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Saturday, 11 March 2017

यु पी चुनाव रिजल्ट लोकतंत्र पर सबसे बड़ा आतंकी हमला : दलित ओ बे सी का प्रतिनिधित्व खत्म करने के लिए रचा गया षड्यंत्र

जन उदय : यु पी चुनाव के रिजल्ट ने सबको चोंका दिया है वह भी इसलिए जिस तरह चुनाव का रसुल्ट आया है उसने एक इतिहासिक  जीत हुई है बी जे पी की जो किसी  भी एंगल  से हो ही नहीं सकती  थी  इस चुनाव में बी जे पी को ३२० से ज्यादा सीट मिली है  जो बिना किसी ई वी एम् के घोटाले के हो ही नहीं सकती  थी

चुनाव के रिजल्ट  के ट्रेंड को देखते ही इस बात पर बहन मायावती ने सवाल खड़ा  कर दिए  थे  की ई वी एम् मशीन में गड़बड़ी है  और चुनाव के अंत तक आते आते   अखिलेश ने भी सी बात को बोल दिया की ई वी एम् मशीन  की जांच की जाए

 हालांकि यह पहली बार ऐसा नहीं हुआ है की जब बी जे पी ने इस गड़बड़ी  को अंजाम  दिया है इससे पहले लोकसभा  चनाव में भी अब यह कहा जा रहा था की मोदी लहर आ गई  है तब भी ई वी में मशीन में गड़बड़ी  की बात कही गई  थी   लेकिन सभी ने कही न कही इस बात को स्वीकार कर लिया था की हो सकता है रिजल्ट मोदी लहर  के कारण रहे हो . लेकिन  अब जब मोदी लहर की कोई बात नहीं बल्कि   मोदी  नाम का  बुलबुला फूट  चुका है  और मोदी  एक नमबर का मूर्ख  प्रधनमंत्री  साबित हो चुका है   जबकि अंदरूनी  तौर  पर कई  नेता मोदी के पक्ष में नहीं है  और यहाँ तक की संघ में भी यह बात  चल चुकी है की अगर यु  पी चुनाव हारे तो मोदी  की जगह प्रकाश  जावेडकर  को प्रधानमन्त्री  बनाया जा सकता है

इस चुनाव में लोक सभा चुनाव की तरह संघ ने अपनी पूरी ताकत  झोंक दी  थी लेकिन  यु पी के वोटर  पैटर्न को देख  यह बात हो ही नहीं सकती  की मुस्लिम भी वोट  दे  मोदी  को  वो भी वो मोदी जो दंगे करवाता है  खासकर मुस्लिम समुदाय  के खिलाफ रहता है   और रहा मोदी  के विकास की बात  तो यह बात  तो देश के बच्चे  बच्चे  को समझ आ चुका है  की मोदी एक नम्बर  का फेंकू  है और इसके शासन काल में देश पूरी दुनिया में बदनाम हुआ है   और  गरीबी , महंगाई  बे-तहाशा  बड़ी  है  और मोदी के पास अब कोई चारा  नहीं है  ऐसे में लोग  मोदी की बातो  का विशवास करेंगे  , यह बहुत मुस्किल  है क्योकि मोदी वो इंसान है ज जिसके आते ही  दलित  उत्पीडन बड़ा है दलित  हत्याए हुई   लोगो  के बोलने की आजादी  कह्तं हुई  हिंसा बड़ी  गो-आतंक  बड़ा  मुस्लिम  के दिलो  दिमाग में डर  बड़ा  इसे में मोदी को सपोर्ट  सिर्फ एक सपना है

यु पी देश का सबसे बड़ा राज्य जहा सबसे जयादा लोकसभा की सीट  है    और ये सीट  दिल्ली का रास्ता  खलती है ऐसे में  ऐसे राज्य पर दलित –ओ बी सी  का कब्जा रहे   यह इनम मनुवाडियो  को मंजूर नहीं था इसलिए  सबने मिलकर इन दलित  ओ बी सी को  बाहर  करना अपना मकसद बनाया  इसमें सभी  राजनितिक  दल  , जो की ब्राह्मणवादी  है  , सारे  पूंजीपति , और   मीडिया संस्थान लामबंद  हुए  और जिसका नतीजा यही निकला जो आज हमारे सामने है



मनुवादी  संघी सरकार जो इस देश के कभी नहीं हुए  इनका पूरा इतिहास  इस देश से गद्दारी  का है  ये आज  देशभक्ति के नाम पर लोगो  को बेवकूफ बनाने  लगे लेकिन कामयाब कभी नहीं  हुए

यु पी में समाजवादी  और बहुजन समाजवादी  पार्टी ने अपना घेरा  बना रखा था ताकि ये लोग अपने लोगो का विकास कर सके  और इस घेरे को तोड़ने में  ये लोग कभी कामयाब नहीं हुई . मनुवादियो ने अपने इतिहास से सीख कर  जैसे महिस्ससुर   , रावण  को मारा गया जसी  तरह इनकी कहानिओ में बाली  को मारा गया  आज बहुजन  समाज फिर इनके षड्यंत्र  का शिकार हो गया है  .

