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Sunday, 7 May 2017

बज गया है दलित क्रांति का बिगुल : जानिये कैसे 14 अप्रैल 2030 को मार दिया जाएगा सारे विदेशी ब्राह्मणों को गृह युद्ध में


जन उदय : दुनिया के देश मिश्र ,लीबिया , यूगांडा , रवांडा ,अफगानिस्तान इरान , ईराक और भी बहुत देश है जो गृह युद्ध के चपेट में रहे है ,और है कारण भेदभाव और दमनकारी निति सरकार ने इनके जबाने काटने तक की कोशिस की लेकिन जनता आखिर जनता है उसकी आवाज ही खुदा का फरमान होता है , शायद ये बात संघ और उसके घटक दलों को समझ नहीं आ रही है

इसलिए ये  लो ई वी एम् घोटाले से सत्ता के प्राप्ति से ही समझ रहे है की ये देश इनके जूते के निचे आ गया है और जो ये कहंगे ,  सबको मानना  होगा जो ये करेंगे सबको  करना होगा .
जब से  ये लोग सत्ता में आये है देश के गरीब मजदूर दलित मुस्लिम लोगो का जीना मुस्किल  हो   गया है रोजगार से लेकर इंसान का जीना मुस्किल हो गया है शिक्षा स्वास्थ , कानून वाव्य्स्था  हर चीज  बेकार हो गई है कुल मिला कर आम आदमी का जीना मुस्ल्किल  हो गया है, अखलाक , डेल्टा मेघवाल , रोहित वेमुला ,गुजरात में गो आतंकियो  द्वारा आक्रमण , अलवर में मुस्लिम की हत्याए , उत्तर प्रदेश में लगातार  दलितों  की हत्याए कुल मिला कर  इन्होने देश को नरक में तब्दील  कर दिया है



भारत में सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई कोई नई  नहीं है समाज में फैले भेदभाव के खिलाफ अनेक संत सूफी समाज सुधारको ने आवाज उठाई लेकिन सभी लोग समाज में फैला जातिवाद और उस पर आधरित भेदभाव खत्म नहीं हुआ  , ये भेदभाव अगर सिर्फ भेदभाव की हद तक रहता तो इतना फर्क नहीं पड़ता  लेकिन ये जातिय भेदभाव ब्राह्मणों द्वारा फैलाया गया और इसको कायम रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे है , इसके लिए कत्ल , दमनकारी नीतिया तक बनी है, जातिवाद में सिर्फ जाति के आधार पर भारत  के मूलनिवासियो को जानवर की तरह समझा जाता है और इनको मूल बेसिक अधिकार तक मना कर दिए गए है या छीन  लिए जाते है

भारत में गृह युद्ध की  वजह सिर्फ जातिवाद ही नहीं है कश्मीर , असाम, मणिपुर , पंजाब , तेलंगाना , आदिवासी समस्या देश के  राजनैतिक  तापमान को हमेशा उंचा  बनाय रखते है
इसके अलावा सम्प्रद्यिक दंगे मंदिर मस्जिद के दंगे गोमांस के दंगे तो बहुत आम बात हो गई है जब से संघियो की सरकार आई है , इसके अलावा रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या , जे एन यु का मसला और  आये दिन दलित बस्तिओ को आग लगाना , उनकी हत्याय , दलित महिलाओं के बलात्कार  इतनी मात्रा में हो रहे है की बात अब बर्दास्त से बाहर हो रही है सबसे बड़ी कमाल की बात यह है की जो भी दलित अपने उपर हुए अपराध के खिलाफ आवाज  उठा रहा है  उसे देशद्रोह के आरोप में जेलमे ठुंसा  जा रहा है . कमाल की बात यह है की पुलिस ,प्रशासन न्यायपलिका सब संघियो के पक्ष में चल  रहा है .

हालात बदल रहे है दलितों में मुसलमानों में रोष बढ़ता जा रहा है , और यह रोष अब धीरे धीरे इतना बढ़  रहा है की ये बहुत जल्द ही एक जातिय  गृह  युद्ध के चपेट में आने वाला  है बहुत सारे दलितों  ने कह दिया है की  वो हद स हद   दस बारह  साल इन्तजार करेंगे  इसके बाद मारेंगे  या मरेंगे  यानी देश में  गृह  युद्ध   .  इस बीच  दलितों  ने ब्राह्मणों  और सवर्णों  की  मेपिंग  करना  शुरू कर दिया है  यानी किस  मोहल्ले  में कितने ब्राह्मण  राजपूत  , बनिए है उनके पास क्या सम्पति  है कितने हथियार है  इस बात का सर्वे  निजी  तौर पर हो रहे है . निहत्थे  कमजोर  दलित  कैसे सत्ताधारी  ब्राह्मणों  को समाप्त  कर पायंगे  इस पर एक दलित ने बताया  की  कौरव  पांडव  युद्ध में पांड्वो  ने कौरव  से  खूब कहा की मान जाओ  , हमें पांच  सहर  दे दो  , पांच  सहर  नहीं  तो पांच  गाव  दे दो पांच गाव नहीं  तो पांच  पद  जमीन दे दो  लेकिन सत्ताधारी कोरव जिनके पास सब कुछ  सेना  हथियार  , सम्पदा  वो भला किसी  से  यानी फकीरों  से क्यों डरने  लगे , अंजाम आज भी  सबको मालूम है   इसी तरह  रावण ने भो सोचा  की कैसे  ये वनवासी  मुझे जित  लेंगे मेरे पास सब कुछ है ,  वर्तमान में कर्नल  गद्दाफी  का उधाह्र्ण  देते हुए  दलित युवक ने  बताया  की  वो आदमी ज्सिका  देश में कब्ज़ा था सेना  उसकी थी , हथियार  थे लेकिन कैसे मारा गया कुत्तो की मौत  , वैसे ही ये संघी  ब्राह्मण  मारे जाएंगे

