Apni Dukan

Saturday, 11 June 2016

जानिये ऐसा क्या है जिसे जानकार लोग हो जाएंगे नास्तिक


जन उदय : भगवान् क्या है ?? क्या ये सच में मौजूद है  है  या मात्र कल्पना ही है ??
सच में भगवान् सिर्फ एक कल्पना है और  इसका निर्माण कुछ ऐसे शातिर लोग करते है जो समाज को अपने इशारे पर नाचना  चाहते है  और चाहते है समाज में जो हो रहा है और होगा वो सब उनके हित के लिए ही हो और समाज पर इनका  वर्चस्व  बना रहे .
अब जानिये वो बाते जिनकी वजह से भगवान् के निर्माण में धूर्त लोगो को  सहयता  मिलती है  , भगवान् के निर्माण से पहले जो लोग अपने आपको भगवान् का संदेश वाहक बताते है या ये कहते है की भगवान् से उनकी सीढ़ी बातचीत  होती है , ये लोग समाज के मनोविज्ञान का पूरा और सही ढंग से अध्यन करते है

ये सब हम बाते भारतीय पोरानिक सन्दर्भ में समझने की कोशिस करेंगे ,आदिकाल् में बारिश , अग्नि , हवा ,  आदि उत्पात , विनाश का कारण होती थी , कभी भी खड़ी पकी फसल  बाढ़  से खराब हो है , या बारिश नहीं हुई सुखा आ गया इससे मानव बहुत डरता था , तो धूर्त लोगो ने  इन सब को भगवान् का रूप  दे दिया और बाकायदा इनकी पूजा का प्रवाधान  और तरीके भी बता दिए .

इसके बात मानव जीवन में एक बात और भयंकर थी की एक दिन अचानक उनमे से कोई दिर जाता और  फिर न तो बात करता और न ही चलता  जो मृत्यु  थी , अब ऐसा क्या है इस शरीर में , जो इसको चलता फिरता बनाता था और जिसके न रहने से शरीर निर्जीव हो गया , इसको आत्मा , रूह का नाम दिया गया जो की भगवान् के हाथ में है

आदिकाल के समाज के लिए यह भी एक अजीब बात थी की आदमी ने औरत की योनी में अपना लिंग  डाला  और उसे अलोकिक सुख मिला और फिर कुछ समय के बाद  एक बच्चा  पैदा हो गया सो ये एक बहुत बड़ी चमत्कारिक  घटना थी उस समय , सो शातिर  लोगो ने जन्म मृत्यु  इन  सबको  भगवान् का खेल बता दिया   और यह ज्ञान बाद में समय  समय पर यह  ज्ञान परिपूर्ण  होता गया

इसके अलावा  इंसान के अंदर प्राक्रतिक  डर  , लालच  , कामचोरी , हवस सबका  फायदा उठाया  ऐसे ऐसे भगवान् की रचना कर दी जिनके हाथ में तलवार है , हथियार है अगर कुछ  गलत किया तो वह सजा देगा  और सही चलोगे यानी हमारे द्वारा रचे गए  उपदेशो से चलोगे तो भगवान् वरदान देगा  भगवान् ऐसा है अगर उसकी पूजा सही ढंग से करोगे तो वह वरदान देगा  जो चाहे मांग  लो भगवान् से , शातीर  लोगो ने ऐसे भी विचार और उपदेश फैलाए

कमाल की बात देखो ४३ दिन एक मन्त्र जपने से आप भगवान् से मिल लोगे , आपकी मन  की मुराद  पूरी हो जाएगी इस तरह  के लालच , हजारो है
अब हम देखे एक बहुत ही  बड़ा  उधाह्र्ण , आप  शादी के लिए पटरी मिलवाते है , शुभ  समय देख कर सारे काम करते है दिवि देवताओं  की पूजा करते है , उन्हें आशीर्वाद के लिए बुलाते है , लेकिन फिर भी शादी के बाद जीवन नर्क  की तरह रहता है , तलाक  हो जाते  है  दिन रात  घर में झगड़ा  रहता है ,  तो ऐसा क्यों
आपने तो सभी कुछ किया तो इसका कारण यही है की आप जीवन में जितना मर्जी पूजा करे कर्म काण्ड करे ये सब आपके मन को कही एक मनोवैज्ञानिक  संतुष्टि  देगा या बल  देगा  और सारे काम भी आप करेंगे , लेकिन मुशीबत में भगवान् कभी नहीं  अता जब भी जो कुछ भी हुआ वो आपने खुद ने किया है , लेकिन भगवान् का डर हमारे दिलो में इतना है , यानी हम अपनी जिन्दगी से और किसी  भी अकस्मात घटना और अप्रिय घटना से इतना डरते है की  भगवान् की शरण में चले जाते है

