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Wednesday, 9 March 2016

देश के 39 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में एससी/एसटी और ओबीसी कोटे के शिक्षकों के 58 फीसदी पद खाली हैं।

देश के 39 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में एससी/एसटी और ओबीसी कोटे के शिक्षकों के 58 फीसदी पद खाली हैं।
इन वर्गों के लिए स्वीकृत 4763 पद में से सिर्फ 1977 पदों पर असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, प्रोफेसर की नियुक्तियां हुई हैं। इसके अलावा असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए बीएचयू और एचएनबी गढ़वाल ने स्वीकृत पदों से ज्यादा नियुक्तियां सामान्य वर्ग में कर ली थी।


आंकड़े एक साल पुराने 2015 के हैं लेकिन वर्तमान में भी इनकी प्रासंगिकता है क्योंकि हाल ही में हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला के सुसाइड के बाद आरक्षण का मुद्दा गर्माया हुआ है।

आरटीआई कार्यकर्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने 2015 में आरटीआई के माध्यम से यूजीसी से केंद्रीय विवि में एससी/एसटी और ओबीसी वर्ग के शिक्षकों का ब्योरा मांगा था।

आरटीआई (2015) के मुताबिक केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कुल 6107 असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, प्रोफेसर के पद खाली हैं। इनमें 1135 एससी, 610 एसटी और 1041 ओबीसी कोटे के पद हैं। जबकि शिक्षकों के कुल स्वीकृत पद 16339 हैं।
आरटीआई से खुलासा

सोर्स : अपडेट मार्ट .कॉम 

कौन सी भारतीय संस्कृति सिखाना चाहते है रवि शंकर ,दंगे जातिवाद ??

कौन सी  भारतीय संस्कृति  सिखाना  चाहते है रवि शंकर ,दंगे जातिवाद ??
दिल्ली में यमुना नदी पर होने वाला श्री श्री रवि शंकर  का संस्कृति महोत्सव न सिर्फ यमुना के लिए बर्बादी बन कर सामने आया है लेकिन अभी तक ये भी पता नहीं चल  रहा है की इतना पैसा खर्च कर के वो विदेशी लोगो को  भारत की कौनसी संस्कृति सिखाना चाहते है



गौर तलब है रवि शंकर का साथ देने वाले लोग वो है जिन्होंने जे एन यु में सत्ता का पूरा दुरउपयोग करके नकली विडियो बनाया  और पुरे देश में अशांति का माहोल बना दिया , इससे पहले हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में पुरे षड्यंत्र के साथ दलित छात्रो को पहले होस्टल से निकाला गया और फिर उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया , दलितों ने इसे  संस्थानिक हत्या का नाम दिया है
देश के अंदर एक बहुत बड़ी आबादी का विकास सिर्फ इसलिए नहीं हो पाया क्योकि जातिवाद के कारण उनको न तो सिर्फ सुविधा दी जाति है  और न ही अवसर दिए  जाते है

देश के अंदर होने वाले दंगे ,  जातिवादी हत्याए  बहुत आम बात है तो क्या रवि शंकर ये संस्कृति पूरी दुनिया को सिखाने वाले है , अगर रवि शंकर को भारतीय संस्कृति पर इतना ही गर्व है तो वो एक बार खुल कर लोगो के साथ संवाद क्यों नहीं करते संस्कृति पर हो सकता है लोगो से गलती हो  रही  हो

किसी को ये समझ में नहीं आता की मानवता को शर्मसार करने वाली संस्कृति को कौन पसंद करेगा 

मनुसिमृति का जलाया जाना संघ के षड्यंत्र की अगली कड़ी : सिर्फ मनुसिमृति नहीं , ब्राह्मणों द्वारा लिखित ग्रन्थ जलाय जाने चाहिए जो करते है जातिगत उत्पीडन की वकालत ,

