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Sunday, 15 April 2018

“हिन्दू “ धर्म है या ब्राह्मणों का षड्यंत्र


जन उदय : हाल ही में भारत के एक वर्ग  जिसे सवर्ण  कहते है उसने  एस सी / एस टी / ओ बी सी आरक्षण  के खिलाफ भारत बंद किया यहाँ तक की इसी वर्ग की एक  पार्टी ने  भारत के उन सभी संस्थाओ मे  आरक्षण को खत्म भी कर  दिया है यानी नौकरी में अब इन वर्गो  को आरक्षण  नहीं मिल  रहा है , क़माल की बात यह है कि ये काम वो लोग कर राहे है जो हिन्दू –हिन्दू कर  इन लोगो  को गुमराह करता है और कभी इसाई  तो कभी मुसलमान से लड्वाता है और दूसरी तरह इनके हको  को छीन लेता है .  ऐसा कैसे हो सकता है कि एक तरफ आप हिन्दू – हिन्दू  कह अपना भाई कहते है  दूसरी  तरफ  इनके  हको को छीनते है . तो क्या एक भी अपने दुसरे भाई के खिलाफ ऐसे  षड्यंत्र  रचता  है ?? जाहिर है नहीं , लेकिन ये लोग करते है जिसका मतलब साफ़ है की ये लोग  हिन्दू  नहीं है यानी  या तो ब्राह्मण  हिन्दू  नहीं है  या एस सी एस टी  ओ बी सी  हिन्दू नहीं है

वैसे भी अगर आप देखे  तो दुनिया के किसी  भी धर्म में प्रेम  भाई चारा सिखाया जाता है सबको सामान  माना  जाता  है  लेकिन  केवल  इन ब्राह्मणों  के ग्रन्थ ऐसे ही जिसमे  एस सी एस टी  ओ बी सी की हत्या  को वैध  मना गया है  इनको शिक्षा   सम्पति  किसी  चीज क अधिकार नहीं है समानता का अधिकार नहीं  है . तो क्या ऐसे ग्रन्थ  कभी किसी भगवान् ने लिखे होंगे ??? इन ग्रंथो में इन छोटे  तबके के लोगो  को लिख लिख के गली दी  गई   है सारी  किताबे नफरत के पुलिंदे 


इतिहास की विवेचना कर लीजिये ब्राह्मण द्वारा लिखे सारे ग्रन्थ छान मारिये जिन्हें ये भगवान् का संदेश बता कर पेश करते है जो भगवान् ने इन्हें संस्कृत में दिए थे , कही भी आपको हिन्दू शब्द नहीं मिलेगा , मिलेगा तो वर्ण वाव्य्स्था या जातिवाद वो भी भारतीय समाज में .

भारत की निचले स्तर की जातीओ को ब्राह्मणों ने अपना गुलाम बना कर रखा और आने वाले हर विदेशी हमलावर चाहे वो मुस्लिम रहे या अंग्रेज उनके सामने अपना गुलाम बना कर पेश किया
ब्राह्मणों ने इन निम्न स्तर की जातिओ का मानसिक ,शारीरिक आर्थिक शोषण सदीओ तक किया और आज भी कर रहे है , ये लोग बिलकुल नहीं चाहते की दलित लोग आगे बड़े या पढ़े , ये सिर्फ इनको जानवरों की तरह ही गुलाम रखना चाहते है

शुद्रो को ब्राह्मण मुसलमानों से लड़वाने के लिए जब इस्तेमाल करते है तब ये जातिया हिन्दू होती है

मुसलमानों से लड़ने के बाद ये सारे लोग अनेक जातियों में बाँट जाते है इन्हें फिर समाज में गन्दी नजरो से देखा जाने लगता है और सारी गंदगी फैलाता है ब्राह्मण .

