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Wednesday, 13 June 2018

Illogical and Frustrated attempt by RSS to debunk Arayn Invasion reality :


Jan uday   through the many  world scientific Researches  and studies   it has been proven that   Aryans Invaded  India    in different phases of Time  and slowly and gradually  captured India by Killing aboriginals .   roots  of Brahman / Arayn   and Sanskrit  Language has been found  at many parts of European world . Apart from these time to time  Many time  Arayn / Brahman themselves  had proved  that they  had come from  Outside India . Jawahar Lal Nehru , Bal Gangadhar Tilak ,  Rabindernath Tagore  reasserted  their origin  and proudly declared  themselves as Arayn

Perhaps Arayn  would never have thought  that this  being an Arayan  and its assertion one day would put their very existence  in danger as Locals  would start a nationwide campaign . though  Arayn’s would used most effective weapon  of  art and culture they developed figmented   folk stories, myths  and religious stories  about their supremacy and ability  to rule as  the divine message  by God .
 Historically 180 BC   had been  the time when Brahman / Arayn came into power when a Brahman General of King Vrahadasth  the Grandson of Emperor Ashoka killed him  and totally exterminated  the Boudhist community , they boudhist people  who ran away to save their lives in Jangal  at that Now called tribal , technically  they divided  the society ino many parts/ caste and made aboriginals  as shudra  and also   created    stories  that this division is made by the God .

Anyway   its been ages aboriginals  sepnt  the slavery   and Now educated ,awaked , mobilized,and are now fighting for their  Basic Human rights

But the Still Arayn Community is not ready to give them  the Basic Human rights  and trying their Best to suppress  the Aboriginals   through Communal Rights , Cow- terrorism , Caste terrorism , through anti Reservation scheme , creating  dived in education system  , and  many policie are being formed tailred , fabricated  to stop  anger of aboriginals

In the course another attempt have been made by the RSS through their  RSS  Man  that vedic era  has been developed by the Locals  and  no Sign of Arayn  Invasion has been found  in a DNA Study of skeletal at the same time they use the word “ Minor Invasion Proof “ has been found

The most hilarious, ridiculous part of this study is   that by doing skeletal study they have declared  that Vadic Era was developed by  Locals in Harrapan Age   Now can anyone imagine that how a skeltel  can tell that Vadic or any era  started when ??  this  is the academic  and intellectual Bankruptcy of the Duo RSS  man  that they just declared  even archeological evidence  can not prove  it  and most interestingly    so far in any academic  research  or archeological  Research  any sign of Rig vadic  Age has been found , like sculpture , stone carving of any deity , wood carving  idols of God and Goddess described in Rigveda

The more interesting  part of it is that RSS people  have never been able to trace   the any archeological  proof or findings to establish  that Ramayan and Mahbharata  ever existed , like no palaces , No coin , No  art work or anything  except  bogus stories created by  Brahmans Current  attempt   of DNA  Study  shows frustration  , fear  and fiasco  on RSS part


Wednesday, 7 February 2018

आर्यों आक्रमण का प्रारम्भिक इतिहास : शिव काबिले का सरदार था

जन उदय:  ऐसा प्रतीत  होता है कि  राजाओं को  छोड़  कभी भी किसी ने इस देश के साथ न्याय नहीं  किया  १८० बी सी में व्रह्द्स्थ की हत्या कर  पुष्यमित्र शुंग  / परशुराम  ने ब्राह्मण सम्राज्य स्व्थापित किया   ८४ हजार बौध और जैन मठो को तोड़ उनको  मंदिरों का रूप दिया गया  इनकी हत्याए  की  और १८० से लेकर २८० ईसा बाद तक इन्होने ऐसे ग्रन्थ लिख लिए गए जिसमे इन्होने  अपने आपको भगवान् का पुत्र , दूत , भगवान से सीधे सम्पर्क करने वाले सब्बित कर लिया  और  इन ग्रंथो में वेद , पुराण , म्नुसिमृति  जैसे घ्रणित  ग्रन्थ लिख लिए क्योकि  इन ग्रंथो  में उत्पीडन  को अपराध को मान्यता दी गई  है उर ब्राह्मण को हर अपराध से मुक्त  रखा गया हत्या बलात्कार , सम्पत्ति  छिनना  इनके लिए सब जायज  और लोगो को  सभी सुविधाओं से महरूम  रखा गया
पूरी दुनिया  में कई शोध के मुताबिक़ आर्य  भारत में लगभग १५०० इस पूर्व आये और  इनमे तीन काबिले मुख्य  रूप से थे पहले कबीले का सरदार शेड्लर  जो बाद में चल कर इन्होने शिव बना दिया  दुसरा काबिला ब्रहेट  का था  जिसे बाद में इन्होने ब्रह्मा  कहा और तीसरा कबीला वैस्नोव का था जिसे इन्होने विष्णु का नाम दिया   और ये नाम इन्होने उनको पूजने के लिए किया

जब ये लोग   आये तो  इन्होने सबसे पहले भारतीय  राजाओं  को गिफ्ट में गोरी लडकिया  और  घोड़े  दिए जिसे पाकर यहाँ के राजा  बहुत खुश होते  थे  क्योकि  घोड़े  ने उनकी यात्रा को सुगम  और तेज बना दिया  था  इसलिए इतिहास एन्थ्रोपोलॉजी  ने  भारतीय और आर्य  से जन्मे लोगो को इंडो-आर्यन कहा , ये लोग कबीलाई  थे और घुमन्तु  जाति  के थे  सो इनमे हथियार , भोजन , पानी  की बहुत महत्वता  थी


आर्यों  की एक धारा  उसी वक्त पर्शिया  की तरफ से आई जिसका नाम  पेरशेरोन था  जिसको बाद में परशुराम  भी कहा गया , परशुराम/ पेरशेरोन निहायत  क्रूर  था और उसके हाथ में एक विशेष  हथियार था जो लकड़ी और जानवर दोनों काट सकता था  और इसने शेड्लर /शिव , ब्रहेट/ ब्रह्मा , और वैस्नोव/ विष्णु  की मदद से अफगानिस्तान  के कुछ भागो  पर कब्जा कर लिया   चूँकि इसमें ब्रहेट/ ब्रह्मा , का बड़ा  योगदान था तो उस जीते  हुए स्थान को इन्होने ब्रह्मवर्त कहा  वर्त इसलिए क्योकि यह   जीता  हुआ इलाका गोल था वर्त की तरह

इस जीत से  ब्राह्मण  / आर्य बड़े ही उत्साहित थे इनके पास एक कोडवर्ड की भाषा जिसे संस्कृत कहते है लम्बे हथियार  और सबसे बड़ी बात इन्हें अपनी चालबाज़ लडकियो पर पूरा भरोसा था और समझ गए थे  गोरी  चमड़ी यहा के राजाओं की कमजोरी है और यही कारण था उत्तर भारत आते आते इन्होने यहा के बाहुबली  राजा हिरणाकश्यप के पुत्र को फसा लिया था  इसकी कहानी ऐसे  चलती है ‘’’’’’ होलिका अनार्य थी , मात् प्रधान कबीले की सरदार , आर्यो की चाल ने प्रहलाद को एक कन्या के चक्कर में फसाया , लेकिन कामयाब न हुए , (आग में जलने का द्रश्य नहीं ये युद्ध हुआ था) प्रह्लाद की मदद से एक युद्ध में आर्यो ने होलिका को मार दिया ,,, बाद में होलिका के कबीले ने आर्यो को बहुत मारा और खून से धरती लाल कर दी , और उस खून से सनी मिटटी को आर्यो के माथे पर लगा कर कहा की तुम वीर नहीं अबीर हो यानी कायर हो ,,, उस दिन से आज तक हर डरपोक आर्य एक दूसरे को रंग लगता है ,, मथुरा में एक दीं अबीर होली का होता है

