Apni Dukan

Thursday, 7 April 2016

भारत महिला आन्दोलन है जातिवादी , डेल्टा मेघवाल दलित है इसलिए की नहीं मिल रहा इन्साफ


जन उदय : न तो भारत में वो वक्त कभी था जब महिलाए स्वंतंत्र रूप से स्वतंत्र विचार के के रूप में एक सामाजिक शक्ति के रूप में सामने आई  और न अब है राजनीति में महिलाओं के लिए सीट आरक्षित  होने के बावजूद इनके पीछे काम इनके मर्द ही करते है और ये सिर्फ कठपुतली बन कर रह जाती है .

 ठीक इसी तरह भारत के महिला आन्दोलन है जो विभिन्न राजनैतिक पार्टियो ने अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए खड़े किये हुए है इन आन्दोलन का काम महिला अधिकारों और हको की लड़ाई के नाम पर  महिलाओं को घुमराह  रखना , अँधेरे में रखना  है

भारत में वैसे भी जितने भी महिला आन्दोलन है उन पर सब पर ब्राह्मण बनिया महिलाओं का कब्जा है जो दिखाने को तो महिला मुक्ति के लिए काम करती है लेकिन अंदर ही अंदर ये दलित महिला आन्दोलन नाम का धंधा करती है , दलित आगे न बढ़े ऐसे षड्यंत्र रचती है ''
इन महिलाओं की ख़ास बात यह भी है की ये षड्यंत्र के रूप में सांस्कृतिक कार्यकर्म का आयोजन करती है , बस ये ये कार्यक्रम इनके सारे मकसद पुरे कर देता है

राष्ट्रीय , अन्तेर्राष्ट्रीय स्तर पर दलित महिलाए बहुत कम आ पाती है , जिसका कारण इन दलित महिलाओं की शिक्षा जो एक षड्यंत्र  के तहत इन्हें कोई अंतरराष्ट्रीय भाषा नहीं सिखने देती .
अभी कुछ दिन पहले राजस्थान में बाड़मेर जिले के एक महिला कोलेज में एक दलित लड़की डेल्टा मेघवाल का बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी गई  पुलिस प्रशासन  ने इस बात को दबाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है लेकिन सोशल मीडिया की बदौलत ये मुद्दा  पुरे देश में छाया  हुआ है लेकिन फिर भी कोई भी महिला आन्दोलन वाली बाई , संस्था इस लड़की को इन्साफ दिलाने के लिए आगे नहीं आया है

आप हद देख सकते है की अपने आपको  राष्ट्रिय मीडिया कहने वाला  यह मीडिया लगातार इस बात को छिपा  रहा है और राजनैतिक स्तर पर भाजपा इस मुद्दे को दबाने के लिए कभी भारत माता , कभी कुछ अनर्गल मुद्दे  निकाल कर सामने ला रही है

 दलितों से भेदभाव  इसी से पता चलता है की  हालात डेल्टा के है की डेल्टा की लाश  को अस्पताल भी कचरा ढोने की गाडी में ले जाया गया डेल्टा के पिता की शिकायत  के बावजूद पुलिस सही ढंग से कार्यवाही नहीं कर रही है

सरकार ,पुलिस ,प्रशासन , में बैठे सभी जातिवादी लोग मामले को दबाने में लगे है

दंगा फसाद मिलेगा ,लेकिन रोहित वेमुला और डेल्टा को न्याय नहीं मिलेगा ,कश्मीर में रो रही सिम्रिति इरानी सीरियल के आंसू


जन उदय : राजनैतिक मज़बूरी कहो या धूर्तता कहो भारत माता के नाम पर सारे देश को देशभक्ति का सर्टिफिकेट बांटने वाली भाजपा ने पी डी पी से पाना गटबंधन जारी  रखा है लेकिन इस पार्टी के लोग भारत माता की जय नहीं बोलते .मुसलमानों के अलावा सिक्खों ने भी मना कर दिया है की वो किसी  भी भारत की जय नहीं बोलेंगे

