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Saturday, 17 March 2018

ताकि टुकड़े हो भारत के : यु पी हार से भोखलाई भाजपा का आईटी सेल अब यादव और जाटव पहचान वाली पांच लाख आईडी देश में फैलाना चाहता है जातिय दंगे


ताकि टुकड़े  हो भारत के : यु पी हार से भोखलाई  भाजपा का आईटी सेल अब यादव और जाटव पहचान वाली पांच  लाख आईडी देश में  फैलाना  चाहता है जातिय  दंगे

जन उदय यु पी हार से भोखलाई  भाजपा का आईटी सेल अब यादव और जाटव पहचान वाली तकरीबन एक लाख आईडी बनाने की तैयारी कर रहा है..।।

 ऐसी  सूचना मिली है  की  देशभक्तों की ये पार्टी यानी भाजपा  जिसका  मुख्य  काम देश में दंगा कराना , गो-आतंक  फैलाना  हिन्दू  -मुस्लिम  दंगे करवाना  और बॉर्डर पर  सैनिको  को मौत  की आगोश  में धकेलना  ताकि  राष्ट्रवाद  फैलाया जा



 सके  , और इस राष्ट्रवाद के पीछे  सिर्फ  एक मकसद है  देश में तनाव  फैला  कर वोट  हांसिल  करना
 अब सुनने  में आया  है की यु पी हार से भोखलाई  भाजपा का आईटी सेल अब यादव और जाटव पहचान वाली तकरीबन एक लाख आईडी बनाने की तैयारी कर रहा है.,भाजपा  इन आईडी से यादवों को जाटव गाली देंगे और जाटवों को यादव गाली देंगे।।

ये भी हो सकता है कि यादवों को अन्य पिछड़ी जातियों का विरोधी और जाटवों को गैर जाटव दलित जातियों का विरोधी बनाने का प्रयास किया जाऐ।।



अगर यह  सच  साबित  हुआ तो  देश  को तोड़ने  की  भाजपा और संघ  की सबसे बड़ी  शाजिस  के रूप में सामने आएगी  यानी इस  षड्यंत्र  को  देश को तोड़ने  के रूप में लिया जा सकता है  इसलिए   देश के सभी  लोगो  को बहुत   सावधान रहने  की जरूरत है और  किसी  भी बात  कर प्रतिक्रया  करने  से पहले  इसे एक शाजिस  के रूप में  ही  देखे , यह   बात  सच  या झूट हो सकती है लेकिन सोशल  मीडिया पर सम्भल कर चला ही ठीक होगा  वर्ना  देश  किसी बड़ी शाजिस  का शिकार हो सकता  है  

Friday, 23 February 2018

उत्तर प्रदेश में अपराध मुक्ति के नाम पर जातिय नरसंहार . हिन्दू नाम गुमराह समझे भगवा चरित्र को

उत्तर प्रदेश में  अपराध मुक्ति के  नाम पर जातिय  नरसंहार . हिन्दू नाम गुमराह समझे भगवा चरित्र को  
जन उदय :  जब से उत्तर प्रदेश में  भाजपा की जातिवादी  ब्राह्मणों  की भगवा सरकार आई है तबसे एक आंकड़ो  के अनुसार  अपराध मुक्ति के नाम पर चार हजार लोगो की कानूनी हत्या की जा चुकी है , पूर्व  डी जी पी ने यह आंकडा  दो हजार और मुख्यमंत्री न खुद बाढ़ सौ  माना है लकिन सच्चाई  कुछ और ही है . .यानी  यह संख्या बहुत जयादास भी हो सकती है

खैर हाल ही में उत्तर प्रदेश के  सुलतान पुर जिले में कादीपुर गाव का सामने आया है जहा का निवासी  अम्बुज यादव पिछले  एक साल से राजेस्थान में रह नौकरी कर रहा  था उसको उत्तर प्रदेश ने फोन करके बुलाया की आ जाओ  वरना  राजस्थान में आकर एनकाउंटर  करेंगे  जब अम्बुज यादव घर आया  तो पुलिस  उसे पकड़ कर ले गई  और खेते मेला जाकर  उसका एनकाउंटर  करने लगी और एक गोली  उसके पाँव में मारी  इस घटना को एक राहगीर ने देख लिया सो वह जल्द से  गाव के लोगो को बुला लाया .

भीड़ ने पुलिस को घेरा  तो पुलिस अपनी जान बचा कर भाग  गई ,अम्बुज यादव का इलाज जिला सरकारी अस्पताल में  चल रहा है   सबसे पहले इस खबर को  मीडिया  ने एक  अपराधी  के एनकाउंटर  के रूप में चलाया  लेकिन सच्चाई  सामने आने पर मीडिया  चुप  लग  गया .

कमाल की बात यह है की  अपराध मुक्ति  के नाम पर  योगी  / भगवा सरकार केवल दलित मुस्लिम युवाओं  को शिकार बना रही है जबकि  सवर्ण गुंडों  को को प्रोमोट  कर  रही   है आज ही अलीगढ  में बजरंग  दल  के गुंडों ने  एक दरोगा  को भरे  बाजार  पीटा  लेकिन इ
न
 गुंडों  के खिलाफ अभी  तक कोई कार्यवाही  नहीं हुई है जबकि सरकार निर्दोष  लोगो  को भी शिकार बना रही है .
अम्बुज यादव के केस में पता चला  है  की  एक ठाकुर  अम्बुज  यादव  के जमीन पर नजर गाड़े  है और  वह पुलिस  के जरिये  अम्बुज को मरवाना चाहता था  जाहिर  है बुडा  बाप  खुद  ही मर जाता इकलोती  सन्तान के जाने के बाद . जन उदय इस घटना से जुडी  सभी जानकारियो  की  जांच  कर रहा है  की इसमें कितना सच है और कितना झूट


