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Tuesday, 22 March 2016

आरक्षण को लेकर मगरमच्छ के आंसू बहा रहा है नोटंकी नरेंद्र मोदी


जन उदय : दिल्ली  और बिहार की   हार ने उस धारणा और भ्रम को खत्म कर दिया जिसमे कहा जा रहा था मोदी लहर चल पड़ी , वैसे खुद मोदी को संघ के इस प्रोपगेंडा पर विशवास हो चला था की उसके नाम की कोई लहर चल पड़ी है . लेकिन बिहार और दिल्ली ने इस बात को झूटा साबित कर दिया जैसा की यह झूट था भी

संघ को पहले यह भी विशवास था की अगर सारे स्वर्ण उनके साथ हो जाए तो पुरे देश पर कब्जा कर लेंगे क्योकि मुसलमानों को एक तरफ करने के लिए संघ ने ओवेशी को ड्यूटी पर लगा दिया था  इसलिए मोहन भागवत ने आरक्षण खत्म करने का अपना दाव  चल दिया  जो बिलकुल खाली गया

अब नरेंद्र मोदी को यह चिंता होने लगी है की कही ऐसा न हो दिल्ली बिहार संघ सम्राज्य के अंत की शुरुआत बन जाए क्योकि बिना दलितों के कुछ भी नहीं हो सकता

इसलिए अब नरेंद्र मोदी ने मगरमच्छ के आंसू बहाना शुर कर दिया है यह कह कर की अम्बेडकर एक विश्व पुरुष थे  उन्हें किसी राष्ट्र या जाति में न बाँधा जाए और आरक्षण कभी खत्म नहीं होगा

आरक्षण खत्म होगा या नहीं ये बात अलग है क्योकि इसको ऐसे समाप्त किया ही नहीं जा सकता  दूसरा अगर मोदी को इतना ही दलित प्रेम हो गया है तो यु पी  बिहार में लगातार दलित बस्तिओ को आग लगाईं जा रही है  पहले  ऐसे अत्याचार रोके   न की नौटंकी करे 

बड़े बड़े अखबारों के मालिक कर रहे है सुप्रीम कोर्ट का अपमान , नहीं दे रहे पत्रकारों को सेलरी,:: हो गए है हजारो पत्रकार बेरोजगार

पत्रकारों  को उनकी सेलरी न देना पड़े   इसलिए अखबार  मलीनको ने पत्रकारों को नौकरी से निकाल दिया जिसमे देश के उन सभी बड़े अखबारों के नाम है जिनके बारे में आप सोच सकते है , कुछ अखबारों ने  पहले से ही पत्रकारों को नौकरी से निकाल दिया था , और अब सभी अखबार  पत्रकारों को अब ठेके पर रख रहे है  यानि  एक मजदूर की तरह


आखिरकार मजीठिया वेज बोर्ड के तहत अपने हक की लड़ाई लड़ रहे अखबार कर्मियों को माननीय सर्वोच्च न्यायालय से एक बड़ा निर्णय हासिल हुआ है। अदालत में लंबित अवमानना याचिकाओं की 14 मार्च को हुई सुनवाई पर लंबे इंतजार के बाद आज अदालत का आर्डर सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड हो चुका है। इसमें माननीय अदालत ने जो आदेश दिए हैं, उन्हें देख कर अखबार मालिकों के होश उड़ गए होंगे। हालांकि अभी भी अदालत ने उन्हें अपनी गलती सुधारने का एक अवसर प्रदान किया है।


अदालत के आदेशों के अनुसार अब इस मामले की अंतिम सुनवाई 19 जुलाई, 2016 को होगी। माननीय न्यायाधीश ने अपने आदेशों में रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि अगली तारीख 19 जुलाई होगी और अखबार मालिकों के खिलाफ अवमानना के सभी मामले इस दिन सबसे पहले सूचीबद्ध किए जाएं। लिहाजा अब दूध का दूध और पानी का पानी होने वाला है।


कोर्ट ने अपने आदेशों में कहा है कि मजीठिया वेज बोर्ड को लागू करने को लेकर तलब की गई रिपोर्ट मेघालय, हिमाचल प्रदेश और पुडुचेरी ने प्रस्तुत की है। इसे कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया है और इन राज्यों की स्थिति का अध्ययन किया गया है। कोर्ट ने कहा है कि जिन राज्यों और संघ शासित प्रदेशों से रिपेार्ट मिली है, जिनमें इस न्यायालय के आदेश की आंशिक अनुपालना की बात कही गई है। वहां से संबंधित पक्षों के प्रतिष्ठानों(समाचारपत्रों)  को स्पष्ट किया जाता है कि वे न्यायालय के आदेश का पालन 19 जुलाई, 2016 से पहले करें।



