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Monday, 7 March 2016

ख़तरा मुसलमानों से नहीं, ब्राह्मणों से है' नुख़बत मलिक बीबीसी उर्दू संवाददाता, इस्लामाबाद

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जगजीत सिंह पाकिस्तान के उन दलित हिंदुओं में से हैं जो भेदभाव से तंग आकर अपना धर्म बदलने पर मजबूर हुए हैं.
जगजीत अपने परिवार के साथ सिंध प्रांत के रेगिस्तानी ज़िले थरपारकर के मुख्यालय मट्ठी में रहते हैं.
2005 तक जगजीत का नाम हसानंद था, लेकिन फिर उन्होंने अपनी पत्नी और बच्चों के साथ अपना धर्म छोड़ कर सिख धर्म अपना लिया.
वो कहते हैं, "मैं इस इलाक़े को छोड़कर नहीं जाना चाहता हूं और यहाँ बग़ावत की एक मिसाल के तौर पर रहना चाहता हूँ."
जगजीत यहां तक दावा करते हैं कि पांच साल पहले ब्राह्मण हिंदुओं ने उन पर क़ातिलाना हमला भी किया था.
वो कहते हैं कि धर्म परिवर्तन करने से उन्हें मन की शांति मिली है.
उनके मुताबिक़, "मेरे बच्चे इस बात से खुश हैं कि उन्हें आने वाली ज़िंदगी में वो अपमान नहीं सहन करना पड़ेगा जो मैंने सहा. मुझे तो लोग मेघवाड़ (एक दलित जाति) ही कहेंगे, लेकिन मेरा बेटा तो सरदार का बेटा कहलाएगा.
जगजीत सिंह सामाजिक समानता और अधिकार पाने के लिए बग़ावत करने वाले इकलौते इंसान नहीं है.

मट्ठी में दलित समुदाय के अधिकारों के लिए काम करने वाले मलजी राठौर कहते हैं कि थरपारकर में रहने वाले दलित, हिंदुओं की ऊंची जाति के भेदभाव का सामना करते हैं, यही वजह है कि अब दलित समुदाय अपना नाम, अपनी पहचान और अपना धर्म भी बदलने के लिए मजबूर है.
उनके मुताबिक वे लोग सोचते हैं कि 'हम एक मंदिर में इकट्ठे पूजा नहीं कर सकते, एक बर्तन में खा नहीं सकते, तो धर्म परिवर्तन करना ही ठीक है और वो कर लेते हैं'.
थरपारकर में आज भी दूसरी बड़ी आबादी हिंदुओं की है जिसका लगभग 80 प्रतिशत अनुसूचित जाति के तौर पर पहचाना जाता है जो आम तौर पर दलित कहे जाते हैं.
1956 में पाकिस्तान का संविधान बनाते हुए हिंदू धर्म की निचली समझी जाने वाली सभी जातियों को अनुसूचित जाति का नाम दिया गया था.
इस अनुसूचित जाति में मेघवाड़, भील, कोली सहित कुल मिलाकर 43 जातियां ऐसी हैं जिनसे संबंधित सदस्यों की आबादी अब दलित कार्यकर्ताओं के अनुसार 80 लाख हो चुकी है.
ये लोग पाकिस्तान के विभिन्न शहरों में विभिन्न नामों के साथ रहते हैं.
'पाकिस्तान हिंदू पंचायत' संगठन के महासचिव रवि दावानी कहते हैं, "दलित समुदाय को हिंदुओं में गिना जाए तो समस्या नहीं होनी चाहिए. पाकिस्तान में हिन्दू अल्पसंख्यक अधिकारों की बात करना ऐसे ही लोगों की बात करने के बराबर है."
लेकिन पाकिस्तान में दलित समुदाय के अधिकारियों के लिए काम करने वाले और राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता डॉक्टर सोनू खनगरियानी तस्वीर का दूसरा रुख दिखाते हुए कहते हैं कि हिंदू अल्पसंख्यकों को मिलने वाले अधिकार तो ब्राह्मण ले जाते हैं.
वो कहते हैं, "इसमें कोई दो राय नहीं कि हमें इस देश में मुसलमानों से कोई ख़तरा नहीं, बल्कि ख़तरा ब्राह्मणों से है और हमारे लोग असुरक्षा की वजह से अपनी जाति नहीं बताते हैं. हम चाहते हैं कि चाहे वो किसी भी धर्म में हो लेकिन अपनी पहचान क़ायम रखें."
पाकिस्तानी सरकार की ओर से कई दलितों को राष्ट्रपति पुरस्कार दिए जाने के बावजूद उनके समुदाय की स्थिति में बदलाव नहीं आया है.
सोमजी ढारानी ने थरपारकर के ऐसे 108 लोगों की कहानियां एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित की हैं जो भेदभाव और अन्य बाधाओं के बावजूद अपने-अपने क्षेत्रों में ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं.
यह किताब सिंधी में है जिसे अब उर्दू और अंग्रेजी में प्रकाशित करने की कोशिश भी की जा रही है और सोमजी ढारानी के मुताबिक उन्होंने अपने लेख में इसी बात को स्पष्ट किया है कि वे किसी से कम नहीं हैं.
वो कहते हैं, "हम दलित नहीं और ना ही अनुसूचित जाति हैं. हम मेघवाड़ हैं. हमारे समुदाय में एक से एक डॉक्टर, इंजीनियर, कलाकार, गायक और एक्टिविस्ट हैं. लोग राष्ट्रपति पुरस्कार ले चुके हैं. हम पढ़े लिखे हैं. क्यों हम खुद को शूद्र कहलवाएं और अपने आप को नीच समझे."
पाकिस्तान सरकार ने अनुसूचित जातियों के लिए सरकारी नौकरियों में छह प्रतिशत आरक्षण रखा है.

