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Monday, 9 May 2016

संघी आतंकवाद का एक और नमूना इनके .. इशारे पर एन डी टीवी कई नेटवर्क से गायब , दर्शक परेशान

जन उदय : ये बात तो पिछले   दिनों की सबको याद होगी की  वाराणसी  जहा से मोदी  जीता था  वहा से एन डी टीवी  को कई टीवी नेटवर्क से हटा दिया गया था कारण था एन डी टीवी  एक मात्र  ऐसा टीवी  न्यूज़ चैनल   रहा जो मोदी चालीसा  नहीं पढ़  रहा था

यानी दंगाई  सरकार और उसके समर्थक दलों के गुणगान नहीं कर रहा था , जिसका खामियाजा  एन डी टीवी को भुगतना पढ़  था और एन डी टीवी को एक तरह से बंद कर   दिया गया  

इसके बाद भी एन डी  टीवी ने  सच्चाई  का साथ नहीं छोड़ा   बल्कि जे एन यु षड्यंत्र  जिसमे मोदी  के साथ  देश के सभी न्यूज़ चैनल थे  जो बेगुनाह छात्रों  को आतंकी साबित करने में लगे थे उसी वक्त ही एक ऐसा चैनल  था जिसने दलित  छात्रो की मदद से  भाजपा  का षड्यंत्र  सबके  सामने लाने में मद्दद  की   ठीक उसी तरह हैदराबाद सेंट्रल  यूनिवर्सिटी में रोहित वेमुला की हत्या के खिलाफ षड्यन्त्र  को सबके सामने लाने में मदद की

अन्यथा  बाकी सभी चैनल   संघ के साथ   दलितों के खिलाफ षड्यंत्र  को अंजाम देने में लगे थे


अब दुबारा से  एन डी टीवी   संघ   आतंकवादियो   से बर्दास्त  नहीं हो  रहा है इसलिए यदा  कदा  सभी नेटवर्क यानी डिश  एयरटेल , den   आदि नेटवर्क से हटा दिया जाता है ताकि  सच्चाई  सबके सामने न आ सके 

Saturday, 7 May 2016

रोहित वेमुला , डेल्टा और जीशा की हत्या के लिए न्याय के आन्दोलन को खत्म करना चाहते है वामपंथी छात्र आन्दोलन


जन उदय : अगर हम १९४७ के पहले के वामपंथी आंदोलनों का सही सही विवेचना करे तो हम  पायंगे की वामपंथी आन्दोलन की इन वामपंथी आंदोलनों का मुख्य उदेश्य  दलित आंदोलनों को खत्म करना था कमजोर करना था न की समाज में एकता , समानता और समाजवाद लाने में इनकी कम दिलचस्पी बहुत कम थी  बल्कि यु कहे ये आन्दोलन दलित आन्दोलन को कजोर करने के षड्यंत्र थे

आजादी के बाद भी दलित आन्दोलन सिर्फ इसलिए कामयाब नहीं हो पाए क्योकि ये लोग दलित युवाओं को समानता और समाजवाद के नाम पर भ्रमित करने में कामयाब रहे सारे के सारे दलित युवा हमेशा इनके पीछे  लगे रहे  , दलित  युवा ये कभी नहीं समझ पाए कि  इन वामपंथी आंदोलनों में सिर्फ और सिर्फ ब्राह्मण  और  उच्च  जातिय  मुसलमान ही क्यों शीर्ष पर रहे .. कभी भी इन आंदोलनों में दलित आगे नहीं आये जबकि ये सारे आन्दोलन चलते रहे दलितों के नाम पर गरीबो के नाम पर

कुल मिला कर  ये वामपंथी लोग दलितों को अपने आन्दोलन के लिए इंधन की तरह इस्तेमाल करते रहे लेकिन दलितों को कभी उनका हक नहीं मिला

 हाल ही में हैदराबाद  सेंट्रल यूनिवर्सिटी में रोहित वेमुला की संस्थानिक  हत्या ने दलित आन्दोलन ने  पूरी दुनिया  को हिला दिया था , पूरी दुनिया में इस हत्या की निंदा  हो रही थी .. ये वामपंथी कभी भी रोहित वेमुला के जिन्दा रहते कभी दलित छात्रो के साथ नहीं आये लेकिन रोहित वेमुला की हत्या से फायदा उठाने तुरंत आ गए


