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Tuesday, 8 March 2016

क्या रवि शंकर भारतीय में लिखी ग्रंथो में लिखी गंदगी और अमानवता को भारतीय संस्कृति सम्मेलन में समझायंगे दुनिया को

क्या रवि शंकर   भारतीय में लिखी   ग्रंथो में लिखी  गंदगी और अमानवता  को भारतीय  संस्कृति सम्मेलन में   समझायंगे दुनिया को

कुछ लोगो को लगता था कि  देश में भेदभाव , दंगो , जातिवाद , की राजनीति सिर्फ भाजपा कर रही है  वो भी अपने पिता आर एस एस के कहने पर लेकिन लोग भूल गए थे की आर एस एस के कुछ एजेंट चुपके चुपके लोगो के बीच में काम कर रहे थे कभी आयुर्वेद के नाम पर , कभी आर्ट ऑफ़ लिविंग के नाम पर कही मन की शांति के नाम पर ,  जिसमे ब्रह्मकुमारी , रवि शंकर  का आर्ट ऑफ़ लिविंग  , रामदेव  इत्यादि
ये ऐसे लोग है जो पहले तो समाज  की समस्या के निवारण के नाम पर  आम लोगो के बीच घुसपैठ करते है और फिर अचानक अपने असली रूप में आ जाते है यानी भगवा आतंक के रूप में
इस वक्त जो बेहद चर्चा का विषया बना हुआ है मुद्दा  वह यह है की श्री रवि शंकर   जो भगवा का एक अंग है भारतीय  संस्कृति के सम्मेलन के नाम पर  यमुना नदी को बर्बाद करने पर तुला हुआ है कमाल की बात यह है की इसकी इजाजत उसके पास कही से भी नहीं है की वो ये कार्यक्रम आयोजित कर सके
देश में भगवा सरकार होने की वजह से  भगवा लोगो के खिलाफ बोलने वाले को या तो  जेल में देशद्रोह के आरोप में डाल  दिया जाता है या  उसके बोलने के अधिकार को ही छीन   लिया जा रहा है  


कमाल की बात यह है की कभी गंगा की सफाई कभी यमुना की सफाई तो कभी गोमांस के नाम पर देश में आतंक  फैलाने वाले भगवा आतंकी  अपनी जरूरत के अनुसार धर्म और संस्क्रती  को मोड़ लेते है , कोई दुसरा करे  तो यमुना माँ  , खुद करे  तो सिर्फ यमुना , खुद गोमांस का व्यापार करे  तो व्यापार    कोई दुसरा करे  तो गोमाता की  हत्या
अब अगर रवि शंकर भारतीय संस्कृति  की बात ही कर रहे है  तो क्या  रवि शंकर  पूरी  दुनिया को  ब्राह्मण ग्रन्थ में लिखी  महिलाओं  और दलितों  के खिलाफ क्रूरता  और गंदगी को बतायंगे ??
दलित और महिला की जान की कीमत कुछ भी  नहीं  क्या ये बतायंगे
क्या ये भी बतायंगे की दलित की हत्या का प्रायश्चित  एक अन्य जानवर को मार कर किया जा सकता है  ???


क्या  रवि शंकर  निचे लिखे   मनुस्मिरती   को दुनिया के लोगो को बतायंगे ??


