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Friday, 8 December 2017

धार्मिक आंतकवाद लोगो को आदमखोर बनाता हुआ : उदय चे

राजस्थान के राजसमंद में एक धार्मिक आंतकवादी ने जिस प्रकार से एक बुजर्ग मजदूर को धोखे से काम के लिए बुलाकर उसकी निर्ममता से हत्या की गई। उसकी पीठ पर वार किया गया। उसके अंगों को बड़ी बेहरमी से काटा गया फिर उसको जलाया गया। उसके बाद जिस निडरता से कातिल ने कत्ल करने के पिछे का राज बताया, हत्या को जायज ठहराने के लिए जिस प्रकार कातिल ने महाराणा प्रताप को कोट किया, जय मेवाड़, जय भारत, जय हिंद का नारा दिया। मन्दिर में वीडियो को बनाना औऱ भगवा रंग, ये सब उस धर्म के जहर का असर है जिसे धीरे-धीरे हिंदुत्व की सिरिंज से चढ़ाया गया है। ऐसे लोगो को आदमखोर जानवर धीरे-धीरे हिंदुत्ववादी आंतकवादियो ने बनाया है। कोई भी इन्सान या समाज आदमखोर एक दम नही बन जाता इसके लिए धार्मिक आंतकवादी बहुत लंबे समय से काम कर रहे होते है। भारत की आजादी के आंदोलन में जहाँ बहुत बड़ा तबका देश को आजाद करवाने के लिएअंग्रेजो के खिलाफ मजबूती से लड़रहा था। 


शहीद भगत सिंह और उसके साथियों ने देश की ही नही, पूरी मानव जाति की आजादी के लिए 1928 में जहाँ हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) का गठन किया। जिसने मानव मुक्ती के लिए संघर्ष का आह्वान किया। वही दूसरी तरफ भारत में अंग्रेजो की मद्दत से आजादी के आन्दोलन और HSRA के खिलाफ मुस्लिम और हिंदुत्वादी संघठनो को मजबूत किया गया। जिनका मुख्य एजेंडा ही मानव मुक्ति के संघर्ष की बुनियाद मेहनतकश आवाम की एकता को तोड़ने के लिए भारतीय समाज में धर्म-जात-इलाका के नाम परलोगो को बांटना था। इस मुहिम में वो कामयाब भी रहे। गोड़से जिसको धर्म के जहर ने धीरे-धीरे आदमखोर जानवर बनाया। इस आदमखोर जानवर का सहारा लेकर इसके आकाओं ने महात्मा गांधी की हत्या करवाई। महात्मा गांधी की हत्या इसी हिंदुत्वादी आंतकवादी लाइन द्वारा की गई हत्या थी। बाबरी मस्जिद को तोड़ने की, बम्बई, गुजरात, गन्धमालके दंगे हो या प्रगतिशील बुद्विजीवियों, कलाकारो, छात्रों, मजदूर नेताओं, लेखकों, पत्रकारो की हत्याये ये सब धार्मिक आतंकवादियों द्वारा अपने आकाओं के इशारे पर की गयी कार्यवाईयाँ है।
एक आदमी जान-बूझकर, सोच-समझकर अपने हाथों से हत्या करता है और उसके चेहरे पर शिकन तक नहीं है। ये धार्मिक पागलपन हैऔऱ ये कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी यहाँ दलितो, मुश्लिमो, सिखों आदिवासियों के नरसंहार हुए है। बस वीडियो अब बनने लगे है। हरियाणा के झज्झर जिले केदुलीना में 5 दलितो को इसलिए जिंदा जला दिया गया था क्योकि वो मरे हुए पशुओं को उठाकर उनकी खाल उतारने का काम करते थे। उस दिन भी वो मरी हुई गायों की खाल उतार कर अपने घर जा रहे थे। इस काम का उनके पास सरकारी मंजूरी भी थी लेकिन आदमखोरों ने उनको घेर लिया और धर्म के नाम पर जिंदा जला दिया। ऐसे ही मिर्चपुर में अंधे बुजर्ग ओर उसकी अपँग बेटी को भीड़ ने जला दिया था। दादरी के अखलाक, जुनैद औऱ अलवर के पास हुई किसान पहलू खान की इन आदमखोरों द्वारा हत्याये इसी धार्मिक जहर का असर है। लेकिन जब ये आदमखोर जानवर अपना शिकार करते है तो बाकी आवाम की चुप्पी ये साबित करती है कि आप भी इस धर्म के जहर के प्रभाव में वहसी दरिंदे बनने की तरफ बढ़ रहे हो। धार्मिक आंतकवादी इन सभी हत्यायों के बाद जश्न मनाते है हत्या के पक्ष में दलील देते है और हत्यारों को समान्नित करते है। आप ऐसे धार्मिक आतंकवादियों के समर्थन में जय जयकार करते हो या चुप रहते हो।आपकी जय जयकार या चुप्पी आपकी आने वाली नश्लो को आदमखोर जानवर बना देगी। फिर इंसानी बस्ती होने कीबजाए आदमखोरों की बस्ती होगी। उस समय इंसानी मूल्य, सिंद्धान्त, मानवतासब खत्म हो जायेगें। इसलिए अभी भी समय है अगर हमे इंसानी सभ्यता को बचाना है तो खुद के धर्म के इन धार्मिक आंतकवादियो का नाश करना पड़ेगा। धर्म-जात-इलाका से ऊपर उठकर हमे मेहनतकश आवाम की एकतास्थापित करनी होगी। क्योकि लुटेरी मण्डली का ये सारा खेल ही इस एकता को तोड़ने के लिए है। भारत में ही नही पुरे विश्व मे जब भी मेहनतकश मानव मुक्ति के लिए एकजुट होना शुरू करता है तो सामंतवादी, पूंजीवादी लुटेरी मण्डली धर्म-जात-इलाका औऱ अंधराष्ट्रवाद के नाम पर लोगों को बांटने का काम करती है। अल्पसंख्यको, दलितो, आदिवासियों को दुश्मन के तौर पर बहुसंख्यक आबादी के सामने पेश करती है और अल्पसंख्यको, दलितो, आदिवासियों पर हमले करने के लिए बहुसंख्यक आबादी को तैयार करती है। पूरी दुनिया में साम्राज्यवादी सत्ताएँ पिछले दरवाजे से इनको संचालित करती है। तालिबान, अलक़ायदा, isisi, भारत मे हिंदुत्वादी आंतकवादी इन सब के पीछे साम्राज्यवादी खेमा मजबूती से खड़ा है। जो इनको फंडिंग करता है।


