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Saturday, 23 April 2016

आईसीस है दुनिया का सबसे अमीर आतंकवादी दल ,आर एस एस भी देता है मदद


जन उदय : पुरे एशिया को ही नहीं दुनिया को दहलाने वाले आईसीस कैसे अचानक इतना खतरनाक और दुनिया में फ़ैल गया इसका अनुमान लगाना सबके लिए तना मुश्किल हो गया था की ये समझ ही नहीं आ रहा था

लेकिन जैसे जाहिर है हर आतंकवादी दस्ते जो किसी न किसी विचारधारा पर चलते है  और उनको चलाने के लिए पैसा जरूरी होता है इसलिए या जानना भी जरूरी होता है
ऐसा अनुमान लगाया जा रहा  है की आईसीस  हर साल दुनिया में एक  बिलियन डॉलर की हेरोइन बेच कर कमाता है जो इसे अफगानिस्तान से मिलती है ,  अमरीका का ऐसा अनुमान भी है की आईसीस को फंडिंग  कतर से मिलती है लेकिन इसके सबूत नहीं मिलते है

लेकिन सारी विवेचना  करने के बाद यह मालूम होता है की  आईसीस को भी अमरीका की तरफ से ही फंडिंग आती है , जो अपरोक्ष रूपसे इस्राइल से अता है ,  सवाल यह है की अमरीका एशिया में आत्नक्व्वाद फैलाने के लिए  इतना पैसा क्यों खर्च करता है ?? सीधा सा जवाब है की अमरीका नहीं चाहता की इस इलाके में कभी शान्ति रहे क्योकि इस क्षेत्र के तेल पर वह अपना कब्जा करना चाहता है , अमरीका की इस कार्यवाही से परेशान मुस्लिम इस बात को फैलाने की कोश्सी करते है की अमरीका मुस्लामनाओ का दुश्मन है , जब ऐसा नहीं है अमरीका तेलक्षेत्र पर अपना कब्जा चाहता है बस और कुछ नहीं

इस तरह के आतंकवाद को अमरीका सीधा सीधा फंडिंग नहीं देता बल्कि यहुदियो के काफी ग्रुप है जो मुस्लिम समुदाय में घुल मल कर रहते है और म्सुलिम युवाओं को  हमेशा अमरीका के खिलाफ भडकाते है और इस्लाम की रक्षा के लिए उकसाते है , जब ऐसा दल बन जाता है तो यहूदी एजेंसी पैसा हथियार उपलब्ध करवा देती है और शुरू हो जता है आतंक का खेल

ऐसा भी कहा  जाता है की इस खेल में आर एस एस भी शामिल है , आर एस एस की अमरीका में काम कर  कर रही ब्रांच जिनके पास अरबो रूपये का फण्ड है और ये लोग यहुदियो के साथ मिल कर काम करते है , ये लोग भी आईसीस को पैसा पहुचा रहे है
अब सवाल यह है की आर एस एस जो एक हिन्दू संघठन है वह अपने दुश्मन मुस्लिम को क्यों  मदद देगा ,

दरसल यही भ्रम है की आर एस एस एक हिन्दू संघठन है , दरसल आर एस एस हिन्दू नहीं बल्कि  ब्राह्मण संघठन है और इसकी मंशा भारत और इसके आस पास के  क्षेत्र पर कब्जा करना चाहता है और वह भी सिर्फ ब्राह्मणों का  अगर इस क्षेत्र में मुस्लिम समृद्ध और शकिशाली रहेंगे तो ब्राह्मणों के लिए बहुत  परेशानी  रहेगी , यानी इतिहास में भी ये लोग मुस्लिम के चमचे रहे और वर्तमान में भी मुस्लिम पर आश्रित और डर कर रहना पड़ेगा  सो यह प्लान अच्छा है की पाकिस्तान  अफगानिस्तान , इरान ईराक , कतर, कुवैत अस्त व्यस्त रहे अशांत रहे और आपस में ही लड़ मर खत्म हो जाए ,

आर एस एस की  इसी तरह की पालिसी भारत में है जो मुस्लिम और दलित के खिलाफ है यानी इनको पढने नहीं देना , अशांत रखना  ताकि ये सिर्फ जानवर बने रह जाए न की अपने अधिकारों के बारे में जागरूक नागरिक और इनका शाशन हमेशा चलता  रहे .

