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Monday, 22 May 2017

अन्याय और उत्पीडन के खिलाफ एक लोकतांत्रिक आवाज है भीम आर्मी : श्रीकांत सत्वदे


संघियो ब्राह्मणों  के आतंकवादी हजारो तरह तरह के दस्तो  के रूप में काम करते है एम् एन एस , शिव सेना , हिन्दू सेना , गो-आतंक , धर्म सेना , ब्राह्मण सेना , ब्राह्मण मह्सभा  आर  एस एस , हिन्दू परिषद , विश्व हिन्दू  परिषद् , बजरंग  दल , ये सब दल धर्म के नाम पर देश में आतंक फैलाते  है दंगे करवाते है  लेकिन कमाल की बता है मीडिया में कभी इस बात की चर्चा नहीं हुई की ये दल  देश के  लोकतंत्र  के लिए खतरा है या नहीं लेकिन जैसे ही दलितों  का एक  दल  जो सिर्फ अपने उपर  हुए अत्याचारों  के खिलाफ एकजुट  हो कर पदर्शन करने  लग जाता  है  तो सारे  आतंकवादी  ब्राह्मण  यह कहने लग जाते है  की इस  दल  पर  विचार  होना चाहिए

“सदियों के दमन से उपजी घुटन और अत्याचारों का मुकाबला करने के लिए दलितों के भीतर प्रतिकार की बलवती होती भावना का परिणाम ही ‘भीम आर्मी’ जैसे संगठन हैं। ”

पश्चिमी यूपी में दलित युवाओं के आक्रोशित समूह ‘भीम आर्मी’ के उभार को लेकर प्रशासन और समुदाय दोनों सकते में है। सहारनपुर में हाल ही में हुई हिंसा में भीम आर्मी के हाथ होने की बात पुलिस के आला अधिकारी कह रहे हैं। वहीँ ‘भीम आर्मी’ के पदाधिकारियों ने किसी भी हिंसक कार्यवाही में हाथ होने से साफ इंकार किया है। खैर सच्चाई तो जांच के बाद ही सामने आयेगी।

वैसे भीम आर्मी इतना भी खूंखार या रहस्यमय संगठन नहीं है, जैसा सत्ता और मीडिया प्रतिष्ठान उसे बनाने पर तुले हुए है। भीम आर्मी को लेकर काफी सामग्री सोशल मीडिया पर उपलब्ध है। जिसमें उसके कर्ताधर्ता नवजवान चंद्रशेखर रावण, सतीश कुमार, अंकित, अक्षय, रोहित राज और ममता के भाषण और इंटरव्यू मौजूद है। भीम आर्मी अपने सारे सार्वजनिक रूप से करती आई है। उनका दावा है कि भीम आर्मी दलित समुदाय के लोगों में आत्मरक्षा और स्वाभिमान का भाव जगाने के लिए कार्यरत है। कई गांव की दलित बस्तियों में भीम आर्मी के लोग, उनके बोर्ड और पोस्टर सहजता से उपलब्ध है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि दलित युवाओं के मध्य भीम आर्मी की जबरदस्त विश्वसनीयता और लोकप्रियता देखी जा सकती है।



क्यों पनपते हैं ‘भीम आर्मी’ जैसे संगठन?

इसका जवाब कथित उच्च जाति वर्णों द्वारा किए जाने वाले दमन और शोषण में छिपा है। आज तकरीबन हर सवर्ण जाति केे नाम पर तरह-तरह की सेनाएं, संगठन हैं, जो अपनी जातीय गौरव के नाम पर कानून और व्यवस्था को जब चाहे तक पर रख देते हैं। जातिवादी सेनाओं का यह दौर बिहार में रणवीर सेना के दौर में चरम पर रहा। बीच का कुछ वक्त गुजरा जब इस प्रकार की सेनाओं की धमक कुछ कम सुनाई दी, लेकिन अब देश भर में तरह तरह की सेनाएं पूरे जोश हैं। कई बार इनके अन्याय और अत्याचार के सामने पुलिस व प्रशासन भी मौन रहता है।

इन संविधानेत्तर सेनाओं को इतना शक्तिशाली कर दिया गया है कि वे अब हर चीज़ को नियंत्रित करने लगी है। खासतौर पर मंडल कमीशन के लागू होने और राजनीतिक हिंदुत्व के उभार के बाद कई जातिसूचक सेनाएं अस्तित्व में आईं। अधिकांश जातिसूचक सेनाओं में दलितों के प्रति घृणा का जो भाव कूट-कूटकर भरा है वह आरक्षण विरोध के नाम पर पूरी ताकत से सामने आता रहा है। इन सेनाओं ने राष्ट्रीय प्रतीकों, महापुरुषों का भी जातिकरण करने का काम किया और उन्हें अपनी अपनी जाति की जागीर में बदल दिया है। शिवाजी महाराज हो या महाराणा प्रताप, इन्होंने किसी को नहीं छोड़ा।