भारत माता भाजपा के लिए इसलिए भी जरूरी है की कई राज्यों में चुनाव हो रहे है इसलिए अपने पुराने सिद्धांत के अनुसार इन्हें कुछ ऐसा करना ही है  यही नहीं महाराष्ट्र में पानी की कमी और धारा १४४ इस बात को दर्शाती है की भाजपा की केंद्र सरकार की तरह बाकी राज्यों की सरकारे भी फेल हो गई है

कमाल की बात  यह है की सिम्रिति इरानी जिस तरह कश्मीर में एन आई टी के छात्रो को देखने और अपना सीरियल वाले आंसू बहाने गई है  क्या उसने  कभी हैदराबाद के बारे में सोचा ??  क्या कभी ये सोचा की  डेल्टा मेघवाल जो एक राष्ट्रिय स्तर की छात्रा  थी उसको देखा जाए ??
एक दलित लडकी का बलात्कार और उसकी हत्या की खबर किसी राष्ट्रीय मीडिया या न्यूज़ चैनल में नहीं है , जाहिर है की वो लड़की ब्राह्मण बनिया नहीं है , क्योकि ब्राह्मण बनिया लडकियो के अलावा बाकी सब लडकिया या लोग जानवर से ज्यादा कुछ नहीं है .

ये बात सबको याद होगी की ज्योति पाण्डेय नाम की लड़की का दिल्ली की एक बस में बलात्कार हुआ और बाद में उसको मरने के लिए फेंक दिया गया . चूँकि यह लड़की ब्राह्मण थी तो जातिवादी मीडिया ने इसे राष्ट्रिय शर्म का मुद्दा करार दिया और पुरे देश को आंदोलित कर दिया . '

जातिवादी लोग लगातार दलित लोगो को प्रताड़ित कर रहे है लेकिन इनके लिए न तो कोई वजह  उठती है और न ही लोग केंडल मार्च निकालते है बल्कि सच्चाई यह है की इनकी हत्या करने वाले और बलात्कार करने वाले लोगो को सरकार की तरफ से अप्रत्यक्ष रूप से इनाम मिलते है
यु पी , मध्य प्रदेश , छतीसगढ़ , ओड़िसा ,बिहार , झारखंड , महाराष्ट्र गुजरात हर जगह दलित उत्पीडन की वारदाते बढ़ रही है

राजेस्थान के बाड़मेर जिले में डेल्टा नाम की एक राष्ट्रिय स्तर की एक मेघावी छात्रा की हत्या और बलात्कार हुआ लेकिन किसी भी बुद्धिजीवी ,मीडिया एन जी ओ की कान में जू तक नहीं रेंगी



Wednesday, 6 April 2016

इस देश में असली देशद्रोही और गद्दार सिर्फ विदेशी ब्राह्मण है


जन उदय : हमारे देश में ऐसे बहुत सारे कानून है जो १५० साल से भी जायदा पुराने है जिन्हें अंग्रेजो ने बनाया था और हो सकता है वो कानून उस वक्त में सार्थक हो क्योकि ये कानून अंग्रेजो की जरूरतों को पूरा करते थे , लेकिन आज ये कानून बेकार हो चुके है इन्हें न सिर्फ बदलने की जरूरत है बल्कि अपराधो की फिर से व्याख्या करने की जरूरत है

पिछले दिनों  जे एन यु के छात्रो को जिस तरह इस कानून की आड़ में प्रताड़ित किया गया  इस बात ने इस बात पर जायदा जोर दाल दिया है की इस कानून को बदला जाए
 हमें सबसे पहले इस बात को पुनर्भाषित करना होगा की आखिर देशद्रोह क्या है ?
देश के खिलाफ किसी षड्यंत्र में शामिल होने के अलावा भ्रस्टाचार को भी देशद्रोह में शामिल किया जाना चाहिए इसका एक मुख्य कारण है की जो बदहाली आज हमारे देश की है उसमे भ्रष्टाचार मुख्य वजह है

