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Saturday, 7 April 2018

२ अप्रैल से बज गया गृह युद्ध का बिगुल , डर आर खोफ से दबाने की कोशिश की दलित आन्दोलन को , हुए नाकाम


जन उदय : अभी हाल में २ अप्रैल को दलित संघटनो  द्वारा एस सी / एस टी एक्ट में बदलाव को लेकर पुरे देश में भारत  बंद किया गया , लेकिन  वर्तमान सरकार  जो दलित विरोधी  है , इस आन्दोलन को बदनाम करने के लिए पुरे देश में भगवा आतंकियो  ने दलित आन्दोलन के नाम पर तोड़ फोड़ की गोलिया  चलाई और आगजनी  की ताकि  इस आन्दोलन को बदनाम किया जा सके  . लेकिन बाद में ये सब यही खत्म नहीं हुआ है  इसके बाद सरकार अपने  तन्त्र का इस्तेमाल करते हुए दलितों  पर आक्रमणकारी  निति अपनाई हुई है   यानी उन दलितों और युवाओं  को जबरदस्ती  जेल में डाला  जा रहा है  जगह जगह उन पर फर्जी  केस दर्ज किये जा रहे है ताकि  इन लोगो में डर  बैठ  सके  मध्य प्रदेश  को मिला कर  जहा जहा भाजपा सरकार है वहा वहा पर  दलितों  के खिलाफ सरकार की दमनकारी  निति  चल रही है .

इन घटनाओं  के जगह जगह से विडियो  आ रहे है जहा पर पुलिस   थाणे में दलित युवाओं  को ले जा कर बेरहमी से पीट  रही है , खुद पुलिस  गाडिओ  में आग लगा रही है  और भाजपा के गुंडे  तोड़  फोड़  और आगजनी कर रहे है .
इतनी बड़ी  घटनाओं को बिना किसी योजना  बनाए  अंजाम नहीं दिया जा सकता  यानी इसमें सरकार शामिल है इसमें कोई शक नहीं

मध्य प्रदेश में  तो यहाँ तक स्थिति  है की सरकार ने १४ अप्रैल  तक हाई अलर्ट उर धारा  १४४ लगा दी  है वह भी १४  अप्रैल तक यानी दलित युवा और  दलित वर्ग १४ अप्रैल  को  बाबा साहेब की जयंती न मना सके
यही हालात खुद भाजपा सरकार ने  अपने सभी विदेशी दूतावास  में पैदा कर दिए है  जहा पर यह कहा गया है  की  दूतावास या उसमे काम करने वाले  बाबा साहेब की जयंती न मनाये


दुनिया के ऐसे बहुत कम ही देश बचे होंगे जो किसी न किसी तरह के हिंसक आन्दोलन या आतंकवाद से न जूझ रहे हो , पूरा एशिया , यूरोप , अमरीका सभी देश इस बिमारी से ग्रस्त है , ये आतंकवाद कैसे पनपा कैसे आया सबसे पहले हम आतंकवाद की कुछ प्रक्रति से मिल लेते है

पूरी दुनिया में हम जिस आतंकवाद को जानते है वह है हिंसक आतंकवाद यानी इसमें या इसके मानने वाले सिर्फ हिंसा में विशवास रखते है यानी अल कायदा , आर एस एस , आइसिस ,लिट्टे जैसे संघठन इसमें आते है , दूसरा होता है सांस्कृतिक आतंकवाद जो दुनिया में सिर्फ आर एस एस चलाता है इसके पूरी दुनिया में बहुत सारे सन्घठन है जो लोगो को गुमराह करके अपनी संस्क्रती की और खींचते है और उन्हें अपने समाज और संस्क्रती की सच्चाई से दूर रखते है , आर एस एस के सन्घठन , अमरीका , यूरोप , कनाडा ,एशिया सभी देश में ये लोग काम करते है इसके कुछ मुख्या एजेंट है ब्रहम कुमारी , पतंजलि , आर्ट ऑफ़ लिविंग , विश्व हिन्दू परिषद , बजरंग दल आदि

तीसरा है राजननीतिक आतंकवाद इसमें अमरीका रूस , चीन , कोरिया इसराइल आदि मुख्य देश है जो पूरी दुनिया में अपना वर्चस्व कायम करने के लिए इन देशे में तरह तरह के आन्दोलन चलवाते है , इन देशो की अर्थ वाव्य्स्था पर कब्जा जमाते है और इन् देशो को वैसा ही चलाने की कोशिस करते है जैसा ये चाहते है

सभी तरह के आतंकवाद का अध्यन अगर हम करे तो हम ये ही पायंगे की राजनितिक आर्थिक , और हिंसक आतंकवाद उस वक्त खत्म हो जाते है जब इनका मकसद खत्म हो जाता है लेकिन एक आतंकवाद ऐसा आतंकवाद है जो इतनी अस्सानी से खत्म नहीं होता बल्कि इसकी विरासत सदीओ तक चलती रहती है और वो है ब्राह्मण आतंकवाद