 इसमें ख़ास बात यह है की आर एस एस ब्राह्मणों का सन्घठन है और कहा जाता है की इसमें सिर्फ भाजपा के लोग शामिल है   यह बात गलत है , आर एस एस के साथ  कांग्रेस , वामपंथी और अन्य सभी ब्राह्मण साथ है  ये तरह तरह के दल सिर्फ लोगो को गुमराह करने के लिए है , ब्राह्मण जहा भी है वह पक्का संघी है  हाँ यह बात जरूर है की अन्य ब्राह्मण लोगो का कार्य करने का स्टाइल अलग है


जानिये क्या है जातिवादियो का षड्यंत्र जिसके तहत नहीं मिलता सेना में जाति आधारित आरक्षण : जाति के नाम पर रजिमेंट क्यों ??


जन उदय : भारत के जातिवादी लोग आरक्षण का विरोध सिर्फ इसलिए नहीं करते की इसके आधार पर सदीओ से पिछड़े लोग आगे आ जाएंये , बल्कि इसलिए करते है की  अगर ये पिछड़े लोग आगे बढ़ गए , पढ़ लिख गए  तो  इन ब्राह्मणवादीओ के सारे झूठे ग्रन्थ , भगवान् की पोल खोल देंगे , पुरे दुनिया अपने हक की लड़ाई लड़ेंगे और सबसे बड़ा डर यह की ये दलित पीड़ित लोग अपने उपर हुए हर जुल्म का बदला लेंगे , इसलिए यह जातिवादी लोग हमेशा घबराए रहते है और इनकी घबराहट आरक्षण के विरोध  में साफ़ झलती है , , इन्हें दरअसल डर है  और इनके सभी काम इसी डर और भय के आधार पर होते है

जैसे इन्हें कोई चिंता नहीं की आरक्षण के आधार पर क्लर्क , चपरासी , की नौकरी दलितों को मिल जाए  लेकिन ये नहीं चाहते की आरक्षण के आधार पर दलितों को शिक्षा  मेडिकल , इंजीनियरिंग , विज्ञान  और रिसर्च में नहीं अनाए देना चाहते . और हुआ भी यही है आरक्षण का रोना जितना मर्जी रोते रहे लेकिन इन क्षेत्रो में दलितों का प्रतिशत बहुत ही कम है या कहे न के बारबार है , हर जगह ब्राह्मण , बनिए घुसे है  और यही कारण है की देश अब बरबादी के कगार पर पहुच गया है  पूरी दुनिया में भारत की थू थू  हो रही है लेकिन इन बेशर्मो को कोई फर्क नहीं पढ़ता



जातिवादियो में एक बहुत  बढ़ा डर इस बात का है की इनसे दलित बदला लेगा  सो इन लोगो ने सेना में आरक्षण के लिए मना कर दिया यह कह कर की ये देश की सुरक्षा का सवाल है  , बिलकुल सही देश की सुरक्षा के नाम पर इस जातिवादी सेना ने क्या किया है  ?? हर जगह पीटने का इनका रिकॉर्ड है , हाँ कश्मीर , और आदिवासी क्षेत्र जहा पर गरीब लोग रहते है निहत्थे  रहते है उनकी हत्या  बलात्कार के अच्छे रिकॉर्ड है  और यह हम नहीं कहते दुनिया के मानवधिकार सन्घठन कहते है
इसके अलावा जब  सेना में आरक्षण है ही नहीं तो  नौकरी के प्राथना पत्र में जाति क्यों  पूछी जाती है ??  इस बात का इनके पास कोई जवाब नहीं , होगा भी नहीं क्योकि ये सब एक षड्यंत्र के तहत है यानी दलित को नहीं आने देना ताकि   भविष्य में अगर कुछ हो जाए  जैसे गृह युद्ध तो दलित सेना में नहि  होंगे तो   सेना दलितों का संहार बड़ी आसानी से कर सकेगी

इसके अलावा जाति के नाम पर  सेना में रजिमेंट है मराठा , जाट , सिख  आदि  तो ये सब क्यों ?? अगर आप इमानदार है और देशभक्त है तो कम से कम देश की सेना में ये जातिवादी दृष्टिकोण नहीं होना चाहिए 

जानिये कैसे धर्म की आड़ में छिप जाती है मानसिक विक्ष्प्ता : ब्राहमणों के धर्म ग्रन्थ है मूल कारण