लेकिन एक बात तय  है  की सरकार  इस वक्त जातिय पूर्वाग्रह के साथ  काम कर रही है  कमाल की बता यह है की  ये ही भगवा लोग जब डरपोको  की तरह  घूमते है तो अपने बचाव के लिय  हिन्दू हिन्दू करते  है ताकि अपने आप को एक बड़े समूह से दिखा सके   और जब इनका  डर निकाल जाता है तब अपने आपको ब्राह्मण  और सवर्ण कहने लग जाते है  . यह एक दोगले लोग है जिसने भार जैसे देश का सर्वनाश  किया हुआ है 

Friday, 9 February 2018

शिवाजी , मुसलमान और संघियो का षड्यंत्र : जीशान अहमद

शिवाजी , मुसलमान और संघियो का षड्यंत्र  : जीशान अहमद

संघी यानी आर एस एस  जिसका दुसरा मतलब  नफरत और आतंक  भी होता है  इन्होने देश में अशिक्षा की वजह से इतिहास के पन्नो   में जहर  डाल डाल के लोगो को पिला रहे है और कमाल की बात यह है की ये लोग हिन्दू शब्द का सहारा ले कर अपना उलू सीधा करते रहते है जब की यह बात सब जानते है की हिन्दू समाज या धर्म से इनका कोई लेना  देना  नहीं है इनका काम है सिर्फ जहर फैलाना , अगर इनका हिन्दू  या हिन्दू समाज से कोई सम्बन्ध  होता तो फिलहाल में  सहारनपुर में ऐसी घटना न होती  की इन्होने अपने ही धर्म के लोगो के साथ बर्बरता की  और ये सिर्फ  सहारनपुर ही नहीं पुरे देश में सदीओ से ये लोग दलित समाज में जहर फैलाते आ रहे है , वर्तमान योगी सरकार चुन चुन कर यादव , गुर्जर  और मुसलमानों की हत्या कर रही है जिसमे  ३००० से जयादा ह्त्या कर चुकी है और ये  खुनी खेल जारी  है वह भी  अपराध मुक्ति के नाम पर

अब बात करते है शिवाजी  की जिसको ये लोग  हिन्दू  कह कर संबोधित  करते है और हिन्दू –मुसलमान के बीच खड़ा कर देते है जबकि  शिवाजी  एक राजा  था   उसका राजधर्म  था जनता से उसे प्यार था  वह अपने राज्य में सबका राजा  था और  उसकी सारी प्रजा  उसके साथ थी वह भी बिना किसी जाति और धर्म के भेद के
यहाँ पर शिवाजी के बारे में कुह खुलासे  किये जा रहे है जरा देखिये
धर्म के ठेकेदारों तुम ही बताओ मुल्लो से नफरत करू भी तो किस वजह से?
छत्रपति शिवाजी महाराज की सेना में 30% से ज़्यादा मुसलमान  थे


शिवाजी के 13 बॉडीगार्ड मुसलमा
न थे

शिवाजी के तोपखाने का प्रमुख इब्राहिम खान नाम का मुसलमान था।
शिवाजी का एक ही वकील था जिसका नाम क़ाज़ी है था वो भी मुसलमान था।
शिवाजी के गुरु का नाम सूफी याकूब बाबा था।
शिवाजी के थल सेना प्रमुख का नाम नूर खान था।

अफ़ज़ल खान को मारने के लिए शिवाजी को वो हथियार बना कर देने वाला सिद्धि हिलाल मुसलमान ही था
अफ़ज़ल खान के आने की खबर देने वाला रुस्तम ए ज़मान मुसलमान था।

इतिहास में कही भी नही है के शिवाजी के सेना के किसी मुसलमान ने शिवाजी को धोखा दिया हो।
शिवाजी ने रायगढ़ में अपने किले से सामने मुस्लिमों के लिए मस्जिद बनाई जो आज भी मौजूद है
शिवाजी पर हमला करने वाला कृष्णा भास्कर कुलकर्णी ब्राम्हण था।
ब्राम्हणो ने शिवाजी के राज्ये अभिषेक को नकारा था।

शिवाजी के पोते  संभाजी की हत्या कर के उनके शरीर के टुकड़े करने वाले ब्राम्हण ही थे।
शास्त्रो के हिसाब से शुद्र का शिक्षा प्राप्त करना अधर्म था अगर कोई शुद्र शिक्षा प्राप्त करले तो उसे मृत्यु दंड दिया जाता था
ज्योतिबा फुले ने शूद्रों की शिक्षा की ज़िम्मेदारी उठाई और स्कूल शुरू करने के लिए आगे बढ़े ब्राम्हणो ने खूब विरोध किया पर एक मुल्ला जिसका नाम उस्मान शेख था उसने स्कूल के लिए जगह दी।
सावित्री बाई फुले जब स्त्री शिक्षा की ज़िम्मेदारी लेकर निकली उस वक़्त भी ब्राम्हणो के खूब विरोध किया यहा तक के सावित्री बाई पर पत्थर और गोबर बरसाए गए ब्राम्हणों द्वारा पर उस वक़्त भी उनके साथ कदम से कदम मिला कर चलने वाली फ़ातेमा शेख भी मुल्ला ही थी।

ब्राम्हणों के विरोध के बावजूद डॉ भीमराव अंबेडकर को संविधान हाल तक पहोचाने वाले भी मुल्ले ही थे

धर्म के ठेकेदारों अब तुमही बताओ मेरे पूर्वजो के साथ कदम से कदम मिला कर चलने वाले इन मुसलमानों  से मैं कैसे नफरत करू?