जब दलितों को शुद्रो को आगे बढ़ने की बात आती है तो ब्राह्मण ही सबसे पहला व्यक्ति होता है जो दलितों के अधिकार के खिलाफ बोलता है , ये इनकी शिक्षा का विरोध करता है , इनके आरक्षण का विरोध करता है और इनको मिलने वाली हर सविन्धानिक सुविधाओं का विरोध करता है

और फिर मुसलमानों का डर दिखा फिर हिन्दू हिन्दू करने लगता है , समाज को बांटने में असमानता फैलाने में ये लोग माहिर है और बंटा हुआ समाज कभी भी तरक्की नहीं कर सकता


Monday, 8 January 2018

भारत फिर चला बंटवारे की तरफ ,ब्राह्मण बाँट रहे है देश को

जन उदय : अगर हम भारत के इतिहास की बात करते है तो  ब्राह्मणों ने बड़ी ही चतुराई से इतिहास को तीन भागो में बाँट  दिया  एक प्राचीन काल , यानी यहाँ के मूलनिवासी  नहीं वह काल जिसमे ब्राह्मण सबसे उपर है ,भारत विश्व गुरु है ,  भारत सोने की चिड़िया है यानी भारत पूरी तरह से एक महान देश है ( यह बात सनद  रहे की इस काल में केवल अशोक जिसने देश को चारो तरफ फैलाया  के अलावा भारत नाम भी देश का नहीं था , )

इसके बाद आता है वह काल जिसमे मुस्लिम शासक आक्रमणकारी के रूप में भारत आये और यही रह गए यानी यहाँ पर बस  गए , यह काल अंग्रेजो के आने तक मध्यकाल कहलाता है इसमें ब्राह्मणों ने प्रमाणिक  इतिहासको दबा कर मुस्लिम शासको  को निर्दयी , क्रूर , और  ऐसे शासक के रूप में पेश किया आम जनता के सामने कि वो भारत के लोगो के विरोधी थे , इन्होने जबदस्ती  देश में इस्लाम फैलाया , आदि आदि  ये बात और है की ये ब्राह्मण  और अन्य सवर्ण हमेशा मुस्लिम राजाओं के साथ  थे उनको शासन करने में मदद  की उनको हमले के लिए भारत बुलाया  और इनके दरबारों में नौकरी करते रहे , और यही नहीं बाकायदा  मुस्लिम शासको से अपने रिश्ते  गहरे करने के लिए अपनी बहन बेटियो की शादी  मुस्लिम राजाओं से की . यही नहीं मुस्लिम  राजाओं द्वारा लगाए गए जाजिया कर भी  ब्राह्मणों  के लिए माफ़  था क्योकि  इन्होने यह प्रमाणित  किया की ये लोग भी  मुस्लिम राजाओं की तरह विदेशी है सो इस्ल्मामिक कानून के हिसाब से इन पर  कर  नहीं लगना चाहिए

इसके बाद आता है अंग्रेजो का काल जिन्होंने १८५७ तक आते आते पुरे भारत पर कब्जा कर लिया  और १ जनवरी  १८१८  में भीमा कोरेगांव की लड़ाई  ब्राह्मणों  के लिए  निर्णायक साबित हुई  जिसमे सिर्फ पांच सो  म्हारो ने पेशवा  ब्राह्मणों  की  २८००० की सेना  को ध्वस्त  क्र दिया  और ब्रह्मणों को दूम  दबा कर भागना पड़ा
इस लड़ाई की  तरफ हम बाद  में आयंगे  उससे पहले  हम भारत के तथाकथित   स्वन्त्रता  संग्राम  की तरफ देखते है जिसमे कई उतार चड़ाव आये जिसमे बाबा साहेब ने अपने लिए यानी मूलनिवासियो के लिए कम्युनल अवार्ड की प्राप्ति  की और गांधी  के पाखंड  के पूना पैक्ट हुआ जिसमे मूलनिवासियो  के लिए आरक्षण  का फैसला हुआ .  भारत के इतिहास के इस फेस में सबसे बड़ी बात की ब्राह्मण बनिया  हमेशा अंग्रेजो का समर्थक बना रहा क्योकि  १९४१ की जनगणना में भारत की आबादी  ४० करोड़ थी और अंग्रेजो  की संख्या   सिर्फ और  सिर्फ  ६५०००  तो ६५०००  लोग चालीस  करोड़ के देश को तो चला नहीं सकते  तो शासन करने के लिए ब्राह्मण बनिए ही  अंग्रेजो  की मदद कर रहे थे ,ब्राह्मण  जज  थे , कलेक्टर  थे , पोलिस में  थे फौज में थे  ये देश चला रहे थे  खैर  दुसरे विश्व युद्ध के बाद अंग्रेजो  की हालत खराब हो रही थी  और पहले विश्व युद्ध और कम्युनल अवार्ड के बाद से ही ब्राह्मणों ने दो राष्ट्र  की थ्योरी  को जन्म दे दिया था जिसके द्वारा भारत और पाकिस्तान नाम के दो देश बने   यह बात भी सनद  रहे की भारत नाम १९४७ के बाद ही आया  इससे पहले इस देश का नाम  इंडिया  था

