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Wednesday, 20 April 2016

आर एस एस से भयभीत आमिरखान ने सिर्फ सवर्ण बाहुल्य गाव ही गोद लिए

जन उदय : महारष्ट्र में सूखे की मार वैसे तो बिना जाति देखे सबको मार रही है लेकिन आर एस एस   और अन्य पार्टियो के लोग भी पानी और राहत सबसे पहले सिर्फ सवर्ण बाहुल्य वाले इलाको में ही पहुचाना चाहते है , जातिवाद का ऐसा मंजर जो इंसानियत को शर्मसार करता हो वो सिर्फ भारत में देखने को मिलता है कि एक मरते इंसान के मूह में पानी उसकी जाति पूछ कर डाला जाता है

यह कोई देश में पहली या आखिरी घटना नहीं है बल्कि इससे पहले भी जब देश में सुनामी आई थी तब तमिलनाडु में ये सब देखने को मिला था  और इसकी पूरी चर्चा या खबर अखबारों में आई थी लेकिन ये बात जातिवाद से सम्बन्धित उत्पीडन की थी इस लिए इस बात को दबा दिया गया .


आमिर खान पिछले दिनों अपने दिए गए असह्शुनता पर दिए गए ब्यान की वजह से संघियो का अपमान और क्रोध का शिकार हुआ था जिस पर आमिर ने अपनी सफाई और माफ़ी भी मांगी थी सो इस बार सोचा की सुखा ग्रस्त क्षेत्र में लोगो को पानी कैसे बचाए एक भाषण दिया जाए सो इस सिलसिले में आमिर खान महाराष्ट्र के कुछ हिस्से में घूम रहे है , इसी के साथ साथ आमिर खान ने सुखा प्रभावित दो ग़ाव को भी गोद लिया है , 

इसकी दो मुख्य बाते है कि सबसे पहला तो यह की ये दोनों गाव सवर्ण बाहुल्य है जो आर एस एस के सदस्यों ने ही सुझाए है  दूसरी बात यह की जब राज्य में पानी ही नही है तो आमिर खान क्या इन ग़ाव को पानी अपनी कार  से या हवाई जहाज से पानी ढो ढो कर देगा ??

खैर  हमारे सूत्रों को तो ये सिर्फ एक स्टंट ही लगता है 

सिर्फ भाषण और सेमिनारो में नहीं अपने चुनावी मेनिफेस्टो में ऐलान करे आरक्षण खत्म करने का


जन उदय :  आज अगर आप भारत में आरक्षण के उपर बहस को देखे तो कोई भी चलता फिरता  नेता , बुद्धिजीवी,  कवि ,नाटककार , आरक्षण पर बहस करता नजर आ जाएगा , और उस पर अपनी टीका टिप्पणी कर देगा की आरक्षण बंद कर दिया जाए कि जातिगत आरक्षण खत्म कर दिया जाए

दरअसल ये वो लोग  है जो आरक्षण को दलितों को दिए  जाने वाला  खैरात समझते है या ऐसा समझते है आरक्षण उनके हक को मार कर दलितों को दिया जा रहा है
तो सबसे पहले ऐसे मंद बुद्धिजीवी , नकली साधू , कवि छुट भय्या नेता समझ ले कि आरक्षण कोई गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम नहीं है , बल्कि सत्ता और समाज में भागीदारी का फार्मूला है और यह सविन्धानिक है , दूसरी बात यह किसी खैरात या भीख में नहीं मिलता है बल्कि १९३२ के कम्युनल अवार्ड में ब्रिटिश सरकार ने दलितों के प्रतिनिधित्व को स्वीकारा  था  और दिया गया  था ,

 लेकिन गांधी की चालबाजी से आंबेडकर ने कम्युनल अवार्ड को छोड़ा और उसके बदले आरक्षण की वाव्व्यस्था की गई , इस कम्युनल अवार्ड की ख़ास बात यह थी की दलित समाज और इसके भूगोलिक खंड पर भारत सरकार राज नहीं कर सकती थी  और न ही भारत का कोई अन्य जाति  का व्यक्ति इनके क्षेत्र से चुनाव लड़ सकता था  हाँ दलितों को ये हक था की उसको दोहरे वोट अधिकार थे

