Apni Dukan

Friday, 22 April 2016

जानिये क्यों : 93.85 % लडकिया शादी तय होते ही फेसबुक अकाउंट बंद और फोन नम्बर बदल लेती है : सर्वे

जन उदय : भारतीय समाज चाहे जितना मर्जी आगे बढ़ गया हो लेकिन यहाँ के पोराणिक  और घटिया संस्कार जो हमें धर्म ग्रंथो और ब्राह्मणवादी समाज से मिलते है वो कभी नहीं बदलते हम आज भी एक घटिया  मानसिकता के साथ जीते है और अपने आपको सार्वजनिक रूप से अपने आपको बढ़ा ही प्रगतिशील और मॉडर्न दिखाने की कोशिस करते है लेकिन अंदर से  जानवर ही होते है

हमारी मानसिकता और मूल्य हमेशा दोहरे मापदंड पर आधारित होते है मर्दों के लिए कुछ और
इसलिए शादी से पहले और शादी के बाद हमारे यहाँ लड़के लडकियो की सौच बहुत अलग होती है , जो लड़की लड़के को शादी से पहले जींस, टॉप , स्कर्ट में अच्छी लगती है

 और खुल कर दोस्तों से बात करने अच्छी  लगती है  वही  लड़की शादी के बाद अगर शादी से पहले के लडके दोस्तों से बात करे तो लड़के के मन में शक आ जाता है  यह बात उसको बिलकुल गवारा नहीं होती की उसकी बीवी किसी गैर मर्द से फोन पर बात करे  या मिले

भारतीय लडकिया भी इस मामले में अब काफी उस्ताद हो गई है वो विरोध का रास्ता न अपना कर ट्रिक का या समझोते का रास्ता अपनाती है यानी शादी से पहले फेसबुक , व्हाट्सअप  आदि पर खूब जोक शोक करती है लेकिन जैसे ही उनकी शादी तय होती है और लड़का लड़की को एक दुसरे का नम्बर मिलता है वैसे ही लड़की अपना फेसबुक अकाउंट बंद कर देती है और नम्बर बदल देती है कारण ?? लड़की अपनी शादीशुदा जिन्दगी में कोई खलल नहीं चाहती और नहीं चाहती की शादी से पहले का कोई लड़का फ्रेंड उसके निजी जीवन  के किसी भी दुःख का कारण बने


देश के छ महानगरो में २५-३५ उम्र की शादी शुदा ३००० महिलाओं पर यह सर्वे किया गया और सबने यही माना की फेसबुक और पुराना  नम्बर किसी दुःख का कारण  बन सकता है इसलिए उन्होंने   फेसबुक बंद किया  और नम्बर  बदल लिया सिर्फ ६.१५ % लडकियो ने कहा  की न तो उन्होंने अपना नम्बर बदला और न ही फेसबुक बंद किया   जो है सब सामने है  किसी को अच्छा लगे या न लगे 

धर्म के नाम पर अय्याशी और वेश्यावृति करने के लिए पानी है लेकिन गरीबो की जान बचाने के लिए नहीं ,सिंघ्स्थ कुम्भ , देश से गद्दारी और देशद्रोह है


जन उदय : धर्म के नाम पर इस देश में दंगे होते है , लोगो की जिन्दगी छिनी जाती है ,उनके मूह से निवाला  छिना  जाता है , उनसे शिक्षा छिनी जाती है  यह कोई नई बात नहीं और वाही वो रहा है मध्य प्रदेश  में , कुम्भ के नाम पर नदी का लाखो लीटर पानी उन नंग धडंग साधू के नाम पर दिया गया है अ  जो अपने जिन्दगी में तो समाज और  परिवार के भगोड़े है ही साथ ही देश के दुश्मन बने हुए है

यह बात देखनी की है की मध्य प्रदेश से सटे राज्य महाराष्ट्र में इस कद्र सुखा पड़ा  है की वहा पानी के लिए लड़ाइया हो रही है  और देश के नेता अपनी अपनी जाती के लिए पानी की वाव्य्स्था करवा रहे है

उसकी ख़ास बात यह भी है की सरकारी पानी केवल उन जगह पर भिजवाया जा रहा है जहा पर सवर्ण बाहुल्य  में है अहा दलित है वहा नहीं