खैर १९४७ के बाद पुरे देश के युवाओं में विशेषकर  मूलनिवासियो में काफी उत्साह था कि अब सब कुछ ठीक होगा  और लेकिन  ब्राह्मण अपनी गन्दी  और कुत्सित मानसिकता से बाज नहीं आये और इन्होने इस देश को कभी देश बन्ने  ही नहीं  दिया , इनकी हमेशा यही कोश्सी  रही की कैसे गरीब से यानी मूलनिवासी से उसके मूह  का निवाला छिना   जाए कैसे उनको शिक्षा से दूर रखा जाए कैसे स्वास्थ स्वच्छता  रोजगार इनको कभी न मिले
एक  उधाहरण  हम लेते है “”  किसी  भी  संसदीय क्षेत्र में , स्कूल , कॉलेज , डिस्पेंसरी , बिजली , सड़क बनाने  में कितना समय लगता है जबकि  आपके पास  फण्ड  चारो तरफ से आता  है ... तो आप ज़रा सोचंगे और कहंगे हद से हद बीस साल “  देखिये  बीस साल  तो क्या यहाँ पर सत्तर साल हो चुके है और  आधे से ज्यादा  देश अँधेरे में है अशिक्षित  है , बीमार  है कुपोषित  है  ७९ % बच्चे  कुपोषित  है  ५२ % लोग निरक्षर  है , मानव विकास  में आज हम  नाइजीरिया  जैसे देश से भी पिच्छे है  , हमेशा पाकिस्तान को कोसने से से क्या होगा की  वो आज भी हम  पाकिस्तान से पीछे  है , दुनिया के सबसे बड़े और महान २०० विश्वविद्यालय में  भारत का स्थान कही नहीं है . मानवधिकार हनन में भारत सबसे आगे है


हमेशा  आरक्षण को कोसने वाले ब्राह्मण  हमेशा मेरिट  की बात करते है  लेकिन रेल , जहाज फोन , टीवी , कार स्कूटर ,   बिजली , पंखा राकेट  हर चीज विदेशी इस्तेमाल करते  है , इनके डॉक्टर , इंजिनियर  एक नम्बर के नक्कारे , जो किडनी चोरी , भ्रूण हत्या ,  गलत दवाई देने में सबसे आगे है  लेकिन शोर योग्यता का मचाते है , इसके अलावा , दंगे फसाद , गोआतंक .मंदिर मस्जिद  जातिवाद  इन सबसे  इन्होने देश को बाँट  ही दिया
खैर  अभी हाल ही में भीमा कोरेगांव में   आर एस एस जो की एक ब्राह्मणवादी  आतंकवादी संघठन  है इसके लोगो ने वहा आये औरतो और बच्चो के एक झुण्ड पर पत्थराव  करवाया  चलिए  साथ के साथ यह भी जान लेते है आखिर  ब्राह्मणों  को इस समारोह से क्यों समस्या थी क्या ऐसी कोई बात थी  जिससे ब्राह्मणों  का सर हमेशा के लिए झुके ??  जी  हाँ  ऐसी ही कुछ बात थी  चलिए जानते है  सच
छत्रपति शिवाजी के जेष्ठ पुत्र छत्रपति संभाजी महाराज थे । शिवाजी महाराज के निधन के बाद 1680 में उन्होंने ही गद्दी संभाली थी। छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक की तरह ही इस बार भी पूना के ब्राह्मण संभाजी महाराज के राज्याभिषेक से खुश नही थे ।

छत्रपति संभाजी महाराज और मुगलों में कई बार युद्ध हुए , किन्तु एक वक्त संभाजी के साले गणोजी शिर्के और मनुवादी ब्राह्मणों के धोखेबाजी/ दगाबाजी से छत्रपति संभाजी महाराज को मुकरब खां द्वारा बन्दी बनाकर औरंगजेब के समक्ष पेश किया गया ।

औरंगजेब के मन की मुराद पूरी हो गई . संभाजी महाराज को सजा देने के वक्त भी ब्राम्हण पंडित की मौजूदगी में मनुस्मृति के अनुसार सजा दी गई .