मनुस्मुर्ति" में क्या कहा हैं
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यह देखिये-
१- पुत्री,पत्नी,माता या कन्या,युवा,व्रुद्धा किसी भी स्वरुप में नारी स्वतंत्र नही होनी चाहिए. -मनुस्मुर्तिःअध्याय-९ श्लोक-२ से ६ तक.
...
२- पति पत्नी को छोड सकता हैं, सुद(गिरवी) पर रख सकता हैं, बेच सकता हैं, लेकिन स्त्री को इस प्रकार के अधिकार नही हैं. किसी भी स्थिती में, विवाह के बाद, पत्नी सदैव पत्नी ही रहती हैं. - मनुस्मुर्तिःअध्याय-९ श्लोक-४५
३- संपति और मिलकियत के अधिकार और दावो के लिए, शूद्र की स्त्रिया भी "दास" हैं, स्त्री को संपति रखने का अधिकार नही हैं, स्त्री की संपति का मलिक उसका पति,पूत्र, या पिता हैं. - मनुस्मुर्तिःअध्याय-९ श्लोक-४१६.
४- ढोर, गंवार, शूद्र और नारी, ये सब ताडन के अधिकारी हैं, यानी नारी को ढोर की तरह मार सकते हैं....तुलसी दास पर भी इसका प्रभाव दिखने को मिलता हैं, वह लिखते हैं-"ढोर,चमार और नारी, ताडन के अधिकारी."
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मनुस्मुर्तिःअध्याय-८ श्लोक-२९९
५- असत्य जिस तरह अपवित्र हैं, उसी भांति स्त्रियां भी अपवित्र हैं, यानी पढने का, पढाने का, वेद-मंत्र बोलने का या उपनयन का स्त्रियो को अधिकार नही हैं.- मनुस्मुर्तिःअध्याय-२ श्लोक-६६ और अध्याय-९ श्लोक-१८.
६- स्त्रियां नर्कगामीनी होने के कारण वह यग्यकार्य या दैनिक अग्निहोत्र भी नही कर सकती.(इसी लिए कहा जाता है-"नारी नर्क का द्वार") - मनुस्मुर्तिःअध्याय-११ श्लोक-३६ और ३७ .
७- यग्यकार्य करने वाली या वेद मंत्र बोलने वाली स्त्रियो से किसी ब्राह्मण भी ने भोजन नही लेना चाहिए, स्त्रियो ने किए हुए सभी यग्य कार्य अशुभ होने से देवो को स्वीकार्य नही हैं. - मनुस्मुर्तिःअध्याय-४ श्लोक-२०५ और २०६ .
८- - मनुस्मुर्ति के मुताबिक तो , स्त्री पुरुष को मोहित करने वाली - अध्याय-२ श्लोक-२१४ .
९ - स्त्री पुरुष को दास बनाकर पदभ्रष्ट करने वाली हैं. अध्याय-२ श्लोक-२१४
१० - स्त्री एकांत का दुरुप्योग करने वाली. अध्याय-२ श्लोक-२१५.
११. - स्त्री संभोग के लिए उमर या कुरुपताको नही देखती. अध्याय-९ श्लोक-११४.
१२- स्त्री चंचल और हदयहीन,पति की ओर निष्ठारहित होती हैं. अध्याय-२ श्लोक-११५.
१३.- केवल शैया, आभुषण और वस्त्रो को ही प्रेम करने वाली, वासनायुक्त, बेईमान, इर्षाखोर,दुराचारी हैं . अध्याय-९ श्लोक-१७.
१४.- सुखी संसार के लिए स्त्रीओ को कैसे रहना चाहिए? इस प्रश्न के उतर में मनु कहते हैं-
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१). स्त्रीओ को जीवन भर पति की आग्या का पालन करना चाहिए. - मनुस्मुर्तिःअध्याय-५ श्लोक-११५.
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२). पति सदाचारहीन हो,अन्य स्त्रीओ में आसक्त हो, दुर्गुणो से भरा हुआ हो, नंपुसंक हो, जैसा भी हो फ़िर भी स्त्री को पतिव्रता बनकर उसे देव की तरह पूजना चाहिए.- मनुस्मुर्तिःअध्याय-५ श्लोक-१५४.
जो इस प्रकार के उपर के ये प्रावधान वाले पाशविक रीति-नीति के विधान वाले पोस्टर क्यो नही छपवाये?
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१) वर्णानुसार करने के कार्यः -
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महातेजस्वी ब्रह्मा ने स्रुष्टी की रचना के लिए ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य और शूद्र को भिन्न-भिन्न कर्म करने को तै किया हैं -
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पढ्ना,पढाना,यग्य करना-कराना,दान लेना यह सब ब्राह्मण को कर्म करना हैं. अध्यायः१:श्लोक:८७
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प्रजा रक्षण , दान देना, यग्य करना, पढ्ना...यह सब क्षत्रिय को करने के कर्म हैं. - अध्यायः१:श्लोक:८९
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पशु-पालन , दान देना,यग्य करना, पढ्ना,सुद(ब्याज) लेना यह वैश्य को करने का कर्म हैं. - अध्यायः१:श्लोक:९०.
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द्वेष-भावना रहित, आंनदित होकर उपर्युक्त तीनो-वर्गो की नि:स्वार्थ सेवा करना, यह शूद्र का कर्म हैं. - अध्यायः१:श्लोक:९१.
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२) प्रत्येक वर्ण की व्यक्तिओके नाम कैसे हो?:-
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ब्राह्मण का नाम मंगलसूचक - उदा. शर्मा या शंकर
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क्षत्रिय का नाम शक्ति सूचक - उदा. सिंह
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वैश्य का नाम धनवाचक पुष्टियुक्त - उदा. शाह
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शूद्र का नाम निंदित या दास शब्द युक्त - उदा. मणिदास,देवीदास
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अध्यायः२:श्लोक:३१-३२.
(
३) आचमन के लिए लेनेवाला जल:-
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ब्राह्मण को ह्रदय तक पहुचे उतना.
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क्षत्रिय को कंठ तक पहुचे उतना.
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वैश्य को मुहं में फ़ैले उतना.
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शूद्र को होठ भीग जाये उतना, आचमन लेना चाहिए.
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अध्यायः२:श्लोक:६२.
(
४) व्यक्ति सामने मिले तो क्या पूछे?:-
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ब्राह्मण को कुशल विषयक पूछे.
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क्षत्रिय को स्वाश्थ्य विषयक पूछे.
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वैश्य को क्षेम विषयक पूछे.
