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Monday, 11 December 2017

मोदी को गुजरात में हार का डर , उतर आये संघी स्टाइल के घटिया स्तर पर , हार्दिक, राहुल की रैलियो पर गैरकानूनी रोक


जन उदय : नरेंदर मोदी को गुजरात में हार डर  सता रहा है , और यही कारण है की ऐसा लगता है जैसे मोदी अपना मानसिक संतुलन खो बैठे है और अंट शंट ब्यान  और आरोप  लगा रहे है , यह बात गोरतलब है की  गुजरात को भाजपा को गड कहा  जाता रहा है  ,गुजरात में भाजपा किसी भी तरीके से सिर्फ जित हांसिल  करना चाहती है , यह  चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है की इस चुनाव को २०१९ का सेमी फाइनल  भी कहा जा रहा है


यह बात पहले से ही उठ रही है कि ..देश का का लोकतंत्र खतरे में है इसके प्रमाण हर चुनाव में उबर कर सामने आ रहे है ९ दिसम्बर २०१७ को जब गुजरात में चुनाव हुए तो दो बात विशेष रूप से सामने आई ई वी एम् की पहली ये वाई फाई से कनेक्ट हुई बल्कि गड़बडियो की एक लम्बी फेहरिस्त सामने आ गई यही नहीं सबसे बड़ा कमाल तो यह रहा की दोपहर दो बजे तक गुजरात में सिर्फ ३० प्रतिशत वोटिंग हुई लेकिन दो बजे से लेकर चार बजे के बीच ६० प्रतिशत वोटिंग हो गई ये सिर्फ दो घंटे में ३० प्रतिशत वोटिंग यह अपने अप में चकित करने वाली बात है अब यह अनुमान लगाए जा रहे है की जो भाजपा गुजरात , मध्य प्रदेश , छत्तीसगढ़ में चुनाव जीतती आ रही थी वे भी ई वी एम् की मेहरबानी से थे ,


सबसे बड़ी बात की मोदी और भाजपा में हार का इतना डर  बैठ  गया है की गुजरात में राहुल गाँधी , जिग्नेश मेवानी , हार्दिक पटेल  के रोड शो  पर कानून  वाव्य्स्था का हवाला दे कर  रोक लगा दी गई है .