औरंगजेब ने 11 मार्च 1689 को संभाजी की 31वर्ष की आयु में वीभत्स रूप से हत्या कर उसके शरीर के टुकड़े टुकड़े कर भीमा_कोरेगांव से पास वाले वडू गाँव में फिकवा दिये और यह फरमान जारी कर दिया कि कोई भी शख्स संभाजी के शरीर के टुकड़ों को उठाकर अंतिम संस्कार करेगा तो उसके भी टुकड़े टुकड़े कर दिए जाएंगे।

संभाजी महाराज के विभत्स किये अंगों को उठाने की किसी की भी हिम्मत नही हुई। किन्तु उसी गाँव मे रहने वाले #गोविंद #गोपाल_गायकवाड़ महार वह शख्स है जिसने खुद के मौत की परवाह न कर छत्रपति संभाजी महाराज के यत्र तंत्र फैले शरीर के टुकड़ों को एकत्रित कर सिलाई किया , और ससम्मान छ्त्रपति संभाजी महाराज की अंत्येष्टि की रस्म पूर्ण की ।

इसी कारण गोविंद महार औऱ उनके परिवार के सभी 16 सदस्यों को मार दिया गया, ऐसे वीर गोविन्द महार की समाधि आज भी वडू गांव के महार बस्ती में संभाजी महाराज के समाधि के पास मौजूद है ।

अब भीमा कोरेगांव की सच्ची घटना यह है कि छ्त्रपति शिवाजी महाराज के साथ ही, उनके वंशजों के दुश्मन, ब्राह्मण पेशवा जिन्होंने शिवाजी को राजा मानने से इंकार कर दिया था , शिवाजी के वंशजो से धोखेबाज़ी से राजपाठ हथियाकर खुद 1713 में राजा बन बैठे।

1 जनवरी 18018 को ब्राह्मणी पेशवाओं के 28000 सैनिक और महार रेजिमेंट के 500 सैनिकों के मध्य भीषण युद्ध हुआ जिसमें ब्राह्मणी पेशवाओं की पराजय हुई । पेशवाओं की इसी पराजय का जश्न मनाने 1 जनवरी को प्रतिवर्ष भीमा कोरेगांव में लाखों की तादात में बहुजन समाज (Sc,St,Obc) के लोग शौर्य दिवस मनाने और श्रद्दांजलि देने आते है ।

इस वर्ष 2018 में पेशवाओं औऱ महारो के बीच हुये युद्ध को 200 वर्ष पूर्ण हुए है।
28 दिसंबर 2017 को वडू गांव में गोविन्द महार की समाधि के पास की सड़क पर उनके वंशजो ने एक दिशा निर्देशक बोर्ड लगाया था ताकि भिमा कोरेगांव में आने वाले बहुजन समाज के लोग वडू गांव में आते वक्त उन्हें गोविन्द गोपाल महार की समाधि के बारे में भी पता चले सके ।

किन्तु 29 दिसंबर 2017 को सुबह 10:30 बजे वडू गांव के सरपंच, ग्राम पंचायत के सदस्य, पुलिस पाटिल औऱ गांव में रहने वाले लगभग 500 से 700 लोगो ने मिलकर गोविन्द गोपाल महार की समाधि के पास लगाया हुआ दिशानिर्देशक बोर्ड तथा गोविन्द महार की समाधि का छत तोड़ दिया,


इसके बाद गोविन्द महार के वंशजो ने समाधि तोड़ने वालों पर FIR दर्ज किया , साथ ही एट्रोसिटी एक्ट के तहत मामला दर्ज होने की खबर भी आई, इसके बाद 30 दिसंबर को भीमा कोरेगांव की ग्रामपंचायत में प्रस्ताव पारित किया गया कि 1 जनवरी को भीमा कोरेगांव पूरी तरह से बंद रहेगा, ताकि भीमा कोरेगांव में आने वाले लाखों बहुजन लोगो को दिक्कते /असुविधा हो ।
इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से 1 जनवरी को भीमा कोरेगांव बंद रखा गया, 1 जनवरी को जब सुबह लगभग 12:00 बजे लोग शांतिप्रिय तरीके से अहमदनगर की औऱ से शौर्य स्तंभ की औऱ जा रहे थे तब भीमा नदी के पास कोरेगांव में कुछ लोगोंने स्तंभ की और जाने वाले लोगो पर बिल्डिंग के ऊपर से पत्थर फेकना शुरू कर दिया , साथ ही कुछ लोग वहा पर आने वाले लोगो की गाड़ियां तोड़ने लगे और गाड़ियों को जलाने लगे, इस तरह से ये आग धीरे धीरे बढ़ती चली गई, पत्थर बाजी बढ़ने लगी आगजनी बढ़ती गई और शौर्य स्तंभ की और जाने वाले लोगो के साथ मारपीट भी होती रही ।

