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Friday, 9 February 2018

शिवाजी , मुसलमान और संघियो का षड्यंत्र : जीशान अहमद

शिवाजी , मुसलमान और संघियो का षड्यंत्र  : जीशान अहमद

संघी यानी आर एस एस  जिसका दुसरा मतलब  नफरत और आतंक  भी होता है  इन्होने देश में अशिक्षा की वजह से इतिहास के पन्नो   में जहर  डाल डाल के लोगो को पिला रहे है और कमाल की बात यह है की ये लोग हिन्दू शब्द का सहारा ले कर अपना उलू सीधा करते रहते है जब की यह बात सब जानते है की हिन्दू समाज या धर्म से इनका कोई लेना  देना  नहीं है इनका काम है सिर्फ जहर फैलाना , अगर इनका हिन्दू  या हिन्दू समाज से कोई सम्बन्ध  होता तो फिलहाल में  सहारनपुर में ऐसी घटना न होती  की इन्होने अपने ही धर्म के लोगो के साथ बर्बरता की  और ये सिर्फ  सहारनपुर ही नहीं पुरे देश में सदीओ से ये लोग दलित समाज में जहर फैलाते आ रहे है , वर्तमान योगी सरकार चुन चुन कर यादव , गुर्जर  और मुसलमानों की हत्या कर रही है जिसमे  ३००० से जयादा ह्त्या कर चुकी है और ये  खुनी खेल जारी  है वह भी  अपराध मुक्ति के नाम पर

अब बात करते है शिवाजी  की जिसको ये लोग  हिन्दू  कह कर संबोधित  करते है और हिन्दू –मुसलमान के बीच खड़ा कर देते है जबकि  शिवाजी  एक राजा  था   उसका राजधर्म  था जनता से उसे प्यार था  वह अपने राज्य में सबका राजा  था और  उसकी सारी प्रजा  उसके साथ थी वह भी बिना किसी जाति और धर्म के भेद के
यहाँ पर शिवाजी के बारे में कुह खुलासे  किये जा रहे है जरा देखिये
धर्म के ठेकेदारों तुम ही बताओ मुल्लो से नफरत करू भी तो किस वजह से?
छत्रपति शिवाजी महाराज की सेना में 30% से ज़्यादा मुसलमान  थे


शिवाजी के 13 बॉडीगार्ड मुसलमा
न थे

शिवाजी के तोपखाने का प्रमुख इब्राहिम खान नाम का मुसलमान था।
शिवाजी का एक ही वकील था जिसका नाम क़ाज़ी है था वो भी मुसलमान था।
शिवाजी के गुरु का नाम सूफी याकूब बाबा था।
शिवाजी के थल सेना प्रमुख का नाम नूर खान था।

अफ़ज़ल खान को मारने के लिए शिवाजी को वो हथियार बना कर देने वाला सिद्धि हिलाल मुसलमान ही था
अफ़ज़ल खान के आने की खबर देने वाला रुस्तम ए ज़मान मुसलमान था।

इतिहास में कही भी नही है के शिवाजी के सेना के किसी मुसलमान ने शिवाजी को धोखा दिया हो।
शिवाजी ने रायगढ़ में अपने किले से सामने मुस्लिमों के लिए मस्जिद बनाई जो आज भी मौजूद है
शिवाजी पर हमला करने वाला कृष्णा भास्कर कुलकर्णी ब्राम्हण था।
ब्राम्हणो ने शिवाजी के राज्ये अभिषेक को नकारा था।

शिवाजी के पोते  संभाजी की हत्या कर के उनके शरीर के टुकड़े करने वाले ब्राम्हण ही थे।
शास्त्रो के हिसाब से शुद्र का शिक्षा प्राप्त करना अधर्म था अगर कोई शुद्र शिक्षा प्राप्त करले तो उसे मृत्यु दंड दिया जाता था
ज्योतिबा फुले ने शूद्रों की शिक्षा की ज़िम्मेदारी उठाई और स्कूल शुरू करने के लिए आगे बढ़े ब्राम्हणो ने खूब विरोध किया पर एक मुल्ला जिसका नाम उस्मान शेख था उसने स्कूल के लिए जगह दी।
सावित्री बाई फुले जब स्त्री शिक्षा की ज़िम्मेदारी लेकर निकली उस वक़्त भी ब्राम्हणो के खूब विरोध किया यहा तक के सावित्री बाई पर पत्थर और गोबर बरसाए गए ब्राम्हणों द्वारा पर उस वक़्त भी उनके साथ कदम से कदम मिला कर चलने वाली फ़ातेमा शेख भी मुल्ला ही थी।

