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Thursday, 11 January 2018

अब सुरक्षित नहीं बैंक में आपका पैसा , हर बात के कटेंगे पैसे

हर अकाउंट  में तीन लाख आयंगे यह सोच कर गरीबो ने अकाउंट खुलावाया  और उसमे अपनी मेहनत की कमाई से  हजार दो हजार रूपये  जमा भी करवाए लेकिन मिनिमम  बलेंस न रखने के कारण उनकी मेहनत की कमाई बैंक ने लूट ली और इस तरह  मोदी सरकार को  १८ हजार करोड़ का मुनाफ़ा हुआ जिसे वो सरकार की  उपलब्धि की तरह पेश करती है . यानी गरीबो के गले काट काट कर अमीरों  की जेब भरने को ही विकास कह रहे है ,
इसके अलावा जान लीजिये अब अगर आप बैंक में पैसे रखंगे  तो  कैसे आपकी जमा पूंजी पर डाका  पड़ेगा वो भी जी एस के साथ

एसबीआई, एचडीएफसी ​, आईसीआईसीआई और एक्सिस बैंक ने फैसला लिया है कि वे अपने अकाउंट होल्डर्स से कैश ट्रांजैक्शन्स करने की तय सीमा से अधिक बार ट्रांजैक्शन करने पर अतरिक्त चार्ज वसूलेंगे। इसके अलावा बैंकों ने कुछ ऐसी सर्विसेज पर भी चार्ज लगाने की घोषणा की है जो अब तक फ्री हुआ करती थीं। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में दूसरे बैंक भी ऐसे ही नियम ला सकते हैं। इस तरह के चार्जेज लगाने का उद्देश्य लोगों को कैश ट्रांजैक्शन्स के लिए हतोत्साहित करना है।

अगर इनमें से किसी भी बैंक में आपका अकाउंट है तो आपके लिए नए नियमों को समझना बेहद जरूरी है। हम आपको बता रहे हैं कि किस बैंक के कस्टमर्स को किस बात के लिए कितना चार्ज देना होगा.....
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)

1. अप्रैल से एसबीआई अपने सेविंग बैंक अकाउट कस्टमर्स को महीने में फ्री में सिर्फ 3 बार कैश जमा करने की अनुमति देगा। इसके बाद हर लेनदेन पर सर्विस टैक्स के साथ 50 रुपए का चार्ज लगेगा।
2. करंट अकाउंट के मामले में ये चार्जेज अधिकतम 20,000 रुपए तक भी हो सकते हैं।

3. अब एसबीआई अकाउंट होल्डर्स को अपने अकाउंट में एक मिनिमम बैलेंस भी मेनटेन करके रखना होगा। ऐसा न होने पर बैंक आपसे फाइन वसूलेगा। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में इस फाइन को काफी कम रखा गया है।

4. मेट्रो शहरों में यदि न्‍यूनतम बैलेंस यानी 5000 रुपए में 75 प्रतिशत से अधिक की कमी होगी तो सर्विस टैक्स के साथ 100 रुपए का फाइन देना होगा। यदि न्‍यूनतम बैलेंस में कमी 50-75 प्रतिशत के बीच है तो सर्विस टैक्स के साथ 75 रुपए का फाइन देना होगा। वहीं 50 प्रतिशत से कम बैलेंस होने पर सर्विस टैक्स के साथ 50 रुपए का फाइन अदा करना होगा। आपको बता दें कि 2012 में भी एसबीआई इस तरह के चार्जेज लगा चुका है।

5. एक महीने में दूसरे बैंक के एटीएम से तीन बार से ज्यादा कैश निकालने पर 20 रुपए का चार्ज देना होगा। वहीं अगर ग्राहक एसबीआई के एटीएम से पांच से ज्यादा ट्रांजैक्शन करता है तो हर बार 10 रुपए का शुल्क लिया जाएगा।
6. हालांकि अकाउंट में 25 हजार से अधिक बैलेंस रखने वालों को एसबीआई एटीएम से पैसे निकालने पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं देना होगा। जबकि 1 लाख रुपए से अधिक बैलेंस रखने पर आपको दूसरे बैंकों के एटीएम से पैसे निकालने पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।