खैर  ये  तो एक ही सच   है अगर ब्राह्मणों  का इतिहास  सही ढंग से देख लिया जाए  तो पता चल जाता है की ये लोग देश के सबसे बड़े गद्दार  और देशद्रोही है  जो अपने फायदे के लिए कही भी जा सकते है  और इन्होने इस तरह के आतंक देशभक्ति के नाम पर ही फैलाए हुए  है

अब दरसल  मुख्य मुद्दा  यहाँ आता  है  जो यह है की इस घटना के बाद भारत के  ब्राह्मणवादी  मीडिया ने भीमा कोरेगांव की घटना को  दलित यानी मूलनिवासी  और  हिन्दू  कह कर  संबोधित  किया हलांकि  इसमें ब्राह्मणों  की यह एक राजनैतिक  चाल है  जिससे वो दलितों  वुनकी नजर में एस सी और एस टी है जिनकी संख्या लगभग  ३० %  और इनके साथ  ओ बी सी  को मिला कर यह संख्या ६३ %  है और अगर इसमें मुस्लिम को भी मिलाया जाए तो ये संख्या कुल मिला कर ८९ % हो जाएगी  और इस विभाजन   से एक बार कम्युनल अवार्ड का मुद्दा उठ सकता है जो जो उठ गया है कम्युनल  अवार्ड मतलब  मूल्निआसिओ को प्रथक निर्वाचन और हो सकता है की इस प्रथक निर्वाचन में  ब्राह्मण ओ बी सी  और मुस्लिम को न काउंट करे  लेकिन ये सभी जातिया ब्राह्मण के चरित्र को  अच्छी  तरह जानते है  और ये भी जानते है की इस देश में सबसे शातिर कौम ब्राह्मणों की है जिसने उन्हें आरक्षण का विरोध करना सिखाया  और ये लोग ये नहीं समझ पाए की वो खुद अपना ही  गला कट रहे है  यानी सबको आरक्षण के खिलाफ ब्राह्मण भडकता  रहा और सबका हिस्सा  खुद डकार जाता  है . और अब  तैश में ब्राह्मण  यह कदम उठा चुका है  यानी इसके पास अब मुस्लिम से लड़ने के लिए शुद्र / दलित मूलनिवासी  नाम के मुर्ख  नहीं होंगे   इनके पास   ओ बी सी  नहीं होगा और जाहिर तौर   पर मुस्लिम  भी नहीं होगा



 तो  क्या ब्राह्मण जिसकी संख्या ३ %  और अगर बनिया राजपूत  इनके साथ मिल जाए तो लगभग  १४ %  इस देश के बाकी नागरिको  को जानवर की तरह इस्तेमाल कर सकते है ?? और अगर शन्ति से भी हम इस देश मूलनिवासी  अपना हक  मांगे तो क्या इस देश का विभाजन दुबारा होगा ??  ऐसा  नहीं होना चाहिए लेकिन  ऐसा लगता है जिस तरह नेहरु   यानी कांग्रेस ने  यानी ब्राह्मणों ने अपने निजी स्वार्थ के लिए देश को हिन्दू – मुस्लिम के नाम पर विभाजित किया था  तो अब क्या  मूलनिवासी  और ब्राह्मणों  के नाम पर देश का बँटवारा होगा ??? क्या ब्राह्मण  इतिहास से कुछ नहीं सीखेगा ?? या देश के टुकड़े कर के दम लेगा 

