Apni Dukan

Sunday, 3 April 2016

न बोल कि लब आज़ाद है न बोल जुबां तेरी है , पत्रकार बनके रहेगा तो संघ का गुलाम बन कर रहेगा ये है भाजपा का शुशासन


छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता की चुनौतियों का पता लगाने के लिए 13 से 15 मार्च के बीच एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया की जो फैक्ट फाइंडिंग टीम वहां गई थी, उसकी रिपोर्ट में कुछ ऐसी चौंकाने वाली बातें शामिल हैं जिन्हें जान कर दिल्ली व दूसरे महानगरों में बैठे पत्रकारों और संपादकों की आँखें खुल सकती हैं.

मसलन, अगर आपको यह बताया जाए कि बस्तर का प्रशासन राष्ट्रीय मीडिया को माओवादियों का समर्थक मानता है, तो इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया होगी? इसका सीधा सा मतलब यह है कि यदि आप दिल्ली के पत्रकार हैं, खुद को राष्ट्रीय मीडिया का हिस्सा मानते हैं और बस्तर में विजिटर के तौर पर असाइनमेंट पर जा रहे हैं, तो सतर्क हो जाइए क्योंकि वहां न तो आपका प्रेस कार्ड काम आएगा और न ही राष्ट्रीय मीडिया का बैनर, क्योंकि आप पहले से ही माओवादी समर्थक माने जा चुके हैं.

आइए, एडिटर्स गिल्ड की रिपोर्ट के कुछ ऐसे ही चौंकाने वाले अंशों पर निगाह डालते हैं:
•             बस्तर पत्रकार संघ के अध्यक्ष करीमुद्दीन ने बताया, ‘‘मैं जगदलपुर से बाहर की किसी भी जगह बीते छह साल से नहीं गया हूं क्योंकि मुझे सच लिखने की मनाही है और आप जो देखते हैं अगर उसे लिख नहीं सकते, तो फिर बाहर जाकर सूचना जुटाने का कोई मतलब नहीं बनता।’’ वे पिछले तीन दशक से ज्यादा वक्त से यूएनआइ के बस्तर प्रतिनिधि हैं।
•             एक स्थानीय अखबार के संपादक दिलशाद नियाज़ी ने बताया कि वे डर के मारे पिछले आठ साल से पड़ोसी जिले बीजापुर नहीं गए हैं।

•             मालिनी सुब्रमण्यम ने बताया कि यदि कोई पत्रकार सूचना जुटाने के लिए बाहर जाने की हिम्मत भी कर लें, तो माना जाता है कि उसे लोगों से बात नहीं करनी है। उन्होंने बताया, ‘‘पुलिस अधिकारी पत्रकारों से यह उम्मीद करते हैं कि उनकी कही बात का भरोसा कर के वे छाप दें। अगर कोई पत्रकार तथ्यों को जुटाने के लिए थोड़ी भी अतिरिक्त मेहनत करने की मंशा रखता हो, तो यह उन्हें पसंद नहीं आता। एक आत्मसमर्पण के मामले में मैंने जब कुछ लोगों से बात करने की कोशिश की, तो पहले मुझसे पूछा गया कि मैं उन लोगों के नाम बताऊं जिनसे मैं बात करना चाहती हूं और मेरे वहां पहुंचने से पहले ही उन्हें बता दिया गया था कि मुझसे क्या बोलना है।’’




•             जैसा कि स्थानीय पत्रकार कहते हैं, बस्तर में पत्रकारों की तीन श्रेणियां हैं- सरकार समर्थक, सरकार के थोड़े कम समर्थक और माओवादी समर्थक या उनसे सहानुभूति रखने वाले पत्रकार।

