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Tuesday, 19 April 2016

ओड़िसा ,गुजरात में चल रहा है आर एस एस का खुनी खेल , आदिवासिओ का धर्म परिवर्तन करा हिन्दू बना रहा है आर एस एस

जन उदय : भारत में यह बात प्रमाणिक और वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुकी है की इस में शुद्र और दलित कहे जाने वाला व्यक्ति ही इस देश का मूलनिवासी है और इस देश का मालिक है , पुष्यमित्र शुंग जिसको ब्राह्मण परशुराम भी कहते है .उस वक्त जो लोग पलायन कर जंगलो में चले गए थे वही लोग आज भी आदिवासी कहलाते है .
आदिवासिओ की संख्या  भारत में बहुत बड़ी है आजादी के इतने सालो बाद भी इनका कोई विकास सिर्फ जातीय आधार पर नहीं हो पाया , लेकिन कुछ समय तक जो इनका विकास हुआ वह सिर्फ इसाई मिसनरी के वजह से हुआ और इसी कारण ये लोग अपने अधिकारों के बारे में जागरूक हो गए

जिस तरह ओड़िसा , महाराष्ट्र , बिहार झारखंड  वेस्ट बंगाल में और अन्य जगहों आर एस एस के द्वारा चलाये जा रहे सन्घठन वहा के आदिवासिओ को लालच दे कर हिन्दू बना रहे है

हाल ही में गुजरात की कूकना जनजाति के लोगो को आर एस एस के लोगो ने कपड़े , और पैसे देकर उनकी सामूहिक शादी कराई , इस जनजाती की ख़ास बात यह है की इनके युवा युवती अपनी मर्जी से अपने पसंद के लड़का लड़की के साथ रहते है सेक्स भी करते है और बच्चे भी पैदा करते है लेकिन ओपचारिक तोर पर शादी काफी बाद में करते है या ये कहे जब लगता है की ये दोनों एक दुसरे के साथ जीवन बिता सकते है तब शादी करते है, लेकिन आर एस एस के लोग इन्हें सभ्यता का पाठ पड़ा रहे है और इनका हिन्दुकरण  कर रहे है  या ये कहे इनको ब्राह्मण संस्कार दे रहे है ,कमाल की बात यह है की न तो  कोई मीडिया वाला और न ही ऐसे संघठन जो मानवाधिकार के लिए लड़ते है इनके बारे में आवाज उठा रहे है

इसके अलावा ओड़िसा में ब्राह्मणों का एक संघठन काम कर रहा है जिसका नाम है कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंस  , यह सन्घठन भी आदिवासिओ को पढ़ाने के नाम पर उनको उनके गाव देहात और उनकी संस्कृति से अलग कर रहा है और इनका हिन्दुकरण कर रहा है बताया जाता है इस इंस्टिट्यूट में २५००० से जयादा आदिवासी  छात्र छात्राए पढ़ते है . इस संस्था के चलाने के पीछे सिर्फ यही एक कारण नहीं है बल्कि इन आदिवासिओ को इनकी जंगल और जमीन छोड़ने के भी कारण है ताकि ये यहाँ आ जाए और इनका ब्रेन वाश कर दिया जाए की लोग अपनी जडो से हट जाए

गरीबी हटाओ और शिक्षा बढाओ के नाम पर संघ बहुत भयानक खेल खेल  रहा है , संघ एक तरफ इनको हिन्दू नाम दे रहा है दूसरी तरफ पुरे देश में दलितों के खिलाफ आन्दोलन छेड़ा हुआ है ताकि इनकी संस्कृति को नष्ट किया जा सके


Monday, 18 April 2016

जानिये चोंका देने वाली वो वैज्ञानिक बाते जो साबित करती है रामायण और महाभारत काल्पनिक और झूठे ग्रन्थ है