Sunday, 7 January 2018

*भिड़े,एकबोटे,दवे ब्राम्हणों द्वारा बौद्ध,सिख,लिंगायत,मुस्लिम, क्रिचन मराठा ओ पर जानलेवा पथराव गाड़िया जलाई गईं प्रफुल अवाज़

 आज़ाद भारत में अंग्रेज़ों की जीत का जश्न क्यों? इस सवाल के जरिये जेनेऊ धारी ब्राम्हणवाद को फ़ैलाने वाली मीडिया और ब्राह्मणवादी मानसिकता के लोग भीमा कोरेगांव की ऐतिहासिक लड़ाई को अंग्रेज़ों की लड़ाई साबित करने की साज़िश कर रहे हैं. वो पूछ रहे हैं कि 200 साल पहले अंग्रेज़ों की जीत का जश्न मनाकर दलित देश विरोधी काम क्यों कर रहे हैं? असल में ये लोग हकीकत को बड़ी ही चालाकी से छुपा रहे हैं. क्योंकि अगर भीमा कोरेगांव जैसी ऐतिहासिक लड़ाई आपके लिए सिर्फ अंग्रेजी सेना की जीत है और उसपर गर्व करने का आपके पास कोई कारण नहीं है तो फिर सवाल है कि 42 मीटर ऊंचा इंडिया गेट आपके लिए गर्व का प्रतीक क्यों है?

इंडिया गेट प्रथम विश्वयुद्ध में अंग्रेजों की तरफ से लड़कर शहीद होने वाले भारतीय सैनिकों की याद में बनाया गया था. 13,000 से ज्यादा शहीदों के नाम इंडिया गेट पर उकेरे गये हैं. ये सैनिक फ्रांस, मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और अफगानिस्तान जैसे मोर्चों पर लड़े थे जिनका मकसद ना भारत को आज़ाद कराना था औऱ ना ही अंग्रेजों से विद्रोह करना, तो बताईये आप आज़ाद भारत में इंडिया गेट को कैसे देखते हैं?
आप हाइफा युद्ध को कैसे देखते हैं?


23 सिंतबर 1918 को विदेशी सरज़मीं पर लड़ी गई हाइफा की ऐतिहासिक लड़ाई में भी तो भारतीय सैनिक अंग्रेज़ों की तरफ से लड़े थे. क्या उन राजपूत जवानों की बहादुरी पर गर्व नहीं करना चाहिए? तो क्या दिल्ली के तीन मूर्ति चौक जिसे पहले हाइफा चौक कहा जाता था, वहां से गुजरते हुए हमें सम्मान और जोश की अनुभूति नहीं करनी चाहिए? क्योंकि ये सभी सैनिक तो अंग्रेज़ों के लिए लड़े थे.

सारागढ़ी की लड़ाई का क्या ?

12 सितंबर 1897 को खैबर पख्तूनख्वा में लड़ी गई सारागढ़ी की लड़ाई को क्या कोई झुठला सकता है? ब्रिटिश सेना के 21 सिख सैनिकों ने अफगान सेना के 10 हज़ार सैनिकों के छक्के छुड़ा दिये थे. क्या उस वक्त इन 21 बहादुरों का मकसद भारत की आज़ादी था? शायद नहीं, क्योंकि वो सब तो ब्रिटिश सेना की नौकरी कर रहे थे. तो क्या आप इस लड़ाई को इतिहास के पन्नों में दफना सकते हैं? क्या आपके लिए इस अदम्य साहस और वीरता की लड़ाई में गर्व की कोई बात नहीं?

एक सवाल मंगल पांडे के बारे में भी

मंगल पांडे ब्रिटिश सेना के सिपाही थे. मज़े से अंग्रेज अफसरों के हुक्म का पालन कर रहे थे. जब तक उनको मातादीन भंगी ने ये ताना नहीं दिया कि ‘तु शूद्र से भेदभाव करता है लेकिन गाय के मांस का बना कारतूस मुंह से फाड़ता है’ तबतक उन्हें ब्रिटिश सिपाही होने में कोई दिक्कत थी ही नहीं. मंगल पांडे ने वैसे भी अपनी हिंदू धार्मिक भावना के आधार पर विरोध किया था ना कि भारत मां की आज़ादी के लिए, तो क्या आप मंगल पांडे  गर्व करना छोड़ देंगे?फिर आप भीमा कोरेगांव की लड़ाई को बदनाम करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं? भीमा-कोरेगांव की लड़ाई तो फिर भी मानवता के खिलाफ खड़े लोगों से आजादी के लिए लड़ी गई थी.

1 जनवरी 1818 को पुणे के पास सिर्फ 500 महार सैनिकों ने पेशवा बाजीराव द्वितीय की 28 हज़ार सैनिकों की फौज को बुरी तरह धूल चटा दी थी. ब्रिटिश सेना की महार रेजिमेंट के शौर्य और अदम्य साहस जैसी मिसाल इतिहास में कहीं नहीं मिलती. पेशवा राज भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास का सबसे क्रूरतम शासनकाल था. मराठों के साथ छल करके ब्राह्मण पेशवा जब सत्ता की कुर्सी पर आये तो उन्होंने शूद्रों को नरक जैसी यातनाएं देना शुरू कर दिया. पेशवा राज में शूद्रों को थूकने के लिए गले में हांडी टांगना जरूरी था. साथ ही शूद्रों को कमर पर झाड़ू बांधना जरूरी था जिससे उनके पैरों के निशान मिटते रहें. शूद्र केवल दोपहर के समय ही घर से बाहर निकल सकते थे क्योंकि उस समय शरीर की परछाई सबसे छोटी होती है, परछाई कहीं ब्राह्मणों के शरीर पर ना पड़ जाये इसलिये उनके लिए समय निर्धारित था. शूद्रों को पैरों में घुंघरू या घंटी बांधनी जरूरी थी ताकि उसकी आवाज़ सुनकर ब्राह्मण दूर से ही अलर्ट हो जाये और अपवित्र होने से बच जाये.