यह बात भी ध्यान रखने की है खुद मध्य प्रदेश भी सूखे से प्रभवित है और पिछले कई सालो से लेकिन मानसिक रूप से विकृत  मुख्यमंत्री पिछले साल भी पानी के लिए यग्य करवा रहा था , शिवराज सिंह चोहान  जैसे लोग जिनका मानसिक इलाज किसी पागलखाने में चलना चाहिए  जो पानी की वाव्य्स्था न करके यग्य और कुम्भ जैसी चीजो पर लाखो करोडो रूपये खर्च कर रहे है 


जितना पैसा और पानी कुम्भ पर खर्च हो रहा है उससे  महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में पानी की कमी को दूर किया जा सकता है लेकिन धर्म के नाम पर गुमराह करने वाले , धर्म के नाम पर शाजिस करने वाले दंगा करने वाले इन संघी लोगो को कुछ दिखाई नहीं देता 

जानिये क्या है देश की सबसे बड़ी समस्या “”ब्राम्हणवादी आतंकवाद”” राज आदिवाल

देश में जितने भी जगह बम ब्लास्ट हुए वे सारे के सारे आरएसएस या आरएसएस से जुड़े लोगो ने यानि ब्राम्हणो ने ही करवाए। असित चटर्जी उर्फ़ असिमानद ने कन्फेशन में कहा की देश भर में जितने बं ब्लास्ट हुए वे सारे के सारे आरएसएस ने ही करवाए !! मगर सत्ता में बैठी कांग्रेस ने उन सारे आतंकवादियों को बचाया क्यों की मोहन भागवत  को वह बचा रहे थे !कांग्रेस ने ही तो आरएसएस को १९२५ में पैदा किया था ना  !कांग्रेस बीजेपी आरएसएस कम्युनिस्ट ब्राम्हणो डीएनए एक ही है !!

सन २००८ को जब मालेगाव बम  ब्लास्ट की जाँच करकरे ने शुरू की तब उन्हें लेफ्टनत कर्नल प्रसाद पुरोहित और दयानन्द पांडे  के पास से ३ लैपटॉप जप्त किये गए।  उसमे मिली जानकारी यह ब्राम्हणी राज  ब्लू प्रिंट था।


उसमे आरएसएस के द्वारा ही चलाये जा रहे अभिनव भारत के असंख्य गुप्त मीटिंग्स के वीडियो , ओडिवो रिकॉर्डिंग थे।  उसके अनुसार उन ब्राम्हणी आतंकवादियों  मीटिंगे delhi ,जम्मू,कलकत्ता ,फरीदाबाद,भोपाल,इंदौर ,जबलपुर,नासिक ,पुणे ,देवळाली इन  पर गुप्त मीटिंगे  हुयी !उन ३ लैपटॉप में ४८ पार्ट है जिसमे २४ विडीवो और २४ ओडिवो  है। उसमे से केवल ४ या ५ भागो का ही सामने जिक्र आता  है बाकी ढेर सारी  बाते सामने अभी तक आयी  नहीं है। वह सब जानकारी सामने नहीं आयी  है अगर वह आती है तो ३ प्रतिशत ब्राम्हणो को जेल में डाला  जायेगा या फिर उन्हें जनता ही चौक चौराह पर लाकर  मार डालेंगी यह चिंता ब्राम्हणो को है।

भारत में छाहे कांग्रेस आये  या बीजेपी, कम्युनिस्ट  ब्राम्हणो के होने के कारण  ब्राम्हणी आतंकवाद को बढ़ावा देते है क्यों की इसी से ३ प्रतिशत ब्राम्हणो का भारत पर और लोकतंत्र पर नाजायज कब्जा हो जाता है। जो भी जाँच एजंसियां है उनमे भी ब्राम्हण  उन्ही  नियंत्रण है !  नाजायज तरीके से कब्ज़ा किया है। आयबी  और एटीएस ,NIA पर भी विदेशी ब्राम्हणो ने कब्ज़ा  किया है।  २६ - ११ का जो हमला हुआ था उसमे आरएसएस का भी हाथ था और इसी में जो मालेगाव बम  ब्लास्ट की तहकीकात कर  रहे अधिकारियो की हत्याए  भी कर दी गयी और इस काम के लिए कांग्रेस ने आरएसएस को मदत किया !! कांग्रेस के ब्राम्हण कितने महान  होगे इसकी आप कल्पना करो !!