यह रोक  गैर कानूनी है जिसे  कानून के फारमे में दिखाया जा रहा है 



bjp scared of defeat in gujrat ,evm scam 

Sunday, 10 December 2017

नफरत , हिंसा , भेदभाव महिला उत्पीडन अपराधियो की गीता है मनुसिमृति

नफरत , हिंसा , भेदभाव महिला उत्पीडन अपराधियो की गीता है मनुसिमृति इसको समझने के लिए मनुसिमृति को पढ़ना जरूरी है इस लिए निचे दिए गए मनु द्वारा लिखे श्लोक को पढ़ना जरूरी है 
मनुस्मुर्ति" में क्या कहा हैं 
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यह देखिये- 
१- पुत्री,पत्नी,माता या कन्या,युवा,व्रुद्धा किसी भी स्वरुप में नारी स्वतंत्र नही होनी चाहिए. -मनुस्मुर्तिःअध्याय-९ श्लोक-२ से ६ तक. 
...२- पति पत्नी को छोड सकता हैं, सुद(गिरवी) पर रख सकता हैं, बेच सकता हैं, लेकिन स्त्री को इस प्रकार के अधिकार नही हैं. किसी भी स्थिती में, विवाह के बाद, पत्नी सदैव पत्नी ही रहती हैं. - मनुस्मुर्तिःअध्याय-९ श्लोक-४५ 
३- संपति और मिलकियत के अधिकार और दावो के लिए, शूद्र की स्त्रिया भी "दास" हैं, स्त्री को संपति रखने का अधिकार नही हैं, स्त्री की संपति का मलिक उसका पति,पूत्र, या पिता हैं. - मनुस्मुर्तिःअध्याय-९ श्लोक-४१६. 
४- ढोर, गंवार, शूद्र और नारी, ये सब ताडन के अधिकारी हैं, यानी नारी को ढोर की तरह मार सकते हैं....तुलसी दास पर भी इसका प्रभाव दिखने को मिलता हैं, वह लिखते हैं-"ढोर,चमार और नारी, ताडन के अधिकारी." 
- मनुस्मुर्तिःअध्याय-८ श्लोक-२९९ 
५- असत्य जिस तरह अपवित्र हैं, उसी भांति स्त्रियां भी अपवित्र हैं, यानी पढने का, पढाने का, वेद-मंत्र बोलने का या उपनयन का स्त्रियो को अधिकार नही हैं.- मनुस्मुर्तिःअध्याय-२ श्लोक-६६ और अध्याय-९ श्लोक-१८. 
६- स्त्रियां नर्कगामीनी होने के कारण वह यग्यकार्य या दैनिक अग्निहोत्र भी नही कर सकती.(इसी लिए कहा जाता है-"नारी नर्क का द्वार") - मनुस्मुर्तिःअध्याय-११ श्लोक-३६ और ३७ . 
७- यग्यकार्य करने वाली या वेद मंत्र बोलने वाली स्त्रियो से किसी ब्राह्मण भी ने भोजन नही लेना चाहिए, स्त्रियो ने किए हुए सभी यग्य कार्य अशुभ होने से देवो को स्वीकार्य नही हैं. - मनुस्मुर्तिःअध्याय-४ श्लोक-२०५ और २०६ . 
८- - मनुस्मुर्ति के मुताबिक तो , स्त्री पुरुष को मोहित करने वाली - अध्याय-२ श्लोक-२१४ . 
९ - स्त्री पुरुष को दास बनाकर पदभ्रष्ट करने वाली हैं. अध्याय-२ श्लोक-२१४ 
१० - स्त्री एकांत का दुरुप्योग करने वाली. अध्याय-२ श्लोक-२१५. 
११. - स्त्री संभोग के लिए उमर या कुरुपताको नही देखती. अध्याय-९ श्लोक-११४. 
१२- स्त्री चंचल और हदयहीन,पति की ओर निष्ठारहित होती हैं. अध्याय-२ श्लोक-११५. 
१३.- केवल शैया, आभुषण और वस्त्रो को ही प्रेम करने वाली, वासनायुक्त, बेईमान, इर्षाखोर,दुराचारी हैं . अध्याय-९ श्लोक-१७. 
१४.- सुखी संसार के लिए स्त्रीओ को कैसे रहना चाहिए? इस प्रश्न के उतर में मनु कहते हैं- 
(१). स्त्रीओ को जीवन भर पति की आग्या का पालन करना चाहिए. - मनुस्मुर्तिःअध्याय-५ श्लोक-११५. 
(२). पति सदाचारहीन हो,अन्य स्त्रीओ में आसक्त हो, दुर्गुणो से भरा हुआ हो, नंपुसंक हो, जैसा भी हो फ़िर भी स्त्री को पतिव्रता बनकर उसे देव की तरह पूजना चाहिए.- मनुस्मुर्तिःअध्याय-५ श्लोक-१५४. 
जो इस प्रकार के उपर के ये प्रावधान वाले पाशविक रीति-नीति के विधान वाले पोस्टर क्यो नही छपवाये? 
(१) वर्णानुसार करने के कार्यः - 
- महातेजस्वी ब्रह्मा ने स्रुष्टी की रचना के लिए ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य और शूद्र को भिन्न-भिन्न कर्म करने को तै किया हैं - 
- पढ्ना,पढाना,यग्य करना-कराना,दान लेना यह सब ब्राह्मण को कर्म करना हैं. अध्यायः१:श्लोक:८७ 
- प्रजा रक्षण , दान देना, यग्य करना, पढ्ना...यह सब क्षत्रिय को करने के कर्म हैं. - अध्यायः१:श्लोक:८९ 
- पशु-पालन , दान देना,यग्य करना, पढ्ना,सुद(ब्याज) लेना यह वैश्य को करने का कर्म हैं. - अध्यायः१:श्लोक:९०. 