  मनुसिमृति का जलाया जाना  संघ के षड्यंत्र की अगली कड़ी : सिर्फ मनुसिमृति नहीं ,  ब्राह्मणों द्वारा लिखित ग्रन्थ जलाय जाने चाहिए जो करते है जातिगत उत्पीडन की वकालत ,

इसे   प्लान कहो या षड्यंत्र की दूसरी क़िस्त में ए बी वी पी के छात्रो ने   जेएनयू में प्रशासन की अनुमति के बिना मंगलवार को मनुस्मृति की फोटो कॉपी की प्रतियां जलाई गई. एबीवीपी के पूर्व यूनिट सचिव प्रदीप नारवाल ने कहा कि “मनुस्मृति महिलाओं और शूद्रों के खिलाफ है. इसलिए इसको लेकर हमारा विरोध है.”  उनके इसी ब्यान से साबित होता है की  वो जातिगत  भावना से कितने पीड़ित है की वो आज भी दलितों और उत्पीड़ितो को  शुद्र    कहते है , जबकि ये लोग भारत के मूल निवासी है  और ब्राह्मण विदेशी हमलावर है


कमाल की बात है की ये मनुवादी  छात्र नारे भी लगा रहे थे की यहाँ  पर मनुवाद की कब्र खुदेगी
कुछ छात्रो का ये भी मानना  है की ए बी  वी पी के छात्रो ने ये इसलिए किया है की इन छात्रो का एक प्रकार से सामाजिक बहिष्कार हो गया है और ये अपने आपको कही अलग थलग महसूस करते है

दुसरे छात्र ने बताया की ए बी  वी पी के इन छात्रो को कोई भी बहिष्कार नहीं किया गया है है ये हो सकता है इन छात्रो में खुद अपराधिक बौध हो और वे अपने अंदर ही अपने आपको अपराधी मानते है जिसकी भरपाई ये मनुसिमृति को जला कर कर रहे है
दुसरे छात्र ने बताया की ए  बी वी पी के इन छात्रो को इस बात का भी डर होगा की आने वाले वक्त में कही इन पर जब कानूनी कार्यवाही होगी तो ये लोग अकेले पढ़ जाएगे और इनका हाल एक वास्तविक अपराधी की तरह ही होगा

एक अन्य छात्र ने कहा की  अगर ये लोग जातिवाद के इतने ही खिलाफ है मानवता के इतने पक्षधर है तो ये ब्राह्मणों द्वारा लिखे उन सभी ग्रंथो को क्यों नहीं जलाते जो दलितों मूलनिवासियो के खिलाफ क्रूरता की वकालत करते है मनुसिमृति को पहले भी  जलाया जा चुका है और उसको एक बार  फिर जला दो उससे कोई फर्क नहीं पढता
दरसल सरकार संघ जे एन यु को ही न्यूज़ में रखना चाहती है और पुरे देश का ध्यान रोहित वेमुला की हत्या से हटानी चाहती है

सेना की खोली पोल : महिला दिवस पर बोले कन्हैया ‘कश्मीर में सुरक्षा के नाम पर सेना करती है महिलाओं से रेप’


नई दिल्ली। देशद्रोह के आरोपी जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने महिला दिवस पर अपने भाषण के जरिये भारतीय सेना को निशाने पर लिया है। साथ ही उसने मोदी सरकार को भी घेरने की कोशिश की। उसने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि चाहे उनकी आवाज दबाने की लाख कोशिशें हों, लेकिन वह डंके की चोट पर कहते हैं कि कश्मीर में सुरक्षा के नाम पर महिलाओं से बलात्कार होते हैं।

