Apni Dukan

Thursday, 21 April 2016

सिर्फ गरीब कमजोर को मार कर बहादुर बनते है ब्राह्मणवादी ,असल में इनका इतिहास डरपोक ,देशद्रोह और गद्दारी का है

जन उदय : भारत का पूरा इतिहास उठा कर देख ले वो भी वो जो सच है न की काल्पनिक कहानिया ,सवर्ण ,ब्राह्मणवादी लोग जो बहादुर बनते है और अपनी  बहादुरी गरीब ,कमजोर निहत्थे लोगो को मार कर दिखाते है ये दरअसल एक नम्बर के डरपोक , देशद्रोही और गद्दार रहे है ,

इनकी बहादुरी के किस्से  पृथ्वीराज चोहान  की काल्पनिक कहानियाओ से शुरू होती है जिसमे ये अपने आपको बहादुर बताते है , लेकिन इसका सच यह है की  गौरी ने बिना देर किये चोहान की गर्दन काट दी थी और उसको ले जाकर दीवार में चिनवा  दिया था
इसके बाद मुस्लिम शासको का सिलसिला जारी रहा जिनके चलते  ये बहादुर लोग  उनके दरबारों में नौकरी करने लगे और ब्राह्मणों ने अपना पूरा पूरा साथ मुस्लिम शासको को दिया और उनसे बदले में मांग की वो भी यानी ब्राह्मण भी उनकी तरह विदेशी हमलावर है इसलिए इनको ज़जिया कर से मुक्त किया जाए , और उनसे मांग की  शुद्र उनके गुलाम है  इसलिए इस ताने बाने को बना रहने दिया जाए . सो मुस्लिम शासको को इस बात से कोई सरोकार न था इसलिए उन्होंने समाज के इस ताने बाने पर कोई ध्यान न दिया  , इसकी एक वजह यह भी रही की ये ब्राह्मण और अन्य सवर्ण मुस्लिम  राजाओं को  मनोरंजन और शादी के लिए अपनी समाज की और परिवार की लडकियो को पेश करते थे .

और यह सिलसिला फिर सैंकड़ो साल चलता रहा हर म्सुलिम शासक , मुग़ल शशक के दरबार में  ब्राह्मण और अन्य स्वर्ण मजे करते रहे मानसिंह ,  पुरनिया पंडित ऐसे   हजारो नाम है

एक नाम और आता है राणा प्रताप का मुग़ल काल में जिसे  ब्राह्मण और जातिवादी लोग बहुत बहादुर बताते है यहाँ तक की उसके घोड़े को भी महान बताते है ,जब असल में यह हुआ की एक हिन्दू  यानी मानसिंह को अकबर ने भेजा और यह बहादुर  डर कर जंगलो में छिप  गया और जब तक बहार नहीं आया जब अकबर ने मेवाड़ की तरह ध्यान देना छोड़ दिया , और राणा आकर   चार सैनको को मार कर   वहा शासन करने लगा

अंग्रेजो के आने के बाद ब्राह्मण इनके भी समीप रहे  और शासन करने में इनकी मदद करते रहे  मात्र  ६५ हजार अंग्रेज  ४० करोड़ से जयादा की जनसंख्या वाले इस देश  पर शासन इसलिए करते रहे क्योकि यहाँ केलोग यानी ब्राह्मण और स्वर्ण इनके साथ थे , पुलिस , प्रशासन , आदि में  १७ आई सी एस अफसरों में  हर बार  १६   अफसर  ब्राह्मण ही होते   थे , और बाकी जातिओ के लोग सेना  और अन्य सेवा में


ब्राह्मण देश देश चिल्लाते  रहे लेकिन देश के नाम पर देश को ये आजादी के नाम पर भी ठगते  आ रहे है ,जातिके नाम पर हर साल हजारो कत्ल , बलात्कार  ये लोग करते है , आदिवासिओ का जीना मुस्ल्किल  किया हुआ है



सरकार कानून इनके लिए कुछ भी नहीं ये सिर्फ आतंक फैला  रहे है अपना और वो भी सिर्फ उन्ही लोगो को मारते है जहा पर दलित लोग कमजोर और  गरीब  है अनपढ़ है , गरीबो की जमीने छीन ले रहे है ,टोला  बथानी ,  और ऐसी  हजारो घटनाए है अहा पर पुरे के पुरे गाव दलितों के जला दिए गए लेकिन कोई सुनवाई  नहीं 