इसके बाद इन्होने इस इलाके को आर्यवर्त कहा जो लगभग उतरी  भारत  था
खैर १८० बी सी से लेकर इन लोगो ने जिस तरह बर्बरता , दिखाई , इस देश के मूलनिवासियो अत्याचार  किये उनकी हत्या की सम्पत्ति  छिनी उर शिक्षा के अधिकार से वंचित कर दिया

इसके बाद मुस्लिम शासक  आये जिनकी मदद  इन्होने की  अंग्रेजो के साहयक रहे  लकिन एक शर्त पर की  ये लोग जाति  यानी समाजिक वाव्य्स्था पर कुछ नहीं कहंगे या करेंगे , लेकिन अंग्रेजो ने जब यह सब देखा  तो इनके वर्चस्व को खत्म कर दिया सबसे बड़ी बात अंग्रेज बड़े ही उदार और न्यायप्रिय  थे इसलिए उन्होंने कभी भी ब्राह्मणों  के लोकतांत्रिक  विरोध का विरोध  नहीं किया  और इसलिए उन्होंने खुद ब्राह्मणों  के लिए कांग्रेस को बना कर  दिया .. ब्राह्मण अपने आपको  चाहे जितना मजी शूरवीर कहे  लेकिन मुगल काल में एक आवाज तक नहीं उठाई क्योकि ब्रह्मण  जानते थे  एक आवाज उठाने पर गर्दन  कट  जाएगी


सबसे बड़े कमाल की बात यह है की  आर्य  यानी ब्राह्मण आज भी इस देश से प्रेम नहीं करते यहाँ लोगो से प्रेम नहीं करते बल्कि ये लोग इतनी नफरत करते और फैलाते है ये लोग आज भी नहीं चाहते की मूलनिवासी  के पास सम्पति आ जाए , ये लोग पढ़ लिख ले  या इन्हें समाज में सम्मान मिले . पूरा इतिहास चाहे कैसा भी हो उसे भुलाया जा सकता है लकिन वर्तमान को कैसे नजरअंदाज करे ??  

Monday, 10 July 2017

ब्राह्मण राजपूत समेत सभी गुंडों की मौज है यु पी में , मिल रहा है मुआवजा और पेंसन . दुनिया सबसे बड़ा गुंडा प्रदेश है यु पी


ऊंचाहार में मारे गए ब्राह्मण नहीं अपराधी व शूटर थे योगी के मंत्री के बयान से मचा हड़कंप, देखें कौन है ये मंत्री
कुशीनगरऊंचाहार में मारे गए 5 ब्राह्मणों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। जहाँ एक तरफ पुरे प्रदेश की ब्राह्मण संगठन हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं तो वहीं योगी सरकार के मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या ने मारे गए सभी लोगों को शातिर अपराधी करार दे दिया है।

योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वामीप्रसाद मौर्या ने शनिवार को कहा कि, ऊंचाहार में ब्राह्मणों की हत्या नहीं हुई है, अपराधियों की हत्या हुई है, सभी हिस्ट्रीशीटर थे। उनके ऊपर थानों में गंभीर मामलों मे केस दर्ज है।
योगी के मंत्री ने सपा विधायक मनोज पांडेय पर आरोप लगाया कि ग्रामप्रधान राजा यादव की हत्या करने के लिए उन्हें भाड़े पर बुलाया गया था। मारे गए लोगों मे एक भी व्यक्ति रायबरेली जनपद के निवासी नहीं है। मारे गए सभी फतेहपुर व प्रतापगढ के रहने वाले हैं।

सपा व कांग्रेस पर पर बरसते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि, सपा व कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं है इसीलिए दोनों पार्टियां लाश पर राजनीति कर रही हैं। ऊंचाचार में पांच लोगों की हुई मौत जनआक्रोश का प्रतिफल है। दोनों पार्टियां हमें बदनाम करने के लिए कुचक्र रच रहीं है। भीड़ द्वारा प्रतापगढ व फतेहपुर के लोग मारे जाते हैं और वाई श्रेणी की सुरक्षा विधायक मनोज पांडेय मांग रहे हैं।
दूसरी खबर

पिछले दिनों रायबरेली में बीते दिनों पुरानी रंजिश को लेकर पांच ब्राह्मणों की हत्या कर उन्हें गाड़ी में बंद करके जला दिया गया था। इसी मामले में ब्राह्मण समाज ने तीखा विरोध प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि हत्यारों को फांसी की सजा दी जाए और मृतकों के आश्रितों को सरकारी नौकरी दी जाए

रायबरेली जिले के ऊँचाहार थानान्तर्गत इटौरा बुजुर्ग गाव सुर्ख़ियों में है ।जनपद प्रतापगढ़ के संग्राम गढ़ गाँव के रहने वाले रोहित शुक्ल ,बृजेश शुक्ल ,नरेंद्र शुक्ल और इनके दोस्त अनूप मिश्र ,तथा अंकुश मिश्र स्कॉर्पियो गाड़ी से इटौरा बुजुर्ग गाँव के प्रधान राम श्री यादव के घर हत्या करने के इरादे से हमला कर दिये ।

        चूँकि रोहित शुक्ला नेवासे मिलने की वजह से इटौरा बुजुर्ग गाँव में आता जाता था और पिछड़ी जाति बाहुल्य वाले गाँव में प्रधान बनने की लालसा से वह अधिकतर गाँव में दबंगई किया करता था । प्रधानी चुनाव में हारने के कारण वह राम श्री यादव को अपने रास्ते से हटाना चाहता था ।

           इसी कायरता पूर्ण कार्य को अंजाम देने के लिये रोहित शुक्ला अपने बदमाश दोस्तों के साथ ब्र्हाम्नी व्यवस्था के मजबूत पायदान पर बैठकर राम श्री यादव के परिवार को ललकारने लगा ।प्रधान परिवार के लड़के अपनी जान बचाकर गाँव की तरफ़ भागे ,लोकप्रिय प्रधान के परिवार को भागता देख भारी संख्या में रात्रि के नौ बजे के आसपास ग्रामीणों ने हमलावरो को खदेड़ लिया ,हमलावर स्कॉर्पियो गाड़ी में बैठकर भागते समय बिजली के खम्बे से टकरा गये । जोरदार झटके से गाड़ी में आग लग गयी ,गाड़ी से उतरकर तीन लोग भागने लगे इतने में ग्रामीणों ने उन्हें लाठी दंडों से पीटकर मार  डाला ,दो लोग गाड़ी में से उतर कर न भागने की वजह से जल गये , प्रत्यक्ष दर्षियो के द्वारा पोलीस को बताई गई घटना को a.d.g.police ने प्रेस कांफ्रेंस में ये बात कही थी ।


           दूसरे दिन यादव प्रधान के परिवार को फँसाने के लिये रणनीति बनायी जाने लगी ,दैनिक  समाचार पत्रों के ब्राह्मण पत्रकारों ने सबसे पहले इस घटना को तोड़ मरोड़ कर लिखना चालू किया ,उसके बाद देष भर के ब्राह्मण संघटन एकजुट होकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट,तथा बिजलीघर से बिजली व्यवस्था की दुहाई देकर हमलावरो को हत्यारा N बताकर ब्राहम्ण की हत्या के जिम्मेदार लोगों को मुलजिम बनाने का प्रचार करने लगे ।