अब कोई भी बुद्धिजीवी समझ सकता है की अगर ऐसा होता  तो दलित आज स्वयं राजा होते और  खुद प्रजा उन पर कोई हुकूमत नहीं कर सकता था यानी देश के अंदर ही कई देश होते दलितों के
लेकिन फिर भी बाबा साहेब ने सदीओ की जिल्लत को भुला कर और इतिहास को ध्यान में रख कि हम एक रहेंगे तो सुरक्षत रहेंगे  को ध्यान में रखा  और भारत यानी गांधी के समझोते को मान लिया  वो भी सिर्फ और सिर्फ आरक्षण के लिए

आज  हलांकि बहुत सारे दलित नेता भी ब्राह्मण की बांटो में आकर यह कहने लगे है की आर्थिक रूप से  सक्षम दलित  आरक्षण  छोड़े , कमाल की बात यह है की सबसे पहले उन्हें छोड़ना  चाहिए ताकि बाकी दलितों को  रास्ता दिखा सके , खुद सामान्य सीट पर लड़े पार्टी के अंदर दलितों से सम्बन्धित किसी भी  विशेष अधिकार का प्रयोग न करे  , और अपने को दलित शब्द से दूर रखे

इसके अलावा जो लोग /पार्टी के नेता आरक्षण का विरोध करते है तो सबसे पहले अपने चुनावी मेनिफेस्टो में  लाये की जीतेंगे तो आरक्षण ख़त्म करेंगे , ताकि आपकी कर्त्यवनिष्ठा चमके  

Tuesday, 19 April 2016

ओड़िसा ,गुजरात में चल रहा है आर एस एस का खुनी खेल , आदिवासिओ का धर्म परिवर्तन करा हिन्दू बना रहा है आर एस एस

जन उदय : भारत में यह बात प्रमाणिक और वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुकी है की इस में शुद्र और दलित कहे जाने वाला व्यक्ति ही इस देश का मूलनिवासी है और इस देश का मालिक है , पुष्यमित्र शुंग जिसको ब्राह्मण परशुराम भी कहते है .उस वक्त जो लोग पलायन कर जंगलो में चले गए थे वही लोग आज भी आदिवासी कहलाते है .
आदिवासिओ की संख्या  भारत में बहुत बड़ी है आजादी के इतने सालो बाद भी इनका कोई विकास सिर्फ जातीय आधार पर नहीं हो पाया , लेकिन कुछ समय तक जो इनका विकास हुआ वह सिर्फ इसाई मिसनरी के वजह से हुआ और इसी कारण ये लोग अपने अधिकारों के बारे में जागरूक हो गए

जिस तरह ओड़िसा , महाराष्ट्र , बिहार झारखंड  वेस्ट बंगाल में और अन्य जगहों आर एस एस के द्वारा चलाये जा रहे सन्घठन वहा के आदिवासिओ को लालच दे कर हिन्दू बना रहे है

हाल ही में गुजरात की कूकना जनजाति के लोगो को आर एस एस के लोगो ने कपड़े , और पैसे देकर उनकी सामूहिक शादी कराई , इस जनजाती की ख़ास बात यह है की इनके युवा युवती अपनी मर्जी से अपने पसंद के लड़का लड़की के साथ रहते है सेक्स भी करते है और बच्चे भी पैदा करते है लेकिन ओपचारिक तोर पर शादी काफी बाद में करते है या ये कहे जब लगता है की ये दोनों एक दुसरे के साथ जीवन बिता सकते है तब शादी करते है, लेकिन आर एस एस के लोग इन्हें सभ्यता का पाठ पड़ा रहे है और इनका हिन्दुकरण  कर रहे है  या ये कहे इनको ब्राह्मण संस्कार दे रहे है ,कमाल की बात यह है की न तो  कोई मीडिया वाला और न ही ऐसे संघठन जो मानवाधिकार के लिए लड़ते है इनके बारे में आवाज उठा रहे है