हालांकि कन्हैया ने ये भी कहा कि वो सुरक्षाबलों का सम्मान करता है, लेकिन जब उसने कश्मीर का जिक्र किया तो कहा कि वहां सेना बलात्कार करती है। कन्हैया ने कश्मीर में सेना को लेकर कहा कि हम सुरक्षाबलों का सम्मान करते हुए भी बोलेंगे कि कश्मीर में सेना द्वारा बलात्कार किया जाता है। हमारे आपस में मतभेद हैं, लेकिन इस देश को बचाने और इस देश के संविधान को बचाने में हमारे कोई मतभेद नहीं है। हम आजाद हिन्दुस्तान में समस्याओं से आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
कन्हैया ने खुद की तस्वीर के सोशल मीडिया में वायरल होने के मुद्दे पर कहा, ‘आज आठ मार्च है। महिला दिवस है। आज उनका नाम नहीं लूंगा। आज ही के दिन हमारी फोटो को गलत तरीके से पेश किया गया है। मैं 21 साल का हूं। मेरी दोस्त मुझे बच्चा कहती है, उसे टीचर बना दिया।


राष्ट्रवाद पर चोट करते हुए कन्हैया ने आरएसएस और भाजपा को घेरने की कोशिश की और कहा कि ये लोग देशद्रोहका स्टिकर लेकर घूमते हैं और जिस पर चाहते हैं चिपका देते हैं। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं कि जवानों से ज्यादा बहादुर व्यापारी है। ये जो बोलते हैं उससे पलट जाते हैं। एक तरफ भारत माता की जय कहते हैं, दूसरी तरफ महिलाओं को वेश्या कहते हैं। जेएनयू देश की समस्या पर बहस करता है तो इसे खत्म करना चाहते हैं।कन्हैया ने कहा, ‘लोग मेरे कपड़ों पर सवाल उठा रहे हैं। कहते हैं कि इतना महंगा जैकेट पहना है, इनको पता नहीं ये जैकेट राजनाथ सिंह की पुलिस ने दिया है।

सुरक्षाबलों पर रेप का आरोप लगाते हुए कन्हैया ने कहा कि कश्मीर में सुरक्षा के नाम पर महिलाओं से रेप हो रहा है। इस देश में कस्टडी में रेप होता है। मैरिटल रेप होता है। उन्होंने कहा, ‘गुजरात का उदाहरण उठाकर देख लीजिए। पहले महिलाओं का बलात्कार किया फिर मारा गया।

गौरतलब है कि संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी का विरोध करने के लिए जेएनयू में नौ फरवरी को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर भारत विरोधी नारे लगाए गए, जिसके बाद जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को 12 फरवरी को गिरफ्तार कर लिया गया। फिलहाल दिल्ली उच्च न्यायालय ने उसे छह महीने की अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया।


सोर्स  : लोकभारत . कॉम  

कन्हिया को चाहिए अपना ध्यान सिर्फ रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या और रोहित एक्ट पर रखे

  
जब से कन्हिया देश द्रोह के  झूठे आरोप  में   जमानत  पर जेल से बाहर आया है  और आकर उसने जे एन यु  कैंपस में भाषण दिया है उस दिन से भाजपा  के गुर्गे  कभी उसकी जबान काट  रहे है कोई उसको मारने  के लिए   फरमान जारी कर रहा है तो कोई उसे देश से निकालने की बात कर रहा है  , कमाल की बात यह है की ये सब गुंडे जो ये आदेश जारी कर रहे है सब टीवी चैनल 

पर बैठ कर ऐसे बाते कर रहे है मानो बहुत बड़े देशभक्त हो और देश का बहुत बड़ा कार्य कर रहे हो
सबसे बड़े कमाल की बात देशभक्ति का राग अलापने वाले चैनल जो आजकल देस्भ्क्तो के साथ कंधे से  कन्धा मिलाकर काम कर रहे है ये भी ऐसे  आतंकी   देशभक्तों को प्रोत्साहन दे रहे है  , 

और सबसे बड़े कमाल की बात की सरेआम धमकिया  देने वाले गुंडों को पुलिस  कुछ कह नहीं रही है

