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Sunday, 24 June 2018

Sri Sri Ravi Shankar most dangerous Hate Spreader psychic


Maintaining  peace and harmony amongst  highly diversified society cannot be handled   , guided  by the Law and Order  alone , the peace and progress  is guided  and supported by   its people  ,democratic institutions and   the parallel  social group .

But In India every thing seems moving in reverse  and deviant direction , allegedly  called  or self styled saint or sadhus  have been trying to break  the society in the name of Caste  and religion .
Sri Sri Ravi Shankar a   secret agent of Orthodox  segment of the Indian Society who  proclaimed to be the Sons and daughter of God had come out from the mouth of Brahma  Creator of the Universe has been spreading the word of Hate by saying that Reservation  for the poor and weaker section of  the Indian society  can invoke the revolt in Indian society .

Perhaps ignoring the very facts  and statistics of India  that 85 % of the Indian People comes under Reservation and these 85 % people gets  only  51 % of the total stake whereas 15 % upper  caste enjoy  fearlessly  and by hook and crook    85 % of the total jobs in all government and Semi government organizations   recent statement by Ravi Shankar  and earlier  statement  on Babri Mosque  reflect the same  thing

Ravi Shankar is the Man who  work worldwide for Yoga and Peace  through his organization  the Art of Living  perhaps befooling people of world

Even on the thousands of pray and petitions  by the suppresses group of Indian Society dominated castes  i.e upper caste  who is handling everything in polity , judiciary forcefully  and lawlessly ignoring the demands of 85% people of the land and eating the stakes of poor people .

See the very interesting things that these same Ravi Shankar and hislike people and groups  always demand  the diversity and equity abroad  , like USA , Canada , Europe  and everywhere  but  the same people they  look at India  they support lynching of Low Caste people , they support  caste terrorism  they fund   the movements against the Muslims

Now a days  Ravi Shankar has become the Biggest Hate spreader in India

Who says 15 % people will Revolt against 85 % landless , Poor  weaker People of India

Who says India will Become Syria if Temple is not  built in Ayodhya

Who Says Caste system and attached atrocity is  the message of God
   

Friday, 23 February 2018

उत्तर प्रदेश में अपराध मुक्ति के नाम पर जातिय नरसंहार . हिन्दू नाम गुमराह समझे भगवा चरित्र को

उत्तर प्रदेश में  अपराध मुक्ति के  नाम पर जातिय  नरसंहार . हिन्दू नाम गुमराह समझे भगवा चरित्र को  
जन उदय :  जब से उत्तर प्रदेश में  भाजपा की जातिवादी  ब्राह्मणों  की भगवा सरकार आई है तबसे एक आंकड़ो  के अनुसार  अपराध मुक्ति के नाम पर चार हजार लोगो की कानूनी हत्या की जा चुकी है , पूर्व  डी जी पी ने यह आंकडा  दो हजार और मुख्यमंत्री न खुद बाढ़ सौ  माना है लकिन सच्चाई  कुछ और ही है . .यानी  यह संख्या बहुत जयादास भी हो सकती है

खैर हाल ही में उत्तर प्रदेश के  सुलतान पुर जिले में कादीपुर गाव का सामने आया है जहा का निवासी  अम्बुज यादव पिछले  एक साल से राजेस्थान में रह नौकरी कर रहा  था उसको उत्तर प्रदेश ने फोन करके बुलाया की आ जाओ  वरना  राजस्थान में आकर एनकाउंटर  करेंगे  जब अम्बुज यादव घर आया  तो पुलिस  उसे पकड़ कर ले गई  और खेते मेला जाकर  उसका एनकाउंटर  करने लगी और एक गोली  उसके पाँव में मारी  इस घटना को एक राहगीर ने देख लिया सो वह जल्द से  गाव के लोगो को बुला लाया .

भीड़ ने पुलिस को घेरा  तो पुलिस अपनी जान बचा कर भाग  गई ,अम्बुज यादव का इलाज जिला सरकारी अस्पताल में  चल रहा है   सबसे पहले इस खबर को  मीडिया  ने एक  अपराधी  के एनकाउंटर  के रूप में चलाया  लेकिन सच्चाई  सामने आने पर मीडिया  चुप  लग  गया .

कमाल की बात यह है की  अपराध मुक्ति  के नाम पर  योगी  / भगवा सरकार केवल दलित मुस्लिम युवाओं  को शिकार बना रही है जबकि  सवर्ण गुंडों  को को प्रोमोट  कर  रही   है आज ही अलीगढ  में बजरंग  दल  के गुंडों ने  एक दरोगा  को भरे  बाजार  पीटा  लेकिन इ
 गुंडों  के खिलाफ अभी  तक कोई कार्यवाही  नहीं हुई है जबकि सरकार निर्दोष  लोगो  को भी शिकार बना रही है .
अम्बुज यादव के केस में पता चला  है  की  एक ठाकुर  अम्बुज  यादव  के जमीन पर नजर गाड़े  है और  वह पुलिस  के जरिये  अम्बुज को मरवाना चाहता था  जाहिर  है बुडा  बाप  खुद  ही मर जाता इकलोती  सन्तान के जाने के बाद . जन उदय इस घटना से जुडी  सभी जानकारियो  की  जांच  कर रहा है  की इसमें कितना सच है और कितना झूट