बड़े ही साधारण लोग ये कहेंगे की ये ब्राह्मण यानी हिन्दू दरअसल ये बिलकुल गलत है क्योकि भारत में हिन्दू शब्द मुस्लिम काल से पहले था ही नहीं , और भारतीय समाज में ब्राह्मण इसलिए उपर रहा क्योकि ये विदेशी थे और इनको यहाँ यहाँ के लोगो से काफी सम्मान मिला और लोगो ने अपने दिलो में काफी आगाह भी दी लेकिन इनकी गद्दार प्रवर्तियो के कारण ये अलग ही रहे मोर्य काल में अशोक के पोते को उसके सेनापति जिसका नाम पुष्य मित्र शुंग था उसने धोखे से मार दिया इसके बाद इसने सभी बौध लोगो की त्या करना शुरू कर दी जो इन बचे उनको इन ब्राह्मणों ने गुलाम बना लिया

ब्राह्मण आतंकवाद क्यों दुनिया का सबसे खतरनाक आतंकवाद कहा जता है इसका पता इसी से चलता है की इन्होने जिन बौध लोगो को गुलाम बनाया उनको सम्पति , शिक्षा सभी छीन ली और इस गुलामी को पीडी दर पीडी बनाए रखा , और एक सामाजिक , सांस्कृतिक वाव्य्स्था कायम कर ली जिसमे अपने आपको भगवान् का दूत बना दिया , अपने आपको सबसे श्रेष्ठ बना लिया और बौध लोगो को सबसे नीचे स्तर पर लाकर सेवक यानी गुलाम बना लिया और साथ में यह भी कह दिया की यह भगवान् का आदेश है . ये लोग समाज के सबसे निचले स्तर पर ही नहीं पहुचे बल्कि आर्थिक सामाजिक शेक्षिक रूप से भी बहिष्कृत हो गए ये पढ़ नहीं सकते थे , समाज में रह नहीं सकते थे , इन लोगो को शुद्र कहने लगे और इनका मानसिक विकास बिलकुल रुक गया ये कोरे जानवर की तरह जीवन बिताने लगे ,

हजारो साल बाद इतिहास ने करवट बदली और ब्रिटिश शासन के दौरान बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर ने पूरी दुनिया को ये साबित कर दिया की ब्राह्मण इस देश में विदेशी है . राजनैतिक पहुलुओ को नजर में रखते हुए बाबा साहेब ने आरक्षण के बदले कम्युनल अवार्ड को छोड़ा .

लेकिन ब्राह्मणों ने तथाकथित शुद्रो को पढने से रोकने के लिए , उन पर अत्याचार करने में कोई कमी नहीं छोड़ी है आज भी ये उनको मानसिक रूप से गुलाम बना कर रखना चाहते है देश में इन शुद्रो के प्रति अत्याचार अभी भी कम नहीं हुआ है
इसलिए हम कह सकते है की गोली से तो आदमी एक बार मर जाता है लेकिन ब्राह्मणों ने जो सांस्कृतिक गुलामी है वह इतनी आसानी से नहीं जानी वाली इसलिए दुनिया का सबसे खतरनाक आतकंवाद ब्राह्मण आतंकवाद है 
लेकिन आज दलित युवा जाग चुका है  और अब इस  तरह की गुलामी  के लिए बिलकुल तैयार नहीं   अगर  ब्राह्मणवादी  लोग नहीं माने  तो  यह हो सकता है की देश में गृह युद्ध जैसे हालात  हो या हो ही जाए इसका फैसला  देश के सभी  निवासिओ  को करना है

Saturday, 3 March 2018

गांव खांडसा में दलितों के घरों पर पथराव पर राजपूतो का हमला कई बुजुर्ग की हालत गंभीर।


गुरुग्राम। साइबर सिटी के गांव खांडसा में जातिवाद का नंगा नाच होली वाले दिन देखने को मिला जब राजपूतों ने शराब पीकर जमकर हुड़दंग मचाया और दलितों के घरों पर जमकर पथराव किया। मामला यहीं शांत नहीं हुआ। हमलावरों ने सोची समझी साजिश के तहत लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से लैस गुंडों को बुलाकर लोगों के घरों में घुसकर जमकर मारपीट की। मामला सेक्टर 37 थाने का है। जिसमें पुलिस भी संदेह के घेरे में है। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम को इसकी सूचना दी। लेकिन जब पूरा 1 घंटा तांडव मचाकर और उन्हें अधमरा करके हमलावर जा चुके थे तब पूरे 2 घंटे बाद पुलिस पहुंची है।