- द्वेष-भावना रहित, आंनदित होकर उपर्युक्त तीनो-वर्गो की नि:स्वार्थ सेवा करना, यह शूद्र का कर्म हैं. - अध्यायः१:श्लोक:९१. 
(२) प्रत्येक वर्ण की व्यक्तिओके नाम कैसे हो?:- 
- ब्राह्मण का नाम मंगलसूचक - उदा. शर्मा या शंकर 
- क्षत्रिय का नाम शक्ति सूचक - उदा. सिंह 
- वैश्य का नाम धनवाचक पुष्टियुक्त - उदा. शाह 
- शूद्र का नाम निंदित या दास शब्द युक्त - उदा. मणिदास,देवीदास 
- अध्यायः२:श्लोक:३१-३२. 
(३) आचमन के लिए लेनेवाला जल:- 
- ब्राह्मण को ह्रदय तक पहुचे उतना. 
- क्षत्रिय को कंठ तक पहुचे उतना. 
- वैश्य को मुहं में फ़ैले उतना. 
- शूद्र को होठ भीग जाये उतना, आचमन लेना चाहिए. 
- अध्यायः२:श्लोक:६२. 
(४) व्यक्ति सामने मिले तो क्या पूछे?:- 
- ब्राह्मण को कुशल विषयक पूछे. 
- क्षत्रिय को स्वाश्थ्य विषयक पूछे. 
- वैश्य को क्षेम विषयक पूछे. 
- शूद्र को आरोग्य विषयक पूछे. 
- अध्यायः२:श्लोक:१२७. 
(५) वर्ण की श्रेष्ठा का अंकन :- 
- ब्राह्मण को विद्या से. 
- क्षत्रिय को बल से. 
- वैश्य को धन से. 
- शूद्र को जन्म से ही श्रेष्ठ मानना.(यानी वह जन्म से ही शूद्र हैं) 
- अध्यायः२:श्लोक:१५५. 
(६) विवाह के लिए कन्या का चयन:- 
- ब्राह्मण सभी चार वर्ण की कन्याये पंसद कर सकता हैं. 
- क्षत्रिय - ब्राह्मण कन्या को छोडकर सभी तीनो वर्ण की कन्याये पंसद कर सकता हैं. 
- वैश्य - वैश्य की और शूद्र की ऎसे दो वर्ण की कन्याये पंसद कर सकता हैं. 
- शूद्र को शूद्र वर्ण की ही कन्याये विवाह के लिए पंसद कर सकता हैं.- (अध्यायः३:श्लोक:१३) यानी शूद्र को ही वर्ण से बाहर अन्य वर्ण की कन्या से विवाह नही कर सकता. 
(७) अतिथि विषयक:- 
- ब्राह्मण के घर केवल ब्राह्मण ही अतिथि गीना जाता हैं,(और वर्ण की व्यक्ति नही) 
- क्षत्रिय के घर ब्राह्मण और क्षत्रिय ही ऎसे दो ही अतिथि गीने जाते थे. 
- वैश्य के घर ब्राह्मण,क्षत्रिय और वैश्य तीनो द्विज अतिथि हो सकते हैं, लेकिन ... 
- शूद्र के घर केवल शूद्र ही अतिथि कहेलवाता हैं - (अध्यायः३:श्लोक:११०) और कोइ वर्ण का आ नही सकता... 
(८) पके हुए अन्न का स्वरुप:- 
- ब्राह्मण के घर का अन्न अम्रुतमय. 
- क्षत्रिय के घर का अन्न पय(दुग्ध) रुप. 
- वैश्य के घर का अन्न जो है यानी अन्नरुप में. 
- शूद्र के घर का अन्न रक्तस्वरुप हैं यानी वह खाने योग्य ही नही हैं. 
(अध्यायः४:श्लोक:१४) 
(९) शब को कौन से द्वार से ले जाए? :- 
- ब्राह्मण के शव को नगर के पूर्व द्वार से ले जाए. 
- क्षत्रिय के शव को नगर के उतर द्वार से ले जाए. 
- वैश्य के शव को पश्र्चिम द्वार से ले जाए. 
- शूद्र के शव को दक्षिण द्वार से ले जाए. 
(अध्यायः५:श्लोक:९२) 
(१०) किस के सौगंध लेने चाहिए?:- 
- ब्राह्मण को सत्य के. 
- क्षत्रिय वाहन के. 
- वैश्य को गाय, व्यापार या सुवर्ण के. 
- शूद्र को अपने पापो के सोगन्ध दिलवाने चाहिए. 
(अध्यायः८:श्लोक:११३) 
(११) महिलाओ के साथ गैरकानूनी संभोग करने हेतू:- 
- ब्राह्मण अगर अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो सिर पे मुंडन करे. 
- क्षत्रिय अगर अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो १००० भी दंड करे. 
- वैश्य अगर अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो उसकी सभी संपति को छीन ली जाये और १ साल के लिए कैद और बाद में देश निष्कासित. 
- शूद्र अगर अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो उसकी सभी संपति को छीन ली जाये , उसका लिंग काट लिआ जाये. 
- शूद्र अगर द्विज-जाती के साथ अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो उसका एक अंग काटके उसकी हत्या कर दे. 
(अध्यायः८:श्लोक:३७४,३७५,३७९) 
(१२) हत्या के अपराध में कोन सी कार्यवाही हो?:- 
- ब्राह्मण की हत्या यानी ब्रह्महत्या महापाप.(ब्रह्महत्या करने वालो को उसके पाप से कभी मुक्ति नही मिलती) 
- क्षत्रिय की हत्या करने से ब्रह्महत्या का चौथे हिस्से का पाप लगता हैं. 
- वैश्य की हत्या करने से ब्रह्महत्या का आठ्वे हिस्से का पाप लगता हैं. 
- शूद्र की हत्या करने से ब्रह्महत्या का सोलह्वे हिस्से का पाप लगता हैं.(यानी शूद्र की जिन्द्गी बहोत सस्ती हैं) 
- (अध्यायः११:श्लोक:१२६) 