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शूद्र को आरोग्य विषयक पूछे.
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अध्यायः२:श्लोक:१२७.
(
५) वर्ण की श्रेष्ठा का अंकन :-
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ब्राह्मण को विद्या से.
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क्षत्रिय को बल से.
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वैश्य को धन से.
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शूद्र को जन्म से ही श्रेष्ठ मानना.(यानी वह जन्म से ही शूद्र हैं)
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अध्यायः२:श्लोक:१५५.
(
६) विवाह के लिए कन्या का चयन:-
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ब्राह्मण सभी चार वर्ण की कन्याये पंसद कर सकता हैं.
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क्षत्रिय - ब्राह्मण कन्या को छोडकर सभी तीनो वर्ण की कन्याये पंसद कर सकता हैं.
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वैश्य - वैश्य की और शूद्र की ऎसे दो वर्ण की कन्याये पंसद कर सकता हैं.
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शूद्र को शूद्र वर्ण की ही कन्याये विवाह के लिए पंसद कर सकता हैं.- (अध्यायः३:श्लोक:१३) यानी शूद्र को ही वर्ण से बाहर अन्य वर्ण की कन्या से विवाह नही कर सकता.
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७) अतिथि विषयक:-
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ब्राह्मण के घर केवल ब्राह्मण ही अतिथि गीना जाता हैं,(और वर्ण की व्यक्ति नही)
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क्षत्रिय के घर ब्राह्मण और क्षत्रिय ही ऎसे दो ही अतिथि गीने जाते थे.
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वैश्य के घर ब्राह्मण,क्षत्रिय और वैश्य तीनो द्विज अतिथि हो सकते हैं, लेकिन ...
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शूद्र के घर केवल शूद्र ही अतिथि कहेलवाता हैं - (अध्यायः३:श्लोक:११०) और कोइ वर्ण का आ नही सकता...
(
८) पके हुए अन्न का स्वरुप:-
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ब्राह्मण के घर का अन्न अम्रुतमय.
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क्षत्रिय के घर का अन्न पय(दुग्ध) रुप.
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वैश्य के घर का अन्न जो है यानी अन्नरुप में.
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शूद्र के घर का अन्न रक्तस्वरुप हैं यानी वह खाने योग्य ही नही हैं.
(
अध्यायः४:श्लोक:१४)
(
९) शब को कौन से द्वार से ले जाए? :-
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ब्राह्मण के शव को नगर के पूर्व द्वार से ले जाए.
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क्षत्रिय के शव को नगर के उतर द्वार से ले जाए.
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वैश्य के शव को पश्र्चिम द्वार से ले जाए.
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शूद्र के शव को दक्षिण द्वार से ले जाए.
(
अध्यायः५:श्लोक:९२)
(
१०) किस के सौगंध लेने चाहिए?:-
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ब्राह्मण को सत्य के.
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क्षत्रिय वाहन के.
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वैश्य को गाय, व्यापार या सुवर्ण के.
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शूद्र को अपने पापो के सोगन्ध दिलवाने चाहिए.
(
अध्यायः८:श्लोक:११३)
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११) महिलाओ के साथ गैरकानूनी संभोग करने हेतू:-
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ब्राह्मण अगर अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो सिर पे मुंडन करे.
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क्षत्रिय अगर अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो १००० भी दंड करे.
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वैश्य अगर अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो उसकी सभी संपति को छीन ली जाये और १ साल के लिए कैद और बाद में देश निष्कासित.
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शूद्र अगर अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो उसकी सभी संपति को छीन ली जाये , उसका लिंग काट लिआ जाये.
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शूद्र अगर द्विज-जाती के साथ अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो उसका एक अंग काटके उसकी हत्या कर दे.
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अध्यायः८:श्लोक:३७४,३७५,३७९)
(
१२) हत्या के अपराध में कोन सी कार्यवाही हो?:-
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ब्राह्मण की हत्या यानी ब्रह्महत्या महापाप.(ब्रह्महत्या करने वालो को उसके पाप से कभी मुक्ति नही मिलती)
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क्षत्रिय की हत्या करने से ब्रह्महत्या का चौथे हिस्से का पाप लगता हैं.
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वैश्य की हत्या करने से ब्रह्महत्या का आठ्वे हिस्से का पाप लगता हैं.
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शूद्र की हत्या करने से ब्रह्महत्या का सोलह्वे हिस्से का पाप लगता हैं.(यानी शूद्र की जिन्द्गी बहोत सस्ती हैं)
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अध्यायः११:श्लोक:१२६)