जब आन्दोलन कम न हुआ तो वामपंथी छात्र ब्राह्मणों के इशारे पर कन्हिया को लेकर एक अन्य षड्यंत्र को जन्म देने लगे इसके बाद यही हुआ यानी जे एन यु षड्यंत्र जिसके बाद रोहित वेमुला की हत्या को लोग भुलाने लगे .. इसके बाद डेल्टा मेघवाल का 
बलात्कार और हत्या हुई  जैसे ही डेल्टा आन्दोलन ने टूल पकड़ा  फिर जे एन यु में एक और षड्यंत्र हुआ उसमे भी वामपंथी  यानी कन्हीय्या  आगे आ गया  इसके बाद जीशा की हत्या और बलात्कार के मसले को फिर जे एन यु ने दबा दिया और अब फिर दुबारा से इसी तरफ आगे बढ़  रहे है . यानी कुल मिला कर दलित आन्दोलन को कमजोर करना सिर्फ यही है वामपंथी आन्दोलन का मकसद  वामपंथी यानी ब्राह्मणों का एक और संघठन 

दलितों करे ब्राह्मणों का सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार


जन उदय : दुनिया   चाँद पर पहुच गई लेकिन संघी ब्राह्मणों के दिमाग अभी भी गटर में ही रह्तेहाई ये लोग चाहे जितना भी पढ़ लिख  लिख ले लेकिन लेकिन ये लोग जाहिल ही रहेंगे .

ये ही दुनिया की एक ऐसी जाति है जो जहा   जाते है वही अपनी दिमाग की  गंदगी वहा वहा फैलाते है
हाल ही में कुम्भ में दलितों के लिए अलग स्थान   बनाया और उसका कारण संघी गधे ये बता रहे है ये लोग गंदे होते है

हमारे देश में सामाजिक परिवर्तन की लहर चल पढ़ी  है और इसको आगे जभी  बढाया जा सकता है जब दलित लोग आर्थिक और सामाजिक रूप से जयादा शक्तिशाली होंगे  और इसके लिए एक सामाजिक स्तर पर दलितों को एक मुहीम चलानी होगी यानी  रोज मर्रा के सारे  सामान  सभी लोग सिर्फ दलितों की दूकान से ही खरीदे , अगर यह सम्भव न हो तो तो सभी लोग पैसा इकट्टा कर थोक में ले आये

इसके अलावा दलित लोगो को सवर्ण लोगो के खेतो  और फक्ट्री में काम नहीं करना चाहिए
ये कुछ लोगो को बढ़ा  अजीब लगेगा  लेकिन एक बार अगर दलित इन ब्राह्मणों का सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार शुरू कर देंगे तो बाजी जल्द ही दलितों के हाथो में आ जाएगी ,


रही मन्दिरों में और भगवानो की बात तो जिनको जरूरत है वो अपने मंदिर बना ले और खुद ही चढ़ावा  खुद अपने सामाजिक की भलाई के लिए लगाए  या फिर इतनी ताकत रखे अगर कोई इस तरह की हरकत करे की जाति  के नाम से उन्हें मन्दिर में न जाने दे   या जो कुम्भ में हुआ  तो जूता  लेकर उसकी पिटाई  करो


इसके अलावा  दलित इन ब्राह्मणों  से कोई भी सामाजिक  रिश्ता  न रखे  इनके आने पर  थूके  और अपने  पास ही न  आने दे

वो दलित नेता जिनकी बहन और बेटी के बलात्कार के बाद भी सत्ता के लालच में नहीं खोला अपना मूह , जानिये कौन कौन है वो ??

जन उदय :  क्या आपने ऐसे लोग देखे है जो पैसे और सत्ता के लिए अपनी बहन बेटी को भी दाव पर लगा दे , उन्हें बेच दे , या किसी को उनकी इज्जत के साथ खिलवाड़ करने दे , या उनका बलात्कार भी हो जाए तो तो कुछ पैसे या सत्ता में कुछ पद  ले कर चुचाप बैठ  जाए ??? शायद नहीं देखे होंगे या देखे होंगे या सुने होंगे तो सालो के बाद कही कोई या शायद बिलकुल नहीं 

