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Tuesday, 26 April 2016

देखिये संघ समर्थक जे एन यु के संघी प्रोफसर कैसे दे रहे है आतंकवाद को बढ़ावा


जन उदय : जे एन यू काण्ड , यानी बी जे पी के छात्र विंग  के साथ मिलकर जो षड्यंत्र मीडिया के कुछ न्यूज़ चैनल ने  चलाया था .

यह बात संसद रहे की देश की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जहा पर वाम विचारधारा का वर्चस्व है उसको बर्बाद करने के लिए संघ , भाजपा ने अपने छात्र विंग के साथ एक षड्यंत्र  चलाया  था जिसमे एक डॉक्टरेड विडियो सभी संघी चैनल पर चलाया गया जिसमे दिखाया गया की जे एन यु के वामपंथी छात्र देशद्रोही  नारे लगा रहे है , जो विडियो बाद में जब जांच हुई फर्जी साबित हुआ
यह घटना  देश के सबसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी  और इस घटना ने देश को पूरी दुनिया में बदनाम किया

इसी घटना के सन्दर्भ और उसी से जुडी घटनाओं के लिए
9 फरवरी को जेएनयू में हुई घटना को लेकर एक जांच पैनल ने उमर खालिद और कन्‍हैया कुमार को अलग अलग सजा दी है. उमर खालिद को एक सेमिस्टर के लिए सस्पेंड कर दिया गया है साथ ही 20 हजार रुपए जुर्माना भरने को कहा है. जबकि जेएनयू स्‍टूडेंट यूनियन के प्रेसिडेंट कन्हैया कुमार को दस हजार रुपए जुर्माना भरने को कहा गया है.

दोनों ही छात्र नेता यूनिवर्सिटी नियमों के तहत अनुशासनहीनता के दोषी पाए गए हैं. बता दें कि इस मामले में मुजीब गट्टू को भी एक सेमेस्टर के लिए निलंबित किया गया है. अनिर्बान भट्टाचार्य को 15 जुलाई तक निलंबित किया गया है. साथ ही अनिर्बान 23 जुलाई से अगले पांच साल तक जेएनयू से कोई भी कोर्स नहीं कर सकेंगे.

इसमें कमाल की बात यह है की  जो दोषी छात्र थे यानी ए बी वी पी के छात्र  , बी जे पी के नेता   और न्यूज़ चैनल उन पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है , जबकि कॉलेज  प्रशासन को चाहिए  था की वो इन संघी छात्र समेत सभी न्यूज़ चैनल पर भी कार्यवाही करे  लेकिन ऐसा न हो कर उलटा पीड़ित  छात्रो को ही और प्रताड़ित  किया जा रहा है


इसमें बताया  जा रहा है  जांच कमिटी का अध्यक्ष  भटनागर  संघ समर्थक और आरक्षण विरोधी  है जो इसी तरह की अन्य देशविरोधी घटनायो में शामिल रहता है 

Wednesday, 23 March 2016

भगवा आतंक सर चड कर बोल रहा है : पुणे में भी फसाया दलित छात्रो को देशद्रोह के आरोप में

ताजा खबर पेशवाई के शहर पुणे से, जो भीमा कोरेगांव की भी जमीन है .

पुणे के फर्गुशन कॉलेज के प्रिंसिपल ने वहां के आंबेडकरवादी और वामपंथी छात्रों पर देशद्रोही होने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को पुलिस में केस दर्ज किया. इन छात्रों ने बिना परमिशन हो रहे ABVP के एक कार्यक्रम का विरोध किया था.
आज वह केस वापस ले लिया गया.


अगर वह मुकदमा दर्ज हो गया होता, तो पहली बार बाबा साहेब के एक वंशज यानी उनके ग्रैंडसन सुजात आंबेडकर पर ऐसा केस चलता. वह भी तब जबकि ABVP ने बयान दिया था कि कार्यक्रम परमिशन के बिना किया गया था और विरोध करने वालों ने कोई आपत्तिजनक नारा नहीं लगाया था.

