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Friday, 18 May 2018

सोनी सोरी को मिला अंतराष्ट्रीय मानव अधिकार सम्मान वर्षल 2018 का ‘फ्रंट लाइन डिफेंडर्स अवार्ड फॉर ह्यूमन राइट्स डिफेंडर्स ऐट रिस्क’ (FRONT LINE DEFENDERS AWARD FOR HUMAN RIGHTS DEFENDERS AT RISK) का पुरस्कार .वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला से प्राप्त जानकारी


सोनी सोरी को मिला अंतराष्ट्रीय मानव अधिकार सम्मान वर्षल 2018 का ‘फ्रंट लाइन डिफेंडर्स अवार्ड फॉर ह्यूमन राइट्स डिफेंडर्स ऐट रिस्क’ (FRONT LINE DEFENDERS AWARD FOR HUMAN RIGHTS DEFENDERS AT RISK) का पुरस्कार .वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला से प्राप्त जानकारी


पुरस्कार प्राप्त करने वाले पाँच अंतर्राष्ट्रीय प्राप्तकर्ताओ के नामों की सूचि में भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी का नाम शामिल किया गया है. छत्तसीगढ़ राज्य के आदिवासी समुदाय को न्याय दिलाने के लिए जोखिम भरे संघर्ष के लिए उन्हें यह सम्मान दिया जा रहा है. इसी शृंखला में 2018 के अन्य विजेता है:

नुर्कन बेसल (टर्की), लूचा (LUCHA) आन्दोलन(कोंगो का लोकतंयत्रात्मक गणराज्य), ला रेसिस्तेंचिया पसिफिचा दे ला मिक्रोरेगिओं दे इक्ष्क़ुइसिस (La Resistencia Pacífica de la Microregión de Ixquisis) (ग्वाटेमाला), और हस्सन बौरास (अल्जीरिया).

विजेताओं के नामों की घोषणा करते हुए, फ्रंट लाइन डिफेंडर्स के कार्यकारी निर्देशक एंड्रू एंडरसन ने कहा, “आज जिन मानवाधिकार रक्षकों का सम्मान हम कर रहे है, ये वो लोग है जो विश्व के सबसे खतरनाक जगहों पर कार्य करते है. अपने-अपने समुदायों के लिए शांतिपूर्ण ढंग से न्याय और मानवाधिकार की मांग करने हेतु स्वयं की परवाह किये बिना इन्होंने कई बलिदान किये है.”


सन 2005  से ‘फ्रंट लाइन डिफेंडर्स अवार्ड फॉर ह्यूमन राइट्स डिफेंडर्स ऐट रिस्क’ पुरस्कार हर साल उन मानवाधिकार रक्षकों को दिया जाता रहा है, जिन्होंने खुद को जोखिम में डाल कर भी अपने समुदाय के व्यक्तिओं के अधिकारों की सुरक्षा और बढ़ावे के लिए अदम्य योगदान दिया है. ऐतिहासिक तौर पर यह सिर्फ एक रक्षक या किसी एक आन्दोलन को दिया जाता था. २०१८ के ‘फ्रंट लाइन डिफेंडर्स अवार्ड फॉर ह्यूमन राइट्स डिफेंडर्स ऐट रिस्क’ पुरूस्कार की ख़ास बात यह है कि पहली बार पांच अलग-अलग देशो के पांच मानवाधिकार रक्षकों को क्षेत्रीय विजेताओ के रूप में मान्यता दी गई है. २०१८ के इन पांच पुरस्कार विजेताओं व उनके परिवारों को विभिन्न तरीके के हमलों का, मानहानि, कानूनन उत्पीड़न, मृत्यु की धमकी, कारावास और अभित्रास आदि का सामना करना पड़ा है.