इसके अलावा ओड़िसा में ब्राह्मणों का एक संघठन काम कर रहा है जिसका नाम है कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंस  , यह सन्घठन भी आदिवासिओ को पढ़ाने के नाम पर उनको उनके गाव देहात और उनकी संस्कृति से अलग कर रहा है और इनका हिन्दुकरण कर रहा है बताया जाता है इस इंस्टिट्यूट में २५००० से जयादा आदिवासी  छात्र छात्राए पढ़ते है . इस संस्था के चलाने के पीछे सिर्फ यही एक कारण नहीं है बल्कि इन आदिवासिओ को इनकी जंगल और जमीन छोड़ने के भी कारण है ताकि ये यहाँ आ जाए और इनका ब्रेन वाश कर दिया जाए की लोग अपनी जडो से हट जाए

गरीबी हटाओ और शिक्षा बढाओ के नाम पर संघ बहुत भयानक खेल खेल  रहा है , संघ एक तरफ इनको हिन्दू नाम दे रहा है दूसरी तरफ पुरे देश में दलितों के खिलाफ आन्दोलन छेड़ा हुआ है ताकि इनकी संस्कृति को नष्ट किया जा सके


Monday, 18 April 2016

जानिये चोंका देने वाली वो वैज्ञानिक बाते जो साबित करती है रामायण और महाभारत काल्पनिक और झूठे ग्रन्थ है

जन उदय : विज्ञान और विज्ञानिक पद्धति वह प्रक्रिया है जिससे यह साबित हो जाता है की  मानव विकास में , तकनीकी  में ब्रह्माण्ड में होने वाली क्रियाये स्वाभाविक नहीं बल्कि एक दुसरे के कार्य – कारण  और एक वयास्थित प्रक्रिया की वजह से हो रही है , धुल आंधी , हवा का  चलना एक  वैज्ञानिक प्रक्रिया है न की कोई इन्हें पंखा  ले कर चला  रहा है बारिस एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है न कोई कोई उपर से पानी बरसा  रहा है . और यह वैज्ञानिक इसलिए है क्योकि इस जांच  हो सकती है और फिर इस जांच की भी जांच हो सकती है  और हर जांच में रिजल्ट सेम ही आयगा , यानी  वैज्ञानिक प्रक्रियामे कुछ डाटा लिया जाएगा , उनको व्यवस्थित किया जाएगा  उसी जांच होगी , उसको परखा जाएगा , रिजल्ट आने पर फिर से जांच होगी , और भारत में ही नहीं दुनिया के हर हिस्से में उसी प्रक्रिया की जांच होगी और सेम रिजल्ट आने पर वह विज्ञानिक प्रक्रिया होगी
अब सवाल आता है भारत में एक वर्ग द्वारा फैलाई जा रही भ्रान्तियो के बारे में यानी रामायण और महाभारत  कभी इस देश में हुए या नहीं  या ये सिर्फ कोरी  कल्पना है ,  

इतिहास ने भी विज्ञान के नियमो को अपनाया है और इतिहास का लेखन वास्तुनिष्ट सामग्री पर लेखन के लिए ही जो डाला गया है , और जब हम  वास्तुनिष्ट सबूतों या सामग्री की बात करते है तो उस पर रामायण और  महाभारत खरी नहीं उतरती ,  आइये देखे कैसे
 कहानी रामयाण और महाभारत एक एपिक की तरह लिखे गए ज्सिका मकसद सिर्फ और सिर्फ एक  राजनितिक षड्यंत्र तय्यार करना था जिसका पहला उधाह्र्ण है

1.कोई भी वास्तु /शिल्प  सबूत नहीं : हर राजा , महाराजा , अपने लिए महल बनवाता है , भवन बनवाता है , बाग़ बगीचे बनवाता है और इन इमारतो को वह कुछ ख़ास तरीके से बनवाता है यानी हम अगर सम्राट अशोक का इतिहास देखे तो हमें सभी प्रकार के सबूत मिलते है वास्तु भी शिल्प भी लेकिन रामायण और महाभारत के इन अभिनेताओं का कुछ भी नहीं मिलता , कुछ संघटनो का कहना है की मंदिर मिले है भगवान् के तो कोई इनसे पूछे क्या भगवान् इन्हों मंदिरों से शासन करते थे ??

