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Friday, 22 April 2016

जानिये क्या है देश की सबसे बड़ी समस्या “”ब्राम्हणवादी आतंकवाद”” राज आदिवाल

देश में जितने भी जगह बम ब्लास्ट हुए वे सारे के सारे आरएसएस या आरएसएस से जुड़े लोगो ने यानि ब्राम्हणो ने ही करवाए। असित चटर्जी उर्फ़ असिमानद ने कन्फेशन में कहा की देश भर में जितने बं ब्लास्ट हुए वे सारे के सारे आरएसएस ने ही करवाए !! मगर सत्ता में बैठी कांग्रेस ने उन सारे आतंकवादियों को बचाया क्यों की मोहन भागवत  को वह बचा रहे थे !कांग्रेस ने ही तो आरएसएस को १९२५ में पैदा किया था ना  !कांग्रेस बीजेपी आरएसएस कम्युनिस्ट ब्राम्हणो डीएनए एक ही है !!

सन २००८ को जब मालेगाव बम  ब्लास्ट की जाँच करकरे ने शुरू की तब उन्हें लेफ्टनत कर्नल प्रसाद पुरोहित और दयानन्द पांडे  के पास से ३ लैपटॉप जप्त किये गए।  उसमे मिली जानकारी यह ब्राम्हणी राज  ब्लू प्रिंट था।


उसमे आरएसएस के द्वारा ही चलाये जा रहे अभिनव भारत के असंख्य गुप्त मीटिंग्स के वीडियो , ओडिवो रिकॉर्डिंग थे।  उसके अनुसार उन ब्राम्हणी आतंकवादियों  मीटिंगे delhi ,जम्मू,कलकत्ता ,फरीदाबाद,भोपाल,इंदौर ,जबलपुर,नासिक ,पुणे ,देवळाली इन  पर गुप्त मीटिंगे  हुयी !उन ३ लैपटॉप में ४८ पार्ट है जिसमे २४ विडीवो और २४ ओडिवो  है। उसमे से केवल ४ या ५ भागो का ही सामने जिक्र आता  है बाकी ढेर सारी  बाते सामने अभी तक आयी  नहीं है। वह सब जानकारी सामने नहीं आयी  है अगर वह आती है तो ३ प्रतिशत ब्राम्हणो को जेल में डाला  जायेगा या फिर उन्हें जनता ही चौक चौराह पर लाकर  मार डालेंगी यह चिंता ब्राम्हणो को है।

भारत में छाहे कांग्रेस आये  या बीजेपी, कम्युनिस्ट  ब्राम्हणो के होने के कारण  ब्राम्हणी आतंकवाद को बढ़ावा देते है क्यों की इसी से ३ प्रतिशत ब्राम्हणो का भारत पर और लोकतंत्र पर नाजायज कब्जा हो जाता है। जो भी जाँच एजंसियां है उनमे भी ब्राम्हण  उन्ही  नियंत्रण है !  नाजायज तरीके से कब्ज़ा किया है। आयबी  और एटीएस ,NIA पर भी विदेशी ब्राम्हणो ने कब्ज़ा  किया है।  २६ - ११ का जो हमला हुआ था उसमे आरएसएस का भी हाथ था और इसी में जो मालेगाव बम  ब्लास्ट की तहकीकात कर  रहे अधिकारियो की हत्याए  भी कर दी गयी और इस काम के लिए कांग्रेस ने आरएसएस को मदत किया !! कांग्रेस के ब्राम्हण कितने महान  होगे इसकी आप कल्पना करो !!

कई जगह पर बम ब्लास्ट हुए उसमे से १७ जगह के बम  ब्लास्ट के मामले के चार्ज शीट कोर्ट में दायर हुए है वे सारे के सारे आरएसएस पर हुए है।  न्यायपालिका में बैठे ब्राम्हण क्या आतंकवादियों का समर्थन कर रहे है ?जानकारी सामने आयी  है पुरोहित को बचाया जा रहा है !! क्लीन चिट  दी जा रही है !! शेम शेम !!