सोनी सोरी एक आदिवासी कार्यकर्ता है साथ ही वह नारी अधिकारों की रक्षक है, जो छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर इलाके में काम करती है. यहाँ वह और उनके सहकर्मी, अर्धसैनिक दल और पुलिस द्वारा हिंसा को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों के खिलाफ वकालत करते है. उन्होंने भारत के सुदूर और दुर्गम क्षेत्रो में राज्य-प्रायोजित दुर्व्यवहार जैसे- घर जलाना, बलात्कार और बिना वजह आदिवासिओ को यातना देना और उनका यौन-शोषण करना आदि के विरोध में संलेख पत्र तैयार किये और इन गतिविधियों के खिलाफ संघर्ष किया है. उन्होंने कई शैक्षणिक संस्थाओ को माओवादी संगठनो से होने वाली हानि से भी बचाया है. सुरक्षा दलों ने उनके इन कार्यों के प्रतिशोध में, सोनी को हिरासत में बंद कर कई तरह की अमानवीय यातनायें दी और उनके private part    में पत्थर डाल कर घंटो तक यंत्रणा दी. उसने दो सालो से ज्यादा कारावास में बिताये है. कुछ सालों बाद कुछ लोगो ने उनके चेहरे पर acid  डाला जिससे उसकी चहरे की चमड़ी जल गई. इतना ही नहीं, उन्हें धमकी दी गई कि अगर उन्होंने सुरक्षा बलो द्वारा किये गए बलात्कारों के खिलाफ वकालत करनी नहीं छोडी, तो उनकी बेटियों का भी ऐसा ही हश्र होगा. किन्तु उन्होंने अपने कार्य के प्रति अडिगता दिखाते हुए काम बंद करने से इंकार किया है और आज भी वह धमकी, अभित्रास और बदनामी के बावजूद उन खतरनाक संघर्ष क्षेत्रो में जाकर उत्तरजीवीओ (संघर्षो में जीवन यापन करने वालों) से बातचित करती है.

एंड्रू एंडरसन कहते है, “जैसे ही सरकार और व्यपारसंधी मानवाधिकार रक्षकों को बदनाम कर उनका विरोध जताना शुरू करते है और उनके शांतिमय काम को गैरकानूनी घोषित करते है, वैसे ही विश्व भर से सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा एकमतता से स्वीकार किया गया कि अंतर्राष्ट्रीय पहचान और सम्मान इस तरह के कार्य के लिए एक महत्वपूर्ण संरक्षण के तौर पे ज़रूरी कदम है.” वे आगे कहते है, “यह पुरूस्कार इस बात का साक्षी है कि इन रक्षकों को अन्तराष्ट्रीय समुदायों का पूर्ण समर्थन है और उनका बलिदान नज़रंदाज़ नहीं हुआ है. हम उनके अदम्य साहस की सराहना करते हुए उनके साथ अटल विश्वास के साथ खड़े है.”

News Source :  CG Basket .in  

Soni Sori a tribal Activist  fighting for human rights of Tribal people of Chhatisgarh  where  tribal people  are killed brutally and next day news comes  that  four Naxals  shot down in encounter , Para Military forces  goes and rape  tribal women  when  a protest is done , in a scuffle  if a para military  person is killed  next day news comes naxal shot down  police personnel’s, tribal people  are killed , jailed for years   without   formal trial process .

Soni Sori is  the brave lady who fights  for  the rights of  tribal people  many time she has been jailed beaten up ,  her face is burnt by acid    police put  stone  in her private  part  for many hours  just to torture  her  but she  never stopped    she teach  tribal kids  she love her mother land  but  the terrorist  group of  Congress and BJP  in the guise of democracy   are attacking  
 The  women of the world  have recognized her struggle an strength   she has become the ideal for all women of the world

Wednesday, 18 April 2018

मीडिया और पार्टियो की मदद से लूट रहे है : चुनाव लड़ने के लिए भी निजी बैंक देते है लोन ,जानिये किसे और क्यों मिलता है ?


मीडिया और पार्टियो की मदद से लूट रहे है : चुनाव लड़ने के लिए भी निजी बैंक देते है लोन ,जानिये किसे और क्यों मिलता है ?

चुनाव में हजारो करोड़ का खर्च , कैसे आता है ये पैसा , पूंजीपतियो का चंदा ,पार्टी का चंदा , पूंजीपतियो में बड़ी बड़ी कम्पनी और निजी बैंक

ये निजी बैंक मीडिया को विज्ञापन देते है और नेताओं को लोन देते है जिसे बाद में राईट ऑफ कर दिया जाता है , उसके बदले में इन बैंक को मिलती है लूट की छूट ,गुंडागर्दी की छूट ,मनचाहा ब्याज दर और ग्राहकों के पैसे लूटने की छूट , ,फाइन , पेनल्टी , ट्रांसेक्सन चार्ज , ए टी एम् , चार्ज , चेकबुक चार्ज , स्टेटमेंट चार्ज , इत्यादि . 