इस हमले में बुजुर्ग सूबेदार महिपाल की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को जिला सामान्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूबेदार महिपाल के अलावा कैलाश, मनोज, राकेश, सोनू, लखन, सुनील, कांता और 2 महिलाएं व कुछ युवा घायल हुए हैं। एक युवक को पेट में शराब की बोतल से भी हमला किया गया है। पीड़ित कैलाश ने बताया कि हमारे बच्चे बाहर होली खेल रहे थे तभी राजपूत समाज के धौला राघव पुत्र बीर सिंह, सतपाल राघव, सौरभ, मोहित, गाला, लवली, सुमित, भोला, रेहड़ा, हालन, सेंकी आदि 20 से 25 लोग हुड़दंग मचाते हुए आये और मारपीट करने लगे। उन्होंने हमारे घरों में पथराव कर दिया। इसके बाद 30-35 ओर लोग लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से लैस होकर आ गए उन्होंने जमकर घरों में घुसकर मारा। कैलाश ने बताया कि मेरी पत्नी ने पुलिस कंट्रोल रूम में सूचना दी लेकिन पुलिस नहीं आयी। पूरा 1 घंटा तांडव मचाकर वे लोग हमें अधमरा छोड़कर फरार हो गए। घटना के 2 घंटे बाद पुलिस पहुंची है। कैलाश ने बताया कि मेरे पिता जी को मारपीट करके रोड पर फेंक दिया था।


घायलों को जिला सामान्य अस्पताल में भर्ती कराया गया गया है। सामाजिक संगठन निगाहें (एक नया बदलाव) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवाब सतपाल तंवर ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की। घायलों से मिलने के लिए बसपा के युवा नेता रविन्द्र तंवर और बसपा के प्रदेश प्रभारी नेतराम एडवोकेट आदि भी के नेता पहुंचे। गौरतलब है कि हरियाणा के युवा क्रान्तिकारी नवाब सतपाल तंवर भी गांव खांडसा के ही निवासी हैं। जिससे मामला तूल पकड़ गया है और सोशल मीडिया पर यह घटना जबरदस्त वायरल हो रही है।
इस घटना के बाद खांडसा गांव में तनाव का माहौल है। लोगों का आरोप है कि राजपूतों का यह हमला कोई पहला नहीं है। इससे पहले भी अनेकों बार उन्होंने मारपीट की है।

निगाहें कोर कमेटी के राष्ट्रीय प्रभारी अनिल तंवर ने का कहना की आरोपी समझौते का दवाब बना रहे हैं और अस्पताल में भी आरोपियों की तरफ से पीड़ितों पर मानसिक दवाब डाला जा रहा है। वहीं राजपूतों ने उन दलितों को भी धमकी दी है जिनकी गाड़ियां यूनियन में चलती हैं कि यदि किसी दलित ने पीड़ित परिवार का साथ दिया तो उनकी गाड़ियों को यूनियन से हटा दिया जाएगा।
अनिल तंवर ने चेतावनी दी है कि यदि 1 सप्ताह के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल में नहीं डाला गया तो निगाहें टीम आंदोलन छेड़ देगी जो पुलिस के लिए भी भारी होगा और इस सरकार के लिए भी।


फिलहाल पुलिस ने अनुसूचित जाति/ जनजाति अधिनियम की धारा 3, भा.दं.स. 147, 148, 149, 323, 324, 452, 506 में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। तनाव को देखते हुए गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। खांडसा गांव के दलित परिवारों का कहना है कि हालात कभी भी खराब हो सकते हैं। राजपूत समाज के लोगों ने खांडसा में दंगे जैसे हालात पैदा कर दिए हैं।

Saturday, 30 December 2017

अम्बेडकर की फोटो लगाने की नौटंकी जबकि दलितों की हत्या , बलात्कार लगातार हो रहे है यु पी में

अम्बेडकर  की फोटो लगाने की नौटंकी जबकि  दलितों की हत्या  , बलात्कार लगातार हो रहे है  यु पी में
जन उदय : वैसे तो पुरे देश में भारत के मूलनिवासी  जिन्हें दलित भी कहा जाता है उनका जातीय  हिंसा और उत्पीडन से बुरा हाल है रोहित वेमुला , जीशा , डेल्टा  मेघवाल ,उना काण्ड , अख़लाक़  काण्ड हुए  है और ऐसे ही रोज हो रहे है लेकिन  भाजपा शासित  राज्यों में ब्राह्मण आतंकवाद  जिसे भगवा आतंकवाद भी कहा जाता है वह इस कद्र  बढ़  रहा है की लोग सांस  नहीं ले पा रहे .

उत्तर प्रदेश में जबसे  ई वी एम् घोटाले से बनी सरकार  आई है तब से जातीय  नरसंहार  जोरो पर रोज हत्या  बलात्कार  हो रहे है  और सहारनपुर की जातीय हिंसा और    ऐसी घटना है   जिनसे पुरे विश्व को हला कर  रख दिया है  पूरी दनिया के मानवाधिकार संघठन  भी हिल गए है . क्योकि  इसमें योगी सरकार ने   ठाकुरों  को पोलिस    का साथ दे कर राज्य के चमारो  पर हमले करवाए   उनकी हत्याए की  और उनके घर लुटे

कमाल की बता की  ठाकरो पर कार्यवाही करने की जगह दलितों को ही  जेल में डाल दिया गया और उनकी जमानत  तक नहीं होने दी जा रही ई  भीम आर्मी के चीफ  चंदर शेखर  को एल में ही मारने की साजिश  रची जा रही है