क्या हम भारत में रहते है ? क्या भारत में लोकतंत्र है ?
उन १७ जगह की कोर्ट में दायर  चार्ज शीट  अनुसार आरएसएस आतंकवादी ब्राम्हणो  संघठन है  जानकारी :
आरएसएस , अभिनव भारत और वन्दे  मातरम के ब्राम्हणो ने किये बम  ब्लास्टः
१ अजमेर शरीफ ,राजस्थान २००६
२ मक्का मस्जित ,आंध्र प्रदेश ,हैदराबाद २००६
३ समझौता एक्सप्रेस २००६
४ मालेगाव , महाराष्ट्र २००६
५ मालेगाव महाराष्ट्र २००८
६ मोडासा ,गुजरात २००८
आरएसएस और बजरंग दलों के द्वारा किये गए बम  ब्लास्ट :
७ नांदेड़ ,महाराष्ट्र २००६
८  परभणी ,महाराष्ट्र २००३
९  जालाना , महाराष्ट्र २००४
१० पूर्णा  , महाराष्ट्र २००४
११ कानपुर , उप , २००८

आरएसएस  के द्वारा किये गए बम  ब्लास्ट
१२ कन्नूर , केरल , २००८
१३ तेन काशी , तमिलनाडु २००८
१४ पनवेल , महाराष्ट्र, २००८
सनातन संस्था  के द्वारा किये गए बम  ब्लास्ट :
१५ ठाणे महाराष्ट्र , २००८
१६ वाशी , नवी मंबई , महाराष्ट्र
१७ मडगाव , गोवा , २०१०
अब इन बम  ब्लास्ट में शामिल ब्राम्हणो की लिस्ट :
१ सुनील जोशी  - मऊ  , मध्य प्रदेश का आरएसएस का प्रचार प्रमुख  १९९०  से २००३
२ संदीप डांगे - आरएसएस का प्रचार प्रमुख :शाजापुर , मध्य प्रदेश , २००५ से २००८
३ देवेन्द्र गुप्ता जामताड़ा झारखण्ड का आरएसएस का जिला प्रचार प्रमुख
४ लोकेश शर्मा -आरएसएस का नगर कार्यवाहक देवगढ़।
५ चंद्रकांत लावे - आरएसएस का जिला  प्रचार प्रमुख :शाजापुर , मध्य प्रदेश , २००८ से २०१०
६  स्वामी असिमांंनन्द - आरएसएस का सबसे पुराना और सर्वोच्च नेता। 
७ राजेंद्र उर्फ़ समुन्दर - आरएसएस वर्ग विस्तारक।
८ मुकेश वासनी -गोधरा का आरएसएस का कार्यकर्त्ता
९ रामजी कालसांगरा - आरएसएस का कार्यकर्त्ता
१० कमल चौहांन - आरएसएस का कार्यकर्ता
११ साध्वी prdnya  सिँघ  ठाकुर , आरएसएस की कार्यकर्ता जो वन्दे  मातरम और अभिनव भारत से जुडी है !
१२ राजेंद्र चौधरी उर्फ़ रामबालक दास -आरएसएस का कार्यकर्ता
१३ धन सिंह उर्फ़ लक्ष्मण - आरएसएस का कार्यकर्ता
१४ राम मनोहर कुमार सिंह
१५  तेज राम उर्फ़ रामजी उर्फ़ रामचन्द्र कालसांगरा - आरएसएस का कार्यकर्त्ता
१६  संदीप उपाध्याय उर्फ़ संदीप डांगे  - आरएसएस
१७ सुनील जोशी - आरएसएस
१८ राहुल पाण्डे  - आरएसएस
१९ डॉ उमेश देशपांडे - आरएसएस
२० संजय चौधरी
२१ हिमांशु पानसे -
२२ रामदास मुलंगे
२३ नरेश राजकोंडावर
२४ योगेश विदुलकर
२५ मारुती वाघ
२६ गुरुराज तुप्तेवर
२७ मिलिंद एकबोटे
२८ मलेगोंडा पाटिल ( जो गोवा में बम  ब्लास्ट के साथ ही मारा  गया , यह पिछड़े वर्ग का है और उसका इस्तेमाल आरएसएस ने किया )
२९ योगेश नाईक
३०  विजय तलेकर
३१ विनायक पाटिल
३२ प्रशांत जुवेकर
३३ सारंग कुलकर्णी
३४ धनजय  अष्टेकर
३५ दिलीप  मंगोंकर
३६ जयप्रकाश उर्फ़ अन्ना
३७ रूद्र पाटिल
३८ प्रशांत अष्टेकर
३९ रमेश गडकरी -सनातन संस्था
४० विक्रम भावे - सनातन संस्था
   पिछले साल आरएसएस ने मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में भी बम  ब्लास्ट किया था जिसमे २०० से ज्यादा लोग टमाटर की तरह फटकर  मारे गए।  mp  में बीजेपी आरएसएस की सत्ता है उस मसले को आरएसएस ने दबाया !