Sunday, 10 December 2017

नफरत , हिंसा , भेदभाव महिला उत्पीडन अपराधियो की गीता है मनुसिमृति

नफरत , हिंसा , भेदभाव महिला उत्पीडन अपराधियो की गीता है मनुसिमृति इसको समझने के लिए मनुसिमृति को पढ़ना जरूरी है इस लिए निचे दिए गए मनु द्वारा लिखे श्लोक को पढ़ना जरूरी है 
मनुस्मुर्ति" में क्या कहा हैं 
=============== 
यह देखिये- 
१- पुत्री,पत्नी,माता या कन्या,युवा,व्रुद्धा किसी भी स्वरुप में नारी स्वतंत्र नही होनी चाहिए. -मनुस्मुर्तिःअध्याय-९ श्लोक-२ से ६ तक. 
...२- पति पत्नी को छोड सकता हैं, सुद(गिरवी) पर रख सकता हैं, बेच सकता हैं, लेकिन स्त्री को इस प्रकार के अधिकार नही हैं. किसी भी स्थिती में, विवाह के बाद, पत्नी सदैव पत्नी ही रहती हैं. - मनुस्मुर्तिःअध्याय-९ श्लोक-४५ 
३- संपति और मिलकियत के अधिकार और दावो के लिए, शूद्र की स्त्रिया भी "दास" हैं, स्त्री को संपति रखने का अधिकार नही हैं, स्त्री की संपति का मलिक उसका पति,पूत्र, या पिता हैं. - मनुस्मुर्तिःअध्याय-९ श्लोक-४१६. 
४- ढोर, गंवार, शूद्र और नारी, ये सब ताडन के अधिकारी हैं, यानी नारी को ढोर की तरह मार सकते हैं....तुलसी दास पर भी इसका प्रभाव दिखने को मिलता हैं, वह लिखते हैं-"ढोर,चमार और नारी, ताडन के अधिकारी." 
- मनुस्मुर्तिःअध्याय-८ श्लोक-२९९ 
५- असत्य जिस तरह अपवित्र हैं, उसी भांति स्त्रियां भी अपवित्र हैं, यानी पढने का, पढाने का, वेद-मंत्र बोलने का या उपनयन का स्त्रियो को अधिकार नही हैं.- मनुस्मुर्तिःअध्याय-२ श्लोक-६६ और अध्याय-९ श्लोक-१८. 
६- स्त्रियां नर्कगामीनी होने के कारण वह यग्यकार्य या दैनिक अग्निहोत्र भी नही कर सकती.(इसी लिए कहा जाता है-"नारी नर्क का द्वार") - मनुस्मुर्तिःअध्याय-११ श्लोक-३६ और ३७ . 
७- यग्यकार्य करने वाली या वेद मंत्र बोलने वाली स्त्रियो से किसी ब्राह्मण भी ने भोजन नही लेना चाहिए, स्त्रियो ने किए हुए सभी यग्य कार्य अशुभ होने से देवो को स्वीकार्य नही हैं. - मनुस्मुर्तिःअध्याय-४ श्लोक-२०५ और २०६ . 
८- - मनुस्मुर्ति के मुताबिक तो , स्त्री पुरुष को मोहित करने वाली - अध्याय-२ श्लोक-२१४ . 
९ - स्त्री पुरुष को दास बनाकर पदभ्रष्ट करने वाली हैं. अध्याय-२ श्लोक-२१४ 
१० - स्त्री एकांत का दुरुप्योग करने वाली. अध्याय-२ श्लोक-२१५. 
११. - स्त्री संभोग के लिए उमर या कुरुपताको नही देखती. अध्याय-९ श्लोक-११४. 
१२- स्त्री चंचल और हदयहीन,पति की ओर निष्ठारहित होती हैं. अध्याय-२ श्लोक-११५. 
१३.- केवल शैया, आभुषण और वस्त्रो को ही प्रेम करने वाली, वासनायुक्त, बेईमान, इर्षाखोर,दुराचारी हैं . अध्याय-९ श्लोक-१७. 
१४.- सुखी संसार के लिए स्त्रीओ को कैसे रहना चाहिए? इस प्रश्न के उतर में मनु कहते हैं- 
(१). स्त्रीओ को जीवन भर पति की आग्या का पालन करना चाहिए. - मनुस्मुर्तिःअध्याय-५ श्लोक-११५. 
(२). पति सदाचारहीन हो,अन्य स्त्रीओ में आसक्त हो, दुर्गुणो से भरा हुआ हो, नंपुसंक हो, जैसा भी हो फ़िर भी स्त्री को पतिव्रता बनकर उसे देव की तरह पूजना चाहिए.- मनुस्मुर्तिःअध्याय-५ श्लोक-१५४. 
जो इस प्रकार के उपर के ये प्रावधान वाले पाशविक रीति-नीति के विधान वाले पोस्टर क्यो नही छपवाये? 
(१) वर्णानुसार करने के कार्यः - 
- महातेजस्वी ब्रह्मा ने स्रुष्टी की रचना के लिए ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य और शूद्र को भिन्न-भिन्न कर्म करने को तै किया हैं - 
- पढ्ना,पढाना,यग्य करना-कराना,दान लेना यह सब ब्राह्मण को कर्म करना हैं. अध्यायः१:श्लोक:८७ 
- प्रजा रक्षण , दान देना, यग्य करना, पढ्ना...यह सब क्षत्रिय को करने के कर्म हैं. - अध्यायः१:श्लोक:८९ 
- पशु-पालन , दान देना,यग्य करना, पढ्ना,सुद(ब्याज) लेना यह वैश्य को करने का कर्म हैं. - अध्यायः१:श्लोक:९०. 