लेकिन एक बात तय  है  की सरकार  इस वक्त जातिय पूर्वाग्रह के साथ  काम कर रही है  कमाल की बता यह है की  ये ही भगवा लोग जब डरपोको  की तरह  घूमते है तो अपने बचाव के लिय  हिन्दू हिन्दू करते  है ताकि अपने आप को एक बड़े समूह से दिखा सके   और जब इनका  डर निकाल जाता है तब अपने आपको ब्राह्मण  और सवर्ण कहने लग जाते है  . यह एक दोगले लोग है जिसने भार जैसे देश का सर्वनाश  किया हुआ है 

Wednesday, 7 February 2018

आर्यों आक्रमण का प्रारम्भिक इतिहास : शिव काबिले का सरदार था

जन उदय:  ऐसा प्रतीत  होता है कि  राजाओं को  छोड़  कभी भी किसी ने इस देश के साथ न्याय नहीं  किया  १८० बी सी में व्रह्द्स्थ की हत्या कर  पुष्यमित्र शुंग  / परशुराम  ने ब्राह्मण सम्राज्य स्व्थापित किया   ८४ हजार बौध और जैन मठो को तोड़ उनको  मंदिरों का रूप दिया गया  इनकी हत्याए  की  और १८० से लेकर २८० ईसा बाद तक इन्होने ऐसे ग्रन्थ लिख लिए गए जिसमे इन्होने  अपने आपको भगवान् का पुत्र , दूत , भगवान से सीधे सम्पर्क करने वाले सब्बित कर लिया  और  इन ग्रंथो में वेद , पुराण , म्नुसिमृति  जैसे घ्रणित  ग्रन्थ लिख लिए क्योकि  इन ग्रंथो  में उत्पीडन  को अपराध को मान्यता दी गई  है उर ब्राह्मण को हर अपराध से मुक्त  रखा गया हत्या बलात्कार , सम्पत्ति  छिनना  इनके लिए सब जायज  और लोगो को  सभी सुविधाओं से महरूम  रखा गया
पूरी दुनिया  में कई शोध के मुताबिक़ आर्य  भारत में लगभग १५०० इस पूर्व आये और  इनमे तीन काबिले मुख्य  रूप से थे पहले कबीले का सरदार शेड्लर  जो बाद में चल कर इन्होने शिव बना दिया  दुसरा काबिला ब्रहेट  का था  जिसे बाद में इन्होने ब्रह्मा  कहा और तीसरा कबीला वैस्नोव का था जिसे इन्होने विष्णु का नाम दिया   और ये नाम इन्होने उनको पूजने के लिए किया

जब ये लोग   आये तो  इन्होने सबसे पहले भारतीय  राजाओं  को गिफ्ट में गोरी लडकिया  और  घोड़े  दिए जिसे पाकर यहाँ के राजा  बहुत खुश होते  थे  क्योकि  घोड़े  ने उनकी यात्रा को सुगम  और तेज बना दिया  था  इसलिए इतिहास एन्थ्रोपोलॉजी  ने  भारतीय और आर्य  से जन्मे लोगो को इंडो-आर्यन कहा , ये लोग कबीलाई  थे और घुमन्तु  जाति  के थे  सो इनमे हथियार , भोजन , पानी  की बहुत महत्वता  थी


आर्यों  की एक धारा  उसी वक्त पर्शिया  की तरफ से आई जिसका नाम  पेरशेरोन था  जिसको बाद में परशुराम  भी कहा गया , परशुराम/ पेरशेरोन निहायत  क्रूर  था और उसके हाथ में एक विशेष  हथियार था जो लकड़ी और जानवर दोनों काट सकता था  और इसने शेड्लर /शिव , ब्रहेट/ ब्रह्मा , और वैस्नोव/ विष्णु  की मदद से अफगानिस्तान  के कुछ भागो  पर कब्जा कर लिया   चूँकि इसमें ब्रहेट/ ब्रह्मा , का बड़ा  योगदान था तो उस जीते  हुए स्थान को इन्होने ब्रह्मवर्त कहा  वर्त इसलिए क्योकि यह   जीता  हुआ इलाका गोल था वर्त की तरह

इस जीत से  ब्राह्मण  / आर्य बड़े ही उत्साहित थे इनके पास एक कोडवर्ड की भाषा जिसे संस्कृत कहते है लम्बे हथियार  और सबसे बड़ी बात इन्हें अपनी चालबाज़ लडकियो पर पूरा भरोसा था और समझ गए थे  गोरी  चमड़ी यहा के राजाओं की कमजोरी है और यही कारण था उत्तर भारत आते आते इन्होने यहा के बाहुबली  राजा हिरणाकश्यप के पुत्र को फसा लिया था  इसकी कहानी ऐसे  चलती है ‘’’’’’ होलिका अनार्य थी , मात् प्रधान कबीले की सरदार , आर्यो की चाल ने प्रहलाद को एक कन्या के चक्कर में फसाया , लेकिन कामयाब न हुए , (आग में जलने का द्रश्य नहीं ये युद्ध हुआ था) प्रह्लाद की मदद से एक युद्ध में आर्यो ने होलिका को मार दिया ,,, बाद में होलिका के कबीले ने आर्यो को बहुत मारा और खून से धरती लाल कर दी , और उस खून से सनी मिटटी को आर्यो के माथे पर लगा कर कहा की तुम वीर नहीं अबीर हो यानी कायर हो ,,, उस दिन से आज तक हर डरपोक आर्य एक दूसरे को रंग लगता है ,, मथुरा में एक दीं अबीर होली का होता है