महिला आन्दोलन के नाम पर हो रहे है ढोंग ,पाखंड ,लूट और षड्यंत्र


आज इंसान लगभग  सभी ग्रहों पर पहुच गया  है लेकिन जांच में आजतक यह नहीं पता चल  पाया की महिलाओं के लिए धर्म ग्रंथो में गुलामी लिखने वाला भगवान रहता  कहा  है .
कमाल की बात यह है की चाँद  और अन्तरिक्ष में पहुचने वाला मर्द  जो पूरी वैज्ञानिकता को जानता है , “ भगवान् और धर्म ग्रंथो की  सारी असलियत  को पहचानने  वाला मर्द  है वह भी जब घर में घुसता  है तो सारी आधुनिकता , सारे खुल्ले विचार , मानवतावाद ,  इंसानियत सब कुछ दरवाजे के पायदान पर झाड कर अंदर घर में घुसता है , , नीलिमा  चौहान की फेसबुक वाल से चोरी किया  गया कथन “

सवाल यह है की आज महिलाय अपने बेसिक अधिकारों के लिए लडती नजर आती है ,इसका कारण पुरुषवादी , ब्राह्मणवादी समाज ही जिम्मेवार नहीं है बल्कि महिलाओं की लड़ाई लड़ने वाली महिलाए  और महिला सन्घठन एक ऐसी मानसिक संस्था के रूप में उभर कर सामने आये है जिनमे महिला अधिकारों के नाम पर महिलाओं के खिलाफ  महिलाए ही षड्यंत्र में जुटी  है
महिलाओं को शिक्षा , सम्पति अधिकार ,  मैटरनिटी  बेनिफिट सब कुछ डॉ. भीम राव आंबेडकर ने १९५६  में ही प्रस्तावित किये  थे , लेकिन उस वक् न सिर्फ  कट्टर हिन्दू संघठनो ने इसका विरोध किया  बल्कि इस कार्य में महिलाए भी सबसे आगे थी  जो महिलाओं को इन अधिकारों के मिलने के खिलाफ  थी जिसका नतीजा यह हुआ की आज  तक महिलाए सिर्फ उन्ही अधिकारों के लिए लड़ रही है जो उन्हें बाबा साहेब ने १९५६ में ही दिलाने की  कोशिस  की थी
महिला आन्दोलन में एक  षड्यंत्र है  यह कहना बढ़ा  अजीब लगता है लेकिन गौर से देखिये को महिला आन्दोलन वो महिलाए चला  रही है जो एक पुरातनवादी / ब्राह्मणवादी विचारधारा को पोषित और पल्लवित करते है मसलन बी जे पी , संघ , भाजपा ये संघठन भी महिला मुक्तो की बाते करते है फिर संस्कृति के नाम पर उसी विचारधारा की तरफ महिलाओं को धकेलते है जो महिलाओं को मानसिक  रूप से गुलाम बनाती  है .


इसके अलावा कुछ महिला संघठन उन महिलाओं के द्वारा चलाये जा रहे है जो जो महिलाए एक तो टाइम पास के लिए एन जी ओ  चलाती है , दुसरा उनके  पति या मर्द ऐसी संस्थाओं में होते है जो उन्हें इन आंदोलनों के नाम पर सरकारी फंड दिलाते है ,  मै ऐसा बिलकुल नहीं कहना चाहूँगा की ये महिलाओं उन पैसो से एश करती है , लेकिन ये बात जरूर  है महिलाओं की असली समस्या से वाकिफ होते हुए भी उनसे दूर  रहती है  हाँ , मीडिया में छाये  रहने के हमेशा प्रयास करती है . और  रहती भी है