इन्ही बैंक के इन्सुरेंस घोटाले , मेडिक्लेम घोटाले इतने बड़े है की भारत जैसे कई देशो के बीस साल के बजट भी इतने बड़े नहीं है . इन पर लगाम के नाम पर ओम्बुड्समैन , त्रुब्नल है जिनके जजों को भी ये बैंक खरीद के रखते है . यानी न्याय नहीं .. हाँ न्याय का फहम बनाए रखने के लिए दस से बीस प्रतिशत लोगो को थोडा बहुत न्याय मिल जाता है .

कमाल की बात ये है कि जनता का सबसे शक्तिशाली हथियार यानी सूचना का अधिकार इन बैंक पर लागू ही नहीं है ..

क्या हो जब नीरव मोदी की तरह ये बैंक या इनके लोग खुद ही षड्यंत्र रच बैंक का पैसा ले विदेश फरार हो जाए ?? यानी देश की अर्थ्वाव्य्स्था चरमरा सकती है . देश में हाहाकार मच सकता है लोग रातो रात दिवालिया हो सकते है , पागल हो जाएंगे , बिना इलाज के मर जाएंगे .. लेकिन नहीं क्योकि वर्तमान सरकार को लोगो से कोई सरोकार ही नहीं



Sunday, 15 April 2018

“हिन्दू “ धर्म है या ब्राह्मणों का षड्यंत्र


जन उदय : हाल ही में भारत के एक वर्ग  जिसे सवर्ण  कहते है उसने  एस सी / एस टी / ओ बी सी आरक्षण  के खिलाफ भारत बंद किया यहाँ तक की इसी वर्ग की एक  पार्टी ने  भारत के उन सभी संस्थाओ मे  आरक्षण को खत्म भी कर  दिया है यानी नौकरी में अब इन वर्गो  को आरक्षण  नहीं मिल  रहा है , क़माल की बात यह है कि ये काम वो लोग कर राहे है जो हिन्दू –हिन्दू कर  इन लोगो  को गुमराह करता है और कभी इसाई  तो कभी मुसलमान से लड्वाता है और दूसरी तरह इनके हको  को छीन लेता है .  ऐसा कैसे हो सकता है कि एक तरफ आप हिन्दू – हिन्दू  कह अपना भाई कहते है  दूसरी  तरफ  इनके  हको को छीनते है . तो क्या एक भी अपने दुसरे भाई के खिलाफ ऐसे  षड्यंत्र  रचता  है ?? जाहिर है नहीं , लेकिन ये लोग करते है जिसका मतलब साफ़ है की ये लोग  हिन्दू  नहीं है यानी  या तो ब्राह्मण  हिन्दू  नहीं है  या एस सी एस टी  ओ बी सी  हिन्दू नहीं है

वैसे भी अगर आप देखे  तो दुनिया के किसी  भी धर्म में प्रेम  भाई चारा सिखाया जाता है सबको सामान  माना  जाता  है  लेकिन  केवल  इन ब्राह्मणों  के ग्रन्थ ऐसे ही जिसमे  एस सी एस टी  ओ बी सी की हत्या  को वैध  मना गया है  इनको शिक्षा   सम्पति  किसी  चीज क अधिकार नहीं है समानता का अधिकार नहीं  है . तो क्या ऐसे ग्रन्थ  कभी किसी भगवान् ने लिखे होंगे ??? इन ग्रंथो में इन छोटे  तबके के लोगो  को लिख लिख के गली दी  गई   है सारी  किताबे नफरत के पुलिंदे 


इतिहास की विवेचना कर लीजिये ब्राह्मण द्वारा लिखे सारे ग्रन्थ छान मारिये जिन्हें ये भगवान् का संदेश बता कर पेश करते है जो भगवान् ने इन्हें संस्कृत में दिए थे , कही भी आपको हिन्दू शब्द नहीं मिलेगा , मिलेगा तो वर्ण वाव्य्स्था या जातिवाद वो भी भारतीय समाज में .