लेकिन आजकल दलित नेता ऐसे है जिन्होंने नीचता की हद पार कर दी है ये लोग पैसे और सत्ता के इतने भूखे हो गए है जिन्हें अपने परिवार और रिश्तो तक की बली चड़ा  दी है शायाद इसे कहते है इंसानियत का मर जाना या आँख का पानी मर जाना
आप सभी सोचंगे की ऐसे नेता कौन है ?? क्या ऐसा सचमुच हुआ है , ?/  

बिलकुल ऐसा  ही हुआ है और जितने भी दलित नेता है सबने ये काम किया है क्योकि एक तरफ ये दलित नेता दलितों के नाम पर वोट लेते है या सत्ता में हिस्सा लेते है है और दलित लोग भी इसी उम्मीद में इनको चुनते है की ये लोग आगे जा कर इनके दुःख दर्द्द में भागी बनेंगे अगर कोई मुसीबत आयगी तो ये नेता इनका साथ देने आयंगे , क्योकि दलित  होना अपने आप में सजा  है  तो शायद ये लोग इनका दर्द समझेंगे और इनके बीच एक रिश्ता होता है , इंसानियत का भाईचारे का  और दलित होने का
लेकिन ये दलित नेता सिर्फ अपनी कुर्सी संभालने में लगे है , 


पुरे देश में दलितों की हत्याए  हो रही है लडकियो के बलात्कार हो रहे है लेकिन ये नेता कुछ नहीं बोलते

डेल्टा , और जीशा  के बलात्कार  और हत्या ऐसे मामले है जिससे दलितों को एकदम सचेत हो जाना चाहिए  और आंदोलित हो जाना  चाहिए क्योकि अब ब्राह्मणों ने नई  रणनीति  अपना ली है दलितों को फिर से गुलाम बनाने  के लिए , सबसे पहले की शिक्षा  छीन ली जाए दलितों से दूसरा  पढ़े  लिखे और मेधावी  दलित  छात्र  छात्राओं  की    हत्या  यानी जल्द पतन

अब दलितों के उपर है की वो लोग सबसे पहले इन दलित  नेताओं को जूता  मारते   है या इनको  अपनी दलाली  के लिए छोड़ते  है


Tuesday, 3 May 2016

जानिये कैसे जातिवादी आतंकवादियो की कमर तोड़ी जा रही है बिहार में , बर्बाद हो जाएंगे सब निकट भविष्य में

जन उदय : दुनिया में किसी  भी समाज को देखो  जो समाज जमीन पर कब्जा रखते है जिनकी आर्थिक स्थिथि  मजबूत है वही लोग दबंग कहलाते है और  उनकी आने वाली पीडिया भी दबंग निकलती है उनका मनोबल इसलिए हमेशा उपर रहता है

यही कारण है भारत में भी उच्च जाति  वाले जिन्होंने इस  देश की सारी जमीनों पर कब्जा कर लिया गरीबो की सारी  जमीने  छीन ली  वो भी जाती के नाम पर और वह भी यह बता कर की भगवान् का आदेश है की नीच जाति  वाले जमीन नहीं  रख सकते . . गरीबो को खून चूस चूस कर इन लोगो ने अपनी तिजोरिया भर ली . आजादी के बाद उसी पैसे और जमीन के दम पर इन्होने तरह तरह  के व्यापार  किये कम्पनी खोली , कारखाने खोले  और जिन लोगो की जमीन थी उन्ही लोगो को वहा मजदूर रखा .

अगर हम इस  देश में सिर्फ शराब के कानूनी धंधे  को देखा जाए तो यह सालाना दस  लाख  हजार करोड़ से उपर का है  और यह पैसा  सारा  जाता है इन्ही जातिवादी लोगो के खाते में यानी ये और मजबूत हुए  और उसी सामाजिक और आर्थिक मजबूती का फायदा उठाते हुए ये लोग समाज में दलित लोगो पर जुल्म करते है , सिर्फ इतना ही नहीं इसी पैसे के दम पर ये लोग   राजनैतिक सत्ता में रहते है  उसी सत्ता के दम पर ये लोग मीडिया  चलाते है  , और दलितों के खिलाफ निति निर्धारित  करते है