महाराष्ट्र सरकार ने अब प्रिंसिपल से जवाब मांगा है. प्रिंसिपल परदेसी जी का कहना है कि "टाइपिंग में गलती" हो गई थी.
कई संगठनों ने इस घटना के खिलाफ प्रदर्शन किया है.

दिलीप मंडल की फेसबुक वाल से

Saturday, 19 March 2016

मुसलमान उर्दू लेखकों को बताना होगा, किताब सरकार या देश विरोधी तो नहीं

नई दिल्ली, 19 मार्च  केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले उर्दू भाषा के प्रचार के लिए राष्ट्रीय समिति (एनसीपीयूएल) ने एक फॉर्म जारी किया है, जिसमें लेखकों को हर साल इस बात की घोषणा करनी होगी कि उनकी किताब सरकार या देश के खिलाफ नहीं है।


अंग्रेजी समाचार पत्र में छपी खबर के अनुसार, पिछले कुछ महीनों से कई लेखकों और संपादकों को ऐसे फॉर्म मिले हैं, जिसमें उनको दो गवाहों के हस्ताक्षर भी उपलब्ध कराने को कहा गया है। वह फॉर्म उर्दू में लिखा गया है। जिसमें लेखक को बताना है कि एनसीपीयूएल के आर्थिक सहायता योजना के तहत अत्यधिक मात्रा में उनकी जिन किताबों या पत्रिकाओं को खरीदने का जो निर्णय लिया गया है,


उसमें सरकार की नीतियों या राष्ट्रहित के खिलाफ कुछ भी नहीं है, और न ही उससे देश के विभिन्न समुदायों के बीच विद्वेष फैलता है, और न ही उसे सरकारी या गैर सरकारी संस्थाओं से आर्थिक मदद प्राप्त है। उसमें चेताया गया है कि अगर घोषणा पत्र में किए गए दावे गलत पाए जाते हैं तो एनसीपीयूएल उस लेखक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकता है और आर्थिक सहायता वापस ले सकता है। एनसीपीयूएल के निदेशक इर्तेजा करीम का कहना है कि अगर कोई लेखक सरकार से आर्थिक मदद चाहता है तो किताब में सरकार के खिलाफ कंटेंट नहीं होना चाहिए।


 एनसीपीयूएल एक सरकारी संस्था है और वे लोग सरकारी कर्मचारी हैं। हम सब सरकार के हितों का संरक्षण करेंगे। उन्होंने बताया कि एक साल पहले परिषद सदस्यों की एक बैठक में इस घोषणा पत्र के संदर्भ में निर्णय लिया गया था। हमारे पास इतने कर्मचारी नहीं हैं कि हर किताब की हर पंक्ती को पढ़ा जा सके, ऐसे में यह फॉर्म हमारी मदद करती है।

उन्होंने बताया कि पिछले साल पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम के बारे में एक किताब में गलत सूचना दे दी गई। उन्होंने कहा कि कलाम एक राष्ट्रीय व्यक्तित्व हैं, उनसे संबंधित गलत सूचना राष्ट्रीय मुद्दा बन सकता है। हमलोग सब चीजों के लिए जिम्मेदारी नहीं ले सकते हैं।





Thursday, 17 March 2016

किसी भी मूल निवासी भारतीय को भारत माता की जय नहीं बोलना चाहिए यह एक राजनैतिक और सांस्कृतिक षड्यंत्र है , न कि देशभक्ति

 जन उदय : सबसे पहले तो इस बात को समझ लेना चाहिए की  किसी ख़ास नारे को लगा कर न तो कोई देशभक्त हो  जाता है  और न  लगाने पर देशद्रोही . क्योकि सिर्फ नारों से देश नहीं चलता  और न ही शासन वाव्य्स्था  बल्कि उन नारों को उन विचारों को अमल में लाने से देश चल सकता है , हमारे देश का सबसे बड़ा  नारा हमारे देश के सविंधान की प्रस्तावना है .