इसके बाद इन्होने इस इलाके को आर्यवर्त कहा जो लगभग उतरी  भारत  था
खैर १८० बी सी से लेकर इन लोगो ने जिस तरह बर्बरता , दिखाई , इस देश के मूलनिवासियो अत्याचार  किये उनकी हत्या की सम्पत्ति  छिनी उर शिक्षा के अधिकार से वंचित कर दिया

इसके बाद मुस्लिम शासक  आये जिनकी मदद  इन्होने की  अंग्रेजो के साहयक रहे  लकिन एक शर्त पर की  ये लोग जाति  यानी समाजिक वाव्य्स्था पर कुछ नहीं कहंगे या करेंगे , लेकिन अंग्रेजो ने जब यह सब देखा  तो इनके वर्चस्व को खत्म कर दिया सबसे बड़ी बात अंग्रेज बड़े ही उदार और न्यायप्रिय  थे इसलिए उन्होंने कभी भी ब्राह्मणों  के लोकतांत्रिक  विरोध का विरोध  नहीं किया  और इसलिए उन्होंने खुद ब्राह्मणों  के लिए कांग्रेस को बना कर  दिया .. ब्राह्मण अपने आपको  चाहे जितना मजी शूरवीर कहे  लेकिन मुगल काल में एक आवाज तक नहीं उठाई क्योकि ब्रह्मण  जानते थे  एक आवाज उठाने पर गर्दन  कट  जाएगी


सबसे बड़े कमाल की बात यह है की  आर्य  यानी ब्राह्मण आज भी इस देश से प्रेम नहीं करते यहाँ लोगो से प्रेम नहीं करते बल्कि ये लोग इतनी नफरत करते और फैलाते है ये लोग आज भी नहीं चाहते की मूलनिवासी  के पास सम्पति आ जाए , ये लोग पढ़ लिख ले  या इन्हें समाज में सम्मान मिले . पूरा इतिहास चाहे कैसा भी हो उसे भुलाया जा सकता है लकिन वर्तमान को कैसे नजरअंदाज करे ??  

Wednesday, 27 December 2017

दीनदयाल हत्याकांड से बचने को अटल विहारी वाजपेयी ने इन्दिरा गांधी को ‘दुर्गा’ कह कर खुश किया था ... कीर्ति कुमार

दीनदयाल हत्याकांड में अटल विहारी वाजपेयी की भूमिका संदिग्ध थी, मोदी सरकार जांच कराने से क्यों बच रही?
दीनदयाल की हत्या की जांच कराने के बजाए जन्मशती मनाकर किस रहस्य को छुपा रही है मोदी सरकार-रिहाई मंच
जनसंघ अध्यक्ष बलराज मधोक ने दीनदयाल हत्याकांड में अटल बिहारी और नाना देशमुख की भूमिका पर उठाए थे सवाल...

मधोक ने लिखा अटल ने 30, राजेंद्र प्रसाद रोड को व्यभिचार का अड्डा बना दिया है
दीनदयाल का भारतीय राजनीति, समाज और सस्कृति में क्या योगदान था, संघियों के अलावा कोई नहीं जानता
लखनऊ । रिहाई मंच ने कहा है कि दीनदयाल उपाध्याय की जन्मशती पर करोड़ों रूपया खर्च करके जश्न मनाने वाली मोदी सरकार द्वारा अपने इस विचारक की हत्या की जांच पर मौन रहना इस लोकधारणा को पुख्ता करता है कि उनकी हत्या में अटल बिहारी बाजपेयी की भूमिका संदिग्ध थी और इसीलिए मोदी सरकार हत्याकांड की जांच नहीं कराकर अटल बिहारी को बचाना चाहती है।

मंच ने यह भी कहा है कि दीनदयाल उपाध्याय का भारतीय राजनीति, समाज और सस्कृति में क्या योगदान था, इसे पूरे देश में संघियों के अलावा कोई नहीं जानता। मंच ने कहा है कि जनता के पैसे से दीनदयाल उपाध्याय जैसे लोगों को प्रतिष्ठित करने का यह भोंडा प्रयास भाजपा और संघ परिवार के नायकत्व विहीन होने की कुंठा से निपटने का हास्यास्पद नुस्खा है।

रिहाई मंच द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में मंच के प्रवक्ता शाहनवाज आलम ने कहा कि यह आश्चर्य की बात है कि सुभाष चंद्र बोस की हत्या की जांच की मांग तो भाजपा करती है लेकिन अपने कथित दाशर्निकनेता दीन दयाल उपाध्याय की 11 फरवरी 1968 को मुगलसराय रेलवे स्टेशन पर संदेहास्पद स्थिति में हुई हत्या की कभी जांच की मांग नहीं करती।
शाहनवाज आलम ने कहा कि समाज में यह धारणा व्याप्त है कि संघ और भाजपा दीन दयाल हत्याकांड की जांच की मांग इसलिए नहीं करती है कि इसमें खुद अटल बिहारी वाजपेयी और नाना जी देशमुख की भूमिका संदिग्ध थी। जिसका आधार पूर्व जनसंघ अध्यक्ष बलराज मधोक द्वारा अपनी पुस्तक जिंदगी का सफरके तीसरे खंड में दीनदयाल हत्या कांड के संदर्भ में किए गए रहस्योद्घाटन हैं।