 “””” सहारनपुर में हुई जातीय हिंसा का सचजाकिर चौधरी

उत्तर प्रदेश में जब से भाजपा की सरकार आई है तब से ऐसा लगता है जैसे सहारनपुर क्षेत्र को किसी की नज़र लग गयी हो। कुछ दिन पहले चिलकाना में सैनी समाज के कुछ उपद्रवी लोगों ने  दलितों पर हमला बोला। होली के अवसर पर राजपूतों और दलितों के बीच झगड़े की खबर आई थी। ताज़ा घटना को ध्यान में रखें तो सहारनपुर के ग्राम शब्बीरपुर में दलित, बाबा साहब अंबेडकर की प्रतिमा लगाना चाह रहे थे। इस स्थान पर क़ानूनी तौर पर अधिकार दलितों का ही है। इस गाँव के राजपूतों को दलितों द्वारा अम्बेडकर की प्रतिमा को लगाने तथा प्रतिमा का चबूतरा ज़्यादा ऊंचा बनवाए जाने से आपत्ति थी। इस कार्य को राजपूतों ने रुकवा दिया। दलितों में सहमति बनी कि इस कार्य को प्रशासन की अनुमति लेने के बाद ही शुरू कराया जाये। इसलिए कार्य वहीं  ठप्प हो गया।

इसके कुछ दिन बाद राजपूतों ने बिना अनुमति के महाराणा प्रताप के जन्मदिन यानि 9 मई को शौर्य दिवसका जूलुस निकाला। शौर्य दिवस मनाने की अनुमति तो प्रशासन ने एक पार्क में दी थी लेकिन जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी क्यूंकि कहीं न कहीं प्रशासन को भी किसी अनुचित घटना घटित हो सकने का अंदेशा था। शौर्य दिवस मनाने के लिया हरियाणा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के राजपूत समुदाय के लोग इकठ्ठा हुए थे. गैरकानूनी ढंग से जलूस निकालने के बाद राजपूत समुदाय के लोगों ने संत रविदास के मंदिर के सामने ऊँची और तेज़ आवाज़ में गाने बजाये। शोर शराबे पर जब दलितों ने आपत्ति जताई तो कहासुनी और झड़प हुई। उसके फलस्वरूप राजपूत समुदाय के लोगों ने संत रविदास मंदिर के अन्दर जाकर संत रविदास की प्रतिमा को क्षति पहुंचाई। इन सभी हरकतों और घटनाओं से आप अंदाजा लगा सकते है कि किस तरह से राजपूत समुदाय के लोग दलितों को डराने और उकसाने का प्रयास कर रहे थे।


इसी बीच जब झुण्ड का एक व्यक्ति प्रतिमा को तोड़कर मंदिर से बाहर आ रहा था तभी वह अचानक से चक्कर खाकर ज़मीन में गिरा और उसकी मृत्यु हो गई। यह बात पोस्ट मॉर्टेम रिपोर्ट में भी साबित हुई कि उस व्यक्ति की मृत्यु स्वतः हुई और उसके शरीर पर किसी भी प्रकार की चोट का कोई निशान नहीं पाया गया है।

एक स्थानीय निवासी के अनुसार झड़प शुरू होने के थोड़ी देर बाद लगभग दो हज़ार राजपूत इकठ्ठा हो गए। राजपूत समुदाय के लोग फ़ोन पर फ़ोन किये जा रहे थे और सभी लोग लाठी, तलवार और अन्य हथियारों से लैस थे। उनहोंने शब्बीरपुर के गरीब, असहाय और निहत्थे दलितों पर धावा बोल दिया और लगभग 30 घरों को जलाकर नष्ट कर दिया। इसी बीच दलितो में हाहाकार मच गया और वह किसी तरह अपनी जान बचा कर सुरक्षित स्थानों पर भागे। राजपूत समुदाय की जो भीड़ दलितों पर आक्रमण कर रही थी उसमें लोग जय राजपूतानाके नारे लगा रहे थे साथ ही साथ यह भी कह रहे थे कि जय भीम नहीं जय राजपूताना बोलना होगा।””””

 अब  चुकी  हर जगह दलितों  की  अनदेखी  की जा रही है   नौकरी में ब्राह्मण आयोग बना  सिर्फ ब्राह्मणों  को ही भारती इया जा रहा है  नर्सिंग घोटाला सामने आया है जिसमे ३ अंक और ८ अंक पाने वाले ब्राह्मणों  को  नौकरी  दी गई जबकि ५० अंक पाने वाले   दलितों  को नहीं  मिली

जब से भाजपा सरकार में आई है तब से गैर ब्राह्मणों  पर आतंक  की तलवार लटकी हुई  है
अब योगी ने एक सगुफा छोड़ा  है की  हर सरकारी  दफ्तर में अम्बेडकर  की मूर्ति लगेगी  यह ब्यान  अंत कुमार  हेगड़े  एक ब्राह्मण आतंकवादी के जिसने यह कहा था हम आये ही सविंधान बदलने है