कोई भी व्यक्ति यह कह सकती है की ये सब बकवास है   तो कृपया करके  वह व्यक्ति यह बताये की जब भगवान् ने आप सबको एक ही बनाया है  तो आप  दुनिया का कोई भी धर्म  या भगवान् बताइये जिसके रहते , उस धर्म को मानने  वाले सभी  लोग सुखी  रहते है , वो लोग कभी बीमार नहीं पड़ते  , उनके बच्चे  या पति  पत्नी कभी आकस्मिक  नहीं मरते उस  समाज  में लोग गरीब नहीं है  , अशिक्षित  नहीं  है उस अमाज में लोग आपस में  लड़ते  नहीं है , सब शान्ति और सुख से रहते है , अगर नहीं तो ऐसे भगवान् या धर्म को मानसे से क्या फायदा ?

इन सब बातो से यही समझ में आता है की दुनिया का कोई भी धर्म , या भगवान्  समाज में फैली विषमता  को संता में नहीं बदल सकता , वह गरीबी , भुखमरी खत्म नहीं  कर सकता ,भाई भाई  हमेशा एक रहे यह भी नहीं हो सकता समाज में लोग आपस में
  लड़ते नहीं मिलजुल कर रहते है यह भी नहीं हो सकता
लेकिन एक बात हमेशा इंसान की जिन्दगी  को उसके मनोविज्ञान को हमेशा प्रभावित  करती है वह यह की वह जिस धर्म को मानता है उस धर्म का भगवान् उसके बारे में क्या कहता है ?? क्या भगवान यह कहता है वह सामान है ??  बस  यही बात और कुछ अन्य  आदर्शवादी  बाते इंसान को दुसरे धर्म की तरफ खींचती  है

दुनिया के सभी धर्मो  और उनकी किताबो में इन्सान को सामान बताया गया है यह बात अलग है की प्रैक्टिस में ऐसा नहीं है  लेकिन धर्म  की किताब में है ऐसा  , लेकिन तथाकथित  ब्राह्मणों  द्वारा लिखी गई किताबे दुनियामे  ऐसी  किताबे  है  या उपदेश है  जिन्हें ब्राह्मणों  ने यह कहकर लिखा है की ये भगवान् के उपदेश है , सिर्फ इन्ही किताबो में इंसान को इंसान से अलग उंचा  नीचा  बताया   गया है , इन किताबो में लिखा है की कुछ लोग ऊँची जाती  के है कुछ निंची जाति के , ऊँची जाति  के लोगो को हक है की ये नीची जाति  को गुलाम बना कर रखे , उन्हें पढने  न दे  , उन्हें  शिक्षित  न होने  दे   उनके पास किसी प्रकार की सम्पति  न रहे ,इनको समाज के बाहर रखा जाए    सिर्फ ब्राह्मणों  की किताबे यानी  गीता  वेद , पुराण , मनुसिमृति  में ही ऐसा लिखा है नीची  जाति  के ही नहीं  महिलाओं को गुलाम बना कर रखा जाए ,, ये सिर्फ भोग की  वस्तु है

क्या कोई महिला या नीची जाति  का ऐसे भगवान् को मानेगा  नहीं कभी  नहीं
ऐसी विचारधारा को  मानने  वाली महिला अगर वह होगी तो कोई किराए पर  शरीर बेचने वाली , साथ ही शेक्षिक  और मानसिक रूप से बदचलन औरत  ही ऐसी  विचारधारा  का समर्थन करेगी  और  प्रचार करेगी और ऐसे ही तथाकथित  नीची  जाति  के लोग करेंगे  तो उन्हें  अपना  डी  एन ए  टेस्ट करवाना  ही चाहिए


Saturday, 4 June 2016

संस्कृत पूर्ण रूप से विदेशी भाषा है जो आर्यों के साथ भारत आई

जन उदय : हाल ही में सीरिया में विश्व भाषा सम्मेलन हुआ जिसमे संस्कृत की उत्पति ,और विकास पर भी चर्चा हुई
सारी चर्चा और इतिहासिक शोध से अब तक ये सामने आया है संस्कृत भाषा का भारत से कोई सम्बन्ध नहीं है और न ही इसकी कोई उत्पति के वैज्ञानिक और भाषा उत्पति के सिद्धांत मिलते है