बहुत पहले हॉलीवुड की एक फ़िल्म रॉंग टर्न फ़िल्म देखी थी। रॉंगटर्न का मतलब होता है "गलत रास्ता"
इसफ़िल्म कि कई सीरीज मार्किट में आई। ये सभी सीरीज इतनी डरावनी औऱ हॉरर थी कि अकेलाआदमी सायद देख सके। फ़िल्म में कहानी ये है कि कुछ वज्ञानिक गरीब लोगों पर बिना सरकार कीइजाजत लिए दवाइयों का प्रयोग करते है। ऐसी दवाइयों का प्रयोग जो मानव हित मे होकर मानव की बर्बादी की तरफ जाता है। जिन इंसानो ओर ये प्रयोग किये जाते है वो सब उन दवाइयों के कारण विकृत हालात ने चले जाते है वो आदमखोर बन जाते है। वो उस प्रयोगशाला से इन सभी को मार कर भाग जाते है। अब वो आदमखोर जहां भी जाते है। वहाँ-वहाँ वो मानव जाति का सर्वनाश करते है उनको खा जाते है। अब वो जंगल मे रहते है जहाँ रहते है वहाँ आस-पास वो मानव जाति को खत्म कर देते है। अब कोई भी शख्स गलती से रास्ता भूल कर उनकी बस्ती की तरफ चल जाता है तो उस इंसान का खात्मा वो बड़ी बेहरमी से कर देते है जैसे कुल्हाड़ी, दरातसे काट देना जैसे लकड़ी को काटा हो। उस फिल्म को देख कर जो मेरी समीक्षा बनी वो ये थी की वो सभी आदमखोर मानवता के लिए इतना बड़ा खतरा नही है वो बड़े दोषी है। लेकिन वो आदमखोर बन चुके है तो उनका इलाजजरूरी है। लेकिनसबसे बड़ा खतरा वो डॉ या वज्ञानिक है जिन्होंने अपने फायदे के लिए साधारण इंसानो को आदमखोर बनाया। उनका खात्मा सबसे ज्यादा जरूरी है ताकि नए आदमखोर पैदा होने से समाज को बचाजा सके। हमें इन्हें देखकर निराश नहीं होना है। उम्मीद अब भी बची हुई है, हम ये सब रोक सकते हैं। वक्त रहते कुछ लिख-पढ़ लें, अपनी सोच का दायरा बढ़ा लें, लोगों से बात करें, तोइस पागलपन को हम आसानी से रोक देंगे।



राजसमंद की इस घटना को टाला जा सकता थाअगर समय रहते ऐसे आदमखोर की पहचान हो जाती तो उसका समय पर इलाज करवाया जा सकता था। इसलिए आज आप अपने आस-पास ऐसे धार्मिक आंतकवादियो की पहचान कीजिये जो साधारण इंसानो को धर्म के नाम पर वहसी जानवर बना रहे है, मानव बम बना रहे है। ऐसे आतंकवादियों को जितना जल्दी खदेड़ दोगे आप खुद को और मानव जाति के वर्तमान भविष्य को सुरक्षित बना पाओगे। मानवता के लिए आज सबसे बड़ा दुश्मन साम्रज्यवाद, उसके दलाल धार्मिक आंतकवादी औरये आदमखोर जानवर है। मानव सभ्यता बचाने औऱ मानव मुक्ति के लिए मेहनतकश आवाम का पहला काम इन तीनों ताकतों का सफाया करना जरूरी है।
UDay Che







Thursday, 7 December 2017

देश का सारा सोना चांदी पैसा आ जाएगा ब्रह्मण बनिए के कब्जे में , ऐसा कानून ला रही है मोदी सरकार


जन उदय ;  ये देश ब्राह्मणों का है इस देश पर सत्ता पर काबिज ब्राह्मण बनिए ठाकुर रहने चाहिए  ऐसी मानसिकता  संघियो यानी   ब्राह्मणों  की है  और ये लोग इस कार्य ले लिए भारत के मूलनिवासियो की हत्या , कत्ल  , बेरोजगारी बढ़ाना , अशिक्षा  बढ़ाना   कुछ भी करने को तैयार  है .

आरक्षण होने के बावजूद देश के मूलनिवासियो  के विकास का पैसा  खा गए  उनका हक उनतक  पहुचने नहीं दिया गया उनकी हत्या क़त्ल आदि कर  बेरोजगार  रखने के लिए हर सम्भव प्रयास  किया जाता है . देश की अर्थ्वाव्स्था  पूरी की पूरी ब्राह्मण बनिए  और सवर्णों के हाथ में है , इन्ही के सारे  धंधे  है


लेकिन अब एक ऐसा बिल आने वाला है  जब देश के हर आदमी का पैसा ब्राह्मण बनिए और सवर्णों की जेब में पहुच जाएगा  और कोई इस बात के खिलाफ किसी  भी अदालत में फ़रियाद  भी नहीं कर सकता
जी हाँ जल्द ही मोदी  सरकार अपने पूंजीपति आकाओं  को खुश करने के लिए एक ऐसा कानून  संसद में आने जा रही है इसमें यह होगा की अगर आपने किसी  भी सरकारी बैंक में पैसा जमा करा दिया   तो बैंक  आपका पैसा  वापिस देने से इकार कर सकता है  उसके बदले में आपको चार कागज के टुकड़े दे  सकता है और कह सकता है  की पैसा दस  साल बाद लेना 