       प्रधान के घर के चार लोँगो को पुलिस ने ग्रिप्तार कर लिया है ,पूर्व ब्लॉक प्रमुख शिव कुमार यादव को मुख्य साजिश करता मानते हुये रात्रि में ग्रिप्तार कर लिया ।

   पूरे देष के ब्राह्मण यादव परिवार को तहस नहस करने पर उतारू हैं ,आप अपना नैतिक समर्थन दीजिये ,आप भी यादव समुदाय को इकठ्ठा करके मांगपत्रक अपने अपने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजईये  परिधि न्यूज़

क्योकि रोज रोज लालू और मुलायम जैसे नेता नही बनते ऐसे नेता वर्षों में एक ही नेता मिलते है
यादवो में भी बहुत नेता है सब नाम के और तो और सिर्फ चापलूस
मुझे याद है बिहार में यादवो के खिलाफ गाली गलौज किया गया यहाँ तक यादव जाती को आतंकवादी बताया गया फिर भी किसी यादव ने कुछ नही बोला यहाँ तक कि भाजपा में बहुत यादव नेता थे उन्होंने इस मुद्दे पर कुछ नही बोला  आखिर क्यों ???

सिर्फ राजद ने ही पूरा बिहार में यादवो के खिलाफ बोलने वालों को आड़े हाथ लिया था  क्या राजद ने ही सिर्फ यादवो का ठेका ले रखा है??

देश के नौजवान बहादुर तेज बहादुर यादव के खिलाफ  भाजपा  ने दाल की कीमत उसका नौकरी खाकर चुकाई कोई भाजपा  यादव नेता ने नही कुछ बोला आखिर क्यों???


यूपी में नाम के आधार पर ही देखते पुलिसकर्मी को तबादला कर दिया जा रहा और इसपे तेजश्वी यादव ने जमकर लताड़े है लेकिन फिर भी कुछ यादव बोलता है लालू तेज तेजश्वी ने यादवो के लिए क्या किया तो मैं उन मूर्ख यादवो को बता देना चाहता हुँ इनलोगों ने  आवाज देंने का काम किये है और आवाज बुलंद रहने के बाद ही हक मिलता है सुधर जाओ यादवो और इस दुख की घड़ी में लालू जी का साथ दे और अपना यादव एकता का परिचय दे वरना हक और  आवाज दोनों  फिर से दबा और कुचल दिया जाएगा घोटाला तो बहुत हुआ है, उस पर सी बी आई क्यों नहीं लगता केन्द्र सरकार , सिर्फ यादव को अलग थलग करके सभी गरीबो को सामन्ती शासन करने की साजिश किया जा रहा है, आरक्षण  को भाजपा  ख़त्म करना चाहती हैं, लेकिन लालु यादव और मुलायम सिंह यादव ही भाजपा के रास्ते का काँटा है, इसलिए इनलोगो को फँसाकर रास्ते से हटाने का रास्ता खोज लिया हम सभी दबे कुचले भाई, बहनो से अनुरोध है की केन्द्र सरकार की साजिश का मुँहतोड़ जवाब देना होगा !!  तेजस्वी तदव 

Friday, 17 March 2017

Aarya v/s aboriginals : पुष्यमित्र शुंग/परशुराम भारतीय इतिहास सबसे बड़ा हत्यारा


मोर्य वंश के महान सम्राट चन्द्रगुप्त के पोत्र महान अशोक ने कलिंग युद्ध के पश्चात् बौद्ध धर्म अपना लिया। और बौध धर्म के प्रचार के लिए अपने  पुत्र और पुत्री तक को इस काम में लगा दिया , सिर्फ अशोक के प्रचार की वजह से लगभग सभी एशियाई  देशो में बौध  धर्म फ़ैल  गया यही कारण रहा की एशिया के सभी देश  में महान अशोक  का नाम बड़े  आज भी आदर से लिया जाता है

उससे भी आगे जब मोर्य वंश का नौवा अन्तिम सम्राट व्रहद्रथ मगध की गद्दी पर बैठा ,तब उस समय तक आज का अफगानिस्तान, श्री लंका , चीन , इंडोनेशिया , थाईलैंड  कोरिया सभी देश  बौद्ध बन बन चुके थे
सम्राट व्रहद्रथ के शासनकाल में ग्रीक शासक मिनिंदर जिसको बौद्ध साहित्य में मिलिंद कहा गया है ,ने भारत वर्ष पर आक्रमण की योजना बनाई। लेकिन हिम्मत नहीं हो रही थी इस कार्य के लिए मिनिंदर ने सबसे पहले ब्राह्मण  गुरुओं से संपर्क साधा,और उनसे कहा कि अगर आप भारत विजय में मेरा साथ दें तो में भारत विजय के पश्चात् में ब्राह्मणों  सत्ता दे दूंगा ब्राह्मणों ने नामक हरामी और   राष्ट्र द्रोह किया तथा भारत पर आक्रमण के लिए एक विदेशी शासक का साथ दिया।

सीमा पर स्थित मठो में ब्राह्मण से बौध बने ब्राह्मण  पहले से ही घुस गए थे  । बोद्ध भिक्षुओ का वेश धरकर मिनिंदर के ब्राह्मणों  के साथ सैनिक मठों में आकर रहने लगा । हजारों मठों में सैनिकों के साथ साथ हथियार भी छुपा दिए गए।

दूसरी तरफ़ सम्राट व्रहद्रथ की सेना का एक गद्दार  सैनिक पुष्यमित्र शुंग जो एक गरीब विधवा ब्राह्मण औरत का पुत्र था  और उस पर दया दिखा कर  सम्राट व्रह्द्स्थ पढने लिखने का मौका दिया और उसे सेना में सिपाही  भी रख लिया था पुष्यमित्र की सेवा और कर्तव्य निष्ठां  से प्रसन्न  हो  सम्राट ने उसे अपने करीब  कर लिया था  लेकिन व्रह्द्स्थ  नहीं जानता था  कि वो आस्तीन में नाग पाल रहा है बाद में अपनी सेवा


अपनी वीरता व साहस के कारण मगध कि सेना का सेनापति बन चुका था । बौद्ध मठों में विदेशी सैनिको का आगमन उसकी नजरों से नही छुपा बल्कि पुष्यमित्र  इस षड्यंत्र में शामिल  था  । इस बात का पता किसी  तरह जब सम्राट को चला  तो वह काफी शुब्द रह गया  और पुष्यमित्र शुंग को बुलवा भेजा और पुष्यमित्र शुंग को भी लेकर मठो में पहुच गया  तो वहा यह देख कर हैरान हो  गया की ब्राह्मण बौध बने हथियारों से लैस मठो में जमे पड़े  है
मठों में स्थित सभी विदेशी सैनिको को पकड़ लिया गया,तथा उनको जेल में डाल दिया  गया  और उनके हथियार कब्जे में कर लिए गए। राष्ट्रद्रोही ब्राह्मणों  को भी ग्रिफ्तार कर लिया गया। लेकिन सम्राट ने पुष्यमित्र  शुंग माफ़ी मांगने पर को माफ़ कर दिया  और यही सबसे बड़ी  गलती कर दी . सम्राट ने सोचा  शायद पुष्यमित्र शुंग भटका  गया था और अब मार्ग  पर आ गया है , लेकिन हुआ उलटा पुष्यमित्र  शुंग के दिल में बौध  सम्राट  के खिलाफ नफरत  और भी गहरी  हो गई और वह अंदर ही अंदर फिर से योजना बनाने  लगा