ब्राम्हणों के विरोध के बावजूद डॉ भीमराव अंबेडकर को संविधान हाल तक पहोचाने वाले भी मुल्ले ही थे

धर्म के ठेकेदारों अब तुमही बताओ मेरे पूर्वजो के साथ कदम से कदम मिला कर चलने वाले इन मुसलमानों  से मैं कैसे नफरत करू?

Wednesday, 7 February 2018

आर्यों आक्रमण का प्रारम्भिक इतिहास : शिव काबिले का सरदार था

जन उदय:  ऐसा प्रतीत  होता है कि  राजाओं को  छोड़  कभी भी किसी ने इस देश के साथ न्याय नहीं  किया  १८० बी सी में व्रह्द्स्थ की हत्या कर  पुष्यमित्र शुंग  / परशुराम  ने ब्राह्मण सम्राज्य स्व्थापित किया   ८४ हजार बौध और जैन मठो को तोड़ उनको  मंदिरों का रूप दिया गया  इनकी हत्याए  की  और १८० से लेकर २८० ईसा बाद तक इन्होने ऐसे ग्रन्थ लिख लिए गए जिसमे इन्होने  अपने आपको भगवान् का पुत्र , दूत , भगवान से सीधे सम्पर्क करने वाले सब्बित कर लिया  और  इन ग्रंथो में वेद , पुराण , म्नुसिमृति  जैसे घ्रणित  ग्रन्थ लिख लिए क्योकि  इन ग्रंथो  में उत्पीडन  को अपराध को मान्यता दी गई  है उर ब्राह्मण को हर अपराध से मुक्त  रखा गया हत्या बलात्कार , सम्पत्ति  छिनना  इनके लिए सब जायज  और लोगो को  सभी सुविधाओं से महरूम  रखा गया
पूरी दुनिया  में कई शोध के मुताबिक़ आर्य  भारत में लगभग १५०० इस पूर्व आये और  इनमे तीन काबिले मुख्य  रूप से थे पहले कबीले का सरदार शेड्लर  जो बाद में चल कर इन्होने शिव बना दिया  दुसरा काबिला ब्रहेट  का था  जिसे बाद में इन्होने ब्रह्मा  कहा और तीसरा कबीला वैस्नोव का था जिसे इन्होने विष्णु का नाम दिया   और ये नाम इन्होने उनको पूजने के लिए किया

जब ये लोग   आये तो  इन्होने सबसे पहले भारतीय  राजाओं  को गिफ्ट में गोरी लडकिया  और  घोड़े  दिए जिसे पाकर यहाँ के राजा  बहुत खुश होते  थे  क्योकि  घोड़े  ने उनकी यात्रा को सुगम  और तेज बना दिया  था  इसलिए इतिहास एन्थ्रोपोलॉजी  ने  भारतीय और आर्य  से जन्मे लोगो को इंडो-आर्यन कहा , ये लोग कबीलाई  थे और घुमन्तु  जाति  के थे  सो इनमे हथियार , भोजन , पानी  की बहुत महत्वता  थी


आर्यों  की एक धारा  उसी वक्त पर्शिया  की तरफ से आई जिसका नाम  पेरशेरोन था  जिसको बाद में परशुराम  भी कहा गया , परशुराम/ पेरशेरोन निहायत  क्रूर  था और उसके हाथ में एक विशेष  हथियार था जो लकड़ी और जानवर दोनों काट सकता था  और इसने शेड्लर /शिव , ब्रहेट/ ब्रह्मा , और वैस्नोव/ विष्णु  की मदद से अफगानिस्तान  के कुछ भागो  पर कब्जा कर लिया   चूँकि इसमें ब्रहेट/ ब्रह्मा , का बड़ा  योगदान था तो उस जीते  हुए स्थान को इन्होने ब्रह्मवर्त कहा  वर्त इसलिए क्योकि यह   जीता  हुआ इलाका गोल था वर्त की तरह