अब विस्तार से समझिये

बैंक पने दिवालिया होने की स्थति में यह कदम उठायगा . तो सबसे बड़ी बात वह पुजीपतियो से पैसा वापिस क्यों नहीं लेता या लेगा , यानि देश  का पैसा ब्राह्मण बनिए उद्योगपति के पास जाएगा , फिर वापिस नहीं देगा , फिर बैंक अपने आपको दिवालिया घोषित करेगा  और आपका यानी गरीब आदमी का पैसा बैंक हडप लेगा अब वो पैसा आप   चाहे मरे , बीमार हो   बेटी की  शादी  हो   कभी नहीं मिलेगा , यानी बैंक पूंजीपति से पैसा न लेकर  आपका पैसा हड्पेगा वो भी कानून के जरिये

उधाह्र्ण के लिय  स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया  का एकलाख अस्सी  हजार करोड़  रुपया एन पी ए  है यानी वो पैसा अब नहीं मिलेगा , इस पैसे को वापिस लाने के लिए बैंक कोई कार्यवाही  भी नहीं करता  ,क्यों ?? विजय माल्या  जैसे विदेशो में मस्ती कर रहे है उनकी कम्पनी यहाँ चल रही है फिर भी सरकार  कुछ नहीं करती
इसके बाद ऐसा हो की आप इजी बैंको के तरफ भागे अपने पैसे को सुरक्षित करने के लिए लेकिन एक दिन वो भी अपना इसी  तरह इस कानून का लाभ लेंगे और इस  कानून के बहाने  आपका सारा पैसा   लेकर ये लोग  यानी ब्राह्मण बनिए  देश छोड़  भाग खड़े  होंगे .


कुछ लोग सोचते है की ऐसा क्यों होगा ये लोग देश छोड़  क्यों भागेंगे ?? ये लोग इसलिए भागेंगे क्योकि देश में सामाजिक परिवर्तन उर गृह युद्ध की बयार चल पढ़ी  है और एक न एक दिन इन  लोगो को मरना ही है  तो ये लोग महसूस कर चुके है इसलिए ये लोग देश को कंगला कर भाग जाना चाहते है  

मायावती के जरिये होगी दुनिया की सबसे बड़ी रक्तहीन क्रान्ति ,जानिये कैसे


जन उदय : आजकल जिस तरह दलित जो की वर्ण वाव्य्स्था के अनुसार छोटी जाति के है उन पर लगातार अत्याचार बढ़ते जा रहे है सहारनपुर मेरठ , अलीगढ , पंजाब और देश के अन्य स्थानों से लगातार दलितों पर जुल्म की खबरे आ रही है सहारन प[उर में लगातार पुलिस और प्रशासन की मदद से ठाकुर लोग दलितों के घर जलाए जा रहे है . आखिर इन जुल्मो का या कोई अंत है ?? आखिर किस तरह सदीओ पुरानी मानसिकता को दलित लोग खत्म कर पायंगे ?? ये हो भी पायेगा या नहीं

भारत में जातिवाद की समस्या हजारो साल से है और यह इसलिए है की ब्राह्मणों ने इस जातिवाद को सामाजिक बना दिया और यह कह दिया की यह भगवान् की बनाई हुई वाव्य्स्था है जिससे समाज को सुचारू रूप से चलाया जा सके . मानसिक रूप से विक्षिप्त ब्राह्मणवादी मैनेजमेंट गुरु यह भी बताने से नहीं हिचकते की भारत में मनेजमेंट हजारो सालो से है क्योकि प्राचीन भारत में समाज को चलाने के लिए एक वैज्ञानिक वाव्य्स्था थी , खैर ये वही लोग है नारद को पहला रिपोर्टर बताते है

खैर यहाँ यह भी जान लेना भी आवश्यक है की भारत में ब्राह्मण विदेशी और यहाँ शरण ले कर रहे रहे थे , लेकिन अशोक के बाद उसके प्रोपोत्र का सेनापति पुष्य मित्र सुंग जिसने धोके से अपने सम्राट को मार बौध लोगो की हत्या करना शुरू कर दिया बौध विहार और मठ तोड़ उनको मंदिरों की शक्ल दे दी गई

और बौध लोगो को अपना गुलाम बना लिया , इसी गुलामी को बरकारर रखने के लिए ब्राह्मणों ने मानव मनोविज्ञान का इस्तेमाल करते हुए कुछ ग्रन्थ रचे जिनमे अपने आपको श्रेष्ट बताया जाति वावय्स्था को समाजिक और धार्मिक मान्यता देने वाले ग्रन्थ रच लिए और दलितों को शिक्षा , सम्पति के अधिकार छीन लिए गए

दलित आन्दोलन होते होते बाबा साहेब तक आये जिन्होंने न सिर्फ इस देश का सविंधान बनाया बल्कि दलितों को पुन पैक्ट के बदले आरक्षण भी दिलवाया जिसमे उम्मीद थी की दलितों की सामाजिक और आर्थिक स्थिथि सुधरेगी लेकिन ऐसा भी नहीं हो सका क्योकि दलितों के नाम पर मिले सारे फायदे खुद जातिवाद के जनक रक्षक और पोषक समाज ने खा लिए , लेकिन एक बहुत बढ़ा फर्क जो भारत के समाज में बाबा साहेब ने डाला वह यह था बाबा साहेब ने अपनी मृत्यु से पहले लाखो लोगो के साथ बौध धर्म अपनाया .