एक बार जब व्रह्धास्थ सेना  का निरक्षण कर रहा था
उसी  समय पीछे  से पुष्यमित्र शुंग ने सम्राट व्रह्द्स्थ का सर  काट  दिया  और योजना  के तहत छिपे हुए ब्राह्मण सैनिक  बाकी के सैनिको  पर टूट  पड़े  और सेना के अंदर ही ब्राह्मण सैनिक  भी  पुष्यमित्र शुंग के साथ हो गए और इस तरह सम्राट का अंत हुआ

लेकिन यह पुष्यमित्र शुंग  के आतंक  का अंत नहीं था इसके बाद पुष्यमित्र  शुंग ब्राह्मण सैनिको  के साथ  पुरे  महल में घुमा  जहा पर  उसने गर्भवती  रानी को  न सिर्फ मारा बल्कि  उसका पेट फाड़ कर बच्चे  को निकाला  और उसे मारा  इसके बाद उसने अपना रुख  नगर  की और  किया  और जहा जहा पर बोध  रहते थे वहा कत्ले आम शुरू  कर दिया सभी बौध  लोगो  की  हत्याए  कर दी  गई  छोटे  छोटे  बच्चो  की लाशो  को नगर  चौक  पर टांगा  
बात सिर्फ एक नगर तक सिमित नहीं रही  पुष्यमित्र  शुंग बौध  लोगो  से इतनी नफरत करता था की  उसकी जब आँख खुल जाति  थी उसी वक्त  वह किसी न किसी  बस्ती में चला जाता  और पागलो  की तरह हत्याए  करने लग जाता  , यहाँ तक की अगर  कुछ ब्राह्मण कहते की  ये गलत है तो उन ब्राह्मण परिवारों को उसने खत्म कर दिया  या उनको सामान्य  ब्राह्मणों  की श्रेणी  से निकाल  कर उन्हें शुद्रो  की श्रेणी  में डाल  दिया महारिषी वाल्मीकि उसी श्रेणी में आते है

ब्राह्मणों  की सत्ता को स्थापित करने के लिए पुरे भारत  की एक सभा  पातिलिपुत्र में  हुई   और  अपनी सत्ता को चिरस्थाई  बनाने के लिए योजनाये  बनाई गई  यह सभा कई महीनो  तक चली और इसका सारा खर्चा  राज्य  ने उठाया  और इस सभा के कुछ निष्कर्ष  इस प्रकार निकाले गए
१ बौध लोगो को समाज से बाहर नहीं निकाला जाएगा बल्कि ब्राह्मणों की बनाई वर्ण वाव्स्य्था के तहत इनको  गुलाम बनाया जाए

२. वर्ण वाव्य्स्था को भगवान का संदेश बताया  जाए

३. इन्हें शिक्षा, सम्पति और धन नहीं रखने दिया जाए ताकि इनकी बुधि एकदम कुंद हो जाए और ये पुरे जानवर बन जाए

४. ईश्वर के ऐसे संदेश  तैयार  किये जाए जिससे इनकी मानसिक  गुलामी  सुनिश्चित  हो

५. भय , अन्धिव्श्वास का पुलिंदा इनके दिमागों  पर लाद दिया जाए

६ बौध  परिवारों में पैदा होने वाले बच्चो को बचपन से ही इतना मानसिक उत्पीडित किया जाए ताकि उनका आत्मविश्वास  मर जाए  और वो कभी  भी विद्रोह  की बात  सोच  ही  न सके

इस सभा में मानिविय मनोविज्ञान पर पूरी  चर्चा  हुई और उसके बाद सिलसिला  चालू  हुआ  दुनिया भर के ऐसे झूठे  धार्मिक ग्रन्थ  लिखने का जिसमे औरतो  और शुद्रो को  गुलाम  रहने की शिक्षा  दी गई  और इस गुलामी  को भगवान्  की मर्जी  और संदेश  बताया  गया .यह घटना १८० बी सी  की है  और इसी के बाद और आने वाले सालो यानी २५० ए डी  तक रामायण , मनुसिमृति , महाभारत , वेदों का अंतिम रूप और पुराण  सामने आये
इन ग्रंथो  को लिखते वक्त इन्होने एक होशियारी  यह भी की कि इन ग्रंथो में इन्होने कोई तारीख  नहीं लिखी  ताकि  हमेशा  यह कहा जा सके की  ये ग्रन्थ  भगवान् के संदेश है  और इन्हें भगवान् ने उसी वक्त भेजा जिस वक्त भगवान् ने दुनिया बनाई ...


Tuesday, 22 March 2016

भारत में आर्य / ब्राह्मण आक्रमण और मूलनिवासियो के स्वर्णकाल का पतन

भारत में आर्य / ब्राह्मण आक्रमण और मूलनिवासियो के स्वर्णकाल का पतन
21 मई, 2001 को अख़बार “TIMES OF INDIA” में भारत के लोगों के DNA से सम्बंधित शोध रिपोर्ट छपी लेकिन मातृभाषा या हिंदी अखबारों में यह बात क्यों नहीं छापी गयी? क्योकि इंग्लिश अखबार ज्यादातर विदेशी लोग यानी ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य लोग ही पढ़ते है मूलनिवासी लोग नहीं। विदेशी यूरेशियन जानकारी के बारे में अतिसंवेदनशील लोग है और अपने लोगो को बाख़बर करना चाहते थे, ये इसके पीछे मकसद था। मूलनिवासी लोगो को यूरेशियन सच से अनजान बनाये रखना चाहते है। THE HIDE AND THE HIGHLIGHT TWO POINT PROGRAM. सुचना शक्ति का स्तोत्र होता है।


DNA Report 2001यूरोपियन लोगो को हजारों सालों से भारत के लोगो, परम्पराओं और प्रथाओं में बहुत ज्यादा दिलचस्पी है। क्योकि यहाँ जिस प्रकार की धर्मव्यवस्था, वर्णव्यवस्था, जातिव्यवस्था, अस्पृश्यता, रीति-रिवाज, पाखंड और आडम्बर पर आधारित धर्म परम्पराए है, उनका मिलन दुनिया के किसी भी दूसरे देश से नहीं होता। इसी कारण यूरोपियन लोग भारत के लोगों के बारे ज्यादा से ज्यादा जानने के लिए भारत के लोगों और धर्म आदि पर शोध करते रहते है। यही कुछ कारण है जिसके कारण विदेशियों के मन में भारत को लेकर बहुत जिज्ञासा है। इन सभी व्यवस्थाओं के पीछे मूल कारण क्या हैइसी बात पर विदेशों में बड़े पैमाने पर शोध हो रहे है। मुश्किल से मुश्किल हालातों में भी विदेशी भारत में स्थापित ब्राह्मणवाद को उजागर करने में लगे हुए है। आज कल बहुत से भारतीय छात्र भी इन सभी व्यवस्थों पर बहुत सी विदेशी संस्थाओं और विद्यालयों में शोध कर रहे है।