चाहे अह्लात कुछ भी हो लेकिन एक बात इस समय कन्हिया को ये बात ध्यान रखनी चाहिए की उसकी  लड़ाई रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या के साथ शुरू हुई थी  और संघियो का सबसे बड़ा  काम था की पुरे देश का ध्यान रोहित वेमुला से हटा कर जे एन यु  पर ले आये हलांकि संघी अपने स मकसद में कुछ कामयाब भी हुए लेकिन घूम कर  कहानी उसी मोड़ क पर आ गई है की रोहित वेमुला की हत्या की जवाबदेही कौन देगा

अब बार बार भाजपा / संघी देश का ध्यान रोहित से हटाने के लिए  कन्हिया के बयानों को  सामने ला रहे है   ऐसे में कन्हिया को चाहिए की वो संघी / भाजपा या उसके गुर्गो द्वारा दिए गए ब्यान से परे रहे है और साथ के साथ ही कोई अन्य बयानबाजी न करे  और रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या पर केन्द्रित रहे  ताकि रोहित एक्ट बन सके  और इस लड़ाई को जीता जा सके 

Tuesday, 8 March 2016

क्या रवि शंकर भारतीय में लिखी ग्रंथो में लिखी गंदगी और अमानवता को भारतीय संस्कृति सम्मेलन में समझायंगे दुनिया को

क्या रवि शंकर   भारतीय में लिखी   ग्रंथो में लिखी  गंदगी और अमानवता  को भारतीय  संस्कृति सम्मेलन में   समझायंगे दुनिया को

कुछ लोगो को लगता था कि  देश में भेदभाव , दंगो , जातिवाद , की राजनीति सिर्फ भाजपा कर रही है  वो भी अपने पिता आर एस एस के कहने पर लेकिन लोग भूल गए थे की आर एस एस के कुछ एजेंट चुपके चुपके लोगो के बीच में काम कर रहे थे कभी आयुर्वेद के नाम पर , कभी आर्ट ऑफ़ लिविंग के नाम पर कही मन की शांति के नाम पर ,  जिसमे ब्रह्मकुमारी , रवि शंकर  का आर्ट ऑफ़ लिविंग  , रामदेव  इत्यादि
ये ऐसे लोग है जो पहले तो समाज  की समस्या के निवारण के नाम पर  आम लोगो के बीच घुसपैठ करते है और फिर अचानक अपने असली रूप में आ जाते है यानी भगवा आतंक के रूप में
इस वक्त जो बेहद चर्चा का विषया बना हुआ है मुद्दा  वह यह है की श्री रवि शंकर   जो भगवा का एक अंग है भारतीय  संस्कृति के सम्मेलन के नाम पर  यमुना नदी को बर्बाद करने पर तुला हुआ है कमाल की बात यह है की इसकी इजाजत उसके पास कही से भी नहीं है की वो ये कार्यक्रम आयोजित कर सके
देश में भगवा सरकार होने की वजह से  भगवा लोगो के खिलाफ बोलने वाले को या तो  जेल में देशद्रोह के आरोप में डाल  दिया जाता है या  उसके बोलने के अधिकार को ही छीन   लिया जा रहा है  


कमाल की बात यह है की कभी गंगा की सफाई कभी यमुना की सफाई तो कभी गोमांस के नाम पर देश में आतंक  फैलाने वाले भगवा आतंकी  अपनी जरूरत के अनुसार धर्म और संस्क्रती  को मोड़ लेते है , कोई दुसरा करे  तो यमुना माँ  , खुद करे  तो सिर्फ यमुना , खुद गोमांस का व्यापार करे  तो व्यापार    कोई दुसरा करे  तो गोमाता की  हत्या
अब अगर रवि शंकर भारतीय संस्कृति  की बात ही कर रहे है  तो क्या  रवि शंकर  पूरी  दुनिया को  ब्राह्मण ग्रन्थ में लिखी  महिलाओं  और दलितों  के खिलाफ क्रूरता  और गंदगी को बतायंगे ??
दलित और महिला की जान की कीमत कुछ भी  नहीं  क्या ये बतायंगे
क्या ये भी बतायंगे की दलित की हत्या का प्रायश्चित  एक अन्य जानवर को मार कर किया जा सकता है  ???