दरअसल भारत में ये भाषा आर्यों यानी ब्राह्मणों के साथ आई ये लोग आपस में ही इस भाषा को बोलते उअर लिखते थे , यही कारण रहा की इसका सम्बन्ध किसी भी भारतीय क्षेत्र से नहीं रहा

ऐसा लगता है की ये भाषा दरसल ब्राह्मणों की कोड वर्ड भाषा थी जिसे ये लोग ही पढ़ और लिख सकते है
संस्कृत में लिखे गये गए ग्रन्थ में कही भी किसी आम आदमी को संस्कृत नहीं बोलते दिखाया गया
ब्राह्मणों की सबसे बड़ी चालाकी जिसे ये हमेशा से आजमाते आये है वे है अंधविश्वास , लोगो में प्राक्रतिक डर की भावना , और अज्ञानता जिसके कारण इन्होने इस भाषा को देव भाषा का दर्जा दे दिया जिसको बाद में पीड़ित , शोषित और कमजोर लोगो ने मान लिया क्योकि उनके पास और कोई चारा भी न था


कई बार इसे ये लोग अमृत वाणी भी कहते है क्योकि इन्होने अपने संदेश इसी भाषा में लिखे , यानी वेद आदि इसमें कमाल की बात यह रही की इस भाषा को भगवान् ने सिर्फ इन्हें ही सिखाया यानी ये इनकी धूर्तता थी की ये इनकी भाषा है और इन्हें ही आती थी

खैर शोध के आधार पर यह बात साफ़ है की सिन्धु घाटी की सभ्यता में ब्रह्मण कही नहीं थे और न ही संस्कृत यानी ये दोनों विदेशी है

इसके अलावा विदेशी भाषाओं में इसके या इससे मिलते जुलते शब्द मिलते है जो ये बात साबित करते है की इसका भारत से कोई सम्बन्ध नहीं है जैसे इंग्लिश में brother तो संस्कृत में भ्राता इसी तरह मदर तो माता
,
patriarchy - पितृसत्तात्मक , matriarchy – मात्रसत्तात्मक आदि

चूँकि यह बात साफ़ है तो इस भाषा के विकास पर अरबो रुपये का खर्चा क्यों ??

Sunday, 29 May 2016

नार नहीं नोरंगी है , ढक ले तो सारे कुल को ढक ले नहीं तो नंगी की नंगी है तोता मैना के किस्से अश्लील , और कामुकता फैलाने वाली कहानिया नहीं बल्कि स्त्री विमर्श और जेंडर सेन्सटाईजेशन की पहल है लोक साहित्य में


जन उदय : कुछ लोग ऐसे होंगे शायद  जिनको तोता मैना के किस्से के बारे में कुछ मालूम नहीं होगा  और साहित्य  में रूचि  रखने वाला  शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति  होगा जिसे इनके बारे में मालूम नहीं होगा .

कुछ लोगो ने तो ये किस्से अपने बड़े लोगो से निति कथाओं के रूप में जरूर सुने होंगे , चूँकि कहानिया कहने वाले अधिकतर  पुरुष है और रहे है तो शायद  ऐसी  कहानिया जयादा प्रचलित है  जिनमे औरत  बेवफा  रहती है , घटक होती है  और ऐसी होती है की उ पर कोई विशवास नहीं किया जा सकता

इस बात की जानकारी सभी साहित्यकारो को जरूर होगी की लोक साहित्य   में कव्वाली , नौटकी  के संवाद इन्ही तोता मैना के  किस्सों पर आधारित हो होते है , हालांकि कव्वाली  सिर्फ मजारो  पर और इबादत के लिए इस्तेमाल की जाति  थी लेकिन लोक साहित्य ने इसको अपने तरीके से अपनाया