गौरतलब है कि पुस्तक में मधोक ने बताया है कि उन्हें अपने सूत्रों से पता चला था कि हत्या में जनसंघ के ही कुछ वरिष्ठ नेता शामिल थे और ये पार्टी पर नियंत्रण के लिए चल रहे आंतरिक संघर्ष का नतीजा था। पुस्तक में उन्होंने यह भी रहस्योद्घाटन किया था कि तत्कालीन सरकार द्वारा इस हत्या कांड की की जारी जांच को अटल बिहारी बाजपेयी और नाना जी देषमुख ने बाधित किया और उसे ठंडे दिमाग से किए गए हत्या के बजाए एक दुखद दुघर्टना के बतौर प्रचारित किया।

मधोक ने अपने दावे के समर्थन में इस तथ्य को भी पुस्तक में दर्ज किया है कि 1977 में जब जनता पार्टी की सरकार बनी तब सुब्रह्मणियम स्वामी ने तत्कालीन गृहमंत्री चौधरी चरण सिंह से दुबारा जांच की मांग की लेकिन जनसंघ के मंत्रियों अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी ने इस प्रयास को बाधित कर दिया।
रिहाई मंच प्रवक्ता ने कहा कि जनमानस में एक धारणा यह भी है कि दीनदयाल की हत्या के पीछे एक कारण अवैध सम्बंधों से भी जुड़ा था जिसमें अटल बिहारी वाजपेयी और नानाजी देशमुख की भूमिका मास्टरमाइंड की थी और इस धारणा का आधार भी मधोक की पुस्तक में उजागर किए गए तथ्य ही हैं।

गौरतलब है कि अपनी पुस्तक के तीसरे खंड के पृष्ठ संख्या 25 पर मधोक ने लिखा है ‘‘मुझे अटल बिहारी और नाना देशमुख की चारित्रिक दुर्बलताओं का ज्ञान हो चुका था। जगदीश प्रसाद माथुर ने मुझसे शिकायत की थी कि अटल (बिहारी वाजपेयी) ने 30, राजेंद्र प्रसाद रोड को व्यभिचार का अड्डा बना दिया है। वहां नित्य नई-नई लड़कियां आती हैं। अब सर से पानी गुजरने लगा है। जनसंघ के वरिष्ठ नेता के नाते मैंने इस बात को नोटिस में लाने की हिम्मत की। मुझे अटल के चरित्र के बारे में कुछ जानकारी थी। पर बात इतनी बिगड़ चुकी है, ये मैं नहीं मानता था। मैंने अटल को अपने निवास पर बुलाया और बंद कमरे में उससे जगदीश माथुर द्वारा कही गई बातों के विषय में पूछा। उसने जो सफाई दी बात साफ हो गई। तब मैंने अटल (बिहारी वाजपेयी) को सुझाव दिया कि वह विवाह कर ले अन्यथा वह बदनाम तो होगा ही जनसंघ की छवि को भी धक्का लगेगा।
’’
मंच के नेता अनिल यादव ने दावा किया है कि इंदिरा गांधी सरकार में हुई दीनदयाल हत्याकांड की जांच में सीबीआई और जस्टिस चंद्रचूड़ आयोग, दोनों ने ही अटल बिहारी और नाना देषमुख की भूमिका को संदिग्ध पाया था और उस रिपोर्ट को जल्दी ही इंदिरा गांधी सरकार सार्वजनिक करने वाली थी। जिसे रोकने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी ने बांग्लादेश के निमार्ण में निभाई गई भूमिका के लिए इंदिरा गांधी को सदन में दुर्गाकह कर सम्बोधित कर दिया। जिससे चापलूसों को पसंद करने वाली इंदिरा गांधी ने खुश होकर रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

अनिल यादव ने कहा कि अगर इंदिरा गांधी ने दीनदयाल उपाध्याय के हत्यारों को इंसाफ देने का साह
स दिखाया होता तो अटल बिहारी वाजपेयी और नाना देशमुख को इस जघन्य हत्याकांड में फांसी या उम्र कैद की सजा हो गई होती।

