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Sunday, 22 May 2016

ब्राह्मणों की एक और षड्यंत्रकारी योजना ; कुम्भ श्नान , मंदिर प्रवेश और सामाजिक समरसता कार्यक्रम , नहीं चाहिए समरसता दलित करे ब्राह्मणों का सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार

जन उदय :  लगातार राजनैतिक  विफलता , एक दो जगह को छोड़  हर जगह विफलता ने संघ के दिमाग के परखच्चे  उड़ा दिये  है ये जानते  है अगर ऐसा ही रहा तो अगली बार ये सत्ता में नहीं होंगे इसलिए एक मजबूत वोट बैंक तय्यार  करना जरूरी है और वह बहुत बढ़ा  वोट बैंक है दलित

ये कामल की बात है की अपने भाषणों में तो ये लोग कभी कबार सामाजिक समानता की और भेदभाव खत्म करने की बात कर जाते है लेकिन जमीन पर इसको कभी नहीं उतार पाते , जिसका कारण है  इनके मन में सदीओ  पुराना  डर  और  इनकी रगों में गद्दारी का खून का बहना

ब्राह्मण एक ] ऐसा है इस देश में जिसने सिर्फ अपने फायदे के लिए अपनी बहन बेटियो  तक को मुस्लिम राजाओं को परोसा उनकी  चाकरी की  और उनको शासन करने में मदद  भी की ऐसा ही इन्होने अंग्रेजो के लिए किया
मुस्लिम राजाओं से तो अपना जजिया  माफ़ कराने के लिए ये लोग हमेशा इस बात कार तर्क देते रहे की ये भी  मुस्लिम राजाओं की तरह विदेशी ही है इसलिए इनसे जजिया माफ़ किया जाए
अंग्रेजो से अपनी नज्दिकिया दिखाने के लिए तिलक से लेकर गांधी नेहरु  सबने ये ही बताया की ये लोग आर्य है और अंग्रेजो की तरह ही विदेशी है

ये लोग इतने बड़े  गद्दार और देशद्रोही है की आजादी के बाद  से अब तक सरकारी नौकरी  और राजनीती में ये लोग ७९ प्रतिशत तक रहे है  और जो भी विकास का  पैसा होता था  ये सब खा गए   अगर अब इसकी बात की जाए तो ये कहते है की ये सब भ्रष्टाचार के कारण हुआ यानी अपने देशद्रो के अपराध को इन्होने एक मामूली  अपराध में बदल दिया


सामाजिक स्तर पर जातिवाद  के जनक  , रक्षक  और पोषक ब्राह्मण आजकल  एक नई पटकथा लिख रहे है वह यह की दलितों  और दलित  आंदोलनों को गुमराह करना और भ्रमित करना  और इसमें ये लोग दलित नेताओं का भी साथ ले रहे है  ये दलित नेता दलितों के दलाल के रोप्प में सामने आये  और अब पूर्ण रूप से इनके गुलाम है
इस पटकथा का नाम है सामाजिक समरसता   यानी तुम भी रहो हम भी रहे  यानी जातिवाद अपनी शक्ति के साथ जिंदाबाद  इसी  क्रम  में अमित शाह  नाम के ब्राह्मण  आतंकवादी  ने कुम्भ में दलितों  के साथ श्नान किया  और  फिर तरुण विजय आम का संघी  आतंकवादी  उत्तराखंड  दलितों को मंदिर में प्रवेश कराने के लिए गया   
कमाल की बात यह है इसमें ब्राह्मणों के सारे सन्घठन ज्योतिष  एन जी ओ  आदि सब शामिल हो गए है