संघियो  के ये ब्यान की इस बार सबने धर्म जाति  से परे  भाजपा को वोट  दिया है  जो कि एक कोरी बकवास है जो लोग खुद जातिवाद  के जनक  है पोषक  है  रक्षक  है  जो खुद दंगे  करवाते  है  उनके मूह  से ये बात  शोभा  नहीं  देती

पांच वाले पांच सालो में इन दलित –ओ बी सी के लोगो  को सबसे पहले ई वी एम् मशीन का विकल्प  देखना है  और  इनके खिलाफ अपने प्रचार को जारी रखना है , इसके आलावा   वैक्लपिक   संचार वाव्य्स्था  तैयार  करनी है   

दलित बहुजन  इस हार से उदास न होकर  इससे  सीख ले   क्योकि लोकतंत्र  का यह पर्व  फिर आएगा  यही  इसकी ख़ूबसूरती  है की  ये दानवो  को जयादा वक्त नहीं देता  और देवताओं  को  भी  धुल  चटा  देता है  है 

Thursday, 2 March 2017

एच डी ऍफ़ सी एर्गो की खुले आम लूट पैसे लेंगे , पालिसी चलायंगे ,लेकिन क्लेम नहीं देंगे

जन उदय : क्या पाने कभी सूना है की कोई इन्सुरेंस कम्पनी  या मेडिक्लेम कम्पनी यह कहे आप हमारी पालिसी ले लीजिये  हमें पैसे दीजिये लेकिन जब आपको  जरूरत पड़ेगी  तो हम आपको आपके पैसे देने  के बजाय  दिखायंगे   ठेंगा ??  जी  हाँ यही काम कर रहा है एच डी ऍफ़ सी एर्गो 

ऐसा ही किस्सा गाजिअबाद के वैशाली में स्थित पारस हस्पताल से सामने आया है जहा पर राज रानी नाम की महिला अपने इलाज के लिए अपनी मेडिक्लेम पालिसी ले कर पहुची . पालिसी देखने के बाद हस्पताल ने उसका इलाज शुरू कर दिया क्योकि वो जिस बिमारी का इलाज कर रहे थे वो बिमारी पालिसी के दायरे में आती थी और तीन साल पुरानी भी थी ,

लेकिन हद तो तब हो गई की इलाज करने के बाद पारस हस्पताल ने राज रानी के हाथ में ५२ हजार रूपये का बिल थमा दिया यह कह कर की एच डी ऍफ़ सी ने यह कह कर मना कर दिया है क्योकि  आपको थाइराइद की बिमारी भी है जिसका जिक्र आपने तीन साल पहले पालिसी लेते वक्त जिक्र नहीं किया था

इस पर राजरानी ने कहा की यह तो वह बिमारी ही नहीं है जिक्सा इलाज चल रहा है इलाज सिस्ट का है इसका थाईराइड से क्या मतलब लेकिन एच डी ऍफ़ सी के एर्गो ने यह कह कर राज रानी को मेडिक्लेम पास नहीं किया क्योकि उसमे उसने झूट बोला था .,

इस पर राजरानी ने कहा की हमने कोई झूट नहीं बोला क्योकि  हमसे यह तो पूछा  ही नहीं गया  था कि  आपको कोई ऐसी बिमारी  जो  लम्बे समय से चल  रही है या नहीं बल्कि यह पूछा गया की  आपका कोई एक्सीडेंट  या आपको ब्लड  प्रेशर , या हाइपर टेंसन तो नहीं  है , जिसकी रिकॉर्डिंग  भी एच डी ऍफ़ सी के पास मौजूद  है  और रही बात स्वास्थ सम्बन्धी  शिकायत की  तो खांसी  बुखार , फ्लू  झुकाम तो सबको  लगा रहता है तो  क्या इसकी  भी  जानकारी  देनी  चाहिए  थी  और अगर जरूरी   था यह  तो साफ़  साफ़ खोल  कर  क्यों  नहीं पूछा  गया , क्योकि  यह काम कम्पनी का था