जन उदय : विज्ञान और विज्ञानिक पद्धति वह प्रक्रिया है जिससे यह साबित हो जाता है की  मानव विकास में , तकनीकी  में ब्रह्माण्ड में होने वाली क्रियाये स्वाभाविक नहीं बल्कि एक दुसरे के कार्य – कारण  और एक वयास्थित प्रक्रिया की वजह से हो रही है , धुल आंधी , हवा का  चलना एक  वैज्ञानिक प्रक्रिया है न की कोई इन्हें पंखा  ले कर चला  रहा है बारिस एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है न कोई कोई उपर से पानी बरसा  रहा है . और यह वैज्ञानिक इसलिए है क्योकि इस जांच  हो सकती है और फिर इस जांच की भी जांच हो सकती है  और हर जांच में रिजल्ट सेम ही आयगा , यानी  वैज्ञानिक प्रक्रियामे कुछ डाटा लिया जाएगा , उनको व्यवस्थित किया जाएगा  उसी जांच होगी , उसको परखा जाएगा , रिजल्ट आने पर फिर से जांच होगी , और भारत में ही नहीं दुनिया के हर हिस्से में उसी प्रक्रिया की जांच होगी और सेम रिजल्ट आने पर वह विज्ञानिक प्रक्रिया होगी
अब सवाल आता है भारत में एक वर्ग द्वारा फैलाई जा रही भ्रान्तियो के बारे में यानी रामायण और महाभारत  कभी इस देश में हुए या नहीं  या ये सिर्फ कोरी  कल्पना है ,  

इतिहास ने भी विज्ञान के नियमो को अपनाया है और इतिहास का लेखन वास्तुनिष्ट सामग्री पर लेखन के लिए ही जो डाला गया है , और जब हम  वास्तुनिष्ट सबूतों या सामग्री की बात करते है तो उस पर रामायण और  महाभारत खरी नहीं उतरती ,  आइये देखे कैसे
 कहानी रामयाण और महाभारत एक एपिक की तरह लिखे गए ज्सिका मकसद सिर्फ और सिर्फ एक  राजनितिक षड्यंत्र तय्यार करना था जिसका पहला उधाह्र्ण है

1.कोई भी वास्तु /शिल्प  सबूत नहीं : हर राजा , महाराजा , अपने लिए महल बनवाता है , भवन बनवाता है , बाग़ बगीचे बनवाता है और इन इमारतो को वह कुछ ख़ास तरीके से बनवाता है यानी हम अगर सम्राट अशोक का इतिहास देखे तो हमें सभी प्रकार के सबूत मिलते है वास्तु भी शिल्प भी लेकिन रामायण और महाभारत के इन अभिनेताओं का कुछ भी नहीं मिलता , कुछ संघटनो का कहना है की मंदिर मिले है भगवान् के तो कोई इनसे पूछे क्या भगवान् इन्हों मंदिरों से शासन करते थे ??

2 . हर शासक , राजा  , महाराजा  अपने शासन काल में अपने सिक्के यानी व्यापार के लिए सिक्के ,मुद्रा चलवाता है , जो निश्चित तोर  पर उसकी सीमा और विदेश सीमा यानी उसके शासन के बाहर भी खुदाई में मिलते है लेकिन रामायण , महाभारत काल का ऐसा कुछ भी नहीं मिलता

३.  विदेशो से सम्बन्ध एक राजा के लिए बड़े जरूरी होते है , युद्ध भी होते है  संधिया भी होती है  लेकिन इन दोनों काल के यानी रामायण और महाभारत काल का ऐसा कुछ भी सबूत नहीं मिलता

४. विदेशो से व्यापार , यात्रिओ के लिए धर्मशाला , सुरक्षा वाव्य्स्था बाग़ बगीचे , सराय ये सब भी रहा बनवाता है लेकिन इन दोनों काल का कुछ भी नहीं मिलता