कई जगह पर बम ब्लास्ट हुए उसमे से १७ जगह के बम  ब्लास्ट के मामले के चार्ज शीट कोर्ट में दायर हुए है वे सारे के सारे आरएसएस पर हुए है।  न्यायपालिका में बैठे ब्राम्हण क्या आतंकवादियों का समर्थन कर रहे है ?जानकारी सामने आयी  है पुरोहित को बचाया जा रहा है !! क्लीन चिट  दी जा रही है !! शेम शेम !!

क्या हम भारत में रहते है ? क्या भारत में लोकतंत्र है ?
उन १७ जगह की कोर्ट में दायर  चार्ज शीट  अनुसार आरएसएस आतंकवादी ब्राम्हणो  संघठन है  जानकारी :
आरएसएस , अभिनव भारत और वन्दे  मातरम के ब्राम्हणो ने किये बम  ब्लास्टः
१ अजमेर शरीफ ,राजस्थान २००६
२ मक्का मस्जित ,आंध्र प्रदेश ,हैदराबाद २००६
३ समझौता एक्सप्रेस २००६
४ मालेगाव , महाराष्ट्र २००६
५ मालेगाव महाराष्ट्र २००८
६ मोडासा ,गुजरात २००८
आरएसएस और बजरंग दलों के द्वारा किये गए बम  ब्लास्ट :
७ नांदेड़ ,महाराष्ट्र २००६
८  परभणी ,महाराष्ट्र २००३
९  जालाना , महाराष्ट्र २००४
१० पूर्णा  , महाराष्ट्र २००४
११ कानपुर , उप , २००८

आरएसएस  के द्वारा किये गए बम  ब्लास्ट
१२ कन्नूर , केरल , २००८
१३ तेन काशी , तमिलनाडु २००८
१४ पनवेल , महाराष्ट्र, २००८
सनातन संस्था  के द्वारा किये गए बम  ब्लास्ट :
१५ ठाणे महाराष्ट्र , २००८
१६ वाशी , नवी मंबई , महाराष्ट्र
१७ मडगाव , गोवा , २०१०
अब इन बम  ब्लास्ट में शामिल ब्राम्हणो की लिस्ट :
१ सुनील जोशी  - मऊ  , मध्य प्रदेश का आरएसएस का प्रचार प्रमुख  १९९०  से २००३
२ संदीप डांगे - आरएसएस का प्रचार प्रमुख :शाजापुर , मध्य प्रदेश , २००५ से २००८
३ देवेन्द्र गुप्ता जामताड़ा झारखण्ड का आरएसएस का जिला प्रचार प्रमुख
४ लोकेश शर्मा -आरएसएस का नगर कार्यवाहक देवगढ़।
५ चंद्रकांत लावे - आरएसएस का जिला  प्रचार प्रमुख :शाजापुर , मध्य प्रदेश , २००८ से २०१०
६  स्वामी असिमांंनन्द - आरएसएस का सबसे पुराना और सर्वोच्च नेता। 
७ राजेंद्र उर्फ़ समुन्दर - आरएसएस वर्ग विस्तारक।
८ मुकेश वासनी -गोधरा का आरएसएस का कार्यकर्त्ता
९ रामजी कालसांगरा - आरएसएस का कार्यकर्त्ता
१० कमल चौहांन - आरएसएस का कार्यकर्ता
११ साध्वी prdnya  सिँघ  ठाकुर , आरएसएस की कार्यकर्ता जो वन्दे  मातरम और अभिनव भारत से जुडी है !
१२ राजेंद्र चौधरी उर्फ़ रामबालक दास -आरएसएस का कार्यकर्ता
१३ धन सिंह उर्फ़ लक्ष्मण - आरएसएस का कार्यकर्ता
१४ राम मनोहर कुमार सिंह
१५  तेज राम उर्फ़ रामजी उर्फ़ रामचन्द्र कालसांगरा - आरएसएस का कार्यकर्त्ता
१६  संदीप उपाध्याय उर्फ़ संदीप डांगे  - आरएसएस
१७ सुनील जोशी - आरएसएस
१८ राहुल पाण्डे  - आरएसएस
१९ डॉ उमेश देशपांडे - आरएसएस
२० संजय चौधरी
२१ हिमांशु पानसे -
२२ रामदास मुलंगे
२३ नरेश राजकोंडावर
२४ योगेश विदुलकर
२५ मारुती वाघ
२६ गुरुराज तुप्तेवर
२७ मिलिंद एकबोटे
२८ मलेगोंडा पाटिल ( जो गोवा में बम  ब्लास्ट के साथ ही मारा  गया , यह पिछड़े वर्ग का है और उसका इस्तेमाल आरएसएस ने किया )
२९ योगेश नाईक
३०  विजय तलेकर
३१ विनायक पाटिल
३२ प्रशांत जुवेकर
३३ सारंग कुलकर्णी
३४ धनजय  अष्टेकर
३५ दिलीप  मंगोंकर
३६ जयप्रकाश उर्फ़ अन्ना
३७ रूद्र पाटिल
३८ प्रशांत अष्टेकर
३९ रमेश गडकरी -सनातन संस्था
४० विक्रम भावे - सनातन संस्था
   पिछले साल आरएसएस ने मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में भी बम  ब्लास्ट किया था जिसमे २०० से ज्यादा लोग टमाटर की तरह फटकर  मारे गए।  mp  में बीजेपी आरएसएस की सत्ता है उस मसले को आरएसएस ने दबाया !