जब राज रानी ने यह पूछा और कहा की अगर मुझसे गलती हुई तो आपने पालिसी देने से पहले इस बात की जांच क्यों नहीं की मैंने सच बोला है या झूट यानी एक टेस्ट जिसमे सारी बिमारी का पता चले इसको आवश्यक क्यों नहीं किया ??? इसका एच डी ऍफ़ सी के पास बिलकुल नहीं था , जिस बिमारी के इलाज के लिए क्लेम माँगा गया वो पालिसी में कवर है लेकिन फिर भी मेडिक्लेम नहीं दिया गया


राजरानी की घटना २० फरवरी २०१७ की है लेकिन इससे पहले हजारो ऎसी घटनाए होती रहती है कि जब लोग अपनी मेडिक्लेम पालिसी का क्लेम मांगते है उस वक्त एच डी ऍफ़ सी एर्गो और बैंक उनके क्लेम को मना रा देते है यानी यह एक तरह की अप्रत्यक्ष लूट और फ्रोड है जिसके जरिये ये लोगो को बेवकूफ बना कर पालिसी बेच देते है ...
इसके  बाद  राजरानी ने एच  डी ऍफ़ सी एर्गो   से पूछा  की अब मेरी पालिसी  का क्या होगा ??  तो एच डी ऍफ़ सी एर्गो  का जवाब था  की पालिसी  आपकी चलती  रहेगी ... एच डी  ऍफ़ सी की यह बात एक बहुत बड़े घोटाले  की तरफ  इशारा करती  है  की अगर आप कोई क्लेम देंगे  ही नहीं  तो  आप पालिसी  चलायंगे  ही क्यों ??? और आप  लोगो  से पैसे लेंगे  ही क्यों ??? बात  साफ़ है  मेडिक्लेम   और जनरल  इन्सुरेंस  के नाम  पर देश में बहुत बड़ा  घोटाला चल रहा है जो  हजारो  करोड़ का है  जिसे सरकारी  तंत्र  की शय  हांसिल है . मीडिया  या सरकार इसलिए कोई कार्यवाही  नहीं करते क्योकि  इन कम्पनियो  के माध्यम  से   करोडो  का विज्ञापन   और  चन्दा  मिलता है

हालांकि यह कोई पहली और आखिरी घटना नहीं है एच डी ऍफ़ सी की वजह से लाखो लोग परेशान घूम रहे है लेकिन न तो सरकार और न ही अपने आपको राष्ट्रवादी बताने वाला मीडिया इस पर कुछ बोल रहा है


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Thursday, 23 February 2017

एच डी ऍफ़ सी एर्गो मेडिक्लेम के नाम पर कर रहा है खरबों घोटाला , नहीं मिलता लोगो को क्लेम

जन उदय : एच डी ऍफ़ सी बैंक के बारे में जन उदय पहले ही यह बता चुका है की कैसे आपके बैंक अकाउंट से एच डी ऍफ़ सी बैंक पैसे चुरा कर हर साल खरबों का घोटाला करता है , जन उदय ने इसके कई सबूत सरकार और बैंक के समक्ष रखे लेकिन चूँकि बैंक को मंत्रियो की शय हांसिल है और मीडिया का सहयोग क्योकि ये लोग मीडिया में अरबो रूपये के हर साल विज्ञापन देते है इसलिए मीडिया कभी भी एच डी ऍफ़ सी बैंक के खिलाफ कोई रिपोर्ट दिखाते ही नहीं है

अब जन उदय क सामने एच डी ऍफ़ सी के कई ऐसे मामले आये है जिसे यह साबित होता है कैसे एच डी ऍफ़ सी बैंक मेडिक्लेम के नाम पर करोडो लोगो की मेहनत की कमाई को चट कर जाता है वह भी इस बात की झूटी उम्मीद देकर की कभी व्यक्ति को बिमारी में जरूरत हुई तो मेडिक्लेम से उस व्यक्ति को दवाई और अस्पताल का खर्चा देगा लेकिन असल में ऐसा होता नहीं है
एक आंकड़े के अनुसार हर साल सिर्फ मेडिक्लेम से खरबों रूपये लोगो से वसूल कर लेता है लेकिन जितने लोग जब अपनी इस मेडिक्लेम पालिसी का फायदा उठाना चाहता है तो बैंक किसी ने किसी बहाने से क्लेम को मना कर देता है