लेकिन अब बिहार सरकार ने इन जातिवादियो की के खिलाफ निति निर्धारित करना शुरू कर दिया है  वह है बिहार में शराबबंदी , बिहार में शराब  के   सभी ठेके इन्ही जातिवादियो के है जिनसे हजारो करोड़ की कमाई होती है ,  अगर ये शराब के ठेके बंद होते है तो हजारो करोडो की इनकी कमाई बंद हो आएगी  जो एक बहुत बड़ा अघात होगा
इसके अलावा बिहार सरकार की अगली कार्यवाही इन जातिवादियो के खिलाफ करने वाली है वह है ट्रांसपोर्ट  बिज़नस  जिसकी भी हजारो करोड़ की कमाई हर महीने इन जातिवादियो की होती है सो बिहार सरकार बहुत जल्द ही इन सारी  बसों  को अपने सिस्टम से बाहर निकाल देगी और उनकी कंडिशन्ड  के आधार पर उनको रोड पर नहीं चले देगी , यानी एक और बहुत बड़ा  अघात

जब इन जातिवादियो से यह आर्थिक शक्ति छीन  जाएगी तो इनकी धीरे धीरे अक्ल  अपने आप ठिकाने आ जाएगी , लेकिन अभी भी इसमें एक बात बाकी है की नितीश सरकार को धीरे धीरे  गरीबो और दलितों के आर्थिक  शास्क्तिकरण की  भी नीतिया बनानी होंगी   और ये काम तभी हो सकता है जब हर जगह  आरक्षण सही ढंग से लागू होगा


जातिवादी जजों की चिंता है प्रमोशन में आरक्षण से लेकिन कभी इस बात की चिंता क्यों नहीं की जिनको आरक्षण का लाभ नहीं मिला उसको मिले और बेक लॉग खत्म हो

 जन उदय :  हाल में में  जातिवादी   ब्राह्मण  जजों  ने  प्रमोशन में आरक्षण को यह कहते हुए खत्म कर दिया की यह तर्क संगत नहीं और देश को बाँट  रहा है और इससे गुणवत्ता  पर फर्क पढ़  रहा है यानी जो  लोग आरक्षण  आगे आये है उनमे योग्यता की कमी है

बहुत  अच्छा  किया जज साहेब ने लेकिन जज साहेब ने नहीं   बताया की जिन्हें आरक्षण नहीं मिला यानी ब्राह्मण बनिए  ने अपनी योग्यता के दम  पर क्या क्या चमत्कार किये है  लेकिन ये बताना  भूल  जाते है ये जज

इसके अलावा सुप्रीम  कोर्ट ने समाज में फैली विषमता जो जातिवाद के कारण फैली है जिसके कारण आरक्षण दिया जाता है उसको दूर करने के लिए कभी भी कोई रोड मैप  नहीं दिया

कभी हमारी आदरणीय ब्राह्मण न्यायपालिका ने यह नहीं कहा की आरक्षण जिन लोगो के लिए था उन लोगो को इतने सालो बाद  भी क्यों नहीं मिला , क्यों उनके हिस्से का माल / यानी आरक्षण सब ब्राह्मण खा   गए  और जो  खा गए उन पर केस   या अपराधिक  मुकदमे  क्यों नहीं  चलाये  गए

हमारे ब्राह्मणवादी जज  कभी ये कोशिस क्यों नहीं करते की जो बकाया   आरक्षण  है उसके लिए सरकार जल्द से जल्द कदम उठाये

कोर्ट ने ये कभी  क्यों नहीं कहा की  या कोई रिपोर्ट  मांगी की  की जिनका आरक्षण था मिला या नहीं उन लोगो को ?/


नहीं ऐसा कभी नहीं करेगी  और साथ में जातिवादी  मीडिया में इस बारे में कुछ नहीं कहेगी 

Sunday, 1 May 2016

, जानिये क्यों सुलगती है ब्राह्मणों की लार्ड मैकाले से : भारत में आधुनिकता के पितामाह है