7. अकाउंट में 25 हजार से कम कैश रखने वालों से बैंक हर तीसरे महीने में 15 रुपए एसएमएस चार्ज के रूप में भी वसूलेगा। लेकिन बैंक 1,000 रुपये तक के UPI/USSD ट्रांजैक्शन्स पर कोई चार्ज नहीं लेगा।
एक्सिस बैंक (Axis Bank)

1. कस्टमर्स को हर महीने 5 ट्रांजैक्शन्स फ्री दिए गए हैं। इसके बाद छठे लेनदेन पर कम से कम 95 रुपए प्रति लेनदेन की दर से चार्ज लगाया जाएगा।

2. नॉन-होम ब्रांच के 5 ट्रांजैक्शन बैंक ने फ्री रखे हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि बैंक ने एक दिन में कैश जमा करने की सीमा 50,000 रुपए ही तय की है। इससे अधिक के जमा पर या छठवे ट्रांजैक्शन पर प्रति 1000 रुपए पर 2.50 रुपए की दर से या प्रति ट्रांजैक्शन 95 रुपए, में जो भी ज्यादा होगा, चार्ज लिया जाएगा।

एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank)
1. एचडीएफसी बैंक से 4 बार से अधिक कैश निकालने पर 150 रुपए फीस अदा करनी होगी।
2. बैंक ने होम ब्रांचेज में भी फ्री कैश ट्रांजैक्शन दो लाख रुपये पर सीमित कर दिया है। इसके ऊपर कस्टमर्स को न्यूनतम 150 रुपए या पांच रुपये प्रति 1000 रुपए का भुगतान करना होगा।
3. नॉन-होम ब्रांचेज में मुफ्त लेन-देन 25,000 रुपये है। इसके ऊपर कस्टमर्स को न्यूनतम 150 रुपए या पांच रुपये प्रति 1000 रुपए का भुगतान करना होगा।

आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank)

1. आईसीआईसीआई बैंक में एक एक महीने में पहले चार लेन-देन के लिए कोई शुल्क नहीं लगेगा। उसके बाद प्रति 1,000 रुपये पर 5 रुपये का शुल्क लगाया जाएगा। यह समान महीने के लिए न्यूनतम 150 रुपये होगा।
2. थर्ड पार्टी ट्रांजैक्शन के मामले में सीमा 50,000 रुपये प्रतिदिन होगी।

3. होम ब्रांच के अलावा अन्य शाखाओं के मामले में आईसीआईसीआई बैंक एक महीने में पहली नकद निकासी के लिए कोई शुल्क नहीं लेगा। लेकिन उसके बाद प्रति 1,000 रुपये पर 5 रुपये का शुल्क लेगा। इसके लिए न्यूनतम शुल्क 150 रुपये रखा गया है।

इसके अलावा  सभी बैंक  पर लगने वाले चार्ज  भी देख ले  और समझ ले कैसी लूट है
चेक से पचास अधिक की निकासी पर दस रूपये प्रति  निकासी
थर्ड पार्टी चेच्क्से नहीं निकलेंगे दस हजार से ज्यादा
बचत खाते पर पचास हजार से ज्यादा जमा प्रति हजार २.५०  रूपये चार्ज
पास बुक एंट्री १०  रूपये
बलेंस स्टेटमेंट २५ रूपये
हस्ताक्षर जांच  पचास रूपये
ए टी एम् इस्तेमाल के लिए चार्ज  ५६०  से हजार रूपये
प्रति डिमांड ड्राफ्ट २५ रूपये
फण्ड ट्रान्सफर  - २५ रूपये