अगर हम तोता मैना के किस्से  सही ढंग से पढ़े  तो शायद हमें अह्मारे समाज की सारी  समस्याओं  की जड  और उन पर फैली मानसिकता  भरी मिल जाएगी . मसलन एक राजा  जंगल में शिकार करते हुए जता है  रास्ता  भटक जाने के कारण एक गवा में जाता है वहा  पर वह एक महतर ( भंगी ) लड़की को देखता है जो चाँद से जयादा खूबसूरत  है उस पर मोहित हो जाता है जब  वह उसके साथ सम्बन्ध बनाना  चाहता हैलेकिन यह सम्भव न होने के कारण वह लड़की  को  शादी का प्रस्ताव रखता है , काफी सोच विचार के बाद  वह लड़की और उसके घरवाले इस रिश्ते को स्वीकार कर लेते है , कुछ  दिन  उस लड़की के साथ समय गुजारने के बाद राजा को होश आता है की वह इस लड़की को सबके सामने कैसे ले जाएगा  सो योजनाबद्ध  तरीके से वह उस लड़की को रास्ते में कत्ल कर देता है “
तो इस कहानी में कामुकता  , स्त्री के अपने निर्णय , जाति , और जाति  से जुड़े पूर्वाग्रह औरत को वस्तु की तरह इस्तेमाल करना यह सब आते है

 कहने को तो ये किस्से  कामुकता के लिए इस्तेमाल किये जाते है लेकिन कमाल की बात यह है की इसमें वफ़ा , और बेवफाई के नाम  पर स्त्री को जयादा दोषी ठहराया  गया है , इसमें एक छिपी  बात यह है की सदीओ पहले इन कहानियों के माध्यम से स्त्री विमर्श किया गया जो भद्र  लोक से दूर रहा  और ये ऐसा विमर्श है जो लोकप्रिय  है  और इसी के सहारे  समाज में सारी  मानसिकता  फैलती है


Saturday, 28 May 2016

आने वाली नस्ले हमें माफ़ नहीं करेंगी , यह कह कर , उस वक्त तुम क्या कर रहे थे जिस वक्त संघ काल में में इंसानियत शर्मशार हो रही थी ,भगवा आतंक बढ़ रहा था


जन उदय : किसी भी देश का इतिहास   एक जैसा नहीं रहता , न उसमे हुक्म करने वाली हुकूमते एक रहती है  वक्त का पहिया हर किसी को कुचल आगे निकल जाता है , और एक  नए समाज को जन्म देता है  नये लोगो को इतिहास में भागीदार  और खिलाड़ी  बन्ने के लिए  आमंत्रित  करता है .

भारत  का इतिहास भी कुछ ऐसा ही रहा है , यहाँ लोग  और हुकूमते  आती रही जाति   रही , कई  परोपकारी   और कई  अत्याचारी  शासक  आये और चले गए . जब भी इस देश में जुल्म हुआ है  ये सिर्फ उस व्यक्ति की ताकत नहीं होती जो अत्याचार करने के लिए आगे बढ़ता  है बल्कि  उन लोगो की बहुत बढ़ी  गलती होती है जो लोग  इस बदलते मंजर को खामोशी से खड़े देखते रहते है और अपने आप को वक्त के पहिये के निचे बिना कुछ कहे  कुचल  जाते है
भारत के जिस दौर में हम आज गुजर रहे है   ये सच में एक बहुत बड़े  संकट का समय है और यह संकट है भारत में भगवा आतंकवादियो  की सरकार कहने को तो इस सरकार बन्ने में पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया  का पालन हुआ लेकिन इस प्रक्रिया में इतनी गडबडी  हुई की सभी लोकतांत्रिक शक्तिया  आवाक  रह गई और अंत में लोकतांत्रिक जंग में भारत के मानवतावादी शक्तियों  की हार हुई

इस भगवा सरकार बन्ने  के बाद शुरू से ही इन लोगो ने अपने आतंकी होने के प्रमाण देने शुरू कर दिए अपने देशद्रोही इरादों  को नजाम देना शुरू कर दिया  इसकी शुरुआत  गंगा  बचाओ आन्दोलन के नाम पर २०० करोड़  , बनारस के पंडो  के लिए ५६ करोड़ , और अन्य  ऐसे कार्य करना शुरू कर दिया


इन भगवा लोगो का काम सबसे पहले शिक्षा  संस्थानों  पर अपना कब्जा ज़माना था सो इन्होने पुणे फिल्म स्कूल हैदराबाद  यूनिवर्सिटी में रोहित वेमुला  की संस्थानिक  हत्या  मद्रास आई आई टी  में संघी आतंक  डेल्टा मेघवाल की हत्या , जे  एन यु    षड्यंत्र , मुजफ्फर नगर दंगे ,  गोमांस को लेकर आतंक , आदि
इन लोगो के द्वारा लोकहित के वादे सब फ्लॉप हुए देश कर्ज  और  पतन के गर्त में जाना  शुरू कर दिया हालांकि ये बात सबको मालूम थी की ये सब देशभक्ति के वादे सब झूठे है लेकिन सभी प्रगतिवादी  शक्तिया कुछ न कर पाई . और न ही कर पा रही है