लेकिन दलित कार्यकर्ताओं के अनुसार अगर सरकार ने उनकी ओर ध्यान नहीं दिया तो हिन्दू धर्म में मौजूद वर्ग विभाजन उनकी आने वाली पीढ़ियों को भी दबाकर रखेगा.

रोहित वेमुला की हत्या ध्यान हटाने के लिए रचाया जे एन यु का स्वांग ,संघ ने : ब्राह्मण शासन है अंतिम लक्ष्य

देश में हो  रही दलित  हत्याए आदिवासिओ की हत्याए  लगातार हो  रही है और बाकायदा इनकी संख्या  लगातार बढती जा रही  है , उड़ीसा से लेकर मध्य प्रदेश , छतीसगढ़ ,महारष्ट्र में कोंग्रेस  बी जे पी दोनों एक साथ मिल कर आदिवासी हत्याओं में शामिल है ,

ये बात जानकार सबको हैरानी होगी की दलित हत्या के मामले में ये दोनों दल एक है , एकमत है


फिलहाल ही  एक आदिवासी महिला सोनी सोरी के मूह पर तेज़ाब फेंका गया  इससे  पहले  उसके निजी अंग में पथ्तर  भर दिए थे पुलिस वालो ने , इस कार्य की वजह से उन पुलिस वालो को राष्ट्रपति का वीरता पुरूस्कार भी मिला था
 दलित हत्या के क्रम में संघियो ने धीरे धीरे उन सस्न्थाओ को और उन छात्रो को निशाना बनाना शुरू किया किया  जहा पर दलित छात्र उनके उपर हो  रहे है जुल्मो के खिलाफ आवाज उठाते है ,

और इस प्रक्रिया में  दक्षिण भारत को चुना गया और  वहा पर आई आई टी मद्रास  को सबसे पहले निशाना  बनाया गया  जहा पर बीफ को लेकर संघियो ने उन्माद मचाया  और दलित छात्रो को प्रताड़ित किया गया .