इसके लिए हम एक उधाहरण लेते है की एक संसदीय क्षेत्र में स्कूल , कोलेज , सडक स्कूल अस्पताल , डिस्पेंसरी बनाने के लिए हद से हद सिर्फ पांच साल लगेंगे , लेकिन आज ६८ साल बाद भी ये सब नहीं हो पाया है कारण के जाति के लोग जिन्होंने इस देश पर कब्जा किया हुआ है उन्होंने जानबूझ कर विकास नहीं होने दिया अगर कही कुछ हुआ तो तो वो भी सिर्फ सवर्णों के इलाको में


तो सिर्फ भ्रष्टाचार ने लोगो के मूह का निवाला छिना , कपडा छिना शिक्षा छिनी , स्वास्थ छिना कुल मिलाकर देश का विकास छीन लिया तो इस लिहाज से सबसे बड़ा देशद्रोह यही है और ये काम उन लोगो का है जिन्होंने देश की ८५ % सीट पर कब्जा किया हुआ है

महाराष्ट्र में सुखा : सरकार सिर्फ दलित बाहुल्य इलाको में पानी नहीं , सवर्णों को कोई कमी नहीं है पानी की , ,पानी बांटने में खूब पसरा है जातिवाद

जन उदय : महाराष्ट्र के कई इलाको में पानी की इस हद तक कमी है लोगो को कई कई दिनों तक लोगो को पिने का पानी नसीब नहीं हो  रहा है , हर साल ९००० हजार से जयादा किसान आत्महत्या कर रहे है जिसका  मुख्य कारण किसान की फसल की बर्बादी  जिसके कारण कर्ज की वापसी नहीं

ये बात गौरतलब है की महाराष्ट्र में पानी का भारी संकट है जिसका कारण है की कई बाँध और जलाशय में पानी की काफी कमी है लेकिन पानी की कमी से जयादा प्रभवित  इलाके लातूर , वर्धा , अमरावती  ऐसे इलाके है जहा पर दलित बाहुल्य लोग रहते है , बाकी इलाको में पानी की वैसी कमी नहीं है जैसी की इन दलित इलाको में

कमाल की बात यह है की इन्ही इलाको में पानी के टैंकर के माफिया छाये हुए है उसमे भी कमाल की बात यह है की ये पानी के टैंकर  सिर्फ और सिर्फ स्वर्ण चला रहे है ,  जिन पर कोई कार्यवाही नहीं हो रहे है  और ये लोग अपने धडल्ले से चला  रहे है
हालांकि पानी की कमी से महारष्ट्र के कई इलाको में धारा १४४ तक लगानी पड़ी है लेकिन बावजूद इसके कोई सुधार नहीं हो पा रहा है , 

इसके कई मुख्य कारण है की आजादी के बाद से ही इन इलाको में पानी की कोई सही वाव्स्था  स्थापित जानबूझ कर नहीं की गई इसका मुख्य कारण यही है की पानी की कमी से प्रबावित होने वाले इलाके जयादातर दलित है , जिनसे सरकार को कोई सरोकार नहीं है , कोई मरे या जिए

इसकी एक और बात यह  है की महाराष्ट्र में पानी की सही वाव्स्य्था को सही करने के लिए यूनाइटेड नेशन ने लाखो  डॉलर  फण्ड  दिया लेकिन नेताओं ने जानबूझ कर इस फण्ड का इस्तेमाल नहीं किया  क्योकि इसका फायदा सिर्फ दलितों को था , सो हार कर यूनाइटेड  नेशन ने ये फण्ड  बंद कर दिया


Tuesday, 5 April 2016

शेर अली आफरीदी’-गवर्नर जनरल Lord Mayo को मौत घाट उतार कर देश के लिये फांसी पर झूलने वाले अज़ीम मुजाहिद-ए-आज़ादी को आज़ाद भारत ने भुला दिया