वैसे भी अम्बेडकर की मूर्ति या तस्वीर लगाने से क्या होगा , एक तरफ  आप तस्वीर लगायंगे  दूसरी तरफ  दलितों की हत्या   और उनके हको  को छिनेंगे  इसे दोग्लापंती  कहते है    भाजपा और आर्य आतंकवादियो  का यह  डरपोक वाला ब्यान है ,  दरसल  ब्राह्मण  और  उसके समर्थक  विदेशी आतंकवादी  है जिन्हें जब तक देश से निकाला  नहीं जाएगा तब तक इस देश का भला नहीं होगा

After genocide of dlit in saharanpur , up yogi govt order to keep ambedkar photo in every govt office
Saharanpur  or any other place yogi  is the mastermind of saharanpur  caste riot wherein he permitted supported  the thakurs 


Sunday, 17 December 2017

चुनाव आयोग ने माना गुजरात में हुई है ई वी एम् हेक :सबूत के साथ सबसे बड़ा खुलासा,

जन उदय  जिस तरह सभी विपक्षी पार्टिया  यह कह रही है भाजपा ई वी एम् हैकिंग  का सहारा लेकर चुनाव जित रही है  जो न सिर्फ   गैर-कानूनी है बल्कि लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा  है , भगवा  गुंडों  के होंसले इतने बढ़ते  जा रहे है की उत्तर प्रदेश में पुलिस वालो  की पिटाई  हो रही है  उनकी हत्याए  की जा रही है बल्कि दिन रात गेंग  रेप  , हत्या , बलात्कार जैसी  घटनाए  बढती जा रही  है
हाल में  राजेस्थान में एक भगवा आतंकी शम्भु  नाम के युवक ने एक मुस्लिम युवा की हत्या कर उसको आग लगा दी और इसी क्रम  में आगे बढ़ते  हुए उसके समर्थको  ने कोर्ट  की  बिल्डिंग पर ही भगवा लहरा दिया  इस तरह की घटनाओं  ने लोकतंत्र  को  शर्मशार  कर  दिया है और कमाल की बात यह है इन दोनों घटनाओं में राज्य  की भाजपा सरकार ने कोई भी कड़ी  कार्यवाही  नहीं की है हां

  अगर गलित से य घटना किसी  ब्राह्मण   या राजपूत के साथ हुई होती  तो पुरे राज्य में इस वक्त सरकार द्वारा समर्थित  उत्पात  मचा  होता  और इन सब की  जड़  में है ई वी एम्
ई वी एम्  हैकिंग  की वजह से भाजपा आज २०१४  के चुनाव के जरिये केंद्र में  काबिज  है  और इसी कारण  देश में भगवा आतंक बढ़ता  जा रहा है लेकिन गुजरात चुनाव के दौरान खुद चुनाव आयोग ने यह स्वीकार कर लिया  है की चुनाव  में ई वी एम् मशीन हैक  की जा रही है और यही कारण रहा की राज्य में जहा जहा चुनाव  हो रहे थे  वहा पर चुनाव आयोग ने इन्टरनेट  सेवाए  बंद कर दी


इस बात का खुलासा  श्री के एल परमार   जो उप  चुनाव आयुक्त  है गुजरात  के उनके एक खत के लीक  होने के बाद हुआ है   और  इस खत की एक प्रति  जन उदय  के हाथ भी लगी  है  ,
यह खत  असली  है या नकली   खुद चुनाव आयोग ने इस बात की पुष्टि  नहीं की है हमारे सहयोगियो  द्वारा  पुष्टि  के प्रयास किये गए यकीन चुनाव आयोग से कोई जवाब नहीं मिला

Tuesday, 12 December 2017

पुष्यमित्र शुंग / परशुराम गद्दार ब्राह्मण , जिसने की लाखो बौध लोगो की हत्या और स्थापित किया ब्राह्मणवाद


जन उदय : ये बात सब को बड़ी अजीब लगेगी की ऐसा कौनसा  समाज दुनिया में हो सकता है जो अपने ही समाज के लोगो  की हत्या , बलात्कार को  जायज समझता है  और बाकायदा इस उत्पीडन और हत्याओं को ये लोग धार्मिक जामा  पहनाते  है , और यह कहते है की इन्हें तो भगवान्  ने ऐसा करने के लिए  बनाया है , और यही नहीं शिक्षा सम्पति  और अधिकार से ये लोग वंचित रखते है .. ऐसे लोग क्या किसी सभ्य समाज के हिसा हो सकते है ??  नहीं शायद नहीं  ये बर्बर लोग है  जंगली लोग है जो इंसानियत  और मानवता को  न जानते है न समझते है   क्या आप जानते है  की ये लोग कौन है  ??  जी हाँ ये लोग  है ब्राह्मण

देश के सबसे बड़े गद्दार , देशद्रोही   साबित हुए  ये लोग आज भी दुसरे लोगो को शिक्षा , और मानवाधिकारों से वंचित रखना चाहते है  और अपना शासन  स्थापित करना चाहते है