ऐसा ही किस्सा गाजिअबाद के वैशाली में स्थित पारस हस्त्प्ताल से सामने आया है जहा पर राज रानी नाम की महिला अपने इलाज के लिए अपनी मेडिक्लेम पालिसी ले कर पहुची . पालिसी देखने के बाद हस्पताल ने उसका इलाज शुरू कर दिया क्योकि वो जिस बिमारी का इलाज कर रहे थे वो बिमारी पालिसी के दायरे में आती थी और तीन साल पुरानी भी थी ,
लेकिन हद तो तब हो गई की इलाज करने के बाद पारस हस्पताल ने राज रानी के हाथ में ५२ हजार रूपये का बिल थमा दिया यह कह कर की एच डी ऍफ़ सी ने यह कह कर मना कर दिया है की आपको थाइराइद की बिमारी भी है जिसका जिक्र आपने तीन साल पहले पालिसी लेते वक्त जिक्र नहीं किया था


इस पर राजरानी ने कहा की यह तो वह बिमारी ही नहीं है जिक्सा इलाज चल रहा है इलाज सिस्ट का है इसका थाईराइड से क्या मतलब लेकिन एच डी ऍफ़ सी के एर्गो ने यह कह कर राज रानी को मेडिक्लेम पास नहीं किया क्योकि उसमे उसने झूट बोला था .
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जब राज रानी ने यह पूछा और कहा की अगर मुझसे गलती हुई तो आपने पालिसी देने से पहले इस बात की जांच क्यों नहीं की मैंने सच बोला है या झूट यानी एक टेस्ट जिसमे सारी बिमारी का पता चले इसको आवश्यक क्यों नहीं किया ??? इसका एच डी ऍफ़ सी के पास बिलकुल नहीं था , जिस बिमारी के इलाज के लिए क्लेम माँगा गया वो पालिसी में कवर है लेकिन फिर भी मेडिक्लेम नहीं दिया गया

राजरानी की घटना २० फरवरी २०१७ की है लेकिन इससे पहले हजारो ऎसी घटनाए होती रहती है कि जब लोग अपनी मेडिक्लेम पालिसी का क्लेम मांगते है उस वक्त एच डी ऍफ़ सी एर्गो और बैंक उनके क्लेम को मना रा देते है यानी यह एक तरह की अप्रत्यक्ष लूट और फ्रोड है जिसके जरिये ये लोगो को बेवकूफ बना कर पालिसी बेच देते है ...

अगर मान ले की कुछ लोग झूट बोल देते है या अपनी बिमारी छिपा लेते है तो क्या यह बैंक का याबिमा कम्पनी का यह फर्ज नहीं बनता की अपने क्लाइंट की यानी जिस व्यक्ति ने मेडिक्लेम लिया है उसकी जांच करवाई जाए और यह जांच आवश्यक रूप से  में नम्बर वन है यानी २० से २५ % ही क्लेम पास करता है और वह भी उसमे कुछ चार्ज इधर उधर के बहाने बना देता ही नहीं
यह एक लूट है जिसकी शिकायत समय समय पर ग्राहक फोरम में चलहो ..

एक आंकड़े के अनुसार एच डी ऍफ़ सी मेडिक्लेम के लिए मना करने रहे है लेकिन सरकार और मंत्री कोई कार्यवाही नहीं करते क्योकि उनकी सरकारों को अप्रत्यक्ष रूप से करोडो का चंदा या फायदे इनको मिलते है

लोगो को भी चाहिए की इस तरह की पालिसी लेते वक्त ऐसी कम्पनियो के इतिहास या आंकड़ो पर जरूर डाले और आंकड़े न देने पर ऐसी कम्पनी को छोड़ ही दे

एच डी ऍफ़ सी बैंक और एर्गो देश की सबसे बदनाम कम्पनियो में है यह जानकारी सबको मिलनी चाहिए इसलिए जानकार लोग सन्देश को आगे फैलाए

