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Tuesday, 26 April 2016

देखिये संघ समर्थक जे एन यु के संघी प्रोफसर कैसे दे रहे है आतंकवाद को बढ़ावा


जन उदय : जे एन यू काण्ड , यानी बी जे पी के छात्र विंग  के साथ मिलकर जो षड्यंत्र मीडिया के कुछ न्यूज़ चैनल ने  चलाया था .

यह बात संसद रहे की देश की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जहा पर वाम विचारधारा का वर्चस्व है उसको बर्बाद करने के लिए संघ , भाजपा ने अपने छात्र विंग के साथ एक षड्यंत्र  चलाया  था जिसमे एक डॉक्टरेड विडियो सभी संघी चैनल पर चलाया गया जिसमे दिखाया गया की जे एन यु के वामपंथी छात्र देशद्रोही  नारे लगा रहे है , जो विडियो बाद में जब जांच हुई फर्जी साबित हुआ
यह घटना  देश के सबसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी  और इस घटना ने देश को पूरी दुनिया में बदनाम किया

इसी घटना के सन्दर्भ और उसी से जुडी घटनाओं के लिए
9 फरवरी को जेएनयू में हुई घटना को लेकर एक जांच पैनल ने उमर खालिद और कन्‍हैया कुमार को अलग अलग सजा दी है. उमर खालिद को एक सेमिस्टर के लिए सस्पेंड कर दिया गया है साथ ही 20 हजार रुपए जुर्माना भरने को कहा है. जबकि जेएनयू स्‍टूडेंट यूनियन के प्रेसिडेंट कन्हैया कुमार को दस हजार रुपए जुर्माना भरने को कहा गया है.

दोनों ही छात्र नेता यूनिवर्सिटी नियमों के तहत अनुशासनहीनता के दोषी पाए गए हैं. बता दें कि इस मामले में मुजीब गट्टू को भी एक सेमेस्टर के लिए निलंबित किया गया है. अनिर्बान भट्टाचार्य को 15 जुलाई तक निलंबित किया गया है. साथ ही अनिर्बान 23 जुलाई से अगले पांच साल तक जेएनयू से कोई भी कोर्स नहीं कर सकेंगे.

इसमें कमाल की बात यह है की  जो दोषी छात्र थे यानी ए बी वी पी के छात्र  , बी जे पी के नेता   और न्यूज़ चैनल उन पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है , जबकि कॉलेज  प्रशासन को चाहिए  था की वो इन संघी छात्र समेत सभी न्यूज़ चैनल पर भी कार्यवाही करे  लेकिन ऐसा न हो कर उलटा पीड़ित  छात्रो को ही और प्रताड़ित  किया जा रहा है


इसमें बताया  जा रहा है  जांच कमिटी का अध्यक्ष  भटनागर  संघ समर्थक और आरक्षण विरोधी  है जो इसी तरह की अन्य देशविरोधी घटनायो में शामिल रहता है 

Wednesday, 23 March 2016

लाशो की सडांध मार रही है मोदी सरकार : इसे साफ़ करो

लाशो की सडांध मार रही है मोदी सरकार : इसे साफ़ करो
जन उदय : इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता की  मोदी सरकार के आते ही बहुत से लोगो में ये आशा बंध गई थी की अब कुछ नया होगा  बेरोजगारी कम होगी , महंगाई कम होगी , और सुशासन  कम होगा

आते के साथ ही मोदी ने  नई नई योजनाये  लागू की , लेकिन विश्लेष्ण से यही पता  चला की ये पिछली सरकार की ही योजनाये  थी , यानी नई बोतल में पुरानी शराब , मोदी ने दुनिया भर की सैर भी की  जिस मीडिया  संस्थाओं ने मोदी  के चमचो से पैसे खाए  हुए थे , उन्होंने  हर संभव प्रयास किया की मोदी को कुछ अलग करके दिखाया जाए
सबने ये भी कहा की आते के साथ ही कोई भी कुछ नहीं कर सकता इसलिए मोदी को थोडा  समय  दिया जाए ,

लेकिन धीरे धीरे जनता का सब्र टूटने लगा और फिर महंगाई कम करने की बेरोजगारी कम करने की मांग करने लगे