भारत की निचले स्तर की जातीओ को ब्राह्मणों ने अपना गुलाम बना कर रखा और आने वाले हर विदेशी हमलावर चाहे वो मुस्लिम रहे या अंग्रेज उनके सामने अपना गुलाम बना कर पेश किया
ब्राह्मणों ने इन निम्न स्तर की जातिओ का मानसिक ,शारीरिक आर्थिक शोषण सदीओ तक किया और आज भी कर रहे है , ये लोग बिलकुल नहीं चाहते की दलित लोग आगे बड़े या पढ़े , ये सिर्फ इनको जानवरों की तरह ही गुलाम रखना चाहते है

शुद्रो को ब्राह्मण मुसलमानों से लड़वाने के लिए जब इस्तेमाल करते है तब ये जातिया हिन्दू होती है

मुसलमानों से लड़ने के बाद ये सारे लोग अनेक जातियों में बाँट जाते है इन्हें फिर समाज में गन्दी नजरो से देखा जाने लगता है और सारी गंदगी फैलाता है ब्राह्मण .

जब दलितों को शुद्रो को आगे बढ़ने की बात आती है तो ब्राह्मण ही सबसे पहला व्यक्ति होता है जो दलितों के अधिकार के खिलाफ बोलता है , ये इनकी शिक्षा का विरोध करता है , इनके आरक्षण का विरोध करता है और इनको मिलने वाली हर सविन्धानिक सुविधाओं का विरोध करता है

और फिर मुसलमानों का डर दिखा फिर हिन्दू हिन्दू करने लगता है , समाज को बांटने में असमानता फैलाने में ये लोग माहिर है और बंटा हुआ समाज कभी भी तरक्की नहीं कर सकता


Saturday, 7 April 2018

एस सी / एस टी / ओ बी सी / मुस्लिम केवल अपनी जाति के उम्मीदवारों को दे वोट : दलित संघटनो का फैसला


एस सी / एस टी / ओ बी सी / मुस्लिम केवल अपनी जाति के उम्मीदवारों को दे वोट : दलित संघटनो का फैसला
जन उदय : देश के बहुत सारे दलित  बुधिजीविओ   ने यह फैसल किया ही  अब वे सिर्फ इस बात पर कम करेंगे की दलित वर्ग  केवल और केवल  दलित उम्मीदवार को  वोट   दे  चाहे  वह पार्टी  कोई भी  हो , इससे हर पार्टी म इनका प्रतिनिधित्व  बढेगा  आर हर पार्टी  को  मजबूर हो कर ज्यादा से जायदा  दलित उम्मीदवारों  को वोट देना पढ़ेगा .

इन संघटनो  का मान्न्ना  है की जिस तरह देश में ब्राह्मणवादी  पार्टिया  केवल ब्राह्मणों  और सवर्णों  को  ही  जयादा  टिकट देती  है  और इन्ही  को  सबसे आगे रखती ही उसका कान यह है की दलित  वोट  को विचारधरा  के नाम पर मरख बना दिया जाता है . और दलित  ब्राह्मणों  आर सवर्णों  को वोट  देने के लिए मजबूर हो जाते  है लेकिन हाल ही में मौजूदा  सरकार ने  जिस तरह दलितों  के प्रति  दमनकारी  निति अपनाई है   उसका सिर्फ एक ही तोड़  है की  दलित – मुस्लिम केवल अपने ही उम्मीदवारों  को वोट  दे



अभी हाल में २ अप्रैल को दलित संघटनो  द्वारा एस सी / एस टी एक्ट में बदलाव को लेकर पुरे देश में भारत  बंद किया गया , लेकिन  वर्तमान सरकार  जो दलित विरोधी  है , इस आन्दोलन को बदनाम करने के लिए पुरे देश में भगवा आतंकियो  ने दलित आन्दोलन के नाम पर तोड़ फोड़ की गोलिया  चलाई और आगजनी  की ताकि  इस आन्दोलन को बदनाम किया जा सके  . लेकिन बाद में ये सब यही खत्म नहीं हुआ है  इसके बाद सरकार अपने  तन्त्र का इस्तेमाल करते हुए दलितों  पर आक्रमणकारी  निति अपनाई हुई है   यानी उन दलितों और युवाओं  को जबरदस्ती  जेल में डाला  जा रहा है  जगह जगह उन पर फर्जी  केस दर्ज किये जा रहे है ताकि  इन लोगो में डर  बैठ  सके  मध्य प्रदेश  को मिला कर  जहा जहा भाजपा सरकार है वहा वहा पर  दलितों  के खिलाफ सरकार की दमनकारी  निति  चल रही है .