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Tuesday, 14 February 2017

जानिये क्यों धर्म एक भयानक समस्या है ?? , ये प्यार नहीं नफरत सिखाता है


जन उदय :  मानव इतिहास गवाह है  कि  धर्म के  नाम पर जितने कत्ल हुए उतने सत्ता के लिए लड़े गए  युद्ध में नहीं हुए  लोग कहते है धर्म मानवता सिखाता है प्यार सिखाता है , मेलजोल  सिखाता है  और इन्ही बातो के आधार पर अपने आपको सबसे सर्वोतम होने का दावा करते है या उसके मानने वाले ऐसा दावा  करते है
धर्म के नाम पर लड़े गए युद्ध इतिहास के काले पन्ने  है लेकिन बावजूद इसके कुछ लोग यह कह कर अपने अपने धर्म का प्रचार करते है कि उनके धर्म को गलत समझा गया है और जो लोग धर्म का नाम ले कत्ल करते है वो मुर्ख है  नासमझ  है या धर्म को जानते नहीं है , मानते जरूर है इसीलिए ये सब होता है
धर्म के नाम पर भारत में जितने साम्राद्यिक दंगे हुए है पूरी दुनिया इतने दंगे नहीं हुए है मंदिर मस्जिद के झगड़े , गुजरात दंगे , माले गाव बम ब्लास्ट , समझोता एक्सप्रेस  ब्लास्ट , आर एस एस के द्वारा हमेशा देश में तनाव पैदा किये रहना  उधर मुस्लिम युवा धर्म के नाम पर कत्ल करते है   लेकिन बावजूद इसके इनके  इन धर्मो के महंत अपने अपने धर्म को महान बताते है . अपने अपने भागवानो को सवर शक्तिमान बताते है  सबसे बड़ा  दयालु  बताते है , और अपने धर्म को सबसे जयादा सुसंस्कृत  बताते  है यानी मानवता के हित  के लिए भगवान् द्वारा भेजा गया अंतिम पैगाम  बताते  है

अब अगर इन धर्म के ठेकेदारो से ये पूछा  जाए  की क्या आपके धर्म में लोग बीमार नहीं पढ़ते है ?? क्या आपके धर्म के लोग आपस में लड़ते  नहीं है ?? क्या आपके धर्म के लोग सभी लोग आपस में भाई  चारा  प्रेम से रहते है ?? क्या आपके धर्म के लोग बुडे  नहीं होते , एक दुसरे को गाली नहीं देते  क्या आपके धर्म के लोग सबी लोग सम्पन्न  है ?? क्या आपके धर्म के  सभी लोग  अमीर है पड़े  लिखे है ???   नहीं नहीं शायद बिलकुल नहीं  इसाई , मुसलमान , आर्य  ब्राह्मण , भारत के मूल निवासी  हिन्दू    सभी  जगह   गरीबी  बेरोजगारी , अंधविश्वास  , बीमार लोग , आपस में लड़ने  मरने वाले  मौजूद है  बल्कि इस हद तक की अपने स्वार्थ के लिए माँ बेटे को मार देती है भाई , बहन को मार देता है पिता पुत्र को मार देता है और पुत्र पिता  का कत्ल  करता है
तो इसमें धर्म  ने क्या किया ??? आपके  भगवान् ने क्या किया ??? कुछ नहीं ...कुछ नहीं किया भगवान ने वो भी इसलिए क्योकि वो कुछ करने लायक ही नहीं है


अब एक बात हमको समझने की जरूरत है कि  भगवान् की  जरूरत ही किया है ?? या भगवान् को मनाया किसने ?? क्या ऐसा हो सकता है की  सर्वशक्तिमान  भगवान् केरल में जा कर कुछ और  संदेश दे कर आये   और दिल्ली में कुछ और ?? या इरान में कुछ  और कहे  स्पेन में अलग और चीन में अलग ?? यानी सबको  अलग अलग संदेश ??   मेरे ख्याल में भगावन ने ऐसा बिलकुल नहीं किया बल्कि जो लोग  धर्म के ठेकेदार है उन लोगो ने अपनी जरूरत अनुसार  ,सामाजिक समानता और एकरूपता  के लिए बना दिया और  आम आदमी के डर  का इस्तेमाल कर सके यानी आदमी  को मानसिक  रूप से गुलाम  बना सके 
अब चलिए देखते है कि धर्म के के तत्व  क्या है यानी धर्म की विशेषताए क्या है

१.       हर धर्म में एक अवतार है , यानी भगवान् के संदेश लेकर  अवतार लोग आते है
२.       धर्म का एक रंग है , यानी हर धर्म  का एक रंग है जैसे भारत के मूलनिवासियो  / हिन्दुओ का नीला , आर्य ब्राह्मणों  का भगवा  इस्लाम का हरा ,

३.       चमत्कार  हर धर्म में भगवान् चमत्कार करता है और भक्तो के कष्ट हरता  है
४.       पूजा पद्धति  , हर धर्म की पूजा पद्धति  अलग  अलग है
५.       किताब : हर धर्म की किताब है जिसमे भगवान् के संदेश है
६.       हर धर्म में कुछ करने या न करने की हिदायत , यानी धर्म के नुसार आप मांस खा सकते है या नहीं खा सकते या कुछ ख़ास तरह का ही खाना है