जन उदय : जब से इस प्रथ्वी पर इंसान  बना है उसके अंदर तरह तरह के  डर और मानसिक विकार पनपने लगे और ये मानसिक विकार और  विक्रित्या उन लोगो ने जयादा फैलाई जो लोग इंसानों को एक अजबनबी डर दिखा कर समाज पर अपना कब्जा ज़माना चाहते थे ,
इसी तरह के लोगो ने कई धार्मिक ग्रन्थ लिखे और यह कहा की ये भगवान् के संदेश है जिन्हें उन्होने बड़ी तपस्या के बाद  सूना है ,भोले भाले लोग जो तर्क नहीं कर सकते थे और किसी भी अनहोनी से डरते थे उन्होंने ये मान लिया की ये सब भगवान् ने कहा है , आइये जानते है ये मानसिक विक्षिप्ता क्या है

मूर्ति पूजा ;  भगवान् है कहा है कैसा है , कैसा दीखता है , ये सब दिखाने के लिए धूर्त लोगो ने भगवान् की एक तस्वीर बना दी या मूर्ति बना दी और ये प्राय आदम आकार से बड़ी और शास्त्र के साथ होती थी , बड़ा ही अजीब लगता  है की जो मूर्ति  अपनी खुद रक्षा नहीं कर सकती , अपना दिया नहीं चला सकती   उसके सामने एक धूर्त के कहने पर सब लोग हाथ जोड़ कर खड़े हो जाते है और याचना करते है ,  इन्ही मुर्तियो का रूप १९वी शताब्दी में राजा रवि वर्मा ने तस्वीरो में किया  इसके बाद रंग बिरंगे  तरह तरह के भगवान् प्रचलन में आ गए ,

स्वर्ग में पितृ भूखे है या गुस्सा है : या सब जानते है आदमी के जीवन में  उतार  चढाव  आते जाते रहते है धूर्त लोगो ने बताया की ये उतार चढाव इसलिए आते है  क्योकि आपके पितृ स्वर्ग में भूखे है इसलिए उनके लिए कुछ करो , सिर्फ इस कारण किसान , गरीब लोग कर्जा लेते थे  और फिर कर्ज में डूब जाते थे इसके बाद एक पीड़ी के बाद दूसरी पीड़ी गुलाम बन जाती थी
बलि प्रथा : आपकी किस्मत इसलिए नहीं खुल रही है क्योकि आपने इस भगवान् को बलि नहीं चढाई सो कभी मानव बलिया दी गई और आज  भी दी जाती है , किसी की सन्तान नहीं हो रही , या धनवान नहीं बन रहा उसके लिए मानव बलि या जानवर बलि देने के प्रचलन है
भूत प्रेत का चढना : अक्सर अखबारों में टीवी में आता रहता है की फला औरत पर काली चढ़ गई है उस पर भैरो  बाबा आ  गए है उसको गाव में घसीटा जाता अहै कई बार औरत या बच्चो की हत्याए भी हुई है इसी बात  को लेकर 

इसी रह की लाखो मानसिक  विक्षिप्ता है जो धर्म और भगाव की आड़ में छिप जाती है एक  मनोवैज्ञानिक सर्वे में यह साफ़ हो गया है की भारत के ९९.२५ % लोग मानसिक रोग से शिकार है और जिसमे हिन्दू कहे जाने वाले लोग १०० % मानसिक रोग से पीड़ित है , यह भी सामने आया है की नास्कित लोग जयादा बुद्धिमान और सफल है ,

तथाकथित हिन्दू  बचपन से ही ये बीमारिया   संस्कारों के नाम पर अपने माता पिता  से ले लेते है उन्हें पता भी नहीं चलता है की वो मानसिक रोग का शिकार हो  रहे है , ऐसे लोगो का मनोबल काफी कमजोर होता है और बार बार , हर बात में सहारा ढूंढते है , अपने आप खुद कुछ नहीं कर पाते मानसिक विक्रित्या चाहे लड़के लड़की के भेद करने की क्यों न हो ये भारतीय समाज में बहुत जयादा है
धर्म के नाम पर संन्यास के नाम पर जन्मी मानसिक विकृति इंसान को कामचोर  और निठल्ला बना देती है हिन्दुओ के साधू , सन्यासी सभी इसी मानसिक रोग का शिकार है हलांकि इस रोग के जरिये ये लोग जयादा पैसा और दौलत कमा लेते है  , और पैसा कमाने के चक्कर में ये साधू कई बार अपराध भी करते है