हालांकि इसके बाद भी जातिवाद खत्म नहीं हुआ बल्कि पिछले कुछ सालो से जातिवाद लगातार बढ़ रहा है और इसके साथ साथ जाति के नाम पर उत्पीडन भी लेकिन इस बीच एक काम यह हो गया है की दलित समाज के काफी लोग पढ़ लिख गए है और ये पढ़े लिखे लोग अपने अपने समाज और परिवेश में काफी जागरूकता ला रहे है लेकिन इनकी संख्या काफी कम है क्योकि जो दलित पढ़ लिख गए है और समाज में काफी अच्छा मकाम हांसिल कर चुके है वो लोग खुद ब्राह्मणवादी हो चुके है और इन्ही की वजह से दलित समाज आगे नहीं जा पा रहा है .

अभी कुछ दिन पहले मायावती ने ये ऐलान किया था की वो अपने समर्थको के साथ बौध धर्म स्वीकार करेंगी .
अगर ऐसा होता है तो यह बात समझ लेनी चाहिए की मायावती के समर्थक लाखो में नहीं बल्कि करोडो में है और ये है भारत के इतिहास की एक बहुत बड़ी घटना होगी जो पूरी दुनिया के सामाजिक आंदोलनों पर बहुत गहरा असर डालेगी और भारत में तो सीधा सीधा ब्राह्मणवाद पर बहुत बढ़ा असर डालेगी ,

मायावती के इस कदम से हिन्दू नाम की प्रजाति एकदम लुप्त हो जाएगी और ब्राह्मणवादी जो लोग हिन्दू नाम का कवच पहन मुस्लिम और इसाइओ पर अत्याचार करते है वह सब इसके बाद न हो सकेगा , बल्कि बौध , मुस्लिम , इसाई मिलकर कर ब्रह्मन्वाडियो को इस देश से ही नेस्तनाबूत कर देंगे , किसी भी तरह का सामाजिक तनाव ब्राह्मणवादी झेल नहीं सकेंगे और इसके बाद यह तय है की इनका अंत बहुत जल्द ही हो जाएगा

और यह दुनिया की सबसे बड़ी रक्तहीन सामाजिक क्रान्ति होगी मायावती के लिए क्रांति की जमीन तैयार है

key word : mayawati convert to boudhism ,boudhism dalit convert to boudhism ayran invasion , upper caste atrocity against dalit / low caste , hinduism


Wednesday, 6 December 2017

भारत में २०२४ का चुनाव एस सी /एस टी / ओ बी सी और आर्य ब्राह्मण - सवर्ण आतंकवाद के बीच होगा

 भारत में २०२४ का चुनाव मूलनिवासी और आर्य आतंकवाद के बीच होगा
जन उदय : पूना पैक्ट   को बाबा साहेब अम्बेडकर ने सिर्फ इसलिए स्वीकार किया क्योकि उस वक्त दलित किसी  भ तरह की सत्ता सम्भालने के लायक नहीं थे यानी आर्थिक रूप से शिक्षा के स्तर से समाजिक रूप से संघठित नहीं थे इसलिए उन्होंने पूना पैक्ट को स्वीकार किया और उसके बदले दलित यानी भारत के मूलनिवासी जिन्हें एस सी एस टी ओ बी सी  कहा गया उनके लिए नौकरी ,शिक्षा राजनैतिक प्रतिनिधित्व मिले , और इस प्रतिनिधित्व को पूरा करने के लिए आरक्षण की वाव्य्स्था की गई . यानी आरक्षण सबसे  पहले कोई खैरात नहीं  क्योकि यह पूना पैक्ट के जरिये बाबा साहेब द्वारा एक बहुत बड़ा बलिदान दे कर मिला यानी यह खुद भारत पर एक अहसान था और  और कोंग्रेसी   गाँधी की नौटंकी से भी निपट लिया गया . अगर आज आरक्षण स्म्पाप्त किया जता है तो भारत में सरकार द्वारा पूना पैक्ट को लागू  करना होगा . दूसरा यह की अब्बा साहेब द्वारा यह देश को  विकसित करने , सभी का विकास करने और एकता बनाए रखने की एक बहुत बड़ी पहल थी , जबकि इसके उल्ट गांधी नेहरु – सावरकर , और अन्य संघियो  ने न सिर्फ देश को तोड़ने की वकालत की बल्कि  अंग्रेजो की सत्ता बनाए रखने की भी वकालत की  .

यहाँ एक बात साफ़ कर देना बहुत जरूरी है कि आर्य विदेशी आक्रमणकारी  है   और इस देश में रोटी पानी की  तलाश में आये थे , कालन्तर में ये शिक्षा के दम पर राज्य की गतिविधिओ में  शामिल रहने लगे  और लगभग  १८० बी सी में एक ब्राह्मण सेनापति  पुश्मित्र शुंग ने व्रह्द्साथ की हत्या कर शासन पर कब्जा कर लिया इकसे बाद पुष्यमित्र शुंग ने बौध  लोग को हत्याए की यहाँ तक की गर्भवती स्त्री का पेट फाड़ बच्चे की ह्त्या की  चौरासी  हजार बौध  स्तूप  और विहारों को तोड़  उनके मंदिर बनवाये और  बौध को शिक्षा और सम्पति से वंचित कर दिया  और इसके बाद २३०  ईसा बाद  तक ऐसे ग्रन्थ लिख लिए जिसमे अपने आपको भगवान का प्रतिनिधि  बताया  और सभी लोगो को अपने से निचे बताया और समाज को जाती में विभाजित कर यहाँ के मूलनिवासियो को नीच / शुद्र  चंडाल घोषित कर दिया , इसके बाद इम्होने मुस्लिम राजाओं को निमन्त्रण दे कर बुलाया  उनके दरबारों में रहे उनसे अपनी बेटियो की शादी की
बाबा साहेब के सपने १९५६ से टूटने शुरू हो गए जब  वामपंथी , संघी औ कोंग्रेस के रूप में छिपे  ब्राह्मण भेडियों  ने अपने रंग दिखाना  शुरू कर दिया , हिन्दू कॉड बिल का विरोध , स्त्री शिक्षा और सम्पत्ति के अधिकार का विरोध और ओ बी सी आरक्षण का विरोध  हुआ तो बाबा साहेब ने इस्तीफा दे दिया