कोर्ट ने अपने 28 अप्रैल, 2015 के आदेशों के तहत प्रदेश की स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल न करने पर उत्तर प्रदेश (आंशिक), उत्तराखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, गोवा और असम राज्यों के रवैये पर चिंता जाहिर करते हुए निर्देश दिए हैं कि वे 5 जुलाई,2016 से पहले अपनी रिपोर्ट दाखिल करें। कोर्ट ने कहा है कि ऐसा न करने पर इन राज्यों के मुख्य सचिवों को 19 जुलाई, 2016 को में व्यक्ति तौर पर कोर्ट के समक्ष हाजिर होना होगा।  साथ ही निर्देश दिए हैं कि इन राज्यों की रिपोर्ट आने पर अगर बचाव पक्ष की कोई आपत्ति होगी, तो वह 12 जुलाई, 2016 तक रिकार्ड में लाई जाएगी।

कोर्ट के आदेशों का सबसे अहम हिस्सा यह है कि कोर्ट ने मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ रहे कर्मियों के उत्पीड़न को गंभीरता से लिया है। इसके तहत कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि कोर्ट ने उन सभी इंटरलोकेटरी एप्लिकेशन को रिकार्ड कर लिया गया है, जिसमें कोर्ट के आदेशों की अनुपालना के तहत अपनी देनदारियों से बचने के लिए संस्थानों ने अपने कर्मियों की सेवाओं को गलत तरीके से समाप्त किया है और वेतन बोर्ड की सिफारिशों के तहत अधिकारों को समाप्त करने के लिए धोखाधड़ी से आत्मसमर्पण करने को मजबूर किया गया है।


आदेशों ने लिखा है कि कोर्ट के पास इस तरह की शिकायतें भारी संख्या में प्राप्त हुई हैं। ऐसे में न्यायालय एक-एक शिकायत को व्यक्तिगत रूप से जांचने की स्थिति में नहीं है। लिहाजा प्रत्येक राज्य के श्रम आयुक्त को निर्देश दिए जाते हैं कि वह ऐसी सभी शिकायतों पर गौर करके न्यायालय के समक्ष एक ही आवश्यक फाइल बनाकर 12 जुलाई, 2016 से पहले अपनी जांच रिपोर्ट दायर करे। आगे कोर्ट ने एक और बड़ा निर्णय सुनाते हुए अपने इन आदेशों में लिखा है कि हम उन सभी कर्मचारियों को जिन्होंने उत्पीडऩ से जुड़ी इंटरलोकेटरी एप्लिकेशन दायर की है और उन सभी कर्मियों को जिन्होंने इस न्यायालय में याचिका दयर की है, मगर वे उत्पीडऩ की शिकायत नहीं कर पाए हैं उन सभी को अपने राज्य के श्रम आयुक्त के समक्ष शिकायत प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता देते हैं।
यहां मैं एक बात यह भी जोड़ना चाहूंगा कि जो डरपोक लोग माननीय सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय के इंतजार में थे, अब उनके लिए कोई आसान रास्ता नहीं नजर आ रहा है। अब उनके लिए एक ही रास्ता है कि वे सीधे श्रम विभाग में शिकायत करके अपनी रिकवरी का केस फाइल करें, नहीं तो उन्हें अखबार मालिकों के गुलाम बनकर आधे टुकड़े पर पलते रहना होगा। बात भी अब साफ हो गई है कि जिन अखबारों ने 20 जे के तहत वेज बोर्ड न देने का रास्ता खोजा था, उन्हें इन ताजा आदेशों मे कोर्ट का फैसला नजर आ जाएगा।

वहीं इनसे भी ज्यादा चालाक उन अखबार मालिकों को भी इन आदेशों में आखिरी मौका मिला है, जिन्होंने मजीठिया वेज बोर्ड को तोड़ मरोड़ कर लागू किया और अदालत की अवमानना से बचने के सपने देख रहे थे। उन्हें कोर्ट ने इन आदेशों के जरिये अंतिम अवसर दे दिया है। साथ ही अखबार मालिकों से डरने वाले और मजीठिया वेजबोर्ड की शिकायतों पर आंखें मूंदे बैठे राज्यों के श्रम अधिकारियों को भी कोर्ट ने साफ संकेत दे दिया है कि अब उनकी लापरवाही नहीं चलेगी। कोर्ट ने इन आदेशों में श्रम आयुक्तों को शामिल करके श्रम विभाग को भी अंतिम अवसर और छदम चेतावनी दी है।