क्या  रवि शंकर  निचे लिखे   मनुस्मिरती   को दुनिया के लोगो को बतायंगे ??


मनुस्मुर्ति" में क्या कहा हैं
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यह देखिये-
१- पुत्री,पत्नी,माता या कन्या,युवा,व्रुद्धा किसी भी स्वरुप में नारी स्वतंत्र नही होनी चाहिए. -मनुस्मुर्तिःअध्याय-९ श्लोक-२ से ६ तक.
...
२- पति पत्नी को छोड सकता हैं, सुद(गिरवी) पर रख सकता हैं, बेच सकता हैं, लेकिन स्त्री को इस प्रकार के अधिकार नही हैं. किसी भी स्थिती में, विवाह के बाद, पत्नी सदैव पत्नी ही रहती हैं. - मनुस्मुर्तिःअध्याय-९ श्लोक-४५
३- संपति और मिलकियत के अधिकार और दावो के लिए, शूद्र की स्त्रिया भी "दास" हैं, स्त्री को संपति रखने का अधिकार नही हैं, स्त्री की संपति का मलिक उसका पति,पूत्र, या पिता हैं. - मनुस्मुर्तिःअध्याय-९ श्लोक-४१६.
४- ढोर, गंवार, शूद्र और नारी, ये सब ताडन के अधिकारी हैं, यानी नारी को ढोर की तरह मार सकते हैं....तुलसी दास पर भी इसका प्रभाव दिखने को मिलता हैं, वह लिखते हैं-"ढोर,चमार और नारी, ताडन के अधिकारी."
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मनुस्मुर्तिःअध्याय-८ श्लोक-२९९
५- असत्य जिस तरह अपवित्र हैं, उसी भांति स्त्रियां भी अपवित्र हैं, यानी पढने का, पढाने का, वेद-मंत्र बोलने का या उपनयन का स्त्रियो को अधिकार नही हैं.- मनुस्मुर्तिःअध्याय-२ श्लोक-६६ और अध्याय-९ श्लोक-१८.
६- स्त्रियां नर्कगामीनी होने के कारण वह यग्यकार्य या दैनिक अग्निहोत्र भी नही कर सकती.(इसी लिए कहा जाता है-"नारी नर्क का द्वार") - मनुस्मुर्तिःअध्याय-११ श्लोक-३६ और ३७ .
७- यग्यकार्य करने वाली या वेद मंत्र बोलने वाली स्त्रियो से किसी ब्राह्मण भी ने भोजन नही लेना चाहिए, स्त्रियो ने किए हुए सभी यग्य कार्य अशुभ होने से देवो को स्वीकार्य नही हैं. - मनुस्मुर्तिःअध्याय-४ श्लोक-२०५ और २०६ .
८- - मनुस्मुर्ति के मुताबिक तो , स्त्री पुरुष को मोहित करने वाली - अध्याय-२ श्लोक-२१४ .
९ - स्त्री पुरुष को दास बनाकर पदभ्रष्ट करने वाली हैं. अध्याय-२ श्लोक-२१४
१० - स्त्री एकांत का दुरुप्योग करने वाली. अध्याय-२ श्लोक-२१५.
११. - स्त्री संभोग के लिए उमर या कुरुपताको नही देखती. अध्याय-९ श्लोक-११४.
१२- स्त्री चंचल और हदयहीन,पति की ओर निष्ठारहित होती हैं. अध्याय-२ श्लोक-११५.
१३.- केवल शैया, आभुषण और वस्त्रो को ही प्रेम करने वाली, वासनायुक्त, बेईमान, इर्षाखोर,दुराचारी हैं . अध्याय-९ श्लोक-१७.
१४.- सुखी संसार के लिए स्त्रीओ को कैसे रहना चाहिए? इस प्रश्न के उतर में मनु कहते हैं-
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१). स्त्रीओ को जीवन भर पति की आग्या का पालन करना चाहिए. - मनुस्मुर्तिःअध्याय-५ श्लोक-११५.
(
२). पति सदाचारहीन हो,अन्य स्त्रीओ में आसक्त हो, दुर्गुणो से भरा हुआ हो, नंपुसंक हो, जैसा भी हो फ़िर भी स्त्री को पतिव्रता बनकर उसे देव की तरह पूजना चाहिए.- मनुस्मुर्तिःअध्याय-५ श्लोक-१५४.
जो इस प्रकार के उपर के ये प्रावधान वाले पाशविक रीति-नीति के विधान वाले पोस्टर क्यो नही छपवाये?
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१) वर्णानुसार करने के कार्यः -
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महातेजस्वी ब्रह्मा ने स्रुष्टी की रचना के लिए ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य और शूद्र को भिन्न-भिन्न कर्म करने को तै किया हैं -
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पढ्ना,पढाना,यग्य करना-कराना,दान लेना यह सब ब्राह्मण को कर्म करना हैं. अध्यायः१:श्लोक:८७
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प्रजा रक्षण , दान देना, यग्य करना, पढ्ना...यह सब क्षत्रिय को करने के कर्म हैं. - अध्यायः१:श्लोक:८९