जन उदय : क्या आप जानते है ब्राह्मणों ने जातिवाद को बढाने के लिए जितने ग्रन्थ लिखे  और सामाजिक वाव्य्स्था को बनाने के लिए इन्होने बौध लोगो की हत्याए की बौध विहार  और मठ तोड़ कर इन्होने मंदिर बनाए  इन मौध मठो  के अलावा  ब्राह्मणों के भगवानो का और कोई भी सबूत  इतिहास में नहीं मिलता  .
ब्राह्मण इस देश में पश्चिमी देशो से रूस  जर्मन , इटली  आदि से आये    और इनको यहाँ  रहने की जगह मिली लेकिन ये लोग जाहे रहे वही उसी देश से समाज से गद्दारी करते रहे . भारत में इसका पूरा इतिहास है . मुस्लिम  राजा जब आये  तब ये उनके साथ हो गए  इस बात के प्रमाण भी मिलते है की इन पर जजिया कर नहीं  लगता था , ब्रिटिश काल में जब अंग्रेजो ने इनकी नहीं सुनी और अंग्रेजो ने पाया की ये इनके किसी काम के नहीं है तो अंग्रेजो ने इनको दरकिनार कर दिया  और  अपनी शासन वाव्य्स्था  चलाने के लिए भारत में आधुनिक शिक्षा  और आधुनिक वाव्स्य्था की नीव डाली  . जिसमे  सभी जातिया  शामिल थी

बस   ये बात इनको मंजूर न थी  ये चाहते थे  जातिवाद  सलामत   रहे और इनकी  पुरोहित  गिरी  भी सलामत रहे  लेकिन अंग्रेजो ने ऐसा नहीं होने  दिया  और इन विदेशी गद्दार ब्राह्मणों . जो काम  ब्राह्मण अपनी योग्यता से  कभी नहीं कर पाए आइये  देखते है  की अंग्रेजो ने कैसे आधुनिकता की नीव डाली  इस देश में

1- अंग्रेजो ने 1795
में अधिनयम 11 द्वारा
शुद्रों को भी सम्पत्ति
रखने का कानून बनाया।

2- 1773 में ईस्ट इंडिया
कम्पनी ने रेगुलेटिग एक्ट
पास किया जिसमें न्याय
व्यवस्था समानता पर
आधारित थी।6 मई 1775
को इसी कानून द्वारा
बंगाल के सामन्त ब्राह्मण
नन्द कुमार देव को फांसी हुई थी।
3- 1804 अधिनीयम 3 द्वारा कन्या हत्या पर रोक
अंग्रेजों नेलगाई (लडकियों
के पैदा होते ही तालु में अफीम चिपकाकर, माँ के
स्तन पर

धतूरे का

लेप लगाकर, एवम्

गढ्ढाबनाकर उसमें दूध डालकर डुबो कर मारा
जाता था

4- 1813 में ब्रिटिश सरकार
ने कानून बनाकर शिक्षा
ग्रहण करने का सभी
जातियों और धर्मों के
लोगों को अधिकार दिया।

5- 1813 में ने दास प्रथा
का अंत कानून बनाकर
किया।

6- 1817 में समान नागरिक
संहिता कानून बनाया
(1817 के पहले सजा का
प्रावधान वर्ण के आधार
पर था। ब्राह्मण को कोई
सजा नही होती थी ओर
शुद्र को कठोर दंड दिया
जाता था। अंग्रेजो ने सजा
का प्रावधान समान कर
दिया।)

7- 1819 में अधिनियम 7
द्वारा ब्राह्मणों द्वारा शुद्र
स्त्रियों के शुद्धिकरण पर
रोक लगाई। (शुद्रोंकी शादी
होने पर दुल्हन को अपने
यानि दूल्हे के घर न जाकर
कम से कम तीन रात ब्राह्मण के घर शारीरिक
सेवा देनी पड़ती थी।)

8- 1830 नरबलि प्रथा पर
रोक
( देवी -देवता को प्रसन्न
करने के लिए ब्राह्मण शुद्रों,
स्त्री व् पुरुष दोनों को मन्दिर
में सिर पटक पटक कर
चढ़ा देता था।)

9- 1833 अधिनियम 87
द्वारा सरकारी सेवा में भेद
भाव पर रोक अर्थात
योग्यता ही सेवा का
आधार स्वीकार किया
गया तथा कम्पनी के
अधीन किसी भारतीय
नागरिक को जन्म स्थान,
धर्म, जाति या रंग के
आधार पर पद से वंचित
नही रखा जा सकता है।

10-1834 में पहला भारतीय विधि आयोग
का गठन हुआ। कानून
बनाने की व्यवस्था जाति,
वर्ण, धर्म और क्षेत्र की भावना से ऊपर उठकर करना आयोग का प्रमुख उद्देश्य था।