लेकिन महंगाई कम होने की बजाय और बढ़ने लगी  मोदी सरकार हर  समस्या को कम करने और खत्म करने में नाकाम रही , दिल्ली की हार ने भाजपा और संघ को थोडा सा चेताया   लेकिन मोदी और भाजपा अपना संघ पापा के साथ जीत के नशे में चूर  रहे  सो परिणाम इनके सामने रहा
समस्या को दूर तो नहीं किया हाँ  दंगे करवाए गए जैसा की इनकी पुरानी आदत है , गोमांस के नाम पर हत्याए हुई , रोहति वेमुला की संस्थानिक  हत्या हुई  बावजूद इसके की पूरी दुनिया में भारत की बदनामी हुई है  मोदी सरकार अब तक रोहित वेमुला को न्याय नहीं देना चाहती बल्कि उल्टा  हैदराबाद  में छात्रो पर दुबारा लाठी चार्ज  हुआ है कई छात्र घायल हुए है , इसके बाद रोहित की मौत के मामले को दबाने के लिए जे एन यु का षड्यंत्र रचा गया   ये  षड्यंत्र ऐसा है की ऐसा पूरी दुनिया में कही नहीं हुई जबकि सरकार ने अपनी पूरी ताकत एक यूनिवर्सिटी को बंद करने , उसे बदनाम करने  और बर्बाद करने  में लगा दी है


इसके बाद अम्बेडकर के नाम पर मोदी मगरमछ के आंसू बहाते नजर आये  जिसमे मोदी ने कहा की आरक्षण को खरोच तक नहीं आएगी  लेकिन लेकिन संसद में आरक्षण के बिल को खुद ही रोका हुआ है  जिसमे नौकरी में प्रमोशन की बात है

और अब दुबारा से हैदराबाद में लाठी चार्ज करवाया जा रहा है , जे एन यु कन्हीय्या के  हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी पहुचते ही यूनिवर्सिटी को बंद करवा दिया गया

ये बात समझ से एकदम परे है की  पुरे देश दुनिया के विरोध के बावजूद संघ , मनुसिमृति इरानी आखिर क्यों दोषी छात्रो और वाईस  चांसलर को बचाना  चाहते है
बिहार यु पी हर जगह दलित बस्तिओ में आग लगाईं जा रही है ताकि दलितों को डराया  धमकाया  जा सके

ये सब वारदाते  मोदी सरकार की गन्दी नीतिओ और मानसिकता के कारण हो रही है  और अब इसमें से सड़ांध आ रही है  इसका एक ही निर्मूलन  है वह है संघ भाजपा मोदी सरकार का देश से सफाया  

Friday, 18 March 2016

जानिये क्यों जलाया जाना चाहिए मनुसिमृति को

भारत ही नहीं पूरा दुनिया में भारत के प्राचीन धार्मिक ग्रंथो की विवेचना  होने लगी है  खुद  संघ के  विधार्थी परिषद्  ने इसको जे एन यु में जलाया  , जानिये क्यों  जला या 

१- पुत्री,पत्नी,माता या कन्या,युवा,व्रुद्धा किसी भी स्वरुप में नारी स्वतंत्र नही होनी चाहिए. -मनुस्मुर्तिःअध्याय-९ श्लोक-२ से ६ तक.

...
२- पति पत्नी को छोड सकता हैं, सुद(गिरवी) पर रख सकता हैं, बेच सकता हैं, लेकिन स्त्री को इस प्रकार के अधिकार नही हैं. किसी भी स्थिती में, विवाह के बाद, पत्नी सदैव पत्नी ही रहती हैं. - मनुस्मुर्तिःअध्याय-९ श्लोक-४५

३- संपति और मिलकियत के अधिकार और दावो के लिए, शूद्र की स्त्रिया भी "दास" हैं, स्त्री को संपति रखने का अधिकार नही हैं, स्त्री की संपति का मलिक उसका पति,पूत्र, या पिता हैं. - मनुस्मुर्तिःअध्याय-९ श्लोक-४१६.
४- ढोर, गंवार, शूद्र और नारी, ये सब ताडन के अधिकारी हैं, यानी नारी को ढोर की तरह मार सकते हैं....तुलसी दास पर भी इसका प्रभाव दिखने को मिलता हैं, वह लिखते हैं-"ढोर,चमार और नारी, ताडन के अधिकारी."
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मनुस्मुर्तिःअध्याय-८ श्लोक-२९९