अब सवाल यह है की जो लोग देश के सविंधान का अपमान करते है देश के कानून को नहीं मानते  कभी मस्जिद  , कभी गोमांस , कभी  आरक्षण ,  के नाम पर देश में अराजकता का माहोल बनाए हुए है  देश में दंगे करवा रहे है , कत्ल करवा रहे है  वो लोग देश भक्त कैसे हो गए ??

इसके अलावा  भारत माता के स्वरुप  की कल्पना या तस्वीर  जो प्रस्तुत की जाती है  वो अपने आप में  षड्यंत्र कारी  है ये एक राजनैतिक  और सांस्कृतिक  षड्यंत्र है , जिसको इंडिया टुडे  के पूर्व  सम्पादक श्री दिलीप मंडल  ने ऐसे समझाया है “” एक तो उस महिला के हाथ में राष्ट्रीय झंडा नहीं है. उसने भगवा झंडा पकड़ रखा है. उसकी देशभक्ति संदिग्ध है. देशभक्त होती, तो हाथ में राष्ट्रीय झंडा होता, जिसे हर देशवासी गर्व से थामता है.

दूसरे वह सिर्फ संस्कृत बोलती और समझती हैं. सिर्फ संस्कृत में उसकी वंदना गाई गई है.
तीसरे, वह नैनो, नक्श और रंग रूप से भारतीय कम और यूरोपीय ज्यादा लगती है. भारतीय लोगों का एवरेज स्किन कलर गेहुआं है.

श्रीलंका, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश की संप्रभुता का मैं आदर करता हूं. आरएसएस की बनाई भारत माता की फोटो से पड़ोसी देश से रिश्ते खराब होंगे.
श्री  दिलीप  मंडल  अंत में कहते है की “”   राष्ट्रीय झंडे के सम्मान के साथ मैं कोई समझौता नहीं कर सकता. आप करेंगे क्या? 

तो अब जो लोग देशभक्ति  के बाते करते है  क्या वो लोग बतायंगे  की भारत माता  के हाथ में  राष्ट्रिय  झंडा  क्यों नहीं है ??  वह क्यों  भारतीय जैसी  नहीं लगती ???

इसका मतलब साफ़ है  की ये तस्वीर विदेशी हमलावर ब्राह्मणों / आर्यों की संस्कृति को बढ़ावा देने वाली है  न की देशभक्ति  सिखाने  वाली 

Friday, 11 March 2016

देशदोह की संस्कृति सिखा रहे है श्री श्री रवि शंकर विश्व संस्कृति महोत्सव के नाम पर पर


स्वयं घोषित विश्व शांति दूत और विश्व शांति गुरु श्री श्री रवि शंकर का विश्व  संस्कृति महोत्सव अपनी कार्य प्रणाली की वजह से विवादों में है ,  इस समारोह को यमुना  की रखवाली में लगे विभागों से पूर्ण रूप से मंजूरी नहीं मिली थी , बल्कि कुछ विभागों ने इसे गैर कानूनी भी ठहराया   क्योकि इससे यमुना के आस पास और यमुना के  वेजी सिस्टम  और इको सिस्टम को खतरा है  और यमुना को बर्बादी की कगार पर खड़ा कर दिया है .

इन विवादों के चलते नेशनल ग्रीन   त्रुबनल ने श्री श्री रवि शंकर पर पांच करोड़ का   जुरमाना भी
लगाया है  जिसे श्री श्री रवि शंकर ने देने से मना कर  दिया है

बड़ी दिलचस्प बात यह है की श्री श्री रवि शंकर ये समारोह दुनिया के सामने भारत की संस्क्रती को रखने की बात कर रहे है , अब  इन जनाब से ये कोई पूछे की आप किस तरह की संस्कृति को  विश्व को सिखाना  चाह   रहे है वो कैसी   संस्कृति है ??