यानी दलित इस बात से समझ सकते है की इनके खिलाफ कितना बड़ा षड्यंत्र  चल  रहा है , इसका एक और मतलब निकाला जा सकता है की ब्राह्मणों को अब अपनी मौत  दिखाई दे रही है यानी ब्राह्मणों  का  अंत
क्योकि  ब्राह्मणों  की हर कोशिश के बावजूद दलित समाज में एक सामाजिक चेतना फैलती जा रही है   लोगो को ये भी मालूम हो गया है ये  इस देश के सबसे बड़े  गद्दार है और इन लोगो ने  सबका हक मारा हुआ है ये लोग सिर्फ अपने फायदे के लिए कुछ भी कर सकते है  अपनी बहन बेटियो  को भी बेचते है ये लोग

विज्ञानिक  रूप से यह प्रमाणित  हो चुका है  की ये विदेशी हमलावर है और इस देश के नागरिक नहीं है 

अब दलितों  को देखना है की   इन्हें जातिवादी   ब्राह्मणों   के साथ रहना है  या अपने देश और समाज को बचाना  है 

Saturday, 21 May 2016

जानिये क्यों है ब्राह्मण सबसे बड़ा नमक हरम , देशद्रोही और अहसान फरामोश

  
जन उदय :  कोई भी व्यक्ति  अगर किसी भी देश में जाए और वाही पड़े , वही रहे ,वही  खाए , और वो खुद ही  नहीं उसके आने  वाली हजारो पीडिया भी वही रहे  अगर वह व्यक्ति उस देश से  गद्दारी करे , वही के लोगो को छोटा  समझे ,  उस देश से गद्दारी करे  तो आप  ऐसे लोगो को क्या कहेंगे ??  जाहि है वह व्यक्ति गद्दार , देशद्रोही  और नामक हराम ही होगा

हमारे   देश में एक कौम ऐसी  है जो इस तरह की नामक हराम है  आइये बताते है इस कौम का नाम क्या है  जी  हां  इसका नाम है ब्राह्मण

ब्राह्मण इस देश में हजारो साल पहले  जर्मन , इटली , रूस  और यूरोप के अन्य  हिस्सों से  रोटी की तलाश में आये लेकिन इन लोगो ने धीरे धीरे न सिर्फ इस देश के मूल निवासिओ को गुलाम बनाया  बल्कि ऐसे प्रपंच भी रच डाले  जिसकी वजह से आज भी ये देश आगे नहीं बढ़  पाया  और  ये आज भी गद्दारी में लिप्त है जानिये इनके द्वारा किया गए काम

जातिवाद  :  जातिवाद ब्राह्मणों का एक ऐसा प्रपंच है जिसके जरिये इन्होने यहाँ के मूलनिवासियो  को अपना गुलाम बनाया और आज भी जाति के आधार पर समाज में भेदभाव  इनकी बदौलत  बरकरार  है

अशिक्षा :  शिक्षा  किसी भी समाज की एक ऐसी चाबी है जिसके  जरिये कोई भी सामाज आगे बढ़  सकता है लेकिन इन्होने शिक्षा को  सिर्फ अपने तक रखा  और आज भी तरह तरह के प्रपंच रचते है  और सविन्धानिक  अधिकार होते हुए भी  ये लोग  मूल निवासिओ  को आगे नहीं बढ़ने देते , रोहित वेमुला , डेल्टा , जीशा  की हत्या  इस बात के जवलन्त  उधाहर्ण है

 गरीबी  और अंधविश्वास : इस देश में  गरीबी  का मुख्य कारण है अशिक्षा  और अशिक्षा  जन्म देती है अंधविश्वास को  और अंधविश्वास  कभी भी किसी  भी समाज को आगे नहीं बढने  देता , अन्धिव्श्वास  एक इनका ऐसा  हथियार है जिसके  जरिये ये आगे बढ़ते है

सांप्रदायिक दगे : दंगे इनका एक ऐसा हथियार है जिसके जरिये ये समाज को हमेशा बाँट  कर रखते है

अपराध :  इसके अलावा  देशद्रोह के अपराध , आर्थिक अपराध  , राजनैतिक अपराध सब सिर्फ इनके द्वारा   ही होते है 