५. संस्कृति – कला ,किसी भी इतिहास में या शासन में अपनी कला और संस्कृति जन्म लेती है , लेखक ,कवी आदि जन्म लेते है लेकिन न तो किताबो के स्तर पर  कुछ भी नहीं मिलता , शिल्प , पेंटिंग , नक्काशी , वाल राइटिंग, वाल कार्विंग  , भित्ति चित्र आदि इस काल का कुछ भी नहीं मिलता
६. कालखंड . सबसे बड़ी बात होती है कि कोई भी घटना किसी कालखंड में  ही होती है यानी उसका अपना एक  समय होता है  लेकिन इन ग्रंथो का कोई भी कालखंड  नहीं है कहने को तो हर  धार्मिक संघठन अपनी अपनी दलील देता रहता है , कोई कुछ काल बताता है तो कोई कुछ
इसके अलावा  जो ग्रन्थ या किताबे मिली है उनकी भी कार्बन डेटिंग से कोई सबूत नहीं मिलता की ये ग्रन्थ बहुत पुराने है बल्कि इसमें भी घपला   है

सो  विज्ञान धारणा या कल्पना से शुरू हो सकता है लेकिन हमने उड़ने की कल्पना की लेकिन  उड़े कैसे ? इसलिए विज्ञानिक  कोई भी तत्थ्य आज तक नहीं है और न ही आयगा


Saturday, 16 April 2016

“”हिन्दू शब्द कवच है””” डरपोक और देशद्रोही आर एस एस का :: वर्ना इस देश में हिन्दू कोई नहीं

जन उदय : इतिहास की विवेचना कर लीजिये  ब्राह्मण द्वारा लिखे सारे ग्रन्थ छान मारिये  जिन्हें ये भगवान् का संदेश बता कर पेश करते है  जो भगवान् ने इन्हें संस्कृत  में दिए थे , कही भी आपको हिन्दू शब्द नहीं मिलेगा , मिलेगा तो वर्ण वाव्य्स्था  या जातिवाद वो भी भारतीय समाज में .
भारत की निचले स्तर की जातीओ को ब्राह्मणों ने अपना गुलाम बना कर रखा और आने वाले हर विदेशी हमलावर  चाहे वो मुस्लिम रहे या अंग्रेज उनके सामने अपना गुलाम  बना कर पेश किया  
ब्राह्मणों ने इन निम्न स्तर की जातिओ का मानसिक ,शारीरिक आर्थिक शोषण सदीओ तक किया और आज भी कर रहे है , ये लोग बिलकुल नहीं चाहते की दलित लोग आगे बड़े या पढ़े , ये सिर्फ इनको जानवरों की तरह ही गुलाम रखना चाहते है

शुद्रो को ब्राह्मण मुसलमानों से लड़वाने के लिए जब इस्तेमाल करते है  तब ये जातिया  हिन्दू होती है

मुसलमानों से लड़ने के बाद ये  सारे  लोग अनेक  जातियों में बाँट जाते है इन्हें फिर समाज में गन्दी नजरो से देखा जाने लगता है और सारी गंदगी फैलाता है ब्राह्मण .

जब  दलितों को शुद्रो को आगे बढ़ने की बात आती है तो ब्राह्मण ही सबसे पहला व्यक्ति होता है जो दलितों के अधिकार के खिलाफ बोलता है , ये इनकी शिक्षा का विरोध करता है , 

इनके आरक्षण का विरोध करता है और इनको मिलने वाली हर सविन्धानिक सुविधाओं  का विरोध करता है
और फिर मुसलमानों का डर  दिखा फिर हिन्दू हिन्दू करने लगता है , समाज को बांटने में असमानता फैलाने में ये लोग माहिर है  और  बंटा  हुआ समाज कभी भी तरक्की नहीं कर सकता



“”चुर्रेट चुर्रेट मुट्ठी से सिक्का बाहर”” एक मंजा हुआ मदारी है केजरीवाल ,जो एक ही सिक्के को बार बार मुट्ठी निकाल कर दिखा रहा है ,दिल्ली की जनता मुर्ख नहीं है

जन उदय : आपने सडको पर मोहल्लो में मदारी देखे  होंगे जो अपनी खाली हथेली दिखा कर फिर उसमे जमीन से मिटटी उठा कर रखता है फिर एक डंडे से चुर्रेट चुर्रेट करके मन्त्र पढ़ता है और और फिर मुट्ठी खोल कर सबको सिक्का दिखाता है , सबको जादूगर लगता है , जिसमे अक्ल भी होती है वह दर्शक भी समझ तो  जाता है की ये मदारी सबको बेवकूफ बना रहा है लेकिन बावजूद उसके वो भी उस मदारी का खेल बड़े ही आनंद से देखता है .