न्यूज़ इनपुट : नवभारत और अन्य राष्ट्रीय दैनिक 

Wednesday, 6 December 2017

भारत में २०२४ का चुनाव एस सी /एस टी / ओ बी सी और आर्य ब्राह्मण - सवर्ण आतंकवाद के बीच होगा

 भारत में २०२४ का चुनाव मूलनिवासी और आर्य आतंकवाद के बीच होगा
जन उदय : पूना पैक्ट   को बाबा साहेब अम्बेडकर ने सिर्फ इसलिए स्वीकार किया क्योकि उस वक्त दलित किसी  भ तरह की सत्ता सम्भालने के लायक नहीं थे यानी आर्थिक रूप से शिक्षा के स्तर से समाजिक रूप से संघठित नहीं थे इसलिए उन्होंने पूना पैक्ट को स्वीकार किया और उसके बदले दलित यानी भारत के मूलनिवासी जिन्हें एस सी एस टी ओ बी सी  कहा गया उनके लिए नौकरी ,शिक्षा राजनैतिक प्रतिनिधित्व मिले , और इस प्रतिनिधित्व को पूरा करने के लिए आरक्षण की वाव्य्स्था की गई . यानी आरक्षण सबसे  पहले कोई खैरात नहीं  क्योकि यह पूना पैक्ट के जरिये बाबा साहेब द्वारा एक बहुत बड़ा बलिदान दे कर मिला यानी यह खुद भारत पर एक अहसान था और  और कोंग्रेसी   गाँधी की नौटंकी से भी निपट लिया गया . अगर आज आरक्षण स्म्पाप्त किया जता है तो भारत में सरकार द्वारा पूना पैक्ट को लागू  करना होगा . दूसरा यह की अब्बा साहेब द्वारा यह देश को  विकसित करने , सभी का विकास करने और एकता बनाए रखने की एक बहुत बड़ी पहल थी , जबकि इसके उल्ट गांधी नेहरु – सावरकर , और अन्य संघियो  ने न सिर्फ देश को तोड़ने की वकालत की बल्कि  अंग्रेजो की सत्ता बनाए रखने की भी वकालत की  .

यहाँ एक बात साफ़ कर देना बहुत जरूरी है कि आर्य विदेशी आक्रमणकारी  है   और इस देश में रोटी पानी की  तलाश में आये थे , कालन्तर में ये शिक्षा के दम पर राज्य की गतिविधिओ में  शामिल रहने लगे  और लगभग  १८० बी सी में एक ब्राह्मण सेनापति  पुश्मित्र शुंग ने व्रह्द्साथ की हत्या कर शासन पर कब्जा कर लिया इकसे बाद पुष्यमित्र शुंग ने बौध  लोग को हत्याए की यहाँ तक की गर्भवती स्त्री का पेट फाड़ बच्चे की ह्त्या की  चौरासी  हजार बौध  स्तूप  और विहारों को तोड़  उनके मंदिर बनवाये और  बौध को शिक्षा और सम्पति से वंचित कर दिया  और इसके बाद २३०  ईसा बाद  तक ऐसे ग्रन्थ लिख लिए जिसमे अपने आपको भगवान का प्रतिनिधि  बताया  और सभी लोगो को अपने से निचे बताया और समाज को जाती में विभाजित कर यहाँ के मूलनिवासियो को नीच / शुद्र  चंडाल घोषित कर दिया , इसके बाद इम्होने मुस्लिम राजाओं को निमन्त्रण दे कर बुलाया  उनके दरबारों में रहे उनसे अपनी बेटियो की शादी की
बाबा साहेब के सपने १९५६ से टूटने शुरू हो गए जब  वामपंथी , संघी औ कोंग्रेस के रूप में छिपे  ब्राह्मण भेडियों  ने अपने रंग दिखाना  शुरू कर दिया , हिन्दू कॉड बिल का विरोध , स्त्री शिक्षा और सम्पत्ति के अधिकार का विरोध और ओ बी सी आरक्षण का विरोध  हुआ तो बाबा साहेब ने इस्तीफा दे दिया


