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Monday, 12 March 2018

सुरक्षित नहीं एच डी ऍफ़ सी बैंक में आपका पैसा , नेट बैंकिंग ,फोरेन रिमिटेंस सब पर है खतरा


जन उदय : आप अपना पैसा बैंक में इसलिए रखते है की आपका पैसा  सुरक्षित  रहे  लेकिन उस वक्त क्या हो जब रखवाला है अमानत में खयानत करने लगे  इसके अलावा उसकी सेवाए ऐसी हो की आप सर पकड कर बैठ जाए .वैसे तो वर्तमान सरकार ने बैंको को बैंकिंग को ऐसा बना दिया अहै कि अब हर आदमी  बैंक में पैसा रखने में डरने लगा है क्योकि आपको पता ही नहीं चलता कि आपके पैसे कब आपके अकाउंट से निकल गए .

अब हैरान करने वाली बता एच डी ऍफ़ सी बैंक से सामने आई  है यह बात दिल्ली की  ओवियाँ कम्युनिकेशन प्राइवेट  लिमिटेड की है जिन्होंने १०/३ २०१८ को अपने अकाउंट से अपने कर्मचारी  को छ  हजार रूपये ट्रान्सफर  किये लेकिन  कमाल की बात यह है एक ये पैसे एक बार ट्रान्सफर  न हो कर दो बार  ट्रान्सफर  हुए यानी  इनके अकाउंट से पैसा  दो बार कटा  यह कैसे संभव हुआ ?? बैंक  के पास कोई जवाब नहीं   चलिए ये तो कर्मचारी  था लेकिन इस घटना से बैंक की सेवाए  और सिस्टम  पर बहुत सारे सवाल खड़े  हो जाते है , जिनका जवाब कोई नहीं देना चाहता .




इसके अलावा इसी कम्पनी के मालिक  को उनकी बहन  ने कनाडा  से दो हजार  डॉलर  भेजे जो एच डी ऍफ़ सी बैंक के पास ५/३/२०१८  को ही आ गए  लेकिन बैंक  ने यह पैसा ओवियाँ कम्युनिकेशन  कंपनी के मालिक के सेविंग अकाउंट में ट्रान्सफर ही नहीं किये बल्कि इ मेल करने पर भी  तीन दिन तक चुप्पी साधे रखी  जब मालिक सुरेंदर  कुमार ने बैंक  ट्रान्सफर के सभी डॉक्यूमेंट   बैंक को दिए  उसके बाद भी बैंक ने  पुरे १२ घंटे के बाद  पैसा ट्रान्सफर किया   यहाँ पर बात  सिर्फ पैसा ट्रान्सफर की नहीं है , सबसे पहली बात की सुरेंदर  जी को उनके पैसे की वैल्यू  नहीं मिली , दुसरा बैंक ने चीटिंग करके इनके पैसे  को अपने काम के लिए इस्तेमाल किया

किसी भी बैंकिंग  ही नहीं  बल्कि  सिस्टम में इसको फ्रॉड  कहते है  चीटिंग कहते है , बार बार मेल  करने पर भी बैंक  इस पर चुप्पी साधे हुए  है , और जिसका कारण  है  बैंक की अपनी चीटिंग  और फ्रॉड की निति  







HDFC Bank customer beware as your money is not safe in the bank
You transfer  money once it is done twice , they cut money from your account for no reason


Thursday, 23 February 2017

एच डी ऍफ़ सी एर्गो मेडिक्लेम के नाम पर कर रहा है खरबों घोटाला , नहीं मिलता लोगो को क्लेम

जन उदय : एच डी ऍफ़ सी बैंक के बारे में जन उदय पहले ही यह बता चुका है की कैसे आपके बैंक अकाउंट से एच डी ऍफ़ सी बैंक पैसे चुरा कर हर साल खरबों का घोटाला करता है , जन उदय ने इसके कई सबूत सरकार और बैंक के समक्ष रखे लेकिन चूँकि बैंक को मंत्रियो की शय हांसिल है और मीडिया का सहयोग क्योकि ये लोग मीडिया में अरबो रूपये के हर साल विज्ञापन देते है इसलिए मीडिया कभी भी एच डी ऍफ़ सी बैंक के खिलाफ कोई रिपोर्ट दिखाते ही नहीं है