सम्राट अशोक ने अपने राज्य में पशु हत्या पर पाबन्दी लगा दी थी, जिसके कारन ब्राह्मणों की रोजगार योजना बंद को गई थी, उसके बाद सम्राट अशोक ने तीसरी धम्म संगती में ६०,००० ब्राह्मणों को बुद्ध धम्म से निकाल बाहर किया था, तो ब्राह्मण १४० सालों तक गरीबी रेखा के नीचे का जीवन जी रहे थे, उस वक़्त ब्राह्मण आर्थिक दुर्बल घटक बनके जी रहे थे, ब्राह्मणों का वर्चस्व और उनकी परंपरा खत्म हो गई थी, उसे वापस लाने के लिए ब्राह्मणों के पास बौद्ध धम्म के राज्य के विरोध में युद्ध करना यही एक मात्र विकल्प रह गया था, ब्राह्मणों ने अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस लाने के लिए

अखण्ड भारत में मगध की राजधानी पाटलिपुत्र में अखण्ड भारत के निर्माता चक्रवर्ती सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक महान के पौत्र , मौर्य वंश के 10 वें न्यायप्रिय सम्राट राजा बृहद्रथ मौर्य की हत्या धोखे से उन्हीं के ब्राह्मण सेनापति पुष्यमित्र शुंग के नेतृत्व में ईसा.पूर्व. १८५ में रक्त रंजिस साजिश के तहत प्रतिक्रांति की और खुद को मगध का राजा घोषित कर लिया था ।

और इस प्रकार ब्राह्मणशाही का विजय हुआ।


उसने राजा बनने पर पाटलिपुत्र से श्यालकोट तक सभी बौद्ध विहारों को ध्वस्त करवा दिया था तथा अनेक बौद्ध भिक्षुओ का खुलेआम कत्लेआम किया था। पुष्यमित्र शुंग, बौद्धों व यहाँ की जनता पर बहुत अत्याचार करता था और ताकत के बल पर उनसे ब्राह्मणों द्वारा रचित मनुस्मृति अनुसार वर्ण (हिन्दू) धर्म कबूल करवाता था।

उत्तर-पश्चिम क्षेत्र पर यूनानी राजा मिलिंद का अधिकार था। राजा मिलिंद बौद्ध धर्म के अनुयायी थे। जैसे ही राजा मिलिंद को पता चला कि पुष्यमित्र शुंग, बौद्धों पर अत्याचार कर रहा है तो उसने पाटलिपुत्र पर आक्रमण कर दिया। पाटलिपुत्र की जनता ने भी पुष्यमित्र शुंग के विरुद्ध विद्रोह खड़ा कर दिया, इसके बाद पुष्यमित्र शुंग जान बचाकर भागा और उज्जैनी में जैन धर्म के अनुयायियों की शरण ली।

जैसे ही इस घटना के बारे में कलिंग के राजा खारवेल को पता चला तो उसने अपनी स्वतंत्रता घोषित करके पाटलिपुत्र पर आक्रमण कर दिया। पाटलिपुत्र से यूनानी राजा मिलिंद को उत्तर पश्चिम की ओर धकेल दिया।
इसके बाद ब्राह्मण पुष्यमित्र शुंग राम ने अपने समर्थको के साथ मिलकर पाटलिपुत्र और श्यालकोट के मध्य क्षेत्र पर अधिकार किया और अपनी राजधानी साकेत को बनाया। पुष्यमित्र शुंग ने इसका नाम बदलकर अयोध्या कर दिया। अयोध्या अर्थात-बिना युद्ध के बनायीं गयी राजधानी...

राजधानी बनाने के बाद पुष्यमित्र शुंग राम ने घोषणा की कि जो भी व्यक्ति, बौद्ध भिक्षुओं का सर (सिर) काट कर लायेगा, उसे 100 सोने की मुद्राएँ इनाम में दी जायेंगी। इस तरह सोने के सिक्कों के लालच में पूरे देश में बौद्ध भिक्षुओ का कत्लेआम हुआ। राजधानी में बौद्ध भिक्षुओ के सर आने लगे । इसके बाद कुछ चालक व्यक्ति अपने लाये सर को चुरा लेते थे और उसी सर को दुबारा राजा को दिखाकर स्वर्ण मुद्राए ले लेते थे। राजा को पता चला कि लोग ऐसा धोखा भी कर रहे है तो राजा ने एक बड़ा पत्थर रखवाया और राजा, बौद्ध भिक्षु का सर देखकर उस पत्थर पर मरवाकर उसका चेहरा बिगाड़ देता था । इसके बाद बौद्ध भिक्षु के सर को घाघरा नदी में फेंकवा दता था।

राजधानी अयोध्या में बौद्ध भिक्षुओ के इतने सर आ गये कि कटे हुये सरों से युक्त नदी का नाम सरयुक्त अर्थात वर्तमान में अपभ्रंश "सरयू" हो गया।
इसी "सरयू" नदी के तट पर पुष्यमित्र शुंग के राजकवि वाल्मीकि ने "रामायण" लिखी थी। जिसमें राम के रूप में पुष्यमित्र शुंग और "रावण" के रूप में मौर्य सम्राटों का वर्णन करते हुए उसकी राजधानी अयोध्या का गुणगान किया थ