 ब्राह्मण तीन  तरीके से दलित / मूलनिवासियो  को बर्बाद करने के षड्यंत्र में लगे रहे , संघी  आक्शन का विरोध करते रहे लेकिन हिन्दू कह कर इन्हें अपने दंगो का ईंधन बनाए रखा  यह बाद दलित बिलकुल समझ ही नहीं पाए की  अगर ब्राह्मण / संघी  हिन्दू कैसे हुए जो हिन्दुओ को मिलने वाली बेसिक सुविदाओ  का विरोध करते है  यानी आरक्षण का  विरोध ,  जब की मुल्सिम मुस्लिम के खिलाफ  आन्दोलन नहीं करता , सिख सिख के विरोध में आन्दोलन नहीं खड़ा करता  तो ये ब्राह्मण  हिन्दू  होने के बावजूद दलितों का विरोध कैसे करते है ??
यानी डरपोक ब्राह्मण  जब मुस्लिम से डरता तो दलितों को आज भी हिन्दू कहता है

खैर वामपंथी समानता का सपना दिखा इन्हें मार्क्सवाद के नाम पर छलता  रहा यानि दलितों का अपना कोई आन्दोलन या पार्टी न खड़ी  हो हमेशा इस कार्य में लगे  रहे  और कोंग्रेस  ने आगजनी , हत्या , जैसे हथियार अपनाए रखे
अब जब २०१७ है वामपंथी , कांग्रेस  और संघी एक समान कार्य करने वाले लोगो के आतंक से सिर्फ दलित ही नहीं बल्कि मुस्लिम   सभी परेशान और आतंकित है , बाबरी मस्जिद विध्वंश ,  गुजरात दंगे गोदरा काण्ड , सहारन पुर काण्ड , रोहित वेमुला हत्या , डेल्टा  मेघवाल हत्या , अख़लाक़ हत्या  और ऐसे हजारो केस फेक एनकाउंटर के , और मोदी योगी के दौर में  लगातार  सपा बसपा के लोगो की रोज हत्या , दलित और प्रगतिवादी  लेखको की हत्या गौरी लंकेश ,  कलबुर्गी  हत्याओं का दौर जारी  है . सबसे बड़ी  बात संघी शासन में लोकतंत्र की हत्या हो चुकी है  लोकतंत्र के नाम पर ई वी एम् का इस्तेमाल   संघियो ने इसको एक ऐसा हथियार  बना लिया है जिसके जरिये  ये लोग अपने हक में जनमत दिखाते है लेकिन असल में इन लोगो ने लोकतंत्र की हत्या कर दी
जी एस टी  आर नोट्बंदी ने देश के आम आदमी  की कमर तोड़  दी है महंगाई , बेरोजगारी , गरीबी बेतहाशा  बढती जा रही है  अगर यह  कर्म और क्रम चलता रहा तो देश में आने वाले सम्स्य में ग्रह युद्ध लाज़मी  बन जाता  और और यही हलात है .

विदेशी  मूल के ब्राह्मण जिन्होंने  भारत पर कब्जा किया हुआ है ,इन्होने देश को विभिन्न जातिओ में  बांटा  हुआ है यह समझते है की इनके द्वारा फैलाए गए अंधविश्वास और  अज्ञानता हमेशा बना रहेगा  , ये सब कुछ खत्म हो जाएगा  और  अंतिम लोकतंत्रिक  चुनाव  २०१९ में या २०२४ में होगा और यह चुनाव  भारत के मूल निवासी  यानी एस सी एस टी ओ बी सी ,मुस्लिम और  विदेशी  आर्य आतंकी  ब्राह्मणों और सवर्णों  के बीच  होगा जो एक दम स्पष्ट रूप से होगा .

