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Saturday, 12 March 2016

जनता ने नकारा और राष्ट्रवादी मीडिया ने किया अघोषित बहिष्कार श्री श्री रवि शंकर के विश्व सांस्कृतिक महोत्सव का


श्री श्री रवि शंकर ने सत्ता के करीब होने का भरपूर फायदा उठाया इसलिए संघियो के साथ मिलकर सरकारी ताम झाम की मदद से ब्राह्मण संस्कृति को फैलाने का  काम कर रहे है .

लेकिन जैसे ही इस महोत्सव पर विवाद हुआ और यह साबित हो गया उसी समय राष्ट्रवादी लोगो ने इस महोत्सव का बहिष्कार करने का मन बना लिया क्योकि जो साधू संत कहने को अपने आपको  साधू संत कहता है लेकिन इसके कार्य  समाज विरोधी तत्वों जैसे है  , उधाहरण के लिए इसके उपर कोर्ट ने पांच करोड़ का जुर्माना लगाया लेकिन रवि शंकर ने कहा की वो जुर्माना  नहीं  भरेगा

अब रवि शंकर से कोई ये पूछे की जब आप अपने  देश के कानून की इज्जत नहीं करते तो आप कैसे महान हो गए , इस बात से तो पुरे देश में ये संदेश जा रहा है की ये धर्म और संस्कृति के नाम पर कुछ भी करेंगे और आपको कुछ  नहीं होगा .


मीडिया के लोगो ने सिवाय कुछ पिछलग्गू मीडिया  ने इस महोत्सव और रवि शंकर का बहिष्कार कर दिया है  और  वहा जिस मात्रा  में  कहा जा रहा था  वहा पर लोग हजारो की संख्या में भी नहीं है  कुल  मिला कर  यह  अरबो रूपये का खेल है  जो संघ और रवि शंकर मिल कर खेल  रहे है 

Friday, 11 March 2016

देशदोह की संस्कृति सिखा रहे है श्री श्री रवि शंकर विश्व संस्कृति महोत्सव के नाम पर पर


स्वयं घोषित विश्व शांति दूत और विश्व शांति गुरु श्री श्री रवि शंकर का विश्व  संस्कृति महोत्सव अपनी कार्य प्रणाली की वजह से विवादों में है ,  इस समारोह को यमुना  की रखवाली में लगे विभागों से पूर्ण रूप से मंजूरी नहीं मिली थी , बल्कि कुछ विभागों ने इसे गैर कानूनी भी ठहराया   क्योकि इससे यमुना के आस पास और यमुना के  वेजी सिस्टम  और इको सिस्टम को खतरा है  और यमुना को बर्बादी की कगार पर खड़ा कर दिया है .

इन विवादों के चलते नेशनल ग्रीन   त्रुबनल ने श्री श्री रवि शंकर पर पांच करोड़ का   जुरमाना भी
लगाया है  जिसे श्री श्री रवि शंकर ने देने से मना कर  दिया है

बड़ी दिलचस्प बात यह है की श्री श्री रवि शंकर ये समारोह दुनिया के सामने भारत की संस्क्रती को रखने की बात कर रहे है , अब  इन जनाब से ये कोई पूछे की आप किस तरह की संस्कृति को  विश्व को सिखाना  चाह   रहे है वो कैसी   संस्कृति है ??

श्री  श्री रविशंकर  अपने देश के कानून की इज्जत नहीं करते , सविंधान की इज्जत नहीं करते  तो इससे बड़ी बात क्या हो सकती है ??  क्योकि किसी भी देश का कानून उस देश का सविंधान ही वहा की राष्ट्रीय संस्कृति को निर्धारित करता है  उसका निर्माण करने में साहयक होता है , और श्री श्री रवि शंकर उसी सविंधान और कानून का मजाक बना रहे है , 

नेशनल ग्रीन त्रुबनल  ने श्री रवि शंकर पर  पांच करोड़ का जुर्माना किया है और यह ताकीद दी है की समारोह के शुरू होने से पहले श्री रवि शंकर  इस जुर्माने की अदायगी करे , लेकिन सत्ता के नशे में  चूर श्री श्री रवि शंकर  जो की नरेंद्र  मोदी , भाजपा  और संघ के समर्थक और घटक दल के है  इन्हें इस बात से कोई फर्क ही नहीं पड़ता  है की ये कितना बड़ा अपराध कर रहे है .