जब यह पूछा  गया तो यह तारीख  लगभग  तेरा  साल  का इन्तजार क्यों  .  होम-वर्क  बस  और कुछ नहीं  इस बीच  उन सभी  दलित संघठनो  को एकत्रित  किया जा रहा है और सबसे बड़ा  फर्क  दो चार साल में जब पड़ेगा   जब मायावती  अपने करोडो  समर्थको  के साथ  बौध  धर्म धारण  कर लेगी  , और जिस दिन यह होगा उसी  दिन समझ लीजिये की ब्राह्मणों  का अंत   ये लोग विदेशी गद्दार हमलावर है  इनका अंत जरूरी है .. और जिस दिन   दलित क्रांति  का बिगुल  बजेगा  उसी  दिन सेना में दलित जवान  सेना में छिपे  ब्राह्मणों  को खत्म कर देंगे , रेल  विभाग  के दलित  रेल से क्रान्तिकारियो  के आवागमन  को सम्भालंगे  पुलिस में दलित   पुलिस को रोक लेंगे  और  चैनल  , मीडिया संस्थानों  पर कब्जा कर   दलित क्रांति  की घोषणा कर दी जाएगी


दलित क्रांति  होगी जरूर होगी  अगर यही उत्पीडन  और सामाजिक  वाव्य्स्था  चली तो , दलित  युवक ने कहा 

Saturday, 7 May 2016

वो दलित नेता जिनकी बहन और बेटी के बलात्कार के बाद भी सत्ता के लालच में नहीं खोला अपना मूह , जानिये कौन कौन है वो ??

जन उदय :  क्या आपने ऐसे लोग देखे है जो पैसे और सत्ता के लिए अपनी बहन बेटी को भी दाव पर लगा दे , उन्हें बेच दे , या किसी को उनकी इज्जत के साथ खिलवाड़ करने दे , या उनका बलात्कार भी हो जाए तो तो कुछ पैसे या सत्ता में कुछ पद  ले कर चुचाप बैठ  जाए ??? शायद नहीं देखे होंगे या देखे होंगे या सुने होंगे तो सालो के बाद कही कोई या शायद बिलकुल नहीं 

लेकिन आजकल दलित नेता ऐसे है जिन्होंने नीचता की हद पार कर दी है ये लोग पैसे और सत्ता के इतने भूखे हो गए है जिन्हें अपने परिवार और रिश्तो तक की बली चड़ा  दी है शायाद इसे कहते है इंसानियत का मर जाना या आँख का पानी मर जाना
आप सभी सोचंगे की ऐसे नेता कौन है ?? क्या ऐसा सचमुच हुआ है , ?/  

बिलकुल ऐसा  ही हुआ है और जितने भी दलित नेता है सबने ये काम किया है क्योकि एक तरफ ये दलित नेता दलितों के नाम पर वोट लेते है या सत्ता में हिस्सा लेते है है और दलित लोग भी इसी उम्मीद में इनको चुनते है की ये लोग आगे जा कर इनके दुःख दर्द्द में भागी बनेंगे अगर कोई मुसीबत आयगी तो ये नेता इनका साथ देने आयंगे , क्योकि दलित  होना अपने आप में सजा  है  तो शायद ये लोग इनका दर्द समझेंगे और इनके बीच एक रिश्ता होता है , इंसानियत का भाईचारे का  और दलित होने का
लेकिन ये दलित नेता सिर्फ अपनी कुर्सी संभालने में लगे है , 


पुरे देश में दलितों की हत्याए  हो रही है लडकियो के बलात्कार हो रहे है लेकिन ये नेता कुछ नहीं बोलते