इस जीत से  ब्राह्मण  / आर्य बड़े ही उत्साहित थे इनके पास एक कोडवर्ड की भाषा जिसे संस्कृत कहते है लम्बे हथियार  और सबसे बड़ी बात इन्हें अपनी चालबाज़ लडकियो पर पूरा भरोसा था और समझ गए थे  गोरी  चमड़ी यहा के राजाओं की कमजोरी है और यही कारण था उत्तर भारत आते आते इन्होने यहा के बाहुबली  राजा हिरणाकश्यप के पुत्र को फसा लिया था  इसकी कहानी ऐसे  चलती है ‘’’’’’ होलिका अनार्य थी , मात् प्रधान कबीले की सरदार , आर्यो की चाल ने प्रहलाद को एक कन्या के चक्कर में फसाया , लेकिन कामयाब न हुए , (आग में जलने का द्रश्य नहीं ये युद्ध हुआ था) प्रह्लाद की मदद से एक युद्ध में आर्यो ने होलिका को मार दिया ,,, बाद में होलिका के कबीले ने आर्यो को बहुत मारा और खून से धरती लाल कर दी , और उस खून से सनी मिटटी को आर्यो के माथे पर लगा कर कहा की तुम वीर नहीं अबीर हो यानी कायर हो ,,, उस दिन से आज तक हर डरपोक आर्य एक दूसरे को रंग लगता है ,, मथुरा में एक दीं अबीर होली का होता है

इसके बाद इन्होने इस इलाके को आर्यवर्त कहा जो लगभग उतरी  भारत  था
खैर १८० बी सी से लेकर इन लोगो ने जिस तरह बर्बरता , दिखाई , इस देश के मूलनिवासियो अत्याचार  किये उनकी हत्या की सम्पत्ति  छिनी उर शिक्षा के अधिकार से वंचित कर दिया

इसके बाद मुस्लिम शासक  आये जिनकी मदद  इन्होने की  अंग्रेजो के साहयक रहे  लकिन एक शर्त पर की  ये लोग जाति  यानी समाजिक वाव्य्स्था पर कुछ नहीं कहंगे या करेंगे , लेकिन अंग्रेजो ने जब यह सब देखा  तो इनके वर्चस्व को खत्म कर दिया सबसे बड़ी बात अंग्रेज बड़े ही उदार और न्यायप्रिय  थे इसलिए उन्होंने कभी भी ब्राह्मणों  के लोकतांत्रिक  विरोध का विरोध  नहीं किया  और इसलिए उन्होंने खुद ब्राह्मणों  के लिए कांग्रेस को बना कर  दिया .. ब्राह्मण अपने आपको  चाहे जितना मजी शूरवीर कहे  लेकिन मुगल काल में एक आवाज तक नहीं उठाई क्योकि ब्रह्मण  जानते थे  एक आवाज उठाने पर गर्दन  कट  जाएगी


सबसे बड़े कमाल की बात यह है की  आर्य  यानी ब्राह्मण आज भी इस देश से प्रेम नहीं करते यहाँ लोगो से प्रेम नहीं करते बल्कि ये लोग इतनी नफरत करते और फैलाते है ये लोग आज भी नहीं चाहते की मूलनिवासी  के पास सम्पति आ जाए , ये लोग पढ़ लिख ले  या इन्हें समाज में सम्मान मिले . पूरा इतिहास चाहे कैसा भी हो उसे भुलाया जा सकता है लकिन वर्तमान को कैसे नजरअंदाज करे ??  

Tuesday, 6 February 2018

एक और रोहित वेमुला : छतीसगढ़ भगवा प्रशासन के व्यवहार से परेशान दलित छात्रा ने की आत्महत्या