५- असत्य जिस तरह अपवित्र हैं, उसी भांति स्त्रियां भी अपवित्र हैं, यानी पढने का, पढाने का, वेद-मंत्र बोलने का या उपनयन का स्त्रियो को अधिकार नही हैं.- मनुस्मुर्तिःअध्याय-२ श्लोक-६६ और अध्याय-९ श्लोक-१८.
६- स्त्रियां नर्कगामीनी होने के कारण वह यग्यकार्य या दैनिक अग्निहोत्र भी नही कर सकती.(इसी लिए कहा जाता है-"नारी नर्क का द्वार") - मनुस्मुर्तिःअध्याय-११ श्लोक-३६ और ३७ .

७- यग्यकार्य करने वाली या वेद मंत्र बोलने वाली स्त्रियो से किसी ब्राह्मण भी ने भोजन नही लेना चाहिए, स्त्रियो ने किए हुए सभी यग्य कार्य अशुभ होने से देवो को स्वीकार्य नही हैं. - मनुस्मुर्तिःअध्याय-४ श्लोक-२०५ और २०६ .
८- - मनुस्मुर्ति के मुताबिक तो , स्त्री पुरुष को मोहित करने वाली - अध्याय-२ श्लोक-२१४ .
९ - स्त्री पुरुष को दास बनाकर पदभ्रष्ट करने वाली हैं. अध्याय-२ श्लोक-२१४

१० - स्त्री एकांत का दुरुप्योग करने वाली. अध्याय-२ श्लोक-२१५.
११. - स्त्री संभोग के लिए उमर या कुरुपताको नही देखती. अध्याय-९ श्लोक-११४.
१२- स्त्री चंचल और हदयहीन,पति की ओर निष्ठारहित होती हैं. अध्याय-२ श्लोक-११५.
१३.- केवल शैया, आभुषण और वस्त्रो को ही प्रेम करने वाली, वासनायुक्त, बेईमान, इर्षाखोर,दुराचारी हैं . अध्याय-९ श्लोक-१७.
१४.- सुखी संसार के लिए स्त्रीओ को कैसे रहना चाहिए? इस प्रश्न के उतर में मनु कहते हैं-
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१). स्त्रीओ को जीवन भर पति की आग्या का पालन करना चाहिए. - मनुस्मुर्तिःअध्याय-५ श्लोक-११५.
(
२). पति सदाचारहीन हो,अन्य स्त्रीओ में आसक्त हो, दुर्गुणो से भरा हुआ हो, नंपुसंक हो, जैसा भी हो फ़िर भी स्त्री को पतिव्रता बनकर उसे देव की तरह पूजना चाहिए.- मनुस्मुर्तिःअध्याय-५ श्लोक-१५४.
जो इस प्रकार के उपर के ये प्रावधान वाले पाशविक रीति-नीति के विधान वाले पोस्टर क्यो नही छपवाये?
(
१) वर्णानुसार करने के कार्यः -
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महातेजस्वी ब्रह्मा ने स्रुष्टी की रचना के लिए ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य और शूद्र को भिन्न-भिन्न कर्म करने को तै किया हैं -