 ब्राह्मण तीन  तरीके से दलित / मूलनिवासियो  को बर्बाद करने के षड्यंत्र में लगे रहे , संघी  आक्शन का विरोध करते रहे लेकिन हिन्दू कह कर इन्हें अपने दंगो का ईंधन बनाए रखा  यह बाद दलित बिलकुल समझ ही नहीं पाए की  अगर ब्राह्मण / संघी  हिन्दू कैसे हुए जो हिन्दुओ को मिलने वाली बेसिक सुविदाओ  का विरोध करते है  यानी आरक्षण का  विरोध ,  जब की मुल्सिम मुस्लिम के खिलाफ  आन्दोलन नहीं करता , सिख सिख के विरोध में आन्दोलन नहीं खड़ा करता  तो ये ब्राह्मण  हिन्दू  होने के बावजूद दलितों का विरोध कैसे करते है ??
यानी डरपोक ब्राह्मण  जब मुस्लिम से डरता तो दलितों को आज भी हिन्दू कहता है

खैर वामपंथी समानता का सपना दिखा इन्हें मार्क्सवाद के नाम पर छलता  रहा यानि दलितों का अपना कोई आन्दोलन या पार्टी न खड़ी  हो हमेशा इस कार्य में लगे  रहे  और कोंग्रेस  ने आगजनी , हत्या , जैसे हथियार अपनाए रखे
अब जब २०१७ है वामपंथी , कांग्रेस  और संघी एक समान कार्य करने वाले लोगो के आतंक से सिर्फ दलित ही नहीं बल्कि मुस्लिम   सभी परेशान और आतंकित है , बाबरी मस्जिद विध्वंश ,  गुजरात दंगे गोदरा काण्ड , सहारन पुर काण्ड , रोहित वेमुला हत्या , डेल्टा  मेघवाल हत्या , अख़लाक़ हत्या  और ऐसे हजारो केस फेक एनकाउंटर के , और मोदी योगी के दौर में  लगातार  सपा बसपा के लोगो की रोज हत्या , दलित और प्रगतिवादी  लेखको की हत्या गौरी लंकेश ,  कलबुर्गी  हत्याओं का दौर जारी  है . सबसे बड़ी  बात संघी शासन में लोकतंत्र की हत्या हो चुकी है  लोकतंत्र के नाम पर ई वी एम् का इस्तेमाल   संघियो ने इसको एक ऐसा हथियार  बना लिया है जिसके जरिये  ये लोग अपने हक में जनमत दिखाते है लेकिन असल में इन लोगो ने लोकतंत्र की हत्या कर दी
जी एस टी  आर नोट्बंदी ने देश के आम आदमी  की कमर तोड़  दी है महंगाई , बेरोजगारी , गरीबी बेतहाशा  बढती जा रही है  अगर यह  कर्म और क्रम चलता रहा तो देश में आने वाले सम्स्य में ग्रह युद्ध लाज़मी  बन जाता  और और यही हलात है .

विदेशी  मूल के ब्राह्मण जिन्होंने  भारत पर कब्जा किया हुआ है ,इन्होने देश को विभिन्न जातिओ में  बांटा  हुआ है यह समझते है की इनके द्वारा फैलाए गए अंधविश्वास और  अज्ञानता हमेशा बना रहेगा  , ये सब कुछ खत्म हो जाएगा  और  अंतिम लोकतंत्रिक  चुनाव  २०१९ में या २०२४ में होगा और यह चुनाव  भारत के मूल निवासी  यानी एस सी एस टी ओ बी सी ,मुस्लिम और  विदेशी  आर्य आतंकी  ब्राह्मणों और सवर्णों  के बीच  होगा जो एक दम स्पष्ट रूप से होगा .

हलांकि इन्होने वक्त को समझते हुए हर चीज का भगवाकरण कर दिया है यहाँ तक की सेना , पोलिस , न्यायपालिका  जो हर तरीके से एससी  एस टी  ओ बी सी के खिलाफ काम करती है , लेकिन

इन लोगो ने भी जो वैचारिक क्रांति  के बीज डाले  है जल्द ही सामाजिक शान्ति , एकता भाई चारे और सबके विकास के लिए   ब्राह्मणों  का अंत जरूर कर देंगे  और तभी  भारत  सच में भारत बनेगा 
THE LAST DEMOCRATIC ELECTION IN INDIA ,  CIVIL WAR 

Tuesday, 5 December 2017

आरक्षण की भीख मांगते है ब्राह्मण विदेशो में , भारत में करते है विरोध :


जन उदय : सामाजिक , आर्थिक विषमता पुरी दुनिया में है चाहे वो साम्यवादी देश ही क्यों न हो कही प्रांत के नाम पर , कही लिंग के आधार पर विषमता आपको जरूर मिलेगी , लेकिन सामाजिक स्तर पर यह विषमता भेदभाव का कारण बनी , ताकतवर और अमीरों ने गरीबो और कमजोरो को अपना शिकार बनाया .