Monday, 21 March 2016

एनडीआईएम को मिला बेस्ट मैनेजमेंट कालेज का अवार्ड



नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में देश के अग्रणी थिंक टैंकों में से एक सेंटर फाॅर एजूकेशन ग्रोथ एण्ड रिसर्च (सीईजीआर) ने उच्च शिक्षा, भारत की क्या ज़रूरत है विषय पर  राष्ट्रीय सेमीनार का आयोजन किया। 

इस सेमीनार में क़रीब 300 शिक्षाविदों और काॅरपोरेट  ने हिस्सा लिया। सेमीनार में भाग लेने आए शिक्षाविदों ने भारत में उच्च शिक्षा की ज़रूरत और उसे किस तरह से हासिल किया जा सकता है, इस पर अपने अपने विचार व्यक्त किए। 

समारोह को मुख्य वक्ता के तौर पर संबोधित करते हुए डाॅ. अरूण कुमार, सांसद, जहानाबाद, बिहार ने भारत की खत्म होती सांस्कृतिक और चारित्रिक मूल्यों पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए इसमें काफी बदलाव की ज़रूरत है। सेमीनार को श्री गुरतेज सिंह ढिल्लन, सचिव, भारतीय जनता पार्टी, पंजाब राज्य ने भी संबोधित किया। 

श्री ढिल्लन ने शिक्षा में अच्छे परिणाम हासिल करने के लिए इसके व्यावसायीकरण की बात कही। सेमीनार के दौरान डाॅ. मनप्रीत सिंह मन्ना, डायरेक्टर, एआईसीटीई ने उच्च शिक्षा के प्रसार के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में हाॅल में मौजूद श्रोताओं और दर्शकों को बड़े ही सरल अंदाज़ में बताया। 

सेमीनार में ही पूरे देश में उच्च शिक्षा के लिए बेहतर काम करने वाले युनीवर्सिटी और काॅलेजों को ‘‘राष्ट्रीय शिक्षा गौरव पुरस्कार’’ से सम्मानित भी किया गया। देश के बेस्ट मैनेजमेंट काॅलेज का अवार्ड नई दिल्ली इंस्टीट्यूट आॅफ मैनेजमेंट (एनडीआईएम) को मिला। पुरस्कार हासिल करने एनडीआईएम के चेयरमेन श्री विश्वमोहन बंसल खुद मौजूद थे। अवार्ड मिलने के बाद उन्होंने सीईजीआर को धन्यवाद दिया और भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करने का वादा किया। ग़ौरतलब है कि एनडीआईएम ने अपने छात्रों को हमेशा अच्छा वातावरण मुहैया करवाने की है। 

शिक्षा और उद्योग जगत से बेहतरीन तालमेल की वजह से इस संस्थान की गिनती देश के सर्वश्रेष्ठ मैनेजमेंट काॅलेजों में होती है।   

हज सब्सिडी के नाम पर लूटती है सरकार मुसलमानों को


जन उदय : ऐसा कहा जाता है की सरकार मुसलमानों को हज के लिए सुस्ब्सीय देती है यानी जो भी खर्चा हज पर आता है उसका कुछ हिस्सा सरकार वहां करती है
भारत के अतिवादी संघठन  आर एस एस के लोगो का कहना है की ये सब्सिडी खत्म की जाए  या जैसे मुसलमानों को सब्सिडी दी जाती है वैसे ही संघियो को वैष्णो देवी   और अमरनाथ यात्रा के लिए दी जाए

खैर   अब इस सब्सिडी को समझ लिया जाए   हज  वाव्य्स्था सऊदी  अरब और भारत सरकार मिल कर करते है और हर साल एक निश्चित  कोटा होता है जिसमे निश्चित लोगो को ही हज पर भेजा जाता है , इस अहद के तहत भारत से जाने वाले मुसलामानो के लिए प्लेन टिकट  रहने सहने की वाव्य्स्था मेडिकल , इसुरेंस  आदि दोनों सरकार मिल कर करती है  सरकार जो खर्चा  आता है हज पर उस खर्च में लघभग  २० – ३०   प्रतिशत  सब्सिडी हज यात्रिओ को देती है