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पशु-पालन , दान देना,यग्य करना, पढ्ना,सुद(ब्याज) लेना यह वैश्य को करने का कर्म हैं. - अध्यायः१:श्लोक:९०.
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द्वेष-भावना रहित, आंनदित होकर उपर्युक्त तीनो-वर्गो की नि:स्वार्थ सेवा करना, यह शूद्र का कर्म हैं. - अध्यायः१:श्लोक:९१.
(
२) प्रत्येक वर्ण की व्यक्तिओके नाम कैसे हो?:-
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ब्राह्मण का नाम मंगलसूचक - उदा. शर्मा या शंकर
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क्षत्रिय का नाम शक्ति सूचक - उदा. सिंह
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वैश्य का नाम धनवाचक पुष्टियुक्त - उदा. शाह
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शूद्र का नाम निंदित या दास शब्द युक्त - उदा. मणिदास,देवीदास
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अध्यायः२:श्लोक:३१-३२.
(
३) आचमन के लिए लेनेवाला जल:-
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ब्राह्मण को ह्रदय तक पहुचे उतना.
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क्षत्रिय को कंठ तक पहुचे उतना.
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वैश्य को मुहं में फ़ैले उतना.
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शूद्र को होठ भीग जाये उतना, आचमन लेना चाहिए.
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अध्यायः२:श्लोक:६२.
(
४) व्यक्ति सामने मिले तो क्या पूछे?:-
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ब्राह्मण को कुशल विषयक पूछे.
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क्षत्रिय को स्वाश्थ्य विषयक पूछे.
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वैश्य को क्षेम विषयक पूछे.
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शूद्र को आरोग्य विषयक पूछे.
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अध्यायः२:श्लोक:१२७.
(
५) वर्ण की श्रेष्ठा का अंकन :-
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ब्राह्मण को विद्या से.
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क्षत्रिय को बल से.
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वैश्य को धन से.
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शूद्र को जन्म से ही श्रेष्ठ मानना.(यानी वह जन्म से ही शूद्र हैं)
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अध्यायः२:श्लोक:१५५.
(
६) विवाह के लिए कन्या का चयन:-
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ब्राह्मण सभी चार वर्ण की कन्याये पंसद कर सकता हैं.
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क्षत्रिय - ब्राह्मण कन्या को छोडकर सभी तीनो वर्ण की कन्याये पंसद कर सकता हैं.
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वैश्य - वैश्य की और शूद्र की ऎसे दो वर्ण की कन्याये पंसद कर सकता हैं.
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शूद्र को शूद्र वर्ण की ही कन्याये विवाह के लिए पंसद कर सकता हैं.- (अध्यायः३:श्लोक:१३) यानी शूद्र को ही वर्ण से बाहर अन्य वर्ण की कन्या से विवाह नही कर सकता.
(
७) अतिथि विषयक:-
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ब्राह्मण के घर केवल ब्राह्मण ही अतिथि गीना जाता हैं,(और वर्ण की व्यक्ति नही)
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क्षत्रिय के घर ब्राह्मण और क्षत्रिय ही ऎसे दो ही अतिथि गीने जाते थे.