शेर अली आफरीदी’-गवर्नर जनरल Lord Mayo को मौत घाट उतार कर देश के लिये फांसी पर झूलने वाले अज़ीम मुजाहिद-ए-आज़ादी को आज़ाद भारत ने भुला दिया
अज़ीम मुजाहिद-ए-आज़ादी शेर अली आफरीदी जिन्होंने उस समय भारत के वाइसराय लार्ड मायो को कत्ल किया था याद रहे की उस समय वाइसराय की हैसियत एक राष्ट्रपति जैसी होती थी वो पुरे मुल्क का एक तरह हुक्मरान होता था जो सिर्फ ब्रिटेन की महरानी के मातहत काम करता था।

एक छोटा सा गांव जमरूद (अफगानिस्तान से सटे) का रहने वाला बहादुर इंसान जिसका नाम शेर अली ख़ान था 30 साल के उम्र मे ही काला पानी का सज़ा हुई।


जुर्म सिर्फ़ यह था कि देश के आज़ादी के लिए अंग्रेज़ो के खिलाफ बागवात की और भारत के इतिहास के सुनहरे पन्नो मे वह पहला व्यक्ति था जिसने किसी गवर्नर जनरल को मौत तक पहुचाया अर्थात उस वक़्त के Lord Mayo को इतना ज़ख्मी किया की कोलकात्ता आते आते उस की मौत हो गयी।

2 april 1767 को Colonel Pollock, Commissioner of Peshawar ने काला पानी का फ़ैसला सुनाया था।
देश को अंग्रेज़ो से छुटकारा दिलाने और यहा से खदेड़ने के लिए एक नायाब तरीका अपनाया। मकसद सिर्फ़ यह था कि अंग्रेज़ो भारत छोड़ो ।कराची और मुंबई होते हुए उनको अंडमान के जेल(1869 ) मे पहुचा दिया गया था।
वहा पर नाई बन कर जिंदगी गुजारने लगे और उस पल का इन्तेज़ार करने लगे कि कब यहा पर लॉर्ड मायो का आना है ताकि में उसका क़त्ल कर सकु और भारत को अंग्रेज़ो से छुटकारा मिल सके।
उन्हे अच्छी तरह मालूम था अगर मे नाई का काम करूँगा तो अंग्रेज़ो के करीब जाने का मौका मिल सकेगा और मेरे उपर अंग्रेज़ो का शक नही होगा।
1869 से इन्तेज़ार करते करते वह वक़्त भी आया जब Lord Mayo Feb 8 1872 को अंडमान निकोबार पहुँचा. Hope Town नाम के जजीरे के पास जा कर वह छुप गये और उसी के पास से Lord Mayo का गुजर हुवा और पल भर गवाए बिना उन्होने ने देश पर ज़ुल्म करने वाले गवर्नर जनरल Lord Mayo को अपने चाकू का निशाना ,इस तरह बनाया कि समुद्र के पानी मे गिर गया और उसको कोलकात्ता लाते लाते मृत्यु हो गयी।
उनसे जब पूछा गया कि अपने ने Lord Mayo को क्यो मारा ?
देश के इस बहादुर ने यु जवाब दिया ”he had done it on orders from God. Then he was asked, if there was any co-conspirator. He said: ‘Yes, God is the co-conspirator” और Mar 11, 1872 को जब सूली को हसते-हसते चूमा
भारतीय जेल कर्मी को मुखातिब करते हुए उनके ज़ुबान पर ये शब्द थे
“‘Brothers! I h
s! I have killed your enemy and you are a witness that I am a Muslim.’ And then he breathed his last while reciting Kalima.”
सभी जानते है अंग्रेज़ो ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन के प्रयास के विफल होने पर खास तौर से मुस्लिम जनता को निशाना बनाया था और इसका ताज़ा सबूत अंडमान और निकोबार है जहा अभी हाल ही के वर्षो मे सबसे ज़्यादा आबादी वहा मुस्लिम की है क्योंकि जब देश के हर कोने से मुस्लिम उल्मा रेशमी रुमाल आंदोलन इत्यादि) और लोगो को काला पानी दिया जाता तो अंडमान निकोबार भेज दिया जाता और वह लोग भी अपना तक़दीर समझ कर वही बस गये और शादी व्याह करके वही जिंदगी काटने लगे और इस इन्तेज़ार मे लगे रहे की हम लोगो की क़ुर्बानी बेकार नही जाएगी
और इंशाअल्लाह एक दिन अपना देश आज़ाद होगा तो हम लोग फिर अपने घरो को लौटेगे।
इस तरह काला पानी का सज़ा पाने वाले सबसे ज़्यादा अनुपात मुस्लिमो का ही था और सारा अंडमान और निकोबार मुस्लिमो से पट गया था ।
आज़ादी के बाद सरकार ने लोगो को नौकरी इत्यादि का लालच देकर तमिलनाडु और अन्य राज्यो से लोगो को बुलाकर वहा बसाया । इस तरह अब फिलहाल मुस्लिम का अनुपात वहा कम हो गया।