तीसरी सबसे बड़ी समस्या महिला आंदोलनों की यह है ये सारे आन्दोलन जाति आधारित रहते है , यानी ये महिलाए या तो उन दबी कुचली दलित गरीब महिलाओं की व् आवाज उठाती है जो  इनके लिए सिर्फ एक विषय भर रहती है , जिनकी आड़  लेकर ये अपनी रोटिया सेंकती  है , हाँ अगर उनकी जाति  या स्वर्ण  जाति  की किसी महिला के साथ कुछ हो जाए तो ये आंदोलनों की बरसात कर देती है , दिन  रात उसमे लगी रहती है , दिल्ली बस बलात्कार काण्ड एक ऐसी ही जातिवादी मानसिकता का उधाह्र्ण  है , रोज दलित , गरीब , मजदूर महिलाओं के बलात्कार होते है लेकिन उनके बारे में ये सिर्फ भाषण  और ब्यान देना चाहिती है ,
ये ही महिलाए , महिलाओं के नाम पर उनके सारे हक खा जाती है  चाहे वो महिला आरक्षण हो या और कोई
सबसे बड़ी बात महिला समस्या जितनी भी विकराल क्यों न हो ये महिलाए अपनी अपनी पार्टी के खिलाफ कभी कोई आन्दोलन नहीं छेड़ती  यानी मतलब साफ़ है फायदा है तो आन्दोलन है 



Monday, 7 March 2016

देश में विरोध , भारतीय विदेशो में मांगते है ब्राह्मण आरक्षण ,देश में ही नहीं भगवा मानसिकता के लोग विदेशो में भी इस जहर को फैलाते है

जन उदय : देश में विरोध , भारतीय विदेशो में मांगते है आरक्षण ,देश में ही नहीं भगवा मानसिकता के लोग विदेशो में भी इस जहर को फैलाते है

कनाडा दुनिया की सभी संस्कृतियो का समावेश , एक खूबसूरत नज़ारा देखने को मिलता है , कनाडा दुनिया का शायद एकमात्र देश है जहां पर दुनिया की सभी हिस्सों के लोग रहते है , सभी भाषा और संस्कृतियो का एक साथ समन्वय और समावेश है
 .
कहने को भारत भी विविधता वाला देश है , यहाँ भी दुनिया के सभी धर्म , प्रजाति के लोग है लेकिन जो आदर सम्मान कनाडा में विदेशी मूल के लोगो को मिलता है वो शायाद कही नहीं . कनाडा में ६९ % लोग विदेशी मूल के है ये एक बहुत बड़ी संख्या है क्योकि ये नज़ारा भी आपको देखने को कही नहीं मिलेगा , लेकिन ऐसा नहीं की इन विदेशी मूल के लोगो को अपने नागरिक हको के लिए लड़ना नहीं पड़ा कोई आन्दोलन नहीं करना पड़ा . यहाँ भी अन्य देशो की तरह सामाजिक आन्दोलन हुए जो लोगो ने अपने हको के लिए लड़े .

कनाडा के सविंधान में इस बात की पूरी कोशिश की गई है की वहा रहने वाले लोग सामान रूप से नागरिक कहे जाए और सामान आदर प्राप्त करे .
सामाजिक उठान के लिए वहा सामान रोजगार अवसर १९९५ में बनाया गया और ये सिर्फ कानून नहीं है बल्कि इसका पालन किया जाता है यहाँ रहने वाले नागरिक चाहे वो चीन से हो अफ्रीका से हो या भारत से हो इस कानून का पूरा लाभ उठाते है और सरकार इस बात की पूरी कोशिस करती है की इस कानून का पालन हो .
कनाडा में रहने वाले भारतीय मूल के लोग इस कानून का पूरा फायदा उठाते है नौकरी में तो है ही इसे साथ साथ राजनीति आदि में भी भारतीयों की पूरी हिस्सेदारी होती है , यही कारण है की इस बार सामान्य चुनाव के बाद कनाडा में पहली बार एक सिख को रक्षा मंत्री बनाया गया है .
लेकिन भारतीय लोगो के चरित्र की एक ख़ास बात समझ नहीं आती की कनाडा और अन्य यूरोपीय देशो में ये लोग अपने लिए आरक्षण की मांग करते है समानता का हक मांगते है लेकिन यही लोग भारत के सन्दर्भ में जातिवादी बन जाते है , धार्मिक रूप से असह्ष्णु बन जाते है मार पिटाई और आतंकवाद पर उतर जाते है . इन्ही भारतीय लोगो की मदद से भारत में कुछ असामाजिक तत्वों ने आतंक मचाया हुआ है , कभी गाय के नाम पर .
भारत में धर्म के नाम पर दंगे कराने वाले केवल ब्राह्मण और बनिए संघठन ही होते है और ये जाती के लोग ही विदेशो में भी भारत की इस सामाजिक बिमारी को फैला रहे है , जिसके कारण इंग्लैंड में जातिविरोधी कानून बनाना पड़ा .
अगर इन लोगो को आरक्षण सामाजिक न्याय से इतना परहेज है तो यही लोग विदेशो में आरक्षण और सामाजिक न्याय की मांग क्यों करते है