ऐसे समय में जब पेशवाओँ ने नागवंशी मूलनिवासियो पर अत्यंत अमानवीय अत्याचार किये, उनका हर तरह से शोषण किया, तब उन्हें ब्रिटिश सेना में शामिल होने का मौका मिला. ब्रिटिश सेना में शामिल सवर्ण समाज के लोग शूद्रों से कोई संबंध नहीं रखते थे, इसलिये अलग महार रेजिमेंट बनाई गई. महारों के दिल में पेशवा साम्राज्य के अत्याचार के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा था, इसलिये जब 1 जनवरी 1818 को भीमा कोरेगांव में पेशवा सेना के साथ उनका सामना हुआ तो वो उनपर शेरों की तरह टूट पड़े. सिर्फ 500 महार सैनिकों ने बाजीराव द्वितीय के 28 हज़ार सैनिकों को धूल चटा दी और काट डाला. जाहिर सी बात है, जैसे हम हाइफा और सारागढ़ी के युद्ध के वीरों की वीरता को नहीं झुठला सकते, उसी तरह कोरेगांव के महार रेजिमेंट के जवानों के शौर्य को भी नहीं झुठलाया जा सकता.

1 जनवरी को इसी लड़ाई का 200वां शौर्य दिवस था जिसे मनाने देश भर के लाखों बौद्ध सिख,मुस्लिम,लिंगायत, मराठा,भीमा कोरेगांव में जुटे थे.ये लड़ाई अन्याय,शोषण और अपमान के प्रतिरोध का प्रतीक है जिसे युगों-युगों तक याद किया जाएगा. अंग्रेजों ने वीर महारों के याद में विजय स्तंभ बनवाया जो आज लाखों बौद्ध के लिए प्रेरणा का प्रतीक है.आपको सवाल उन पेशवाई गुंडों से पूछना चाहिए जो मूलनिवासियो के स्वाभीमान से जीने को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे.

 Reality of Bheema Koregaon , Brahman terror , Rss Conspiracy 

Saturday, 30 December 2017

अम्बेडकर की फोटो लगाने की नौटंकी जबकि दलितों की हत्या , बलात्कार लगातार हो रहे है यु पी में

अम्बेडकर  की फोटो लगाने की नौटंकी जबकि  दलितों की हत्या  , बलात्कार लगातार हो रहे है  यु पी में
जन उदय : वैसे तो पुरे देश में भारत के मूलनिवासी  जिन्हें दलित भी कहा जाता है उनका जातीय  हिंसा और उत्पीडन से बुरा हाल है रोहित वेमुला , जीशा , डेल्टा  मेघवाल ,उना काण्ड , अख़लाक़  काण्ड हुए  है और ऐसे ही रोज हो रहे है लेकिन  भाजपा शासित  राज्यों में ब्राह्मण आतंकवाद  जिसे भगवा आतंकवाद भी कहा जाता है वह इस कद्र  बढ़  रहा है की लोग सांस  नहीं ले पा रहे .

उत्तर प्रदेश में जबसे  ई वी एम् घोटाले से बनी सरकार  आई है तब से जातीय  नरसंहार  जोरो पर रोज हत्या  बलात्कार  हो रहे है  और सहारनपुर की जातीय हिंसा और    ऐसी घटना है   जिनसे पुरे विश्व को हला कर  रख दिया है  पूरी दनिया के मानवाधिकार संघठन  भी हिल गए है . क्योकि  इसमें योगी सरकार ने   ठाकुरों  को पोलिस    का साथ दे कर राज्य के चमारो  पर हमले करवाए   उनकी हत्याए की  और उनके घर लुटे

कमाल की बता की  ठाकरो पर कार्यवाही करने की जगह दलितों को ही  जेल में डाल दिया गया और उनकी जमानत  तक नहीं होने दी जा रही ई  भीम आर्मी के चीफ  चंदर शेखर  को एल में ही मारने की साजिश  रची जा रही है


 “””” सहारनपुर में हुई जातीय हिंसा का सचजाकिर चौधरी

उत्तर प्रदेश में जब से भाजपा की सरकार आई है तब से ऐसा लगता है जैसे सहारनपुर क्षेत्र को किसी की नज़र लग गयी हो। कुछ दिन पहले चिलकाना में सैनी समाज के कुछ उपद्रवी लोगों ने  दलितों पर हमला बोला। होली के अवसर पर राजपूतों और दलितों के बीच झगड़े की खबर आई थी। ताज़ा घटना को ध्यान में रखें तो सहारनपुर के ग्राम शब्बीरपुर में दलित, बाबा साहब अंबेडकर की प्रतिमा लगाना चाह रहे थे। इस स्थान पर क़ानूनी तौर पर अधिकार दलितों का ही है। इस गाँव के राजपूतों को दलितों द्वारा अम्बेडकर की प्रतिमा को लगाने तथा प्रतिमा का चबूतरा ज़्यादा ऊंचा बनवाए जाने से आपत्ति थी। इस कार्य को राजपूतों ने रुकवा दिया। दलितों में सहमति बनी कि इस कार्य को प्रशासन की अनुमति लेने के बाद ही शुरू कराया जाये। इसलिए कार्य वहीं  ठप्प हो गया।

इसके कुछ दिन बाद राजपूतों ने बिना अनुमति के महाराणा प्रताप के जन्मदिन यानि 9 मई को “शौर्य दिवस” का जूलुस निकाला। शौर्य दिवस मनाने की अनुमति तो प्रशासन ने एक पार्क में दी थी लेकिन जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी क्यूंकि कहीं न कहीं प्रशासन को भी किसी अनुचित घटना घटित हो सकने का अंदेशा था। शौर्य दिवस मनाने के लिया हरियाणा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के राजपूत समुदाय के लोग इकठ्ठा हुए थे. गैरकानूनी ढंग से जलूस निकालने के बाद राजपूत समुदाय के लोगों ने संत रविदास के मंदिर के सामने ऊँची और तेज़ आवाज़ में गाने बजाये। शोर शराबे पर जब दलितों ने आपत्ति जताई तो कहासुनी और झड़प हुई। उसके फलस्वरूप राजपूत समुदाय के लोगों ने संत रविदास मंदिर के अन्दर जाकर संत रविदास की प्रतिमा को क्षति पहुंचाई। इन सभी हरकतों और घटनाओं से आप अंदाजा लगा सकते है कि किस तरह से राजपूत समुदाय के लोग दलितों को डराने और उकसाने का प्रयास कर रहे थे।