 देश भर में आरएसएस बम  ब्लास्ट कर रही है। 

भारत में एक भी राजनैतिक दल  इन विदेशी ब्राम्हणो को आतंकवादी तक कहने को डरता है।

Saturday, 16 April 2016

“”हिन्दू शब्द कवच है””” डरपोक और देशद्रोही आर एस एस का :: वर्ना इस देश में हिन्दू कोई नहीं

जन उदय : इतिहास की विवेचना कर लीजिये  ब्राह्मण द्वारा लिखे सारे ग्रन्थ छान मारिये  जिन्हें ये भगवान् का संदेश बता कर पेश करते है  जो भगवान् ने इन्हें संस्कृत  में दिए थे , कही भी आपको हिन्दू शब्द नहीं मिलेगा , मिलेगा तो वर्ण वाव्य्स्था  या जातिवाद वो भी भारतीय समाज में .
भारत की निचले स्तर की जातीओ को ब्राह्मणों ने अपना गुलाम बना कर रखा और आने वाले हर विदेशी हमलावर  चाहे वो मुस्लिम रहे या अंग्रेज उनके सामने अपना गुलाम  बना कर पेश किया  
ब्राह्मणों ने इन निम्न स्तर की जातिओ का मानसिक ,शारीरिक आर्थिक शोषण सदीओ तक किया और आज भी कर रहे है , ये लोग बिलकुल नहीं चाहते की दलित लोग आगे बड़े या पढ़े , ये सिर्फ इनको जानवरों की तरह ही गुलाम रखना चाहते है

शुद्रो को ब्राह्मण मुसलमानों से लड़वाने के लिए जब इस्तेमाल करते है  तब ये जातिया  हिन्दू होती है

मुसलमानों से लड़ने के बाद ये  सारे  लोग अनेक  जातियों में बाँट जाते है इन्हें फिर समाज में गन्दी नजरो से देखा जाने लगता है और सारी गंदगी फैलाता है ब्राह्मण .

जब  दलितों को शुद्रो को आगे बढ़ने की बात आती है तो ब्राह्मण ही सबसे पहला व्यक्ति होता है जो दलितों के अधिकार के खिलाफ बोलता है , ये इनकी शिक्षा का विरोध करता है , 

इनके आरक्षण का विरोध करता है और इनको मिलने वाली हर सविन्धानिक सुविधाओं  का विरोध करता है
और फिर मुसलमानों का डर  दिखा फिर हिन्दू हिन्दू करने लगता है , समाज को बांटने में असमानता फैलाने में ये लोग माहिर है  और  बंटा  हुआ समाज कभी भी तरक्की नहीं कर सकता