दरअसल अरविन्द केजरीवाल एक ऐसा ही मदारी है  जो दिल्ली की जनता को इसी तरह चुर्रेट
चुर्रेट  करके नए नए शो दिखा रहा है  कभी ओड- इवन कर  कभी महाराष्ट्र में पानी भेजने के नाम पर
वैसे कोमन सेन्स की बात है की जिस दिल्ली के पास खुद के लिए अपना पानी नहीं है वो महारष्ट्र में कैसे भेजेगा पानी ??

खैर  आरक्षण विरोधी सेना का सेनापति  आज अम्बेडकर के चरणों में पड़ा है और बोल रहा है की हम अम्बेकर को अपने स्कूलों में  पढ़ायांगे सवाल यह है की केजरीवाल जी आप बिलकुल न पढाओ अम्बेडकर को ये सब सगूफे न छोडो सबसे पहले जिन सरकारी स्कूलों में दलित बच्चे पढ़ते है उन सरकारी स्कूलों की हालत सुधारों जहा पर टीचर नहीं है और जो थे उनको आपने निकाल दिया आपके घर के बाहर दिन रात इन शिक्षको का पदर्शन होता है

दूसरी बात केजरीवाल को जो दिल्ली में बहुमत मिला उसके मुख्य कारण दिल्ली में व्यापत  भ्रष्टाचार था  आपने कहा था की आप शीला दीक्षित के खिलाफ , सुरेश  कलमाड़ी के खिलाफ केस करेंगे और उन्हें जेल भेजंगे  लेकिन ऐसा नहीं हुआ

आपने लोकपाल का शगूफा भी छोड़ा था लेकिन उसका भी कुछ नहीं हुआ
और अब केजरीवाल जी ५२४ करोड़ के सालाना विज्ञापनों के खर्च को मनीष सिसोदिया के साले की एजेंसी के जरिये अपने खुद के प्रचार पर खर्च कर रहे है और वो भी  बेतुकी बातो के लिए

केजरीवाल ने अपने रिश्तेदारों को  और अपने चहेतों को मलाई वाली पोस्ट पर बिना किसी योग्यता के बिठाना शुरू कर दिया है उन्हें नीली  और लाल बत्ती की गाडिया बांटी है

तकनिकी रूप से जो पैसा बिजली सब्सिडी  के रूप में दिया जा रहा है वह बिजली कम्पनियो पर सरकार का ही उधार है जिसे आप बर्बाद कर रहे है
कुल मिला कर अरविन्द केजरीवाल दिल्ली की जनता को मूर्ख न समझे  चुनाव आने दो फिर सब पता  चल जाएगा


जानिये कौन है माता पिता , डरपोक ,निर्बल .निर्लज्ज भगवान के

जन उदय : क्या आप जानते है कि  भगवान् कौन है ,कहा है कैसा है ?? शायद नहीं  सिवाय इसके कि कुछ लोग इसकी रचना आकर लेते है अपने आपको भगवान् का एजेंट कहते है  बताते है की उनका संदेश  लेकर आये है  साथ में ये भी बता देते है की भगवान् ने उनको कुछ लाइसेंस  दिया है
खैर  भगवान् कही नहीं होता  उसका  अस्तित्व  जब तक रहता है जब तक समाज में विषमता  रहती है ,दुःख दर्द  रहता है , तकलीफ रहित है बेरोजगारी रहती है , सबसे बड़ी बात जब जीवन में कुछ भी निश्चित  न हो और चारो तरफ से इंसान मुसीबतों से घिर जाता है तब वह भगवान् के पीछे पीछे  भागने लग जाता है वह सोचता है की उसके हाथ कोई ऐसी शक्ति है जो उसे सारी मुसीबतों से बाहर  निकल देगी , जबकि कोई  भी मुसीबत , समस्या तब तक सोल्व नहीं  हो सकती जब तक उसे सोल्व करने के लिए व्यक्ति खुद खड़ा नहो हो जाता