इन लोगो ने पुरे देश में खुला  आतंक फैलाया हुआ है ,गरीबी महंगाई , बेरोजगारी बढती  ही जा रही है और ऐसा लगता नहीं की आगे कुछ रुक जाएगा   इसके विपरीत  मोदी के चहेते  सारे  पूंजीपति  खूब मुनाफ़ा  कमा रहे है  रेलैएंस का तिमाही  मुनाफ़ा  ४ से ६.५ हजार करोड़ पहुच गया है इसी तरह अधानी का मुनाफ़ा  ७५ ५ बढ़ गया है कमाल की बात यह है की सारी सरकारी संस्थाए घाटे में और आई सी यु में पहुच गई है इस बात को खुद  सरकारी  लोग मानते है  जिस जी डी पी का हवाला  दिया जा रहा है  उसमे रिटेल  और गरीबो का कितना हक है  इसका कोई  जवाब सरकार के पास नहीं है क्योकि ये सब भ्रम है . लगातार किसान आत्महत्या  कर रहे है , अपराधो  की संख्या  ४०० %  बढ़  गई है कमाल की बात यह है की इसमें दलितों के प्रति अपराध ३०० % से जयादा बढे  है , इनकी हत्याए बलात्कार लगातार बढ़  रहे है

 हमें इतनी उम्मीद नहीं थी की  देश इस तरह पतन के गर्त में चला जाएगा इसी कारण न जाने क्यों मन एक तनाव रहता है  क्योकि इस सरकार का असर आने वाली नस्लों  तक होगा और नसले हमसे पूछेंगी  की जब ऐसे लोग देश में आये तो आप लोग क्या कर रहे  थे ??  जवाब ये तो बिलकुल नहीं हो सकता हमसे गलती  हो गई या हम इन लोगो  को पहचान नहीं पाए ??  नहीं हम लोगो  को अपनी गलती मान ली चाहिए और ये स्वीकार करना चाहिए की  हम नाकामयाब हुए  ,


चाहे कुछ भी रहे लेकिन हम आने वाले वक्त में ऐसा नहीं होने देंगे  सभी लोगो  को  एकजुट करना होगा और अपने देश को बचाना होगा  इस देश की आने वाली नस्लों  को बचाना  होगा 

दलित खुद नीच और जलील है ,ब्राह्मण इसलिए इनको दबाता है , जानिये क्या है यह नीचता



जन उदय : भारत में दलित समुदाय जिस तरह जाति  के नाम पर और उससे जुड़े अत्याचार से परेशान है कह नहीं सकते हर जगह हर स्थान पर जातिवाद  का बोलबाला  और ये सब वो लोग जयादा फैलाते है जो अपनी  ऊँची जाति को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करते है और दलितों का मोबल एक पल में जातिवाद के नाम पर तोड़  देते है ,

लेकिन ये सब देख कर ऐसा लगता नहीं की दलित  लोग भी जातिवाद  और उत्पीडन के खिलाफ कोई जोरदार और सच्ची  मुहीम चला रहे है है जातिवाद से उत्पीडन के बावजूद ये लोग खुद ब्राह्मणों द्वारा फैलाए गए जाल में  फंसते है खुद उनकी शरण में पहुच जाते है

इसके अलावा  खुद दलितों के नेता इनके नाम से आगे बढ़ते है , दलित नाम से जीवन में नौकरी पाते है लेकिन जब सही समय आता है तब दलितों के दलाल इनका सौदा कर बैठते है , राम विलास पासवान , उदित राज जितन राम मांझी जैसे लोग जो आरक्षण की बदौलत आगे आ गए है अब दलितों को आरक्षण छोड़ने का उपदेश देते है ,

इसके अलावा खुद समान्य जन उन सभी ब्राह्मण कुरितियो  को अपनाते है जो इनके लिए जाल के  रूप में तैयार की गई