Friday, 22 April 2016

जानिये क्यों : 93.85 % लडकिया शादी तय होते ही फेसबुक अकाउंट बंद और फोन नम्बर बदल लेती है : सर्वे

जन उदय : भारतीय समाज चाहे जितना मर्जी आगे बढ़ गया हो लेकिन यहाँ के पोराणिक  और घटिया संस्कार जो हमें धर्म ग्रंथो और ब्राह्मणवादी समाज से मिलते है वो कभी नहीं बदलते हम आज भी एक घटिया  मानसिकता के साथ जीते है और अपने आपको सार्वजनिक रूप से अपने आपको बढ़ा ही प्रगतिशील और मॉडर्न दिखाने की कोशिस करते है लेकिन अंदर से  जानवर ही होते है

हमारी मानसिकता और मूल्य हमेशा दोहरे मापदंड पर आधारित होते है मर्दों के लिए कुछ और
इसलिए शादी से पहले और शादी के बाद हमारे यहाँ लड़के लडकियो की सौच बहुत अलग होती है , जो लड़की लड़के को शादी से पहले जींस, टॉप , स्कर्ट में अच्छी लगती है

 और खुल कर दोस्तों से बात करने अच्छी  लगती है  वही  लड़की शादी के बाद अगर शादी से पहले के लडके दोस्तों से बात करे तो लड़के के मन में शक आ जाता है  यह बात उसको बिलकुल गवारा नहीं होती की उसकी बीवी किसी गैर मर्द से फोन पर बात करे  या मिले

भारतीय लडकिया भी इस मामले में अब काफी उस्ताद हो गई है वो विरोध का रास्ता न अपना कर ट्रिक का या समझोते का रास्ता अपनाती है यानी शादी से पहले फेसबुक , व्हाट्सअप  आदि पर खूब जोक शोक करती है लेकिन जैसे ही उनकी शादी तय होती है और लड़का लड़की को एक दुसरे का नम्बर मिलता है वैसे ही लड़की अपना फेसबुक अकाउंट बंद कर देती है और नम्बर बदल देती है कारण ?? लड़की अपनी शादीशुदा जिन्दगी में कोई खलल नहीं चाहती और नहीं चाहती की शादी से पहले का कोई लड़का फ्रेंड उसके निजी जीवन  के किसी भी दुःख का कारण बने


देश के छ महानगरो में २५-३५ उम्र की शादी शुदा ३००० महिलाओं पर यह सर्वे किया गया और सबने यही माना की फेसबुक और पुराना  नम्बर किसी दुःख का कारण  बन सकता है इसलिए उन्होंने   फेसबुक बंद किया  और नम्बर  बदल लिया सिर्फ ६.१५ % लडकियो ने कहा  की न तो उन्होंने अपना नम्बर बदला और न ही फेसबुक बंद किया   जो है सब सामने है  किसी को अच्छा लगे या न लगे 

धर्म के नाम पर अय्याशी और वेश्यावृति करने के लिए पानी है लेकिन गरीबो की जान बचाने के लिए नहीं ,सिंघ्स्थ कुम्भ , देश से गद्दारी और देशद्रोह है


जन उदय : धर्म के नाम पर इस देश में दंगे होते है , लोगो की जिन्दगी छिनी जाती है ,उनके मूह से निवाला  छिना  जाता है , उनसे शिक्षा छिनी जाती है  यह कोई नई बात नहीं और वाही वो रहा है मध्य प्रदेश  में , कुम्भ के नाम पर नदी का लाखो लीटर पानी उन नंग धडंग साधू के नाम पर दिया गया है अ  जो अपने जिन्दगी में तो समाज और  परिवार के भगोड़े है ही साथ ही देश के दुश्मन बने हुए है

यह बात देखनी की है की मध्य प्रदेश से सटे राज्य महाराष्ट्र में इस कद्र सुखा पड़ा  है की वहा पानी के लिए लड़ाइया हो रही है  और देश के नेता अपनी अपनी जाती के लिए पानी की वाव्य्स्था करवा रहे है

उसकी ख़ास बात यह भी है की सरकारी पानी केवल उन जगह पर भिजवाया जा रहा है जहा पर सवर्ण बाहुल्य  में है अहा दलित है वहा नहीं