इसी बीच जब झुण्ड का एक व्यक्ति प्रतिमा को तोड़कर मंदिर से बाहर आ रहा था तभी वह अचानक से चक्कर खाकर ज़मीन में गिरा और उसकी मृत्यु हो गई। यह बात पोस्ट मॉर्टेम रिपोर्ट में भी साबित हुई कि उस व्यक्ति की मृत्यु स्वतः हुई और उसके शरीर पर किसी भी प्रकार की चोट का कोई निशान नहीं पाया गया है।

एक स्थानीय निवासी के अनुसार झड़प शुरू होने के थोड़ी देर बाद लगभग दो हज़ार राजपूत इकठ्ठा हो गए। राजपूत समुदाय के लोग फ़ोन पर फ़ोन किये जा रहे थे और सभी लोग लाठी, तलवार और अन्य हथियारों से लैस थे। उनहोंने शब्बीरपुर के गरीब, असहाय और निहत्थे दलितों पर धावा बोल दिया और लगभग 30 घरों को जलाकर नष्ट कर दिया। इसी बीच दलितो में हाहाकार मच गया और वह किसी तरह अपनी जान बचा कर सुरक्षित स्थानों पर भागे। राजपूत समुदाय की जो भीड़ दलितों पर आक्रमण कर रही थी उसमें लोग “जय राजपूताना” के नारे लगा रहे थे साथ ही साथ यह भी कह रहे थे कि “जय भीम नहीं जय राजपूताना बोलना होगा।””””

 अब  चुकी  हर जगह दलितों  की  अनदेखी  की जा रही है   नौकरी में ब्राह्मण आयोग बना  सिर्फ ब्राह्मणों  को ही भारती इया जा रहा है  नर्सिंग घोटाला सामने आया है जिसमे ३ अंक और ८ अंक पाने वाले ब्राह्मणों  को  नौकरी  दी गई जबकि ५० अंक पाने वाले   दलितों  को नहीं  मिली

जब से भाजपा सरकार में आई है तब से गैर ब्राह्मणों  पर आतंक  की तलवार लटकी हुई  है
अब योगी ने एक सगुफा छोड़ा  है की  हर सरकारी  दफ्तर में अम्बेडकर  की मूर्ति लगेगी  यह ब्यान  अंत कुमार  हेगड़े  एक ब्राह्मण आतंकवादी के जिसने यह कहा था हम आये ही सविंधान बदलने है

वैसे भी अम्बेडकर की मूर्ति या तस्वीर लगाने से क्या होगा , एक तरफ  आप तस्वीर लगायंगे  दूसरी तरफ  दलितों की हत्या   और उनके हको  को छिनेंगे  इसे दोग्लापंती  कहते है    भाजपा और आर्य आतंकवादियो  का यह  डरपोक वाला ब्यान है ,  दरसल  ब्राह्मण  और  उसके समर्थक  विदेशी आतंकवादी  है जिन्हें जब तक देश से निकाला  नहीं जाएगा तब तक इस देश का भला नहीं होगा

After genocide of dlit in saharanpur , up yogi govt order to keep ambedkar photo in every govt office
Saharanpur  or any other place yogi  is the mastermind of saharanpur  caste riot wherein he permitted supported  the thakurs 


Tuesday, 12 December 2017

पुष्यमित्र शुंग / परशुराम गद्दार ब्राह्मण , जिसने की लाखो बौध लोगो की हत्या और स्थापित किया ब्राह्मणवाद


जन उदय : ये बात सब को बड़ी अजीब लगेगी की ऐसा कौनसा  समाज दुनिया में हो सकता है जो अपने ही समाज के लोगो  की हत्या , बलात्कार को  जायज समझता है  और बाकायदा इस उत्पीडन और हत्याओं को ये लोग धार्मिक जामा  पहनाते  है , और यह कहते है की इन्हें तो भगवान्  ने ऐसा करने के लिए  बनाया है , और यही नहीं शिक्षा सम्पति  और अधिकार से ये लोग वंचित रखते है .. ऐसे लोग क्या किसी सभ्य समाज के हिसा हो सकते है ??  नहीं शायद नहीं  ये बर्बर लोग है  जंगली लोग है जो इंसानियत  और मानवता को  न जानते है न समझते है   क्या आप जानते है  की ये लोग कौन है  ??  जी हाँ ये लोग  है ब्राह्मण

देश के सबसे बड़े गद्दार , देशद्रोही   साबित हुए  ये लोग आज भी दुसरे लोगो को शिक्षा , और मानवाधिकारों से वंचित रखना चाहते है  और अपना शासन  स्थापित करना चाहते है

सम्राट अशोक ने अपने राज्य में पशु हत्या पर पाबन्दी लगा दी थी, जिसके कारन ब्राह्मणों की रोजगार योजना बंद को गई थी, उसके बाद सम्राट अशोक ने तीसरी धम्म संगती में ६०,००० ब्राह्मणों को बुद्ध धम्म से निकाल बाहर किया था, तो ब्राह्मण १४० सालों तक गरीबी रेखा के नीचे का जीवन जी रहे थे, उस वक़्त ब्राह्मण आर्थिक दुर्बल घटक बनके जी रहे थे, ब्राह्मणों का वर्चस्व और उनकी परंपरा खत्म हो गई थी, उसे वापस लाने के लिए ब्राह्मणों के पास बौद्ध धम्म के राज्य के विरोध में युद्ध करना यही एक मात्र विकल्प रह गया था, ब्राह्मणों ने अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस लाने के लिए

अखण्ड भारत में मगध की राजधानी पाटलिपुत्र में अखण्ड भारत के निर्माता चक्रवर्ती सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक महान के पौत्र , मौर्य वंश के 10 वें न्यायप्रिय सम्राट राजा बृहद्रथ मौर्य की हत्या धोखे से उन्हीं के ब्राह्मण सेनापति पुष्यमित्र शुंग के नेतृत्व में ईसा.पूर्व. १८५ में रक्त रंजिस साजिश के तहत प्रतिक्रांति की और खुद को मगध का राजा घोषित कर लिया था ।