Saturday, 9 December 2017

ई वी एम् घोटाले में मोदी पर चलेगा देशद्रोह का मुकदमा ??

 देश में जिस तरह ई वी एम् घोटाले सामने आ रहे है उससे यह लगता है की भजपा ने लोकतंत्र की हत्या कर दी  है २०१४ के लोकसभा  चुनाव में  वैसे ऐसा कोई चोंकाने वाला  नहीं था सिवाए  इसके की भाजपा ने अपने बल  पर सरकार बना ली  ये ३२५ सीट  जीत ली , हलांकि सी वक्त मायावती  ने इस बात का ऐलान  कर दिया था कि  चुनाव में गड़बड़ी  हुई है  . लेकिन समाजवादी पार्टी और लालू प्रसाद  यादव को छोड़ मायावती जी का समर्थन किया  और बात बहुत आगे तक यानी चुनाव आयोग की विश्व्स्वनियता  गई लेकिन चुनाव आयोग ने मात्र  गुमराह किया देश की जनता को .

इसके बाद   दुबारा , उत्तर प्रदेश , हिमाचल आदि में चुनाव हुए  और ई वी एम् की गड़बड़ी फी खुल कर सामने आई  यहाँ तक की मायावती ने बसपा से जीते  दो मेयर  की इस्तीफे भी दिलवा दिए  लेकिन कमाल की बात यह  निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की आत्मा है लकिन भाजपा ने इस आत्मा की भी हत्या कर दी और  देखिये की इस बात पर कही कोई चर्चा नहीं यहाँ तक की सुप्रीम कोर्ट  भी चुप बैठा  है , वैसे सुप्रीम कोर्ट को  यह मालूम है कि  कौन कहा हगेगा लेकिन   यह नहीं मालूम की चुनाव में ई वी एम्  अपना नृशंस  खेल खेल रही है