•             स्ट्रिंगर और समाचार एजेंटः ये लोग बस्तर में पत्रकारिता की रीढ़ हैं। संघर्ष-क्षेत्र के सुदूर इलाकों में तैनात इन लोगों को स्ट्रिंगर, न्यूजएजेंट और यहां तक कि हॉकर भी कहा जाता है। ये लोग खबरें जुटाकर या तो जगदलपुर ब्यूरो में या फिर सीधे मुख्यालय में भेजते हैं। इन्हें अपने अखबार से न तो कोई औपचारिक नियुक्ति पत्र मिलता है और न ही काम के बदले कोई पारिश्रमिक मिलता है।
•             स्थानीय अधिकारियों ने दावा किया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि जगदलपुर से कोई स्क्रोल डॉट इन नामक वेबसाइट के लिए लिख रहा है। जगदलपुर के कलक्टर ने इस बारे में कहा, ‘‘वह तो मुख्यधारा का मीडिया भी नहीं है।’’
•             स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि इस विवाद के सामने आने से पहले खुद उन्हें नहीं पता था कि मालिनी सुब्रमण्यम स्क्रोल डॉट इन के लिए लिखती हैं। मालिनी ने यह स्वीकार किया कि उन्होंने कभी भी सरकार के जनसंपर्क विभाग में एक पत्रकार के बतौर अपना पंजीकरण करवाने की परवाह नहीं की क्योंकि वे दैनंदिन घटनाओं को कवर नहीं करती थीं।
•             आलोक पुतुल छत्तीसगढ़ से बीबीसी हिंदी के लिए लिखते हैं। वे खबर करने के लिए बस्तर गए थे और बस्तर के आइजी एसआरपी कल्लूरी व पुलिस अधीक्षक नारायण दास से मिलने की कोशिश कर रहे थे। कई कोशिशों के बाद उन्हें आइजी की ओर से यह संदेश मिला, ‘‘आपकी रिपोर्टिंग बहुत एकतरफा और पूर्वाग्रहग्रस्त होती है। आप जैसे पत्रकारों पर अपना समय खर्च करने का कोई मतलब नहीं है। मेरे साथ मीडिया और प्रेस का एक राष्ट्रवादी और देशभक्त तबका खड़ा है और वह मेरा समर्थन भी करता है। बेहतर है कि मैं उन्हें वक्त दूं। शुक्रिया।’’

•             पुलिस अधीक्षक ने भी ऐसा ही संदेश भेजा, ‘‘हाय (अंग्रेज़ी में अभिवादन) आलोक, मुझे देश के लिए बहुत सारे काम करने हैं। मेरे पास आप जैसे पत्रकारों के लिए वक्त नहीं है जो एकतरफा तरीके से खबरें लिखते हैं। मेरा इंतजार मत करना।’’
•             इस बारे में टीम द्वारा सवाल किए जाने पर जगदलपुर के कलक्टर अमित कटारिया ने हंसते हुए कहा, ‘‘आलोक पुतुल और आइजी के बीच कुछ कम्युनिकेशन गैप रहा होगा, और कुछ नहीं।’’
•             राज्य सरकार चाहती है कि माओवादियों के साथ सरकार की लड़ाई को मीडिया राष्ट्र के लिए की जा रही लड़ाई के रूप में देखे, उसे राष्ट्रीय सुरक्षा के मसले की तरह बरते और इस बारे में कोई सवाल न खड़ा करे।




 सोर्स : mediavigil.com  

जानिये मोदी ने कैसे देश को बदनाम किया है ,”सामरिक क्षेत्र में भारत की करारी हार , मोदी हुए फ्लॉप , देश का मान घटा

जन उदय : जिस  तरह भाजपा /संघ  चुनाव जितने के साथ ही यहाँ देश में लोकतंत्र के लिए भगवा ताकतों ने लोकतंत्र के लिए खतरे पैदा कर दिए , वही दूसरी तरफ  एक चक्रवर्ती सम्राट अशोक की तरह पूरी दुनिया का दौरा करना  शुरू कर दिया था  उससे देश में ये संदेश देने की कोश्सी की गई की जो पहले की सरकारों ने नहीं किया वह अब हो जाएगा , अमरीका , दुबई , कनाडा में भाजपा ने प्रायोजित कार्यकर्म करवाए और भारतीय पिछलग्गू मीडिया ने भी ऐसा ही दिखाने की कोशिस की लेकिन सब उपर से ही पानी के बबूले की तरह लग रहा था .