Thursday, 14 April 2016

ब्राह्मण चल पड़े है आतंकवाद की राह पर

जन उदय :  आर एस एस की स्थापना ब्राह्मणों के हितो के लिए हुई थी उसके लिए चाहे जो भी रास्ता क्यों न अपनाना पड़े , यही हुआ भी  ब्राह्मण अंग्रेजी शासन में इस तरह समा गए की देखने में तो लगता था की अंग्रेज शासन कर रहे है लेकिन अंदर से इनकी शक्ति ब्राह्मण ही हुआ करते थे जो नौकरशाह के रूप में काम करते थे , इन्होने उस वक्त भी एक काम बड़ी चालाकी का किया  कि  ब्राह्मणों के हितो की रक्षा के लिए इन्होने अन्य स्वर्ण और ओ बी सी को अपना हथियार बनाया जो मुसलमान और इसाई से लड़ सके

आजादी के बाद  भी जब इनका सपना पूरा नहीं हुआ की सारी सत्ता इनके हाथ में आ जाए तो इन्होने फिर से हिन्दू मुसलमान  मुसलमान विदेशी और खुद को भारतीय बताना शुरू कर दिया  जब की इनके पूर्वज ये बात पहले ही साबित कर चुके थे कि ये लोग भी विदेशी हमलावर है

खैर सत्ता बदली  यानाही लेकिन ब्राह्मणों का वर्चस्व जारी रही रहा राजनीती से लेकर नौकरशाही में ये लोग काबिज रहे और दलित उत्पीडन में भी लगातार रहे क्योकि वही एक ऐसी सत्ता थी जिससे इनको बहुत डर  था , इसलिए दलितों के लिए अशिक्षा  अन्धविश्वास , हिन्दू शब्द का इस्तेमाल अक्र्ते रहे , यानी खुद दलितों का उत्पीडन और मुस्लिम से दंगो में इनकी मौत  चलती रही

धीरे  धीरे दलित ओ बी सी में चटनाआती रही और विशेस रूप से  १९९१ में मंडल  कमिसन की रिपोर्ट के बाद जिसमे यह साबित हो गया की जो ब्राह्मण समाज के एक बहुत बड़े वर्ग को आरक्षण के नाम पर भडकता  रहा है  दरसल  वही है जो दलितों का भी और ओ बी सी का भी सारा हिस्सा खा गया है

बस यही से ब्राह्मणों में खौफ  भर गया है  आज वह समझ गया है की आने वाला वक्त ब्राह्मणों के लिए नहीं रहा है  जो समझदार ब्राह्मण है उन्होंने जातिगत परिवर्तन को स्वीकार लिया है  लेकिन गरीब , माध्यम वर्गीय  ब्राह्मण जो अ भी आदिकाल में जीता है  उसको लगता है की सब कुछ उसका है वह जो कहेगा वही सच है , यह वर्ग खुद भी नहीं  जानता की उसी का ही ब्राह्मण भाई जो उच्च स्तर पर पहुच गया है उसका भी हक खा गया है 

यही कारण है आज वह दलितों में आणि वाली हर चेतना , हर अधिकार की आवाज को अपना दुश्मन मानता है  इसलिए कभी दलितों को गुमराह करने के लिए  नय नय प्रपंच रचता रहता है कभी गोमांस , कभी देशभक्ति , कभी राम मंदिर , कभी कुछ   अह ब्राह्मण इन आंदोलनों के  जरिये अपना वर्चस्व काम रखना चाहता है  और जब ऐसा नही हो पाता  तो खून खराबा , हथियार  पर उतर आता है

हालांकि हथियारबंद नियन्त्र  के लिए पहले भी  बिहार में  कई गाव  जला चुके है , आये दिन दलितों की हत्या , बलात्कार  सब इन्ही लोगो के नाम है

इससे यही लगता है की आने वाले वक्त में दलित ओ बी सी बढ़ जाएंगे , जीवन में आगे बढ़ जाएंगे  और ये अपनी सत्ता  जमाने के लिए आतंक  का ही सहारा लेंगे क्योकि  इनका आज भी किसी भी लोकतांत्रिक  मूल्य में विशवास  नहीं है  सो आगे भी नहीं रहेगा ऐसा ही प्रतीत  होता है