देश का  का लोकतंत्र खतरे में है इसके प्रमाण हर चुनाव में उबर कर सामने आ रहे है ९ दिसम्बर २०१७ को जब गुजरात में चुनाव हुए तो दो बात विशेष रूप से सामने आई ई वी एम् की पहली  ये वाई फाई  से कनेक्ट हुई बल्कि गड़बडियो  की एक लम्बी फेहरिस्त   सामने आ गई  यही नहीं सबसे बड़ा कमाल तो यह रहा की  दोपहर  दो बजे तक गुजरात में सिर्फ ३० प्रतिशत  वोटिंग  हुई लेकिन दो बजे से लेकर चार बजे के बीच  ६० प्रतिशत  वोटिंग हो गई ये सिर्फ दो घंटे में ३० प्रतिशत  वोटिंग  यह अपने अप में चकित करने वाली बात है

अब यह अनुमान लगाए जा रहे है की जो भाजपा  गुजरात , मध्य प्रदेश , छत्तीसगढ़ में चुनाव जीतती आ रही थी वे भी ई वी एम् की मेहरबानी से थे ,

अब मुद्दे की बात यह है की  अगर यह साबित हो जाए की भाजपा ने अब तक जो भी चुनाव जीते  वे सब ई वी एम् मैनेज करके जीते  तो क्या भाजपा क नेताओं को सजा होगी , होगी तो कितनी , किस कानून के तहत , या इसको सिर्फ और सिर्फ देशद्रोह  माना जाए ??


क्या भाजपा की एक पार्टी की तरह मान्यता रद्द की जाएगी और इस षड्यंत्र में शामिल सभी लोगो पर देशद्रोह का मुकद्दमा   चलेगा ?/ विशेषकर नरेंदर मोदी पर जो  इस जमात का पूरा सरदार है   

Friday, 8 December 2017

दुसरो को आचरण की नसीहत देने वाले भाजपाई / दंगाई / संघाई ज़रा इसे भी देखे


धार्मिक आंतकवाद लोगो को आदमखोर बनाता हुआ : उदय चे

राजस्थान के राजसमंद में एक धार्मिक आंतकवादी ने जिस प्रकार से एक बुजर्ग मजदूर को धोखे से काम के लिए बुलाकर उसकी निर्ममता से हत्या की गई। उसकी पीठ पर वार किया गया। उसके अंगों को बड़ी बेहरमी से काटा गया फिर उसको जलाया गया। उसके बाद जिस निडरता से कातिल ने कत्ल करने के पिछे का राज बताया, हत्या को जायज ठहराने के लिए जिस प्रकार कातिल ने महाराणा प्रताप को कोट किया, जय मेवाड़, जय भारत, जय हिंद का नारा दिया। मन्दिर में वीडियो को बनाना औऱ भगवा रंग, ये सब उस धर्म के जहर का असर है जिसे धीरे-धीरे हिंदुत्व की सिरिंज से चढ़ाया गया है। ऐसे लोगो को आदमखोर जानवर धीरे-धीरे हिंदुत्ववादी आंतकवादियो ने बनाया है। कोई भी इन्सान या समाज आदमखोर एक दम नही बन जाता इसके लिए धार्मिक आंतकवादी बहुत लंबे समय से काम कर रहे होते है। भारत की आजादी के आंदोलन में जहाँ बहुत बड़ा तबका देश को आजाद करवाने के लिएअंग्रेजो के खिलाफ मजबूती से लड़रहा था। 


