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Sunday, 25 February 2018

भारत सभी अलगाववादी पार्टी भाजपा के साथ ही क्यों ?? : मो.मिनाज़

देश में अलगाववाद एक ऐसी समस्या है जिससे भारत आजादी के बाद से ही जूझ रहा है और इसकी वजह से वुरे देश में अशांति है इन शक्तिओ के उबरने का एक कारण यह भी है की इनके क्षेत्रो में सामाजिक -आर्थिक विकास न के बराबर हो पाया और इसको एक षड्यंत्र के तहत होने ही नहीं दिया गया यानी जानबूझ कर इन कोमो को इन प्रान्तों को विकास से दूर रखा गया . 

कमाल की बात यह है की १९५० से लेकर अब तक देश की नौकरशाही , राजनीती और प्रशासन में केवल और केवल एक ही जाति के लोग हावी रहे है यानी ब्राह्मण और इन ब्राह्मणों ने देश केविकास के पैसे को लूट लिया और देश से इस गद्दारी को नाम दिया भ्रष्टाचार . खैर 



आज बैठे बैठे अचानक मन में विचार आया, आप भी एक बार विचार जरूर कीजिएगा... 
अलग गोरखालैंड की मांग करने वाला 
"गोरखा जनमुक्ति मोर्चा" का गठबंधन बीजेपी के साथ है। 
आज़ाद नागालैंड की मांग करने वाला 
"नागा जनमुक्ति मोर्चा" का गठबंधन बीजेपी के साथ है। 
आज़ाद कश्मीर की मांग करने वाली 
"पीडीपी" का गठबंधन बीजेपी के साथ है। 
आज़ाद खालिस्तान की मांग करने वाला 
"अकाली दल" का गठबंधन बीजेपी के साथ है। 
केवल मराठियों के लिए महाराष्ट्र की मांग करने वाली "शिवसेना" का गठबंधन बीजेपी के साथ है। 
अलग बोडोलैंड की मांग करने वाला 
"बोडो जनमुक्ति मोर्चा" का गठबंधन बीजेपी के साथ है। 

Friday, 9 February 2018

मोदीजी, नेहरु में कमियां रही होंगी मगर आपके ‘संघी पूर्वजों’ की तरह वो ‘अंग्रेजों’ की दलाली तो नहीं करते थे : उर्मिलेश


मोदीजी, नेहरु में कमियां रही होंगी मगर आपके ‘संघी पूर्वजों’ की तरह वो ‘अंग्रेजों’ की दलाली तो नहीं करते थे : उर्मिलेश

मैं सहमत हूं, कांग्रेस का शासन अच्छा नहीं था। उसके कुछ साल तो वाकई बुरे थे। पर उसके बाद का यह ‘संघ परिवारी राज’? यह तो बहुत बुरा, विनाशकारी होने की हद तक बुरा साबित हो रहा है!

लोकतांत्रिक संरचनाएं चरमरा रही हैं। संवैधानिक संस्थाएं अपना स्वतंत्र वजूद खो रही हैं! विरोधियों, आलोचकों और असहमति की आवाजों को तरह-तरह से कुचला जा रहा है!

यह बात सही है कि सन् 1947 में जिस तरह स्वतंत्र भारत वजूद में आया, उसे हासिल करने में इस ‘भगवा परिवार के पूर्वजों'(जो सन् 1925 से लगातार सक्रिय रहे पर आजादी की लड़ाई में नहीं!) का कोई योगदान नहीं था। इनके पूर्वजों में कुछ बेहद गणमान्यों ने ‘टू नेशन थिउरी’ का मोहम्मद अली जिन्ना से पहले ही प्रतिपादन कर दिया था।

इनका मातृसंगठन शुरू से ही कुछ अलग तरह का देश चाहता था। उन्हें मनु का देश और मनु का विधान पसंद था। वे मुल्क को अतीत के राजे-रजवाड़ों की हुकूमत की तरफ ले जाने चाहते थे। वे आधुनिक लोकतंत्र के विरुद्ध थे।