और इस प्रकार ब्राह्मणशाही का विजय हुआ।


उसने राजा बनने पर पाटलिपुत्र से श्यालकोट तक सभी बौद्ध विहारों को ध्वस्त करवा दिया था तथा अनेक बौद्ध भिक्षुओ का खुलेआम कत्लेआम किया था। पुष्यमित्र शुंग, बौद्धों व यहाँ की जनता पर बहुत अत्याचार करता था और ताकत के बल पर उनसे ब्राह्मणों द्वारा रचित मनुस्मृति अनुसार वर्ण (हिन्दू) धर्म कबूल करवाता था।

उत्तर-पश्चिम क्षेत्र पर यूनानी राजा मिलिंद का अधिकार था। राजा मिलिंद बौद्ध धर्म के अनुयायी थे। जैसे ही राजा मिलिंद को पता चला कि पुष्यमित्र शुंग, बौद्धों पर अत्याचार कर रहा है तो उसने पाटलिपुत्र पर आक्रमण कर दिया। पाटलिपुत्र की जनता ने भी पुष्यमित्र शुंग के विरुद्ध विद्रोह खड़ा कर दिया, इसके बाद पुष्यमित्र शुंग जान बचाकर भागा और उज्जैनी में जैन धर्म के अनुयायियों की शरण ली।

जैसे ही इस घटना के बारे में कलिंग के राजा खारवेल को पता चला तो उसने अपनी स्वतंत्रता घोषित करके पाटलिपुत्र पर आक्रमण कर दिया। पाटलिपुत्र से यूनानी राजा मिलिंद को उत्तर पश्चिम की ओर धकेल दिया।
इसके बाद ब्राह्मण पुष्यमित्र शुंग राम ने अपने समर्थको के साथ मिलकर पाटलिपुत्र और श्यालकोट के मध्य क्षेत्र पर अधिकार किया और अपनी राजधानी साकेत को बनाया। पुष्यमित्र शुंग ने इसका नाम बदलकर अयोध्या कर दिया। अयोध्या अर्थात-बिना युद्ध के बनायीं गयी राजधानी...

राजधानी बनाने के बाद पुष्यमित्र शुंग राम ने घोषणा की कि जो भी व्यक्ति, बौद्ध भिक्षुओं का सर (सिर) काट कर लायेगा, उसे 100 सोने की मुद्राएँ इनाम में दी जायेंगी। इस तरह सोने के सिक्कों के लालच में पूरे देश में बौद्ध भिक्षुओ का कत्लेआम हुआ। राजधानी में बौद्ध भिक्षुओ के सर आने लगे । इसके बाद कुछ चालक व्यक्ति अपने लाये सर को चुरा लेते थे और उसी सर को दुबारा राजा को दिखाकर स्वर्ण मुद्राए ले लेते थे। राजा को पता चला कि लोग ऐसा धोखा भी कर रहे है तो राजा ने एक बड़ा पत्थर रखवाया और राजा, बौद्ध भिक्षु का सर देखकर उस पत्थर पर मरवाकर उसका चेहरा बिगाड़ देता था । इसके बाद बौद्ध भिक्षु के सर को घाघरा नदी में फेंकवा दता था।

राजधानी अयोध्या में बौद्ध भिक्षुओ के इतने सर आ गये कि कटे हुये सरों से युक्त नदी का नाम सरयुक्त अर्थात वर्तमान में अपभ्रंश "सरयू" हो गया।
इसी "सरयू" नदी के तट पर पुष्यमित्र शुंग के राजकवि वाल्मीकि ने "रामायण" लिखी थी। जिसमें राम के रूप में पुष्यमित्र शुंग और "रावण" के रूप में मौर्य सम्राटों का वर्णन करते हुए उसकी राजधानी अयोध्या का गुणगान किया थ…


Brahmaan kingdom / dominance was established by Pushyamitr shung / Parshuram was the chief soldier of vrahdhasth  the grand son of  King Ashok in 180 BC ,  Pushymitr shung  killed millions of Boudhist People  demolished more then  90 thousand  Boudh Vihar and  Stupa and converte them into temple

Brahmins   nomads of Europe  and central asia originally came  to india in search of food and water  and a peaceful life but later  by  luring  local kings  giving them their daughters  they got  the place in courts of local king . but  they did as their original nature was , treachery , ungretfulness 

Saturday, 9 December 2017

ई वी एम् घोटाले में मोदी पर चलेगा देशद्रोह का मुकदमा ??

 देश में जिस तरह ई वी एम् घोटाले सामने आ रहे है उससे यह लगता है की भजपा ने लोकतंत्र की हत्या कर दी  है २०१४ के लोकसभा  चुनाव में  वैसे ऐसा कोई चोंकाने वाला  नहीं था सिवाए  इसके की भाजपा ने अपने बल  पर सरकार बना ली  ये ३२५ सीट  जीत ली , हलांकि सी वक्त मायावती  ने इस बात का ऐलान  कर दिया था कि  चुनाव में गड़बड़ी  हुई है  . लेकिन समाजवादी पार्टी और लालू प्रसाद  यादव को छोड़ मायावती जी का समर्थन किया  और बात बहुत आगे तक यानी चुनाव आयोग की विश्व्स्वनियता  गई लेकिन चुनाव आयोग ने मात्र  गुमराह किया देश की जनता को .