इसके बाद हैदराबाद  केन्द्रीय विश्विद्यालय  को चुना गया  जहा पर झूटा इल्जाम लगा कर रोहित वेमुला और  अन्य  छात्रो को  जबरदस्ती  होस्टल से निकाला गया  और  ये  छात्र सडक पर रात बिताने के लिए मजबूर किया गया , इसके साथ साथ इनकी स्कोलरशिप भी रोक दी  गयी यानी की मानसिक , आर्थिक और शारीरक तीनो तरह से इनको प्रताड़ित  किया गया ,  हैदराबाद केन्द्रीय  विश्वविध्यालय के इस दलित आन्दोलन  का अंत रोहत वेमुला की संस्थानिक हत्या से हुआ जिसका पुरे देश में ही नहीं दुनिया में विरोध होने लगा  सारे देश  की भावना रोहित और उसके परिवार से जुड़  गुई  संघियो को लगा जैसे ये उनकी एक राजनेतिक हार है  रोहित के मामले को दबाने के लिए एक नया षड्यंत्र  रचा गया और ये  षड्यंत्र जे एन यु षड्यंत्र के नाम से जाना गया जहा पर  संघियो ने पूरी प्लानिंग के साथ अपने ही लोगो से देश विरोधी नारे लगवाये और पुलिस  और मीडिया की मदद से जे एन यु छात्रो को गिरफ्तार  करवाया गया वो भी देशद्रोह के आरोप में

इन छात्रो की भी गलती यही  थी की ये भी ब्राह्मणवाद , सामन्तवाद , जातिवाद के खिलाफ नारे लगाते थे , जे एन यु की घटना के जरिये  संघियो/ भाजपा  ने  पुरे देश का ध्यान दलितों  के उपर हो  रहे अत्याचार से हटाने की एक नाकाम कोशिस  की जो की हो नहीं पाया



घटना सिर्फ ये नहीं  है  इतिहास में भाजपा / संघ इसी तरह के कार्यो में लिप्त रहे है 

बोखलाई भाजपा और संघ ने कन्हिया के समक्ष उतारा एक विक्षिप्त लड़की को : लड़की ने दी बहस की चुनोती ,विक्षिप्त मीडिया बना रहा है लड़की को हीरो

नई दिल्ली, 07 मार्च (एजेंसी)। जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को बहस के लिए खुली चुनौती देने वाली लुधियाना की 15 वर्षीय जाह्नवी बहल इन दिनों अपनी मानसिक विक्षिप्त के कारण सोशल मीडिया पर छाई हुई है।

इसी साल गणतंत्र दिवस के मौके पर स्वच्छ भारत अभियान में सहयोग के लिए सम्मानित की गई जाह्नवी भाजपा और संघ के करीबी बताई जाती है , इसने कन्हैया कुमार को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के विषय पर सार्वजनिक बहस के लिए ललकारा है।

जाह्नवी का कहना है कि कन्हैया कुमार ने देश के लिए बहुत कुछ करने वाले, दुनियाभर में भारत को पहचान दिलाने वाले, बिना कोई छुट्टी लिए सिर्फ देश के बारे में सोचते रहने वाले और देश का भला सोचते रहने वाले प्रधानमंत्री के खिलाफ बोला है।

जाह्नवी ने कहा कि कन्हैया उन्हें किसी भी जगह किसी भी वक्त मिल सकते हैं और जो भी उन्होंने प्रधानमंत्री के खिलाफ बोला है वो उस पर उनसे बहस करने के लिए तैयार हैं। जाह्नवी ने कहा कि अगर वो प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ बात कर रहे हैं, तो इसका मतलब है कि वह देश के लोगों के खिलाफ भी बात कर रहे हैं। 




जाह्नवी की ये टिप्पणियां रविवार को माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर ट्रेंड कर रही थीं, और उन पर हजारों कमेंट आए थे। वैसे, जाह्नवी वर्ष 2010 से सामाजिक कार्य करती रही है, और स्वच्छ भारत अभियान में सहयोग के लिए उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से प्रशस्ति पत्र भा प्राप्त हुआ था।