ख़तरा मुसलमानों से नहीं, ब्राह्मणों से है' नुख़बत मलिक बीबीसी उर्दू संवाददाता, इस्लामाबाद

'
जगजीत सिंह पाकिस्तान के उन दलित हिंदुओं में से हैं जो भेदभाव से तंग आकर अपना धर्म बदलने पर मजबूर हुए हैं.
जगजीत अपने परिवार के साथ सिंध प्रांत के रेगिस्तानी ज़िले थरपारकर के मुख्यालय मट्ठी में रहते हैं.
2005 तक जगजीत का नाम हसानंद था, लेकिन फिर उन्होंने अपनी पत्नी और बच्चों के साथ अपना धर्म छोड़ कर सिख धर्म अपना लिया.
वो कहते हैं, "मैं इस इलाक़े को छोड़कर नहीं जाना चाहता हूं और यहाँ बग़ावत की एक मिसाल के तौर पर रहना चाहता हूँ."
जगजीत यहां तक दावा करते हैं कि पांच साल पहले ब्राह्मण हिंदुओं ने उन पर क़ातिलाना हमला भी किया था.
वो कहते हैं कि धर्म परिवर्तन करने से उन्हें मन की शांति मिली है.
उनके मुताबिक़, "मेरे बच्चे इस बात से खुश हैं कि उन्हें आने वाली ज़िंदगी में वो अपमान नहीं सहन करना पड़ेगा जो मैंने सहा. मुझे तो लोग मेघवाड़ (एक दलित जाति) ही कहेंगे, लेकिन मेरा बेटा तो सरदार का बेटा कहलाएगा.
जगजीत सिंह सामाजिक समानता और अधिकार पाने के लिए बग़ावत करने वाले इकलौते इंसान नहीं है.

मट्ठी में दलित समुदाय के अधिकारों के लिए काम करने वाले मलजी राठौर कहते हैं कि थरपारकर में रहने वाले दलित, हिंदुओं की ऊंची जाति के भेदभाव का सामना करते हैं, यही वजह है कि अब दलित समुदाय अपना नाम, अपनी पहचान और अपना धर्म भी बदलने के लिए मजबूर है.
उनके मुताबिक वे लोग सोचते हैं कि 'हम एक मंदिर में इकट्ठे पूजा नहीं कर सकते, एक बर्तन में खा नहीं सकते, तो धर्म परिवर्तन करना ही ठीक है और वो कर लेते हैं'.
थरपारकर में आज भी दूसरी बड़ी आबादी हिंदुओं की है जिसका लगभग 80 प्रतिशत अनुसूचित जाति के तौर पर पहचाना जाता है जो आम तौर पर दलित कहे जाते हैं.
1956 में पाकिस्तान का संविधान बनाते हुए हिंदू धर्म की निचली समझी जाने वाली सभी जातियों को अनुसूचित जाति का नाम दिया गया था.
इस अनुसूचित जाति में मेघवाड़, भील, कोली सहित कुल मिलाकर 43 जातियां ऐसी हैं जिनसे संबंधित सदस्यों की आबादी अब दलित कार्यकर्ताओं के अनुसार 80 लाख हो चुकी है.
ये लोग पाकिस्तान के विभिन्न शहरों में विभिन्न नामों के साथ रहते हैं.
'पाकिस्तान हिंदू पंचायत' संगठन के महासचिव रवि दावानी कहते हैं, "दलित समुदाय को हिंदुओं में गिना जाए तो समस्या नहीं होनी चाहिए. पाकिस्तान में हिन्दू अल्पसंख्यक अधिकारों की बात करना ऐसे ही लोगों की बात करने के बराबर है."
लेकिन पाकिस्तान में दलित समुदाय के अधिकारियों के लिए काम करने वाले और राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता डॉक्टर सोनू खनगरियानी तस्वीर का दूसरा रुख दिखाते हुए कहते हैं कि हिंदू अल्पसंख्यकों को मिलने वाले अधिकार तो ब्राह्मण ले जाते हैं.
वो कहते हैं, "इसमें कोई दो राय नहीं कि हमें इस देश में मुसलमानों से कोई ख़तरा नहीं, बल्कि ख़तरा ब्राह्मणों से है और हमारे लोग असुरक्षा की वजह से अपनी जाति नहीं बताते हैं. हम चाहते हैं कि चाहे वो किसी भी धर्म में हो लेकिन अपनी पहचान क़ायम रखें."
पाकिस्तानी सरकार की ओर से कई दलितों को राष्ट्रपति पुरस्कार दिए जाने के बावजूद उनके समुदाय की स्थिति में बदलाव नहीं आया है.
सोमजी ढारानी ने थरपारकर के ऐसे 108 लोगों की कहानियां एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित की हैं जो भेदभाव और अन्य बाधाओं के बावजूद अपने-अपने क्षेत्रों में ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं.
यह किताब सिंधी में है जिसे अब उर्दू और अंग्रेजी में प्रकाशित करने की कोशिश भी की जा रही है और सोमजी ढारानी के मुताबिक उन्होंने अपने लेख में इसी बात को स्पष्ट किया है कि वे किसी से कम नहीं हैं.
वो कहते हैं, "हम दलित नहीं और ना ही अनुसूचित जाति हैं. हम मेघवाड़ हैं. हमारे समुदाय में एक से एक डॉक्टर, इंजीनियर, कलाकार, गायक और एक्टिविस्ट हैं. लोग राष्ट्रपति पुरस्कार ले चुके हैं. हम पढ़े लिखे हैं. क्यों हम खुद को शूद्र कहलवाएं और अपने आप को नीच समझे."
पाकिस्तान सरकार ने अनुसूचित जातियों के लिए सरकारी नौकरियों में छह प्रतिशत आरक्षण रखा है.