इसके अलावा न तो इन लोगो में एकता है  और न ही द्रिड निश्चय , ये लोग बस  ये चाहते है जाति  बरकरार रहे लेकिन जाति के नाम पर उत्पीडन न हो और इन्हें आरक्षण मिलता  रहे
इसपर जयादा कुछ न कहते हुए पेश है एक छोटी से कहानी जिसको शशि अतुलकर के फेसबुक वाल से लिया गया है

एक ओबीसी अफसर हनुमान का भक्त था।

रोज वह हनुमान के मंदिर मे जा कर प्रसाद और पैसे चढाता फिर घर आ कर अपने कुत्ते को भी प्रसाद खिलाता। एक दिन उसका कुत्ता भी उसके पीछे-पीछे मंदिर तक चला गया, वहां सभी लोग कुत्तों को भी प्रसाद डालते थे। जैसे ही वह अफसर का कुत्ता प्रसाद खाने लगा तो वहाँ के लोकल कुत्ते उस पर टूट पडे। जैसे-तैसे उस अफसर ने अपने कुत्ते को बचाया लेकिन कुत्ते के कई घाव हो चुके थे, घर लाकर अफसर ने कुत्ते की मरहम पटटी की और कुत्ते को उपदेश देने लगा , क्या जरूरत थी मंदिर आने की, अकल ठिकाने आ गइ न, अब तो कभी मंदिर नहीं जायेगा।


कुत्ते ने जवाब दिया मैं तो कुत्ता हूँ फिर भी कसम खाता हूँ क़ि जहाँ मेरी बेइज्जती हुई है वहाँ कभी नहीं जाउंगा। पर तुम तो जानवरों से भी गिरे हुए हो, तुम्हारे बाप दादा और माँ बहिनो की हिंदू धर्म के नाम पर मंदिरो मे अनेको बार बेइज्जती हुई हैं फिर भी तुम कितने बेशर्म हो, तुम्हें लात मारने के बाद भी बार बार उन्ही हिन्दू मंदिरो में जाते हो।
सुधर जाओ।

Friday, 27 May 2016

जानिये कौन बनाता है आईसीस के दिल दहलाने वाले विडियो , और क्या है इनकी सच्चाई


जन उदय :  दुनिया में ऐसे शायद ही कोई और आतंकी संघठन  हो जो अपने जुल्मो के विडियो जारी करता हो , हां  ये बात सही है की ऐसे आतंकवादी संघठन अपने संदेश दुनिया को देने के लिए विडियो मेसेज का इस्तेमाल करते है ताकि पूरी दुनिया  में इन विडियो मेसेज को इन्टरनेट के जरिये फैलाया  जा सके  और लोगो में दहशत पैदा की जा सके

आप सभी लोग ऐसे विडियो देखते होंगे जो आईसीस  जारी करता है जिसमे वो कत्ल करते है , लोगो को आग में जलाते है , पानी में डुबो कर मारते है , लेकिन आपने इन विडियो की प्रामणिकता जांचने की कौशिस  की है ??  क्या आपने ये  जानने की कौशिस  की है की इस विडियो बनाने वाले क्या सच में आतंकवादी है  या इसमें किसी स्पेशल इफ़ेक्ट का सहारा  लेकर बनाए गए है और सबको बेवकूफ बनाया  जा  रहा है

आइये जानते है इन विडियो के बारे में तकनिकी रूप से

सबसे पहले इन विडियो की ख़ास बात है की इनको कम से कम कम तीन कैमरा  एंगल  से शूट  किया जाता है  यानी एक कैमरा बीच में एक  सीधे  हाथ पर और एक उलटे हाथ पर  , इसके अलावा  एक कैमरा  क्रेन  में भी रखा जाता है जिसे आप इस तरह पहचान सकते है की यह कैमरा उपर से नीचे  की और आता है और फिर नीचे से उपर की और जाता है 

इसके अलावा  पुरे  शूट को  एक लॉन्ग   शॉट  में भी रखा जाता है  ताकि  पूरा ड्रामा  बनाया जा सके ,  इसका मतलब यह है की इस शूट  की पूरी प्लानिंग  की जाती है  और इसकी  एडिटिंग  भी उसी प्रोफेसनल  तरीके से की जाती है ,