कन्हैया ने पिछले सप्ताह न्यायिक हिरासत से बाहर आने के बाद जेएनयू लौटकर एक भाषण दिया था, जो दुनियाभर में चर्चा का विषय तो बना ही था, राजनैतिक तबकों में उस पर कड़ी प्रतिक्रियाएं भी हुई थीं। अपने भाषण में कन्हैया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा उनके विकास मंत्र पर वार करते हुए कहा था, मैं गांव का रहने वाला हूं, जहां जादू के शो होते हैं। वहां लोग जादू दिखाते हैं, और ऐसी अंगूठियां बेचते हैं, जिनसे सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। हमारे देश में ऐसे ही कुछ लोग हैं, जो कहते हैं, काला धन वापस आएगा, सबका साथ, सबका विकास।

गौर तलब है की कन्हिया ने सिर्फ उन्ही बातो को कहा जो बाते नरेंदर मोदी , अमित शाह और भाजपा अपने विज्ञापनों में चुनाव से पहले कह रही थी और चुनाव जितने के बाद उन सब चुनावी वादों को चुनावी जूमला बता दिया , जिसके कारण पुरे देश में असंतोष का माहोल बना हुआ है ,


भारत के लोकतंत्र में ऐसा धोखा शायद ही किसी नेता और पार्टी ने दिया हो

Sunday, 6 March 2016

तानाशाह भाजपा अगला लोकसभा चुनाव हारी तो कर लेगी हथियारों के दम देश पर कब्जा

 हलांकि देश में भाजपा शासन का आना  ही देश का सबसे बढ़ा  दुर्भाग्य था लेकिन ये सारा  कार्य एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत हुआ तो पुरे देश ने भाजपा को सम्मान की दृष्टि से देखा और नरेंदर मोदी को  प्रधान मंत्री के  रूप  में  दिल से स्वीकार  भी  किया
जिस तरह से किसी भी पार्टी से देश की जनता उम्मीद करती है उसी तरह जनता ने भाजपा  सरकार से भी उम्मीद की देश की टूटती  ,बिखरती अर्थ वाव्य्स्था को भाजपा  संभाल लेगी  और महंगाई , पर रोक लगायगी , दाम कम होंगे, पट्रोल के दाम कम होंगे  बेरोजगारी  कम होगी  और युवाओं को विकास के नए  रास्ते मिलेंगे .

लेकिन युवाओं के साथ और देश के साथ बहुत बढ़ा  धोखा  हुआ नरेंद्र मोदी सिर्फ भाषणों से और घोषणाओं से लोगो का दिल बहलाने लगे , कुछ समय तो देश की जनता भाषणों से से भी खुश नजर आये  , लेकिन फिर भी कुछ  न हुआ  , कुछ लोगो ने कहा  की भाजपा  सरकार को कुछ समय  देना चाहिए ताकि वो चीजो को समझ कर अर्थ वाव्य्स्था को सही दिशा में ले जा सके लेकिन दो साल बाद भी कुछ नहीं हुआ ,
अपनी नाकामयाबी को भाजपा समझ भी  रही  थी , हालांकि ऐसा नहीं है की भाजपा  ने कोशिश  नहीं की लेकिन शायद  उसकी सारी  कोशिशे  सब बेकार गई , यानी पिछले  दो सालो में भाजपा  पूरी तरह विफल   रही है .
अब भाजपा ने अपने पुराने तरीके भी इस्तेमाल करने शुरू कर दिए यानी राज्यों के आम चुनावों में साम्प्रदायिक  दंगे कराये गए , मुज्ज़फर नगर दंगे , इसके बाद दादरी में गोमांस को लेकर एक मुस्लिम व्यक्ति की हत्या  कराई गई ,  हर समय देश में एक असंतोष का माहोल बनता चला गया  उधर दूसरी तरफ  विश्विध्यालो में अपने लोगो को लाना और संघियो के प्रभाव को बढाने के लिए  प्रयास किये जाने लगे , मद्रास आई आई टी , हैदराबाद केन्द्रीय विश्वविध्यालय  में रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या , दूसरी तरफ जे एन यू , पुणे फिल्म स्कूल , फिर इलाहाबाद विश्वविध्यालय में  ऋचा सिंह को प्रताड़ित किया जाने लगा , स्कूलों और कोलेजो में पाठ्यक्रम को बदलना , जे एन यू  की घटना ने तो पुरे विश्व को हिला दिया यही नहीं पुरे  विश्व में भारत की इमेज बहुत गन्दी हो गई 