सवाल न्याय  का और रवि शंकर के मौलिक अधिकारों का भी है लेकिन इस तरह की प्रक्रिया  जहा पर रवि शंकर देश के कानून को धत्ता  बता   रहे है और नेतिक रूप से एक देशद्रोह वाला उधाहर्ण पेश कर रहे है जो सरासर गलत है गैरकानूनी  है  अनैतिक है  श्री रवि शंकर के इस अपराध से देश में ही नहीं दुनिया में गलत संदेश  जाएगा , इनको ये समझ लेना   चाहिए की ये देश   इनकी  निजी सम्पति नहीं है

और वैसे भी  श्री श्री रवि शंकर  भारतीय संस्कृति  के नाम पर ब्राह्मण संस्क्रती को फैला  रहे है




Thursday, 10 March 2016

धर्म और संस्कृति श्री श्री रवि शंकर जैसी जमात के धंधे है सदीओ पुराने

                धर्म  और संस्कृति  इनके धंधे है सदीओ पुराने

 जब कुछ भी निश्चित नहीं होता  और इंसान के हाथो से हालात निकल जाते है , ठीक उसी वक्त भगवान की या एक ऐसी अद्रश्य शक्ति का जन्म हो जता है जिसे लोग भगवान्  कहते है , अलग अलग भाषाओं में इसके अलग अलग नाम  दिए गए है .
इंसान का डर  किसी दुसरे व्यक्ति के लिए वरदान का काम करता है वहो धूर्त आदमी इस भगवान् के नाम से लोगो को डराता  है , धमकाता है और अपना  उल्लू सीधा करता है  वरना  किसने भगवान् को  देखा कौन स्वर्ग नर्क देख कर आया  और किसके द्वाराए भगवान् आये  ये कोई भी व्यक्ति प्रमाणित नहीं कर सकता .
सदिया बदली युग बदले ,  तरह तरह के नए ने धर्म के ठेकेदार पैदा हुए , नए नए संदेश और सिद्धांत उन लोगो ने लोगो को सुनाये  लेकिन  कोई भी व्यक्ति भगावन को सामने ले कर नहीं आया


दरअसल एक ख़ास  बात और ये की इन धूर्त ,मक्कार भगवान् के दूतो  ने मानव मनोविज्ञान  का , जिज्ञासाओं का जम कर अध्यन किया  और उसी के हिसाब से भगवान् रच डाले ,   धरती का घूमना  दिन के बाद रात का होना  और फिर दिन निकल जाना आम  लोगो के लिए भगवान् का चमत्कार हो गया , गर्मी ,  वर्षा , तूफ़ान ये सब भगवान् बना कर पेश कर दिए  गए

भारत में  ये काम तो हुआ ही लेकिन इसके साथ भगवान् एक जमात की बपोती के रूप में उभरा  और  भगवान्  के ठेकेदार  ये लोग ही रहे , इसी भगवान् की आड़ में इन लोगो ने जितने 
अमानवीय कार्य किये  जो इंसानियत को शर्मसार कर दे  , अगर कोई ऐसे समाज से व्यक्ति हो जिसे भारत के तथाकथित  हिन्दू धर्म के बारे में न मालूम हो जिसे ब्राह्मणों ने तय्यार किया  तो उसके  हैरान होने की डिग्री बहुत जयादा होगी , ये भगवान् के दूत  लोगो ने इंसान को इंसानियत नहीं समझा  , एक  कमाल की बात यह है ये लोग इस ज्ञान विज्ञान के दौर में भी भगवान् के नाम पर अंधविश्वास फैलाते है और इन्होने  जाति के आधार पर इंसान के इंसान होने की उसके अंदर क्षमता होने की डिग्री को निर्धारित किया हुआ है  ये मानते है की ये भगवान् के दूत है  और सबसे जयादा योग्यता इन्ही लोगो में है  


आज भी ये लोग धर्म के नाम पर संस्कृति के नाम पर पुरे देश को देश के सविंधान  को कानून को हर व्यक्ति को मुर्ख बनाए हुए  रवि शंकर  जो  वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल मना रहे है इस बात का सबसे बड़ा उधाहरण है