इन घटनाओं  के जगह जगह से विडियो  आ रहे है जहा पर पुलिस   थाणे में दलित युवाओं  को ले जा कर बेरहमी से पीट  रही है , खुद पुलिस  गाडिओ  में आग लगा रही है  और भाजपा के गुंडे  तोड़  फोड़  और आगजनी कर रहे है .
इतनी बड़ी  घटनाओं को बिना किसी योजना  बनाए  अंजाम नहीं दिया जा सकता  यानी इसमें सरकार शामिल है इसमें कोई शक नहीं

मध्य प्रदेश में  तो यहाँ तक स्थिति  है की सरकार ने १४ अप्रैल  तक हाई अलर्ट उर धारा  १४४ लगा दी  है वह भी १४  अप्रैल तक यानी दलित युवा और  दलित वर्ग १४ अप्रैल  को  बाबा साहेब की जयंती न मना सके
यही हालात खुद भाजपा सरकार ने  अपने सभी विदेशी दूतावास  में पैदा कर दिए है  जहा पर यह कहा गया है  की  दूतावास या उसमे काम करने वाले  बाबा साहेब की जयंती न मनाये
दुनिया के ऐसे बहुत कम ही देश बचे होंगे जो किसी न किसी तरह के हिंसक आन्दोलन या आतंकवाद से न जूझ रहे हो , पूरा एशिया , यूरोप , अमरीका सभी देश इस बिमारी से ग्रस्त है , ये आतंकवाद कैसे पनपा कैसे आया सबसे पहले हम आतंकवाद की कुछ प्रक्रति से मिल लेते है

पूरी दुनिया में हम जिस आतंकवाद को जानते है वह है हिंसक आतंकवाद यानी इसमें या इसके मानने वाले सिर्फ हिंसा में विशवास रखते है यानी अल कायदा , आर एस एस , आइसिस ,लिट्टे जैसे संघठन इसमें आते है , दूसरा होता है सांस्कृतिक आतंकवाद जो दुनिया में सिर्फ आर एस एस चलाता है इसके पूरी दुनिया में बहुत सारे सन्घठन है जो लोगो को गुमराह करके अपनी संस्क्रती की और खींचते है और उन्हें अपने समाज और संस्क्रती की सच्चाई से दूर रखते है , आर एस एस के सन्घठन , अमरीका , यूरोप , कनाडा ,एशिया सभी देश में ये लोग काम करते है इसके कुछ मुख्या एजेंट है ब्रहम कुमारी , पतंजलि , आर्ट ऑफ़ लिविंग , विश्व हिन्दू परिषद , बजरंग दल आदि

तीसरा है राजननीतिक आतंकवाद इसमें अमरीका रूस , चीन , कोरिया इसराइल आदि मुख्य देश है जो पूरी दुनिया में अपना वर्चस्व कायम करने के लिए इन देशे में तरह तरह के आन्दोलन चलवाते है , इन देशो की अर्थ वाव्य्स्था पर कब्जा जमाते है और इन् देशो को वैसा ही चलाने की कोशिस करते है जैसा ये चाहते है

सभी तरह के आतंकवाद का अध्यन अगर हम करे तो हम ये ही पायंगे की राजनितिक आर्थिक , और हिंसक आतंकवाद उस वक्त खत्म हो जाते है जब इनका मकसद खत्म हो जाता है लेकिन एक आतंकवाद ऐसा आतंकवाद है जो इतनी अस्सानी से खत्म नहीं होता बल्कि इसकी विरासत सदीओ तक चलती रहती है और वो है ब्राह्मण आतंकवाद




२ अप्रैल से बज गया गृह युद्ध का बिगुल , डर आर खोफ से दबाने की कोशिश की दलित आन्दोलन को , हुए नाकाम