ऐसे गुमनाम शहीदो को श्रद्धांजलि देने वाले आज बहुत कम है मगर जिन्होने देश के लिए अपने जान की आहुति दे दी उनको अपना मक़सद प्यारा था ना की नाम और शोहरत

आज भी दलितों के कान में शीशा पिघला कर डाला जाता है अगर मांगते है शिक्षा

जन उदय : सब लोगो ने ब्राह्मणों के उस साम्राज्य की बात तो सुनी होगी की जब दलितों को शिक्षा के लिए मनाही थी और  अगर गलती से भी कोई दलित / शुद्र स्कूल के पास से गुजर जाए और उसके कानो में कोई ब्राह्मणों का मन्त्र पड़  जाए तो उस शुद्र के कानो में शीशा पिघला कर दाल दिया जाता  था .

देश के एक बड़े   इतने बड़े समाज को ब्राह्मणों ने केवल शिक्षा  से वंचित करके गुलाम बना कर रख लिया   इसी अशिक्षा की वजह से ये मानसिक रूप से भी गुलाम हो गए और शुद्रो की ये गुलामी सदीओ तक चलती रही . यानी एक वक्त के राजा अपने ही देश में इन  विदेशी ब्राह्मण आक्रमंकारियो  के गुलाम बन गए .

शुद्रो की गुलामी सुनिश्चित   रहे  ब्राह्मणों ने इस देश में राज करने वाले वाले  , या राज करने के लिए आने वाले हर देशी विदेशी वर्ग को अपना समर्थन  दिया , और शासन करने में मदद की

शिक्षा  पर ब्राह्मणों के एकाधिकार को तोडा तो लार्ड मैकाले ने जिसने शिक्षा में सभी वर्गो को पढने का सामान अधिकार दिया  , इस पर ब्राह्मणों को बहुत अफ़सोस हुआ , खैर  इन अंग्रेजो को भी ब्राह्मण  बाद में मदद करते नजर आये

आजादी के बाद  ये ब्राह्मणों की  मजबूरी  हो गई क्योकि   डॉ  भीम राव अम्बेडकर ने पूना पैक्ट में अपने लिए सारे  अधिकार ले लिए थे लेकिन धूर्त ब्राह्मणों  ने इस पर भी चाल चली  लेकिन इतने कामयाब नहीं हुए और बाबा साहेब ने समानता  के साथ साथ सविंधान में  ही सरकार को मजबूर कर दिया की  सरकार सबको शिक्षा दे , लेकिन ब्राह्मणों को ये भी मंजूर नहीं था इसलिए इन्होने शिक्षा को निजी और सरकारी दो भागो में बाँट  दिया यानी गरीब / शुद्र  और निजी उच्च   जाति  इरादा  था ऐसा करने के पीछे की सरकारी खराब शिक्षा से ये शुद्र उपर नहीं उठ पायंगे  और इनका वर्चस्व हर चीज पर बना रहेगा, जैसा की हुआ भी लेकिन शुद्र के मेघावी बच्चे आगे निकलने लगे , और जीवन के हर क्षेत्र में आगे आने लगे , बावजूद इसके की ब्राह्मणों ने खूब बेईमानी  की  धोखे  दिए   लेकिन फिर भी शुद्र  आगे आ गए