श्री  श्री रविशंकर  अपने देश के कानून की इज्जत नहीं करते , सविंधान की इज्जत नहीं करते  तो इससे बड़ी बात क्या हो सकती है ??  क्योकि किसी भी देश का कानून उस देश का सविंधान ही वहा की राष्ट्रीय संस्कृति को निर्धारित करता है  उसका निर्माण करने में साहयक होता है , और श्री श्री रवि शंकर उसी सविंधान और कानून का मजाक बना रहे है , 

नेशनल ग्रीन त्रुबनल  ने श्री रवि शंकर पर  पांच करोड़ का जुर्माना किया है और यह ताकीद दी है की समारोह के शुरू होने से पहले श्री रवि शंकर  इस जुर्माने की अदायगी करे , लेकिन सत्ता के नशे में  चूर श्री श्री रवि शंकर  जो की नरेंद्र  मोदी , भाजपा  और संघ के समर्थक और घटक दल के है  इन्हें इस बात से कोई फर्क ही नहीं पड़ता  है की ये कितना बड़ा अपराध कर रहे है .

सवाल न्याय  का और रवि शंकर के मौलिक अधिकारों का भी है लेकिन इस तरह की प्रक्रिया  जहा पर रवि शंकर देश के कानून को धत्ता  बता   रहे है और नेतिक रूप से एक देशद्रोह वाला उधाहर्ण पेश कर रहे है जो सरासर गलत है गैरकानूनी  है  अनैतिक है  श्री रवि शंकर के इस अपराध से देश में ही नहीं दुनिया में गलत संदेश  जाएगा , इनको ये समझ लेना   चाहिए की ये देश   इनकी  निजी सम्पति नहीं है

और वैसे भी  श्री श्री रवि शंकर  भारतीय संस्कृति  के नाम पर ब्राह्मण संस्क्रती को फैला  रहे है




Friday, 4 March 2016

कन्हय्या ने नरेंद्र मोदी और सिम्रिति इरानी को साबित कर दिया बौना और टुच्चा


पिछले दिनों पुरे देश में आर एस एस  और आर एस एस के के चमचे और जूते चाटने वाले मीडिया संस्थानों ने   फर्जी विडियो के जरिये जे एन यु की खिलाफ जो माहोल बनाया  उसके  बारे में सब जानते है , पुरे देश में संघ और उसके समर्थक हिंसक डालो ने बवाल मचा  कर रख दिया  और ये साबित करने में लगे रहे की वो सबसे बड़े देशभक्त है और देश को बचाने का सारा   भार उनके सर पर आ गया है .


जे एन यु छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हया को देशद्रोह के   अपराध में जेल जाना पड़ा
लेकिन ये बात सभी जानते थे की कन्हया  बेकसूर है और उसके खिलाफ एक माहोल बनाया जा  रहा है  बल्कि उसके खिलाफ ही नहीं जे एन यु को बदनाम किया जा रहा है
सवाल यह है की रोहित वेमुला और उसके बाद कन्हया के खिलाफ  ऐसा क्यों किया जा रहा है , इसका सीधा सा  जवाब है की रोहित और कन्हया ब्राह्मणवाद के खिलाफ आवाज उठाता था और हिन्दू मुस्लिम सोहार्द की बात करता था , वो बात करता था गरीबो की मजदूर की   और सबसे बड़ी  बात आर एस एस  के हर षड्यंत्र  के खिलाफ आवाज  उठाता  था .

जेल से आने के बाद कन्हया ने जो भाषण दिया है जिसमे उसने मोदी , सिम्रिति  इरानी  को बौना  साबित कर  दिया है  मोदी की हर बात का  और स्टाइल की  धज्जिया  उड़ा  दी  मोदी  ढोंगी   है पाखंडी  है  और  संघ इस  देश  का   सबसे बड़ा गद्दार  है 

Thursday, 3 March 2016

शिल्पी , सिम्रिति ईरानी ,और न्यूज़ चैनल सब पर हो कार्यवाही जे एन यु षड्यंत्र के लिए