दमन का प्रस्फुटन है भीम आर्मी

गैर दलित जातियों की जाति सेनाओं की वजह से दलितों को शिक्षण संस्थानों से लेकर आजीविका के स्थानों और राजनीतिक अवसरों तक हर तरफ दमन का सामना करना पड़ रहा है। अनुसूचित जाति जन जाति अत्याचार निवारण अधिनियम का भी विरोध करना इन सवर्ण जातिवादी सेनाओं का प्रमुख काम रहा है। खुलेआम हिंसा के जरिये दलितों में दहशत पैदा करने को आतुर इन जाति सेनाओं को राजनीतिक प्रश्रय भी मिलता रहा है। नतीजा यह हुआ कि इन सेनाओं से पीड़ित दलितों में आक्रोश बढ़ता गया। इस दमन और घुटन का प्रस्फुटन भीम आर्मी जैसे संगठनों के उभार की असली वजह है।

दलितों ने हमेशा संंविधान को माना

अब नवजवान दलित पीढ़ी में शिक्षा आई है और सामर्थ्य भी। उन्होंने संविधान को समझा, कानून और व्यवस्था का आदर किया तथा संविधान के दायरे में रह कर न्याय के लिए संघर्ष किया है। देश की 70 साल की आज़ादी के इतिहास में एक भी स्थान पर दलितों के संगठित सशस्त्र संघर्ष का कोई उदहारण नहीं मिलता है। दलितों ने सदैव संविधान को माना और आज भी वे पूरी तरह से संविधान के दायरे में ही अपने संगठन निर्माण और जन जागरण का काम करते दिखाई पड़ते है।

जहां तक भीम आर्मी का सवाल है, वह भी संविधान की हदों में रहकर ही कार्यरत है। लेकिन जहां दलितों के साथ गंभीर हिंसा की घटनाएं हुई हैं, वहां प्रतिरोध में आवाज उठाने का काम भी भीम आर्मी ने किया है। इसके अलावा कोई रास्ता भी उनके पास नहीं था।

सहारनपुर की सच्चाई

हाल ही में जो घटनाक्रम सहारनपुर जिले में हुआ है, उसमें पहले अम्बेडकर जयंती के नाम पर सत्तारूढ़ दल के लोगों द्वारा दलितों और मुसलमानों को भिड़ाने की कोशिश की गई। इसमें सफलता नहीं मिली तो दलित बस्ती पर हमले किये गये, रविदास का मंदिर तोडा गया, अम्बेडकर की प्रतिमा खंडित की गई, दलितों के घर जलाये गये, दलित महिलाओं के हाथ काटे गये। जमकर हिंसा का तांडव शब्बीरपुर में किया गया। इस वारदात के घटित होने के चार दिन बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की गई तो आक्रोशित दलित समुदाय ने भीम आर्मी के बैनर तले महापंचायत की इजाजत मांगी जो नहीं दी गई। महापंचायत में शिरकत करने जा रहे युवाओं को भड़काने के लिए उन पर जगह-जगह लाठी चार्ज किया गया। अंततः आक्रोशित भीड़ ने कानून व्यवस्था को हाथ में ले लिया। अब शासन, प्रशासन और मीडिया सब तरफ से आवाज उठ रही है कि भीम आर्मी पर प्रतिबन्ध लगाओ, क्योंकि वह हिंसक है। उसके नेताओं पर रासुका लगाओ, क्योंकि वे राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खतरा बन चुके है।


मगर सवाल यह है कि जब तक दलित मार खाता रहे, तब तक वह राष्ट्र की सुरक्षा के लिए कोई खतरा नहीं है। जब तक सवर्ण सेनाओं की मनमानी दलित सहे, तब तक वह भला है लेकिन जैसे ही वह जवाब देने लगे तो खतरा बन जाता है। यह दोगलापन है, यह पाखंड है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है।


जब से सहारनपुर हिंसा के लिए सिर्फ भीम आर्मी को गुनहगार ठहराने की कोशिशें चली हैं, दलितों के दिल में भीम आर्मी के प्रति जबर्दस्त सहानुभूति और समर्थन की लहर उठ खड़ी हुई है। दलित राजनेता और बुद्धिजीवी भले ही भीम आर्मी की आलोचना करते दिख रहे हो मगर जो लोग शासन में है वो भीम आर्मी को मिल रहे जन समर्थन से अनजान नहीं होंगे।