अमेरिका के उताह विश्वविद्यालय वाशिंगटन में माइकल बामशाद नाम के आदमी ने जो BIOTECHNOLOGY DEPARTMENT का HOD ने भारत के लोगों के DNA परीक्षण का प्रोजेक्ट तैयार किया था। बामशाद ने प्रोजेक्ट तो शुरू कर दिया, लेकिन उसे लगा भारत के लोग इस प्रोजेक्ट के निष्कर्ष (RESULT REPORT) को स्वीकार नहीं करेंगे या उसके शोध को मान्यता नहीं देंगे। इसलिए माईकल ने एक रास्ता निकला। माईकल ने भारत के वैज्ञानिकों को भी अपने शोध में शामिल कर लिया ताकि DNA परिक्षण पर जो शोध हो रहा है वो पूर्णत पारदर्शी और प्रमाणित हो और भारत के लोग इस शोध के परिणाम को स्वीकार भी कर ले। इसलिए मद्रास, विशाखापटनम में स्थित BIOLOGUCAL DEPARTMENT, भारत सरकार मानववंश शास्त्र – ENTHROPOLOGY के लोगों को भी माइकल ने इस शोध परिक्षण में शामिल कर लिया। यह एक सांझा शोध परीक्षण था जो यूरोपियन और भारत के वैज्ञानिको ने मिल कर करना था। उन भारतीय और यूरोपियन वैज्ञानिकों ने मिलकर शोध किया। ब्राह्मणों, राजपूतों और वैश्यों के डीएनए का नमूना लेकर सारी दुनिया के आदमियों के डीएनए के सिद्धांत के आधार पर, सभी जाति और धर्म के लोगों के डीएनए के साथ परिक्षण किया गया।


यूरेशिया प्रांत में मोरूवा समूह है, रूस के पास काला सागर नमक क्षेत्र के पास, अस्किमोझी भागौलिक क्षेत्र में, मोरू नाम की जाति के लोगों का DNA भारत में रहने वाले ब्राह्मणों, राजपूतों और वैश्यों से मिला। इस शोध से ये प्रमाणित हो गया कि ब्राह्मण, राजपूत और वैश्य भारत के मूलनिवासी नहीं है। महिलाओं में पाए जाने वाले

MITICONDRIYAL DNA(जो हजारों सालों में सिर्फ महिलाओं से महिलाओं में ट्रान्सफर होता है) पर हुए परीक्षण के आधार पर यह भी साबित हुआ कि भारतीय महिलाओं का DNA किसी भी विदेशी महिलाओं की जाति से मेल नहीं खाता। भारत के सभी महिलाओं एस सी, एस टी, ओबीसी, ब्राह्मणों की औरतों, राजपूतों की महिलाओं और वैश्यों की औरतों का DNA एक है और 100% आपस में मिलता है। वैदिक धर्मशास्त्रों में भी कहा गया है कि औरतों की कोई जाति या धर्म नहीं होता। यह बात भी इस शोध से सामने आ गई कि जब सभी महिलाओं का DNA एक है तो इसी आधार पर यह बात वैदिक धर्मशास्त्रों में कही गई होगी। अब इस शोध के द्वारा इस बात का वैज्ञानिक प्रमाण भी मिल गया है। सारी दुनिया के साथ-साथ भारतीय उच्चतम न्यायलय ने भी इस शोध को मान्यता दी। क्योकि यह प्रमाणित हो चूका है कि किसका कितना DNA युरेशियनों के साथ मिला है:
ब्राह्मणों का DNA 99.99% युरेशियनों के साथ मिलता है।
राजपूतों(क्षत्रियों) का DNA 99.88% युरेशियनों के साथ मिलता है।
और वैश्य जाति के लोगों का DNA 99.86% युरेशियनों के साथ मिलता है।
राजीव दीक्षित नाम का ब्राह्मण (ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर) ने एक किताब लिखी। उसका पूना में एक चाचा, जो जोशी(ब्राह्मण) है, ने वो किताब भारतमें प्रकाशित की, में भी लिखा है ब्राह्मण, राजपूत और वैश्यों का DNA रूस में, काला सागर के पास यूरेशिया नामक स्थान पर पाई जाने वाली मोरू जाति और यहूदी जाति (ज्यूज हिटलर ने जिसको मारा था) के लोगों से मिलता है। राजिव दीक्षित ने ऐसा क्यों किया? ताकि अमेरिकन लोग भारत के ब्राह्मण, राजपूत और वैश्य जाति के लोगों को अमेरिका में एशियन ना कहे। राजीव दीक्षित ने बामशाद के शोध को आधार बनाकर यूरेशिया कहाँ है ये भी बता दिया था। राजीव दीक्षित एक महान संशोधक था और वास्तव में भारत रत्न का हक़दार था।
DNA परिक्षण की जरुरत क्यों पड़ी?
संस्कृत और रूस की भाषा में हजारों ऐसे शब्द है जो एक जैसे है। यह बात पुरातत्व विभाग, मानववंश शास्त्र विभाग, भाषाशास्त्र विभाग आदि ने भी सिद्ध की, लेकिन फिर भी ब्राह्मणों ने इस बात को नहीं माना जोकि सच थी। ब्राहमण भ्रांतियां पैदा करने में बहुत माहिर है, पूरी दुनिया में ब्राह्मणों का इस मामले में कोई मुकाबला नहीं है। इसीलिए DNA के आधार पर शोध हुआ। ब्राह्मणों का DNA प्रमाणित होने के बाद उन्होंने सोचा कि अगर हम इस बात का विरोध करेंगे तो दुनिया में हम लोग बेबकुफ़ साबित हो जायेंगे। तथ्यों पर दोनों तरफ से चर्चा होने वाली थी इसीलिए ब्राह्मण, राजपूत और वैश्य लोगों ने चुप रहने का निर्णय लिया। ब्राह्मण जब ज्यादा बोलता है तो खतरा है, ब्राह्मण जब मीठा बोलता है तो खतरा बहुत नजदीक पहुँच गया है और जब ब्राह्मण बिलकुल नहीं बोलता। एक दम चुप हो जाता है तो भी खतरा है।“ ITS CONSPIRACY OF SILENCE- DR. B.R. AMBEDKAR अगर ब्राह्मण चुप है और कुछ छुपा रहा है तो हमे जोर से बोलना चाहिए।
इस शोध का परिणाम यह हुआ कि अब हमे अपना इतिहास नए सिरे से लिखना होगा। जो भी आज तक लिखा गया है वो सब ब्राह्मणों ने झूठ और अनुमानों पर आधारित लिखा है। अब अगर DNA को आधार पर विश्लेषण किया जाये, और इतिहास फिर से ना लिखा जाये तो दुनिया ब्राह्मणों को BACKWARD HISTORIAN कहेंगे। DNA पीढ़ी दर पीढ़ी बिना किसी बदलाव के स्थानांतरित होता रहता है। आक्रमणकारी लोग हमेशा अल्पसंख्यक होते है और वह की प्रजा बहुसंख्यक होती है। जब भी अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक की बात आती है तो आक्रमणकारी लोगों के मन में बहुसंख्यकों के प्रति हीन भावना का विकास होता है। इसीलिए ब्राह्मणों के मन में मूलनिवासियों के प्रति हीन भावना का विकास हुआ। युद्ध में हारे हुए लोगों को गुलाम बनाना एक बात है, लेकिन गुलामों को हमेशा के लिए गुलाम बनाये रखना दूसरी बात है। यह समस्या ब्राह्मणों के सामने थी।
ऋग्वेद में ब्राह्मणों को देव और मूलनिवासियों को असुर, राक्षस, शुद्र, दैत्य या दानव कहा गया है यह बात प्रमाणित है और इस बात के बहुत से सबुत भी है। भारत के बहुत से लेखकों ने इस बात को कई बार प्रमाणित किया है। यहाँ तक डॉ भीम राव अम्बेडकर ने भी अपनी किताबों में इस बात को प्रमाणित किया है। एक सबुत यह भी है कि देव अब ब्राह्मण कैसे हो गये? दीर्घकाल तक मूलनिवासियों को गुलाम बनाने के लिए ब्राह्मणों ने वर्ण व्यवस्था स्थापित की। मूलनिवासियों को शुद्र घोषित किया गया। क्रमिक असमानता में ब्राह्मणों, राजपूतों और वैश्यों को अधिकार प्राप्त है, मूलनिवासी शूद्रों को कोई अधिकार नहीं दिया गया। मूलनिवासियों को भी अधिकार होना चाहिए था मगर उनको शुद्र बना कर सभी अधिकारों से वंचित कर दिया गया। ऐसा क्यों किया गया? खुद को सर्वश्रेष्ठ साबित करने के लिए, ताकि मूलनिवासी हमेशा शुद्र बने रहे और बिना किसी युद्ध के ब्राह्मणों, राजपूतों और वैश्यों के गुलाम बने रहे।

