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Monday, 11 December 2017

मोदी को गुजरात में हार का डर , उतर आये संघी स्टाइल के घटिया स्तर पर , हार्दिक, राहुल की रैलियो पर गैरकानूनी रोक


जन उदय : नरेंदर मोदी को गुजरात में हार डर  सता रहा है , और यही कारण है की ऐसा लगता है जैसे मोदी अपना मानसिक संतुलन खो बैठे है और अंट शंट ब्यान  और आरोप  लगा रहे है , यह बात गोरतलब है की  गुजरात को भाजपा को गड कहा  जाता रहा है  ,गुजरात में भाजपा किसी भी तरीके से सिर्फ जित हांसिल  करना चाहती है , यह  चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है की इस चुनाव को २०१९ का सेमी फाइनल  भी कहा जा रहा है


यह बात पहले से ही उठ रही है कि ..देश का का लोकतंत्र खतरे में है इसके प्रमाण हर चुनाव में उबर कर सामने आ रहे है ९ दिसम्बर २०१७ को जब गुजरात में चुनाव हुए तो दो बात विशेष रूप से सामने आई ई वी एम् की पहली ये वाई फाई से कनेक्ट हुई बल्कि गड़बडियो की एक लम्बी फेहरिस्त सामने आ गई यही नहीं सबसे बड़ा कमाल तो यह रहा की दोपहर दो बजे तक गुजरात में सिर्फ ३० प्रतिशत वोटिंग हुई लेकिन दो बजे से लेकर चार बजे के बीच ६० प्रतिशत वोटिंग हो गई ये सिर्फ दो घंटे में ३० प्रतिशत वोटिंग यह अपने अप में चकित करने वाली बात है अब यह अनुमान लगाए जा रहे है की जो भाजपा गुजरात , मध्य प्रदेश , छत्तीसगढ़ में चुनाव जीतती आ रही थी वे भी ई वी एम् की मेहरबानी से थे ,


सबसे बड़ी बात की मोदी और भाजपा में हार का इतना डर  बैठ  गया है की गुजरात में राहुल गाँधी , जिग्नेश मेवानी , हार्दिक पटेल  के रोड शो  पर कानून  वाव्य्स्था का हवाला दे कर  रोक लगा दी गई है .

यह रोक  गैर कानूनी है जिसे  कानून के फारमे में दिखाया जा रहा है 



bjp scared of defeat in gujrat ,evm scam 

Saturday, 7 May 2016

रोहित वेमुला , डेल्टा और जीशा की हत्या के लिए न्याय के आन्दोलन को खत्म करना चाहते है वामपंथी छात्र आन्दोलन


जन उदय : अगर हम १९४७ के पहले के वामपंथी आंदोलनों का सही सही विवेचना करे तो हम  पायंगे की वामपंथी आन्दोलन की इन वामपंथी आंदोलनों का मुख्य उदेश्य  दलित आंदोलनों को खत्म करना था कमजोर करना था न की समाज में एकता , समानता और समाजवाद लाने में इनकी कम दिलचस्पी बहुत कम थी  बल्कि यु कहे ये आन्दोलन दलित आन्दोलन को कजोर करने के षड्यंत्र थे

आजादी के बाद भी दलित आन्दोलन सिर्फ इसलिए कामयाब नहीं हो पाए क्योकि ये लोग दलित युवाओं को समानता और समाजवाद के नाम पर भ्रमित करने में कामयाब रहे सारे के सारे दलित युवा हमेशा इनके पीछे  लगे रहे  , दलित  युवा ये कभी नहीं समझ पाए कि  इन वामपंथी आंदोलनों में सिर्फ और सिर्फ ब्राह्मण  और  उच्च  जातिय  मुसलमान ही क्यों शीर्ष पर रहे .. कभी भी इन आंदोलनों में दलित आगे नहीं आये जबकि ये सारे आन्दोलन चलते रहे दलितों के नाम पर गरीबो के नाम पर

कुल मिला कर  ये वामपंथी लोग दलितों को अपने आन्दोलन के लिए इंधन की तरह इस्तेमाल करते रहे लेकिन दलितों को कभी उनका हक नहीं मिला

 हाल ही में हैदराबाद  सेंट्रल यूनिवर्सिटी में रोहित वेमुला की संस्थानिक  हत्या ने दलित आन्दोलन ने  पूरी दुनिया  को हिला दिया था , पूरी दुनिया में इस हत्या की निंदा  हो रही थी .. ये वामपंथी कभी भी रोहित वेमुला के जिन्दा रहते कभी दलित छात्रो के साथ नहीं आये लेकिन रोहित वेमुला की हत्या से फायदा उठाने तुरंत आ गए