भारत में यह सामाजिक विषमता जाति के आधार पर आई , कुछ जाति समाजो ने अपने आपको भगवान का प्रतिनिधि घोषित कर दिया और बता दिया की उन्हें भगवान् ने भेजा है वो भगवान् की सन्तान है और ये भेदभाव भगवान् का आदेश है , सुनने से ही बड़ा बुरा लगता है , लेकिन इसी विचार के साथ समाज आगे बढता रहा और गरीब और गरीब होते रहे , कमजोर और भी कमजोर होते रहे , जाति के आधार पर बना अत्याचार बढता रहा यहाँ तक की अत्याचार की सारी हदे पार कर गया ,

आजादी के बाद भारत में इन जातिओ और पिछड़े समूहों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए आरक्षण का इस्तेमाल किया लेकिन जो लोग पहले से ही सामाजिक राजनेतिक सत्ता में थे उन्होंने सामाजिक उत्थान के सारे प्रयासों को विफल कर दिया , व्यापम जैसे घोटाले पहले भी होते रहे लेकिन सामने न आये , इन अगड़े समाजो ने इमानदारी के नाम पर सबको लूट लिया भारत में आरक्षण आज भी है लेकिन फायदा न के बराबर है ..
भारत के समृद्ध उच्च जाति के लोग विदेशो में भी रह रहे है और हर साल लाखो के संख्या में नौकरी शिक्षा की खोज में भारतीय लोग विदेश जाते है , और यही नहीं भारी संख्या में वहा बस भी गए है , इंग्लैंड , कनाडा , अमरीका आदि देशो में भारतीय लोगो की संख्या भारी मात्रा में है , कनाडा में तो पंजाबी को तीसरी राजिकीय भाषा का दर्जा मिल गया है . लेकिन ये सब इतनी आसानी से नहीं हुआ है इसके लिए भारतीय लोगो ने संघर्ष किया है यानी यूरोपीय देशो में , अमरीका में , कनाडा में भारतीय लोगो ने डाइवर्सिटी या आरक्षण , एम्प्लॉयमेंट इक्विटी की मांग की , और अपने लिए तरह तरह के आरक्षण मांगते रहे है .


कमाल की बात है ये वही भारतीय है और उन्ही समाजो से आते है जो लोगो भारत में सदीओ से पिछड़ी , और सामाजिक रूप से उत्पीडित जातिओ के खिलाफ लागातार ज़हर उगलते है , आरक्षण को हटाने की मांग करते है , जाति के नाम पर हत्या गरीबो की हत्या अपना धर्म समझते है लेकिन वाही लोग विदेशो में जाकर आरक्षण की मांग क्यों करते है ??

किसी भी समाज या देश का भला तभी होगा जब उसका हर नागरिक आगे होगा उसका विकास होगा , केवल सेंक्सेस के उपर जाने से देश उपर नहीं जाता , केवल औसत आय के बड जाने से देश आर्थिक रूप से सम्पन्न नहीं हो जाता , ये समझने की जरूरत है


भारत में आरक्षण होते हुए भी केवल ब्राह्मण ही ७९ % सीट पर बैठा है जबकि इनकी संख्या केवल ३ % है , यह बात भी वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हो चुकी है की ब्राह्मण विदेशी हमलावर है और इसने यहाँ के मूलनिवासियो को धार्मिक अंधविश्वास और धोखे से मानसिक गुलाम बना लिया . खैर आरक्षण का विरोध करने वाले जान ले की यही ब्राह्मण विदेशो में कैसे आरक्षण मांगते है और कैसे इनको दिया जाता है

दुनिया के निम्नलिखित देशो में मिलता है आरक्षण (Reservation/Affirmative Action):-
आजकल देश में दलित (OBC, SC & ST) आरक्षण के विरोध मे आंधी सी चल रही है। आरक्षण के खिलाफ बेहूदे और बेतुके तर्क किये जाते है। सबसे पहला तर्क होता है कि दूसरे देशो मे आरक्षण नहीं दिया जाता इसलिये वे देश हमसे ज्यादा प्रगितिशील है जो बिल्कुल गलत है। विदेशो मे भी आरक्षण की पद्धति है। अमेरिका, चीन, जापान जैसे देशों में भी आरक्षण है और इसे ईमानदारी से दिया जाता है।

बाहरी देशों में आरक्षण को Affirmative Action कहा जाता है। Affirmative Action का मतलब समाज के "वर्ण " तथा "नस्लभेद" के शिकार लोगो के लिये सामाजिक समता का प्रावधान है ।
1961 को संयुक्त राष्ट्र की बैठक मे सभी प्रकार के वर्ण, नस्लभेद व रंगभेद के खिलाफ कड़ा कानून बनाया गया। इसके तहत संयुक्त राष्ट्र में सम्मिलित सभी देशो ने अपने देश के शोषित वर्ग (दलित) की मदद करके उन्हें समाज की मुख्य धारा मे स्थापित करने का निर्णय लिया। इसी फैसले के तहत ही शोषितों और वंचितो को उठाने के लिए अलग अलग देशो ने अपने अपने तरीके से आरक्षण लागु किया है।

ऊपर कहे गए देश अमेरिका, जापान और भारत के अलावा अन्य देशो ने भी आरक्षण दिया है जिन मे से कुछेक निम्नलिखित हैं :-