७.       हर धर्म में सामाजिक वाव्य्स्था  है जो सबको समान रूप से देखती है , केवल  आर्य ब्राह्मणों द्वारा लिखी किताबे ही ऐसी  है  जो ये कहती है की धर्म में उनको सबसे बड़ा  बताया है , निचले स्तर के लोगो को मारो  कत्ल  करो , महिलाओं  को भोगो , जानवर समझो और उनका  धन  छीन  लो

८.       हर धर्म में जादू  टोना  है
९.       हर धर्म में विवाह  की पद्धति  अलग अलग है  यानी महिलाओं  को सेक्स के लिए इस्तेमाल करने के तरीके
१०.   हर धर्म में व्रत, तीर्थ  यात्रा आदि सब है
११.   विशेष  प्रकार के पूजा स्थल है

तो कुल मिला कर धर्म  या भगवान ने देश समाज या दुनिया को एक नहीं किया बल्कि पूरी दुनिया को बाँट दिया है  

Wednesday, 23 November 2016

मीडिया संस्थानों ,कलाकारों और टीवी सीरियल निर्माताओ को धमका नोट-बंदी के पक्ष में प्रचार करवा रही है भाजपा

जन उदय : वैसे तो मीडिया रिपोर्टिंग से पता चल रहा है की मोदी और भाजपा के डर से सभी न्यूज़ चैनल अखबार नोट बंदी के बाद देश में हुए हालातो पर सच नहीं दिखा रहे है बल्कि जान बूझ कर ऐसी तस्वीर पेश कर रहे है मानो देश में सभी लोग मोदी के नोट बंदी के फैसले से खुश है और सब लोग उत्सव मना रहे है

कोई भी चैनल एक या दो चैनल को छोड़ यह नहीं दिखा रहा है की कितने लोग मर रहे है ,आम लोगो को कितनी परेशानी हो रही है , रोटी नहीं मिल रही है , दवाई नहीं मिल रही है इलाज नहीं हो पा रहा है बल्कि बिकायु मीडिया इन सब परेशानियो को देशभक्ति से जोड़ कर दिखा रहा है यानी कोरा झूट




भाजपा के लोग समाज के उस हर वर्ग पर प्रभाव डाल रहे है जो लोग समाज में कुछ मकाम रखते है जैसे व्यापारी संस्थाओं को धमकाया जा रहा है की वो लोग यापार मंडल की तरफ से मोदी के फैसले का स्वागत वाले पोस्टर और बैनर लगाए , सारे एन जी ओ , वकीलों , आदि

अब धीरे धीरे मोदी के गुंडों का दबदबा टीवी सीरियल और समाज में होने वाले एयर सामाजिक उत्सवो में मोदी गुणगान करने का दबाव डाला जा रहा है

स्टार प्लस , सोनी , कलर और अन्य टीवी चैनल पर आने वाले हर कार्यक्रम यानी सीरियल की स्क्रिप्ट में जबरदस्ती नोट बंदी को सही ठहराया जा रहा है , कपिल शर्मा शो आदि में और अन्य सीरियल में ये सब हो चुका है ऐसा इसलिए किया जा रहा है की इन टी सीरियल को करोड़ो लोग देखते है और इन टीवी सीरियल के जरिये लोगो को गुमराह करना आसान है , कमाल की बात यह है की १९ नवम्बर को होने वाले मुम्बई के एक रॉक कॉन्सर्ट को मोदी ने लाइव सम्बोधित किया


यह वही प्रधानमंत्री है जो संसद में सिर्फ इसलिए नहीं आ रहा ताकि देश को संसद को जवाब न देना पड़े

शील भंग करवा कर अपनी जगह बनाने वाली महिलाए तार्किक रिपोर्टिंग नहीं कर पाती, अखबार ,न्यूज़ चैनल सब एक अंडर वर्ल्ड गैंग की तरह

जन उदय : ५० के दशक में यह बहस जिन्दा थी की मीडिया झा चाहे समाज को मोड़ दे सकता है लोगो की मानसिकता को शेप कर सकता है , समाज की सोच को निर्धारित कर सकता है इसमें फिल्म ,कला न्यूज़ रिपोर्टिंग आदि सभी तरह की कला आती है . कार्ल मार्क्स ने तो यहाँ तक कहा की सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई में साहित्य / मीडिया एक हथियार का काम करता है .

लेकिन जैसे जैसे मीडिया में शोध बढ़ने लगे और संचार के फैलने यानी उसकी गति और प्रभाव पर और भी शोध हुए तो पीछे वाली भ्रान्तिया खत्म होने लगी और नयी नयी सोच सामने आने लगी और अंत में आज हम मीडिया शोध से यहाँ तक आ पहुचे है की मीडिया भ्रान्ति / प्रोपगेंडा फैलाने में एक नम्बर का हो गया है और कुल मिला कर ऐसा नहीं है की मीडिया लोगो को कुछ करने पर मजबूर कर दे बल्कि मीडिया इस तरह से भी काम करता है की समाज में ओपिनियन मेकर सूचना अपना काम करने लगते है यानी ये अफवाह भी हो सकती है .