ब्राह्मण आतंकवादियो के अच्छे दिन शुरू : धीरे धीरे छूट रहे है जेल से : राज आदिवाल

अब तो मैं बड़े जोर से कहूंगा सबसे बड़े आतंकवादी ब्राम्हणवादी ब्राम्हणवादी !!मोहन भागवत ने आरएसएस के ब्राम्हणो को बम ब्लास्ट के काम पर लगाया अब बीजेपी आरएसएस की सत्ता आयी है तो उन आतंकवादी ब्राम्हणो को मोहन भागवत केवल बचा ही नहीं रहा है तो उन्हें महानता की खिताब भी दिया जा रहा है।मैं इस बात की कड़ी आलोचना करता हु !!इस तरह अगर हो रहा है तो देश में ब्राम्हणो को रहना मुश्किल हो सकता है !!इसी कर्नल प्रसाद पुरोहित ने गुप्त मीटिंग लेकर कहा था की हमें इस देश से भारत संविधान खत्म करके मनुस्मृति का राज लाना है !!

ब्राम्हण आतंकवादी है यह बात प्रमाणित हुयी !!न्यायपालिका में भी ब्राम्हण बैठे है ,ब्राम्हणो का जुडिशियल कैरक्टर नहीं होता इस लिए ब्राम्हण न्याय पालिका में ब्राम्हण नाते बैठने लायक नहीं है !निकलो बाहर मकानों जंग लढो बेईमानो से !!भारत मुक्ति मोर्चा लड़ेगा देशव्यापी आंदोलन !!जय मूलनिवासी !!देखे खबर :समझौता ब्लास्ट मामले में लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को NIA ने दी क्लीन चिटअंतिम अपडेट: बुधवार अप्रैल 20, 2016 समझौता ब्लास्ट मामले में लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को NIA ने दी क्लीन चिट लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित

नई दिल्ली: मालेगांव धमाकों के आरोपी कर्नल पुरोहित को एनआईए ने समझौता एक्सप्रेस में हुए धमाके के मामले में क्लीन चिट दे दी है। बताया जा रहा है कि मालेगांव में भी एनआईए की जांच सवालों से घिरी है। एनडीटीवी को मिली जानकारी के मुताबिक, कर्नल पुरोहित को समझौता धमाके में क्लीन चिट दे दी गई है। एनआईए के डीजी का कहना है कि पुरोहित का नाम कभी इस मामले में आया ही नहीं।कर्नल पुरोहित ने भी रक्षा मंत्रालय में अर्जी देकर अपने सम्मान बहाली कीमांग की है।
मालेगांव मामले में भी कई अहम गवाहियों का पता नहीं है, जबकी समझौता धमाकों में भी 165 गवाहों में से 22 गवाह पलट चुके हैं। 

दरअसल, 2006 के मालेगांव धमाकों में 37 लोगों की मौत हुई।2007 के समझौता धमाके में 68 लोग मारे गए। इन धमाकों के लिए पहले लश्कर और सिमी को जिम्मेदार बताया गया और फिर अभिनव भारत को, लेकिन समझौता धमाकों मे एनआईए अब नए सिरे से इस मामले में यू-टर्न लेती दिख रही है।आरिफ कासमानी की तलाशइस बीच एनआईए ने इस सिलसिले में आरिफ कासमानी नाम के एक शख्स की तलाश शुरू कर दी है। एनआईए के मुताबिक, आरिफ कासमानी वह शख्स है, जिसने समझौता धमाके की फंडिंग की। भारत ने अमेरिकासे इस बारे में मदद मांगी है।


एनआईए के मुताबिक, अमेरिकी सरकार की ओर से 2010 में इस शख़्स की जानकारी मिली थी।जब जब बीजेपी सत्ता में आती है तो ऐसा ही होता है : तारिक अनवरएनसीपी नेता तारिक अनवर ने कहा, जब बीजेपी की सरकार केन्द्र में आती है तब यही सब होता है। धीरे-धीरे सभी आरोपी इस मामले में छूट जाएंगे।सरकार किसी पर दबाव नहीं डालती : 

रिजिजूकेंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू ने सफाई दी है कि हमारी सरकार किसी पर दबाव नहीं डालती। मगर एक जांच के भीतर इतने सारे यू-टर्न हैरान करने वाले हैं। दरअसल, केंद्र में जब जब सरकार सरकार बदली तब तब जांच एजेंसियां संवेदनशील मामलों में अपना रुख बदल लेती हैं। चाहे वह एटीएस हो या सीबीआई या फिर NIA

वचन है नहीं पड़ने देंगे गरीब ,दलित ओ बी सी को यु जी सी नॉन नेट फ़ेलोशिप जारी रहने का सच , धूर्तता से भरी चाल ,कर दिया देश को गुमराह

 जन उदय :  देश के सभी शिक्षा संस्थानों के गरीब ओ बी सी छात्रों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई है की उनके द्वारा किये गए प्रयासों से सरकार यु जी सी की नॉन नेट फ़ेलोशिप जारी रखने के लिए मजबूर हो गई है .