1. हमारे पडोसी देश पाकिस्तान मे बडी मुश्किल से 5% दलित हैं लेकिन उन्हें ईमानदारी से 6% आरक्षण दिया जाता है।
2. आरक्षण के कारण दक्षिण अफ्रीका टीम में 4 अश्वेत खिलाडियों का चयन जरूरी होता है।
3. अमेरिका में affirmative action) के तहत अश्वेतों को आरक्षण मिला हुआ है। वहां की पिक्चरों में भी अश्वेत कलाकारों का आरक्षण निर्धारित है। वहाँ कोई पिक्चर या विभाग ऐसा नहीं मिलेगा जिसमें अश्वेत/काले न हो। अमेरिका ने तो आज से 155 साल पहले 4 मार्च, 1861 को दलित (अब्राहम लिंकन) को अपना राष्ट्रपति बना दिया था। अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति बराक ओबामा भी एक अश्वेत, मुस्लिम और छोटे तबके के हैं।तभी तो अमेरिका तरक्की की दुनिया में अन्य देशों से काफी आगे हैं। भारत में तो सम्पूर्ण हिस्सेदारी पर कुछे लोग कुंडली मारकर कब्जा जमा रखा है.. इसीलिये वे समाज मे भ्रांति फैलाने के लिए आरक्षण/
हिस्सेदारी का आऐ दिन विरोध करते रहते हैं।
4. ब्राझील में आरक्षण Vestibular नाम से जाना जाता है ।
5. कनाडा में समान रोजगार का तत्व है जिसके तहत फायदा वहाँ के असामान्य तथा अल्पसंख्यकों को होता है ।
6. चीन में महिला और तात्विक अल्पसंख्यको के लिये आरक्षण है ।
7. फिनलैंड मे स्वीडीश लोगो के लिये आरक्षण है ।
8. जर्मनी में जिमनॅशियम सिस्टम है ।
9. इसरायल में Affirmative Action के तहत आरक्षण है ।
10. जापान जैसे सबसे प्रगतिशिल देश में भी बुराकूमिन लोगो के लिये आरक्षण है (बुराकूमिन जापान के हक वंचित दलित लोग हैं )
11. मॅसेडोनिया में अल्बानियन के लिये आरक्षण है ।
12. मलेशिया में भी उनकी नई आर्थिक योजना के तहत आरक्षण लागू हुआ है ।
13. न्यूजीलैंड में माओरिस और पॉलिनेशियन लोगो के लिये Affirmative Action का आरक्षण है ।
14. नॉर्वे के पीसीएल बोर्ड मे 40 % महिला आरक्षण हें।
15. रोमानिया मे शोषण के शिकार रोमन लोगों के लिये आरक्षण है ।
16. दक्षिण आफ्रिका मे रोजगार समता (काले गोरे लोगो को समान रोजगार) आरक्षण है ।
17. दक्षिण कोरिया मे उत्तरी कोरिया तथा चीनी लोगों के लिये आरक्षण है ।
18. श्रीलंका मे तमिल तथा क्रिश्चियन लोगो के लिये अलग नियम अर्थात आरक्षण है ।
19. स्वीडन मे General Affirmative Action के तहत आरक्षण मिलता है ।
अगर इतने सारे देशों में आरक्षण दिया जाता है (जिनमे कई विकसित देश भी शामिल है) तो फिर भारत का आरक्षण किस प्रकार भारत की प्रगति में बाधक है। भारत में तो लोग सबसे ज्यादा जातिभेद के ही शिकार हैं । भारतीय शुद्रो/दलितो को तो हजारों सालों से उनके मौलिक अधिकारों से ही वंचित कर गुलाम बना कर रखा। तो फिर भारतीय दलितो को आरक्षण क्यों न मिले?
जब तक भारत के सभी जाति धर्म के लोग शिक्षा, सेना, सभी प्रकार की नौकरी, संसाधन तथा सरकार में समान रुप से प्रतिनिधित्व नहीं करेंगे , तब तक देश वांछनीय प्रगति नहीं कर पाएगा। अगर सभी देश प्रगति के लिए सभी लोगों को साथ लेकर चल रहे हैं तो फिर भारत क्यों नहीं।




Sunday, 3 December 2017

लोकतंत्र लिए सबसे बड़ा खतरा बनेगी सेना : सेना का भगवाकरण यानी ब्राह्मणों द्वारा सेना का आतंकी इस्तेमाल :


जन उदय : सेना में भ्रष्टाचार  उबर कर सामने आ  चुका है लेकिन सिर्फ ये एक मुद्दा नहीं जिसकी  वजह से डर  लगे . बल्कि असली मुद्दा यही है की सेना  के  जवानो में एक ऐसा राष्ट्रवाद का जहर  घोला जा रहा है जिसके जरिये सेना एक जातिय और धार्मिक आहार पर कट्टर बनती जा रही है और इसके सामने अब दलित नक्सलवादी , मुस्लिम आतंकवादी है और इस देश में केवल सवर्ण  ही राष्ट्रवादी  है देशभक्त है  और  ये सवर्ण  भाजपा , संघी , भगवा पण्डे , ही है  जो देश को अंधविश्वास और अज्ञान के अँधेरे में रखना चाहते है .  इनके ये काम कोई आज दस बीस साल में नहीं आये है बल्कि इसकी  इतिहासिक वजह है , इनका मानना  है दलित यानि शुद्र को सिर्फ सेवा का अधिकार है , उसका अपना कोई मानवीय अधिकार नहीं है  और अगर वह इस अधिकार  की मांग करता है तो धर्म का विरोध करता है और धर्म किसी  भी हाल में बचना चाहिए .

यही कारण रहा की आरक्षण होने के बावजूद  ८५ % सीट  पर ब्राह्मण और सवर्ण  विराजमान है और अपनी इस धूर्तता को छिपाने के लिए दिन रात प्रपंच रचता रहता है और पुरे देश को आरक्षण के बहाने  दलित के  खिलाफ जहर  घोलता  है .  बड़ी समान्य  ज्ञान की बात है की अगर किसी संसदीय  क्षेत्र में स्कूल कॉलेज , सडक , बिजली , डिस्पेंसरी , अस्पताल खोलना हो तो कितना समय लगेगा  , और इस कार्य को पंचायत , विधायक , सांसद  तीन तरफ से फण्ड  आता है  ??  तो अप कहेंगे हद से हद दस साल जयादा समय लगा तो बीस साल ,. लेकिन इस देश में  साथ सालो में ऐसा नहीं हो पाया  कारण ब्राह्मण – सवर्ण इस बात को चाहते  ही नहीं थे , की गरीब दलित , आदिवासी , शुद्रो के इलाको को विकसित  किया जाए यानी ये देश के विकास का पैसा खा गए , लोगो के मूह से निवाला छिना , शिक्षा  छिनी  तो इनसे बड़ा  गद्दार कौन  हो सकता है ??/  ये देश के सबसे बड़े गद्दार  और देशद्रोही है  लेकिन इनकी धूर्तता देखो  दो चार राजनैतिक  धड़े बना कर कहते है भ्रष्टाचार  हो .. नहीं ये भ्रस्तचार  नहीं  देशद्रोह है