अब ब्राह्मणों के पास एक ही रास्ता  बचा  की भारत की उस शिक्षा वाव्य्स्था को बिलकुल बर्बाद कर दिया जाए ताकि ये दलित शुद्र आगे न आ सके  इसलिए धीरे धीरे  शिक्षा का बजट कम किया जा रहा है  , उच्च संस्थाओं  जैसे आई आई टी , मेडिकल में फी बढाई जा रही है  और निजी कॉलेज को प्राथमिकता  दी जा रही है इसके अलावा उच्च शिक्षा में आने वाले दलित और ओ बी सी न आ पाए इसके लिए यु जी सी के द्वारा दी जाने वाली फेलोशिप बंद करने जा रही है यही नहीं यु जी सी का सालाना बजट इस बार ५५ % कम कर  दिया गया है , पुरे देश में  पिछले  दो सालमे ३ लाख से जयादा  सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए है

और सबसे बड़ी  बात की सरकारी स्कूलों में ९वी कक्षा तक फेल न करने की निति  से भी  शिक्षा  तो बर्बाद हो  ही  रही है  बल्कि ब्राह्मण  टीचर  इन स्कूलों में जानबूझ कर दलित  छात्रो को  तीन विषय में  फेल कर रहे है  और इनको पास करने के लिए एक हजार रूपये  प्रति विषय  लिया जा  रहा है

रोहित वेमुला  , डेल्टा की संस्थानिक हत्या  और अन्य  छात्रो की हत्या ये सब साबित कर रही है


आज से सदीओ पहले जिस  तरह शीशा  पिघला कर डालने का चलन  रहा होगा , अब शीशा  पिघला कर  दलितों के कान में डालने का स्टाइल  बदल  गया है लेकिन काम वही है 

Monday, 4 April 2016

जूते भी साफ़ किये टट्टी सिर पर ढोई ,लेकिन ब्राह्मणों की तरह देश से गद्दारी नहीं की मधु मिश्रा एक राजनैतिक वेश्या है


जन उदय : मधु मिश्र जो भारतीय जनता पार्टी की महिला मोर्चे की अध्यक्ष है इनको शायद ब्राह्मणों  का इतिहास नहीं मालूम है की किस तरह  ब्राह्मणों  ने इस देश से गद्दारी की है ,वैज्ञानिक तौर  पर साबित हो चुका है की ब्राह्मण विदेशी हमलावर है लेकिन बावजूद इसके इस देश ने इनको खाने को दिया , रहने को जगह दी , पहनने को कपडे दिए  लेकिन इनकी फितरत हमेशा गद्दार और लुटेरे की बनी रही  जो आज भी बनी हुई है ,

भाजपा की महिला मोर्चा अध्यक्ष मधु मिश्रा जिस परसुराम समारोह में बोल रही थी दरसल इस परसुराम का  असली नाम पुष्य मित्र शुंग  था जो  सम्राट अशोक के पोते के वक्त उसका सेनापति था , इसने धोके से अशोक के पोते को मार सत्ता  हथिया  ली और इसके बाद इसने दलितों और बौध  लोगो की हत्या करना शुरू कर दिया , यहाँ तक की इसने गर्भवती बौध महिलाओं के पेट फाड़ कर उनके बच्चे को निकाला और फिर उसकी हत्या  की , 


यही नहीं  भारत में जो भी मंदिर  नजर आते है जिन्हें ब्राह्मण अपने भगवानो के मंदिर बताता है वे भी बौध मठो को तोड़ कर  ही बनाए गए है  जिसका स्स्बूत यह है की जब बाबरी मस्जिद को तोडा  गया तो उसके निचे से कोई  ब्राह्मण देवी देवता की नहीं बल्कि बौध  मुर्तिया ही निकली है