Friday, 20 May 2016

जानिये कैसे भगवा अजेंडा को पूरा कर रहा है केजरीवाल , दलितों को बर्बाद करने में लगा है


जन उदय : ये बात सभी जानते है की केजरीवाल आरक्षण विरोधी सेना का एक सक्रीय  सदस्य रहा है और इसने अपने पुरे जीवन में सिर्फ जातिवादी अजेंडा को आगे बढ़ाया  है


दिल्ली कि जनता शीला दीक्षित से परेशान कुछ विकल्प ढून्ढ  रही थी सो उसको केजरीवाल के रूप में मिला दिल्ली की जनता यानी दलित लोगो  ने जो बाहुल्य  मात्रा में इस  बात पर  भरोसा किया की केजरीवाल अपने वादे निभाय्गा  लेकिन ऐसा नहीं हुआ


शिला दीक्षित को जेल भेजने वाला , भ्रस्ताचार को खत्म करेगा  और इमानदारी से काम करेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ  इमानदारी और मेरिट  का पाठ  पढ़ाने वाला  केजरीवाल ने सबसे पहले मलाईदार सीट  पर जिसमे कोई इम्तिहान नहीं होता  उन जगह पेर अपने रिश्तेदारों  को लगाया 


यही नहीं एम् सी डी  में टीचर की कमी  को पूरी  नहीं कर पाया केजरीवाल बल्कि दलित टीचर  को किसी न किसी  बहाने से नौकरी से बर्खास्त कर  रहा है , यानी दिल्ली की शिक्षा  को बर्बाद कर रहा है


दिल्ली में बिजली पानी  की कमी है लेकिन सब को जान कर यह आश्चर्य   होगा की ये कमी सिर्फ दलित बाहुल्य  इलाको में है  यानी स्वर्ण बाहुल्य  इलाको में ऐसा कुछ  नहीं है



कुछ लोगो  को यह  बात बढ़ी  अछि  लग   रही है की दिल्ली में बिजली   का बिल  बहुत कम  आ रहा है  लेकिन लोग शायद यां नहीं जानते  की जब दिन में बिजली  और पानी आयेगा ही नहीं  तो बिल तो अपने आप  कम  आएगा  ही 

जानिये किस जाति की लडकिया करती है शादी से पहले और शादी के बाद गैर मर्दों से कम से कम दस बार सेक्स चोंकाने वाला सर्वे ,


जन उदय : वैसे तो इस देश में प्राचीन समय  में सेक्स पर कोई पाबंदी नहीं थी  क्योकि यह सेक्स भी हमारी बाकी  बेसिक  जरूरत ही है लेकिन सम्स्य के चलते  जैसे जैसे जातिवादी   और गंदे दिमागों ने समाज पर अपना कब्जा ज़माना शुरू किया वैसे वैसे समाज पर कई तरह के परिबंध लग गए  वो भी सभ्यता  के नाम पर

गुजरात में कूकना  नाम की एक जनजाति में तो अभी  भी सेक्स एकदम दम  फ्री इस जनजाति में लड़का लड़की एक साथ बिना शादी के रहते है और बच्चे  भी पैदा करते है  और जब लगता है शादी करनी चाहिए  क्योकि दोनों साथ जीवन बिता सकते है  तो शादी कर लेते है
सेक्स सच में एक ऐसी  चीज है जिसे अगर शिक्षित रूप से   नहीं किया गया तो सच में यह एक समस्या बन सकती है


जन उदय   ने सभी बड़े शहरो में और सभी जातिओ में एक सुर्वे  करवाया  जिसमे कोलेज  गर्ल और  बिना  पढ़ी  लिखी लडकियों  और औरतो को सामिल  किया गया  तो इसके रिजल्ट एकदम चोंकाने वाले आये इसमें यह सामने आया की ९८.५ % ब्राह्मण  लडकिया शादी से पहले कम से कम दस बार सेक्स करती है     दलित  लडकिया के बारे में यह रिजल्ट बहुत चोंकाने वाला  सामने आया जो दलित लडकिया  शादी से पहले या शादी के बाद गैर्मर्द से  सेक्स करती है वह दरसल  गरीब घर की होती है  और यही कारण होता है सेक्स करने का