हलांकि इन्होने वक्त को समझते हुए हर चीज का भगवाकरण कर दिया है यहाँ तक की सेना , पोलिस , न्यायपालिका  जो हर तरीके से एससी  एस टी  ओ बी सी के खिलाफ काम करती है , लेकिन

इन लोगो ने भी जो वैचारिक क्रांति  के बीज डाले  है जल्द ही सामाजिक शान्ति , एकता भाई चारे और सबके विकास के लिए   ब्राह्मणों  का अंत जरूर कर देंगे  और तभी  भारत  सच में भारत बनेगा 
THE LAST DEMOCRATIC ELECTION IN INDIA ,  CIVIL WAR 

Sunday, 21 May 2017

भीम आर्मी के पदर्शन में पहुचे लाखो लोग : ये गृह युद्ध के लिए शुभ संकेत


जन उदय : सहारनपुर काण्ड   जिसमे  ठाकुरों ने पुलिस और प्रशासन की मदद से चमारो के २००  से जयादा घर जला दिए और जब चमार पुलिस  रिपोर्ट करने गए तो उलटा उन्ही  पर नाक्साली  होने के आरोप लगा दिए गए और उन्हें जेल में ठूंस दिया गया ,

ऐसा भारत के इतिहास में पहली बार नहीं हुआ है  क्योकि  सवर्णों  में  नुपुन्स्कता  धूर्तता  हमेशा से रही है   इसलिए  इसके विरोध में भीम आर्मी नामक संस्था ने आज जंतर मंतर  पर धरना  पदर्शन  किया  जिसमे लाखो  लोगो ने शिरकत  की 

इस आन्दोलन की ख़ास बात यह थी की  इसकी सिर्फ घोषणा की गई  थी इसके बाद  फेसबुक   और व्हात्सप्प  पर लोगो के बीच मेसेज  शेयर  हुए और लोग  बिना किसी पार्टी और नेता के अपने आप आ गए  दरसल  इनका आना यह बता दर्शाता  है की  देश के अंदर  अभी तक जातिवादी  जुल्म बंद नहीं हुए है और आज भी लोग सवर्णों  के जुल्मो के शिकार है . इस आन्दोलन की ख़ास बात यह थी


की इसमें देश केकोने कोने से लोग आये थे ,

दुनिया के देश मिश्र ,लीबिया , यूगांडा , रवांडा ,अफगानिस्तान इरान , ईराक और भी बहुत देश है जो गृह युद्ध के चपेट में रहे है ,और है कारण भेदभाव और दमनकारी निति सरकार ने इनके जबाने काटने तक की कोशिस की लेकिन जनता आखिर जनता है उसकी आवाज ही खुदा का फरमान होता है , शायद ये बात संघ और उसके घटक दलों को समझ नहीं आ रही है

जब से ये लोग सत्ता में आये है देश के गरीब मजदूर दलित -मुस्लिम लोगो का जीना मुस्किल हो गया है रोजगार से लेकर इंसान का जीना मुस्किल हो गया है शिक्षा स्वास्थ , कानून वाव्य्स्था हर चीज बेकार हो गई है कुल मिला कर आम आदमी का जीना मुस्ल्किल हो गया है, अखलाक , डेल्टा मेघवाल , रोहित वेमुला ,गुजरात में गो आतंकियो द्वारा आक्रमण , अलवर में मुस्लिम की हत्याए , उत्तर प्रदेश में लगातार दलितों की हत्याए कुल मिला कर इन्होने देश को नरक में तब्दील कर दिया है
और यही कारण है की अब लोग इनसे तंग आ गए है और ऐसा लगता है देश में जल्द ही एक गृह  युद्ध होगा




भारत में गृह युद्ध की वजह सिर्फ जातिवाद ही नहीं है कश्मीर , असाम, मणिपुर , पंजाब , तेलंगाना , आदिवासी समस्या देश के राजनैतिक तापमान को हमेशा उंचा बनाय रखते है