फ्रांस ने तो राफेल विमान के मामले  में पहले से ही झटका दे दिया था भारत को  जिससे  ऐसे लग रहा था की मोदी  और ओबामा की केमिस्ट्री काफी अच्छी  है लेकिन  अमरीका ने अपना रुख  एकदम साफ़ कर  दिया , कमाल की बात ये की अमरीका ने राफेल विमान भारत को न देकर पाकिस्तान को दिए , ये बड़े शर्म  की बात थी
हाल ही में  चीन ने पठानकोट आतंकी हमले के साजिशकर्ता और जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर पर बैन लगाने की भारत की कोशिश पर फिर अवरोध खड़ा कर दिया है। आज समय सीमा से कुछ घंटे पहले चीन ने संयुक्त राष्ट्र की कमेटी से अनुरोध किया कि इसे रोका जाए।


यह कमेटी पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख पर पाबंदी पर विचार कर रही है। वहीं केंद्रीय मंत्री किरण रिरिजु ने कहा कि सरकार इस पर जल्द ही उचित कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि चीन ने जो किया है वह सही नहीं है। संयुक्त राष्ट्र में चीन के इस व्यवहार को लेकर संवाददाताओं के सवाल पर उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय जो भी आवश्यक कदम होगा उठाएगा।

गौरतलब है कि मसूद को बैन करने के लिए भारत ने यूएन से अपील की थी। 15 में से 14 देश थे जो भारत के समर्थन में थे। यूएन कमेटी में अजहर मसूद को बैन करने पर फैसला होना था। कमेटी में शामिल 15 में से 14 देश इसके हक में थे। रिपोर्ट के मुताबिक बैन के समर्थन में अमरीका, यूके और फ्रांस जैसे देश थे, सिर्फ चीन ने इसका विरोध किया।


चीन का विरोध भी इसलिए महत्व पूर्ण है क्योकि   ये दावा  किया जा रहा था की मोदी ने आते ही चीन से भारत के सम्बन्ध   सुधार लिए है जो की गलत साबित हुआ  और पूरी दुनिया में यह संदेश गया है की भारत पूरी दुनिया के सामने हाथ फैलाता  घूम  रहा है , लेकिन कोई भी उसके हाथ पर सहयता की इक्कनी नहीं रख रहा है


 इस वक्त पूरी दुनिया में भारत एक मजबूर इंसान बन कर खड़ा है और इसका कारण है संघ संचालित सरकार की नीतिया  जो लगातार हर स्तर पर भारत  का मान  कम करती जा रही है  चाहे देश  में होने वाली रोहित वेमुला की हत्या  दलित बस्तिओ को जलाना , डेल्टा मेघवाल की हत्या  अन्य  जातीय  हत्याए , जे एन यु की घटना  के बावजूद  संघी नेताओं द्वारा समय समय पर दिए आ रहे  ब्यान  इन सब ने मिल कर देश का बेडा गरक कर  दिया है  

भारत माता की जय बोलो और तिरंगा जलाने वाले , दंगे करवाने ,सविंधान जलाने वाले , बन जाए देशभक्त

  जन उदय :   “”RSS के मुखपत्र ऑर्गनाइजर ने "14 अगस्त 1947 के भगवा ध्वज के पीछे का रहस्य_ शीर्षक सम्पादकीय में.. "भाग्य की लात खाकर सत्ता में आ गए लोग हमारे हाथ में तिरंगा पकड़ा सकते हैं पर हिन्दू उस तिरंगे को न कभी स्वीकारेंगे, न उसका सम्मान करेंगे. 3 की संख्या खुद में ही अशुभ है, अपशकुनी है, और तीन रंगों वाला झंडा देश को बहुत बुरा मनोवैज्ञानिक नुकसान पंहुचाएगा और देश के लिए खतरनाक होगा

तिरंगे और देश  के सविंधान से इन्हें सबसे जयादा अलर्जी  रही है इसलिए समय समय पर इन्होने जब चाहा  देश के सविंधान को जलाया , दंगे करवाए

जिस तरह पुरे देश में इस वक्त एक आतंक का माहोल बना दिया है संघ ने उससे लगता है ये लोग बहुत जल्द ही अराजकता ले आयंगे पुरे देश में ,

हाल ही में फद्न्विस जो महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री है दुबारा से अपना गैर जिम्मेदाराना  ब्यान जारी किया है कि  जो भारत माता की जय बोलेगा वही इस देश में रहेगा , मुसलमान बोल चुके है की हम नहीं बोलेंगे  


तो इस पर इन्होने मुसलमानों को विदेशी बताना  शुरू कर दिया है , लेकिन सिक्खों ने भी मना कर दिया है लेकिन उनके खिलाफ ये जवाब नहीं दे रहे है , इनकी इन्ही हरकत की वजह से नवजोत सिद्धू ने इनकी पार्टी छोड़  दी है  वैसे भी सिक्ख धर्म के सबसे बड़े दुश्मन ये खुद ब्राह्मण भी रहे है