ब्राह्मण, राजपूत और वैश्य अगर एक है तो उन्होंने अपनों को तीन हिस्सों में क्यों बंटा? मूलनिवासियों को हमेशा के लिए गुलाम बनाने के लिए व्यवस्था बनाना जरुरी था। संस्कृत में वर्ण का अर्थ होता है रंग। तो वर्णव्यवस्था का अर्थ है रंगव्यवस्था। संस्कृत के शब्दकोष में आपको आज भी वर्ण का अर्थ रंग ही मिलेगा। ये रंगव्यवस्था/वर्णव्यवस्था क्यों? क्योकि ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्यों का रंग तो एक ही है। इसीलिए रंगव्यवस्था में ये तीनों वर्ण अधिकार सम्पन है। चौथे रंग का आदमी उनके रंग का नहीं है। इसीलिए अधिकार वंचित है। DNA की वजह से विश्लेषण करना संभव है। नस्लीय भेदभाव की विचारधारा का नाम ही ब्राह्मणवाद है। वर्णव्यवस्था के द्वारा ही गुलाम बनाना और दीर्घ काल तक गुलाम बनाये रखना ब्राह्मणों के लिए संभव हो पाया।

ब्राह्मणों ने सभी धर्मशास्त्रों में महिलाओं को शुद्र क्यों घोषित किया? ये आज तक का सबसे मुश्किल सवाल था, ब्राह्मणों ने अपनी माँ, बहन, बेटी और पत्नी तक को शुद्र घोषित कर रखा है। DNA में MITOCONDRIVAL DNA के आधार पर ये सच सामने आया कि भारत की सभी महिलाओं का DNA 100% एक है और भारत की महिलाओं का DNA किसी भी विदेशी महिला के DNA से नहीं मिलाता। इस से साबित हो जाता है कि भारत की सभी महिलाये मूलनिवासी है, इसीलिए ब्राह्मणों ने अपनी माँ, बहन, बेटी और पत्नी तक को शुद्र घोषित कर रखा है। ब्राह्मण, राजपूत और वैश्य जानते है कि उन्होंने केवल प्रजनन के लिए महिलाओं का उपयोग किया है। इसीलिए भी अपनी माँ, बेटी और बहन को शुद्र घोषित कर रखा है। ब्राह्मण हमेशा शुद्धता की बात करता है। ब्राह्मण जानता है कि आदमी का DNA सिर्फ आदमी में स्थानांतरित होता है, इसीलिए ब्रहामण स्त्री को पाप योनी मानता है। क्योकि वो उनकी कभी थी ही नहीं। DNA और धर्मशास्त्र दोनों के आधार पर ये बात सिद्ध की जा सकती है। इससे ये भी साबित हुआ कि आर्य ब्राह्मण स्थानांतरित नहीं हुए, आर्य आक्रमण करने के उद्देश्य से भारत में आये थे। क्योकि जो आक्रमण करने आते है वो अपनी महिलाओं को कभी अपने साथ नहीं लाते। ऐसी उस समय की मान्यता थी इसीलिए आज भी आर्यों का स्वाभाव आज तक वैसा ही बना हुआ है।
बुद्ध ने वर्णव्यवस्था को समाप्त किया। हमारे गुलामी के विरोघ में लड़ाने वाला सबसे पुराना और बड़ा पूर्वज था। इसका मतलब ये है कि वर्णव्यवस्था बुद्ध के काल में भी थी। यह बात प्रामाणिक है कि इस जन आंदोलन में बुद्ध को मूलनिवासियों ने ही सबसे जयादा जन समर्थन दिया। जैसे ही वर्णव्यवस्था ध्वस्त हुई तो चतुसूत्री पर आधारित नई समाज रचना का निर्माण हुआ। उसमें समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय पर आधारित समाज की व्यवस्था की गई।
इस क्रांति के बाद प्रतिक्रांति हुई, जो पुष्यमित्र शुंग(राम) ने बृहदत की हत्या करके की। वाल्मीकि शुंग दरबार का राजकवि था और उसने पुष्यमित्र शुंग और बृहदत को सामने रख कर ही रामायण लिखी। इसका सबुत वाल्मीकि रामायणमें है। बृहदत की हत्या पाटलिपुत्र में हुई थी, पुष्यमित्र शुंग की राजधानी अयोध्या में थी। रामायण के अनुसार राम की राजधानी भी अयोध्या में थी। पुरातात्विक प्रमाण है, कोई भी राजा अपनी राजधानी का निर्माण करता है तो उस जगह को युद्ध में जीतता है, फिर अपनी राजधानी बनाता है। मगर अयोध्या युद्ध में जीत गई राजधानी नहीं थी। इसिलए उसका नाम रखा गया अयोध्या अर्थात अ+योद्ध्या; युद्ध में ना जीत गई राजधानी। पुष्यमित्र शुंग ने अश्वमेध यज्ञ किया, रामायण में राम ने भी अश्वमेध यज्ञ किया।
पुष्यमित्र ने जो प्रतिक्रांति की इसके बाद भारत में जाति व्यवस्था को स्थापित किया गया। पहले गुलाम बनाने के लिए वर्णव्यवस्था और प्रतिक्रांति के बाद मूलनिवासी हमेशा गुलाम बने रहे, उसके लिए जाति व्यवस्था का निर्माण किया गया। मूलनिवासियों का प्रतिकार हमेशा के लिए खत्म करने के लिए विदेशी आर्यों ने योजना बना कर सभी मूलनिवासियों को अलग अलग 6743 जातियों में बाँट दिया। जिससे मूलनिवासियों में एक मानसिक स्थिति पैदा हो गई कि हम प्रतिकार करने योग्य नहीं रह गये। गुलामों में ही ऐसी मानसिक स्थिति होती है।
ब्राह्मणों ने जातिव्यवस्था को क्रमिक असमानता पर खड़ा किया गया। असमान लोग एक होने चाहिए थे लेकिन ब्राह्मणों ने असमान लोगों को भी क्रमिक असमानता में विभाजित किया। प्रतिकार अंदर ही अंदर होता है। लेकिन जिसने गुलामी लादी उसका प्रतिकार करने का ख्याल भी मन में नहीं आता क्योकि ब्राह्मणों ने मूलनिवासियों में जाति पर आधारित लड़ाईयां करवाना शुरू कर दिया। जिससे मूलनिवासी आपस में ही लड़ने लगे और उन्होंने असली गुलामी लादने वाले का प्रतिकार करना बंद कर दिया। DNA शोध सिद्ध करता है कि जाति/वर्ण व्यवस्था का निर्माणकर्ता ब्राह्मण है उसने सभी को विभाजित किया लेकिन खुद को कभी विभाजित नहीं होने दिया।
जाति के साथ ब्राह्मणों की सर्वोच्चता जुडी हुई है। इसलिए ब्राह्मणों के सामने हमेशा संकट खड़ा रहा कि इस व्यवस्था को कैसे कायम रखा जाये। जाति प्रथा को बनाये रखने के लिए ब्राह्मणों ने निम्न परम्पराओं और प्रथाओं का विकास किया;