हालात बदल रहे है दलितों में मुसलमानों में रोष बढ़ता जा रहा है , और यह रोष अब धीरे धीरे इतना बढ़ रहा है की ये बहुत जल्द ही एक जातिय गृह युद्ध के चपेट में आने वाला है बहुत सारे दलितों ने कह दिया है की वो हद स हद दस बारह साल इन्तजार करेंगे इसके बाद मारेंगे या मरेंगे यानी देश में गृह युद्ध . इस बीच दलितों ने ब्राह्मणों और सवर्णों की मेपिंग करना शुरू कर दिया है यानी किस मोहल्ले में कितने ब्राह्मण राजपूत , बनिए है उनके पास क्या सम्पति है कितने हथियार है इस बात का सर्वे निजी तौर पर हो रहे है . निहत्थे कमजोर दलित कैसे सत्ताधारी ब्राह्मणों को समाप्त कर पायंगे इस पर एक दलित ने बताया की कौरव पांडव युद्ध में पांड्वो ने कौरव से खूब कहा की मान जाओ , हमें पांच सहर दे दो , पांच सहर नहीं तो पांच गाव दे दो पांच गाव नहीं तो पांच पद जमीन दे दो लेकिन सत्ताधारी कोरव जिनके पास सब कुछ सेना हथियार , सम्पदा वो भला किसी से यानी फकीरों से क्यों डरने लगे , अंजाम आज भी सबको मालूम है इसी तरह रावण ने भो सोचा की कैसे ये वनवासी मुझे जित लेंगे मेरे पास सब कुछ है , वर्तमान में कर्नल गद्दाफी का उधाह्र्ण देते हुए दलित युवक ने बताया की वो आदमी ज्सिका देश में कब्ज़ा था सेना उसकी थी , हथियार थे लेकिन कैसे मारा गया कुत्तो की मौत , वैसे ही ये संघी ब्राह्मण मारे जाएंगे 

AGAINST THE CASTE ATROCITY IN SAHARANPUR MEMBERS OF BHIM ARMY GETHERED AT JANATAR MANATAR , IT IS SIGN OF DALIT REVOLUTION IN INDIA , IT WILL LAST THE BRAHMANS IN INDIA , CIVIL WAR IN INDIA 

Monday, 21 March 2016

नरेंद्र मोदी ने मोहन भागवत और संघियो को साबित किया भोंकने वाला कूकुर

नरेंद्र  मोदी ने मोहन  भागवत और संघियो  को साबित  किया  भोंकने वाला कूकुर
जन उदय :  बिहार , दिल्ली में हार के बाद  अब अन्य राज्यों में  चुनाव आने वाले है इसलिए  मोदी और भाजपा अब घडियाली  आंसू बहाना शुरू कर दिया है ताकि दलित वोट उनसे क्त न सके

हलांकि बिहार चुनाव के वक्त मोहन भागवत ने आरक्षण खत्म करने की बात करने की बात कह कर स्वर्ण समाज को अपने साथ करने की  कोशिस  की  भागवत जी को ये विशवास था की अगर समस्त स्वर्ण समाज संघ के साथ आ जाएगा  तो दलित समाज को  तो  दुबारा  मनुस्मिरिती  लागू करके  उनकी औकात  दिखा देंगे  , लेकिन सफल न हो सके

 हार से परेशान आज मोदी  ने ये एलान कर  दिया कि आरक्षण को  कोई छू  भी नहीं सकता   तो सबसे पहले मोदी  यह जान ले की संघ  भाजपा  की कोई औकात है ही नहीं  अगर है  तो कर के दिखा दो   यानी आरक्षण  खत्म कर दो .
नरेंद्र मोदी अम्बेडकर के नाम पर जितना  रोना  रो रहे है तो सबसे पहले ये बता  दे की बाबा साहेब की किताबे रिडिल्स ऑफ़ हिंदूइस्म  और अन्हीलेश्न ऑफ़ कास्ट  क्यों नहीं छपने दे रहे है संघी
दरसल ये सिर्फ चुनावी  आंसू  है