कुछ लोगो को लगता है की ये काम मुसलमानों के लिए विशेस  रूप से किया जाता है
अब इस वाव्य्स्था को बाजार के अंदाज से समझते है  , पुरे साल खाली रहने वाले  एयर इंडिया के  हवाई  जहाज  हज के मौसम में एकदम व्यस्त हो जाते है , पुरे साल एयर इंडिया की फ्लाइट में बहुत कम लोग जाते है क्योकि इसका किराया बहुत जयादा है  जब की दूसरी प्राइवेट एयर लाइन्स का किराया काफी कम  है  इसके अलावा  होटल  आदि में जो खर्च आता है  अगर किसी दुसरे होटल आदि में रहा जाए तो वह भी बहुत कम खर्च होगा

अब हम मान लेते है की भारत के मुसलमानों को यह सब्सिडी खत्म कर दी जाए और और मुसलमान अपने आप हज जाए या किसी ट्रेवल एजेंसी के जरिये जाय , आप यकीन नहीं मानेंगे अगर यह काम किसी प्राइवेट कम्पनी के हाथ में आ जाए तो तो न सिर्फ वह कम्पनी आज से यानी सब्सिडी  वाले पैसे से मुसलमानों को कम खर्च में हज यात्रा  करा देगी  बल्कि  खुद करोड़ो  रुपया काम लेगी


लेकिन मुसलमानों  को यह समझ  नहीं  आ रहा है  क्योकि इस लूट में मुसलमानों के कुछ  नुमाइंदे   भी शामिल है  जो मुसलमानों की आँख पर पट्टी  बाँध कर रखते है 

नरेंद्र मोदी ने मोहन भागवत और संघियो को साबित किया भोंकने वाला कूकुर

नरेंद्र  मोदी ने मोहन  भागवत और संघियो  को साबित  किया  भोंकने वाला कूकुर
जन उदय :  बिहार , दिल्ली में हार के बाद  अब अन्य राज्यों में  चुनाव आने वाले है इसलिए  मोदी और भाजपा अब घडियाली  आंसू बहाना शुरू कर दिया है ताकि दलित वोट उनसे क्त न सके

हलांकि बिहार चुनाव के वक्त मोहन भागवत ने आरक्षण खत्म करने की बात करने की बात कह कर स्वर्ण समाज को अपने साथ करने की  कोशिस  की  भागवत जी को ये विशवास था की अगर समस्त स्वर्ण समाज संघ के साथ आ जाएगा  तो दलित समाज को  तो  दुबारा  मनुस्मिरिती  लागू करके  उनकी औकात  दिखा देंगे  , लेकिन सफल न हो सके

 हार से परेशान आज मोदी  ने ये एलान कर  दिया कि आरक्षण को  कोई छू  भी नहीं सकता   तो सबसे पहले मोदी  यह जान ले की संघ  भाजपा  की कोई औकात है ही नहीं  अगर है  तो कर के दिखा दो   यानी आरक्षण  खत्म कर दो .
नरेंद्र मोदी अम्बेडकर के नाम पर जितना  रोना  रो रहे है तो सबसे पहले ये बता  दे की बाबा साहेब की किताबे रिडिल्स ऑफ़ हिंदूइस्म  और अन्हीलेश्न ऑफ़ कास्ट  क्यों नहीं छपने दे रहे है संघी
दरसल ये सिर्फ चुनावी  आंसू  है


भारत बौधकाल में विश्व गुरु था , इसमें ब्राहमणों का कोई योगदान नहीं रहा


आज   दुनिया में भारत के शिक्षा संस्थान सिर्फ सिलिये बदनाम नहीं है की यहाँ की यूनिवर्सिटी में रोहित  वेमुला ,जैसे होनहार छात्रो की संस्थानिक हत्या हो जाती है  

और इसमें सरकार  और सभी कर्मचारी शामिल होते है . भारत इसलिए भी बदनाम हुआ है की देश के एकमात्र अच्छी  यूनिवर्सिटी के छात्रो को भाजपा सरकार ने झूटे  देशद्रोह  कानून  में फसाया .
वैसे अगर हम दुनिया के स्तर पर भारत में  शिक्षा के स्तर को देखा जाएगा कि दुनिया टॉप ४०० यूनिवर्सिटी में भारत का स्थान २७९ वा है