ब्राह्मणों  बनिया , राजपूत में यह संख्या  बड़ी  ही अजीब आई यानी ९८.५ % लडकियो  का सेक्स करना 


इसके अलावा  शहरो  और कस्बो में जयादा  फर्क  नजर नहीं  आया , इसके अलावा  लडकिया  अब जागरूक है इसलिए  गर्भ न ठहरे  इसका पूरा ख्याल रखती है  और इस तरह की दवाइओ  की पूरी  जानकारी इन्हें है , इसलिए   गर्भपात की संख्या  सिर्फ १२ % गैर शादीशुदा  में रहती है 

चिंता मत करो अभी टीना डाबी का विरोध कर रहे है ,जब फटेगी आयंगे दलितों का गू खाने और मूत पीने संघी हिन्दू हिन्दू कह कर


जन उदय : दुनिया में कोई भी शायद ऐसा प्राणी  या जानवर नहीं होगा जो ब्राह्मण से जयादा  जहरीला  , गद्दार  और देश्द्रोहो हो

अब टीना डाबी जो एक  दलित लड़की है और सिविल सर्विस परीक्षा में पुरे भारत में टॉप पर आई है , यह देख कर   ब्राह्मणों  की  छाती पर सांप  लोटने लगे है , दरअसल  इनसे यह सफलता  हजम नहीं हो  रही है ,


इस अंकित श्रीवास्तव नामक गधे ने न तो अपने मैंन एग्जाम के मार्कस बताये, न टोटल मार्कस. ये गधा अचयनित रहा, फिर भी अपनी तुलना UPSC Topper से कर रहा है. जिस व्यक्ति का चुनाव नहीं हुआ, वह अपनी तुलना मेरिट लिस्ट में सबसे नीचे वाले व्यक्ति से तो कर सकता है पर किसी अन्य से नहीं और Topper से तो बिल्कुल नहीं. इस जैसे बेवकूफ भी IAS बनना चाहते हैं, जिनको यही नहीं मालूम कि वे कह क्या रहे हैं?

टीना डाबी ने भले ही कैटेगरी SC choose की हो पर मार्क्स तो सबसे अधिक हैं. दूसरे स्थान पर आने वाले अभ्यर्थी के मार्क्स से काफी ज्यादा. टीना को टोटल 1063 अंक मिले, जबकि अतर आमिर उल-सफी खान (2nd Top) को 1018 अंक मिले. फिर ये अंकित श्रीवास्तव नामक बेवकूफ की बात कहीं स्टेंड नहीं करती.  इस अंकित नामक गधे का उद्देश्य आरक्षण को कोसना मात्र है.


Thursday, 19 May 2016

टीना डाबी खिलाफ जहर उगल रहे ब्राह्मणों ने साबित किया कि ब्राह्मण है देश का देशद्रोही और गद्दार नम्बर वन


क्या ऑल वर्ल्ड गायत्री परिवार आरक्षण विरोधी संगठन है?

गायत्री परिवार में अगर सिर्फ सवर्ण हैं तो मुझे कुछ नहीं कहना. लेकिन अगर इस संगठन में SC, ST, OBC का कोई है, तो उसे संगठन के नेताओं से पूछना चाहिए कि वे आरक्षण विरोधी अभियान क्यों चला रहे हैं.



गायत्री परिवार के पेज पर लगभग दस लाख लाइक्स हैं. मेरी फ्रैंड लिस्ट के डेढ़ सौ लोग वहां है.
इस पेज ने सिविल सेवा की टॉपर टीना डाबी के प्रिलिम्स के नंबर के आधार पर एक आरक्षण विरोधी टिप्पणी लगाई है. जबकि हर कोई जानता है कि प्रिलिम्स सिर्फ क्वालिफाई करने के लिए है. मेरिट मेंस और इंटरव्यू के आधार पर तय होती है.