 एक और रोहित वेमुला : छतीसगढ़ भगवा प्रशासन के व्यवहार से परेशान दलित छात्रा ने की आत्महत्या
रायपुर। मुख्यमंत्री रमन सिंह के गृह जिला कवर्धा सरकारी नर्सिंग कॉलेज के हॉस्टल में सीनियर वर्षीय छात्रा ज्योति बंजारे जो कि द्वितीय वर्ष की छात्रा है को हॉस्टल प्रबंधन द्वारा और सीनियर छात्रों द्वारा प्रताड़ित किये जाने और एक गुलामों की तरह व्यवहार भी किये जाने के कारण ज्योति बंजारे ने हॉस्टल के तीसरे माले से छलांग लगा दी। पालक गण शिक्षा ग्रहण करने के लिये नर्सिंग कॉलेज में दाखिला करवाए थे, वही हॉस्टल प्रबंधन और सीनियर छात्रों द्वारा उससे सुबह से शाम तक दैनिक दिनचर्या का काम करने को दबाव डाला जाता था बर्तन मंजवाने का भी काम करवाना बताया जा रहा है।



 साफ सफाई व्यवस्था छात्रों की उपस्थिति की भी जिम्मेदारी ज्योति को दी गयी थी, उसे खाना भी नही दिया जाता था, लगातार अपने साथ हो रहे प्रताड़ना को वह अपने परिवार जनों को बताया करती थी और कॉलेज प्रबंधन को बताने पर किसी भी प्रकार का कोई भी कार्यवाही नहीं किए जाने से प्रताड़ित होकर अपने ही कॉलेज के तीसरे माले से ज्योति कूद गई क्योंकि वह यह जिल्लत भरी जिंदगी नहीं जीना चाह रही थी। एक गरीब अनुसूचित जाति परिवार की बेटी जो कि पढ़ लिख कर अपने मां बाप और परिवार का नाम रोशन करना चाह रही थी वही उससे गुलामों जैसा व्यवहार किया गया जिससे वह दुखी प्रताड़ित थी।


 मुख्यमंत्री रमन सिंह के गृह क्षेत्र में यह घटना होना सरकार के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के मुंह में करारा तमाचा है। प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली का खुलासा इसी से हो रहा है कि स्वयं मुख्यमंत्री के गृह जिले में संपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं है जिसके कारण ज्योति बंजारे को रायपुर के सरकारी अस्पताल में भर्ती होना पड़ छत्तीसगढ़ की बेटी ज्योति बंजारे जो कि शिक्षा ग्रहण करने के लिए सरकारी नर्सिंग कॉलेज में एडमिशन ली थी

Thursday, 1 February 2018

बजट 2018 : स्वास्थ योजना : दुनिया का सबसे बड़ा घोटाला जानिये कैसे

जन उदय :  एक बड़ी पुरानी कहावत  है  चोर चोरी से जाए हेराफेरी से न जाए , यही बात भाजपा और मोदी सरकार पर लागू  होती है ई वी एम् घोटाले स बनी सरकार जिसमे सभी पूंजीपति शामिल है  सिर्फ उनके लिए ही काम कर रही है .
आज बजट २०१८ में जो स्वास्थ  योजना बीमा को लाया गया है  जो की दुनिया का सबसे बड़ा घोटाला और भ्रम कहा जा सकता है  आइये  इसको जान लेते  है

जिस  व्यक्ति का बीमा हो जाता  है  वह व्यक्ति गरीबी रेखा से उपर कहलाता है यानी जो व्यक्ति   आजतक  गरीबी रेखा के निचे  था वह रातो  रात गरीबी रेखा से उपर उठ  गया  ठीक वैसे ही जैसे पहले अतर्राष्ट्रीय  स्तर पर शुगर लेवल  १४०- १४५  हुआ करता था  लेकिन दुनिया की बड़ी बड़ी दवा कम्पनियो  ने दुबारा  शोध  का नाटक किया  और  सही शुगर  लेवल  को  १४० से घटा  कर १२५  कर दिया  यानी जो आदमी आज बिना शुगर की  बिमारी के सोया था   वो सुबह उठते  ही शुगर का मरीज हो गया  , ठीक उसी तरह  करोडो लोग  गरीबी रेखा से उठ गए और  अमीर हो गए यानी ये दुनिया का सबसे बड़ा  गरीबी उन्मूलन प्रोग्राम हो गया