2 . हर शासक , राजा  , महाराजा  अपने शासन काल में अपने सिक्के यानी व्यापार के लिए सिक्के ,मुद्रा चलवाता है , जो निश्चित तोर  पर उसकी सीमा और विदेश सीमा यानी उसके शासन के बाहर भी खुदाई में मिलते है लेकिन रामायण , महाभारत काल का ऐसा कुछ भी नहीं मिलता

३.  विदेशो से सम्बन्ध एक राजा के लिए बड़े जरूरी होते है , युद्ध भी होते है  संधिया भी होती है  लेकिन इन दोनों काल के यानी रामायण और महाभारत काल का ऐसा कुछ भी सबूत नहीं मिलता

४. विदेशो से व्यापार , यात्रिओ के लिए धर्मशाला , सुरक्षा वाव्य्स्था बाग़ बगीचे , सराय ये सब भी रहा बनवाता है लेकिन इन दोनों काल का कुछ भी नहीं मिलता

५. संस्कृति – कला ,किसी भी इतिहास में या शासन में अपनी कला और संस्कृति जन्म लेती है , लेखक ,कवी आदि जन्म लेते है लेकिन न तो किताबो के स्तर पर  कुछ भी नहीं मिलता , शिल्प , पेंटिंग , नक्काशी , वाल राइटिंग, वाल कार्विंग  , भित्ति चित्र आदि इस काल का कुछ भी नहीं मिलता
६. कालखंड . सबसे बड़ी बात होती है कि कोई भी घटना किसी कालखंड में  ही होती है यानी उसका अपना एक  समय होता है  लेकिन इन ग्रंथो का कोई भी कालखंड  नहीं है कहने को तो हर  धार्मिक संघठन अपनी अपनी दलील देता रहता है , कोई कुछ काल बताता है तो कोई कुछ
इसके अलावा  जो ग्रन्थ या किताबे मिली है उनकी भी कार्बन डेटिंग से कोई सबूत नहीं मिलता की ये ग्रन्थ बहुत पुराने है बल्कि इसमें भी घपला   है

सो  विज्ञान धारणा या कल्पना से शुरू हो सकता है लेकिन हमने उड़ने की कल्पना की लेकिन  उड़े कैसे ? इसलिए विज्ञानिक  कोई भी तत्थ्य आज तक नहीं है और न ही आयगा


Saturday, 16 April 2016

“”हिन्दू शब्द कवच है””” डरपोक और देशद्रोही आर एस एस का :: वर्ना इस देश में हिन्दू कोई नहीं

जन उदय : इतिहास की विवेचना कर लीजिये  ब्राह्मण द्वारा लिखे सारे ग्रन्थ छान मारिये  जिन्हें ये भगवान् का संदेश बता कर पेश करते है  जो भगवान् ने इन्हें संस्कृत  में दिए थे , कही भी आपको हिन्दू शब्द नहीं मिलेगा , मिलेगा तो वर्ण वाव्य्स्था  या जातिवाद वो भी भारतीय समाज में .
भारत की निचले स्तर की जातीओ को ब्राह्मणों ने अपना गुलाम बना कर रखा और आने वाले हर विदेशी हमलावर  चाहे वो मुस्लिम रहे या अंग्रेज उनके सामने अपना गुलाम  बना कर पेश किया  
ब्राह्मणों ने इन निम्न स्तर की जातिओ का मानसिक ,शारीरिक आर्थिक शोषण सदीओ तक किया और आज भी कर रहे है , ये लोग बिलकुल नहीं चाहते की दलित लोग आगे बड़े या पढ़े , ये सिर्फ इनको जानवरों की तरह ही गुलाम रखना चाहते है