Saturday, 2 April 2016

ब्राह्मण इंजिनियरस की लिस्ट जो कोलकता का फ्लाई ओवर बना रहे थे , नहीं चाहिए ऐसी योग्यता देश को

जन उदय : देश में देशद्रोही अतार्थ ब्राह्मण, बनिया जब ऐसे किसी काम में पकड़ा जाता है जो देश , समाज के लिए खतरा होता है , उससे देश समाज के लिए नुक्सान होता है तो इनके भाई बंधू इसे भ्रस्टाचार का नाम देते है , और जब कोई आम आदमी गरीब आदमी अपने उपर किये गए इन जुल्मो के खिलाफ बोलता है तो उसे देशद्रोह कहते है .
ऐसी ही एक घटना अभी हमारे सामने आई है कोलकता से जहा पर निर्माणधीन पूल गिर गया और उसमे सैंकड़ो लोगो हताहत हुए है और लगभग २५ लोगो की जान अब तक जा चुकी है

अगर इस पूल के डिजाईन को देखे तो लोग बड़े हैरान हो जाएंगे की यहाँ के रहने वाले लोग के घरो की खिड़की और पूल के बीच मात्र १० इंच का फर्क है , इस पुल की वजह से लोगो के घरो की खिड़की खुल नहीं सकती ,

अब आप और भी कुछ अंदाजा लगा सकते है की धवनी और वायु प्रदुषण कितना होगा , चोर और डाकू पूल से सीधा लोगो के घरो में घुस जाएंगे इत्यादि , सोचने वाली बात यह है की सब कुछ ऐसा था तो इस पुल के नक्से को पास कैसे किया गया ?? सिर्फ एक कारण ब्राह्मण बनिए की युक्ति

इस बात से जयादा दुखद बात क्या होगी की पुल बनाने वाली कम्पनी ने इसे भगवान् की लीला कह कर पीछा छुड़ा लिया है ,और ज्यादा दुखद बात की कम्पनी पर कोई कार्यवाही नहीं .
इस कम्पनी के पास तीन हजार से जयादा ब्राह्मण बनिए इंजिनियर है लेकिन हल क्या निकला ??
सबसे बड़ी बात ये लोग अपने आपको विश्व गुरु , और योग्यता वाले कहते है , आजादी के बाद ऐसी कोई इमारत इन योग्यता वालो ने नहीं बनाई है जो आजतक बिना किसी तकलीफ के खड़ी हो

पेश   है इन ब्राह्मण इंजिनियर की लिस्ट
आरक्षण के कुपरिणाम:
कलकत्ता में पुल बनाया IVRCL ने
और IVRCL के ----
Er Sudhir Reddy(ब्राहमण)
chairman & MD (IVRCL)
K Ashok Reddy(ब्राहमण)
R B Reddy(ब्राहमण)
Joint MD (IVRCL)
A Krishna Reddy(ब्राहमण)
S Ramachandran(ब्राहमण)
Subrahmanya Gopal(ब्राहमण)
Executive director (IVRCL)
A G K Murty(ब्राहमण)
Dinesh Degvekar(ब्राहमण)
director (IVRCL)
Dr. K Panduranga (ब्राहमण)
group head HR & admin (IVRCL)
R V R Murty(ब्राहमण)
Sr. Vice President (IVRCL)
S K Viswas(ब्राहमण)
C N Chatterjee(ब्राहमण)


हिंडाल्को कम्पनी को जमीन देने के लिए चलाया आदिवासी बस्ती पर बुलडोज़र : डॉ लखन सिंह

जन उदय :ओड़िसा, छतीसगढ़ , मध्य प्रदेश , बिहार , झारखंड महाराष्ट्र आदि से आय दिन खबरे आती है की नक्सलियो ने ये कर दिया , वो कर दिया लेकिन सच्चाई इसके विपरीत होती है ,क्योकि इन जगहों पर बड़ी बड़ी कम्पनियो को जमीन देने के लिए सरकार पुलिस , प्रशासन और हत्यारों का सहारा लेती है जो आदिवासी जमीन अपनी जमीन नहीं देते उनके परिवारों को जेल में डाल दिया जाता है , फिर भी न माने तो डराया धमकाया जाता है और अगर फिर भी न माने तो उनकी बहन बेटियो का बलात्कार कर उनकी हत्या कर दी जाती है