महिलाए और दलित वर्ग के लोग बहुत चाहने पर भी इस ताकतवर माध्यम से नहीं जुड़ पा रहे है या ये कह सके है की इस माध्यम से उन्हें जानबूझ कर जुड़ने नहीं दिया जाता यानी जगह नहीं दी जाती , लेकिन बावजूद इसके बहुत सारे लोग इन मीडिया संस्थानों में अपनी जगह बनाने में कामयाब हुए है और बहुत अच्छा काम भी कर रहे है

लेकिन पिछले पन्द्रह सालो से मीडिया शेक्षिक संस्थानों में लगातार वृद्धि हुई है और साथ के साथ बहुत सारे चेंनेल और अखबार खुले है लेकिन इनकी ख़ास बात यह है की ये मीडिया संस्थान बिल्डर , और बनिया लोगो ने खोले है जिनका प्रथम उदेश्य इस माध्यम को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना और दुसरा कम से कम खर्च हो .. और

यही कारण रहा की मीडिया शेक्षिक संस्थानों से निकले ये नवयूवक पत्रकार अपनी जगह बनाने के लिए अपनी नौकरी पक्की करने के लिए वही काम करते है जो इनके बनिया आका कहते है और ये बनिया आका पोलटिकल खेमे में अपनी जगह बनाने के लिए अपनी दहशत फैलाने के लिए किसी न किसी पार्टी के लिए काम करने लगते है .और इस काम में लगे युवा युवती इनकी इस धूर्तता को अंजाम देते है



दरसल ये युवा पत्रकार जिसमे लडकिया भी शामिल है कुछ ऐसे पारिवारिक माहौल से आते है जो इलीट क्लास के होते है इसके अलावा इनका बौधिक स्तर बहुत ही कम होता है या कहिये की ये लडकिया इस तरह के काम के काबिल ही नहीं होती ,

अब इन लडकियो को चैनल इन लडकियो को लेता ही क्यों है ?? पहला ये की यह मानसिकता है की टीवी देखने वाले खबर के साथ साथ खबर देने वाली को भी देखते है यानी खूबसूरत लड़की को देखते है , लेकिन सिर्फ इतना ही काफी नहीं होता इनको लेने के लिए बड़े बड़े एडिटर भी चाहते है की खूबसूरत लड़की साथ रहे और जरूरत पड़े तो इस्तेमाल कर सके

इस्तेमाल की बात कोई खुल कर नहीं होती लेकिन अंदाज से समझा दिया जता है की नौकरी में रहने की शर्त यही है यानी सम्पादक का बिस्तर गर्म करना , इंडिया टीवी का तनु शर्मा केस शायद सबको याद होगा इसके अलवा चैनल मालिक सम्पादक इन लडकियो को अपने क्लाइंट या नेताओं को भी परोसते है और कुछ लडकिया तो इतनी शातिर होती है की चैनल छोड़ इन नेताओं के साथ ही हो लेती है एन डी टीवी का अमृता सिंह का केस जिसने राजनाथ से शादी की यह भी सबको याद होगा , . नीरा रादिया के साथ बरखा दत का भी केस सबको याद होगा की ये लोग कैसे पूंजीपति और अपने चैनल के लिए दलाली करती है

इन महिला एंकर और रिपोर्टर की भाषा , अंदाज , और खबरे पेश करने का तरीका और पक्षपाती तरिका इनके चरित्र को और भी दागदार बना देता है

यह हो सकता है की शायद इस तरह की लडकियो की संख्या या प्रतिशत कम हो लेकिन मीडिया के अंदर वर्ल्ड में जिस तरह की लडकिया काम कर रही है वो यकीनन जातिवादी , मुर्ख और अपना शील भंग कराने के बाद ही इसमें रहती है


नोट बंदी पर रायशुमारी : मोदी का एक एक और मूर्खतापूर्ण कदम

जन उदय : वैसे ये पुरानी कहावत है की किसी भी कार्य को करने से पहले हजार बार सोच लेना चाहिए उसके सारे पहलु पर अच्छे से विचार करना चाहिए की क्या सही है और क्या गलत , कार्य के बीच में सिर्फ उसी कदम में सुधार लाने की ही बाते की जा सकती है बाकी कुछ नहीं .