लेकिन दलित कार्यकर्ताओं के अनुसार अगर सरकार ने उनकी ओर ध्यान नहीं दिया तो हिन्दू धर्म में मौजूद वर्ग विभाजन उनकी आने वाली पीढ़ियों को भी दबाकर रखेगा.

रोहित वेमुला की हत्या ध्यान हटाने के लिए रचाया जे एन यु का स्वांग ,संघ ने : ब्राह्मण शासन है अंतिम लक्ष्य

देश में हो  रही दलित  हत्याए आदिवासिओ की हत्याए  लगातार हो  रही है और बाकायदा इनकी संख्या  लगातार बढती जा रही  है , उड़ीसा से लेकर मध्य प्रदेश , छतीसगढ़ ,महारष्ट्र में कोंग्रेस  बी जे पी दोनों एक साथ मिल कर आदिवासी हत्याओं में शामिल है ,

ये बात जानकार सबको हैरानी होगी की दलित हत्या के मामले में ये दोनों दल एक है , एकमत है


फिलहाल ही  एक आदिवासी महिला सोनी सोरी के मूह पर तेज़ाब फेंका गया  इससे  पहले  उसके निजी अंग में पथ्तर  भर दिए थे पुलिस वालो ने , इस कार्य की वजह से उन पुलिस वालो को राष्ट्रपति का वीरता पुरूस्कार भी मिला था
 दलित हत्या के क्रम में संघियो ने धीरे धीरे उन सस्न्थाओ को और उन छात्रो को निशाना बनाना शुरू किया किया  जहा पर दलित छात्र उनके उपर हो  रहे है जुल्मो के खिलाफ आवाज उठाते है ,

और इस प्रक्रिया में  दक्षिण भारत को चुना गया और  वहा पर आई आई टी मद्रास  को सबसे पहले निशाना  बनाया गया  जहा पर बीफ को लेकर संघियो ने उन्माद मचाया  और दलित छात्रो को प्रताड़ित किया गया .

इसके बाद हैदराबाद  केन्द्रीय विश्विद्यालय  को चुना गया  जहा पर झूटा इल्जाम लगा कर रोहित वेमुला और  अन्य  छात्रो को  जबरदस्ती  होस्टल से निकाला गया  और  ये  छात्र सडक पर रात बिताने के लिए मजबूर किया गया , इसके साथ साथ इनकी स्कोलरशिप भी रोक दी  गयी यानी की मानसिक , आर्थिक और शारीरक तीनो तरह से इनको प्रताड़ित  किया गया ,  हैदराबाद केन्द्रीय  विश्वविध्यालय के इस दलित आन्दोलन  का अंत रोहत वेमुला की संस्थानिक हत्या से हुआ जिसका पुरे देश में ही नहीं दुनिया में विरोध होने लगा  सारे देश  की भावना रोहित और उसके परिवार से जुड़  गुई  संघियो को लगा जैसे ये उनकी एक राजनेतिक हार है  रोहित के मामले को दबाने के लिए एक नया षड्यंत्र  रचा गया और ये  षड्यंत्र जे एन यु षड्यंत्र के नाम से जाना गया जहा पर  संघियो ने पूरी प्लानिंग के साथ अपने ही लोगो से देश विरोधी नारे लगवाये और पुलिस  और मीडिया की मदद से जे एन यु छात्रो को गिरफ्तार  करवाया गया वो भी देशद्रोह के आरोप में