यह महज संयोग नहीं कि स्वतंत्र भारत में बहुत सारे भूतपूर्व राजे महराजे जब राजनीति में उतरे तो जनसंघ या स्वतंत्र पार्टी जैसे संंगठन उनके स्वाभाविक विकल्प बने। अनेक कांग्रेस में भी आये।

पर मुल्क ने आजादी की लड़ाई के दौरान विकसित होते राजनीतिक मूल्यों की रोशनी में सन् 1950 में अंबेडकर के संविधान को अपनाया। इसने हमें संवैधानिक लोकतंत्र दिया। यह सही है कि इसके अमल में असंख्य गलतियां, शरारतें और साजिशें हुईं।

इन सब से सबक लेकर ही यह मुल्क बेहतर दिशा में आगे बढ़ सकता है। शहीद भगत सिंह और डॉ बी आर अंबेडकर के विचारों को मिलाकर ही यह दिशा तय हो सकती है! संघ परिवार की दिशा पहले संकीर्ण मनुवादी और पुनरुत्थानवादी थी, आज पूरी तरह विनाशकारी है। वह भारत नामक एक बनते हुए आधुनिक राष्ट्र राज्य की आधारशिला को ही धाराशाही करने पर तुली है!
http://januday.co.in/NewsDetail.aspx?Article=10484
-उर्मिलेश उर्मिल
news source
bolta hindustan dot com

Monday, 11 December 2017

मोदी को गुजरात में हार का डर , उतर आये संघी स्टाइल के घटिया स्तर पर , हार्दिक, राहुल की रैलियो पर गैरकानूनी रोक


जन उदय : नरेंदर मोदी को गुजरात में हार डर  सता रहा है , और यही कारण है की ऐसा लगता है जैसे मोदी अपना मानसिक संतुलन खो बैठे है और अंट शंट ब्यान  और आरोप  लगा रहे है , यह बात गोरतलब है की  गुजरात को भाजपा को गड कहा  जाता रहा है  ,गुजरात में भाजपा किसी भी तरीके से सिर्फ जित हांसिल  करना चाहती है , यह  चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है की इस चुनाव को २०१९ का सेमी फाइनल  भी कहा जा रहा है


यह बात पहले से ही उठ रही है कि ..देश का का लोकतंत्र खतरे में है इसके प्रमाण हर चुनाव में उबर कर सामने आ रहे है ९ दिसम्बर २०१७ को जब गुजरात में चुनाव हुए तो दो बात विशेष रूप से सामने आई ई वी एम् की पहली ये वाई फाई से कनेक्ट हुई बल्कि गड़बडियो की एक लम्बी फेहरिस्त सामने आ गई यही नहीं सबसे बड़ा कमाल तो यह रहा की दोपहर दो बजे तक गुजरात में सिर्फ ३० प्रतिशत वोटिंग हुई लेकिन दो बजे से लेकर चार बजे के बीच ६० प्रतिशत वोटिंग हो गई ये सिर्फ दो घंटे में ३० प्रतिशत वोटिंग यह अपने अप में चकित करने वाली बात है अब यह अनुमान लगाए जा रहे है की जो भाजपा गुजरात , मध्य प्रदेश , छत्तीसगढ़ में चुनाव जीतती आ रही थी वे भी ई वी एम् की मेहरबानी से थे ,


सबसे बड़ी बात की मोदी और भाजपा में हार का इतना डर  बैठ  गया है की गुजरात में राहुल गाँधी , जिग्नेश मेवानी , हार्दिक पटेल  के रोड शो  पर कानून  वाव्य्स्था का हवाला दे कर  रोक लगा दी गई है .