जब आन्दोलन कम न हुआ तो वामपंथी छात्र ब्राह्मणों के इशारे पर कन्हिया को लेकर एक अन्य षड्यंत्र को जन्म देने लगे इसके बाद यही हुआ यानी जे एन यु षड्यंत्र जिसके बाद रोहित वेमुला की हत्या को लोग भुलाने लगे .. इसके बाद डेल्टा मेघवाल का 
बलात्कार और हत्या हुई  जैसे ही डेल्टा आन्दोलन ने टूल पकड़ा  फिर जे एन यु में एक और षड्यंत्र हुआ उसमे भी वामपंथी  यानी कन्हीय्या  आगे आ गया  इसके बाद जीशा की हत्या और बलात्कार के मसले को फिर जे एन यु ने दबा दिया और अब फिर दुबारा से इसी तरफ आगे बढ़  रहे है . यानी कुल मिला कर दलित आन्दोलन को कमजोर करना सिर्फ यही है वामपंथी आन्दोलन का मकसद  वामपंथी यानी ब्राह्मणों का एक और संघठन 

वो दलित नेता जिनकी बहन और बेटी के बलात्कार के बाद भी सत्ता के लालच में नहीं खोला अपना मूह , जानिये कौन कौन है वो ??

जन उदय :  क्या आपने ऐसे लोग देखे है जो पैसे और सत्ता के लिए अपनी बहन बेटी को भी दाव पर लगा दे , उन्हें बेच दे , या किसी को उनकी इज्जत के साथ खिलवाड़ करने दे , या उनका बलात्कार भी हो जाए तो तो कुछ पैसे या सत्ता में कुछ पद  ले कर चुचाप बैठ  जाए ??? शायद नहीं देखे होंगे या देखे होंगे या सुने होंगे तो सालो के बाद कही कोई या शायद बिलकुल नहीं 

लेकिन आजकल दलित नेता ऐसे है जिन्होंने नीचता की हद पार कर दी है ये लोग पैसे और सत्ता के इतने भूखे हो गए है जिन्हें अपने परिवार और रिश्तो तक की बली चड़ा  दी है शायाद इसे कहते है इंसानियत का मर जाना या आँख का पानी मर जाना
आप सभी सोचंगे की ऐसे नेता कौन है ?? क्या ऐसा सचमुच हुआ है , ?/  

बिलकुल ऐसा  ही हुआ है और जितने भी दलित नेता है सबने ये काम किया है क्योकि एक तरफ ये दलित नेता दलितों के नाम पर वोट लेते है या सत्ता में हिस्सा लेते है है और दलित लोग भी इसी उम्मीद में इनको चुनते है की ये लोग आगे जा कर इनके दुःख दर्द्द में भागी बनेंगे अगर कोई मुसीबत आयगी तो ये नेता इनका साथ देने आयंगे , क्योकि दलित  होना अपने आप में सजा  है  तो शायद ये लोग इनका दर्द समझेंगे और इनके बीच एक रिश्ता होता है , इंसानियत का भाईचारे का  और दलित होने का
लेकिन ये दलित नेता सिर्फ अपनी कुर्सी संभालने में लगे है , 


पुरे देश में दलितों की हत्याए  हो रही है लडकियो के बलात्कार हो रहे है लेकिन ये नेता कुछ नहीं बोलते

डेल्टा , और जीशा  के बलात्कार  और हत्या ऐसे मामले है जिससे दलितों को एकदम सचेत हो जाना चाहिए  और आंदोलित हो जाना  चाहिए क्योकि अब ब्राह्मणों ने नई  रणनीति  अपना ली है दलितों को फिर से गुलाम बनाने  के लिए , सबसे पहले की शिक्षा  छीन ली जाए दलितों से दूसरा  पढ़े  लिखे और मेधावी  दलित  छात्र  छात्राओं  की    हत्या  यानी जल्द पतन

अब दलितों के उपर है की वो लोग सबसे पहले इन दलित  नेताओं को जूता  मारते   है या इनको  अपनी दलाली  के लिए छोड़ते  है


Monday, 4 April 2016

जूते भी साफ़ किये टट्टी सिर पर ढोई ,लेकिन ब्राह्मणों की तरह देश से गद्दारी नहीं की मधु मिश्रा एक राजनैतिक वेश्या है


जन उदय : मधु मिश्र जो भारतीय जनता पार्टी की महिला मोर्चे की अध्यक्ष है इनको शायद ब्राह्मणों  का इतिहास नहीं मालूम है की किस तरह  ब्राह्मणों  ने इस देश से गद्दारी की है ,वैज्ञानिक तौर  पर साबित हो चुका है की ब्राह्मण विदेशी हमलावर है लेकिन बावजूद इसके इस देश ने इनको खाने को दिया , रहने को जगह दी , पहनने को कपडे दिए  लेकिन इनकी फितरत हमेशा गद्दार और लुटेरे की बनी रही  जो आज भी बनी हुई है ,