खैर मानने वाले ऐसा मानते है की भारत में शिक्षा का स्तर सिर्फ आरक्षण की वजह से गिरा हुआ है , लेकिन जब हम आंकड़े देखते है तो ये बड़ी हैरानी वाले होते है  जैसे भारत में सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेज मे९९ % शिक्षक प्रोफेसर  सिर्फ और सिर्फ ब्राह्मण जाति   के है तो शिक्षा की खराब हालत के जिम्मेदार भी वही ठहरे

प्राचीन कालमें भारत विश्वगुरु था। विश्वगुरु बोले तो... ? जो विश्व को शिक्षा देता है, वो.! तो किसने विश्व को शिक्षाये दी ? किस गुरू की प्रतिमाये विश्वभरमे स्थापित की गयी ? किसकी शिक्षा पुरे विश्व में अनुदित हुयी

विश्वभरमे शिक्षा देने के लिए किन किन विद्वानोंको भारत से आमंत्रित किया गया ? कुछ नाम सेम्पल के लिए -गुणवर्मन, गुणभद्र, प्रग्नारुचि, उपशुन्य, ज्ञानभद्र, बुद्धभद्र, कमलशील, ज्ञानप्रभ, चित्रगुप्त जैसे हजारो बौद्ध विद्वान यूनान, तुर्की, और मध्य एशिया से लेकर पुरे पूर्वी एशिया के देशो मे शिक्षा देने के लिये बुलाये गए। मजेदार बात यह ही इनमे एक भी चोटी धारी प्रकांड पण्डित नही है...। जाहिर है वे सारे के सारे बौद्ध थे। फिर भी आज, कुछ लोगो को मेरिट की माला जपते देखता हूँ तो बड़ा मजा आता है...!

आर टी आई का न दिया जाए जवाब : सभी मंत्रालयों को मोदी सरकार का आदेश ?


जन उदय : आर टी आई के खुलासे से परेशान सभी सरकारे रही है , लेकिन पूर्व सरकार के भ्रस्ताचार और मोदी के मंत्रियो के भ्रष्टाचार  अब दोनों मिला कर आर टी आई में सामने आ रहे है , और मोदी विरोधी  मीडिया जैम आकर फायदा उठा रहा है , वही दूसरी तरफ एक सकारत्मक काम यह हो रहा है की मोदी  सरकार की पोल खोलने के चक्कर में  सभी भ्रष्टाचार सामने आ रहे है
 इस बात से परेशान  मोदी सरकार ने ऐसा लगता है की सभी मंत्रालयों को ये कह दिया है की ऐसी किसी भी आर टी आई का जवाब न दिया जाए जो सरकार विरोधी चली जाए

ऐसा हम  इसलिए कह रहे है की हमारे  अखबार ने जब सामाजिक  सामाजिक न्याय और शास्क्तिकर्ण मंत्रालय में यह जाने के लिए आर टी आई लगाईं की एस  सी एस टी छात्रो को परीक्षा की तय्यारी कराने वाले एन जी ओ को कितना फंड दिया गया है और कितने लोगो को इससे से फायदा हुआ  तो सरकार को ये मालूम ही नहीं की इस पैसे से क्या हुआ है , सो सरकार ने जवाब देना ही उचित ही नहीं समझा 


इसके अलावा  हमारी जांच में ये भी पता चला की क लगभग बहुत सारे एन जी ओ एस सी एस टी  विकास के नाम पर  उनको परीक्षा की तय्यारी कराने के नाम पर जम कर सरकारी खजाने को लूट  रहे है  सो जन उदय अखबार ने सम्बन्धित अधिकारिओ को सूचित किया और शिकायत  दर्ज कराई लेकिन इस शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं हुई , जब कई महीनो बाद हमने ये जानने की कोशिश की कि कार्यवाही क्यों नहीं हुई  तो इस बात को भी दबा  दिया गया  और बाकायदा  आर टी आई तक का जवाब नहीं दिया गया

एस सी  एस टी के विकास के लिए   बहुत साड़ी योजान्ये कागज पर आती है लेकिन  इसका फायदा सभी स्वर्ण लूटेरे   ले जाते है और एस सी एस टी देखते रह जाते है

कमाल की बात यह की किसी भी शिकायत पर कोई कार्यवाही  नहीं होती  और न ही सुचना के लिए कोई  जवाब दिया जाता