- द्वेष-भावना रहित, आंनदित होकर उपर्युक्त तीनो-वर्गो की नि:स्वार्थ सेवा करना, यह शूद्र का कर्म हैं. - अध्यायः१:श्लोक:९१. 
(२) प्रत्येक वर्ण की व्यक्तिओके नाम कैसे हो?:- 
- ब्राह्मण का नाम मंगलसूचक - उदा. शर्मा या शंकर 
- क्षत्रिय का नाम शक्ति सूचक - उदा. सिंह 
- वैश्य का नाम धनवाचक पुष्टियुक्त - उदा. शाह 
- शूद्र का नाम निंदित या दास शब्द युक्त - उदा. मणिदास,देवीदास 
- अध्यायः२:श्लोक:३१-३२. 
(३) आचमन के लिए लेनेवाला जल:- 
- ब्राह्मण को ह्रदय तक पहुचे उतना. 
- क्षत्रिय को कंठ तक पहुचे उतना. 
- वैश्य को मुहं में फ़ैले उतना. 
- शूद्र को होठ भीग जाये उतना, आचमन लेना चाहिए. 
- अध्यायः२:श्लोक:६२. 
(४) व्यक्ति सामने मिले तो क्या पूछे?:- 
- ब्राह्मण को कुशल विषयक पूछे. 
- क्षत्रिय को स्वाश्थ्य विषयक पूछे. 
- वैश्य को क्षेम विषयक पूछे. 
- शूद्र को आरोग्य विषयक पूछे. 
- अध्यायः२:श्लोक:१२७. 
(५) वर्ण की श्रेष्ठा का अंकन :- 
- ब्राह्मण को विद्या से. 
- क्षत्रिय को बल से. 
- वैश्य को धन से. 
- शूद्र को जन्म से ही श्रेष्ठ मानना.(यानी वह जन्म से ही शूद्र हैं) 
- अध्यायः२:श्लोक:१५५. 
(६) विवाह के लिए कन्या का चयन:- 
- ब्राह्मण सभी चार वर्ण की कन्याये पंसद कर सकता हैं. 
- क्षत्रिय - ब्राह्मण कन्या को छोडकर सभी तीनो वर्ण की कन्याये पंसद कर सकता हैं. 
- वैश्य - वैश्य की और शूद्र की ऎसे दो वर्ण की कन्याये पंसद कर सकता हैं. 
- शूद्र को शूद्र वर्ण की ही कन्याये विवाह के लिए पंसद कर सकता हैं.- (अध्यायः३:श्लोक:१३) यानी शूद्र को ही वर्ण से बाहर अन्य वर्ण की कन्या से विवाह नही कर सकता. 
(७) अतिथि विषयक:- 
- ब्राह्मण के घर केवल ब्राह्मण ही अतिथि गीना जाता हैं,(और वर्ण की व्यक्ति नही) 
- क्षत्रिय के घर ब्राह्मण और क्षत्रिय ही ऎसे दो ही अतिथि गीने जाते थे. 
- वैश्य के घर ब्राह्मण,क्षत्रिय और वैश्य तीनो द्विज अतिथि हो सकते हैं, लेकिन ... 
- शूद्र के घर केवल शूद्र ही अतिथि कहेलवाता हैं - (अध्यायः३:श्लोक:११०) और कोइ वर्ण का आ नही सकता... 
(८) पके हुए अन्न का स्वरुप:- 
- ब्राह्मण के घर का अन्न अम्रुतमय. 
- क्षत्रिय के घर का अन्न पय(दुग्ध) रुप. 
- वैश्य के घर का अन्न जो है यानी अन्नरुप में. 
- शूद्र के घर का अन्न रक्तस्वरुप हैं यानी वह खाने योग्य ही नही हैं. 
(अध्यायः४:श्लोक:१४) 
(९) शब को कौन से द्वार से ले जाए? :- 
- ब्राह्मण के शव को नगर के पूर्व द्वार से ले जाए. 
- क्षत्रिय के शव को नगर के उतर द्वार से ले जाए. 
- वैश्य के शव को पश्र्चिम द्वार से ले जाए. 
- शूद्र के शव को दक्षिण द्वार से ले जाए. 
(अध्यायः५:श्लोक:९२) 
(१०) किस के सौगंध लेने चाहिए?:- 
- ब्राह्मण को सत्य के. 
- क्षत्रिय वाहन के. 
- वैश्य को गाय, व्यापार या सुवर्ण के. 
- शूद्र को अपने पापो के सोगन्ध दिलवाने चाहिए. 
(अध्यायः८:श्लोक:११३) 
(११) महिलाओ के साथ गैरकानूनी संभोग करने हेतू:- 
- ब्राह्मण अगर अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो सिर पे मुंडन करे. 
- क्षत्रिय अगर अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो १००० भी दंड करे. 
- वैश्य अगर अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो उसकी सभी संपति को छीन ली जाये और १ साल के लिए कैद और बाद में देश निष्कासित. 
- शूद्र अगर अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो उसकी सभी संपति को छीन ली जाये , उसका लिंग काट लिआ जाये. 
- शूद्र अगर द्विज-जाती के साथ अवैधिक(गैरकानूनी) संभोग करे तो उसका एक अंग काटके उसकी हत्या कर दे. 
(अध्यायः८:श्लोक:३७४,३७५,३७९) 
(१२) हत्या के अपराध में कोन सी कार्यवाही हो?:- 
- ब्राह्मण की हत्या यानी ब्रह्महत्या महापाप.(ब्रह्महत्या करने वालो को उसके पाप से कभी मुक्ति नही मिलती) 
- क्षत्रिय की हत्या करने से ब्रह्महत्या का चौथे हिस्से का पाप लगता हैं. 
- वैश्य की हत्या करने से ब्रह्महत्या का आठ्वे हिस्से का पाप लगता हैं. 
- शूद्र की हत्या करने से ब्रह्महत्या का सोलह्वे हिस्से का पाप लगता हैं.(यानी शूद्र की जिन्द्गी बहोत सस्ती हैं) 
- (अध्यायः११:श्लोक:१२६) 