 देश भर में आरएसएस बम  ब्लास्ट कर रही है। 

भारत में एक भी राजनैतिक दल  इन विदेशी ब्राम्हणो को आतंकवादी तक कहने को डरता है।

Thursday, 21 April 2016

आर एस एस के सीक्रेट एजेंट है नितीश लालू और मुलायम , कर रहे है शुद्र और मुसलमानों का सर्वनाश

जन उदय : कुछ लोगो को लगता है की आर एस एस का कार्यालय सिर्फ नागपुर में है और ये लोग वही से सारी देशविरोधी गतिविधिया चलाते है , दरसल ऐसा नहीं है  पहले आर एस एस के मक्कड़ जाल को समझना होगा आर एस एस  ने अपने एजेंट सभी पार्टियो में छोड़े हुए है चाहे वो वामपंथी हो या कांग्रेस   वैचारिक स्तर पर ये लोग उपरी तौर  पर ऐसा दिखाते है की जैसे आर एस एस के दुश्मन हो लेकिन अंदर ही अंदर ये सब आर एस एस  के सबसे बड़े समर्थक है और उसकी विचारधारा को ही आगे बढाते है ,
ऐसा आर एस एस और ब्राह्मणवादी करने पर क्यों मजबूर हुए . दरसल इनके सामने समस्या थी  शुद्रो की जिनका नेत्रत्व  बाबा साहेब कर रहे थे और उनके अधिकारों के लिए लड़  रहे थे , दूसरी समस्या  थी मुस्लिम की  जो जनसँख्या में काफी  जयादा है ,
यह बिल्किल सम्भव न हो पाया की सारे मुसलमान पाकिस्तान चले जाए सो येंके गले की हड्डी बन गए  अब  शुद्र और मुस्लिम  इन सभी के दिमाग में  ये ही टारगेट बन गए

समय समय  पर दंगे होते रहे , लोहे को लोहे से काटा जाता रहा यानी शुद्रो को हिन्दू बना कर मुस्लिम से लड़वाते रहे और मारते रहे  और मुस्लिम करते रहे  और यही नहीं सेक्लुरिस्म के नाम पर भी संघी दूकान चलाते  रहे , मुस्लिम शुद्र को मारता रहा और शुद्र मुस्लिम को  , कमाल की बता यह थी की इन हजारो दंगो में आजतक दस  स्वर्ण या ब्राह्मण नहीं मारे गए है लेकिन ये दोनों जानवर कौम आज तक इस बात को समझ ही नहीं पाई

इसके बाद इन दोनों का खेल अजीब तरीके से चालु हुआ ७० के दशक में एक मनुवादी के जरिये ही  जिसे जे पी आन्दोलन कहते है  इस आन्दोलन से तीन गुर्गे निकले  मुलायम , लालू  और नितीश