यह रोक  गैर कानूनी है जिसे  कानून के फारमे में दिखाया जा रहा है 



bjp scared of defeat in gujrat ,evm scam 

Monday, 10 July 2017

जानिए कैसे ब्राह्मण चलाते है लश्कर के आतंकवादी मोडुल


लखनऊ।जम्मू-कश्मीर पुलिस की गिरफ्त में लश्कर के संदिग्ध आतंकी संदीप शर्मा उर्फ आदिल के बारे में यूपी एटीएस सूत्रों का कहना है कि उसने एक कश्मीरी लड़की के प्यार में पड़कर इस्लाम कबूल किया था. उसने उस लड़की से शादी भी कर ली थी. हालांकि, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इससे इंकार किया है. उनका कहना है कि इस बात के कोई सबूत नहीं मिले हैं.

सूत्रों के मुताबिक, करीब आठ साल पहले संदीप शर्मा काम की तलाश में कश्मीर गया था. वहां उसे एक कश्मीरी लड़की से प्यार हो गया. उसने अपना उससे शादी के बाद अपना धर्म बदल कर इस्लाम स्वीकार कर लिया. वह एक बार अपने घर वोटर आईडी लेने आया था. वह पहले से ही आपराधिक पृष्ठभूमि का रहा है. यूपी में भी कई वारदात कर चुका है.

संदिग्ध संदीप ने लश्कर के आतंकियों के साथ मिलकर कई वारदातों को अंजाम दिया है. उसका नाम बैंक और एटीएम लूट में भी शामिल है. इस तरह पहली बार आतंकी हमले के तार घाटी के बाहर यूपी से जुड़े हैं. संदीप के पिता का नाम रामकुमार शर्मा है, जो अब इस दुनिया में नहीं है. 8 साल पहले उसका परिवार मकान बेचकर अंकित विहार में आ गया था.


संदीप शर्मा का एक भाई है. उसका नाम प्रवीण शर्मा है. आस-पड़ोस के लोगों का कहना है कि संदीप कम पढ़ा-लिखा था. खुराफात करता रहता था. करीब सात-आठ साल पहले कश्मीर चला गया था. वह 2012 में घाटी में आया था. 2017 में आतंकवाद में शामिल हो गया. संदीप ने मानेर शाह और शाहिद अहमद के साथ एक गिरोह बनाया और आतंकियों से मिला.

पुलिस के मुताबिक, आदिल ने आतंकियों के साथ मिलकर कई वारदातों को अंजाम दिया. वह 16 जून को एसएचओ फिरोज डार की हत्या में भी शामिल था. पहली बार कोई गैर-कश्मीर युवक लश्कर में शामिल हुआ है. संदिग्ध आतंकी दो पहचान के साथ रहता था. कश्मीर के लिए आदिल था, तो यूपी के लिए संदीप था. यूपी एटीएस की टीम कश्मीर पहुंच रही है.


फोटो एंड न्यूज़ तीसरी जंग 

Saturday, 6 May 2017

सहारनपुर में आर्य सवर्ण आतंकवादियो ने मूलनिवासियो के घर जलाए : सवर्ण प्रशासन ने दिया सवर्णों का साथ !

जन उदय :  ऐसे  वैसे कैसे  हो गए  , और कैसे कैसे , कैसे हो गए  अगर कोई इस कहावत  को समझना चाहता है तो उसे मानव सभ्यता के इतिहास और समाजिक परिवर्तन को बड़ी  बारीकी से समझना होगा की कैसे महलो में र्सहने वाले इस देश के मालिक मूलनिवासी  आज अपने ही देश में गुलाम हो गए है और कैसे  उन पर विदेशी  आक्रमणकारी  आर्य शासन कर रहे है .