11-1835 प्रथम
पुत्र को गंगा दान पर रोक (ब्राह्मणों ने नियम बनाया
की शुद्रों के घर यदि पहला
बच्चा लड़का पैदा हो तो
उसे गंगा में फेंक देना
चाहिये।
पहला पुत्र ह्रष्ट-पृष्ट एवं
स्वस्थ पैदा होता है।यह
बच्चा ब्राह्मणों से लड़ न
पाए इसलिए पैदा होते ही
गंगा को दान करवा देते थे।

12- 7 मार्च 1835 को
लार्ड मैकाले ने शिक्षा
नीति राज्य का विषय
बनाया और उच्च शिक्षा
को अंग्रेजी भाषा का
माध्यम बनाया गया।

13- 1835 को कानून
बनाकर अंग्रेजों ने शुद्रों
को कुर्सी पर बैठने का अधिकार दिया।

14- दिसम्बर 1829 के
नियम 17 द्वारा विधवाओं
को जलाना अवैध घोषित कर सती प्रथा का अंत किया।

15- देवदासी प्रथा पर
रोक लगाई।ब्राह्मणों के
कहने से शुद्र अपनी
लडकियों को मन्दिर की
सेवा के लिए दान देते थे। मन्दिर के पुजारी उनका
शारीरिक शोषण करते थे।
बच्चा पैदा होने पर उसे
फेंक देते थे।और उस
बच्चे को हरिजन नाम
देते थे।
1921 को जातिवार जनगणना के आंकड़े के अनुसार अकेले मद्रास में कुल जनसंख्या 4 करोड़
23 लाख थी जिसमें 2
लाख देवदासियां मन्दिरों
में पड़ी थी।
यह प्रथा अभी भी दक्षिण भारत के मन्दिरो में चल
रही है।

16- 1837 अधिनियम
द्वारा ठगी प्रथा का अंत
किया।

17- 1849 में कलकत्ता
में एक बालिका विद्यालय
जे ई डी बेटन ने स्थापित
किया।

18- 1854 में अंग्रेजों ने
3 विश्वविद्यालय कलकत्ता
मद्रास और बॉम्बे में
स्थापित किये। 1902 मे
विश्वविद्यालय आयोग
नियुक्त किया गया।

19- 6 अक्टूबर 1860
को अंग्रेजों ने इंडियन
पीनल कोड बनाया।
लार्ड मैकाले ने सदियों
से जकड़े शुद्रों की
जंजीरों को काट दिया
ओर भारत में जाति, वर्ण
और धर्म के बिना एक
समान क्रिमिनल लॉ
लागु कर दिया।

20- 1863 अंग्रेजों ने कानून बनाकर चरक
पूजा पर रोक लगा दिया (आलिशान भवन एवं पुल
निर्माण पर शुद्रों को
पकड़कर जिन्दा चुनवा
दिया जाता था इस पूजा
में मान्यता थी की भवन
और पुल ज्यादा दिनों
तक टिकाऊ रहेगें।

21- 1867 में बहू विवाह
प्रथा पर पुरे देश में
प्रतिबन्ध लगाने के
उद्देश्य से बंगाल सरकार
ने एक कमेटी गठित
किया ।

22- 1871 में अंग
्रेजों ने भारत में जातिवार गणना प्रारम्भ की। यह जनगणना 1941 तक
हुई । 1948 में पण्डित
नेहरू ने कानून बनाकर जातिवार गणना पर
रोक लगा दी।

23- 1872 में सिविल
मैरिज एक्ट द्वारा 14
वर्ष से कम आयु की कन्याओं एवम् 18 वर्ष
से कम आयु के लड़को
का विवाह वर्जित करके
बाल विवाह पर रोक
लगाई।

24- अंग्रेजों ने महार और चमार रेजिमेंट बनाकर
इन जातियों को सेना में
भर्ती किया लेकिन 1892
में ब्राह्मणों के दबाव के कारण सेना में अछूतों की भर्ती बन्द हो गयी।

25- रैयत वाणी पद्धति अंग्रेजों ने बनाकर प्रत्येक पंजीकृत भूमिदार को
भूमि का स्वामी स्वीकार
किया।