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पढ्ना,पढाना,यग्य करना-कराना,दान लेना यह सब ब्राह्मण को कर्म करना हैं. अध्यायः१:श्लोक:८७
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प्रजा रक्षण , दान देना, यग्य करना, पढ्ना...यह सब क्षत्रिय को करने के कर्म हैं. - अध्यायः१:श्लोक:८९
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पशु-पालन , दान देना,यग्य करना, पढ्ना,सुद(ब्याज) लेना यह वैश्य को करने का कर्म हैं. - अध्यायः१:श्लोक:९०.
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द्वेष-भावना रहित, आंनदित होकर उपर्युक्त तीनो-वर्गो की नि:स्वार्थ सेवा करना, यह शूद्र का कर्म हैं. - अध्यायः१:श्लोक:९१.
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२) प्रत्येक वर्ण की व्यक्तिओके नाम कैसे हो?:-
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ब्राह्मण का नाम मंगलसूचक - उदा. शर्मा या शंकर
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क्षत्रिय का नाम शक्ति सूचक - उदा. सिंह
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वैश्य का नाम धनवाचक पुष्टियुक्त - उदा. शाह
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शूद्र का नाम निंदित या दास शब्द युक्त - उदा. मणिदास,देवीदास
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अध्यायः२:श्लोक:३१-३२.
(
३) आचमन के लिए लेनेवाला जल:-
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ब्राह्मण को ह्रदय तक पहुचे उतना.
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क्षत्रिय को कंठ तक पहुचे उतना.
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वैश्य को मुहं में फ़ैले उतना.
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शूद्र को होठ भीग जाये उतना, आचमन लेना चाहिए.
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अध्यायः२:श्लोक:६२.
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४) व्यक्ति सामने मिले तो क्या पूछे?:-
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ब्राह्मण को कुशल विषयक पूछे.
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क्षत्रिय को स्वाश्थ्य विषयक पूछे.
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वैश्य को क्षेम विषयक पूछे.
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शूद्र को आरोग्य विषयक पूछे.
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अध्यायः२:श्लोक:१२७.
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५) वर्ण की श्रेष्ठा का अंकन :-
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ब्राह्मण को विद्या से.
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क्षत्रिय को बल से.
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वैश्य को धन से.
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शूद्र को जन्म से ही श्रेष्ठ मानना.(यानी वह जन्म से ही शूद्र हैं)
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अध्यायः२:श्लोक:१५५.
(
६) विवाह के लिए कन्या का चयन:-
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ब्राह्मण सभी चार वर्ण की कन्याये पंसद कर सकता हैं.
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क्षत्रिय - ब्राह्मण कन्या को छोडकर सभी तीनो वर्ण की कन्याये पंसद कर सकता हैं.
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वैश्य - वैश्य की और शूद्र की ऎसे दो वर्ण की कन्याये पंसद कर सकता हैं.
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शूद्र को शूद्र वर्ण की ही कन्याये विवाह के लिए पंसद कर सकता हैं.- (अध्यायः३:श्लोक:१३) यानी शूद्र को ही वर्ण से बाहर अन्य वर्ण की कन्या से विवाह नही कर सकता.
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७) अतिथि विषयक:-
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ब्राह्मण के घर केवल ब्राह्मण ही अतिथि गीना जाता हैं,(और वर्ण की व्यक्ति नही)
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क्षत्रिय के घर ब्राह्मण और क्षत्रिय ही ऎसे दो ही अतिथि गीने जाते थे.
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वैश्य के घर ब्राह्मण,क्षत्रिय और वैश्य तीनो द्विज अतिथि हो सकते हैं, लेकिन ...
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शूद्र के घर केवल शूद्र ही अतिथि कहेलवाता हैं - (अध्यायः३:श्लोक:११०) और कोइ वर्ण का आ नही सकता...
(
८) पके हुए अन्न का स्वरुप:-
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ब्राह्मण के घर का अन्न अम्रुतमय.
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क्षत्रिय के घर का अन्न पय(दुग्ध) रुप.
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वैश्य के घर का अन्न जो है यानी अन्नरुप में.
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शूद्र के घर का अन्न रक्तस्वरुप हैं यानी वह खाने योग्य ही नही हैं.
(
अध्यायः४:श्लोक:१४)
(
९) शब को कौन से द्वार से ले जाए? :-
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ब्राह्मण के शव को नगर के पूर्व द्वार से ले जाए.
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क्षत्रिय के शव को नगर के उतर द्वार से ले जाए.
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वैश्य के शव को पश्र्चिम द्वार से ले जाए.
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शूद्र के शव को दक्षिण द्वार से ले जाए.
(
अध्यायः५:श्लोक:९२)
(
१०) किस के सौगंध लेने चाहिए?:-
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ब्राह्मण को सत्य के.
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क्षत्रिय वाहन के.
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वैश्य को गाय, व्यापार या सुवर्ण के.
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शूद्र को अपने पापो के सोगन्ध दिलवाने चाहिए.
(
अध्यायः८:श्लोक:११३)
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११) महिलाओ के साथ गैरकानूनी संभोग करने हेतू:-
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ब्राह्मण अगर अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो सिर पे मुंडन करे.
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क्षत्रिय अगर अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो १००० भी दंड करे.
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वैश्य अगर अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो उसकी सभी संपति को छीन ली जाये और १ साल के लिए कैद और बाद में देश निष्कासित.
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शूद्र अगर अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो उसकी सभी संपति को छीन ली जाये , उसका लिंग काट लिआ जाये.
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शूद्र अगर द्विज-जाती के साथ अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो उसका एक अंग काटके उसकी हत्या कर दे.
(
अध्यायः८:श्लोक:३७४,३७५,३७९)
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१२) हत्या के अपराध में कोन सी कार्यवाही हो?:-
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ब्राह्मण की हत्या यानी ब्रह्महत्या महापाप.(ब्रह्महत्या करने वालो को उसके पाप से कभी मुक्ति नही मिलती)
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क्षत्रिय की हत्या करने से ब्रह्महत्या का चौथे हिस्से का पाप लगता हैं.
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वैश्य की हत्या करने से ब्रह्महत्या का आठ्वे हिस्से का पाप लगता हैं.
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शूद्र की हत्या करने से ब्रह्महत्या का सोलह्वे हिस्से का पाप लगता हैं.(यानी शूद्र की जिन्द्गी बहोत सस्ती हैं)
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अध्यायः११:श्लोक:१२६)