ऐसा ही एक और केस छतीसगढ़ में सामने आया , जहा पर सामाजिक कार्यकर्ता रिन चिन सहित दो आदिवासी महिलाओ को गिरफ्तार किया थाने में . 250 महिलाओ ने घेरा थाना तमनार को . महिलाओ की मांग जिनके मकान तोड़े है ,उसके लिए जिम्मेदार लोगो के खिलाफ एफ आई आर दर्ज़ की जाये . प्रतिबंधित धारा और अपराध 79 /16 _184, 294. रद्द किया जाये ।

लोगो ने मुचलका भरने से इंकार किया. अभी भी महिलाये थाने का घेराव जारी .
रायगढ़ जिले के ग्राम बनखेता में हिंडाल्को माइनिंग के लिए गांव के 2 परिवारो के घरो को बुलडोजर चलकर तहस नहस कर दिया गया .

विरोध करने पर 2 महिलाओ सनीरो विरहोर, निर्मला सिदार सहित सामाजिक कार्यकर्त्ता रिनचिन को तमनार थाने लाया गया हे।। विरोध स्वरुप गांव वाले तमनार में एकत्रित हो रहे हे।।।
दोनों परिवारो को 30 तारीख तक घर खाली करने का नोटिस 31 तारीख को ही प्राप्त हुआ और आज प्रशासन ने घरो को पूणतः तोड़ दिया ।

जिला प्रशासन की यह कार्यवा ही पूणतः उधोग समूह के दवाव में की गई हे जो पूरी तरह जन विरोधी हे।। प्रदेश में आदिवासियों को उनके जंगल, जमीन और घरो से जबरन उजाड़ने की घटनाये लगातार बढ़ रही हैं।। यहाँ तक की मर्जी के बगैर प्रक्रिया का सही ढंग से पालन न करते हुए जमीनों का अधिग्रहण हो रहा हे यहाँ तक की पुनर्वास के बिना ही घरो को तोड़कर बेघर किया जा रहा हैं। प्रदेश के मुखिया को इन मामलो का संज्ञान लेते हुए तत्काल दिशा निर्देश जारी करने चाहिए।


छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए महिला साथियो की नि शर्त रिहाई की मांग करता हे।। बिना पूर्व सुचना के घर तोड़ने वाले दोषी अधिकारियो पर कड़ी कार्यवाही और प्रभावितों के उचित उचित व्यवस्थापन की मांग करता हे।
लिखने तक 250 महिलाये थाने के सामने घेरे खड़ी है ,अधिकारियो से चर्चा चल रही है


आस्तिक लोग होते है डरपोक ,धूर्त और आत्मविश्वासहीन : वैज्ञानिक शोध “

जन उदय : ये बहस सदीओ से चली आ रही है की ईश्वर ने इस दुनिया को बनाया है या दुनिया के लोगो ने ईश्वर को बनाया है ,समय समय पर ऐसे बहुत सारे लोग आये जिन्होंने ये दावा   किया की उन्होंने ईश्वर को देखा है ,उनसे बात की और वे  लोग वही बता रहे है जो इन्हें ईश्वर ने बताया है समझया है

ज्ञान  और तर्क हीन लोग क्या करे तो ऐसे ही लोगो पर विशवास कर लेते थे , और तर्क रहे न रहे ईश्वर ऐसी चीज है जिससे सब डरते है , लेकिन इस डर और विशवास ने इंसान के व्यक्तित्व में कुछ खामिया पैदा की है  जिसके बारे अब ने ने शोध होने लगे है


अमेरिका , कनाडा , यूरोप के कई देशो में लगातार उन   उन लोगो पर शोध हो  रहे है जो इश्वर में विशवास रखते है और उनकी तुलना इश्वर के मानने वालो से की तो रिजल्ट बहुत चोंकाने वाले सामने आये

१.      आस्तिक लोग डरपोक होते है  उनके अंदर तरह तरह के डर भरे होते है , कही कोई मर न जाए , कही घर में चोरी न हो जाए , रास्ते में कोई उसकी बहन बेटी का बलात्कार न हो जाए जबकि नास्तिक लोग  इस तरह के डर  से दूर  होते है और आशंकाओं को वाव्हारिक तर्क से तौलते है
२.      जहा तक मानवता की बात है यह देखा गया है की हर छोटे मोटे अपराध आस्तिक लोग जल्दी कर देते है वह भी ईश्वर का नाम ले कर  जब की नास्तिक लोग भी इसको वाव्हारिकता में ही लेते है
३.      आस्तिक लोग परजीवी होते है ये लोग मानसिक रूप से इतने पिछड़ जाते है की इनको बार बार पूजा पाठ करनी पढ़ती है , शुभ अशुभ मानते है और अपने कार्य करने का निर्णय तक धार्मिक विधि से ही लेते है , जबकि नास्तिक लोग आत्म्विशाव्स से भरे होते है ,स्थितियो का जायजा लेते है और अपना निर्णय खुद करते है