शुद्रो को ब्राह्मण मुसलमानों से लड़वाने के लिए जब इस्तेमाल करते है  तब ये जातिया  हिन्दू होती है

मुसलमानों से लड़ने के बाद ये  सारे  लोग अनेक  जातियों में बाँट जाते है इन्हें फिर समाज में गन्दी नजरो से देखा जाने लगता है और सारी गंदगी फैलाता है ब्राह्मण .

जब  दलितों को शुद्रो को आगे बढ़ने की बात आती है तो ब्राह्मण ही सबसे पहला व्यक्ति होता है जो दलितों के अधिकार के खिलाफ बोलता है , ये इनकी शिक्षा का विरोध करता है , 

इनके आरक्षण का विरोध करता है और इनको मिलने वाली हर सविन्धानिक सुविधाओं  का विरोध करता है
और फिर मुसलमानों का डर  दिखा फिर हिन्दू हिन्दू करने लगता है , समाज को बांटने में असमानता फैलाने में ये लोग माहिर है  और  बंटा  हुआ समाज कभी भी तरक्की नहीं कर सकता



“”चुर्रेट चुर्रेट मुट्ठी से सिक्का बाहर”” एक मंजा हुआ मदारी है केजरीवाल ,जो एक ही सिक्के को बार बार मुट्ठी निकाल कर दिखा रहा है ,दिल्ली की जनता मुर्ख नहीं है

जन उदय : आपने सडको पर मोहल्लो में मदारी देखे  होंगे जो अपनी खाली हथेली दिखा कर फिर उसमे जमीन से मिटटी उठा कर रखता है फिर एक डंडे से चुर्रेट चुर्रेट करके मन्त्र पढ़ता है और और फिर मुट्ठी खोल कर सबको सिक्का दिखाता है , सबको जादूगर लगता है , जिसमे अक्ल भी होती है वह दर्शक भी समझ तो  जाता है की ये मदारी सबको बेवकूफ बना रहा है लेकिन बावजूद उसके वो भी उस मदारी का खेल बड़े ही आनंद से देखता है .

दरअसल अरविन्द केजरीवाल एक ऐसा ही मदारी है  जो दिल्ली की जनता को इसी तरह चुर्रेट
चुर्रेट  करके नए नए शो दिखा रहा है  कभी ओड- इवन कर  कभी महाराष्ट्र में पानी भेजने के नाम पर
वैसे कोमन सेन्स की बात है की जिस दिल्ली के पास खुद के लिए अपना पानी नहीं है वो महारष्ट्र में कैसे भेजेगा पानी ??

खैर  आरक्षण विरोधी सेना का सेनापति  आज अम्बेडकर के चरणों में पड़ा है और बोल रहा है की हम अम्बेकर को अपने स्कूलों में  पढ़ायांगे सवाल यह है की केजरीवाल जी आप बिलकुल न पढाओ अम्बेडकर को ये सब सगूफे न छोडो सबसे पहले जिन सरकारी स्कूलों में दलित बच्चे पढ़ते है उन सरकारी स्कूलों की हालत सुधारों जहा पर टीचर नहीं है और जो थे उनको आपने निकाल दिया आपके घर के बाहर दिन रात इन शिक्षको का पदर्शन होता है

दूसरी बात केजरीवाल को जो दिल्ली में बहुमत मिला उसके मुख्य कारण दिल्ली में व्यापत  भ्रष्टाचार था  आपने कहा था की आप शीला दीक्षित के खिलाफ , सुरेश  कलमाड़ी के खिलाफ केस करेंगे और उन्हें जेल भेजंगे  लेकिन ऐसा नहीं हुआ