नई दिल्ली। जेएनयू में  संघ ए बी वी पी  के द्वारा रचित षड्यंत्र में जिन नारों की बात हो  रही है  अब उस विडियो के बारे में रोज  नए खुलासे हो रहे हैं। इस मामले में अब एचआरडी मिनिस्टर स्मृति ईरानी की करीबी सहयोगी शिल्पी तिवारी की भूमिका निशाने पर आ गई है।
दिल्ली सरकार की फॉरेंसिक रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में डॉक्टर्ड किए गए वीडियोज में से एक को शिल्पी के ट्विटर अकाउंट पर होस्ट किया गया था। इस रिपोर्ट में कम से कम तीन वीडियो को संदिग्ध बताया गया है और इसमें से क्यू2 नामक वीडियो का संबंध तिवारी से बताया गया है।

एक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक क्यू 1 और क्यू 2 रिकॉर्डिंग में लिप सिंक में फर्क नजर आया है। इससे पता चलता है कि ऑडियो स्ट्रीम ओरिजनल रिकॉर्डेड वीडियो का हिस्सा नहीं है। इसलिए वीडियो में सुनाई देने वाली बातचीत प्रामाणिक नहीं है और वह कहने वालों की असल स्पीच से मेल नहीं खाती।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि क्यू 2 रिकॉर्डिंग का संबंध शिल्पी तिवारी के ट्विटर अकाउंट से है। रिपोर्ट के मुताबिक क्यू1 और क्यू 2 वीडियो अलग अलग सोर्स से लिए गए हैं, जिनको इस मकसद से एक दूसरे से मिला दिया गया है कि रिकॉर्डिंग असल कार्यक्रम की नजर आए।

अब सवाल यह है की शिल्प के अलावा सिम्रिति इरानी के  खिलाफ तो कार्यवाही होनी ही चाहिए साथ में वो सभी न्यूज़ चैनल भी पाप  के भागीदार है जिन्होंने  भाजपा के साथ मिल कर इस षड्यंत्र को अंजाम  दिया


Sunday, 28 February 2016

संसद में सिमृती इरानी का महिसासुर ब्यान देश में जातिय दंगा शुरू हो सकता था


जन उदय : इस वक्त भारतीय जनता पार्टी शासन वाव्य्स्था के सभी फ्रंट पर फेल हो चुकी है उसकी समझ में नहीं आ रहा है की वो आने वाले चुनावों में अपना क्या मूह लेकर जाए

चुनाव में जो वादे कर के आये थे उन वादों को भाजपा खुद नकार चुकी है वह भी यह कह कर की ये सब चुनावी जुमले थे , काला दान आया नहीं महंगाई कम नहीं हुई बेरोजगारी घटी नहीं स्मार्ट सिटी , बुलेट ट्रेन ये ऐसे चीजे है की भविष्य में हुई न हुई हाँ इनको एक सपने के रूप में देखा जा सकता है , लेकिन सपनों से आम आदमी का पेट नहीं भरता , आम आदमी विकास के साथ जीना चाहता है , वह उसे अपने सामने साकार होता देखना चाहता है , जो मोदी सरकार के बसका नहीं
यही कारण है की भाजपा यानी मोदी के गुर्गो ने ऐसे ऐसे कारनामे करने शुरू कर दिए है जो लोगो का ध्यान देश की समस्याओं से खींच कर कही और ले जाए ताकि भाजपा आने वाले बंगाल , पंजाब उत्तर प्रदेश , तमिलनाडु चुनाव में प्रवेश कर सके दादरी , गोमांस मद्रास आई आई टी पुणे फिल्म स्कूल , और सबसे बड़ा मुद्दा रोहित वेमुला की संस्थागत हत्या



दरअसल रोहित वेमुला और जे एन यु के वारदातों से जिनमे ब्राह्मणवाद को चुनोती दी जाति थी , के जरिये स्वर्ण वोट को एक तरफ करना है , इन मसलो की ख़ास बात की जे एन यु और हैदराबाद विश्वविद्यालय की घटनाओं को भाजपा ने उठाया तो सही लेकिन छात्र समस्या को लेकर सही बात मीडिया के जरिये आम लोगो के सामने नहीं आने दी

जैसे जे एन यु और रोहित मूल रूप से एक बात के खिलाफ थे वो था ब्राह्मणवाद , जिसमे वो लोग महिसासुर जयंती भी मनाते थे

भाजपा ने इस मुद्दे को और देशद्रोह के मुद्दे को जम कर भुनाया लेकिन अंत में भाजपा और मैडम इरानी झूटी साबित हुई .