यह बात भी ध्यान रखने की है खुद मध्य प्रदेश भी सूखे से प्रभवित है और पिछले कई सालो से लेकिन मानसिक रूप से विकृत  मुख्यमंत्री पिछले साल भी पानी के लिए यग्य करवा रहा था , शिवराज सिंह चोहान  जैसे लोग जिनका मानसिक इलाज किसी पागलखाने में चलना चाहिए  जो पानी की वाव्य्स्था न करके यग्य और कुम्भ जैसी चीजो पर लाखो करोडो रूपये खर्च कर रहे है 


जितना पैसा और पानी कुम्भ पर खर्च हो रहा है उससे  महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में पानी की कमी को दूर किया जा सकता है लेकिन धर्म के नाम पर गुमराह करने वाले , धर्म के नाम पर शाजिस करने वाले दंगा करने वाले इन संघी लोगो को कुछ दिखाई नहीं देता 

जानिये क्या है देश की सबसे बड़ी समस्या “”ब्राम्हणवादी आतंकवाद”” राज आदिवाल

देश में जितने भी जगह बम ब्लास्ट हुए वे सारे के सारे आरएसएस या आरएसएस से जुड़े लोगो ने यानि ब्राम्हणो ने ही करवाए। असित चटर्जी उर्फ़ असिमानद ने कन्फेशन में कहा की देश भर में जितने बं ब्लास्ट हुए वे सारे के सारे आरएसएस ने ही करवाए !! मगर सत्ता में बैठी कांग्रेस ने उन सारे आतंकवादियों को बचाया क्यों की मोहन भागवत  को वह बचा रहे थे !कांग्रेस ने ही तो आरएसएस को १९२५ में पैदा किया था ना  !कांग्रेस बीजेपी आरएसएस कम्युनिस्ट ब्राम्हणो डीएनए एक ही है !!

सन २००८ को जब मालेगाव बम  ब्लास्ट की जाँच करकरे ने शुरू की तब उन्हें लेफ्टनत कर्नल प्रसाद पुरोहित और दयानन्द पांडे  के पास से ३ लैपटॉप जप्त किये गए।  उसमे मिली जानकारी यह ब्राम्हणी राज  ब्लू प्रिंट था।


उसमे आरएसएस के द्वारा ही चलाये जा रहे अभिनव भारत के असंख्य गुप्त मीटिंग्स के वीडियो , ओडिवो रिकॉर्डिंग थे।  उसके अनुसार उन ब्राम्हणी आतंकवादियों  मीटिंगे delhi ,जम्मू,कलकत्ता ,फरीदाबाद,भोपाल,इंदौर ,जबलपुर,नासिक ,पुणे ,देवळाली इन  पर गुप्त मीटिंगे  हुयी !उन ३ लैपटॉप में ४८ पार्ट है जिसमे २४ विडीवो और २४ ओडिवो  है। उसमे से केवल ४ या ५ भागो का ही सामने जिक्र आता  है बाकी ढेर सारी  बाते सामने अभी तक आयी  नहीं है। वह सब जानकारी सामने नहीं आयी  है अगर वह आती है तो ३ प्रतिशत ब्राम्हणो को जेल में डाला  जायेगा या फिर उन्हें जनता ही चौक चौराह पर लाकर  मार डालेंगी यह चिंता ब्राम्हणो को है।

भारत में छाहे कांग्रेस आये  या बीजेपी, कम्युनिस्ट  ब्राम्हणो के होने के कारण  ब्राम्हणी आतंकवाद को बढ़ावा देते है क्यों की इसी से ३ प्रतिशत ब्राम्हणो का भारत पर और लोकतंत्र पर नाजायज कब्जा हो जाता है। जो भी जाँच एजंसियां है उनमे भी ब्राम्हण  उन्ही  नियंत्रण है !  नाजायज तरीके से कब्ज़ा किया है। आयबी  और एटीएस ,NIA पर भी विदेशी ब्राम्हणो ने कब्ज़ा  किया है।  २६ - ११ का जो हमला हुआ था उसमे आरएसएस का भी हाथ था और इसी में जो मालेगाव बम  ब्लास्ट की तहकीकात कर  रहे अधिकारियो की हत्याए  भी कर दी गयी और इस काम के लिए कांग्रेस ने आरएसएस को मदत किया !! कांग्रेस के ब्राम्हण कितने महान  होगे इसकी आप कल्पना करो !!