लेकिन संघी ,जो पूंजीवादियो के चमचे है और ब्राह्मणवाद को फैलाने के लिए वचनबद्ध इतने आसानी से हार मानने वाले नहीं है ,पुरे देश को गुमराह  करते हुए इन लोगो ने सबसे पहले यु जी सी के बजट को ५५ % कम किया है इस साल के लिए जो आगे भी जारी रहेगा , तो जब बजट ही नहीं रहेगा तो यह संस्था काम कसी करेगी , इसके दो उपाय है की इसके समक्ष एक दूसरी ऐसी संस्था बना दी जाए जो इससे अलग हो और दूसरा इसके बजट को यानी कार्य  क्षमता को ही खत्म कर दिया जाए

वैसे पुरे देश में शिक्षा का बजट कम क्र दिया गया है , यानी यह वो बजट है जो सरकारी स्कूलों और कोलेज को दिया जाता है , सरकारी स्कूल और संस्थानों को हालत इतनी खराब है की वहा पर स्कूल नहीं है  कोई सुविधा नहीं है , अकेले सिर्फ ओड़िसा में ३००० हजार स सरकारी स्कूल यह कह कर बंद कर दिए गए की यहाँ बच्चे पढने नहीं आते , सवाल यह है की जब शिक्षक ही नहीं आते तो बच्चे कहा से आयंगे ?

दूसरा देश में सरकार निजी कोलेज और यूनिवर्सिटी को बढ़ावा दे रही है यानी जिसके पास पैसा है वही पढ़ेगा , गरीब  दलित इसलिए नहीं पढ़ सकेगा क्योकि उसके पास पैसा ही नहीं है फीस भरने के लिए , दूसरा कदम जो देश का बेडागर्क करेगा वही है  विदेशी यूनिवर्सिटी के कैंपस देश में ही खुलेंगे ऐसा निति आयोग ने सुझाया है और इसकी नीव कपिल सिब्बल ने डाली थी , अब इन यूनिवर्सिटी के आने से जाहिर है फिर वही अमीर लोगो के बच्चे ही पढेंगे  जिनके पास विदेशी डिग्री होगी और अंग्रेजी का ज्ञान होगा

ऐसा नहीं है की गरीबो को पढने नहीं दिया जाएगा , पढ़ ले दसवी कर ले , बारहवी कर ले चल जा कोलेज चला जा , लेकिन उच्च शिक्षा में रिसर्च में मेडिकल में इंजीनियरिंग में दलित को नहीं आने देना

हां  दलित स्किल बने यानी मजदूर बने स्किल इंडिया कार्यक्रम इस मकसद की पूर्ति के लिए चला दिया गया है , अफसर सिर्फ तिलकधारी बनेगा , देश वही  चलायगा .


Wednesday, 20 April 2016

आर एस एस से भयभीत आमिरखान ने सिर्फ सवर्ण बाहुल्य गाव ही गोद लिए

जन उदय : महारष्ट्र में सूखे की मार वैसे तो बिना जाति देखे सबको मार रही है लेकिन आर एस एस   और अन्य पार्टियो के लोग भी पानी और राहत सबसे पहले सिर्फ सवर्ण बाहुल्य वाले इलाको में ही पहुचाना चाहते है , जातिवाद का ऐसा मंजर जो इंसानियत को शर्मसार करता हो वो सिर्फ भारत में देखने को मिलता है कि एक मरते इंसान के मूह में पानी उसकी जाति पूछ कर डाला जाता है

यह कोई देश में पहली या आखिरी घटना नहीं है बल्कि इससे पहले भी जब देश में सुनामी आई थी तब तमिलनाडु में ये सब देखने को मिला था  और इसकी पूरी चर्चा या खबर अखबारों में आई थी लेकिन ये बात जातिवाद से सम्बन्धित उत्पीडन की थी इस लिए इस बात को दबा दिया गया .