यहाँ तक की आज भी खुदाई में सिर्फ बौध विहार और मठ मिलते है न की कोई मंदिर  जिससे ये साबित हो जाता है की इस देश में मंदिर थे  ही नहीं
मुस्लिम काल में भी ब्राह्मणों ने अपनी जान बचाने के लिए मुस्लिम राजाओं का ही साथ देना बेहतर समझा इस बारे में काफी शौध सामने आये है की गैर इस्लामी लोगो पर लगने वाला जाजिया  कर ब्राह्मणों पर नहीं लगता था क्योकि ये मुस्लिम राजाओं से फ़रियाद करते थे की ये कर  ब्राह्मणों पर न लगाया जाए  क्योकि ब्राह्मण भी मुस्लिम की तरह विदेशी है

इसके बाद ब्रिटिश शासन काल में तिलक  सावरकर , गोविलकर , अटल बिहारी बाजपाई ये  ऐसे लोग है जो अंग्रेजो की मदद करते थे  और उनको शासन  चलाने में साथ देते थे , इसके साथ ही अंग्रेजो के लिए मुखबरी का भी काम करते थे ,
आई सी एस परीक्षा में १७ में से १६ ब्राह्मण हुआ करते थे ,  इसलिए १९४७ के बाद ये हमेशा उच्च पदों पर रहे  और अन्य सवर्णों को राजनीती में साहयता  दी  और देश को लूटना जारी रखा

इसका एक बेहतरीन उधाह्र्ण देखिये  “” एक संसदीय क्षेत्र  के विकास के लिए जिसमे स्कूल , डिस्पेंसरी , अस्पताल , कोलेज , सडक , बिजली अगर देना हो तो कितना  समय लगेगा ??  तो कोई भी साधारण  व्यक्ति कह सकता है की हद से हद बीस साल , लेकिन ये सब चीजे आज भी हमारे देश में उपलब्ध नहीं है ?? कारण   यह है की इन ब्राह्मणों ने ही विकास का सारा पैसा खा लिया  और इसे नाम दिया भ्रष्टाचार का , जब की यह विषय सबसे बड़े  देशद्रोह का होना चाहिए
इन बातो से साबित हो जाता है की ये सबसे बड़े  देशद्रोही है , गद्दार है , ये लोग जब तक शासन में रहंगे  या इस देश में रहेंगे  इस देश से गद्दारी करते  रहेंगे , कभी कांग्रेस  ,बन कर कभी भाजपा  बन कर कभी वामंपथी  बन कर

 मधु मिश्रा   का ब्यान “”उत्तर प्रदेश में भाजपा की महिला मोर्चा अध्यक्ष मधु मिश्रा ने एक विप्र समारोह में लगातार लगातार सजग और शिक्षित होते दलित समाज के आगे बढ़ने पर अपनी टीस जाहिर की। ब्राह्मणों के कार्यक्रम में उन्होंने दलितों को निशाना बनाते हुए कहा कि जो कभी तुम्हारे जूते साफ करते थे


 वे आज संविधान के सहारे तुम्हारे ही सिर पर बैठकर राज कर रहे हैं। यह बयान उन्होंने अलीगढ़ के रामलीला मैदान में आयोजित विप्र सम्मेलन व होली मिलन समारोह में दिया। उन्होंने कहा था, ''साथियो आप सब यहां बैठे हैं। यहां कुछ विप्र बंधुओं के अलावा भी लोग बैठे हैं। मैं उनसे क्षमा चाहती हूं। आज तुम्हारे सिर पर बैठ कर संविधान के सहारे जो राज कर रहे हैं। याद करो, वो कभी तुम्हारे जूते साफ किया करते थे। आज तुम्हारे हुजूर हो गए हैं। क्यों? क्योंकि हम बंट गए। हम विभाजित हो गए।''