४.      आस्तिकता बहुत सारी  सामाजिक समस्याओं को जन्म दे देती है जिसके चलते आस्तिक लोग भगवान् की मर्जी कहा कर चीजो को टाल देते है  भिक्षावृति , वेश्या वृति बाल विवाह , भ्रूण हत्या ,आदि सब बीमारिया आस्तिक लोगो की वजह से होती है  यहाँ तक की भिक्षा वृति दान ये सब बाते  धर्म में लिखी है

५.       

Friday, 1 April 2016

डेल्टा मेघवाल दलित लड़की है इसलिए उसके लिए न्याय की मांग कोई नहीं उठा रहा

जन उदय : एक दलित लडकी का बलात्कार और उसकी हत्या की खबर किसी राष्ट्रीय मीडिया या न्यूज़ चैनल में नहीं है , जाहिर है की वो लड़की ब्राह्मण बनिया नहीं है , क्योकि ब्राह्मण बनिया लडकियो के अलावा बाकी सब लडकिया या लोग जानवर से ज्यादा कुछ नहीं है .

ये बात सबको याद होगी की ज्योति पाण्डेय नाम की लड़की का दिल्ली की एक बस में बलात्कार हुआ और बाद में उसको मरने के लिए फेंक दिया गया . चूँकि यह लड़की ब्राह्मण थी तो जातिवादी मीडिया ने इसे राष्ट्रिय शर्म का मुद्दा करार दिया और पुरे देश को आंदोलित कर दिया .

लेकिन देश में रोज दलित लडकियो के बलात्कार उनकी हत्या होती है जातिवादी लोग लगातार दलित लोगो को प्रताड़ित कर रहे है लेकिन इनके लिए न तो कोई वजा उठती है और न ही लोग केंडल मार्च निकालते है बल्कि सच्चाई यह है की इनकी हत्या करने वाले और बलात्कार करने वाले लोगो को सरकार की तरफ से अप्रत्यक्ष रूप से इनाम मिलते है
यु पी , मध्य प्रदेश , छतीसगढ़ , ओड़िसा ,बिहार , झारखंड , महाराष्ट्र गुजरात हर जगह दलित उत्पीडन की वारदाते बढ़ रही है

राजेस्थान के बाड़मेर जिले में डेल्टा नाम की एक राष्ट्रिय स्तर की एक मेघावी छात्रा की हत्या और बलात्कार हुआ लेकिन किसी भी बुद्धिजीवी ,मीडिया एन जी ओ की कान में जू तक नहीं रेंगी

भारत में वैसे भी जितने भी महिला आन्दोलन है उन पर सब पर ब्राह्मण बनिया महिलाओं का कब्जा है जो दिखाने को तो महिला मुक्ति के लिए काम करती है लेकिन अंदर ही अंदर ये दलित महिला आन्दोलन नाम का धंधा करती है , दलित आगे न बढ़े ऐसे षड्यंत्र रचती है
इन महिलाओं की ख़ास बात यह भी है की ये षड्यंत्र के रूप में सांस्कृतिक कार्यकर्म का आयोजन करती है , बस ये ये कार्यक्रम इनके सारे मकसद पुरे कर देता है

राष्ट्रीय , अन्तेर्राष्ट्रीय स्तर पर दलित महिलाए बहुत कम आ पाती है , जिसका कारण इन दलित महिलाओं की शिक्षा जो एक शय्न्त्र के तहत इन्हें कोई अंतरराष्ट्रीय भाषा नहीं सिखने देती ये हालात डेल्टा के है की उसकी लाश को अस्पताल भी कचरा ढोने की गाडी में ले जाया गया डेल्टा के पिता की शिकयात के बावजूद पुलिस सही ढंग से कार्यवाही नहीं कर रही है

सरकार ,पुलिस ,प्रशासन , में बैठे सभी जातिवादी लोग मामले को दबाने में लगे है