इस के अलावा   इससे होने वाला फायदा  सिर्फ सुर सिर्फ निजी बीमा कम्पनियो  को होने वाला  है जिसका प्रीमियम   सरकार भरेगी   जिस  सरकार क पास में खाली पड़ी  नौकरी भरनी का पैसा नहीं है वह उसका खर्चा कैसे उठाएगी  ?? यानी उसका पैसा यानी बीमा का पैसा  रजिस्ट्रेशन  के रूप में  गरीब आदमी से ही लिया जाएगा   और जो शुरू में काफी कम हो होगा लेकिन  यह बीमा होने बाद सरकार सरकारी अस्तपाल  आयर सुविधाए कम  करेगी  जिसका मतलब धीर धीरे  आप निजी अस्पताल में जाएंगी जहा पर आपके चेक्काप  से लेकर  एक्सरे से लेकर सभी उस तरह के इलाज पैसे  से होंगे जिन पर आप को भर्ती नहीं किया जा सकता  तो किसका फायदा  हुआ ?? निजी अस्तपाल  का  , इसके अलावा जीवन रक्षक  दवाई  और अन्य  समान पर भारी बडत  जो की निजी अस्पताल  बीमा से लेगा   वह भी एक सोची  समझी लूट  मानी जा सकती है



और धीरे धीरे सरकार ने जन स्वास्थ  के क्षेत्र  से अपना दामन  खींच  ही लिया होगा
यह बात सभी जानते है की किस तरह मोदी  ने गरीबो के अकाउंट खुलवा कर  फिर बैंक को यह  छूट दी की अवरेज  न होने से पैसे काट  लो  यानी इसी बात से  सभी बैंक को १८००० हजार करोड़  से जयादा का मुनाफ़ा हुआ यानी गरीबो के खून पसीने के कमाई  सभी बैंक ने मिल कर लूट  ली और इस लूट की इजाजत इस सरकार ने दी
कुल मिला कर सब समझ सकते है  की यह दुनिया का सबसे बड़ा  घोटाला साबित होगा





      Indian budget 2018  biggest scam of the world , fraud by Modi Government 

Monday, 22 January 2018

संस्कृत पूर्ण रूप से विदेशी भाषा है जो आर्यों के साथ भारत आई

जन उदय : हाल ही में सीरिया में विश्व भाषा सम्मेलन हुआ जिसमे संस्कृत की उत्पति ,और विकास पर भी चर्चा हुई
सारी चर्चा और इतिहासिक शोध से अब तक ये सामने आया है संस्कृत भाषा का भारत से कोई सम्बन्ध नहीं है और न ही इसकी कोई उत्पति के वैज्ञानिक और भाषा उत्पति के सिद्धांत मिलते है

दरअसल भारत में ये भाषा आर्यों यानी ब्राह्मणों के साथ आई ये लोग आपस में ही इस भाषा को बोलते और  लिखते थे , यही कारण रहा की इसका सम्बन्ध किसी भी भारतीय क्षेत्र से नहीं रहा
अगर संस्कृत भारतीय भाषा होती तो संस्कृत में लिखे  ग्रंथो में .कोई आम आदमी इस भाषा को बोलता हुआ नहीं दिखा , केवल  ब्राह्मण ही इस भाषा को बोलते   थे ,
इसका एक मुख्य वजह की संस्कृत  विदेशी भाषा है इसका कोई भी  प्रमाण , हड़प्पा  , मोहन-जोदारो  की सभ्यता में नहीं  मिलता कभी किसी  भी राजाज्ञा  या  राजा के आदेश  नहीं आये . इनके कभी कोई शिलालेख  भी नहीं मिले


ऐसा लगता है की ये भाषा दरसल ब्राह्मणों की कोड वर्ड भाषा थी जिसे ये लोग ही पढ़ और लिख सकते है
संस्कृत में लिखे गये गए ग्रन्थ में कही भी किसी आम आदमी को संस्कृत नहीं बोलते दिखाया गया
ब्राह्मणों की सबसे बड़ी चालाकी जिसे ये हमेशा से आजमाते आये है वे है अंधविश्वास , लोगो में प्राक्रतिक डर की भावना , और अज्ञानता जिसके कारण इन्होने इस भाषा को देव भाषा का दर्जा दे दिया जिसको बाद में पीड़ित , शोषित और कमजोर लोगो ने मान लिया क्योकि उनके पास और कोई चारा भी न था

कई बार इसे ये लोग अमृत वाणी भी कहते है क्योकि इन्होने अपने संदेश इसी भाषा में लिखे , यानी वेद आदि इसमें कमाल की बात यह रही की इस भाषा को भगवान् ने सिर्फ इन्हें ही सिखाया यानी ये इनकी धूर्तता थी की ये इनकी भाषा है और इन्हें ही आती थी