आमिर खान पिछले दिनों अपने दिए गए असह्शुनता पर दिए गए ब्यान की वजह से संघियो का अपमान और क्रोध का शिकार हुआ था जिस पर आमिर ने अपनी सफाई और माफ़ी भी मांगी थी सो इस बार सोचा की सुखा ग्रस्त क्षेत्र में लोगो को पानी कैसे बचाए एक भाषण दिया जाए सो इस सिलसिले में आमिर खान महाराष्ट्र के कुछ हिस्से में घूम रहे है , इसी के साथ साथ आमिर खान ने सुखा प्रभावित दो ग़ाव को भी गोद लिया है , 

इसकी दो मुख्य बाते है कि सबसे पहला तो यह की ये दोनों गाव सवर्ण बाहुल्य है जो आर एस एस के सदस्यों ने ही सुझाए है  दूसरी बात यह की जब राज्य में पानी ही नही है तो आमिर खान क्या इन ग़ाव को पानी अपनी कार  से या हवाई जहाज से पानी ढो ढो कर देगा ??

खैर  हमारे सूत्रों को तो ये सिर्फ एक स्टंट ही लगता है 

सिर्फ भाषण और सेमिनारो में नहीं अपने चुनावी मेनिफेस्टो में ऐलान करे आरक्षण खत्म करने का


जन उदय :  आज अगर आप भारत में आरक्षण के उपर बहस को देखे तो कोई भी चलता फिरता  नेता , बुद्धिजीवी,  कवि ,नाटककार , आरक्षण पर बहस करता नजर आ जाएगा , और उस पर अपनी टीका टिप्पणी कर देगा की आरक्षण बंद कर दिया जाए कि जातिगत आरक्षण खत्म कर दिया जाए

दरअसल ये वो लोग  है जो आरक्षण को दलितों को दिए  जाने वाला  खैरात समझते है या ऐसा समझते है आरक्षण उनके हक को मार कर दलितों को दिया जा रहा है
तो सबसे पहले ऐसे मंद बुद्धिजीवी , नकली साधू , कवि छुट भय्या नेता समझ ले कि आरक्षण कोई गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम नहीं है , बल्कि सत्ता और समाज में भागीदारी का फार्मूला है और यह सविन्धानिक है , दूसरी बात यह किसी खैरात या भीख में नहीं मिलता है बल्कि १९३२ के कम्युनल अवार्ड में ब्रिटिश सरकार ने दलितों के प्रतिनिधित्व को स्वीकारा  था  और दिया गया  था ,

 लेकिन गांधी की चालबाजी से आंबेडकर ने कम्युनल अवार्ड को छोड़ा और उसके बदले आरक्षण की वाव्व्यस्था की गई , इस कम्युनल अवार्ड की ख़ास बात यह थी की दलित समाज और इसके भूगोलिक खंड पर भारत सरकार राज नहीं कर सकती थी  और न ही भारत का कोई अन्य जाति  का व्यक्ति इनके क्षेत्र से चुनाव लड़ सकता था  हाँ दलितों को ये हक था की उसको दोहरे वोट अधिकार थे

अब कोई भी बुद्धिजीवी समझ सकता है की अगर ऐसा होता  तो दलित आज स्वयं राजा होते और  खुद प्रजा उन पर कोई हुकूमत नहीं कर सकता था यानी देश के अंदर ही कई देश होते दलितों के
लेकिन फिर भी बाबा साहेब ने सदीओ की जिल्लत को भुला कर और इतिहास को ध्यान में रख कि हम एक रहेंगे तो सुरक्षत रहेंगे  को ध्यान में रखा  और भारत यानी गांधी के समझोते को मान लिया  वो भी सिर्फ और सिर्फ आरक्षण के लिए

आज  हलांकि बहुत सारे दलित नेता भी ब्राह्मण की बांटो में आकर यह कहने लगे है की आर्थिक रूप से  सक्षम दलित  आरक्षण  छोड़े , कमाल की बात यह है की सबसे पहले उन्हें छोड़ना  चाहिए ताकि बाकी दलितों को  रास्ता दिखा सके , खुद सामान्य सीट पर लड़े पार्टी के अंदर दलितों से सम्बन्धित किसी भी  विशेष अधिकार का प्रयोग न करे  , और अपने को दलित शब्द से दूर रखे

इसके अलावा जो लोग /पार्टी के नेता आरक्षण का विरोध करते है तो सबसे पहले अपने चुनावी मेनिफेस्टो में  लाये की जीतेंगे तो आरक्षण ख़त्म करेंगे , ताकि आपकी कर्त्यवनिष्ठा चमके  