Sunday, 21 May 2017

भीम आर्मी के पदर्शन में पहुचे लाखो लोग : ये गृह युद्ध के लिए शुभ संकेत


जन उदय : सहारनपुर काण्ड   जिसमे  ठाकुरों ने पुलिस और प्रशासन की मदद से चमारो के २००  से जयादा घर जला दिए और जब चमार पुलिस  रिपोर्ट करने गए तो उलटा उन्ही  पर नाक्साली  होने के आरोप लगा दिए गए और उन्हें जेल में ठूंस दिया गया ,

ऐसा भारत के इतिहास में पहली बार नहीं हुआ है  क्योकि  सवर्णों  में  नुपुन्स्कता  धूर्तता  हमेशा से रही है   इसलिए  इसके विरोध में भीम आर्मी नामक संस्था ने आज जंतर मंतर  पर धरना  पदर्शन  किया  जिसमे लाखो  लोगो ने शिरकत  की 

इस आन्दोलन की ख़ास बात यह थी की  इसकी सिर्फ घोषणा की गई  थी इसके बाद  फेसबुक   और व्हात्सप्प  पर लोगो के बीच मेसेज  शेयर  हुए और लोग  बिना किसी पार्टी और नेता के अपने आप आ गए  दरसल  इनका आना यह बता दर्शाता  है की  देश के अंदर  अभी तक जातिवादी  जुल्म बंद नहीं हुए है और आज भी लोग सवर्णों  के जुल्मो के शिकार है . इस आन्दोलन की ख़ास बात यह थी


की इसमें देश केकोने कोने से लोग आये थे ,

दुनिया के देश मिश्र ,लीबिया , यूगांडा , रवांडा ,अफगानिस्तान इरान , ईराक और भी बहुत देश है जो गृह युद्ध के चपेट में रहे है ,और है कारण भेदभाव और दमनकारी निति सरकार ने इनके जबाने काटने तक की कोशिस की लेकिन जनता आखिर जनता है उसकी आवाज ही खुदा का फरमान होता है , शायद ये बात संघ और उसके घटक दलों को समझ नहीं आ रही है

जब से ये लोग सत्ता में आये है देश के गरीब मजदूर दलित -मुस्लिम लोगो का जीना मुस्किल हो गया है रोजगार से लेकर इंसान का जीना मुस्किल हो गया है शिक्षा स्वास्थ , कानून वाव्य्स्था हर चीज बेकार हो गई है कुल मिला कर आम आदमी का जीना मुस्ल्किल हो गया है, अखलाक , डेल्टा मेघवाल , रोहित वेमुला ,गुजरात में गो आतंकियो द्वारा आक्रमण , अलवर में मुस्लिम की हत्याए , उत्तर प्रदेश में लगातार दलितों की हत्याए कुल मिला कर इन्होने देश को नरक में तब्दील कर दिया है
और यही कारण है की अब लोग इनसे तंग आ गए है और ऐसा लगता है देश में जल्द ही एक गृह  युद्ध होगा




भारत में गृह युद्ध की वजह सिर्फ जातिवाद ही नहीं है कश्मीर , असाम, मणिपुर , पंजाब , तेलंगाना , आदिवासी समस्या देश के राजनैतिक तापमान को हमेशा उंचा बनाय रखते है


हालात बदल रहे है दलितों में मुसलमानों में रोष बढ़ता जा रहा है , और यह रोष अब धीरे धीरे इतना बढ़ रहा है की ये बहुत जल्द ही एक जातिय गृह युद्ध के चपेट में आने वाला है बहुत सारे दलितों ने कह दिया है की वो हद स हद दस बारह साल इन्तजार करेंगे इसके बाद मारेंगे या मरेंगे यानी देश में गृह युद्ध . इस बीच दलितों ने ब्राह्मणों और सवर्णों की मेपिंग करना शुरू कर दिया है यानी किस मोहल्ले में कितने ब्राह्मण राजपूत , बनिए है उनके पास क्या सम्पति है कितने हथियार है इस बात का सर्वे निजी तौर पर हो रहे है . निहत्थे कमजोर दलित कैसे सत्ताधारी ब्राह्मणों को समाप्त कर पायंगे इस पर एक दलित ने बताया की कौरव पांडव युद्ध में पांड्वो ने कौरव से खूब कहा की मान जाओ , हमें पांच सहर दे दो , पांच सहर नहीं तो पांच गाव दे दो पांच गाव नहीं तो पांच पद जमीन दे दो लेकिन सत्ताधारी कोरव जिनके पास सब कुछ सेना हथियार , सम्पदा वो भला किसी से यानी फकीरों से क्यों डरने लगे , अंजाम आज भी सबको मालूम है इसी तरह रावण ने भो सोचा की कैसे ये वनवासी मुझे जित लेंगे मेरे पास सब कुछ है , वर्तमान में कर्नल गद्दाफी का उधाह्र्ण देते हुए दलित युवक ने बताया की वो आदमी ज्सिका देश में कब्ज़ा था सेना उसकी थी , हथियार थे लेकिन कैसे मारा गया कुत्तो की मौत , वैसे ही ये संघी ब्राह्मण मारे जाएंगे 