अब मोदी जी जनता से राय जान रहे है की क्या मोदी का ये कदम सही है क्या इस योजना से काला धन निकलेगा ?? आदि आदि तो क्या मोदी जी एप के जरिये यह योजना के बारे में क देश की राय जान पायंगे ?? क्या पूरा देश स्मार्ट फोन इस्तेमाल करता है ?? या सिर्फ भक्त लोगो की राय से खुश हो जाएंगे . और अगर राय जाननी थी तो इस कार्य को करने से पहले जाननी थी . अब तो सिर्फ एक ही रास्ता है योजना को वापिस लेना शायद इसी वजह से मोदी को थोड़ी राहत मिल पाय और इज्जत बच जाए

काले धन पर गुमराह करने वाले मोदी अपने नेताओं को जो ५०० करोड़ की शादी करते है उनको सिर्फ नोटिस भेज रहे है और जो अपने पुरे जीवन की कमाई ४ लाख रूपये बैंक में जमा करा रहा है उससे बैंक के ही कर्मचारी पूछताछ कर रहे है .. ये साफ़ साफ़ आतंक है

नोटबंदी के बाद पुरे देश को गुमराह कर मोदी ने जो काले धन का पत्ता फेंका है यह दरअसल उल्टा पढता नजर आ रहा है और अब मोदी बैकफूट पर पहुच गया है मोदी की हालत सिर्फ सलिए नहीं हुई की संसद में इन जनाब से सवाल पूछे जा रहे है बल्कि इसलिए हुई है की देश के अंदर आम लोगो का जीवन तबाह हो गया है


अब तक अस्सी से जयादा लोग बिना मौत के मर चुके है एक ऐसी मौत जिसके बारे में मरने वाले के परिवारों ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी इसके अलावा जो भी धन बैंक में जमा हो रहा है वह काला धन तो बिलकुल नहीं है बल्कि गरीबो का खून पसीने से कमाया हुआ धन है दस ग्यारह दिन के पश्चात शायद सरकार ने भी यह महसूस कर लिया है की यह जतन भी काम नहीं आया है जिसकी वजह से सरकार को कोई फायदा हो

इसके अलावा यह कदम साफ़ साफ़ दिखाता है की मोदी ने इस कार्य को करने से पहले कोई होम वर्क नहीं या है क्योकि यह अफरातफरी इसी बात का नतीजा है इस बात के लिए सभी माननीय हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट कह रहे है की सरकार ने अपना काम पूरा नहीं किया और आनन् फानन में यह फैसला कर लिया ,

मोदी के चरित्र और भाजपा की अब तक की विफलता को देखते हुए यही कहा जा सकता है , मोदी ने भी लोगो को चोंका देना वाला काम किया ताकि लोग गरीबी , बेरोजगारी महंगाई पर कभी कोई बात न कर सके

वैसे मोदी की डींग मारने की आदत इस काम पर भी नहीं गई और कहने लगे जनाब की मै पिछले दस महीने से इस योजना में लगा हुआ था , अगर हम मोदी की यह बात भी मान ले तो यह कहना बिलकुल गलत नहीं होगा की भाजपा और मोदी किसी भी योजना को नहीं बना सकते जो सफल हो सके इसके अलावा कुमारी मायावती ने यह बात संसद में भी पूछी थी अगर मोदी दस महीने से इस योजना पर काम कर रहे थे तो फिर अब पचास दिन क्यों मांग रहे है ??? फिर तो यह योजना आसानी से कामयाब हो जानी चाहिए थी लेकिन न हो सकी क्योकि यह मोदी की मूर्खतापूर्ण योजना था

इसके अलावा मोदी ने यह योजना यु पी पंजाब के चुनाव को देखते हुए लागू की मोदी का मानना था की सपा और बसपा चुनाव में पैसे खर्च करके यानी काला धन लगा कर चुनाव जीतते है तो मोदी महाशय जी ने यह अक्ल क्यों नहीं लगाईं की भाजपा के पास तो सबसे जयादा पैसा है वो फिर भी इतने सालो से पुरे देश पर कब्जा नहीं जमा पाई . और अगर पैसे से सब कुछ होता तो कांग्रेस को भी कोई नहीं हरा सकता था बी एस पी जैसी पार्टी कैडर बेस्ड पार्टी है अगर इन लोगो को पैसा नहीं भी मिलेगा तो भी इनका वोट बी एस पी को जाएगा और मुलायम का वोट मुलायम को ही मिलेगा .


खैर अब मोदी ने अपने दोनों तरफ खाई खोद ली है जिसमे इसका गिरना निश्चित है