Wednesday, 16 March 2016

कन्हिया ने फिर मारे भिगो भिगो कर जूते मोदी , भाजपा और इनकी अम्मा संघ को :रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या के विरोध में मार्च

रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या के विरोध में मार्च
कन्हिया  ने फिर मारे भिगो भिगो कर जूते मोदी , भाजपा और इनकी अम्मा संघ को
जन उदय : हैदराबाद  केंद्रीय के टॉपर  दलित  छात्र   रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या को दबाने के लिए  संघ सरकार न जाने क्या क्या पापड़ बेल रही है लेकिन हर बार विफल रही है ,

रोहित वेमुला की हत्या के मामले को दबाने के लिए संघ ने न्यूज़ चैनल  और मीडिया संस्थाओं से मिल कर जे एन यु षड्यंत्र  रचा  जिसमे खुद संघ  के लोगो ने  भारत विरोधी   नारे लगाए   और इल्जाम जे एन यु के मासूम  छात्रो पर धर  दिया .
इस मामले में जे एन यु छात्र संघ अध्यक्ष कन्हिया  को देशद्रोह  कानून में फंसा कर जेल में भी डाला गया   लेकिन इस बात से भी रोहित वेमुला का मामला दब न सका  उल्टा   ज़रा से ही वक्त में संघियो   का षड्यंत्र  सामने आ गया और संघियो  की दबा कर किरकिरी  हो गयी

 जेल से आने के बाद कनाहिया  ने जो भाषण  दिया उसके इस भाषण को दुनिया में प्रसारित  किया गया   और पूरी दुनिया के लोगो ने मोदी सरकार की भर्त्सना की
 १५ मार्च को रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या के खिलाफ  एक विशाल रैली  निकाली गई


जिसमे हजारो  छात्रो ने  भाग लिया  जहा पर कन्हिया  ने फिर  जे एन यु स्टाइल में संघियो को भाजपा को और उनके  समर्थको को शब्द बाण  से लताड़ा    और इतना लताड़ा  की ऐसे लग रहा था कोई बड़ी बे रहमी से  किसी के सर  पर जूते  बरसा  रहा हो


भारत के पुरे इतिहास में  आजतक किसी पार्टी या  प्रधानमंत्री  की बेइज्जती  नहीं हुई है  और न ही इतने कठोर शब्द कहे गए है जितने की मोदी के बारे में , लेकिन मोदी भाजपा संघ  इरानी ये सब बेशर्म  षड्यंत्रकारी  लोग है   इन्हें  कोई फर्क  नहीं पड़ता 

Monday, 14 March 2016

विनायक दामोदर सावरकर सावरकर मानते थे कि गाय की पूजा करना मानव जाति का स्तर गिराना है


‘हिंदुत्व’ के विचार की बुनियाद रखने वाले विनायक दामोदर सावरकर का मानना था कि मुसलमानों ने हिंदुओं को नहीं हराया बल्कि वे गाय की पूजा करने से हारे.