Sunday, 10 December 2017

नफरत , हिंसा , भेदभाव महिला उत्पीडन अपराधियो की गीता है मनुसिमृति

नफरत , हिंसा , भेदभाव महिला उत्पीडन अपराधियो की गीता है मनुसिमृति इसको समझने के लिए मनुसिमृति को पढ़ना जरूरी है इस लिए निचे दिए गए मनु द्वारा लिखे श्लोक को पढ़ना जरूरी है 
मनुस्मुर्ति" में क्या कहा हैं 
=============== 
यह देखिये- 
१- पुत्री,पत्नी,माता या कन्या,युवा,व्रुद्धा किसी भी स्वरुप में नारी स्वतंत्र नही होनी चाहिए. -मनुस्मुर्तिःअध्याय-९ श्लोक-२ से ६ तक. 
...२- पति पत्नी को छोड सकता हैं, सुद(गिरवी) पर रख सकता हैं, बेच सकता हैं, लेकिन स्त्री को इस प्रकार के अधिकार नही हैं. किसी भी स्थिती में, विवाह के बाद, पत्नी सदैव पत्नी ही रहती हैं. - मनुस्मुर्तिःअध्याय-९ श्लोक-४५ 
३- संपति और मिलकियत के अधिकार और दावो के लिए, शूद्र की स्त्रिया भी "दास" हैं, स्त्री को संपति रखने का अधिकार नही हैं, स्त्री की संपति का मलिक उसका पति,पूत्र, या पिता हैं. - मनुस्मुर्तिःअध्याय-९ श्लोक-४१६. 
४- ढोर, गंवार, शूद्र और नारी, ये सब ताडन के अधिकारी हैं, यानी नारी को ढोर की तरह मार सकते हैं....तुलसी दास पर भी इसका प्रभाव दिखने को मिलता हैं, वह लिखते हैं-"ढोर,चमार और नारी, ताडन के अधिकारी." 
- मनुस्मुर्तिःअध्याय-८ श्लोक-२९९ 
५- असत्य जिस तरह अपवित्र हैं, उसी भांति स्त्रियां भी अपवित्र हैं, यानी पढने का, पढाने का, वेद-मंत्र बोलने का या उपनयन का स्त्रियो को अधिकार नही हैं.- मनुस्मुर्तिःअध्याय-२ श्लोक-६६ और अध्याय-९ श्लोक-१८. 
६- स्त्रियां नर्कगामीनी होने के कारण वह यग्यकार्य या दैनिक अग्निहोत्र भी नही कर सकती.(इसी लिए कहा जाता है-"नारी नर्क का द्वार") - मनुस्मुर्तिःअध्याय-११ श्लोक-३६ और ३७ . 
७- यग्यकार्य करने वाली या वेद मंत्र बोलने वाली स्त्रियो से किसी ब्राह्मण भी ने भोजन नही लेना चाहिए, स्त्रियो ने किए हुए सभी यग्य कार्य अशुभ होने से देवो को स्वीकार्य नही हैं. - मनुस्मुर्तिःअध्याय-४ श्लोक-२०५ और २०६ . 
८- - मनुस्मुर्ति के मुताबिक तो , स्त्री पुरुष को मोहित करने वाली - अध्याय-२ श्लोक-२१४ . 
९ - स्त्री पुरुष को दास बनाकर पदभ्रष्ट करने वाली हैं. अध्याय-२ श्लोक-२१४ 
१० - स्त्री एकांत का दुरुप्योग करने वाली. अध्याय-२ श्लोक-२१५. 
११. - स्त्री संभोग के लिए उमर या कुरुपताको नही देखती. अध्याय-९ श्लोक-११४. 
१२- स्त्री चंचल और हदयहीन,पति की ओर निष्ठारहित होती हैं. अध्याय-२ श्लोक-११५. 
१३.- केवल शैया, आभुषण और वस्त्रो को ही प्रेम करने वाली, वासनायुक्त, बेईमान, इर्षाखोर,दुराचारी हैं . अध्याय-९ श्लोक-१७. 
१४.- सुखी संसार के लिए स्त्रीओ को कैसे रहना चाहिए? इस प्रश्न के उतर में मनु कहते हैं- 
(१). स्त्रीओ को जीवन भर पति की आग्या का पालन करना चाहिए. - मनुस्मुर्तिःअध्याय-५ श्लोक-११५. 
(२). पति सदाचारहीन हो,अन्य स्त्रीओ में आसक्त हो, दुर्गुणो से भरा हुआ हो, नंपुसंक हो, जैसा भी हो फ़िर भी स्त्री को पतिव्रता बनकर उसे देव की तरह पूजना चाहिए.- मनुस्मुर्तिःअध्याय-५ श्लोक-१५४. 
जो इस प्रकार के उपर के ये प्रावधान वाले पाशविक रीति-नीति के विधान वाले पोस्टर क्यो नही छपवाये? 
(१) वर्णानुसार करने के कार्यः - 
- महातेजस्वी ब्रह्मा ने स्रुष्टी की रचना के लिए ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य और शूद्र को भिन्न-भिन्न कर्म करने को तै किया हैं - 
- पढ्ना,पढाना,यग्य करना-कराना,दान लेना यह सब ब्राह्मण को कर्म करना हैं. अध्यायः१:श्लोक:८७ 
- प्रजा रक्षण , दान देना, यग्य करना, पढ्ना...यह सब क्षत्रिय को करने के कर्म हैं. - अध्यायः१:श्लोक:८९ 
- पशु-पालन , दान देना,यग्य करना, पढ्ना,सुद(ब्याज) लेना यह वैश्य को करने का कर्म हैं. - अध्यायः१:श्लोक:९०. 