Thursday, 18 May 2017

ब्राह्मणों के कार्यक्रम पर अमरीका में पाबंदी : कहा मानसिक विकृति फैलाते है ये लोग


जन उदय : हाल ही में एक बेहद जरूरी तथ्य सामने आया है , कि अमरीका ने ब्राह्मण कार्यक्रमों पर रोक लगा दी है और इसके कारण बहुत ही स्पष्ट है , अमरीका ने जो कारण गिनाये है वे तो है ही लेकिन इससे एक बात साफ़ हो गई है की ब्राह्मण जहा भी जाते है अपने साथ अपनी कुत्सित और दूषित मानसिकता भी साथ ले जाते है , घृणा फैलाना भेदभाव फैलाना इनका पहला काम है .. आइये एक बार नजर मारते है की अमरीका ने क्या कहा


इस साल आमेरिका मे होनेवाले "अखिल भारतिय ब्राम्हण महासभा" के साहित्य सम्मेलन को अमेरिकन सरकार ने ब्राम्हण समाज कों अधिवेशन के लिए नकारा हैं।

अमेरिकन सरकार ने उसके लिए कारण दिये हैं

1) ब्राम्हण साहित्य ने भारतीय इतिहास एवं साहित्य का विकृतिकरण किया हैं ।
.2) ब्राह्मणी साहित्य एक दूसरे में झगड़ा पैदा करता हैं।
3) ब्राम्हण, भारतीय प्रेरक महापुरुषो की बदनामी करते हैं।
4) वे जातपात का पालन करते हैं।
5) भेदभाव कर के अपना वर्चस्व निरंतर बनाए रखते हैं .।

अमेरिकन सरकार ने कहा कि ये सभी बाते हमारे देश में बिलकुल नहीं होनी चाहिए। उसके लिए उन्होने ब्राम्हण महासभा के पूना (Pune) सचिव को नोटिस भेजा हैं।

.इस खबर को मीडिया ने फ्लैश नहीं किया क्योंकि मीडिया ब्राह्मणवाद का पर्दाफ़ाश करना नहीं चाहती।

 USA Ban the Brahman Mahasabha Programme saying the spread hatredness