भाजपा यह भी मान रही है की अगर देश के स्वर्ण हिन्दू एक तरह हो कर उनके साथ आ जाए तो इनका भारत पर कब्जा हो जाएगा क्योकि स्वर्ण दलितों को मार पीट कर डरा कर अपने साथ कर लेगा , यही कारण था की मैडम इरानी ने यह सोचे बिना की देश जातिय दंगो की चपेट में आ सकता है संसद में जानबूझ कर यह ब्यान पड़ा की जे एन यु में जब महिसासुर की जयंती मनाई जाती है तब दुर्गा को एक वेश्या के रूप में पेश किया जाता है . मैडम इरानी के इस ब्यान का खंडन और निंदा सभी जाति और पार्टी के लोगो ने की क्योकि ये भारत के इतिहास में इस तरह की ब्यान बाजी संसद में पहली बार हुई जिसकी वजह से संसद शर्मसार हुई , लोकतंत्र शर्मसार हुआ

मैडम इरानी शायद ये भूल गई की एम् पी छतीसगढ़ ,ओड़िसा , बंगाल ,बिहार आदि के आदिवासी इलाको में महिसासुर को देवता के रूप में पूजा जाता है ,तो कोई समाज अपने देवता को राक्षस के रूप में कैसे स्वीकारेगा , दूसरी बात भारत में जातिय दंगे सिर्फ और सिर्फ दलितों का ही फायदा करेंगे और भाजपा संघ जैसी पार्टी का इस देश से अंत हो जाएगा

आर एस एस पुरे देश को अपना सांस्कृतिक गुलाम बनाना चाहता है


यह बात किसी से छिपी  नहीं  है  की  भारत का सविंधान न सिर्फ अभिव्यक्ति की आजादी  देता है बल्कि हर जाति  , समुदाय , धर्म के लोगो को अपने रीती रिवाज आस्था के  साथ सम्मानीय जीवन जीने की भी आजादी मौलिक अधिकारों में देता है .
आर एस एस  जो  की ब्राह्मणों का एक अतिवादी संघठन है अपनी स्थापना  से ही देश में धर्म और संस्कृति के नाम पर लोगो को बरगलाता आया है , देश  में होने वाले आज तक तक सभी दंगो में सीधा  उलटे  तरीके से संघ का हाथ   रहा है .
कभी गंगा बचाओ , कभी मंदिर , कभी गोमांस  कभी महिसासुर , कभी देशद्रोह के नाम पर संघ ने देश में न सिर्फ तनाव पैदा किया है बल्कि देश को  भाषा और संस्कृति के नाम पर  बांटने का काम किया है .