26- 1918 में साऊथ
बरो कमेटी को भारत मे
ं अंग्रेजों ने भेजा। यह कमेटी भारत में सभी
जातियों का विधि
मण्डल (कानून बनाने
की संस्था) में भागीदारी
के लिए आया था। शाहू
जी महाराज के कहने पर पिछङो के नेता भाष्कर
राव जाधव ने एवम्
अछूतों के नेता डा
अम्बेडकर ने अपने लोगों
को विधि मण्डल में
भागीदारी के लिये
मेमोरेंडम दिया।

27- अंग्रेजो ने 1919 में भारत सरकार अधिनियम का गठन किया ।

28- 1919 में अंग्रेजो ने ब्राह्मणों के जज बनने प
र रोक लगा दी थी और
कहा था की इनके अंदर
न्यायिक चरित्र नही
होता है।

29- 25 दिसम्बर 1927
को डा अम्बेडकर द्वारा
मनु समृति का दहन किया।

30- 1 मार्च 1930 को
डा अम्बेडकर द्वारा काला
राम मन्दिर (नासिक)
प्रवेश का आंदोलन
चलाया।

31- 1927 को अंग्रेजों ने कानून बनाकर शुद्रों के सार्वजनिक स्थानों पर
जाने का अधिकार दिया।

32- नवम्बर 1927 में साइमन कमीशन की
नियुक्ति की।जो 1928 में
भारत के लोगों को
अतिरिक्त अधिकार देने
के लिए आया। भारत के
लोगों को अंग्रेज अधिकार न दे सके इसलिए इस कमीशन के भारत पहुँचते ही गांधी ने
इस कमीशनके विरोध में बहुत बड़ा आंदोलन
चलाया। जिस कारण
साइमन कमीशन अधूरी
रिपोर्ट लेकर वापस
चला गया। इस पर
अंतिम फैसले के लिए
अंग्रेजों ने भारतीय
प्रतिनिधियों को 12
नवम्बर 1930 को लन्दन गोलमेज सम्मेलन में
बुलाया।

33- 24 सितम्बर 1932
को अंग्रेजों ने कम्युनल
अवार्ड घोषित किया
जिसमें प्रमुख अधिकार
निम्न दिए----

A--वयस्क मताधिकार

B--विधान मण्डलों और
संघीय सरकार में
जनसंख्या के अनुपात
में अछूतों को आरक्षण
का अधिकार

C--सिक्ख, ईसाई और मुसलमानों की तरह
अछूतों को भी स्वतन्त्र
निर्वाचन के क्षेत्र का
अधिकार मिला। जिन
क्षेत्रों में अछूत प्रतिनिधि
खड़े होंगे उनका चुनाव केवल अछूत ही करेगें।

D--प्रतिनिधियोंको चुनने
के लिए दो बार वोट का
अधिकार मिला जिसमें
एक बार सिर्फ अपने
प्रतिनिधियों को वोट देंगे
दूसरी बार सामान्य
प्रतिनिधियों को वोट देगे।

34- 19 मार्च 1928 को बेगारी प्रथा के विरुद्
ध डा अम्बेडकर ने मुम्बई
विधान परिषद में आवाज
उठाई। जिसके बाद
अंग्रेजों ने इस प्रथा को
समाप्त कर दिया।

35- अंग्रेजों ने 1 जु
लाई 1942 से लेकर 10 सितम्बर 1946 तक डाॅ अम्बेडकर को वायसराय
की कार्य साधक
कौंसिल में लेबर मेंबर
बनाया। लेबरो को डा अम्बेडकर ने 8.3 प्रतिशत आरक्षण दिलवाया।

36-- 1937 में अंग्रेजों
ने भारत में प्रोविंशियल गवर्नमेंट का चुनाव
करवाया।

37-- 1942 में अंग्रेजों
से डा अम्बेडकर ने 50
हजार हेक्टेयर भूमि को
अछूतों एवम् पिछङो में
बाट देने के लिए अपील
किया ।
अंग्रेजों ने 20 वर्षों की
समय सीमा तय किया था।

38- अंग्रेजों ने शासन प्रसासन में ब्राह्मणों की भागीदारी को 100% से 2.5% पर लाकर खड़ा
कर दिया था।

इन्ही सब वजाह से ब्राह्मणों
ने अन्ग्रेजो के खिलाफ़
क्रांति शुरू कर दी क्योकि
अन्ग्रेजो ने शुद्रो को सारे अधिकार दे दीये थे और
सब जातियो के लोगो को एक समान अधिकार देकर सबको बराबरी मे लाकर खडा किया।