खैर शोध के आधार पर यह बात साफ़ है की सिन्धु घाटी की सभ्यता में ब्रह्मण कही नहीं थे और न ही संस्कृत यानी ये दोनों विदेशी है

इसके अलावा विदेशी भाषाओं में इसके या इससे मिलते जुलते शब्द मिलते है जो ये बात साबित करते है की इसका भारत से कोई सम्बन्ध नहीं है जैसे इंग्लिश में brother तो संस्कृत में भ्राता इसी तरह मदर तो माता
,
patriarchy - पितृसत्तात्मक , matriarchy – मात्रसत्तात्मक आदि  बिरादर , ब्रोदर , मदर
चूँकि यह बात साफ़ है तो इस भाषा के विकास पर अरबो रुपये का खर्चा क्यों ??

Origin of Sanskrit , Sanskrit is not Indian language , Sanskrit. language of Brahmans , Language Conspiracy in India , Language and Culture in India ,Sanskrit is a fraud Language , Sanskrit code word Language of Brahman 

Saturday, 13 January 2018

दलितों और मुसलमानों को मुर्ख बनाती मोदी की कल्याणकारी योजनाये

जन उदय : जिस तरह भाजपा ने एक इवेंट मैनेजमेंट के जरिये मोदी का समां बांधा और लोगो को एक नए तरीके के राष्ट्रवाद में फंसाया उस तरह की गोली भक्त लोग अभी तक चूस रहे है मोदी ने सबसे पहले मेक इन इंडिया का नारा दिया यह सच में एक बहुत अच्छा कदम हो सकता था अगर इसको लागू कर दिया जाता क्योकि चीन से आने वाले उत्पाद काफी कम हो जाते और युवाओं और बेरोजगारों को काफी रोजगार मिलता लेकिन मोदी के सारे वादे और इरादे केवल भाषण बन कर रह गए बल्कि अब तो यह होने लगा है है की मेट्रो कोच देश में बनाने के लिए मोदी साहेब ने नागपुर में चीन की फैक्ट्री ही लगवा ली और जिस तरह के राष्ट्रवाद के प्रतीक को लेकरं पटेल के नाम को इस्तेमाल क्या उसी पटेल की मूर्ति भी अब चीन में ही बन रही है .. थोथे वादे और थोथा मोदी .. 

इसके अलावा मोदी ने अपने पद की गरिमा को जिस तरह गिराया है वो भी बहुत शर्मनाक है मोदी की भाषा पर उठने वाले सवाल एक दम सही साबित हो रहे है , मोदी के बोल , चौराहे पर खड़ा कर कर मुझे जूते मार लेना , आदि आदि 

अभी ठीक यु पी चुनाव से पहले मोदी ने मुस्लिम सिख यानी अल्पसंख्यक लोगो के लिए योजनाये लागू की है अगर इन योजनाओं की परत दर परत जांच की जाए तो अन्य कल्याणकारी योजनाओं की तरह ये भी सिर्फ दिखावे की है 


छात्रवृति योजना जिसमे परिवार की आय एक लाख रूपये सालाना से कम होनी चाहिए ये योजना प्राथमिक शिक्षा के लिए है इसके अलावा शिक्षा के लिए मिलने वाली छात्रवृति में परिवार की आय छ लाख रूपये सालाना से कम होनी चाहिए 

स्टार्ट अप योजना जो गरीबो दलितों के लिए है जिसमे पचास लाख तक का धन दिया जाता है इसी तरह एक फण्ड सरकार ने बनाया है जिसमे दलितों को अपना व्यापार करने के लिए साहयता दी जाती है 
यह योजना सामाजिक न्याय मंत्रालय के अंतर्गत है 

अब इन योजनाओं की पोल खोल देते है आप जाएये और इस सोच के साथ जाइए की आपको यह फण्ड लेना है तो आपसे सबसे पहले यह सवाल की आपके पास गिरवी रखने के लिए क्या है ?? अंग्रेजी भाषा में इसे कोल्लेक्ट्रल सिक्यूरिटी कहते है और अगर आप कोई manufacturing यूनिट लगाना चाहते है को आपके पास किसी इंडस्ट्रियल एरिया में एक हजार गज का प्लाट है ??? 