इसके बाद   दुबारा , उत्तर प्रदेश , हिमाचल आदि में चुनाव हुए  और ई वी एम् की गड़बड़ी फी खुल कर सामने आई  यहाँ तक की मायावती ने बसपा से जीते  दो मेयर  की इस्तीफे भी दिलवा दिए  लेकिन कमाल की बात यह  निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की आत्मा है लकिन भाजपा ने इस आत्मा की भी हत्या कर दी और  देखिये की इस बात पर कही कोई चर्चा नहीं यहाँ तक की सुप्रीम कोर्ट  भी चुप बैठा  है , वैसे सुप्रीम कोर्ट को  यह मालूम है कि  कौन कहा हगेगा लेकिन   यह नहीं मालूम की चुनाव में ई वी एम्  अपना नृशंस  खेल खेल रही है

देश का  का लोकतंत्र खतरे में है इसके प्रमाण हर चुनाव में उबर कर सामने आ रहे है ९ दिसम्बर २०१७ को जब गुजरात में चुनाव हुए तो दो बात विशेष रूप से सामने आई ई वी एम् की पहली  ये वाई फाई  से कनेक्ट हुई बल्कि गड़बडियो  की एक लम्बी फेहरिस्त   सामने आ गई  यही नहीं सबसे बड़ा कमाल तो यह रहा की  दोपहर  दो बजे तक गुजरात में सिर्फ ३० प्रतिशत  वोटिंग  हुई लेकिन दो बजे से लेकर चार बजे के बीच  ६० प्रतिशत  वोटिंग हो गई ये सिर्फ दो घंटे में ३० प्रतिशत  वोटिंग  यह अपने अप में चकित करने वाली बात है

अब यह अनुमान लगाए जा रहे है की जो भाजपा  गुजरात , मध्य प्रदेश , छत्तीसगढ़ में चुनाव जीतती आ रही थी वे भी ई वी एम् की मेहरबानी से थे ,

अब मुद्दे की बात यह है की  अगर यह साबित हो जाए की भाजपा ने अब तक जो भी चुनाव जीते  वे सब ई वी एम् मैनेज करके जीते  तो क्या भाजपा क नेताओं को सजा होगी , होगी तो कितनी , किस कानून के तहत , या इसको सिर्फ और सिर्फ देशद्रोह  माना जाए ??


क्या भाजपा की एक पार्टी की तरह मान्यता रद्द की जाएगी और इस षड्यंत्र में शामिल सभी लोगो पर देशद्रोह का मुकद्दमा   चलेगा ?/ विशेषकर नरेंदर मोदी पर जो  इस जमात का पूरा सरदार है   

Tuesday, 5 December 2017

आरक्षण की भीख मांगते है ब्राह्मण विदेशो में , भारत में करते है विरोध :


जन उदय : सामाजिक , आर्थिक विषमता पुरी दुनिया में है चाहे वो साम्यवादी देश ही क्यों न हो कही प्रांत के नाम पर , कही लिंग के आधार पर विषमता आपको जरूर मिलेगी , लेकिन सामाजिक स्तर पर यह विषमता भेदभाव का कारण बनी , ताकतवर और अमीरों ने गरीबो और कमजोरो को अपना शिकार बनाया .

भारत में यह सामाजिक विषमता जाति के आधार पर आई , कुछ जाति समाजो ने अपने आपको भगवान का प्रतिनिधि घोषित कर दिया और बता दिया की उन्हें भगवान् ने भेजा है वो भगवान् की सन्तान है और ये भेदभाव भगवान् का आदेश है , सुनने से ही बड़ा बुरा लगता है , लेकिन इसी विचार के साथ समाज आगे बढता रहा और गरीब और गरीब होते रहे , कमजोर और भी कमजोर होते रहे , जाति के आधार पर बना अत्याचार बढता रहा यहाँ तक की अत्याचार की सारी हदे पार कर गया ,

आजादी के बाद भारत में इन जातिओ और पिछड़े समूहों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए आरक्षण का इस्तेमाल किया लेकिन जो लोग पहले से ही सामाजिक राजनेतिक सत्ता में थे उन्होंने सामाजिक उत्थान के सारे प्रयासों को विफल कर दिया , व्यापम जैसे घोटाले पहले भी होते रहे लेकिन सामने न आये , इन अगड़े समाजो ने इमानदारी के नाम पर सबको लूट लिया भारत में आरक्षण आज भी है लेकिन फायदा न के बराबर है ..
भारत के समृद्ध उच्च जाति के लोग विदेशो में भी रह रहे है और हर साल लाखो के संख्या में नौकरी शिक्षा की खोज में भारतीय लोग विदेश जाते है , और यही नहीं भारी संख्या में वहा बस भी गए है , इंग्लैंड , कनाडा , अमरीका आदि देशो में भारतीय लोगो की संख्या भारी मात्रा में है , कनाडा में तो पंजाबी को तीसरी राजिकीय भाषा का दर्जा मिल गया है . लेकिन ये सब इतनी आसानी से नहीं हुआ है इसके लिए भारतीय लोगो ने संघर्ष किया है यानी यूरोपीय देशो में , अमरीका में , कनाडा में भारतीय लोगो ने डाइवर्सिटी या आरक्षण , एम्प्लॉयमेंट इक्विटी की मांग की , और अपने लिए तरह तरह के आरक्षण मांगते रहे है .


कमाल की बात है ये वही भारतीय है और उन्ही समाजो से आते है जो लोगो भारत में सदीओ से पिछड़ी , और सामाजिक रूप से उत्पीडित जातिओ के खिलाफ लागातार ज़हर उगलते है , आरक्षण को हटाने की मांग करते है , जाति के नाम पर हत्या गरीबो की हत्या अपना धर्म समझते है लेकिन वाही लोग विदेशो में जाकर आरक्षण की मांग क्यों करते है ??