और ये अंकित श्रीवास्तव रो क्यों रहे हैं. टीना डाबी ने मेंस में उन तमाम लोगों को पीछे छोड़ दिया, जो अंकित से ज्यादा नंबर लाकर सेलेक्ट हुए थे... अंकित को और मेहनत करनी चाहिए.


गायत्री परिवार अगर हर जाति के लोगों का है, तो यह पोस्ट हटानी चाहिए और जांच करनी चाहिए कि उसका फेसबुक पेज कौन चला रहा है.

इस पोस्ट से गायत्री परिवार की प्रतिष्ठा खराब हुई है.

गजनी के बाजारों में जिनकी इज्जत नीलाम होती थी और पहले तलवे चाटते थे ब्राह्मण ,क्षत्रिय मुसलमानों के ,..शादी करते थे अपनी बेटियो की ,अब हजारो साल बाद उनकी गैर मौजूदगी में दिखा रहे है अपनी बहादुरी स्थानों के नाम बदल कर

,जन उदय :   जनसत्ता  अखबार की खबर के अनुसार   “ केंद्रीय मंत्री वीके सिंह की ओर से अकबर रोड का नाम बदलकर महाराणा प्रताप रोड करने की मांग के बाद इतिहास को लेकर एक बार फिर से विवाद खड़ा हो गया है। वीके सिंह से पहले भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी और फिर बुधवार को शायना एनसी ने भी इस मांग को दोहराया। शायना एनसी ने तो अकबर की तुलना हिटलर की कर दी और इजरायल का उदाहरण भी दे दिया। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, ”कोई देश हमारी तरह अत्याचारी शासकों का सम्मान नहीं करता।


पिछले साल दिल्ली में औरंगजेब रोड का नाम बदलकर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम रोड कर दिया था। उस समय भाजपा सांसद महेश गिरी ने यह मांग रखी थी। जिसे तुरंत मान लिया गया था। कहा गया था कि औरंगजेब क्रूर शासक था और उसके बजाय कलाम पर सड़क का नाम रखना उचित है। लेकिन मुगल जो भारतीय इतिहास का अभिन् हिस्सा बन चुके हैं। उनकी बनाई कई ऐतिहासिक इमारतें उनके योगदान को दर्शाती है। इसके अलावा पूरे देश में मुगल शासकों के नाम से कई शहर और गांव बसे हुए हैं। “”


  कमाल की बात है आज संघी   डरपोक ,बुजदिल ,  बड़े आक्रामक हो कर सडको का स्थानों  का नाम बदलने की बात कर रहे है , अगर इतिहास देखा जाए तो  तो ये ही वो लोग है जो मुस्लिम राजाओं से अपनी जान बचाने के लिए उनके दरबारों में रोटी  के लिए  नौकरी  करते थे , 

आज उनकी गैर मौजूदगी में उनके द्वारा  रखे गए गाव और शहरो के नाम बदलने की बात कर
 रहे है

आज भी ये वही लोग है जिनके सर  जब मर्जी चाहे पाकिस्तान काट  कर ले जाता  है   जब मर्जी मुंबई  और पठानकोट  जैसी  घटनाए होती रहती है , उसके बदले में ये लोग दलितों की मदद से  हिन्दू मुस्लिम करते है और राज्य के सैनिक बल के दम पर उन  मुस्लिम को मारते है 


जो मूल रूप से भारतीय ही है  क्योकि ये मुसलमान  सामाजिक भेदभाव की वजह से ही मुसलमान  बने थे , ये संघी  यह भी जानते है की अगर ये मुसलमान भी भारत के मूलनिवासियो से मिल जाएंगे तो उस दिन ये खत्म हो जाएंगे इसलिए ये ब्राह्मण हिन्दू नाम का कवच पहन  लड़ते  है