सावरकर मानते थे कि गाय की पूजा करना मानव जाति का स्तर गिराना है
विनायक दामोदर सावरकर द्वारा मराठी भाषा में लिखी गई किताब ‘विज्ञाननिष्ठ निबंध’ भाग 1 और भाग 2, स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक प्रकाशन, मुंबई ने प्रकाशित की थी. इस किताब के अध्याय 1.5 का शीर्षक है – गोपालन हवे, गोपूजन नव्हे. हिंदी में इसका अनुवाद होगा - गाय की देखभाल करिये, लेकिन पूजा नहीं. सत्याग्रह की सहयोगी वेबसाइट स्क्रोलडॉटइन पर प्रकाशित इस अध्याय के अग्रेजी अनुवाद का हिंदी रूपांतरण.

भारत जैसे कृषि प्रधान देश में यह स्वाभाविक ही है कि लोगों को गाय अच्छी लगे. गाय लंबे समय से हमारे साथ रही है. वह हमें कई चीजें उपलब्ध करवाती है. उसका दूध, अनाज के साथ मिलकर हमारे शरीर का विकास करता है. जो गायें रखते हैं उनके लिए ये परिवार के किसी सदस्य जैसी ही बन गई हैं. हिंदूओं का करुणापूर्ण मन और हृदय गायों के प्रति कृतज्ञता महसूस करता है.
हम गाय के प्रति समर्पित हैं क्योंकि वह इतनी उपयोगी है. यह हमारा कृतज्ञता बोध है जो उसे दैवीय बना देता है. जो लोग गाय की पूजा करते हैं यदि उनसे आप पूछें कि गाय पूजनीय क्यों है तो वे सिर्फ यह बताते हैं कि वह कितनी उपयोगी है.

ईश्वर सर्वोच्च है, फिर मनुष्य का स्थान है और उसके बाद पशु जगत है. गाय को दैवीय मानना और इस तरह से मनुष्य के ऊपर समझना, मनुष्य का अपमान है.

यदि गाय की पूजा इसलिए की जाती है कि वह इतनी उपयोगी है तो क्या इसका मतलब यह नहीं है कि उसकी देखभाल इतनी अच्छी तरह से हो कि उसकी उपयोगिता ज्यादा से ज्यादा बढ़ सके? यदि गाय का सबसे अच्छा उपयोग करना है तो सबसे पहले आपको उसकी पूजा बंद करनी पड़ेगी. जब आप गाय की पूजा करते हैं तो आप मानव जाति का स्तर नीचे गिराते हैं.

ईश्वर सर्वोच्च है, फिर मनुष्य का स्थान है और उसके बाद पशु जगत है. गाय तो एक ऐसा पशु है जिसके पास मूर्ख से मूर्ख मनुष्य के बराबर भी बुद्धि नहीं होती. गाय को दैवीय मानना और इस तरह से मनुष्य के ऊपर समझना, मनुष्य का अपमान है.

गाय एक तरफ से खाती है और दूसरी तरफ से गोबर और मूत्र विसर्जित करती रहती है. जब वह थक जाती है तो अपनी ही गंदगी में बैठ जाती है. फिर वह अपनी पूंछ (जिसे हम सुंदर बताते हैं) से यह गंदगी अपने पूरे शरीर पर फैला लेती है. एक ऐसा प्राणी जो स्वच्छता को नहीं समझता उसे दैवीय कैसे माना जा सकता है?

ऐसा क्यों है कि गाय का मूत्र और गोबर तो पवित्र है जबकि अंबेडकर जैसे व्यक्तित्व की छाया तक अपवित्र? यह एक उदाहरण दिखाता है किस तरह हमारी समझ खत्म हो गई है.