आपको  इस बात का भी शायद यकीन नहीं होगा की आपका भगवान् उतना ही बलवान और शक्तिशाली है जितना शक्तिशाली आपका विशवास और आस्था अगर आपकी आस्था कमजोर है तो आपको भगवान् भी कमजोर होगा

आपको यह भी शायद यकीन नहीं होगा की आपका भगवान् भाषा भी वही जानता है जो आप जानत है और उसको भोग , उसका माहोल वही होता है जो आपका होता है यानी भगवान् वही भाषा और संस्क्रती को जानता है जो आपकी है

आप लाख मुशीबत में होते है लेकिन भगवान् कभी नहीं आता , कभी नहीं सुनता केवल आपने जो कर्म किये होते है उसी के आधार पर आगे का फैसला आ जाता है  बाकी कुछ नहीं होता
हाल ही  में  पुत्निग्ल मंदिर की घटना भगवान् और केदरनाथ की घटना ने यह साबित कर दिया की आप सुरक्षित नहीं है यहाँ तक की अ भगवान् के घर में भी

भगवान्  इस कद्र निक्कम्मा और नकारा  है की खुद के बनाए हुए घर में नहीं रहता ह खुद  कमा नहीं सकता अपना घर नहीं बना सकता

इसलिए आप चींखते रहिये चिल्लाते रहिये लेकिन भगवान् आपकी मदद के लिए कभी नहीं आयगा .. हाँ एक बार हिम्मत करके खड़े हो जाइए आप अपने आप के भगवान् बन जाएंगे


भगवान् का जन्म एक ख़ास शासक वर्ग ने अपनी सत्ता चलाने के लिए और जनता को बेवकूफ बनाने के लिए किया है , जातिवाद भारत में  इसका बहुत बड़ा  उधाहरण है

Friday, 15 April 2016

अपने हर अपमान और जिल्लत का बदला लेगा दलित :बात सिर्फ आरक्षण या सामाजिक समानता की नहीं है

 जन उदय : युद्ध में जीत  प्राचीन समाज में एक व्यक्ति के हाथो में निरंकुश सत्ता देती थी अब ये बात उस राजा पर निर्भर करती थी की वो हारे हुए व्यक्ति को क्या सजा दे . सभी युद्ध में यही होता था की सत्ता बदल जाति थी लेकिन आम आदमी , मजदूर किसान वही रहते थे कोई आय जाए मजदूर सिर्फ  मजदूरी ही करते थे ,

लेकिन   ब्राह्मणों ने ऐसा नहीं किया पुष्यमित्र शुंग जो  अशोक के पोते के राज में उसका एक सेनापति था उसने धोखे से सारी सत्ता को हडप लिया और उसके बाद उसने बौध  लोगो की हत्या करना शुरू कर दिया , जहा जहा तक उसकी नजर गई  वहा वहा बौध विहार , तोड़ दिए गए उनकी हत्याए की गई  , उनकी औरतो के बलात्कार किये गए यहाँ तक की गर्भवती  बौध महिलाओं के पेट फाड़ कर बच्चे निकाल कर उनकी हत्याए की गई और इनकी सारी जमीन , खेत , घर खलिहान पर कब्जा कर लिया गया  . ब्राह्मण  इस पुष्यमित्र शुंग को  परशुराम कहते है  और अपना भगवान् मानते है
इसके बाद भी परशुराम का दिल नहीं भरा इन बौध लोगो को गुलाम बनाया गया  और इनको हर क्व्हीज से वंचित कर दिया गया  जिसमे शिक्षा , धन , सम्पति आदि रहा  और यह सिलसिला सदीओ तक रहा और धीरे धीरे खुद शुद्र लोग  ब्राह्मणों के इस षड्यंत्र कि इनका जन्म अपने से उपर  वाले वर्गों यानी जातिओ के सेवा के लिए हुआ है और इनका हक इस दुनिया की किसी भी चीज पर नहीं है “ को भगवान् का आदेश मानने लगे