इन छात्रो की भी गलती यही  थी की ये भी ब्राह्मणवाद , सामन्तवाद , जातिवाद के खिलाफ नारे लगाते थे , जे एन यु की घटना के जरिये  संघियो/ भाजपा  ने  पुरे देश का ध्यान दलितों  के उपर हो  रहे अत्याचार से हटाने की एक नाकाम कोशिस  की जो की हो नहीं पाया



घटना सिर्फ ये नहीं  है  इतिहास में भाजपा / संघ इसी तरह के कार्यो में लिप्त रहे है 

बोखलाई भाजपा और संघ ने कन्हिया के समक्ष उतारा एक विक्षिप्त लड़की को : लड़की ने दी बहस की चुनोती ,विक्षिप्त मीडिया बना रहा है लड़की को हीरो

नई दिल्ली, 07 मार्च (एजेंसी)। जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को बहस के लिए खुली चुनौती देने वाली लुधियाना की 15 वर्षीय जाह्नवी बहल इन दिनों अपनी मानसिक विक्षिप्त के कारण सोशल मीडिया पर छाई हुई है।

इसी साल गणतंत्र दिवस के मौके पर स्वच्छ भारत अभियान में सहयोग के लिए सम्मानित की गई जाह्नवी भाजपा और संघ के करीबी बताई जाती है , इसने कन्हैया कुमार को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के विषय पर सार्वजनिक बहस के लिए ललकारा है।

जाह्नवी का कहना है कि कन्हैया कुमार ने देश के लिए बहुत कुछ करने वाले, दुनियाभर में भारत को पहचान दिलाने वाले, बिना कोई छुट्टी लिए सिर्फ देश के बारे में सोचते रहने वाले और देश का भला सोचते रहने वाले प्रधानमंत्री के खिलाफ बोला है।

जाह्नवी ने कहा कि कन्हैया उन्हें किसी भी जगह किसी भी वक्त मिल सकते हैं और जो भी उन्होंने प्रधानमंत्री के खिलाफ बोला है वो उस पर उनसे बहस करने के लिए तैयार हैं। जाह्नवी ने कहा कि अगर वो प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ बात कर रहे हैं, तो इसका मतलब है कि वह देश के लोगों के खिलाफ भी बात कर रहे हैं। 




जाह्नवी की ये टिप्पणियां रविवार को माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर ट्रेंड कर रही थीं, और उन पर हजारों कमेंट आए थे। वैसे, जाह्नवी वर्ष 2010 से सामाजिक कार्य करती रही है, और स्वच्छ भारत अभियान में सहयोग के लिए उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से प्रशस्ति पत्र भा प्राप्त हुआ था।

कन्हैया ने पिछले सप्ताह न्यायिक हिरासत से बाहर आने के बाद जेएनयू लौटकर एक भाषण दिया था, जो दुनियाभर में चर्चा का विषय तो बना ही था, राजनैतिक तबकों में उस पर कड़ी प्रतिक्रियाएं भी हुई थीं। अपने भाषण में कन्हैया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा उनके विकास मंत्र पर वार करते हुए कहा था, मैं गांव का रहने वाला हूं, जहां जादू के शो होते हैं। वहां लोग जादू दिखाते हैं, और ऐसी अंगूठियां बेचते हैं, जिनसे सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। हमारे देश में ऐसे ही कुछ लोग हैं, जो कहते हैं, काला धन वापस आएगा, सबका साथ, सबका विकास।

गौर तलब है की कन्हिया ने सिर्फ उन्ही बातो को कहा जो बाते नरेंदर मोदी , अमित शाह और भाजपा अपने विज्ञापनों में चुनाव से पहले कह रही थी और चुनाव जितने के बाद उन सब चुनावी वादों को चुनावी जूमला बता दिया , जिसके कारण पुरे देश में असंतोष का माहोल बना हुआ है ,


भारत के लोकतंत्र में ऐसा धोखा शायद ही किसी नेता और पार्टी ने दिया हो