Brahmaan kingdom / dominance was established by Pushyamitr shung / Parshuram was the chief soldier of vrahdhasth  the grand son of  King Ashok in 180 BC ,  Pushymitr shung  killed millions of Boudhist People  demolished more then  90 thousand  Boudh Vihar and  Stupa and converte them into temple

Brahmins   nomads of Europe  and central asia originally came  to india in search of food and water  and a peaceful life but later  by  luring  local kings  giving them their daughters  they got  the place in courts of local king . but  they did as their original nature was , treachery , ungretfulness 

Thursday, 7 December 2017

देश का सारा सोना चांदी पैसा आ जाएगा ब्रह्मण बनिए के कब्जे में , ऐसा कानून ला रही है मोदी सरकार


जन उदय ;  ये देश ब्राह्मणों का है इस देश पर सत्ता पर काबिज ब्राह्मण बनिए ठाकुर रहने चाहिए  ऐसी मानसिकता  संघियो यानी   ब्राह्मणों  की है  और ये लोग इस कार्य ले लिए भारत के मूलनिवासियो की हत्या , कत्ल  , बेरोजगारी बढ़ाना , अशिक्षा  बढ़ाना   कुछ भी करने को तैयार  है .

आरक्षण होने के बावजूद देश के मूलनिवासियो  के विकास का पैसा  खा गए  उनका हक उनतक  पहुचने नहीं दिया गया उनकी हत्या क़त्ल आदि कर  बेरोजगार  रखने के लिए हर सम्भव प्रयास  किया जाता है . देश की अर्थ्वाव्स्था  पूरी की पूरी ब्राह्मण बनिए  और सवर्णों के हाथ में है , इन्ही के सारे  धंधे  है


लेकिन अब एक ऐसा बिल आने वाला है  जब देश के हर आदमी का पैसा ब्राह्मण बनिए और सवर्णों की जेब में पहुच जाएगा  और कोई इस बात के खिलाफ किसी  भी अदालत में फ़रियाद  भी नहीं कर सकता
जी हाँ जल्द ही मोदी  सरकार अपने पूंजीपति आकाओं  को खुश करने के लिए एक ऐसा कानून  संसद में आने जा रही है इसमें यह होगा की अगर आपने किसी  भी सरकारी बैंक में पैसा जमा करा दिया   तो बैंक  आपका पैसा  वापिस देने से इकार कर सकता है  उसके बदले में आपको चार कागज के टुकड़े दे  सकता है और कह सकता है  की पैसा दस  साल बाद लेना 

अब विस्तार से समझिये

बैंक पने दिवालिया होने की स्थति में यह कदम उठायगा . तो सबसे बड़ी बात वह पुजीपतियो से पैसा वापिस क्यों नहीं लेता या लेगा , यानि देश  का पैसा ब्राह्मण बनिए उद्योगपति के पास जाएगा , फिर वापिस नहीं देगा , फिर बैंक अपने आपको दिवालिया घोषित करेगा  और आपका यानी गरीब आदमी का पैसा बैंक हडप लेगा अब वो पैसा आप   चाहे मरे , बीमार हो   बेटी की  शादी  हो   कभी नहीं मिलेगा , यानी बैंक पूंजीपति से पैसा न लेकर  आपका पैसा हड्पेगा वो भी कानून के जरिये

उधाह्र्ण के लिय  स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया  का एकलाख अस्सी  हजार करोड़  रुपया एन पी ए  है यानी वो पैसा अब नहीं मिलेगा , इस पैसे को वापिस लाने के लिए बैंक कोई कार्यवाही  भी नहीं करता  ,क्यों ?? विजय माल्या  जैसे विदेशो में मस्ती कर रहे है उनकी कम्पनी यहाँ चल रही है फिर भी सरकार  कुछ नहीं करती
इसके बाद ऐसा हो की आप इजी बैंको के तरफ भागे अपने पैसे को सुरक्षित करने के लिए लेकिन एक दिन वो भी अपना इसी  तरह इस कानून का लाभ लेंगे और इस  कानून के बहाने  आपका सारा पैसा   लेकर ये लोग  यानी ब्राह्मण बनिए  देश छोड़  भाग खड़े  होंगे .


कुछ लोग सोचते है की ऐसा क्यों होगा ये लोग देश छोड़  क्यों भागेंगे ?? ये लोग इसलिए भागेंगे क्योकि देश में सामाजिक परिवर्तन उर गृह युद्ध की बयार चल पढ़ी  है और एक न एक दिन इन  लोगो को मरना ही है  तो ये लोग महसूस कर चुके है इसलिए ये लोग देश को कंगला कर भाग जाना चाहते है  

Friday, 24 November 2017

परशुराम / पुष्यमित्र शुंग विदेशो से आये ब्राह्मण इस देश पर कब्जा कर लिया जानिये कैसे