सर  उठाने पर सर काटना , पढने पर जबान काटना , शीशा पिघला कर कान में डालना भगवान् के नाम पर किया गया , ब्राह्मणों का षड्यंत्र सदीओ तक इस लिए भी कामयाब रहा की आने वाले अंतराल  में जो शासक भारत विदेशो से आये  , ब्राह्मण उनके साथ मिल गए  और उनको उनकी सत्ता में पूरा योगदान दिया  और यह भी कहा गया की ये गुलामो की फौज  उनकी सेवा के लिए हमेशा हाजिर है , जिससे आने वाले विदेशी मुस्लिम शासको को कोई ऐतराज न था

भारत  में अंग्रेजो का आना और भारत को गुलाम बनाना  शायद कुछ दृष्टिकोण से ठीक न हो लेकिन आधुनिकता , और शुद्रो की गुलामी को दूर करने में एक बहुत बड़ा कदम था जब अंग्रेजो ने शुद्रो के लिए भी शिक्षा की वाव्य्स्था की तो बस  जैसे इन ब्राह्मणों के होश उड़ गए  शायद इसी लिए ये आज भी लार्ड मैकाले को गाली देते है .
इसके बाद ब्राह्मणों में  डर  इसलिए भी आ गया जब १ जनवरी १८१८ की भीमा कोरेगाव की लड़ाई में सिर्फ ५००  म्हारो ने २९०००  हजार की सेना को काट कर फेंक दिया था

पेरियार  फुले , और बाबा साहेब के आन्दोलन  अब ब्राह्मणों को डराने लगे थे  यही कारण रहा की गाँधी ने पहली राउंड टेबल कांफ्रेंस में अम्बेडकर के  होने का  विरोध किया  और  विरोध ही नहीं किया बल्कि अंग्रेजो से कहा की अम्बेडकर को न बुलाया जाए ,
खैर  बाबा साहेब के प्रयासों से कम्युनल अवार्ड  मिला और  शुद्रो को हिन्दू नाम  से अलग करके देखा गया , जिसका  गांधी ने फिर विरोध किया  इसके बाद गांधी –अम्बेडकर के बीच पूना पैक्ट  हुआ जिसमे आरक्षण की वाव्य्स्था को स्वीकार किया  गया
आरक्षण के बावजूद  और इस बात के साबित होने के बावजूद की दलित ब्राह्मणों से लाग दर्जे बेहतर है ब्राह्मणों की जातिगत  दुर्भावना  गई नहीं है ये इतने मुर्ख है की इनको लगता है की ये रात को दिन  कहंगे तो सबको वही कहना पड़ेगा
योग्यता के नाम पर किचन से लेकर उपग्रह ,रेडियो , टीवी  फोन , कंप्यूटर ,आदि  कुछ भी नहीं बना पाए है  ,आधुन्किता के नाम पर भारत में जो कुछ भी है वह सब विदेशो से है लेकिन न जाने क्यों ये आज भी सुधर नहीं पाते

आज भी जाति के नाम पर दलितों के कत्ल हत्या , बलात्कार  करते है और इनको ये लगता है की इनका कुछ नहीं होगा

लेकिन दलितों में जो आक्रोश है अब इससे ये बच  नहीं पायंगे , सभी दलित युवा ये मानते है की आरक्षण तो है ही इनका हक इनकी लड़ाई सामाजिक समानता के साथ साथ उस उत्पीडन और अपमान का बदला लेना है   

वैज्ञानिक रूप से साबित की ब्राह्मण विदेशी हमलावर  है  तो इस देश में यह स्वीकार नहीं किया जा सकता है की ये लोग आतंक मचाते रहे ,

वैसे भी दलित बुद्धिजीवी  मानते है की आने वाले सालो में गृह युद्ध  भारत में निश्चित है और ब्राह्मणों का अंत भी


उपरोक्त लेख दलित युवाओं से लिए गए इंटरव्यू पर आधारित  है 

जाति के नाम पर , धर्म के नाम पर फिर देश के नाम पर बेचा , लेकिन खराब क्वालिटी के कारण फ्लॉप हो गए रामदेव के प्रोडक्ट , बंद भी हो सकता है पतंजलि