कन्हिया के जेल से आने के बाद जो भाषण हुआ उसके बाद  कोई  उसकी जीभ  काटने की बात कर रहा है  , कोई उसकी  ह्त्या करवा   रही  है , कोई उसको  गोली मार  रहा है
कमाल की बात है की इस  तरह की बाते करने वाले खुल्ले आम अखबारों में और टीवी  चंनेलो में बैठे  बकवास कर  रहे है , और पुलिस प्रशासन घर बैठे इन्हें देख रहे है ,

जो लोग देश के माहोल  को खराब करने पर तुले है उनके खिलाफ  कोई भी कार्यवाही  नहीं  हो  रही  है , अगर  हालात ऐसे ही  रहे तो ऐसा लगता है की आने वाले वक्त में जब भाजपा सत्ता से बहार होने लगेगी  तो वो इस बात को बर्दास्त नहीं कर पायंगे और फिर भाजपा संघ के साथ मिल  कर एक हथियारबंद कब्जा देश पर करना  चाहेगी हालांकि  ये शायद आज के दौर में न हो पाए लेकिन हालात  ऐसे लग  रहे है की भाजपा अब सत्ता से बहार नहीं जाना चाहेगी  और इस कार्य के लिए चाहे दंगे हो चाहे दलितों की हत्या हो  या खुनी  खेल  भाजपा   किसी  बात से पीछे  नहीं हटेगी 

देश में बढ़ रहा है भगवा आतंकवाद , जे एन यु के रोहित वेमुला/ कनाहिय्या की जान को खतरा


हैदराबाद  सेंट्रल यूनिवर्सिटी  में रोहित वेमुला की हत्या के  से शुरू हुआ भगवा आतंक देश में दिनों दिन बढ़ता  जा रहा है ऐसा लग रहा है देश में कानून नाम की कोई चीज नहीं  रही गई है अपने आपको देशभक्त कहने वाले देश की इज्जत को दुनिया में तार तार कर रहे है ,
गौर तलब है है की रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या में सीधे सीधे संघ का बगल बच्चा ए बी वी पी को आगे बढाने के लिए संघ सरकार पूरी मदद कर रही थी  यहाँ तक यूनिवर्सिटी में सारे प्रोफेस्सर इस बात से डरे हुए थे की कही सरकार उनके उपर कोई कार्यवाही न करे , सिम्रिति इरानी ने देश को गुमराह किया


इसके बाद संघियो का रुख देश के जाने  माने  विश्वविध्यालय की तरफ किया गया जहा पर एक भयंकर साजिस रची गई ए बे वी पी द्वारा  कुछ नकाब पोश छात्र बुलाये गए और  देश विरोधी नारे लगवाये गए फिर दो विडियो को मिला कर सिम्रिति इरानी की सलाहकार ने एक विडियो बनाया गया   जिसको मीडिया में यह कह कर बाँट  दिया गया और कहा गया की ये देशविरोधी नारे  कन्हैया और उसके साथी लगा रहे थे , कमाल की बात है की ए बी वी पी के बुलावे पर जी न्यूज़ और ए एन आई दोनों आये  और देश विरोधी नारे लगे तो फिर उनके पास वो ओरिजिनल  विडियो क्यों नहीं है ,
क्यों  वो ए बे वी पी के द्वारा दिए गए विडियो चलाते  रहे इसके अलावा विडियो की जांच से यह भी पता चला की की असल में ए बी वी पी के छात्र ही देश विरोधी नारे  लगा रहे थे
इस घटना को मीडिया ने एक राष्ट्र संकट के रूप में पेश किया  और कनाहिय्या को कोर्ट से लेकर पुलिस ने  थाने  तक में  पीटा  
 इस पूरी कार्यवाही के पीछे संघियो की मंशा थी की कनाहिया  और उसके साथिओ का मनोबल तोड़ दिया जाय  हिम्मत तोड़  दी जाए  , लेकिन जिस   तरह जे एन यु के टीचर  , स्टाफ  और पुरे देश से  सपोर्ट मिला  उसे देख कर संघी घबरा गए ,  इसके बाद कोर्ट ने भी कन्हिया को जमानत दे दी है
लेकिन जैसे ही कन्हिया  जेल से वापिस आया और उसने सभी छात्रो के सामने भाषण  दिया  कन्हिया के भाषण में मोदी को , सिम्रिति  इरानी  को सुब्रम्नाय्म स्वामी को ललकारा   गया   और उनके  द्वारा रचित हर झूट का पर्दाफाश किया   इस भाषण को पूरी दुनिया में लाइक  किया गया   और   मोदी , इरानी ,  संघी सारे बौने नजर आने लगे .. ये इतिहास में पहली बार ऐसा  हुआ है की जब एक मामूली से छात्र ने प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री को टुच्चा   साबित कर  दिया .इसके बाद  से ही कन्हिया को संघी से धमकी मिलने लगी  है , कोई  कन्हिया  की जीब  पर पांच लाख का इनाम रख  रहा है  तो कोई उसकी हत्या की कीमत  ११  लाख लगा रहा है .