किसी भी समाज या देश का भला तभी होगा जब उसका हर नागरिक आगे होगा उसका विकास होगा , केवल सेंक्सेस के उपर जाने से देश उपर नहीं जाता , केवल औसत आय के बड जाने से देश आर्थिक रूप से सम्पन्न नहीं हो जाता , ये समझने की जरूरत है


भारत में आरक्षण होते हुए भी केवल ब्राह्मण ही ७९ % सीट पर बैठा है जबकि इनकी संख्या केवल ३ % है , यह बात भी वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हो चुकी है की ब्राह्मण विदेशी हमलावर है और इसने यहाँ के मूलनिवासियो को धार्मिक अंधविश्वास और धोखे से मानसिक गुलाम बना लिया . खैर आरक्षण का विरोध करने वाले जान ले की यही ब्राह्मण विदेशो में कैसे आरक्षण मांगते है और कैसे इनको दिया जाता है

दुनिया के निम्नलिखित देशो में मिलता है आरक्षण (Reservation/Affirmative Action):-
आजकल देश में दलित (OBC, SC & ST) आरक्षण के विरोध मे आंधी सी चल रही है। आरक्षण के खिलाफ बेहूदे और बेतुके तर्क किये जाते है। सबसे पहला तर्क होता है कि दूसरे देशो मे आरक्षण नहीं दिया जाता इसलिये वे देश हमसे ज्यादा प्रगितिशील है जो बिल्कुल गलत है। विदेशो मे भी आरक्षण की पद्धति है। अमेरिका, चीन, जापान जैसे देशों में भी आरक्षण है और इसे ईमानदारी से दिया जाता है।

बाहरी देशों में आरक्षण को Affirmative Action कहा जाता है। Affirmative Action का मतलब समाज के "वर्ण " तथा "नस्लभेद" के शिकार लोगो के लिये सामाजिक समता का प्रावधान है ।
1961 को संयुक्त राष्ट्र की बैठक मे सभी प्रकार के वर्ण, नस्लभेद व रंगभेद के खिलाफ कड़ा कानून बनाया गया। इसके तहत संयुक्त राष्ट्र में सम्मिलित सभी देशो ने अपने देश के शोषित वर्ग (दलित) की मदद करके उन्हें समाज की मुख्य धारा मे स्थापित करने का निर्णय लिया। इसी फैसले के तहत ही शोषितों और वंचितो को उठाने के लिए अलग अलग देशो ने अपने अपने तरीके से आरक्षण लागु किया है।

ऊपर कहे गए देश अमेरिका, जापान और भारत के अलावा अन्य देशो ने भी आरक्षण दिया है जिन मे से कुछेक निम्नलिखित हैं :-

1. हमारे पडोसी देश पाकिस्तान मे बडी मुश्किल से 5% दलित हैं लेकिन उन्हें ईमानदारी से 6% आरक्षण दिया जाता है।
2. आरक्षण के कारण दक्षिण अफ्रीका टीम में 4 अश्वेत खिलाडियों का चयन जरूरी होता है।
3. अमेरिका में affirmative action) के तहत अश्वेतों को आरक्षण मिला हुआ है। वहां की पिक्चरों में भी अश्वेत कलाकारों का आरक्षण निर्धारित है। वहाँ कोई पिक्चर या विभाग ऐसा नहीं मिलेगा जिसमें अश्वेत/काले न हो। अमेरिका ने तो आज से 155 साल पहले 4 मार्च, 1861 को दलित (अब्राहम लिंकन) को अपना राष्ट्रपति बना दिया था। अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति बराक ओबामा भी एक अश्वेत, मुस्लिम और छोटे तबके के हैं।तभी तो अमेरिका तरक्की की दुनिया में अन्य देशों से काफी आगे हैं। भारत में तो सम्पूर्ण हिस्सेदारी पर कुछे लोग कुंडली मारकर कब्जा जमा रखा है.. इसीलिये वे समाज मे भ्रांति फैलाने के लिए आरक्षण/
हिस्सेदारी का आऐ दिन विरोध करते रहते हैं।
4. ब्राझील में आरक्षण Vestibular नाम से जाना जाता है ।
5. कनाडा में समान रोजगार का तत्व है जिसके तहत फायदा वहाँ के असामान्य तथा अल्पसंख्यकों को होता है ।
6. चीन में महिला और तात्विक अल्पसंख्यको के लिये आरक्षण है ।
7. फिनलैंड मे स्वीडीश लोगो के लिये आरक्षण है ।
8. जर्मनी में जिमनॅशियम सिस्टम है ।
9. इसरायल में Affirmative Action के तहत आरक्षण है ।
10. जापान जैसे सबसे प्रगतिशिल देश में भी बुराकूमिन लोगो के लिये आरक्षण है (बुराकूमिन जापान के हक वंचित दलित लोग हैं )
11. मॅसेडोनिया में अल्बानियन के लिये आरक्षण है ।
12. मलेशिया में भी उनकी नई आर्थिक योजना के तहत आरक्षण लागू हुआ है ।
13. न्यूजीलैंड में माओरिस और पॉलिनेशियन लोगो के लिये Affirmative Action का आरक्षण है ।
14. नॉर्वे के पीसीएल बोर्ड मे 40 % महिला आरक्षण हें।
15. रोमानिया मे शोषण के शिकार रोमन लोगों के लिये आरक्षण है ।
16. दक्षिण आफ्रिका मे रोजगार समता (काले गोरे लोगो को समान रोजगार) आरक्षण है ।
17. दक्षिण कोरिया मे उत्तरी कोरिया तथा चीनी लोगों के लिये आरक्षण है ।
18. श्रीलंका मे तमिल तथा क्रिश्चियन लोगो के लिये अलग नियम अर्थात आरक्षण है ।
19. स्वीडन मे General Affirmative Action के तहत आरक्षण मिलता है ।
अगर इतने सारे देशों में आरक्षण दिया जाता है (जिनमे कई विकसित देश भी शामिल है) तो फिर भारत का आरक्षण किस प्रकार भारत की प्रगति में बाधक है। भारत में तो लोग सबसे ज्यादा जातिभेद के ही शिकार हैं । भारतीय शुद्रो/दलितो को तो हजारों सालों से उनके मौलिक अधिकारों से ही वंचित कर गुलाम बना कर रखा। तो फिर भारतीय दलितो को आरक्षण क्यों न मिले?
जब तक भारत के सभी जाति धर्म के लोग शिक्षा, सेना, सभी प्रकार की नौकरी, संसाधन तथा सरकार में समान रुप से प्रतिनिधित्व नहीं करेंगे , तब तक देश वांछनीय प्रगति नहीं कर पाएगा। अगर सभी देश प्रगति के लिए सभी लोगों को साथ लेकर चल रहे हैं तो फिर भारत क्यों नहीं।