इन तीनो ने समाजवाद और एकता समानता के नाम पर इन दोनों कौमो को  यानी शुद्र और मुस्लिम को बेवकूफ बनाना  शुरू कर दिया ,

कमाल की बात यह है की इन तीनो के काल में बिहार यु पी में  हजारो दलितों के कत्ल हुए , उनके गाव   जलाए  गए  दिन रात  शुद्रो  का शोषण होता रहता है  हालात  यह है की दलितों की जमीन छीन कर   सवर्णों में बांटी जा रही है लेकिन कोई सुनवाई नहीं


सिर्फ गरीब कमजोर को मार कर बहादुर बनते है ब्राह्मणवादी ,असल में इनका इतिहास डरपोक ,देशद्रोह और गद्दारी का है

जन उदय : भारत का पूरा इतिहास उठा कर देख ले वो भी वो जो सच है न की काल्पनिक कहानिया ,सवर्ण ,ब्राह्मणवादी लोग जो बहादुर बनते है और अपनी  बहादुरी गरीब ,कमजोर निहत्थे लोगो को मार कर दिखाते है ये दरअसल एक नम्बर के डरपोक , देशद्रोही और गद्दार रहे है ,

इनकी बहादुरी के किस्से  पृथ्वीराज चोहान  की काल्पनिक कहानियाओ से शुरू होती है जिसमे ये अपने आपको बहादुर बताते है , लेकिन इसका सच यह है की  गौरी ने बिना देर किये चोहान की गर्दन काट दी थी और उसको ले जाकर दीवार में चिनवा  दिया था
इसके बाद मुस्लिम शासको का सिलसिला जारी रहा जिनके चलते  ये बहादुर लोग  उनके दरबारों में नौकरी करने लगे और ब्राह्मणों ने अपना पूरा पूरा साथ मुस्लिम शासको को दिया और उनसे बदले में मांग की वो भी यानी ब्राह्मण भी उनकी तरह विदेशी हमलावर है इसलिए इनको ज़जिया कर से मुक्त किया जाए , और उनसे मांग की  शुद्र उनके गुलाम है  इसलिए इस ताने बाने को बना रहने दिया जाए . सो मुस्लिम शासको को इस बात से कोई सरोकार न था इसलिए उन्होंने समाज के इस ताने बाने पर कोई ध्यान न दिया  , इसकी एक वजह यह भी रही की ये ब्राह्मण और अन्य सवर्ण मुस्लिम  राजाओं को  मनोरंजन और शादी के लिए अपनी समाज की और परिवार की लडकियो को पेश करते थे .

और यह सिलसिला फिर सैंकड़ो साल चलता रहा हर म्सुलिम शासक , मुग़ल शशक के दरबार में  ब्राह्मण और अन्य स्वर्ण मजे करते रहे मानसिंह ,  पुरनिया पंडित ऐसे   हजारो नाम है

एक नाम और आता है राणा प्रताप का मुग़ल काल में जिसे  ब्राह्मण और जातिवादी लोग बहुत बहादुर बताते है यहाँ तक की उसके घोड़े को भी महान बताते है ,जब असल में यह हुआ की एक हिन्दू  यानी मानसिंह को अकबर ने भेजा और यह बहादुर  डर कर जंगलो में छिप  गया और जब तक बहार नहीं आया जब अकबर ने मेवाड़ की तरह ध्यान देना छोड़ दिया , और राणा आकर   चार सैनको को मार कर   वहा शासन करने लगा

अंग्रेजो के आने के बाद ब्राह्मण इनके भी समीप रहे  और शासन करने में इनकी मदद करते रहे  मात्र  ६५ हजार अंग्रेज  ४० करोड़ से जयादा की जनसंख्या वाले इस देश  पर शासन इसलिए करते रहे क्योकि यहाँ केलोग यानी ब्राह्मण और स्वर्ण इनके साथ थे , पुलिस , प्रशासन , आदि में  १७ आई सी एस अफसरों में  हर बार  १६   अफसर  ब्राह्मण ही होते   थे , और बाकी जातिओ के लोग सेना  और अन्य सेवा में


ब्राह्मण देश देश चिल्लाते  रहे लेकिन देश के नाम पर देश को ये आजादी के नाम पर भी ठगते  आ रहे है ,जातिके नाम पर हर साल हजारो कत्ल , बलात्कार  ये लोग करते है , आदिवासिओ का जीना मुस्ल्किल  किया हुआ है