एक वक्त था जब आर्य  इस देश में आये  तो रोटी  पानी के बदले इस देश में शरण  के बदले  उन्होंने कैसे  अपने साथ  लाये घोड़े और अपनी लडकिया   यहाँ के राजाओं  को गिफ्ट दिए और यही रहने  की गुहार की  जिसको  यहाँ के राजाओं  ने मान लिया  मूलनिवासी  और आर्य  लडकियो  की संताने  ही  आज  भी  इंडो-आर्यन प्रजाति  कहलाती  है लेकिन आर्यों ने अपनी धूर्तता  दिखानी शुरू  कर दी और १८०  ईसा  पूर्व  व्रह्द्स्थ जो की सम्राट अशोक  का पोता  था  उसे उसके  ही ब्राह्मण सेनापति पुश्मित्र  शुंग ने धोखे  से मार   दिया और इसके बाद बौध  लोगो  की हत्याए  करना शुरू कर  दिया  बौध लोगो का ये नरसंहार  भारत के इतिहास का सबसे बड़ा नरसंहार है . इसके बाद यहाँ के मूलनिवासी  गुलाम होते  चले गए और इनकी गुलामी को एक सांस्कृतिक  रूप  दे दिया गया  और मूलनिवासियो को वर्ण वाव्य्स्था के अधीन  ला दिया , वर्ण  यानी  रंग , यानी गोरे आर्य  और काले  मूलनिवासी  आर्य मतलब ब्राह्मण  बनिया  ठाकुर  इन्होने अपनी जोड़ी  बना ली और सदीओ   से अब तक  ये भगवान्  , अन्ध्विशाव्स   और मूलनिवासियो  की   अज्ञानता के सहारे  जीते  आ रहे है

आजादी के बाद भी  और आज तक भी  देश में रोज  हजारो  केस दलित उत्पीडन  के आते है लेकिन चूँकि  मूलनिवासी  अनपढ़  रहे इसलिए  सत्ता में नहीं आ पाए  , उच्च  पदों  पर नहीं आ पाए  सेना , पुलिस , प्रशासन  हर जगह इन आर्यों  का बोलबोला  है   और अगर कुछ  मूलनिवासी  आरक्षण  के  दम  से  अच्छी  नौकरी में आ भी गए तो उनको ऐसी  जगह सवर्ण  नहीं रहने देते की वो कुछ अपने समाज के लिए कर सके  और कुछ करते भी नहीं


अभी दो दिन पहले उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में सवर्णों  ने दलितों  के बीस से जयादा घर जला दिए  और एक व्यक्ति  की हत्या कर दी  जिसका कर्ण सिर्फ इतना था की   सवर्ण यानी ठाकुर  बनिए , ब्राह्मणों के साथ  मिलकर दलितों  की बस्ती में डी  जे  बजा रहे थे  और गुंदगर्दी  कर रहे थे ,  दलित यानी  मूलनिवासियो  ने जब इसका विरोध किया तो सवर्णों  ने उनके घर जला दिए  और  आतंकी  हमला बोल दिया जिसमे एक व्यक्ति  की मौत  भी हो गई . 


स्थानीय  निवासी का कहना है की  ये सब पुलिस  की मौजदगी में हुआ  और उन्होंने  सवर्णों  का ही साथ  दिया , जिले  का डी  एम् जो  खुद सवर्ण  है नरेंदर  सिंह  ने  भी अभी तक सही ढंग  से कार्यवाही  नहीं की है हालांकि  मीडिया के सामने ये कह रहे है की कार्यवाही करेंगे  , कमाल  की  बात है सब कुछ सामने है तो फिर  कार्यवाही  क्यों  नहीं ?? , कारण साफ़ है जब से पुरे देश में भाजपा / संघ  की सरकार आई है तब से देश जगह  जगह  हिन्दू- मुस्लिम दंगे , गो-आतंकियो  के मूलनिवासियो  पर हमले , और मूलनिवासी  छात्रो  के दमन  हो रहे है .  उत्तर प्रदेश में  जब से  योगी  की  सरकार बनी यह  यह सब  अभूत बढ़ता  जा रहा है  कुल मिला कर पुरे देश में अशांति  फैली  हुई है  , ऐसे  लगता है देश में जल्द ही गृह युद्ध  होगा