Tuesday, 19 April 2016

ओड़िसा ,गुजरात में चल रहा है आर एस एस का खुनी खेल , आदिवासिओ का धर्म परिवर्तन करा हिन्दू बना रहा है आर एस एस

जन उदय : भारत में यह बात प्रमाणिक और वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुकी है की इस में शुद्र और दलित कहे जाने वाला व्यक्ति ही इस देश का मूलनिवासी है और इस देश का मालिक है , पुष्यमित्र शुंग जिसको ब्राह्मण परशुराम भी कहते है .उस वक्त जो लोग पलायन कर जंगलो में चले गए थे वही लोग आज भी आदिवासी कहलाते है .
आदिवासिओ की संख्या  भारत में बहुत बड़ी है आजादी के इतने सालो बाद भी इनका कोई विकास सिर्फ जातीय आधार पर नहीं हो पाया , लेकिन कुछ समय तक जो इनका विकास हुआ वह सिर्फ इसाई मिसनरी के वजह से हुआ और इसी कारण ये लोग अपने अधिकारों के बारे में जागरूक हो गए

जिस तरह ओड़िसा , महाराष्ट्र , बिहार झारखंड  वेस्ट बंगाल में और अन्य जगहों आर एस एस के द्वारा चलाये जा रहे सन्घठन वहा के आदिवासिओ को लालच दे कर हिन्दू बना रहे है

हाल ही में गुजरात की कूकना जनजाति के लोगो को आर एस एस के लोगो ने कपड़े , और पैसे देकर उनकी सामूहिक शादी कराई , इस जनजाती की ख़ास बात यह है की इनके युवा युवती अपनी मर्जी से अपने पसंद के लड़का लड़की के साथ रहते है सेक्स भी करते है और बच्चे भी पैदा करते है लेकिन ओपचारिक तोर पर शादी काफी बाद में करते है या ये कहे जब लगता है की ये दोनों एक दुसरे के साथ जीवन बिता सकते है तब शादी करते है, लेकिन आर एस एस के लोग इन्हें सभ्यता का पाठ पड़ा रहे है और इनका हिन्दुकरण  कर रहे है  या ये कहे इनको ब्राह्मण संस्कार दे रहे है ,कमाल की बात यह है की न तो  कोई मीडिया वाला और न ही ऐसे संघठन जो मानवाधिकार के लिए लड़ते है इनके बारे में आवाज उठा रहे है

इसके अलावा ओड़िसा में ब्राह्मणों का एक संघठन काम कर रहा है जिसका नाम है कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंस  , यह सन्घठन भी आदिवासिओ को पढ़ाने के नाम पर उनको उनके गाव देहात और उनकी संस्कृति से अलग कर रहा है और इनका हिन्दुकरण कर रहा है बताया जाता है इस इंस्टिट्यूट में २५००० से जयादा आदिवासी  छात्र छात्राए पढ़ते है . इस संस्था के चलाने के पीछे सिर्फ यही एक कारण नहीं है बल्कि इन आदिवासिओ को इनकी जंगल और जमीन छोड़ने के भी कारण है ताकि ये यहाँ आ जाए और इनका ब्रेन वाश कर दिया जाए की लोग अपनी जडो से हट जाए

गरीबी हटाओ और शिक्षा बढाओ के नाम पर संघ बहुत भयानक खेल खेल  रहा है , संघ एक तरफ इनको हिन्दू नाम दे रहा है दूसरी तरफ पुरे देश में दलितों के खिलाफ आन्दोलन छेड़ा हुआ है ताकि इनकी संस्कृति को नष्ट किया जा सके


Monday, 18 April 2016

जानिये चोंका देने वाली वो वैज्ञानिक बाते जो साबित करती है रामायण और महाभारत काल्पनिक और झूठे ग्रन्थ है