कन्यादान परम्परा कन्या कोई वस्तु नहीं है जिसका दान किया जाये। लेकिन ब्राह्मणों ने बड़ी चालाकी के साथ धर्म का प्रयोग करते हुए, ऐसी व्यवस्था बनाई कि जब कन्या शादी योग्य हो जाये तो उसकी शादी की जिमेवारी माँ-बाप की होगी। माँ-बाप कन्या की शादी ब्राह्मणों द्वारा स्थापित ब्राह्मण सामाजिक व्यवस्थाके अनुसार ही करेंगे। अगर लडकी जाति से बाहर अपनी पसंद से शादी करेगी तो जाति व्यवस्था समाप्त हो जायेगी और ब्राह्मणों की सर्वोच्चता समाप्त हो जायेगी। ऐसे तो मूलनिवासियों की गुलामी समाप्त हो जायेगी, ये नहीं होना चाहिए इसीलिए ब्राह्मण सामाजिक व्यवस्थास्थापित करके कन्यादान की प्रणाली विकसित की गई।
बाल विवाह प्रथा लडकी विवाह योग्य होने पर अपनी पसंद से शादी कर सकती है और उस से जातिव्यवस्था समाप्त हो सकती है तो उसके लिए बालविवाह व्यवस्था को स्थापित किया गया। ताकि बचपन में ही लडकी की शादी कर दी जाये। क्योकि माँ-बाप तो अपनी ही जाति में लडकी की शादी करवाएंगे और मूलनिवासी गुलाम के गुलाम ही बने रहेंगे। ज्यादा जानकारी के लिए CAST IN INDIA और ANHILATION OF CASTE किताबे पढ़े, जो डॉ. भीम राव अम्बेडकर ने लिखी है।
विधवा विवाह प्रथा विधवा विवाह निषेध कर दिया गया। अगर कोई विधवा किसी विवाह योग्य लडके से शादी कर लेती है तो समाज में एक लड़का कम हो जायेगा, और जिस लडकी के लिए लड़का कम होगा वो लडकी जाति से बाहर जा कर शादी कर सकती है। इससे भी जाति प्रथा को खतरा था तो विधवा विवाह भी निषेध कर दिया गया था। जाति अंतर्गत विवाह जाति बनाये रखने का सूत्र है और जाति व्यवस्था वनाये रखने के लिए महिलाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इस व्यवस्था को बनाये रखने के लिए विधवाओं पर मन मने अत्याचार होते थे। ब्राह्मणों ने देखा कि विधवा को टिकाये रखना संभव नहीं है तो विधवाओं के लिए नए क़ानून बनाये गये। विधवा सुन्दर नहीं दिखनी चाहिए इसलिए उनके बाल काट दिए जाते थे। कोई उनकी ओर आकर्षित ना हो जाये इसलिए उनको साफ़ सफाई से रहने का अधिकार नहीं था। ताकि कोई उनके साथ शादी करने को तैयार ना हो जाये। यानी किसी भी स्थिति में जातिव्यवस्था बनी रहनी चाहिए।
सतीप्रथा ब्राह्मणों ने विधवा औरतों से निपटने और जाति व्यवस्था को बनाये रखने के लिए दूसरा रास्ता सती प्रथा निकला। धर्म के नाम पर औरतों में गौरव भाव का निर्माण किया। जैसे कि मरने वाली स्त्री सचे चरित्र, पतिव्रता और पवित्र है इसीलिए सती है। जो स्त्री सची है उसे अपने पति की चिता में जिन्दा जल जाना चाहिए। स्त्रियों में गौरव की भावना का निर्माण करने के लिए बडसावित्री नाम की प्रथा को जन्म दिया गया। ब्राह्मणों ने जितने भी घटिया काम किये उन पर गर्व किया। और महिलाये बिना सच को जाने अपनी जान देती रही।
बडसावित्री संस्कार भी बहुत योजनाबढ तरीके से बनाया गया है। इस में औरत हाथ में धागा लेकर चक्कर कटती है और कहती है यही पति मुझे अगले सात जन्मों तक मिलाना चाहिए, यह शराबी है, मुझे मारता पिटता है, मेरे पर अत्याचार करता है, फिर भी मुझे यही पति मिलाना चाहिए।यह ब्राह्मणों का एक बहुत गहरा षड्यंत्र है, यह त्यौहार हर साल आता है। हर साल स्त्रियों के मन में यह संस्कार डाला जाता है। यही पति तुम को मिलाने वाला है और कोई नहीं मिलेगा और अगर तुम जिन्दा रहती हो तो जब तक जिन्दा रहोगी तब तक तुम्हारे पुनर्मिलन में बहुत देरी हो जायेगी। अगर तुम अपने पति के साथ चिता पर मर जोगी तो एक ही तारीख में, एक ही समय में, एक साथ पैदा हो जाओगी, पुनर्जन्म हो जायेगा। फिर दोनों का मिलन भी हो जायेगा। ब्राह्मणों ने यह योजना जाति व्यवस्था को बनाये रखने के लिए बनाई। जैसे कोई चोर यह नहीं कहता कि में चोर हूँ; यही हाल ब्राह्मणों का है। जन्म जन्म का काल्पनिक सिद्धांत बना कर स्त्रियों पर मन चाहे अत्याचार किये गये ताकि जातिव्यवस्था बनी रहे।
क्रमिक असमानता जाति बंधन डालने के बाद उसे बनाये रखना संभव नहीं था। गुलाम को गुलाम बनाये रखने के लिए हर किसी के ऊपर किसी को रखना ही इस समस्या का समाधान था। सारे मूलनिवासी आपस में लड़ते रहे, मूलनिवासी कभी ब्राह्मणों के खिलाफ खड़े ना हो जाये। इसीलिए ब्राह्मणों ने मूलनिवासियों को ऊँची और नीची जातियों में बाँट दिया। उंच नीच की भावना मानवता की भावना को खत्म कर देती है। इसीलिए ब्राह्मणों ने क्रमिक असमानता के साथ जाति व्यवस्था का निर्माण किया है। और आज भी हर मूलनिवासी जाति और धर्म के नाम पर लड़ता रहता है और ब्राह्मण मज़े से तमाशा देख कर हँसता है।
अस्पृश्यता जातिव्यवस्था बुद्ध पूर्व काल में नहीं थी इसीलिए उस समय के साहित्य में जाति या वर्ण व्यवस्था का वर्णन नहीं आता। इसीलिए यह भ्रान्ति फैली हुई है जिन बौद्धों ने ब्राह्मण धर्म का अनुसरण किया, और ब्राह्मणों ने जिन बौद्धों को अपना लिया वो आज के समय में ओबीसी में आते है। उन पर आज भी ब्राह्मणों का प्रभाव है जिसके कारण ओबीसी में आने वाले लोग दूसरे मूलनिवासियों से अपने आप को उच्च समझते है। ओबीसी भी पुष्यमित्र शुंग की प्रतिक्रांति के बाद बनाया गया मूलनिवासी लोगों का समूह है।