शहीद भगत सिंह और उसके साथियों ने देश की ही नही, पूरी मानव जाति की आजादी के लिए 1928 में जहाँ हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) का गठन किया। जिसने मानव मुक्ती के लिए संघर्ष का आह्वान किया। वही दूसरी तरफ भारत में अंग्रेजो की मद्दत से आजादी के आन्दोलन और HSRA के खिलाफ मुस्लिम और हिंदुत्वादी संघठनो को मजबूत किया गया। जिनका मुख्य एजेंडा ही मानव मुक्ति के संघर्ष की बुनियाद मेहनतकश आवाम की एकता को तोड़ने के लिए भारतीय समाज में धर्म-जात-इलाका के नाम परलोगो को बांटना था। इस मुहिम में वो कामयाब भी रहे। गोड़से जिसको धर्म के जहर ने धीरे-धीरे आदमखोर जानवर बनाया। इस आदमखोर जानवर का सहारा लेकर इसके आकाओं ने महात्मा गांधी की हत्या करवाई। महात्मा गांधी की हत्या इसी हिंदुत्वादी आंतकवादी लाइन द्वारा की गई हत्या थी। बाबरी मस्जिद को तोड़ने की, बम्बई, गुजरात, गन्धमालके दंगे हो या प्रगतिशील बुद्विजीवियों, कलाकारो, छात्रों, मजदूर नेताओं, लेखकों, पत्रकारो की हत्याये ये सब धार्मिक आतंकवादियों द्वारा अपने आकाओं के इशारे पर की गयी कार्यवाईयाँ है।
एक आदमी जान-बूझकर, सोच-समझकर अपने हाथों से हत्या करता है और उसके चेहरे पर शिकन तक नहीं है। ये धार्मिक पागलपन हैऔऱ ये कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी यहाँ दलितो, मुश्लिमो, सिखों आदिवासियों के नरसंहार हुए है। बस वीडियो अब बनने लगे है। हरियाणा के झज्झर जिले केदुलीना में 5 दलितो को इसलिए जिंदा जला दिया गया था क्योकि वो मरे हुए पशुओं को उठाकर उनकी खाल उतारने का काम करते थे। उस दिन भी वो मरी हुई गायों की खाल उतार कर अपने घर जा रहे थे। इस काम का उनके पास सरकारी मंजूरी भी थी लेकिन आदमखोरों ने उनको घेर लिया और धर्म के नाम पर जिंदा जला दिया। ऐसे ही मिर्चपुर में अंधे बुजर्ग ओर उसकी अपँग बेटी को भीड़ ने जला दिया था। दादरी के अखलाक, जुनैद औऱ अलवर के पास हुई किसान पहलू खान की इन आदमखोरों द्वारा हत्याये इसी धार्मिक जहर का असर है। लेकिन जब ये आदमखोर जानवर अपना शिकार करते है तो बाकी आवाम की चुप्पी ये साबित करती है कि आप भी इस धर्म के जहर के प्रभाव में वहसी दरिंदे बनने की तरफ बढ़ रहे हो। धार्मिक आंतकवादी इन सभी हत्यायों के बाद जश्न मनाते है हत्या के पक्ष में दलील देते है और हत्यारों को समान्नित करते है। आप ऐसे धार्मिक आतंकवादियों के समर्थन में जय जयकार करते हो या चुप रहते हो।आपकी जय जयकार या चुप्पी आपकी आने वाली नश्लो को आदमखोर जानवर बना देगी। फिर इंसानी बस्ती होने कीबजाए आदमखोरों की बस्ती होगी। उस समय इंसानी मूल्य, सिंद्धान्त, मानवतासब खत्म हो जायेगें। इसलिए अभी भी समय है अगर हमे इंसानी सभ्यता को बचाना है तो खुद के धर्म के इन धार्मिक आंतकवादियो का नाश करना पड़ेगा। धर्म-जात-इलाका से ऊपर उठकर हमे मेहनतकश आवाम की एकतास्थापित करनी होगी। क्योकि लुटेरी मण्डली का ये सारा खेल ही इस एकता को तोड़ने के लिए है। भारत में ही नही पुरे विश्व मे जब भी मेहनतकश मानव मुक्ति के लिए एकजुट होना शुरू करता है तो सामंतवादी, पूंजीवादी लुटेरी मण्डली धर्म-जात-इलाका औऱ अंधराष्ट्रवाद के नाम पर लोगों को बांटने का काम करती है। अल्पसंख्यको, दलितो, आदिवासियों को दुश्मन के तौर पर बहुसंख्यक आबादी के सामने पेश करती है और अल्पसंख्यको, दलितो, आदिवासियों पर हमले करने के लिए बहुसंख्यक आबादी को तैयार करती है। पूरी दुनिया में साम्राज्यवादी सत्ताएँ पिछले दरवाजे से इनको संचालित करती है। तालिबान, अलक़ायदा, isisi, भारत मे हिंदुत्वादी आंतकवादी इन सब के पीछे साम्राज्यवादी खेमा मजबूती से खड़ा है। जो इनको फंडिंग करता है।