- द्वेष-भावना रहित, आंनदित होकर उपर्युक्त तीनो-वर्गो की नि:स्वार्थ सेवा करना, यह शूद्र का कर्म हैं. - अध्यायः१:श्लोक:९१. 
(२) प्रत्येक वर्ण की व्यक्तिओके नाम कैसे हो?:- 
- ब्राह्मण का नाम मंगलसूचक - उदा. शर्मा या शंकर 
- क्षत्रिय का नाम शक्ति सूचक - उदा. सिंह 
- वैश्य का नाम धनवाचक पुष्टियुक्त - उदा. शाह 
- शूद्र का नाम निंदित या दास शब्द युक्त - उदा. मणिदास,देवीदास 
- अध्यायः२:श्लोक:३१-३२. 
(३) आचमन के लिए लेनेवाला जल:- 
- ब्राह्मण को ह्रदय तक पहुचे उतना. 
- क्षत्रिय को कंठ तक पहुचे उतना. 
- वैश्य को मुहं में फ़ैले उतना. 
- शूद्र को होठ भीग जाये उतना, आचमन लेना चाहिए. 
- अध्यायः२:श्लोक:६२. 
(४) व्यक्ति सामने मिले तो क्या पूछे?:- 
- ब्राह्मण को कुशल विषयक पूछे. 
- क्षत्रिय को स्वाश्थ्य विषयक पूछे. 
- वैश्य को क्षेम विषयक पूछे. 
- शूद्र को आरोग्य विषयक पूछे. 
- अध्यायः२:श्लोक:१२७. 
(५) वर्ण की श्रेष्ठा का अंकन :- 
- ब्राह्मण को विद्या से. 
- क्षत्रिय को बल से. 
- वैश्य को धन से. 
- शूद्र को जन्म से ही श्रेष्ठ मानना.(यानी वह जन्म से ही शूद्र हैं) 
- अध्यायः२:श्लोक:१५५. 
(६) विवाह के लिए कन्या का चयन:- 
- ब्राह्मण सभी चार वर्ण की कन्याये पंसद कर सकता हैं. 
- क्षत्रिय - ब्राह्मण कन्या को छोडकर सभी तीनो वर्ण की कन्याये पंसद कर सकता हैं. 
- वैश्य - वैश्य की और शूद्र की ऎसे दो वर्ण की कन्याये पंसद कर सकता हैं. 
- शूद्र को शूद्र वर्ण की ही कन्याये विवाह के लिए पंसद कर सकता हैं.- (अध्यायः३:श्लोक:१३) यानी शूद्र को ही वर्ण से बाहर अन्य वर्ण की कन्या से विवाह नही कर सकता. 
(७) अतिथि विषयक:- 
- ब्राह्मण के घर केवल ब्राह्मण ही अतिथि गीना जाता हैं,(और वर्ण की व्यक्ति नही) 
- क्षत्रिय के घर ब्राह्मण और क्षत्रिय ही ऎसे दो ही अतिथि गीने जाते थे. 
- वैश्य के घर ब्राह्मण,क्षत्रिय और वैश्य तीनो द्विज अतिथि हो सकते हैं, लेकिन ... 
- शूद्र के घर केवल शूद्र ही अतिथि कहेलवाता हैं - (अध्यायः३:श्लोक:११०) और कोइ वर्ण का आ नही सकता... 
(८) पके हुए अन्न का स्वरुप:- 
- ब्राह्मण के घर का अन्न अम्रुतमय. 
- क्षत्रिय के घर का अन्न पय(दुग्ध) रुप. 
- वैश्य के घर का अन्न जो है यानी अन्नरुप में. 
- शूद्र के घर का अन्न रक्तस्वरुप हैं यानी वह खाने योग्य ही नही हैं. 
(अध्यायः४:श्लोक:१४) 
(९) शब को कौन से द्वार से ले जाए? :- 
- ब्राह्मण के शव को नगर के पूर्व द्वार से ले जाए. 
- क्षत्रिय के शव को नगर के उतर द्वार से ले जाए. 
- वैश्य के शव को पश्र्चिम द्वार से ले जाए. 
- शूद्र के शव को दक्षिण द्वार से ले जाए. 
(अध्यायः५:श्लोक:९२) 
(१०) किस के सौगंध लेने चाहिए?:- 
- ब्राह्मण को सत्य के. 
- क्षत्रिय वाहन के. 
- वैश्य को गाय, व्यापार या सुवर्ण के. 
- शूद्र को अपने पापो के सोगन्ध दिलवाने चाहिए. 
(अध्यायः८:श्लोक:११३) 
(११) महिलाओ के साथ गैरकानूनी संभोग करने हेतू:- 
- ब्राह्मण अगर अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो सिर पे मुंडन करे. 
- क्षत्रिय अगर अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो १००० भी दंड करे. 
- वैश्य अगर अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो उसकी सभी संपति को छीन ली जाये और १ साल के लिए कैद और बाद में देश निष्कासित. 
- शूद्र अगर अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो उसकी सभी संपति को छीन ली जाये , उसका लिंग काट लिआ जाये. 
- शूद्र अगर द्विज-जाती के साथ अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो उसका एक अंग काटके उसकी हत्या कर दे. 
(अध्यायः८:श्लोक:३७४,३७५,३७९) 
(१२) हत्या के अपराध में कोन सी कार्यवाही हो?:- 
- ब्राह्मण की हत्या यानी ब्रह्महत्या महापाप.(ब्रह्महत्या करने वालो को उसके पाप से कभी मुक्ति नही मिलती) 
- क्षत्रिय की हत्या करने से ब्रह्महत्या का चौथे हिस्से का पाप लगता हैं. 
- वैश्य की हत्या करने से ब्रह्महत्या का आठ्वे हिस्से का पाप लगता हैं. 
- शूद्र की हत्या करने से ब्रह्महत्या का सोलह्वे हिस्से का पाप लगता हैं.(यानी शूद्र की जिन्द्गी बहोत सस्ती हैं) 
- (अध्यायः११:श्लोक:१२६) 