आब आप इनसे पूछिए की अगर मेरे पास इंडस्ट्रियल एरिया में एक हजार गज का प्लाट होगा तो क्या तुमसे मदद के लिए आऊंगा ?? और कोलेटरल सिक्यूरिटी देने पर कोई भी बैंक हंस कर लोन दे देगा तो आप क्या कर रहे है उसमे ??? तो सरकारी लोग जवाब देते है तो जाओ वही से ले लो 

schemes launched by Modi for the welfare of SC /ST and Muslims 

Thursday, 11 January 2018

अब सुरक्षित नहीं बैंक में आपका पैसा , हर बात के कटेंगे पैसे

हर अकाउंट  में तीन लाख आयंगे यह सोच कर गरीबो ने अकाउंट खुलावाया  और उसमे अपनी मेहनत की कमाई से  हजार दो हजार रूपये  जमा भी करवाए लेकिन मिनिमम  बलेंस न रखने के कारण उनकी मेहनत की कमाई बैंक ने लूट ली और इस तरह  मोदी सरकार को  १८ हजार करोड़ का मुनाफ़ा हुआ जिसे वो सरकार की  उपलब्धि की तरह पेश करती है . यानी गरीबो के गले काट काट कर अमीरों  की जेब भरने को ही विकास कह रहे है ,
इसके अलावा जान लीजिये अब अगर आप बैंक में पैसे रखंगे  तो  कैसे आपकी जमा पूंजी पर डाका  पड़ेगा वो भी जी एस के साथ

एसबीआई, एचडीएफसी ​, आईसीआईसीआई और एक्सिस बैंक ने फैसला लिया है कि वे अपने अकाउंट होल्डर्स से कैश ट्रांजैक्शन्स करने की तय सीमा से अधिक बार ट्रांजैक्शन करने पर अतरिक्त चार्ज वसूलेंगे। इसके अलावा बैंकों ने कुछ ऐसी सर्विसेज पर भी चार्ज लगाने की घोषणा की है जो अब तक फ्री हुआ करती थीं। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में दूसरे बैंक भी ऐसे ही नियम ला सकते हैं। इस तरह के चार्जेज लगाने का उद्देश्य लोगों को कैश ट्रांजैक्शन्स के लिए हतोत्साहित करना है।

अगर इनमें से किसी भी बैंक में आपका अकाउंट है तो आपके लिए नए नियमों को समझना बेहद जरूरी है। हम आपको बता रहे हैं कि किस बैंक के कस्टमर्स को किस बात के लिए कितना चार्ज देना होगा.....
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)

1. अप्रैल से एसबीआई अपने सेविंग बैंक अकाउट कस्टमर्स को महीने में फ्री में सिर्फ 3 बार कैश जमा करने की अनुमति देगा। इसके बाद हर लेनदेन पर सर्विस टैक्स के साथ 50 रुपए का चार्ज लगेगा।
2. करंट अकाउंट के मामले में ये चार्जेज अधिकतम 20,000 रुपए तक भी हो सकते हैं।

3. अब एसबीआई अकाउंट होल्डर्स को अपने अकाउंट में एक मिनिमम बैलेंस भी मेनटेन करके रखना होगा। ऐसा न होने पर बैंक आपसे फाइन वसूलेगा। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में इस फाइन को काफी कम रखा गया है।

4. मेट्रो शहरों में यदि न्‍यूनतम बैलेंस यानी 5000 रुपए में 75 प्रतिशत से अधिक की कमी होगी तो सर्विस टैक्स के साथ 100 रुपए का फाइन देना होगा। यदि न्‍यूनतम बैलेंस में कमी 50-75 प्रतिशत के बीच है तो सर्विस टैक्स के साथ 75 रुपए का फाइन देना होगा। वहीं 50 प्रतिशत से कम बैलेंस होने पर सर्विस टैक्स के साथ 50 रुपए का फाइन अदा करना होगा। आपको बता दें कि 2012 में भी एसबीआई इस तरह के चार्जेज लगा चुका है।