जन उदय : अभी हाल में २ अप्रैल को दलित संघटनो  द्वारा एस सी / एस टी एक्ट में बदलाव को लेकर पुरे देश में भारत  बंद किया गया , लेकिन  वर्तमान सरकार  जो दलित विरोधी  है , इस आन्दोलन को बदनाम करने के लिए पुरे देश में भगवा आतंकियो  ने दलित आन्दोलन के नाम पर तोड़ फोड़ की गोलिया  चलाई और आगजनी  की ताकि  इस आन्दोलन को बदनाम किया जा सके  . लेकिन बाद में ये सब यही खत्म नहीं हुआ है  इसके बाद सरकार अपने  तन्त्र का इस्तेमाल करते हुए दलितों  पर आक्रमणकारी  निति अपनाई हुई है   यानी उन दलितों और युवाओं  को जबरदस्ती  जेल में डाला  जा रहा है  जगह जगह उन पर फर्जी  केस दर्ज किये जा रहे है ताकि  इन लोगो में डर  बैठ  सके  मध्य प्रदेश  को मिला कर  जहा जहा भाजपा सरकार है वहा वहा पर  दलितों  के खिलाफ सरकार की दमनकारी  निति  चल रही है .

इन घटनाओं  के जगह जगह से विडियो  आ रहे है जहा पर पुलिस   थाणे में दलित युवाओं  को ले जा कर बेरहमी से पीट  रही है , खुद पुलिस  गाडिओ  में आग लगा रही है  और भाजपा के गुंडे  तोड़  फोड़  और आगजनी कर रहे है .
इतनी बड़ी  घटनाओं को बिना किसी योजना  बनाए  अंजाम नहीं दिया जा सकता  यानी इसमें सरकार शामिल है इसमें कोई शक नहीं

मध्य प्रदेश में  तो यहाँ तक स्थिति  है की सरकार ने १४ अप्रैल  तक हाई अलर्ट उर धारा  १४४ लगा दी  है वह भी १४  अप्रैल तक यानी दलित युवा और  दलित वर्ग १४ अप्रैल  को  बाबा साहेब की जयंती न मना सके
यही हालात खुद भाजपा सरकार ने  अपने सभी विदेशी दूतावास  में पैदा कर दिए है  जहा पर यह कहा गया है  की  दूतावास या उसमे काम करने वाले  बाबा साहेब की जयंती न मनाये


दुनिया के ऐसे बहुत कम ही देश बचे होंगे जो किसी न किसी तरह के हिंसक आन्दोलन या आतंकवाद से न जूझ रहे हो , पूरा एशिया , यूरोप , अमरीका सभी देश इस बिमारी से ग्रस्त है , ये आतंकवाद कैसे पनपा कैसे आया सबसे पहले हम आतंकवाद की कुछ प्रक्रति से मिल लेते है

पूरी दुनिया में हम जिस आतंकवाद को जानते है वह है हिंसक आतंकवाद यानी इसमें या इसके मानने वाले सिर्फ हिंसा में विशवास रखते है यानी अल कायदा , आर एस एस , आइसिस ,लिट्टे जैसे संघठन इसमें आते है , दूसरा होता है सांस्कृतिक आतंकवाद जो दुनिया में सिर्फ आर एस एस चलाता है इसके पूरी दुनिया में बहुत सारे सन्घठन है जो लोगो को गुमराह करके अपनी संस्क्रती की और खींचते है और उन्हें अपने समाज और संस्क्रती की सच्चाई से दूर रखते है , आर एस एस के सन्घठन , अमरीका , यूरोप , कनाडा ,एशिया सभी देश में ये लोग काम करते है इसके कुछ मुख्या एजेंट है ब्रहम कुमारी , पतंजलि , आर्ट ऑफ़ लिविंग , विश्व हिन्दू परिषद , बजरंग दल आदि

तीसरा है राजननीतिक आतंकवाद इसमें अमरीका रूस , चीन , कोरिया इसराइल आदि मुख्य देश है जो पूरी दुनिया में अपना वर्चस्व कायम करने के लिए इन देशे में तरह तरह के आन्दोलन चलवाते है , इन देशो की अर्थ वाव्य्स्था पर कब्जा जमाते है और इन् देशो को वैसा ही चलाने की कोशिस करते है जैसा ये चाहते है