ऐसा क्यों कि गाय का मूत्र और गोबर तो पवित्र है जबकि अंबेडकर जैसे व्यक्तित्व की छाया तक अपवित्र? यह एक उदाहरण दिखाता है किस तरह हमारी समझ खत्म हो गई है.
यदि हम ये कहते हैं कि गाय दैवीय है और उसकी पूजा हमारा कर्तव्य है तो इसका मतलब है कि मनुष्य गाय के लिए बना है, गाय मनुष्य के लिए नहीं. यहां उपयोगितावाद की दृष्टि जरूरी है : गाय की अच्छी देखभाल करें क्योंकि वह उपयोगी है. इसका मतलब है कि युद्ध के समय, जब यह अपंग हो सकती है, इसे न मारने की कोई वजह नहीं है.

यदि हमारे हिंदू राष्ट्र के किसी अभेद्य नगर पर हमला होता है और रसद खत्म हो रही है तो क्या हम नई रसद आने तक इंतजार करेंगे? तब राष्ट्र के प्रति समर्पण, सेना की कमान संभाल रहे नेता के लिए यह कर्तव्य निर्धारित करता है कि वह गोवध का आदेश दे और गोमांस को खाने की जगह इस्तेमाल करे. यदि हम गाय की ऐसे ही पूजा करते रहे तो हमारे सैनिकों के सामने फिर यही विकल्प होगा कि वे भूख से मर जाएं और नगर पर दूसरों का कब्जा हो जाए.

यह कोई बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बात नहीं है कि गाय पूज्य है, जैसी मूर्खतापूर्ण और सरल धारणा ने देश को हानि पहुंचाई है. इतिहास बताता है कि हिंदू साम्राज्यों को इस मान्यता की वजह से हार का मुंह देखना पड़ा है. राजाओं को अक्सर युद्ध हारने पड़े क्योंकि वे गाय की हत्या नहीं कर सकते थे. मुसलमानों ने गाय को ढाल की तरह इस्तेमाल किया क्योंकि उन्हें भरोसा था कि हिंदू इस पशु को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे.

गाय पूज्य है, जैसी मूर्खतापूर्ण और सरल धारणा ने देश को हानि पहुंचाई है. इतिहास बताता है कि हिंदू साम्राज्यों को इस मान्यता की वजह से हार का मुंह देखना पड़ा है.
जो बात गायों के लिए सही है, वही मंदिरों के लिए भी कही जा सकती है. जब एक शक्तिशाली हिंदू सेना ने मुल्तान पर आक्रमण किया तो वहां के मुसलमान शासक ने पवित्र सूर्य मंदिर तोड़ने की धमकी दे दी. इसके तुरंत बाद हिंदू सेना वहां से लौट आई. ठीक यही तब हुआ जब मल्हारराव होलकर काशी को स्वतंत्र करवाने वहां पहुंचे. लेकिन जब मुसलमानों ने वहां मंदिर तोड़ने, ब्राह्मणों की हत्याएं करने और जो भी हिंदुओं के लिए पवित्र है उसे अशुद्ध करने की धमकी दी तो उन्होंने अपने कदम वापस खींच लिए.

कुछ गायों, ब्राह्मणों और मंदिरों को बचाने जैसी मूर्खता के कारण देश का बलिदान हो गया. इसमें कुछ भी गलत नहीं था यदि  देश के लिए उनका बलिदान किया जाता. हर एक मुसलमान आक्रमणकारी को युद्ध जीतने दिया गया क्योंकि हिंदू गाय और मंदिर बचाना चाहते थे. इस तरह पूरा देश हाथ से चला गया.

विकल्प दो हैं जिनमें से एक को चुनना है. उपयोगितावादी दृष्टि और धर्मांधता की जकड़न. धार्मिक ग्रंथ और पुजारी सिर्फ यही कहते हैं कि यह पाप है और यह पवित्र है: वे यह नहीं बताते कि क्यों. विज्ञान धर्मांधता से अलग है. वह चीजों की व्याख्या करता है और हमें सही या गलत जानने के लिए वास्तविकता का परीक्षण करने की अनुमति देता है. विज्ञान हमें बताता है कि गाय उपयोगी है इसलिए हमें उसे नहीं मारना चाहिए – लेकिन यदि वह मनुष्य की भलाई के लिए अहितकर सिद्ध हो तो वह मारी भी जा सकती है.
सोर्स : satyagrah. scroll.in