कई जगह पर बम ब्लास्ट हुए उसमे से १७ जगह के बम  ब्लास्ट के मामले के चार्ज शीट कोर्ट में दायर हुए है वे सारे के सारे आरएसएस पर हुए है।  न्यायपालिका में बैठे ब्राम्हण क्या आतंकवादियों का समर्थन कर रहे है ?जानकारी सामने आयी  है पुरोहित को बचाया जा रहा है !! क्लीन चिट  दी जा रही है !! शेम शेम !!

क्या हम भारत में रहते है ? क्या भारत में लोकतंत्र है ?
उन १७ जगह की कोर्ट में दायर  चार्ज शीट  अनुसार आरएसएस आतंकवादी ब्राम्हणो  संघठन है  जानकारी :
आरएसएस , अभिनव भारत और वन्दे  मातरम के ब्राम्हणो ने किये बम  ब्लास्टः
१ अजमेर शरीफ ,राजस्थान २००६
२ मक्का मस्जित ,आंध्र प्रदेश ,हैदराबाद २००६
३ समझौता एक्सप्रेस २००६
४ मालेगाव , महाराष्ट्र २००६
५ मालेगाव महाराष्ट्र २००८
६ मोडासा ,गुजरात २००८
आरएसएस और बजरंग दलों के द्वारा किये गए बम  ब्लास्ट :
७ नांदेड़ ,महाराष्ट्र २००६
८  परभणी ,महाराष्ट्र २००३
९  जालाना , महाराष्ट्र २००४
१० पूर्णा  , महाराष्ट्र २००४
११ कानपुर , उप , २००८

आरएसएस  के द्वारा किये गए बम  ब्लास्ट
१२ कन्नूर , केरल , २००८
१३ तेन काशी , तमिलनाडु २००८
१४ पनवेल , महाराष्ट्र, २००८
सनातन संस्था  के द्वारा किये गए बम  ब्लास्ट :
१५ ठाणे ,  महाराष्ट्र , २००८
१६ वाशी , नवी मंबई , महाराष्ट्र
१७ मडगाव , गोवा , २०१०
अब इन बम  ब्लास्ट में शामिल ब्राम्हणो की लिस्ट :
१ सुनील जोशी  - मऊ  , मध्य प्रदेश का आरएसएस का प्रचार प्रमुख  १९९०  से २००३
२ संदीप डांगे - आरएसएस का प्रचार प्रमुख :शाजापुर , मध्य प्रदेश , २००५ से २००८
३ देवेन्द्र गुप्ता जामताड़ा झारखण्ड का आरएसएस का जिला प्रचार प्रमुख
४ लोकेश शर्मा -आरएसएस का नगर कार्यवाहक देवगढ़।
५ चंद्रकांत लावे - आरएसएस का जिला  प्रचार प्रमुख :शाजापुर , मध्य प्रदेश , २००८ से २०१०
६  स्वामी असिमांंनन्द - आरएसएस का सबसे पुराना और सर्वोच्च नेता। 
७ राजेंद्र उर्फ़ समुन्दर - आरएसएस वर्ग विस्तारक।
८ मुकेश वासनी -गोधरा का आरएसएस का कार्यकर्त्ता
९ रामजी कालसांगरा - आरएसएस का कार्यकर्त्ता
१० कमल चौहांन - आरएसएस का कार्यकर्ता
११ साध्वी prdnya  सिँघ  ठाकुर , आरएसएस की कार्यकर्ता जो वन्दे  मातरम और अभिनव भारत से जुडी है !
१२ राजेंद्र चौधरी उर्फ़ रामबालक दास -आरएसएस का कार्यकर्ता
१३ धन सिंह उर्फ़ लक्ष्मण - आरएसएस का कार्यकर्ता
१४ राम मनोहर कुमार सिंह
१५  तेज राम उर्फ़ रामजी उर्फ़ रामचन्द्र कालसांगरा - आरएसएस का कार्यकर्त्ता
१६  संदीप उपाध्याय उर्फ़ संदीप डांगे  - आरएसएस
१७ सुनील जोशी - आरएसएस
१८ राहुल पाण्डे  - आरएसएस
१९ डॉ उमेश देशपांडे - आरएसएस
२० संजय चौधरी
२१ हिमांशु पानसे -
२२ रामदास मुलंगे
२३ नरेश राजकोंडावर
२४ योगेश विदुलकर
२५ मारुती वाघ
२६ गुरुराज तुप्तेवर
२७ मिलिंद एकबोटे
२८ मलेगोंडा पाटिल ( जो गोवा में बम  ब्लास्ट के साथ ही मारा  गया , यह पिछड़े वर्ग का है और उसका इस्तेमाल आरएसएस ने किया )
२९ योगेश नाईक
३०  विजय तलेकर
३१ विनायक पाटिल
३२ प्रशांत जुवेकर
३३ सारंग कुलकर्णी
३४ धनजय  अष्टेकर
३५ दिलीप  मंगोंकर
३६ जयप्रकाश उर्फ़ अन्ना
३७ रूद्र पाटिल
३८ प्रशांत अष्टेकर
३९ रमेश गडकरी -सनातन संस्था
४० विक्रम भावे - सनातन संस्था
   पिछले साल आरएसएस ने मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में भी बम  ब्लास्ट किया था जिसमे २०० से ज्यादा लोग टमाटर की तरह फटकर  मारे गए।  mp  में बीजेपी आरएसएस की सत्ता है उस मसले को आरएसएस ने दबाया !