हाल ही में हैदराबाद केन्द्रीय विश्वविध्यालय में दलित छात्रो पर जो प्रशासनिक जुल्म हुए जिसकी वजह से रोहित वेमुला नाम के दलित छात्र को आत्महत्या करनी पड़ी  , इन  छात्रो  से संघ को सिर्फ इसलिए परेशानी   थी कि  ये छात्र अम्बेडकरवादी सन्घठन से जुड़े थे और हमेशा सभी के लोकतांत्रिक हको के लिए आवाज उठाते  थे , ब्राह्मणों द्वारा फैलाई जा  रही कुत्सित और घ्रणित विचारधारा के खिलाफ  थे , विश्विध्यल्या में गोमांस खाने की आजादी की बाते करते क्योकि ये एक बहुत बड़े समुदाय की खान पान संस्कृति से जुडी थी , लेकिन संघ  की  विचारधारा  के  लोग हमेशा इस बात के खिलाफ  थे और वो गोमांस खाने को देशद्रोह से जोड़ कर देखते  थे  संघी  ये भी बताते  थे की  यह ब्राह्मणों  का पवित्र पशु  है  और ये इश्वर का वरदान  है .. लेकिन शोध आदि  से यह  भी  पता  चल गया  की  प्राचीन काल में स्वव्म  ब्राह्मण गोमांस  खाते   थे  बल्कि मारकंदय  पुराण में  तो यहाँ तक  बताया  गया  है कि मृत  पितरो  को गोमांस अर्पित करने से वो बहुत तृप्त  हो  जाते  है . . इसके अलावा  बहुत सारे और दृष्टांत   ब्राह्मण द्वारा  रचित ग्रंथो में मिल जाएंगे  
तो आज इन  बातो  के  लिए  संघ  का  यह आतंकी    रवेय्या  क्यों  ??
इससे पहले मंदिर के नाम पर  गुजरात में मुंबई में हम बहुत खून खराबा  देख  चुके  है , कोई कहे  नहीं  लेकिन तीस  सबके दिल में  .
यही  हाल  जे एन यु  में  हुआ   जहा छात्रो  को देशद्रोह के जूठे  आरोप लगा कर जेल में दाल  दिया   गया  है

सवाल  यह  है  की  क्या कोई  भी व्यक्ति , समुदाय ,अगर समाज में फैली बुराई  के खिलाफ अगर बोलेगा  तो  क्या उसे देशद्रोही कहा जाएगा ?? या सीधा सीधा  कहे  कि अगर ब्राह्मणों  द्वारा  फैलाई जा  रही मानसिकता के  खिलाफ बोलेगा   तो वह  देशद्रोही  होगा ?? क्या इस  तरह ब्राह्मण  इस  देश  को  अपना सांस्कृतिक  गुलाम  बनाना  चाहता  है ??   और जो नहीं  मानेगा  वो  देशद्रोही  होगा  , ऐसे कई  लेखक , कलाकार  है   जिनकी हत्या संघ करवा चुका  है  
आज  संघ के पास  देश की  कमान  है  यानी ये  लोग सत्ता  में है  इसका मतलब  यह  नहीं  की  ये  लोग हमेशा  के लिए  सत्ता  में आ चुके  है  समय और लोकतंत्र  का पहिया  हर तानाशाह को कुचल  देता  है संघ को भी कुचल देगा    और जब  ये  लोग  सत्ता  में  नहीं  होंगे  तब इनके लिए बहुत मुश्किल  होगी .  इसके  अलावा इन  लोगो को ये बात  अपने मन  में बिठानी  ही होगी  की  ये  देश  किसी  का गुलाम  नहीं  है


ये  बात  अलग  है की विदेशो  से आये आर्य /  ब्राह्मण एक समय आने पर  कत्ले आम करके इस  देश  के शासक  बन  गए  और यहाँ के  मूलनिवासी लोगो  को अपना सांस्कृतिक  गुलाम बना लिया  अपने  लिए   ग्रन्थ  लिख  लिए   की  उन्हें  भगवान्  ने भेजा  है  आने  वाली नसले गरीब कमजोर , निरक्षर   रहे  और उनकी अज्ञानता  का फायदा  ब्राह्मणों  को  मिलता  रहा लेकिन  आज  तो  ये  मूलनिवासी पड़ लिख  गए  है और अपने इतिहास को  जानने  लग गए  है , दूसरी  बात अगर  आपको  अपने रीती रिवाज की  इतनी  परवाह  है   तो  आप  कैसे किसी  दुसरे  जाति  धर्म  के  बारे  में अपमानजनक बाते  कह  सकते   है  ??? सबसे   पहले   ब्राह्मणों  को   अपने  आपको  सुधारना  होगा  और  इस   देश  को  अपना सांस्कृतिक   गुलाम  समझना  बंद  करना  होगा   तभी   इनका  भविष्य  इस  देश  में सुरक्षित  रहेगा  , क्योकि  ताकतवर , अत्याचारी कभी   सलामत  नहीं   रहे  , इतिहास   गवाह  है