बहुत पहले हॉलीवुड की एक फ़िल्म रॉंग टर्न फ़िल्म देखी थी। रॉंगटर्न का मतलब होता है "गलत रास्ता"
इसफ़िल्म कि कई सीरीज मार्किट में आई। ये सभी सीरीज इतनी डरावनी औऱ हॉरर थी कि अकेलाआदमी सायद देख सके। फ़िल्म में कहानी ये है कि कुछ वज्ञानिक गरीब लोगों पर बिना सरकार कीइजाजत लिए दवाइयों का प्रयोग करते है। ऐसी दवाइयों का प्रयोग जो मानव हित मे होकर मानव की बर्बादी की तरफ जाता है। जिन इंसानो ओर ये प्रयोग किये जाते है वो सब उन दवाइयों के कारण विकृत हालात ने चले जाते है वो आदमखोर बन जाते है। वो उस प्रयोगशाला से इन सभी को मार कर भाग जाते है। अब वो आदमखोर जहां भी जाते है। वहाँ-वहाँ वो मानव जाति का सर्वनाश करते है उनको खा जाते है। अब वो जंगल मे रहते है जहाँ रहते है वहाँ आस-पास वो मानव जाति को खत्म कर देते है। अब कोई भी शख्स गलती से रास्ता भूल कर उनकी बस्ती की तरफ चल जाता है तो उस इंसान का खात्मा वो बड़ी बेहरमी से कर देते है जैसे कुल्हाड़ी, दरातसे काट देना जैसे लकड़ी को काटा हो। उस फिल्म को देख कर जो मेरी समीक्षा बनी वो ये थी की वो सभी आदमखोर मानवता के लिए इतना बड़ा खतरा नही है वो बड़े दोषी है। लेकिन वो आदमखोर बन चुके है तो उनका इलाजजरूरी है। लेकिनसबसे बड़ा खतरा वो डॉ या वज्ञानिक है जिन्होंने अपने फायदे के लिए साधारण इंसानो को आदमखोर बनाया। उनका खात्मा सबसे ज्यादा जरूरी है ताकि नए आदमखोर पैदा होने से समाज को बचाजा सके। हमें इन्हें देखकर निराश नहीं होना है। उम्मीद अब भी बची हुई है, हम ये सब रोक सकते हैं। वक्त रहते कुछ लिख-पढ़ लें, अपनी सोच का दायरा बढ़ा लें, लोगों से बात करें, तोइस पागलपन को हम आसानी से रोक देंगे।



राजसमंद की इस घटना को टाला जा सकता थाअगर समय रहते ऐसे आदमखोर की पहचान हो जाती तो उसका समय पर इलाज करवाया जा सकता था। इसलिए आज आप अपने आस-पास ऐसे धार्मिक आंतकवादियो की पहचान कीजिये जो साधारण इंसानो को धर्म के नाम पर वहसी जानवर बना रहे है, मानव बम बना रहे है। ऐसे आतंकवादियों को जितना जल्दी खदेड़ दोगे आप खुद को और मानव जाति के वर्तमान भविष्य को सुरक्षित बना पाओगे। मानवता के लिए आज सबसे बड़ा दुश्मन साम्रज्यवाद, उसके दलाल धार्मिक आंतकवादी औरये आदमखोर जानवर है। मानव सभ्यता बचाने औऱ मानव मुक्ति के लिए मेहनतकश आवाम का पहला काम इन तीनों ताकतों का सफाया करना जरूरी है।
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