 देश भर में आरएसएस बम  ब्लास्ट कर रही है। 

भारत में एक भी राजनैतिक दल  इन विदेशी ब्राम्हणो को आतंकवादी तक कहने को डरता है।

Thursday, 21 April 2016

आर एस एस के सीक्रेट एजेंट है नितीश लालू और मुलायम , कर रहे है शुद्र और मुसलमानों का सर्वनाश

जन उदय : कुछ लोगो को लगता है की आर एस एस का कार्यालय सिर्फ नागपुर में है और ये लोग वही से सारी देशविरोधी गतिविधिया चलाते है , दरसल ऐसा नहीं है  पहले आर एस एस के मक्कड़ जाल को समझना होगा आर एस एस  ने अपने एजेंट सभी पार्टियो में छोड़े हुए है चाहे वो वामपंथी हो या कांग्रेस   वैचारिक स्तर पर ये लोग उपरी तौर  पर ऐसा दिखाते है की जैसे आर एस एस के दुश्मन हो लेकिन अंदर ही अंदर ये सब आर एस एस  के सबसे बड़े समर्थक है और उसकी विचारधारा को ही आगे बढाते है ,
ऐसा आर एस एस और ब्राह्मणवादी करने पर क्यों मजबूर हुए . दरसल इनके सामने समस्या थी  शुद्रो की जिनका नेत्रत्व  बाबा साहेब कर रहे थे और उनके अधिकारों के लिए लड़  रहे थे , दूसरी समस्या  थी मुस्लिम की  जो जनसँख्या में काफी  जयादा है ,
यह बिल्किल सम्भव न हो पाया की सारे मुसलमान पाकिस्तान चले जाए सो येंके गले की हड्डी बन गए  अब  शुद्र और मुस्लिम  इन सभी के दिमाग में  ये ही टारगेट बन गए

समय समय  पर दंगे होते रहे , लोहे को लोहे से काटा जाता रहा यानी शुद्रो को हिन्दू बना कर मुस्लिम से लड़वाते रहे और मारते रहे  और मुस्लिम करते रहे  और यही नहीं सेक्लुरिस्म के नाम पर भी संघी दूकान चलाते  रहे , मुस्लिम शुद्र को मारता रहा और शुद्र मुस्लिम को  , कमाल की बता यह थी की इन हजारो दंगो में आजतक दस  स्वर्ण या ब्राह्मण नहीं मारे गए है लेकिन ये दोनों जानवर कौम आज तक इस बात को समझ ही नहीं पाई

इसके बाद इन दोनों का खेल अजीब तरीके से चालु हुआ ७० के दशक में एक मनुवादी के जरिये ही  जिसे जे पी आन्दोलन कहते है  इस आन्दोलन से तीन गुर्गे निकले  मुलायम , लालू  और नितीश

इन तीनो ने समाजवाद और एकता समानता के नाम पर इन दोनों कौमो को  यानी शुद्र और मुस्लिम को बेवकूफ बनाना  शुरू कर दिया ,

कमाल की बात यह है की इन तीनो के काल में बिहार यु पी में  हजारो दलितों के कत्ल हुए , उनके गाव   जलाए  गए  दिन रात  शुद्रो  का शोषण होता रहता है  हालात  यह है की दलितों की जमीन छीन कर   सवर्णों में बांटी जा रही है लेकिन कोई सुनवाई नहीं