सम्राट अशोक ने अपने राज्य में पशु हत्या पर पाबन्दी लगा दी थी, जिसके कारन ब्राह्मणों की रोजगार योजना बंद को गई थी, उसके बाद सम्राट अशोक ने तीसरी धम्म संगती में ६०,००० ब्राह्मणों को बुद्ध धम्म से निकाल बाहर किया था, तो ब्राह्मण १४० सालों तक गरीबी रेखा के नीचे का जीवन जी रहे थे, उस वक़्त ब्राह्मण आर्थिक दुर्बल घटक बनके जी रहे थे, ब्राह्मणों का वर्चस्व और उनकी परंपरा खत्म हो गई थी, उसे वापस लाने के लिए ब्राह्मणों के पास बौद्ध धम्म के राज्य के विरोध में युद्ध करना यही एक मात्र विकल्प रह गया था, ब्राह्मणों ने अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस लाने के लिए

 अखण्ड भारत में मगध की राजधानी पाटलिपुत्र में अखण्ड भारत के निर्माता चक्रवर्ती सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक महान के पौत्र , मौर्य वंश के 10 वें न्यायप्रिय सम्राट राजा बृहद्रथ मौर्य  की हत्या धोखे से उन्हीं के ब्राह्मण सेनापति पुष्यमित्र शुंग के नेतृत्व में ईसा.पूर्व. १८५ में रक्त रंजिस साजिश के तहत प्रतिक्रांति की और खुद को मगध का राजा घोषित कर लिया था ।
और इस प्रकार ब्राह्मणशाही का विजय हुआ।

 उसने राजा बनने पर पाटलिपुत्र से श्यालकोट तक सभी बौद्ध विहारों को ध्वस्त करवा दिया था तथा अनेक बौद्ध भिक्षुओ का खुलेआम कत्लेआम किया था। पुष्यमित्र शुंग, बौद्धों व यहाँ की जनता पर बहुत अत्याचार करता था और ताकत के बल पर उनसे ब्राह्मणों द्वारा रचित मनुस्मृति अनुसार वर्ण (हिन्दू) धर्म कबूल करवाता था।




उत्तर-पश्चिम क्षेत्र पर यूनानी राजा मिलिंद का अधिकार था। राजा मिलिंद बौद्ध धर्म के अनुयायी थे। जैसे ही राजा मिलिंद को पता चला कि पुष्यमित्र शुंग, बौद्धों पर अत्याचार कर रहा है तो उसने पाटलिपुत्र पर आक्रमण कर दिया। पाटलिपुत्र की जनता ने भी पुष्यमित्र शुंग के विरुद्ध विद्रोह खड़ा कर दिया, इसके बाद पुष्यमित्र शुंग जान बचाकर भागा और उज्जैनी में जैन धर्म के अनुयायियों की शरण ली।

जैसे ही इस घटना के बारे में कलिंग के राजा खारवेल को पता चला तो उसने अपनी स्वतंत्रता घोषित करके पाटलिपुत्र पर आक्रमण कर दिया। पाटलिपुत्र से यूनानी राजा मिलिंद को उत्तर पश्चिम की ओर धकेल दिया।

 इसके बाद ब्राह्मण पुष्यमित्र शुंग राम ने अपने समर्थको के साथ मिलकर पाटलिपुत्र और श्यालकोट के मध्य क्षेत्र पर अधिकार किया और अपनी राजधानी साकेत को बनाया। पुष्यमित्र शुंग ने इसका नाम बदलकर अयोध्या कर दिया। अयोध्या अर्थात-बिना युद्ध के बनायीं गयी राजधानी...

 राजधानी बनाने के बाद पुष्यमित्र शुंग राम ने घोषणा की कि जो भी व्यक्ति, बौद्ध भिक्षुओं का सर (सिर) काट कर लायेगा, उसे 100 सोने की मुद्राएँ इनाम में दी जायेंगी। इस तरह सोने के सिक्कों के लालच में पूरे देश में बौद्ध भिक्षुओ  का कत्लेआम हुआ। राजधानी में बौद्ध भिक्षुओ के सर आने लगे । इसके बाद कुछ चालक व्यक्ति अपने लाये  सर को चुरा लेते थे और उसी सर को दुबारा राजा को दिखाकर स्वर्ण मुद्राए ले लेते थे। राजा को पता चला कि लोग ऐसा धोखा भी कर रहे है तो राजा ने एक बड़ा पत्थर रखवाया और राजा, बौद्ध भिक्षु का सर देखकर उस पत्थर पर मरवाकर उसका चेहरा बिगाड़ देता था । इसके बाद बौद्ध भिक्षु के सर को घाघरा नदी में फेंकवा दता था।

 राजधानी अयोध्या में बौद्ध भिक्षुओ  के इतने सर आ गये कि कटे हुये सरों से युक्त नदी का नाम सरयुक्त अर्थात वर्तमान में अपभ्रंश "सरयू" हो गया।


 इसी "सरयू" नदी के तट पर पुष्यमित्र शुंग के राजकवि वाल्मीकि ने "रामायण" लिखी थी। जिसमें राम के रूप में पुष्यमित्र शुंग और "रावण" के रूप में मौर्य सम्राटों का वर्णन करते हुए उसकी राजधानी अयोध्या का गुणगान किया थ