अब सवाल यह आता है की क्या ये विडियो  सच में ऐसे ही होते है , तो जवाब सुन कर आप हैरान हो जाएंगे की ये विडियो एकदम  झूठे है इनको स्पेशल इफ़ेक्ट से बनाया  जाता है जिसे होलीवूड में  दो भारतीय  की कम्पनी बनाती है  जो  वायरल  विडियो बनाने में माहिर है  जानी ऐसे विडियो  जिन्हें देख कर लोग विचलित हो जाए और जयादा से जयादा शेयर हो सोशल नेटवर्किंग  साइट्स है


ऐसा भी कहा जाता है  यही संस्था  अमरीका में आर एस एस के विडियो  भी तैयार करती है जो संघ इसी तरह के झूट के लिए  बनाए जाते है. विडियो बनाने  वाले लोगो में दो नाम मुख्य है एक है लम्बोदर  पिल्लई , और अक्षत भारद्वाज  , ये दोनों संघ के  और ऐसी  ही संस्थाओं  के लिए काम करते है जिसमे  दुसरे देशो की वेबसाइट को हैक  करना  भी शामिल है . हलांकि इस बात की पुष्टि किसी आधिकारिक  रूप से नहीं है लेकिन आम लोगो  का यह मानाना  है की ये विडियो  अमरीका  में ही बनते है   

Thursday, 26 May 2016

जानिये ऐसा क्या हुआ है की न रहेगा सरकारी स्कूल , कॉलेज और सरकारी नौकरी , तो किस काम का आरक्षण दलित ही नहीं सवर्ण भी हो जाए सावधान ,

 जन उदय : शिक्षा किसी भी समाज  या देश की तरक्की की चाबी  है आप  जिस भी समाज को तरक्की से वंचित करना चाहते है तो उस समाज से शिक्षा छीन  लीजिये बस  धीरे धीरे उनका जीवन अपने आप अंधकारमय  होने लग जाएगा . दलितों के साथ सदीओ पहले यही हुआ की इनसे सबसे पहले शिक्षा  जी छिनी  ब्राह्मणों  ने और इसके बाद वही हुआ जो ब्राह्मण चाहते थे यानी देश के मालिक  गुलाम हो गए और विदेशी  आतंकी  ब्राह्मण देश  और समाज के मालिक  और भगवान् के दूत  बन गए

जो दलित जातिवाद से परेशान हो कर मुस्लिम  राजाओं  या नवाबो की सरपरस्ती में मुस्लिम बन गए  कहने को तो वो मुस्लिम बन सामाजिक स्तर पर सामान हो गए लेकिन ब्राह्मणों  में से मुस्लिम बने लोगो ने इस  छोटी  जाति के मुस्लिम लोगो को फिर भी शिक्षा हांसिल नहीं होने दी यानी  ब्राह्मणों को डर  था अगर ये छोटी  जाति के लोग मुस्लिम बन पढने  लिखने लग गए तो एक दिन ये अपना इतिहास जान लेंगे  और धर्म या जाति  के आधार पर न सही लेकिन ब्राह्मणों को मानवता का दुश्मन ठहरायंगे  इसलिए इन दलितों  के साथ साथ बहुत सारे ब्राह्मण भी मुस्लिम बने  और इन्होने वहा भी पुरोहित पद  को और बुद्धिजीवी वर्ग को ही अपनाया  और इसके चलते इन्होने मुस्लिम समाज को  शिक्षा से वंचित रखने में कोई कसर  नहीं छोड़ी  यानी  मुस्लिम को न तो पूरा कुरआन  का ज्ञान होने  दिया   और न ही ऐसा होने दिया की ये लोग खुद  कुरआन पढ़ ले और समझ ले

है  न कमाल की बात ?? की जिस कुरआन में औरत  और मर्द की शिक्षा के उपर जोर डाला  गया है  और कष्ट झेलने के बाद भी पढने  की सलाह दी गई है  उसी मुस्लिम समाज में ३ %  लोग भी सही ढंग से शिक्षित  नहीं है  कारण ??  ब्राह्मण ..