अब जन उदय क सामने एच डी ऍफ़ सी के कई ऐसे मामले आये है जिसे यह साबित होता है कैसे एच डी ऍफ़ सी बैंक मेडिक्लेम के नाम पर करोडो लोगो की मेहनत की कमाई को चट कर जाता है वह भी इस बात की झूटी उम्मीद देकर की कभी व्यक्ति को बिमारी में जरूरत हुई तो मेडिक्लेम से उस व्यक्ति को दवाई और अस्पताल का खर्चा देगा लेकिन असल में ऐसा होता नहीं है
एक आंकड़े के अनुसार हर साल सिर्फ मेडिक्लेम से खरबों रूपये लोगो से वसूल कर लेता है लेकिन जितने लोग जब अपनी इस मेडिक्लेम पालिसी का फायदा उठाना चाहता है तो बैंक किसी ने किसी बहाने से क्लेम को मना कर देता है

ऐसा ही किस्सा गाजिअबाद के वैशाली में स्थित पारस हस्त्प्ताल से सामने आया है जहा पर राज रानी नाम की महिला अपने इलाज के लिए अपनी मेडिक्लेम पालिसी ले कर पहुची . पालिसी देखने के बाद हस्पताल ने उसका इलाज शुरू कर दिया क्योकि वो जिस बिमारी का इलाज कर रहे थे वो बिमारी पालिसी के दायरे में आती थी और तीन साल पुरानी भी थी ,
लेकिन हद तो तब हो गई की इलाज करने के बाद पारस हस्पताल ने राज रानी के हाथ में ५२ हजार रूपये का बिल थमा दिया यह कह कर की एच डी ऍफ़ सी ने यह कह कर मना कर दिया है की आपको थाइराइद की बिमारी भी है जिसका जिक्र आपने तीन साल पहले पालिसी लेते वक्त जिक्र नहीं किया था


इस पर राजरानी ने कहा की यह तो वह बिमारी ही नहीं है जिक्सा इलाज चल रहा है इलाज सिस्ट का है इसका थाईराइड से क्या मतलब लेकिन एच डी ऍफ़ सी के एर्गो ने यह कह कर राज रानी को मेडिक्लेम पास नहीं किया क्योकि उसमे उसने झूट बोला था .
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जब राज रानी ने यह पूछा और कहा की अगर मुझसे गलती हुई तो आपने पालिसी देने से पहले इस बात की जांच क्यों नहीं की मैंने सच बोला है या झूट यानी एक टेस्ट जिसमे सारी बिमारी का पता चले इसको आवश्यक क्यों नहीं किया ??? इसका एच डी ऍफ़ सी के पास बिलकुल नहीं था , जिस बिमारी के इलाज के लिए क्लेम माँगा गया वो पालिसी में कवर है लेकिन फिर भी मेडिक्लेम नहीं दिया गया

राजरानी की घटना २० फरवरी २०१७ की है लेकिन इससे पहले हजारो ऎसी घटनाए होती रहती है कि जब लोग अपनी मेडिक्लेम पालिसी का क्लेम मांगते है उस वक्त एच डी ऍफ़ सी एर्गो और बैंक उनके क्लेम को मना रा देते है यानी यह एक तरह की अप्रत्यक्ष लूट और फ्रोड है जिसके जरिये ये लोगो को बेवकूफ बना कर पालिसी बेच देते है ...

अगर मान ले की कुछ लोग झूट बोल देते है या अपनी बिमारी छिपा लेते है तो क्या यह बैंक का याबिमा कम्पनी का यह फर्ज नहीं बनता की अपने क्लाइंट की यानी जिस व्यक्ति ने मेडिक्लेम लिया है उसकी जांच करवाई जाए और यह जांच आवश्यक रूप से  में नम्बर वन है यानी २० से २५ % ही क्लेम पास करता है और वह भी उसमे कुछ चार्ज इधर उधर के बहाने बना देता ही नहीं
यह एक लूट है जिसकी शिकायत समय समय पर ग्राहक फोरम में चलहो ..

एक आंकड़े के अनुसार एच डी ऍफ़ सी मेडिक्लेम के लिए मना करने रहे है लेकिन सरकार और मंत्री कोई कार्यवाही नहीं करते क्योकि उनकी सरकारों को अप्रत्यक्ष रूप से करोडो का चंदा या फायदे इनको मिलते है

लोगो को भी चाहिए की इस तरह की पालिसी लेते वक्त ऐसी कम्पनियो के इतिहास या आंकड़ो पर जरूर डाले और आंकड़े न देने पर ऐसी कम्पनी को छोड़ ही दे

एच डी ऍफ़ सी बैंक और एर्गो देश की सबसे बदनाम कम्पनियो में है यह जानकारी सबको मिलनी चाहिए इसलिए जानकार लोग सन्देश को आगे फैलाए

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HDFC ERGO BIGGEST FRAUD COMPANY OF INDIA