सरकार कानून इनके लिए कुछ भी नहीं ये सिर्फ आतंक फैला  रहे है अपना और वो भी सिर्फ उन्ही लोगो को मारते है जहा पर दलित लोग कमजोर और  गरीब  है अनपढ़ है , गरीबो की जमीने छीन ले रहे है ,टोला  बथानी ,  और ऐसी  हजारो घटनाए है अहा पर पुरे के पुरे गाव दलितों के जला दिए गए लेकिन कोई सुनवाई  नहीं 

ब्राह्मण आतंकवादियो के अच्छे दिन शुरू : धीरे धीरे छूट रहे है जेल से : राज आदिवाल

अब तो मैं बड़े जोर से कहूंगा सबसे बड़े आतंकवादी ब्राम्हणवादी ब्राम्हणवादी !!मोहन भागवत ने आरएसएस के ब्राम्हणो को बम ब्लास्ट के काम पर लगाया अब बीजेपी आरएसएस की सत्ता आयी है तो उन आतंकवादी ब्राम्हणो को मोहन भागवत केवल बचा ही नहीं रहा है तो उन्हें महानता की खिताब भी दिया जा रहा है।मैं इस बात की कड़ी आलोचना करता हु !!इस तरह अगर हो रहा है तो देश में ब्राम्हणो को रहना मुश्किल हो सकता है !!इसी कर्नल प्रसाद पुरोहित ने गुप्त मीटिंग लेकर कहा था की हमें इस देश से भारत संविधान खत्म करके मनुस्मृति का राज लाना है !!

ब्राम्हण आतंकवादी है यह बात प्रमाणित हुयी !!न्यायपालिका में भी ब्राम्हण बैठे है ,ब्राम्हणो का जुडिशियल कैरक्टर नहीं होता इस लिए ब्राम्हण न्याय पालिका में ब्राम्हण नाते बैठने लायक नहीं है !निकलो बाहर मकानों जंग लढो बेईमानो से !!भारत मुक्ति मोर्चा लड़ेगा देशव्यापी आंदोलन !!जय मूलनिवासी !!देखे खबर :समझौता ब्लास्ट मामले में लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को NIA ने दी क्लीन चिटअंतिम अपडेट: बुधवार अप्रैल 20, 2016 समझौता ब्लास्ट मामले में लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को NIA ने दी क्लीन चिट लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित

नई दिल्ली: मालेगांव धमाकों के आरोपी कर्नल पुरोहित को एनआईए ने समझौता एक्सप्रेस में हुए धमाके के मामले में क्लीन चिट दे दी है। बताया जा रहा है कि मालेगांव में भी एनआईए की जांच सवालों से घिरी है। एनडीटीवी को मिली जानकारी के मुताबिक, कर्नल पुरोहित को समझौता धमाके में क्लीन चिट दे दी गई है। एनआईए के डीजी का कहना है कि पुरोहित का नाम कभी इस मामले में आया ही नहीं।कर्नल पुरोहित ने भी रक्षा मंत्रालय में अर्जी देकर अपने सम्मान बहाली कीमांग की है।
मालेगांव मामले में भी कई अहम गवाहियों का पता नहीं है, जबकी समझौता धमाकों में भी 165 गवाहों में से 22 गवाह पलट चुके हैं। 

दरअसल, 2006 के मालेगांव धमाकों में 37 लोगों की मौत हुई।2007 के समझौता धमाके में 68 लोग मारे गए। इन धमाकों के लिए पहले लश्कर और सिमी को जिम्मेदार बताया गया और फिर अभिनव भारत को, लेकिन समझौता धमाकों मे एनआईए अब नए सिरे से इस मामले में यू-टर्न लेती दिख रही है।आरिफ कासमानी की तलाशइस बीच एनआईए ने इस सिलसिले में आरिफ कासमानी नाम के एक शख्स की तलाश शुरू कर दी है। एनआईए के मुताबिक, आरिफ कासमानी वह शख्स है, जिसने समझौता धमाके की फंडिंग की। भारत ने अमेरिकासे इस बारे में मदद मांगी है।