डेल्टा , और जीशा  के बलात्कार  और हत्या ऐसे मामले है जिससे दलितों को एकदम सचेत हो जाना चाहिए  और आंदोलित हो जाना  चाहिए क्योकि अब ब्राह्मणों ने नई  रणनीति  अपना ली है दलितों को फिर से गुलाम बनाने  के लिए , सबसे पहले की शिक्षा  छीन ली जाए दलितों से दूसरा  पढ़े  लिखे और मेधावी  दलित  छात्र  छात्राओं  की    हत्या  यानी जल्द पतन

अब दलितों के उपर है की वो लोग सबसे पहले इन दलित  नेताओं को जूता  मारते   है या इनको  अपनी दलाली  के लिए छोड़ते  है


Thursday, 21 April 2016

सिर्फ गरीब कमजोर को मार कर बहादुर बनते है ब्राह्मणवादी ,असल में इनका इतिहास डरपोक ,देशद्रोह और गद्दारी का है

जन उदय : भारत का पूरा इतिहास उठा कर देख ले वो भी वो जो सच है न की काल्पनिक कहानिया ,सवर्ण ,ब्राह्मणवादी लोग जो बहादुर बनते है और अपनी  बहादुरी गरीब ,कमजोर निहत्थे लोगो को मार कर दिखाते है ये दरअसल एक नम्बर के डरपोक , देशद्रोही और गद्दार रहे है ,

इनकी बहादुरी के किस्से  पृथ्वीराज चोहान  की काल्पनिक कहानियाओ से शुरू होती है जिसमे ये अपने आपको बहादुर बताते है , लेकिन इसका सच यह है की  गौरी ने बिना देर किये चोहान की गर्दन काट दी थी और उसको ले जाकर दीवार में चिनवा  दिया था
इसके बाद मुस्लिम शासको का सिलसिला जारी रहा जिनके चलते  ये बहादुर लोग  उनके दरबारों में नौकरी करने लगे और ब्राह्मणों ने अपना पूरा पूरा साथ मुस्लिम शासको को दिया और उनसे बदले में मांग की वो भी यानी ब्राह्मण भी उनकी तरह विदेशी हमलावर है इसलिए इनको ज़जिया कर से मुक्त किया जाए , और उनसे मांग की  शुद्र उनके गुलाम है  इसलिए इस ताने बाने को बना रहने दिया जाए . सो मुस्लिम शासको को इस बात से कोई सरोकार न था इसलिए उन्होंने समाज के इस ताने बाने पर कोई ध्यान न दिया  , इसकी एक वजह यह भी रही की ये ब्राह्मण और अन्य सवर्ण मुस्लिम  राजाओं को  मनोरंजन और शादी के लिए अपनी समाज की और परिवार की लडकियो को पेश करते थे .

और यह सिलसिला फिर सैंकड़ो साल चलता रहा हर म्सुलिम शासक , मुग़ल शशक के दरबार में  ब्राह्मण और अन्य स्वर्ण मजे करते रहे मानसिंह ,  पुरनिया पंडित ऐसे   हजारो नाम है

एक नाम और आता है राणा प्रताप का मुग़ल काल में जिसे  ब्राह्मण और जातिवादी लोग बहुत बहादुर बताते है यहाँ तक की उसके घोड़े को भी महान बताते है ,जब असल में यह हुआ की एक हिन्दू  यानी मानसिंह को अकबर ने भेजा और यह बहादुर  डर कर जंगलो में छिप  गया और जब तक बहार नहीं आया जब अकबर ने मेवाड़ की तरह ध्यान देना छोड़ दिया , और राणा आकर   चार सैनको को मार कर   वहा शासन करने लगा

अंग्रेजो के आने के बाद ब्राह्मण इनके भी समीप रहे  और शासन करने में इनकी मदद करते रहे  मात्र  ६५ हजार अंग्रेज  ४० करोड़ से जयादा की जनसंख्या वाले इस देश  पर शासन इसलिए करते रहे क्योकि यहाँ केलोग यानी ब्राह्मण और स्वर्ण इनके साथ थे , पुलिस , प्रशासन , आदि में  १७ आई सी एस अफसरों में  हर बार  १६   अफसर  ब्राह्मण ही होते   थे , और बाकी जातिओ के लोग सेना  और अन्य सेवा में


ब्राह्मण देश देश चिल्लाते  रहे लेकिन देश के नाम पर देश को ये आजादी के नाम पर भी ठगते  आ रहे है ,जातिके नाम पर हर साल हजारो कत्ल , बलात्कार  ये लोग करते है , आदिवासिओ का जीना मुस्ल्किल  किया हुआ है



सरकार कानून इनके लिए कुछ भी नहीं ये सिर्फ आतंक फैला  रहे है अपना और वो भी सिर्फ उन्ही लोगो को मारते है जहा पर दलित लोग कमजोर और  गरीब  है अनपढ़ है , गरीबो की जमीने छीन ले रहे है ,टोला  बथानी ,  और ऐसी  हजारो घटनाए है अहा पर पुरे के पुरे गाव दलितों के जला दिए गए लेकिन कोई सुनवाई  नहीं