सब सरकार के हितों का संरक्षण करेंगे। उन्होंने बताया कि एक साल पहले परिषद सदस्यों की एक बैठक में इस घोषणा पत्र के संदर्भ में निर्णय लिया गया था। हमारे पास इतने कर्मचारी नहीं हैं कि हर किताब की हर पंक्ती को पढ़ा जा सके, ऐसे में यह फॉर्म हमारी मदद करती है।

उन्होंने बताया कि पिछले साल पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम के बारे में एक किताब में गलत सूचना दे दी गई। उन्होंने कहा कि कलाम एक राष्ट्रीय व्यक्तित्व हैं, उनसे संबंधित गलत सूचना राष्ट्रीय मुद्दा बन सकता है। हमलोग सब चीजों के लिए जिम्मेदारी नहीं ले सकते हैं।





Monday, 7 March 2016

रोहित वेमुला की हत्या ध्यान हटाने के लिए रचाया जे एन यु का स्वांग ,संघ ने : ब्राह्मण शासन है अंतिम लक्ष्य

देश में हो  रही दलित  हत्याए आदिवासिओ की हत्याए  लगातार हो  रही है और बाकायदा इनकी संख्या  लगातार बढती जा रही  है , उड़ीसा से लेकर मध्य प्रदेश , छतीसगढ़ ,महारष्ट्र में कोंग्रेस  बी जे पी दोनों एक साथ मिल कर आदिवासी हत्याओं में शामिल है ,

ये बात जानकार सबको हैरानी होगी की दलित हत्या के मामले में ये दोनों दल एक है , एकमत है


फिलहाल ही  एक आदिवासी महिला सोनी सोरी के मूह पर तेज़ाब फेंका गया  इससे  पहले  उसके निजी अंग में पथ्तर  भर दिए थे पुलिस वालो ने , इस कार्य की वजह से उन पुलिस वालो को राष्ट्रपति का वीरता पुरूस्कार भी मिला था
 दलित हत्या के क्रम में संघियो ने धीरे धीरे उन सस्न्थाओ को और उन छात्रो को निशाना बनाना शुरू किया किया  जहा पर दलित छात्र उनके उपर हो  रहे है जुल्मो के खिलाफ आवाज उठाते है ,

और इस प्रक्रिया में  दक्षिण भारत को चुना गया और  वहा पर आई आई टी मद्रास  को सबसे पहले निशाना  बनाया गया  जहा पर बीफ को लेकर संघियो ने उन्माद मचाया  और दलित छात्रो को प्रताड़ित किया गया .

इसके बाद हैदराबाद  केन्द्रीय विश्विद्यालय  को चुना गया  जहा पर झूटा इल्जाम लगा कर रोहित वेमुला और  अन्य  छात्रो को  जबरदस्ती  होस्टल से निकाला गया  और  ये  छात्र सडक पर रात बिताने के लिए मजबूर किया गया , इसके साथ साथ इनकी स्कोलरशिप भी रोक दी  गयी यानी की मानसिक , आर्थिक और शारीरक तीनो तरह से इनको प्रताड़ित  किया गया ,  हैदराबाद केन्द्रीय  विश्वविध्यालय के इस दलित आन्दोलन  का अंत रोहत वेमुला की संस्थानिक हत्या से हुआ जिसका पुरे देश में ही नहीं दुनिया में विरोध होने लगा  सारे देश  की भावना रोहित और उसके परिवार से जुड़  गुई  संघियो को लगा जैसे ये उनकी एक राजनेतिक हार है  रोहित के मामले को दबाने के लिए एक नया षड्यंत्र  रचा गया और ये  षड्यंत्र जे एन यु षड्यंत्र के नाम से जाना गया जहा पर  संघियो ने पूरी प्लानिंग के साथ अपने ही लोगो से देश विरोधी नारे लगवाये और पुलिस  और मीडिया की मदद से जे एन यु छात्रो को गिरफ्तार  करवाया गया वो भी देशद्रोह के आरोप में

इन छात्रो की भी गलती यही  थी की ये भी ब्राह्मणवाद , सामन्तवाद , जातिवाद के खिलाफ नारे लगाते थे , जे एन यु की घटना के जरिये  संघियो/ भाजपा  ने  पुरे देश का ध्यान दलितों  के उपर हो  रहे अत्याचार से हटाने की एक नाकाम कोशिस  की जो की हो नहीं पाया



घटना सिर्फ ये नहीं  है  इतिहास में भाजपा / संघ इसी तरह के कार्यो में लिप्त रहे है