हालांकि पुलिस ने कन्हिया को सुरक्षा देने का वादा  किया है  लेकिन सवाल है  जो लोग इस तरह की सुपारी दे रहे है उन लोगो  के खिलाफ कार्यवाही  क्यों नहीं हो  रही  है , मतलब साफ़ है की संघियो  की सरकार है और संघियो  की ही कानून वाव्य्स्था  चलेगी  यानी जब तक   ये रहेंगे तब तक आतंक  रहेगा  लोकतंत्र  की हत्या  बार बार  होगी 

रोहित वेमुला की हत्या के बाद ऋचा सिंह की संस्थानिक हत्या की शाजिस कर रहा है संघ

रोहित, कन्हैया के बाद अब किया जा रहा ऋचा सिंह को प्रताड़ित

दक्षिणपंथी  छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से भिड़ने के वजह से कथित तौर पर जिस तरह  हैदराबाद विश्वविद्यालय में रोहित वेमुला ने हुए उत्पीड़न और निलंबन की वजह से आत्महत्या कर ली थी फिर उसी तरह ही जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में भी  के छात्र संघ के  अध्यक्ष कन्हैया कुमार सहित कई छात्र नेताओं की गिरफ़्तारी कर के उनपर देशद्रोह का मुकदमा चलाया गया।  हैदराबाद विश्वविद्यालय के रोहित और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के बाद अब ऋचा सिंह की बारी है. इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ की पहली महिला अधय्क्ष ऋचा सिंह को  भाजपा छात्र इकाई ABVP और विश्वविद्यालय प्रशासन के दबाव का सामना करना पड़ रहा है है।  ऋचा   इलाहाबाद विश्वविद्यालय के ग्लोबलाइज़ेशन एवं  डेवेलपमेंट  स्टडीज सेंटर से पीएचडी कर रही हैं