जन उदय : विज्ञान और विज्ञानिक पद्धति वह प्रक्रिया है जिससे यह साबित हो जाता है की  मानव विकास में , तकनीकी  में ब्रह्माण्ड में होने वाली क्रियाये स्वाभाविक नहीं बल्कि एक दुसरे के कार्य – कारण  और एक वयास्थित प्रक्रिया की वजह से हो रही है , धुल आंधी , हवा का  चलना एक  वैज्ञानिक प्रक्रिया है न की कोई इन्हें पंखा  ले कर चला  रहा है बारिस एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है न कोई कोई उपर से पानी बरसा  रहा है . और यह वैज्ञानिक इसलिए है क्योकि इस जांच  हो सकती है और फिर इस जांच की भी जांच हो सकती है  और हर जांच में रिजल्ट सेम ही आयगा , यानी  वैज्ञानिक प्रक्रियामे कुछ डाटा लिया जाएगा , उनको व्यवस्थित किया जाएगा  उसी जांच होगी , उसको परखा जाएगा , रिजल्ट आने पर फिर से जांच होगी , और भारत में ही नहीं दुनिया के हर हिस्से में उसी प्रक्रिया की जांच होगी और सेम रिजल्ट आने पर वह विज्ञानिक प्रक्रिया होगी
अब सवाल आता है भारत में एक वर्ग द्वारा फैलाई जा रही भ्रान्तियो के बारे में यानी रामायण और महाभारत  कभी इस देश में हुए या नहीं  या ये सिर्फ कोरी  कल्पना है ,  

इतिहास ने भी विज्ञान के नियमो को अपनाया है और इतिहास का लेखन वास्तुनिष्ट सामग्री पर लेखन के लिए ही जो डाला गया है , और जब हम  वास्तुनिष्ट सबूतों या सामग्री की बात करते है तो उस पर रामायण और  महाभारत खरी नहीं उतरती ,  आइये देखे कैसे
 कहानी रामयाण और महाभारत एक एपिक की तरह लिखे गए ज्सिका मकसद सिर्फ और सिर्फ एक  राजनितिक षड्यंत्र तय्यार करना था जिसका पहला उधाह्र्ण है

1.कोई भी वास्तु /शिल्प  सबूत नहीं : हर राजा , महाराजा , अपने लिए महल बनवाता है , भवन बनवाता है , बाग़ बगीचे बनवाता है और इन इमारतो को वह कुछ ख़ास तरीके से बनवाता है यानी हम अगर सम्राट अशोक का इतिहास देखे तो हमें सभी प्रकार के सबूत मिलते है वास्तु भी शिल्प भी लेकिन रामायण और महाभारत के इन अभिनेताओं का कुछ भी नहीं मिलता , कुछ संघटनो का कहना है की मंदिर मिले है भगवान् के तो कोई इनसे पूछे क्या भगवान् इन्हों मंदिरों से शासन करते थे ??

2 . हर शासक , राजा  , महाराजा  अपने शासन काल में अपने सिक्के यानी व्यापार के लिए सिक्के ,मुद्रा चलवाता है , जो निश्चित तोर  पर उसकी सीमा और विदेश सीमा यानी उसके शासन के बाहर भी खुदाई में मिलते है लेकिन रामायण , महाभारत काल का ऐसा कुछ भी नहीं मिलता

३.  विदेशो से सम्बन्ध एक राजा के लिए बड़े जरूरी होते है , युद्ध भी होते है  संधिया भी होती है  लेकिन इन दोनों काल के यानी रामायण और महाभारत काल का ऐसा कुछ भी सबूत नहीं मिलता

४. विदेशो से व्यापार , यात्रिओ के लिए धर्मशाला , सुरक्षा वाव्य्स्था बाग़ बगीचे , सराय ये सब भी रहा बनवाता है लेकिन इन दोनों काल का कुछ भी नहीं मिलता

५. संस्कृति – कला ,किसी भी इतिहास में या शासन में अपनी कला और संस्कृति जन्म लेती है , लेखक ,कवी आदि जन्म लेते है लेकिन न तो किताबो के स्तर पर  कुछ भी नहीं मिलता , शिल्प , पेंटिंग , नक्काशी , वाल राइटिंग, वाल कार्विंग  , भित्ति चित्र आदि इस काल का कुछ भी नहीं मिलता
६. कालखंड . सबसे बड़ी बात होती है कि कोई भी घटना किसी कालखंड में  ही होती है यानी उसका अपना एक  समय होता है  लेकिन इन ग्रंथो का कोई भी कालखंड  नहीं है कहने को तो हर  धार्मिक संघठन अपनी अपनी दलील देता रहता है , कोई कुछ काल बताता है तो कोई कुछ
इसके अलावा  जो ग्रन्थ या किताबे मिली है उनकी भी कार्बन डेटिंग से कोई सबूत नहीं मिलता की ये ग्रन्थ बहुत पुराने है बल्कि इसमें भी घपला   है

सो  विज्ञान धारणा या कल्पना से शुरू हो सकता है लेकिन हमने उड़ने की कल्पना की लेकिन  उड़े कैसे ? इसलिए विज्ञानिक  कोई भी तत्थ्य आज तक नहीं है और न ही आयगा