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वैश्य के घर ब्राह्मण,क्षत्रिय और वैश्य तीनो द्विज अतिथि हो सकते हैं, लेकिन ...
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शूद्र के घर केवल शूद्र ही अतिथि कहेलवाता हैं - (अध्यायः३:श्लोक:११०) और कोइ वर्ण का आ नही सकता...
(
८) पके हुए अन्न का स्वरुप:-
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ब्राह्मण के घर का अन्न अम्रुतमय.
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क्षत्रिय के घर का अन्न पय(दुग्ध) रुप.
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वैश्य के घर का अन्न जो है यानी अन्नरुप में.
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शूद्र के घर का अन्न रक्तस्वरुप हैं यानी वह खाने योग्य ही नही हैं.
(
अध्यायः४:श्लोक:१४)
(
९) शब को कौन से द्वार से ले जाए? :-
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ब्राह्मण के शव को नगर के पूर्व द्वार से ले जाए.
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क्षत्रिय के शव को नगर के उतर द्वार से ले जाए.
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वैश्य के शव को पश्र्चिम द्वार से ले जाए.
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शूद्र के शव को दक्षिण द्वार से ले जाए.
(
अध्यायः५:श्लोक:९२)
(
१०) किस के सौगंध लेने चाहिए?:-
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ब्राह्मण को सत्य के.
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क्षत्रिय वाहन के.
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वैश्य को गाय, व्यापार या सुवर्ण के.
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शूद्र को अपने पापो के सोगन्ध दिलवाने चाहिए.
(
अध्यायः८:श्लोक:११३)
(
११) महिलाओ के साथ गैरकानूनी संभोग करने हेतू:-
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ब्राह्मण अगर अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो सिर पे मुंडन करे.
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क्षत्रिय अगर अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो १००० भी दंड करे.
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वैश्य अगर अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो उसकी सभी संपति को छीन ली जाये और १ साल के लिए कैद और बाद में देश निष्कासित.
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शूद्र अगर अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो उसकी सभी संपति को छीन ली जाये , उसका लिंग काट लिआ जाये.
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शूद्र अगर द्विज-जाती के साथ अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो उसका एक अंग काटके उसकी हत्या कर दे.
(
अध्यायः८:श्लोक:३७४,३७५,३७९)
(
१२) हत्या के अपराध में कोन सी कार्यवाही हो?:-
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ब्राह्मण की हत्या यानी ब्रह्महत्या महापाप.(ब्रह्महत्या करने वालो को उसके पाप से कभी मुक्ति नही मिलती)
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क्षत्रिय की हत्या करने से ब्रह्महत्या का चौथे हिस्से का पाप लगता हैं.
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वैश्य की हत्या करने से ब्रह्महत्या का आठ्वे हिस्से का पाप लगता हैं.
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शूद्र की हत्या करने से ब्रह्महत्या का सोलह्वे हिस्से का पाप लगता हैं.(यानी शूद्र की जिन्द्गी बहोत सस्ती हैं)
- (
अध्यायः११:श्लोक:१२६)