जन उदय : रामदेव  जो स्कूल नहीं गया  और घर से भाग कर  हरिद्वार  पहुच गया  इसके बाद  ये योग और आयुर्वेद का कैसे  विद्वान हो गया  ?  जो स्कूल , कोलेज गया नहीं  - फिर दुनिया के सामने योग गुरु – आयुर्वेदाचार्य बनके प्रकट हुआ   यह पूरी प्रक्रिया  भक्तो को छोड़ सबके मन में एक शंका जरूर जगाती है

खैर यहाँ हमें रामदेव को एक व्यापारी की तरह देखना है एक ऐसा व्यापारी जिसने बहुत कम सायं में एक अगलग ही तरीके से बहुत  जल्द ही शोहरत हांसिल कर ली और बाकायदा अपने सारे प्रोडक्ट जनता के बीच पहुचा दिए

रामदेव ने अपनी यात्रा योग शिविर से शुरू की और कुछ दवाईया सामने लाया जिसका विरोध यह कह कर खुद करवाया की इसमें मानव हड्डिया मिली हुई है  इस  विरोध का विरोध रामदेव ने यह कह कर किया कि उसके उत्पादों का विरोध पश्चिमी सभ्यता को मान्न्ने वाले लोग ही कर रहे है और यह भारत का प्राचीन ज्ञान है जिसे दबाया जा रहा है , रामदेव के इस काउंटर विरोध से काफी  संख्या में लोग जुड़ गए  जो सच में बड़े ही नादाँ और देशभक्त टाइप है

इसके बाद रामदेव ने योग शिविर के नाम पर देश विरोधी या सरकार विरोधी गतिविधिया चलानी शुरू कर दी जिसका परिणाम दिल्ली के रामलीला मैदान में सामने आया  इस घटना के बाद लोग रामदेव के और भी भक्त हो गए इसके बाद लोगो की सवेंदना का फायदा उठाते हुए रामदेव ने अपने सेवा केंद्र खोलने शुरू कर दिए और जम कर मुनाफ़ा कमाया

तीसरा फेस रामदेव का रहा जहा पर इसने दलित विरोधी और कांग्रेस विरोधी ब्यान जारी करना शुरू कर दिया  इससे रामदेव को भाजपा और संघियो की मदद तो मिली लेकिन एक बहुत बड़ी जनसख्या रामदेव से अलग हो गई  और यही कारण रहा की रामदेव को आज से ट्रेंड के विज्ञापनों का सहारा लेना शुरू कर  दिया है  हलांकि इस बीच रामदेव के उत्पादों को पोल खुलने शुरू हो गई यानी रामदेव के उत्पाद खराब और गन्दी क्वालिटी के नीलने शुरू हो गए , किसी में फुंग्स , किसी में छिपकली ,  आदि यह सब शुरू  हो गया है

इसके अलावा रामदेव के राजनीतिक झुकाव ने जनता का मन बदल दिया है  यही कारण है की अब रामदेव के सेवा केंद्र अब रामदेव के उत्पादों पर न तो निर्भर है और न हो उनको प्रोमोट कर रहे है यानी सेवा केंद्र वाले अब दुसरे आयुर्वेदिक प्रोडक्ट रख रहे ही  और रामदेव को साइड लाइन कर रहे है
इसी बीच रामदेव ने दुबारा देशभक्ति का नारा विज्ञापनों में देना शुरू कर दिया है लेकिन शायद रामदेव को यह नहीं मालूम  आजकल  लोगो को फ्री का भी मिले तो भी लोग अच्छा ही खाना पसंद करेंगे  दस बीस रूपये के लिए अपनी जान और स्वास्थ का खतरा मोल नहीं लेंगे , और इसका परिणाम रामदेव के उत्पाद बंद होने जा रहे है ,

वैसे भी देशभक्त रामदेव के कारखाने में लोगो को वक्त पर सेलरी नहीं मिल रही है , वर्कर्स यूनियन को दबाया जा रहा है  जो  ज्यादा देर तक नहीं चलेगा