एनआईए के मुताबिक, अमेरिकी सरकार की ओर से 2010 में इस शख़्स की जानकारी मिली थी।जब जब बीजेपी सत्ता में आती है तो ऐसा ही होता है : तारिक अनवरएनसीपी नेता तारिक अनवर ने कहा, जब बीजेपी की सरकार केन्द्र में आती है तब यही सब होता है। धीरे-धीरे सभी आरोपी इस मामले में छूट जाएंगे।सरकार किसी पर दबाव नहीं डालती : 

रिजिजूकेंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू ने सफाई दी है कि हमारी सरकार किसी पर दबाव नहीं डालती। मगर एक जांच के भीतर इतने सारे यू-टर्न हैरान करने वाले हैं। दरअसल, केंद्र में जब जब सरकार सरकार बदली तब तब जांच एजेंसियां संवेदनशील मामलों में अपना रुख बदल लेती हैं। चाहे वह एटीएस हो या सीबीआई या फिर NIA

वचन है नहीं पड़ने देंगे गरीब ,दलित ओ बी सी को यु जी सी नॉन नेट फ़ेलोशिप जारी रहने का सच , धूर्तता से भरी चाल ,कर दिया देश को गुमराह

 जन उदय :  देश के सभी शिक्षा संस्थानों के गरीब ओ बी सी छात्रों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई है की उनके द्वारा किये गए प्रयासों से सरकार यु जी सी की नॉन नेट फ़ेलोशिप जारी रखने के लिए मजबूर हो गई है .

लेकिन संघी ,जो पूंजीवादियो के चमचे है और ब्राह्मणवाद को फैलाने के लिए वचनबद्ध इतने आसानी से हार मानने वाले नहीं है ,पुरे देश को गुमराह  करते हुए इन लोगो ने सबसे पहले यु जी सी के बजट को ५५ % कम किया है इस साल के लिए जो आगे भी जारी रहेगा , तो जब बजट ही नहीं रहेगा तो यह संस्था काम कसी करेगी , इसके दो उपाय है की इसके समक्ष एक दूसरी ऐसी संस्था बना दी जाए जो इससे अलग हो और दूसरा इसके बजट को यानी कार्य  क्षमता को ही खत्म कर दिया जाए

वैसे पुरे देश में शिक्षा का बजट कम क्र दिया गया है , यानी यह वो बजट है जो सरकारी स्कूलों और कोलेज को दिया जाता है , सरकारी स्कूल और संस्थानों को हालत इतनी खराब है की वहा पर स्कूल नहीं है  कोई सुविधा नहीं है , अकेले सिर्फ ओड़िसा में ३००० हजार स सरकारी स्कूल यह कह कर बंद कर दिए गए की यहाँ बच्चे पढने नहीं आते , सवाल यह है की जब शिक्षक ही नहीं आते तो बच्चे कहा से आयंगे ?

दूसरा देश में सरकार निजी कोलेज और यूनिवर्सिटी को बढ़ावा दे रही है यानी जिसके पास पैसा है वही पढ़ेगा , गरीब  दलित इसलिए नहीं पढ़ सकेगा क्योकि उसके पास पैसा ही नहीं है फीस भरने के लिए , दूसरा कदम जो देश का बेडागर्क करेगा वही है  विदेशी यूनिवर्सिटी के कैंपस देश में ही खुलेंगे ऐसा निति आयोग ने सुझाया है और इसकी नीव कपिल सिब्बल ने डाली थी , अब इन यूनिवर्सिटी के आने से जाहिर है फिर वही अमीर लोगो के बच्चे ही पढेंगे  जिनके पास विदेशी डिग्री होगी और अंग्रेजी का ज्ञान होगा

ऐसा नहीं है की गरीबो को पढने नहीं दिया जाएगा , पढ़ ले दसवी कर ले , बारहवी कर ले चल जा कोलेज चला जा , लेकिन उच्च शिक्षा में रिसर्च में मेडिकल में इंजीनियरिंग में दलित को नहीं आने देना

हां  दलित स्किल बने यानी मजदूर बने स्किल इंडिया कार्यक्रम इस मकसद की पूर्ति के लिए चला दिया गया है , अफसर सिर्फ तिलकधारी बनेगा , देश वही  चलायगा .