भाजपा की महिला मोर्चा अध्यक्ष मधु मिश्रा जिस परसुराम समारोह में बोल रही थी दरसल इस परसुराम का  असली नाम पुष्य मित्र शुंग  था जो  सम्राट अशोक के पोते के वक्त उसका सेनापति था , इसने धोके से अशोक के पोते को मार सत्ता  हथिया  ली और इसके बाद इसने दलितों और बौध  लोगो की हत्या करना शुरू कर दिया , यहाँ तक की इसने गर्भवती बौध महिलाओं के पेट फाड़ कर उनके बच्चे को निकाला और फिर उसकी हत्या  की , 


यही नहीं  भारत में जो भी मंदिर  नजर आते है जिन्हें ब्राह्मण अपने भगवानो के मंदिर बताता है वे भी बौध मठो को तोड़ कर  ही बनाए गए है  जिसका स्स्बूत यह है की जब बाबरी मस्जिद को तोडा  गया तो उसके निचे से कोई  ब्राह्मण देवी देवता की नहीं बल्कि बौध  मुर्तिया ही निकली है


यहाँ तक की आज भी खुदाई में सिर्फ बौध विहार और मठ मिलते है न की कोई मंदिर  जिससे ये साबित हो जाता है की इस देश में मंदिर थे  ही नहीं
मुस्लिम काल में भी ब्राह्मणों ने अपनी जान बचाने के लिए मुस्लिम राजाओं का ही साथ देना बेहतर समझा इस बारे में काफी शौध सामने आये है की गैर इस्लामी लोगो पर लगने वाला जाजिया  कर ब्राह्मणों पर नहीं लगता था क्योकि ये मुस्लिम राजाओं से फ़रियाद करते थे की ये कर  ब्राह्मणों पर न लगाया जाए  क्योकि ब्राह्मण भी मुस्लिम की तरह विदेशी है

इसके बाद ब्रिटिश शासन काल में तिलक  सावरकर , गोविलकर , अटल बिहारी बाजपाई ये  ऐसे लोग है जो अंग्रेजो की मदद करते थे  और उनको शासन  चलाने में साथ देते थे , इसके साथ ही अंग्रेजो के लिए मुखबरी का भी काम करते थे ,
आई सी एस परीक्षा में १७ में से १६ ब्राह्मण हुआ करते थे ,  इसलिए १९४७ के बाद ये हमेशा उच्च पदों पर रहे  और अन्य सवर्णों को राजनीती में साहयता  दी  और देश को लूटना जारी रखा

इसका एक बेहतरीन उधाह्र्ण देखिये  “” एक संसदीय क्षेत्र  के विकास के लिए जिसमे स्कूल , डिस्पेंसरी , अस्पताल , कोलेज , सडक , बिजली अगर देना हो तो कितना  समय लगेगा ??  तो कोई भी साधारण  व्यक्ति कह सकता है की हद से हद बीस साल , लेकिन ये सब चीजे आज भी हमारे देश में उपलब्ध नहीं है ?? कारण   यह है की इन ब्राह्मणों ने ही विकास का सारा पैसा खा लिया  और इसे नाम दिया भ्रष्टाचार का , जब की यह विषय सबसे बड़े  देशद्रोह का होना चाहिए
इन बातो से साबित हो जाता है की ये सबसे बड़े  देशद्रोही है , गद्दार है , ये लोग जब तक शासन में रहंगे  या इस देश में रहेंगे  इस देश से गद्दारी करते  रहेंगे , कभी कांग्रेस  ,बन कर कभी भाजपा  बन कर कभी वामंपथी  बन कर

 मधु मिश्रा   का ब्यान “”उत्तर प्रदेश में भाजपा की महिला मोर्चा अध्यक्ष मधु मिश्रा ने एक विप्र समारोह में लगातार लगातार सजग और शिक्षित होते दलित समाज के आगे बढ़ने पर अपनी टीस जाहिर की। ब्राह्मणों के कार्यक्रम में उन्होंने दलितों को निशाना बनाते हुए कहा कि जो कभी तुम्हारे जूते साफ करते थे


 वे आज संविधान के सहारे तुम्हारे ही सिर पर बैठकर राज कर रहे हैं। यह बयान उन्होंने अलीगढ़ के रामलीला मैदान में आयोजित विप्र सम्मेलन व होली मिलन समारोह में दिया। उन्होंने कहा था, ''साथियो आप सब यहां बैठे हैं। यहां कुछ विप्र बंधुओं के अलावा भी लोग बैठे हैं। मैं उनसे क्षमा चाहती हूं। आज तुम्हारे सिर पर बैठ कर संविधान के सहारे जो राज कर रहे हैं। याद करो, वो कभी तुम्हारे जूते साफ किया करते थे। आज तुम्हारे हुजूर हो गए हैं। क्यों? क्योंकि हम बंट गए। हम विभाजित हो गए।''