खैर  इतिहास को छोडिये  और लोड मैकाले के प्रयासों से खिन्न हो कर आज भी उसको गाली देने वाले ब्राह्मण कहने को तो अपने आपको देशभक्त कहते है लेकिन ये लोग कभी नहीं चाहते की दलित – मुस्लिम समाज पढ़ लिख  ले और यही कारण है की ये किसी न किसी तरह से इन  प्रयासों में लगे रहते है की दलित मुस्लिम शिक्षा  के क्षेत्र में पिछड़  जाए  , ये लोग पढ़  लिख  तो ले लेकिन रिसर्च  और उच्च  शिक्षा में कभी ना आये ताकि ब्राह्मणों  द्वारा रचा गया झूट का तिलिस्म कभी न टूट  पाए
कोंग्रेस  वामपंथी  और भाजपा  ये सब एक ही थाली के चट्टे बट्टे  ब्राह्मण  है कपिल सिब्बल से शुरुआत हुई यूनिवर्सिटी में शिक्षको की कमी करना , नए  कोलेज न खोलना , इनका बजट कम करना   जिसको अब भाजपा बढ़ी श्ख्ती से लागू कर  रही है
पिछले  दस  दिन पहले यु जी सी  ने एक अजीब सा तुगलकी  फरमान  देश के सभी कोलेज  और यूनिवर्सिटी  को भेजा है जिसमे कहा गया है की हर शिक्षक को  हफ्ते में कम से कम  १६ की जगह २४ घंटे पढ़ना  होगा यानी दो शिक्षको  पर एक टीचर  कम करने की  ताकिक

अब इन जनाब से कोई ये पूछे  क्या शिक्षको  को पढ़ाने  के लिए पढने का वक्त मिल पाएगा इस तरह ?? बिलकुल  नहीं एक तरफ क्वालिटी  शिक्षा की बात करने वाली भाजपा दरसल शिक्षा को बर्बाद कर  देना  चाहती है , क्योकि  शिक्षक को पढ़ाना  तो है ही साथ के साथ यु जी सी  से सम्बन्धित  जर्नल में अपने साल में कुछ रिसर्च  पेपर  भी पब्लिश  करना जरूरी कर दिया गया है  इसके अलावा कोलेज  के प्रशासनिक  कार्य भी शिक्षको  को करने पढेंगे
इसमें दुसरा एक बढ़ा  ही  प्रवाधान  है की शिक्षक की ए पी आई में छात्रो  का फीडबेक  सबसे जयादा महत्वपूर्ण होगा  यानी अगर सरकार किसी शिक्षक को निकालना चाहे  तो छात्रो के एक्स्मूह को जो राजनैतिक  हो सकता है या  उनके इशारों पर काम करना वाला हो सकता है  , उसको शिक्षक के पीछे  लगा दिया जाएगा  और शिक्षक को  बर्बाद कर दिया जाएगा . यानी पहले छात्र  गुरु जी के पाँव  छूते  थे अब गुरु  जी छात्रो के  पाँव  छुएंगे

एक तरफ सरकार चाहती है की छात्र  राजनीती न करे सिर्फ पढ़े  दूसरी तरफ  उनको  उसी  दलदल  में धकेल रही है 
मौजूदा सरकार का दो साल का रिकॉर्ड  किसी  भी स्तर पर अच्छा  नहीं  रहा बल्कि इनकी हर चाल देश को बर्बाद करने  और गुमराह करने की रही है  , ये लोग  वैज्ञानिकों  को जो देश के लिए काम करते है उनको एक तरफ कर रही है और उन लोगो को जो चमचे है शिक्ष्ण संस्थानों  का मुखिया बना रही  है पुणे फिल्म स्कूल , हैदराबाद  यूनिवर्सिटी  जहा रोहित वेमुला  की संस्थानिक  हत्या हुई आई  आई टी  मद्रास , अलाहाबाद  उनिवेसिटी आदि


मौजूदा समय में सवाल सिर्फ दलितों  का या आरक्षण का नहीं है बल्कि , सवाल  मुस्लिम ब्राह्मण , बनिया का  भी  नहीं है सवाल यह है की अगर इसी तरह सरकारी  संस्थान बर्बाद हो जाएंगे  तो  आने वाली नसले  कहा जाएंगी , क्या भाजपा सभी सवर्ण लोगो को  अपने इजी शिक्षा  संस्थानों में जहा लाखो  रूपये  की फीस  है वहा मुफ्त पढने देगी ?? या वो  इजी संस्थान जो  सिर्फ पैसे के दम  पर चलते है सवर्णों  को  मुफ्त में आने देंगे ??  नहीं समय  और सोच सबके  पास है  देश के नाम पर आतंक  फैलाने वाले अगर पुरे देश में शिक्षा  फैलने देंगे तो सच में देशभक्त कह्लाय्न्गे  वर्ना   इतिहास अनिसार सब जानते  है की  कौन देशभक्त है  कौन  देशद्रोही ,