5. एक महीने में दूसरे बैंक के एटीएम से तीन बार से ज्यादा कैश निकालने पर 20 रुपए का चार्ज देना होगा। वहीं अगर ग्राहक एसबीआई के एटीएम से पांच से ज्यादा ट्रांजैक्शन करता है तो हर बार 10 रुपए का शुल्क लिया जाएगा।
6. हालांकि अकाउंट में 25 हजार से अधिक बैलेंस रखने वालों को एसबीआई एटीएम से पैसे निकालने पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं देना होगा। जबकि 1 लाख रुपए से अधिक बैलेंस रखने पर आपको दूसरे बैंकों के एटीएम से पैसे निकालने पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।

7. अकाउंट में 25 हजार से कम कैश रखने वालों से बैंक हर तीसरे महीने में 15 रुपए एसएमएस चार्ज के रूप में भी वसूलेगा। लेकिन बैंक 1,000 रुपये तक के UPI/USSD ट्रांजैक्शन्स पर कोई चार्ज नहीं लेगा।
एक्सिस बैंक (Axis Bank)

1. कस्टमर्स को हर महीने 5 ट्रांजैक्शन्स फ्री दिए गए हैं। इसके बाद छठे लेनदेन पर कम से कम 95 रुपए प्रति लेनदेन की दर से चार्ज लगाया जाएगा।

2. नॉन-होम ब्रांच के 5 ट्रांजैक्शन बैंक ने फ्री रखे हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि बैंक ने एक दिन में कैश जमा करने की सीमा 50,000 रुपए ही तय की है। इससे अधिक के जमा पर या छठवे ट्रांजैक्शन पर प्रति 1000 रुपए पर 2.50 रुपए की दर से या प्रति ट्रांजैक्शन 95 रुपए, में जो भी ज्यादा होगा, चार्ज लिया जाएगा।

एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank)
1. एचडीएफसी बैंक से 4 बार से अधिक कैश निकालने पर 150 रुपए फीस अदा करनी होगी।
2. बैंक ने होम ब्रांचेज में भी फ्री कैश ट्रांजैक्शन दो लाख रुपये पर सीमित कर दिया है। इसके ऊपर कस्टमर्स को न्यूनतम 150 रुपए या पांच रुपये प्रति 1000 रुपए का भुगतान करना होगा।
3. नॉन-होम ब्रांचेज में मुफ्त लेन-देन 25,000 रुपये है। इसके ऊपर कस्टमर्स को न्यूनतम 150 रुपए या पांच रुपये प्रति 1000 रुपए का भुगतान करना होगा।

आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank)

1. आईसीआईसीआई बैंक में एक एक महीने में पहले चार लेन-देन के लिए कोई शुल्क नहीं लगेगा। उसके बाद प्रति 1,000 रुपये पर 5 रुपये का शुल्क लगाया जाएगा। यह समान महीने के लिए न्यूनतम 150 रुपये होगा।
2. थर्ड पार्टी ट्रांजैक्शन के मामले में सीमा 50,000 रुपये प्रतिदिन होगी।

3. होम ब्रांच के अलावा अन्य शाखाओं के मामले में आईसीआईसीआई बैंक एक महीने में पहली नकद निकासी के लिए कोई शुल्क नहीं लेगा। लेकिन उसके बाद प्रति 1,000 रुपये पर 5 रुपये का शुल्क लेगा। इसके लिए न्यूनतम शुल्क 150 रुपये रखा गया है।

इसके अलावा  सभी बैंक  पर लगने वाले चार्ज  भी देख ले  और समझ ले कैसी लूट है
चेक से पचास अधिक की निकासी पर दस रूपये प्रति  निकासी
थर्ड पार्टी चेच्क्से नहीं निकलेंगे दस हजार से ज्यादा
बचत खाते पर पचास हजार से ज्यादा जमा प्रति हजार २.५०  रूपये चार्ज
पास बुक एंट्री १०  रूपये
बलेंस स्टेटमेंट २५ रूपये
हस्ताक्षर जांच  पचास रूपये
ए टी एम् इस्तेमाल के लिए चार्ज  ५६०  से हजार रूपये
प्रति डिमांड ड्राफ्ट २५ रूपये
फण्ड ट्रान्सफर  - २५ रूपये



न्यूज़ इनपुट : नवभारत और अन्य राष्ट्रीय दैनिक