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Monday, 11 April 2016

पानी के बिना तडप तड़प कर मर रही है गाय : संघी इसको भी गोहत्या दिखा फायदा उठाना चाहते है

जन उदय : जिस तरह देश में सुखा पड़ा है और विशेस रूप से महाराष्ट्र में पानी की कमी है जहा पर पानी के लिए कही युद्ध न हो जाए तो धारा १४४ लगा दी गई

वैसे धारा १४४ इसलिए लगाईं गई है ताकि दलित लोग कही सवर्णों के इलाके से पानी छीन कर न ले जाए . गौरतलब यह भी है की सवर्णों की बस्तिओ में इलाको में पानी सरकार द्वारा बराबर पहुचाया जा रहा है

दूसरी तरह एक और दुखद हादसा सामने आ रहा है की दलित किसान पानी की वजह से अपने जानवर ओने पोने दामो में अपने जानवरों को बेच रहे है और इन इलाको को छोड़ रहे है

मराठवाडा मे भूख प्यास से तडप तडप कर मर रही गऊ माताओं के लिए इतने बडे देश मे किसी भी गौभक्त की भक्ति उमडकर नही आ रही है...


बीड़, लातूर, ओस्मानाबाद और पारभानी इलाके सबसे ज्यादा सूखा प्रभावित 4 जिले हैं। यहां बारिश सामान्य से 60-65 फीसदी कम हुई। जुलाई में बोई गई पूरी फसल बर्बाद हो गई है। कई जगह किसानों ने अगस्त में दोबारा रोपनी की, लेकिन वह फसल भी सूख गई।

आसपास की पूरी जमीन सूखी और खाली पड़ी है। जुलाई से लेकर अबतक लगाई गई फसलों पर वह 30,000 खर्च कर चुके हैं और सारी फसल बर्बाद हो गई है।


कमाल की बात है गोमाता गौमाता कर जिन लोगो ने पुरे देश में आतंक फैला दिया , लोगो के घर में घुस घुस कर लोगो की हत्याए की वही लोग इन गायो को बचाने की जगह इनकी लाशो से अपना राजनैतिक फायदा उठाना छह रहे है , यानी हिन्दू मुस्लिम दंगे करवाना छह रहे है ,

Wednesday, 6 April 2016

महाराष्ट्र में सुखा : सरकार सिर्फ दलित बाहुल्य इलाको में पानी नहीं , सवर्णों को कोई कमी नहीं है पानी की , ,पानी बांटने में खूब पसरा है जातिवाद

जन उदय : महाराष्ट्र के कई इलाको में पानी की इस हद तक कमी है लोगो को कई कई दिनों तक लोगो को पिने का पानी नसीब नहीं हो  रहा है , हर साल ९००० हजार से जयादा किसान आत्महत्या कर रहे है जिसका  मुख्य कारण किसान की फसल की बर्बादी  जिसके कारण कर्ज की वापसी नहीं

ये बात गौरतलब है की महाराष्ट्र में पानी का भारी संकट है जिसका कारण है की कई बाँध और जलाशय में पानी की काफी कमी है लेकिन पानी की कमी से जयादा प्रभवित  इलाके लातूर , वर्धा , अमरावती  ऐसे इलाके है जहा पर दलित बाहुल्य लोग रहते है , बाकी इलाको में पानी की वैसी कमी नहीं है जैसी की इन दलित इलाको में

कमाल की बात यह है की इन्ही इलाको में पानी के टैंकर के माफिया छाये हुए है उसमे भी कमाल की बात यह है की ये पानी के टैंकर  सिर्फ और सिर्फ स्वर्ण चला रहे है ,  जिन पर कोई कार्यवाही नहीं हो रहे है  और ये लोग अपने धडल्ले से चला  रहे है
हालांकि पानी की कमी से महारष्ट्र के कई इलाको में धारा १४४ तक लगानी पड़ी है लेकिन बावजूद इसके कोई सुधार नहीं हो पा रहा है , 

इसके कई मुख्य कारण है की आजादी के बाद से ही इन इलाको में पानी की कोई सही वाव्स्था  स्थापित जानबूझ कर नहीं की गई इसका मुख्य कारण यही है की पानी की कमी से प्रबावित होने वाले इलाके जयादातर दलित है , जिनसे सरकार को कोई सरोकार नहीं है , कोई मरे या जिए

इसकी एक और बात यह  है की महाराष्ट्र में पानी की सही वाव्स्य्था को सही करने के लिए यूनाइटेड नेशन ने लाखो  डॉलर  फण्ड  दिया लेकिन नेताओं ने जानबूझ कर इस फण्ड का इस्तेमाल नहीं किया  क्योकि इसका फायदा सिर्फ दलितों को था , सो हार कर यूनाइटेड  नेशन ने ये फण्ड  बंद कर दिया