AGAINST THE CASTE ATROCITY IN SAHARANPUR MEMBERS OF BHIM ARMY GETHERED AT JANATAR MANATAR , IT IS SIGN OF DALIT REVOLUTION IN INDIA , IT WILL LAST THE BRAHMANS IN INDIA , CIVIL WAR IN INDIA 

Thursday, 18 May 2017

बदनाम कर रहा ही ब्राह्मणवादी मीडिया भीम आर्मी को : कातिलो की जगह ,पीडितो को जेल में बंद कर रही है

बदनाम कर रहा ही ब्राह्मणवादी मीडिया भीम आर्मी को : कातिलो की जगह ,पीडितो को जेल में बंद  कर रही है  
जन उदय : सहारनपुर में ठाकुरों ने दलितों की बस्ती में हुड-दंग किया या के युवाओं की महिलाओं की बुजुर्गो की पिटाई की , इसके बदले में पुलिस ने अपनी जातिवादी मानसिकता के चलते ठाकुरों पर कोई कारवाही नहीं की डी एम् भी चुप रहा इसी बीच वीर बहादुर ठाकुरों ने २० से जयादा निहत्थे चमारो को तलवारों से घायल कर दिया . लेकिन फिर भी पुलिस वालो ने कोई कार्यवाही नहीं की इस पर चमारो ने पुलिस की गाडिया जला दी और चौकी को आग लगा दी .

इसके बाद पुलिस और प्रशासन मीडिया में इस तरह की गलत बयानबाजी कर रहा है की सारी फसाद की जड़ भीम आर्मी है



कमाल की बाते देखो :

१.     पुलिस प्रशासन यानी एस एस पी दुबे और डी एम् नरेंदर सिंह , जो ठाकुर है ने ठाकुरों को दंगा करने से नहीं रोका , पुलिस के होते हुए भी मौके पर पुलिस नहीं भेजी
२.     दंगाई ठाकुरों के खिलाफ जिन्होंने निर्दोष बच्चे , बुजुर्गो को तलवारों से मारो उनके खिलाफ कार्यवाही नहीं की
३.     जब भीम आर्मी ने इनके खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए पुलिस पर दबाव डाला तो इनके ही खिलाफ मुकदमा बना दिया
४.     पुलिस कहती है की भीम आर्मी ने अपना ग्रेट चमार का बोर्ड लगा रखा है जिससे ठाकुरों को ऐतराज है .. तो कोई इनसे पूछे क्या बोर्ड लागना अपराध है ?? और इस बोर्ड से ठाकुरों को क्या जलन है ?? यानी हमेशा डरे , इनको सलाम ठोके तो सही वर्ना उपद्रवी ?? या इन लोगो के नाम से सब कुछ हो
५.     इतनी घटना के बाद मीडिया ने सही ढंग से रिपोर्टिंग नहीं की
६.     मीडिया पर सरकार ने दबाव डाला खबर न दिखाए
७.     दंगाईओ के लिए प्रशासन की तरफ से हथियारों की सुविधा मिली
८.     घायल चमारो को इलाज तक नहीं होने दिया जा रहा

अब कोई बताये क्या अपनी रक्षा करना अपने आत्म-सम्मान की रक्षा करना अपराध है ??
इन्ही ठाकुरों ने जब ये लोग बाबा साहेब की मूर्ति लगा रहे थे तो मूर्ति नहीं लगने दी इन लोगो ने सरेआम गुंडागर्दी की जब भी जातिवादी मानसिकता के पुलिस प्रशासन ने ठाकुरों की मदद की .

इन्ही चमारो को मुसलमानों से लड़वाने के लिए आर एस एस नाम के आतंकवादी संघठन ने २० अप्रैल को कोशिस की कमाल की बात ये है जब इनको डर लगता है तब ये लोग चमार भंगी को हिन्दू हिन्दू कहने लग जाते है . वर्ना इसके बाद इन्हें अछूत बना कर हमला करते है भेदभाव करते है . सहारनपुर उत्तर प्रदेश या गुजरात या अन्य स्थानों पर यह रोज होता है लेकिन तब कोई आगे नहीं आता

सहारनपुर में भीम आर्मी के लोगो ने जो किया यह बात पुरे देश के दलित समाज को काफी प्रेरित कर रही है , और लाखो करोडो लोग भीम आर्मी में जाना चाहते है . इनका मानना है की आर एस एस जैसे संघठनो और अन्य ठाकुर बनिए ब्राह्मणों की जातीय गुंडागर्दी रोकने में कामयाब होगा और इस देश पर फिर से मूलनिवासियो का वर्चस्व होगा और पुरे देश में फैली अमानिविय प्रथाए खत्म होंगी



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