सभी तरह के आतंकवाद का अध्यन अगर हम करे तो हम ये ही पायंगे की राजनितिक आर्थिक , और हिंसक आतंकवाद उस वक्त खत्म हो जाते है जब इनका मकसद खत्म हो जाता है लेकिन एक आतंकवाद ऐसा आतंकवाद है जो इतनी अस्सानी से खत्म नहीं होता बल्कि इसकी विरासत सदीओ तक चलती रहती है और वो है ब्राह्मण आतंकवाद

बड़े ही साधारण लोग ये कहेंगे की ये ब्राह्मण यानी हिन्दू दरअसल ये बिलकुल गलत है क्योकि भारत में हिन्दू शब्द मुस्लिम काल से पहले था ही नहीं , और भारतीय समाज में ब्राह्मण इसलिए उपर रहा क्योकि ये विदेशी थे और इनको यहाँ यहाँ के लोगो से काफी सम्मान मिला और लोगो ने अपने दिलो में काफी आगाह भी दी लेकिन इनकी गद्दार प्रवर्तियो के कारण ये अलग ही रहे मोर्य काल में अशोक के पोते को उसके सेनापति जिसका नाम पुष्य मित्र शुंग था उसने धोखे से मार दिया इसके बाद इसने सभी बौध लोगो की त्या करना शुरू कर दी जो इन बचे उनको इन ब्राह्मणों ने गुलाम बना लिया

ब्राह्मण आतंकवाद क्यों दुनिया का सबसे खतरनाक आतंकवाद कहा जता है इसका पता इसी से चलता है की इन्होने जिन बौध लोगो को गुलाम बनाया उनको सम्पति , शिक्षा सभी छीन ली और इस गुलामी को पीडी दर पीडी बनाए रखा , और एक सामाजिक , सांस्कृतिक वाव्य्स्था कायम कर ली जिसमे अपने आपको भगवान् का दूत बना दिया , अपने आपको सबसे श्रेष्ठ बना लिया और बौध लोगो को सबसे नीचे स्तर पर लाकर सेवक यानी गुलाम बना लिया और साथ में यह भी कह दिया की यह भगवान् का आदेश है . ये लोग समाज के सबसे निचले स्तर पर ही नहीं पहुचे बल्कि आर्थिक सामाजिक शेक्षिक रूप से भी बहिष्कृत हो गए ये पढ़ नहीं सकते थे , समाज में रह नहीं सकते थे , इन लोगो को शुद्र कहने लगे और इनका मानसिक विकास बिलकुल रुक गया ये कोरे जानवर की तरह जीवन बिताने लगे ,

हजारो साल बाद इतिहास ने करवट बदली और ब्रिटिश शासन के दौरान बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर ने पूरी दुनिया को ये साबित कर दिया की ब्राह्मण इस देश में विदेशी है . राजनैतिक पहुलुओ को नजर में रखते हुए बाबा साहेब ने आरक्षण के बदले कम्युनल अवार्ड को छोड़ा .

लेकिन ब्राह्मणों ने तथाकथित शुद्रो को पढने से रोकने के लिए , उन पर अत्याचार करने में कोई कमी नहीं छोड़ी है आज भी ये उनको मानसिक रूप से गुलाम बना कर रखना चाहते है देश में इन शुद्रो के प्रति अत्याचार अभी भी कम नहीं हुआ है
इसलिए हम कह सकते है की गोली से तो आदमी एक बार मर जाता है लेकिन ब्राह्मणों ने जो सांस्कृतिक गुलामी है वह इतनी आसानी से नहीं जानी वाली इसलिए दुनिया का सबसे खतरनाक आतकंवाद ब्राह्मण आतंकवाद है 
लेकिन आज दलित युवा जाग चुका है  और अब इस  तरह की गुलामी  के लिए बिलकुल तैयार नहीं   अगर  ब्राह्मणवादी  लोग नहीं माने  तो  यह हो सकता है की देश में गृह युद्ध जैसे हालात  हो या हो ही जाए इसका फैसला  देश के सभी  निवासिओ  को करना है