आपने लोकपाल का शगूफा भी छोड़ा था लेकिन उसका भी कुछ नहीं हुआ
और अब केजरीवाल जी ५२४ करोड़ के सालाना विज्ञापनों के खर्च को मनीष सिसोदिया के साले की एजेंसी के जरिये अपने खुद के प्रचार पर खर्च कर रहे है और वो भी  बेतुकी बातो के लिए

केजरीवाल ने अपने रिश्तेदारों को  और अपने चहेतों को मलाई वाली पोस्ट पर बिना किसी योग्यता के बिठाना शुरू कर दिया है उन्हें नीली  और लाल बत्ती की गाडिया बांटी है

तकनिकी रूप से जो पैसा बिजली सब्सिडी  के रूप में दिया जा रहा है वह बिजली कम्पनियो पर सरकार का ही उधार है जिसे आप बर्बाद कर रहे है
कुल मिला कर अरविन्द केजरीवाल दिल्ली की जनता को मूर्ख न समझे  चुनाव आने दो फिर सब पता  चल जाएगा


जानिये कौन है माता पिता , डरपोक ,निर्बल .निर्लज्ज भगवान के

जन उदय : क्या आप जानते है कि  भगवान् कौन है ,कहा है कैसा है ?? शायद नहीं  सिवाय इसके कि कुछ लोग इसकी रचना आकर लेते है अपने आपको भगवान् का एजेंट कहते है  बताते है की उनका संदेश  लेकर आये है  साथ में ये भी बता देते है की भगवान् ने उनको कुछ लाइसेंस  दिया है
खैर  भगवान् कही नहीं होता  उसका  अस्तित्व  जब तक रहता है जब तक समाज में विषमता  रहती है ,दुःख दर्द  रहता है , तकलीफ रहित है बेरोजगारी रहती है , सबसे बड़ी बात जब जीवन में कुछ भी निश्चित  न हो और चारो तरफ से इंसान मुसीबतों से घिर जाता है तब वह भगवान् के पीछे पीछे  भागने लग जाता है वह सोचता है की उसके हाथ कोई ऐसी शक्ति है जो उसे सारी मुसीबतों से बाहर  निकल देगी , जबकि कोई  भी मुसीबत , समस्या तब तक सोल्व नहीं  हो सकती जब तक उसे सोल्व करने के लिए व्यक्ति खुद खड़ा नहो हो जाता

आपको  इस बात का भी शायद यकीन नहीं होगा की आपका भगवान् उतना ही बलवान और शक्तिशाली है जितना शक्तिशाली आपका विशवास और आस्था अगर आपकी आस्था कमजोर है तो आपको भगवान् भी कमजोर होगा

आपको यह भी शायद यकीन नहीं होगा की आपका भगवान् भाषा भी वही जानता है जो आप जानत है और उसको भोग , उसका माहोल वही होता है जो आपका होता है यानी भगवान् वही भाषा और संस्क्रती को जानता है जो आपकी है

आप लाख मुशीबत में होते है लेकिन भगवान् कभी नहीं आता , कभी नहीं सुनता केवल आपने जो कर्म किये होते है उसी के आधार पर आगे का फैसला आ जाता है  बाकी कुछ नहीं होता
हाल ही  में  पुत्निग्ल मंदिर की घटना भगवान् और केदरनाथ की घटना ने यह साबित कर दिया की आप सुरक्षित नहीं है यहाँ तक की अ भगवान् के घर में भी

भगवान्  इस कद्र निक्कम्मा और नकारा  है की खुद के बनाए हुए घर में नहीं रहता ह खुद  कमा नहीं सकता अपना घर नहीं बना सकता

इसलिए आप चींखते रहिये चिल्लाते रहिये लेकिन भगवान् आपकी मदद के लिए कभी नहीं आयगा .. हाँ एक बार हिम्मत करके खड़े हो जाइए आप अपने आप के भगवान् बन जाएंगे


भगवान् का जन्म एक ख़ास शासक वर्ग ने अपनी सत्ता चलाने के लिए और जनता को बेवकूफ बनाने के लिए किया है , जातिवाद भारत में  इसका बहुत बड़ा  उधाहरण है