Friday, 8 December 2017

धार्मिक आंतकवाद लोगो को आदमखोर बनाता हुआ : उदय चे

राजस्थान के राजसमंद में एक धार्मिक आंतकवादी ने जिस प्रकार से एक बुजर्ग मजदूर को धोखे से काम के लिए बुलाकर उसकी निर्ममता से हत्या की गई। उसकी पीठ पर वार किया गया। उसके अंगों को बड़ी बेहरमी से काटा गया फिर उसको जलाया गया। उसके बाद जिस निडरता से कातिल ने कत्ल करने के पिछे का राज बताया, हत्या को जायज ठहराने के लिए जिस प्रकार कातिल ने महाराणा प्रताप को कोट किया, जय मेवाड़, जय भारत, जय हिंद का नारा दिया। मन्दिर में वीडियो को बनाना औऱ भगवा रंग, ये सब उस धर्म के जहर का असर है जिसे धीरे-धीरे हिंदुत्व की सिरिंज से चढ़ाया गया है। ऐसे लोगो को आदमखोर जानवर धीरे-धीरे हिंदुत्ववादी आंतकवादियो ने बनाया है। कोई भी इन्सान या समाज आदमखोर एक दम नही बन जाता इसके लिए धार्मिक आंतकवादी बहुत लंबे समय से काम कर रहे होते है। भारत की आजादी के आंदोलन में जहाँ बहुत बड़ा तबका देश को आजाद करवाने के लिएअंग्रेजो के खिलाफ मजबूती से लड़रहा था। 


शहीद भगत सिंह और उसके साथियों ने देश की ही नही, पूरी मानव जाति की आजादी के लिए 1928 में जहाँ हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) का गठन किया। जिसने मानव मुक्ती के लिए संघर्ष का आह्वान किया। वही दूसरी तरफ भारत में अंग्रेजो की मद्दत से आजादी के आन्दोलन और HSRA के खिलाफ मुस्लिम और हिंदुत्वादी संघठनो को मजबूत किया गया। जिनका मुख्य एजेंडा ही मानव मुक्ति के संघर्ष की बुनियाद मेहनतकश आवाम की एकता को तोड़ने के लिए भारतीय समाज में धर्म-जात-इलाका के नाम परलोगो को बांटना था। इस मुहिम में वो कामयाब भी रहे। गोड़से जिसको धर्म के जहर ने धीरे-धीरे आदमखोर जानवर बनाया। इस आदमखोर जानवर का सहारा लेकर इसके आकाओं ने महात्मा गांधी की हत्या करवाई। महात्मा गांधी की हत्या इसी हिंदुत्वादी आंतकवादी लाइन द्वारा की गई हत्या थी। बाबरी मस्जिद को तोड़ने की, बम्बई, गुजरात, गन्धमालके दंगे हो या प्रगतिशील बुद्विजीवियों, कलाकारो, छात्रों, मजदूर नेताओं, लेखकों, पत्रकारो की हत्याये ये सब धार्मिक आतंकवादियों द्वारा अपने आकाओं के इशारे पर की गयी कार्यवाईयाँ है।
एक आदमी जान-बूझकर, सोच-समझकर अपने हाथों से हत्या करता है और उसके चेहरे पर शिकन तक नहीं है। ये धार्मिक पागलपन हैऔऱ ये कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी यहाँ दलितो, मुश्लिमो, सिखों आदिवासियों के नरसंहार हुए है। बस वीडियो अब बनने लगे है। हरियाणा के झज्झर जिले केदुलीना में 5 दलितो को इसलिए जिंदा जला दिया गया था क्योकि वो मरे हुए पशुओं को उठाकर उनकी खाल उतारने का काम करते थे। उस दिन भी वो मरी हुई गायों की खाल उतार कर अपने घर जा रहे थे। इस काम का उनके पास सरकारी मंजूरी भी थी लेकिन आदमखोरों ने उनको घेर लिया और धर्म के नाम पर जिंदा जला दिया। ऐसे ही मिर्चपुर में अंधे बुजर्ग ओर उसकी अपँग बेटी को भीड़ ने जला दिया था। दादरी के अखलाक, जुनैद औऱ अलवर के पास हुई किसान पहलू खान की इन आदमखोरों द्वारा हत्याये इसी धार्मिक जहर का असर है। लेकिन जब ये आदमखोर जानवर अपना शिकार करते है तो बाकी आवाम की चुप्पी ये साबित करती है कि आप भी इस धर्म के जहर के प्रभाव में वहसी दरिंदे बनने की तरफ बढ़ रहे हो। धार्मिक आंतकवादी इन सभी हत्यायों के बाद जश्न मनाते है हत्या के पक्ष में दलील देते है और हत्यारों को समान्नित करते है। आप ऐसे धार्मिक आतंकवादियों के समर्थन में जय जयकार करते हो या चुप रहते हो।आपकी जय जयकार या चुप्पी आपकी आने वाली नश्लो को आदमखोर जानवर बना देगी। फिर इंसानी बस्ती होने कीबजाए आदमखोरों की बस्ती होगी। उस समय इंसानी मूल्य, सिंद्धान्त, मानवतासब खत्म हो जायेगें। इसलिए अभी भी समय है अगर हमे इंसानी सभ्यता को बचाना है तो खुद के धर्म के इन धार्मिक आंतकवादियो का नाश करना पड़ेगा। धर्म-जात-इलाका से ऊपर उठकर हमे मेहनतकश आवाम की एकतास्थापित करनी होगी। क्योकि लुटेरी मण्डली का ये सारा खेल ही इस एकता को तोड़ने के लिए है। भारत में ही नही पुरे विश्व मे जब भी मेहनतकश मानव मुक्ति के लिए एकजुट होना शुरू करता है तो सामंतवादी, पूंजीवादी लुटेरी मण्डली धर्म-जात-इलाका औऱ अंधराष्ट्रवाद के नाम पर लोगों को बांटने का काम करती है। अल्पसंख्यको, दलितो, आदिवासियों को दुश्मन के तौर पर बहुसंख्यक आबादी के सामने पेश करती है और अल्पसंख्यको, दलितो, आदिवासियों पर हमले करने के लिए बहुसंख्यक आबादी को तैयार करती है। पूरी दुनिया में साम्राज्यवादी सत्ताएँ पिछले दरवाजे से इनको संचालित करती है। तालिबान, अलक़ायदा, isisi, भारत मे हिंदुत्वादी आंतकवादी इन सब के पीछे साम्राज्यवादी खेमा मजबूती से खड़ा है। जो इनको फंडिंग करता है।