सिंधु घाटी की सभ्यता पैदा करने वाले भारतीय लोगो से इतनी बड़ी महान सभ्यता कैसे नष्ट हुई,जो 4500-5000 ईसा पूर्व से स्थापित थी?ये इंग्रेजो ने पूछा था, एक अंग्रेज अफसर को इस का शोध करने के लिए भी बोला गया था। बाद में इसके शोध को राघवन और एक संशोधक ने शुरू किया। पत्थर और ईंटों के परिक्षण में पता चला कि ये संस्कृति अपने आप नहीं मिटी थी। बल्कि सिंधु घटी की सभ्यता को मिटाया गया था। दक्षिण राज्य केरल में हडप्पा और मोहनजोदड़ों 429 अवशेष मिले। ब्राम्हण भारत में ईसा पूर्व 1600-1500 शताब्दी पूर्व आया।
ऋग्वेद में इंद्र के संदर्भ में 250 श्लोक आतें हैं। ब्राह्मणों के नायक इन्द्र पर लिखे सभी श्लोकों में यह बार बार आता है कि हे इंद्र उन असुरों के दुर्ग को गिराओं” “उन असुरों(बहुजनों) की सभ्यता को नष्ट करो। ये धर्मशास्त्र नहीं बल्कि ब्रहामणों के अपराधों से भरेदस्तावेज हैं।
भाषाशास्त्र के आधार पर ग्रिअरसन ने भी ये सिद्ध किया की अलग-अलग राज्यों में जो भाषा बोली जाती हैं,वो सारी भाषाओँ का स्त्रोतपाली है।
DNA के परिक्षण से प्राप्त हुआ सबूतनिर्विवाद और निर्णायक है। क्योकि वो किसी तर्क या दलील पर खड़ा नहीं किया गया है। इस शोध को विज्ञान के द्वारा कभी भी प्रमाणित किया जा सकता है। विज्ञान कोई जाति या धर्म नहीं है। इस शोध को करने वाले पूरी दुनिया से 265 लोग थे। बामशाद का यह शोध 21 मई 2001 के TIMES OF INDIA में NATURE नामक पेज पर छपा, जो दुनिया का सबसे ज्यादा वैज्ञानिक मान्यता प्राप्त अंक है।
बाबासाहब आंबेडकर की उम्र सिर्फ 22 साल थी जब उन्होंने विश्व का जाति का मूलक्या है, इसकी खोज की थी। और 2001 में जो DNA परिक्षणहुआ था, बाबासाहब का और माइकल बामशाद का मत एक ही निकला था।
ब्राम्हण सारी दुनिया के सामने पुरे बेनकाबहो चुके थे। फिर भी ब्राह्मणों ने अपनी असलियत को छुपाने के लिए अपनी ब्रह्माणी सिद्धांत को अपनाया और ऐसा प्रचारित किया कि भारत में दक्षिणी ब्राह्मण दो नस्लों के होते है। ब्राह्मणों ने DNA के परिक्षण को पूरी तरह ख़ारिज नहीं किया और एक और झूठ मीडिया द्वारा प्रचारित करना शुरू कर दिया कि अब कोई मूलनिवासी नहीं है सभी लोग संमिश्र हो चुके है। उन्होंने कहा मापदंड ढूंढा? ब्राह्मणों ने दलील देकर कहा कि अन्डोमान और निकोबार द्वीप समूह की जो आदिवासी जनजाति है वो अफ्रीकन के वंशज है, वो उधर से आया था, और यूरेशियन देशों में चला गया है, इस पर भी शोध होना चाहिए। बामशाद के द्वारा किये गये शोध को नकारने के लिए ब्राह्मणों ने सिर्फ विज्ञान शब्द का प्रयोग किया और उसे झूठा प्रचारित किया। ब्राह्मण अगर यह झूठी कहानी सुनाये तो उस से पूछो कि दोनों ब्राह्मण नस्लों में से विदेश से कौन आया है? विदेशी का DNA बताओ? DNA के आधार पर ब्राह्मण अपनी बातों को सिद्ध नहीं कर सकता।
ब्राह्मण मुसलमान विरोधी घृणा आंदोलन क्यों चलता है?
क्योकि ब्राह्मणवाद और बुद्धिज्म के टकराव के समय बहुत से बौद्धिष्ट मुसलमान बन गये थे उन्होंने ब्राह्मण धर्म को नहीं अपनाया था। ब्राह्मण जनता है कि आज भारत में जितने भी मुसलमान है वो सब मूलनिवासी है इसीलिए ब्राह्मण मुसलमानों के खिलाफ घृणा का आंदोलन चलता रहता है ताकि ब्राह्मण किसी भी तरह मूलनिवासियों की एक शाखा को पूरी तरह खत्म कर सके।
अंग्रेजों के गुलाम ब्राह्मण था और उनके गुलाम मूलनिवासी थे। आज़ादी की जंग में आज़ादी के लिए आंदोलन करने वाले लोगों के सामने यह सबसे बड़ी समस्या थी। इसीलिए डॉ. भीम राव अम्बेडकर ने अंग्रेजों को कहा कि ब्राह्मणों को आज़ाद करने से पहले मूलनिवासी बहुजनों को जरुर आज़ाद कर देना चाहिए। अगर ब्राह्मण मूलनिवासियों से पहले आज़ाद हो गया तो ब्राह्मण मूलनिवासियों को कभी आज़ाद नहीं करेगा। ये आशंका सिर्फ डॉ. भीम राव अम्बेडकर के मन में ही नहीं थी बल्कि मुसलमान नेताओं के मन में भी थी। इसीलिए 14 अगस्त को पाकिस्तान बना। मुसलमानों ने अंग्रेजों को कहा कि गाँधी से एक दिन पहले हमे आज़ादी देना और हमारे बाद गाँधी को देना। अगर तुमने पहले गाँधी को आज़ादी दे दी तो गाँधी बनिया है हमको कुछ नहीं देगा। ब्राह्मणों ने अपनी आज़ादी की लड़ाई मूलनिवासियों को सीडी बनाकर लड़ी और वो अंग्रेजों को भगा कर आज़ाद हो गये।

DNA संशोधन से सामने आया कि ब्राह्मण, राजपूत और वैश्य भारत के मूलनिवासी नहीं है। व्यवहारिक रूप से भी देखा जाये तो ब्राह्मणों ने कभी भारत को अपना देश माना भी नहीं है। ब्राह्मण हमेशा राष्ट्रवाद का सिद्धांत बताता आया है लेकिन खुद कितना देशभक्त है ये बात किसी को नहीं बताता। इसका मतलब एक विदेशी गया और दूसरा विदेशी मालिक हो गया, DNA ने सिद्ध कर दिया। दूसरे विदेशी ब्राह्मणों ने ये प्रचार किया कि भारत आज़ाद हो गया। लेकिन आज भी भारत पर आज भी ब्राह्मणों का राज है। इससे यह साबित होता है कि मूलनिवासियों को भविष्य में आज़ादी हासिल करने का कार्यक्रम चलाना ही पड़ेगा। DNA परिक्षण के आधार पर यह भी कहा जा सकता है कि आज भी देश के 130 करोड में से 32 करोड लोग बाकि 98 करोड़ लोगों पर राज कर रहा है। कल्पना करो कितना मुलभुत और महत्वपूर्ण संशोधन है।


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