 खैर  भारत के जातिवादी लोग आरक्षण का विरोध सिर्फ इसलिए नहीं करते की इसके आधार पर सदीओ से पिछड़े लोग आगे आ जाएंये , बल्कि इसलिए करते है की अगर ये पिछड़े लोग आगे बढ़ गए , पढ़ लिख गए तो इन ब्राह्मणवादीओ के सारे झूठे ग्रन्थ , भगवान् की पोल खोल देंगे , पुरे दुनिया अपने हक की लड़ाई लड़ेंगे और सबसे बड़ा डर यह की ये दलित पीड़ित लोग अपने उपर हुए हर जुल्म का बदला लेंगे , इसलिए यह जातिवादी लोग हमेशा घबराए रहते है और इनकी घबराहट आरक्षण के विरोध में साफ़ झलती है , , इन्हें दरअसल डर है और इनके सभी काम इसी डर और भय के आधार पर होते है

जैसे इन्हें कोई चिंता नहीं की आरक्षण के आधार पर क्लर्क , चपरासी , की नौकरी दलितों को मिल जाए लेकिन ये नहीं चाहते की आरक्षण के आधार पर दलितों को शिक्षा मेडिकल , इंजीनियरिंग , विज्ञान और रिसर्च में नहीं अनाए देना चाहते . और हुआ भी यही है आरक्षण का रोना जितना मर्जी रोते रहे लेकिन इन क्षेत्रो में दलितों का प्रतिशत बहुत ही कम है या कहे न के बारबार है , हर जगह ब्राह्मण , बनिए घुसे है और यही कारण है की देश अब बरबादी के कगार पर पहुच गया है पूरी दुनिया में भारत की थू थू हो रही है लेकिन इन बेशर्मो को कोई फर्क नहीं पढ़ता


जातिवादियो में एक बहुत बढ़ा डर इस बात का है की इनसे दलित बदला लेगा सो इन लोगो ने सेना में आरक्षण के लिए मना कर दिया यह कह कर की ये देश की सुरक्षा का सवाल है , बिलकुल सही देश की सुरक्षा के नाम पर इस जातिवादी सेना ने क्या किया है ?? हर जगह पीटने का इनका रिकॉर्ड है , हाँ कश्मीर , और आदिवासी क्षेत्र जहा पर गरीब लोग रहते है निहत्थे रहते है उनकी हत्या बलात्कार के अच्छे रिकॉर्ड है और यह हम नहीं कहते दुनिया के मानवधिकार सन्घठन कहते है

इसके अलावा जब सेना में आरक्षण है ही नहीं तो नौकरी के प्राथना पत्र में जाति क्यों पूछी जाती है ?? इस बात का इनके पास कोई जवाब नहीं , होगा भी नहीं क्योकि ये सब एक षड्यंत्र के तहत है यानी दलित को नहीं आने देना ताकि भविष्य में अगर कुछ हो जाए जैसे गृह युद्ध तो दलित सेना में नहि होंगे तो सेना दलितों का संहार बड़ी आसानी से कर सकेगी

इसके अलावा जाति के नाम पर सेना में रजिमेंट है मराठा , जाट , सिख आदि तो ये सब क्यों ?? अगर आप इमानदार है और देशभक्त है तो कम से कम देश की सेना में ये जातिवादी दृष्टिकोण नहीं होना चाहिए  

अब इस देश के हलात ऐसे है की आने वाले समय में एक गृहयुद्ध   लाजिम  है और ऐसा नहीं की ये जातिवादी  ब्राह्मणवादी  ताकते  इस बात को समझते नहीं  बल्कि ये लोग इतना समझते है की इन्होने सेना  में जातिवाद इतना भर  दिया है की अगर कोई भी खुनी  या रक्तहीन क्रान्ति होने लगी तो  उस वक्त सेना का इस्तेमाल इस  विद्रोह को दबाने  के लिए इस्तेमाल करेंगे .

लेकिन देश की सेना ऐसा क्यों करेगी ?? वो तो निष्पक्ष  है , नहीं बिलकुल नही बल्कि  इस देश में होने वाली समाजिक क्रान्ति को दबाने के लिए सेना के जवानो में फैला  ब्राह्मणवादी  राष्ट्रवाद का जाहर काम करेगा ,

सेना के जवान को बताया जाता है की मुस्लिम देश के लिए खतरा है , उनको बताया जाता है आरक्षण देश के लिए खतरा है आरक्षण मतलब  दलित देश के लिय खतरा है और ये जवान किसी ने किसी तरह से ग्रामीण  प्रष्टभूमि  से आते है , जहा पर इनका पता चलता है की अब दलित मैला  नहीं उठाता  , चमार अब उन्को सलाम नहीं करते बल्कि अच्छे अच्छे  कपडे पहन कर घूमते है  बल्कि उनसे अच्छे बस  इन जवानो को यानी जातिवादी  जवानो  को यह बर्दास्त  नहीं  होता  इस लिए  हम कह सकते है सेना का पूर्णरूप से भगवाकरण  हो चुका है , जिस सेना के जनरल  कश्मीर में मुस्लिम को मारते है , आदिवासिओ  को मरते है वो भी निर्दोष लोगो को और उनके जनरल भगाव पार्टी ज्वाइन करते है  इस बात के बहुत बड़े मतलब ही और बहुत बड़े खतरे  है 

indian army has become the weapon of Saffron terror and to control  and suppress civil war in india