बहुत पहले हॉलीवुड की एक फ़िल्म रॉंग टर्न फ़िल्म देखी थी। रॉंगटर्न का मतलब होता है "गलत रास्ता"
इसफ़िल्म कि कई सीरीज मार्किट में आई। ये सभी सीरीज इतनी डरावनी औऱ हॉरर थी कि अकेलाआदमी सायद देख सके। फ़िल्म में कहानी ये है कि कुछ वज्ञानिक गरीब लोगों पर बिना सरकार कीइजाजत लिए दवाइयों का प्रयोग करते है। ऐसी दवाइयों का प्रयोग जो मानव हित मे होकर मानव की बर्बादी की तरफ जाता है। जिन इंसानो ओर ये प्रयोग किये जाते है वो सब उन दवाइयों के कारण विकृत हालात ने चले जाते है वो आदमखोर बन जाते है। वो उस प्रयोगशाला से इन सभी को मार कर भाग जाते है। अब वो आदमखोर जहां भी जाते है। वहाँ-वहाँ वो मानव जाति का सर्वनाश करते है उनको खा जाते है। अब वो जंगल मे रहते है जहाँ रहते है वहाँ आस-पास वो मानव जाति को खत्म कर देते है। अब कोई भी शख्स गलती से रास्ता भूल कर उनकी बस्ती की तरफ चल जाता है तो उस इंसान का खात्मा वो बड़ी बेहरमी से कर देते है जैसे कुल्हाड़ी, दरातसे काट देना जैसे लकड़ी को काटा हो। उस फिल्म को देख कर जो मेरी समीक्षा बनी वो ये थी की वो सभी आदमखोर मानवता के लिए इतना बड़ा खतरा नही है वो बड़े दोषी है। लेकिन वो आदमखोर बन चुके है तो उनका इलाजजरूरी है। लेकिनसबसे बड़ा खतरा वो डॉ या वज्ञानिक है जिन्होंने अपने फायदे के लिए साधारण इंसानो को आदमखोर बनाया। उनका खात्मा सबसे ज्यादा जरूरी है ताकि नए आदमखोर पैदा होने से समाज को बचाजा सके। हमें इन्हें देखकर निराश नहीं होना है। उम्मीद अब भी बची हुई है, हम ये सब रोक सकते हैं। वक्त रहते कुछ लिख-पढ़ लें, अपनी सोच का दायरा बढ़ा लें, लोगों से बात करें, तोइस पागलपन को हम आसानी से रोक देंगे।



राजसमंद की इस घटना को टाला जा सकता थाअगर समय रहते ऐसे आदमखोर की पहचान हो जाती तो उसका समय पर इलाज करवाया जा सकता था। इसलिए आज आप अपने आस-पास ऐसे धार्मिक आंतकवादियो की पहचान कीजिये जो साधारण इंसानो को धर्म के नाम पर वहसी जानवर बना रहे है, मानव बम बना रहे है। ऐसे आतंकवादियों को जितना जल्दी खदेड़ दोगे आप खुद को और मानव जाति के वर्तमान भविष्य को सुरक्षित बना पाओगे। मानवता के लिए आज सबसे बड़ा दुश्मन साम्रज्यवाद, उसके दलाल धार्मिक आंतकवादी औरये आदमखोर जानवर है। मानव सभ्यता बचाने औऱ मानव मुक्ति के लिए मेहनतकश आवाम का पहला काम इन तीनों ताकतों का सफाया करना जरूरी है।
UDay Che