वो लोग मुझे पीएच.डी. से बाहर करने के लिए कोशिश कर रहे हैं मेरा एडमिशन रद्द करने   की  कोशिश  की  जा  रही है ,  “मैंने  अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के खिलाफ लड़ाई लड़ाई लड़ती रही  हूँ और मैंने विश्वविद्यालय परिसर में विवादित सांसद योगी आदित्यनाथ को प्रवेश नहीं होने दिया था जब उन्हें किसी कार्यकर्म  में आना था । मैंने कुलपति द्वारा किए गए गलत नियुक्तियों पर भी सवाल उठाया है और इसी वजह से  वो सब मुझे निशाना बना रहे हैं और मेरा दाखिला रद्द करने के लिए कोशिश कर रहे हैं।”  ऋचा सिंह ने आपका टाइम्स संवाददाता को फ़ोन पर हुई बातचीत में बताया।
ऋचा  ने कहा कि उनका दाखिला  पीएच.डी. में  2013-14 के सत्र में  हुआ था और दो साल पूरा होने वाला है  एडमिशन होने के बाद  और सब सही चल रहा था और  आज  अचानक  ही  ऐसा  क्या के मेरे एडमिशन पर  सवाल  उठाया  जा  रहा  है? अब तक 2 सालों में मेरे एडमिशन में उन्हें कुछ गलत नहीं लगा और अब जाकर उन्हें मेरा एडमिशन गलत लग रहा है तो सवाल यह है की पिछले  दो साल से वो लोग क्या कर रहे थे।
ऋचा ने बताया की जब मेरा  एडमिशन 2013-14 में हुआ था तब , सेंटर में दो सीटें थे। वो लोग(कॉलेज प्रशाशन ) कहते हैं कि दो सीटों में से एक  सामान्य सीट और अन्य एक आरक्षित सीट थी। वो  अब दावा कर रहे हैं कि सीटों के रोटेशन के हिसाब से वह सीट आरक्षित वर्ग के लिए थी।
गौरतबल है की ऋचा M.Phill की गोल्ड मेडलिस्ट भी रही हैं और छात्र संघ का चुनाव निर्दलीय जीता था जबकि बाकी के तीन सीटों पर ABVP का कब्ज़ा है।
News source : aapkatimes.com 

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मौजूदा रुपया शब्द है देन शेरशाह सूरी की


 प्राचीन भारत मे व्यापार कितना फला फुला  इसका पता  उस समय के सिक्के या मुद्रा के प्रचलन से चलता  है किन किन देशो में और स्थानों  से व्यापार सम्बन्ध थे इसका पता भी खुदाई में मिले इन सिक्को से चलता है .

अफ़सोस की बात है की तथाकथित टूर पर भारत को स्वर्ण भारत सोने की चिड़िया  कहने वाले लोग  इस बात का अभी तक तार्किक रूप से पता नहीं चला पाए .

भारत में सिक्के / मुद्रा का प्रचलन हलांकि  प्राचीन समय  से  ही   है  लेकिन उस वक्त दुसरे समुदाय , देशो   और राज्यों  से व्यापार का तरीका  विनिमय  जयादा था  और मुद्रा पर आधारित कम था यानी  की एक  वस्तु के बदले दूसरी वास्तु ले लेना  यही  लें दें का आधार था  लेकिन जहा  ये सब नहीं  हो  सकता था  वहा पर यह कहा आता है की जानवर , स्वर्ण , महिलाए को अदला  बदला   जाता  था जानवर में मुख्य   रूप  से गाय  और भैंस  हुआ करती  थी .

स्वर्ण मुद्रा का पता  प्राचीन द्रविड़  संस्कृति   से पता  चलता है जिसको बाद में आर्यों ने भी अपनाया

और अशोक  के  समय में इसको काफी वाव्स्थित  रूप मिल  चूका   था
 कथित रूप से व्यापार का ग्रन्थ माने जाने वाले अर्थ शास्त्रीय ग्रन्थ अथर्वेद में भी मुद्रा का कोई सही मुलायांक्न   नहीं मिलता है

मौजूदा मुद्रा के प्रचलन में मुस्लिम राजा शेर शाह सूरी का ही सबसे बड़ा  योगदान हमें देखने को मिलता है १५४० -१५४५ तक के समय में शेर  शाह सूरी ने काफी युगांतकारी कार्य इस क्षेत्र में किये  और एक चांदी का सिक्का  चलाया जो १७८  ग्राम का था  जिसे रुपया  नाम  दया  गया   हलांकि  इस में आगे आकर काफी सुधार हुए  जिसमे १६ आने बनाए गए  और हर  आना या  तो चार पैसे या १२ पैएस  में विभाजित  था या  जिसके  कारण भारत में मुद्रा को एक वैज्ञानिक  पहचान मिली

अंग्रेजो   के आने के बाद भी यही शब्द प्रचलन में रहा और जब अंग्रेजो ने कागज का रुपया पहली बार  बैंक ऑफ़ हिन्दोस्तान  १७७०-१८३२  और बैंक ऑफ़ बंगाल  १७८४ १७९१ में  के जरिये चालु  किया